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भ्रष्ट अधिकारियों पर पाँचवीं बार गिरी मोदी सरकार की गाज, 21 को जबरन दी गई सेवानिवृत्ति

केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार पर बड़ी चोट की है। सरकार ने 21 भ्रष्ट अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। भ्रष्टाचार में फँसे इन 21 अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए इन अधिकारियों की जबरन सेवानिवृत्ति करवा इन्हें सेवा से मुक्त कर दिया है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड सीबीडीटी के अनुसार ग्रुप बी के 21 ऐसे अधिकारियों को केंद्र सरकार की नियमावली के नियम 56(जे) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेजा जा रहा है जोकि भ्रष्टाचार या सीबीआई की इन्क्वारी में फँसे हुए हैं अथवा जिन पर जाँच चल रही है।

बता दें कि यह पाँचवाँ राउंड है, जब सरकार द्वारा भ्रष्ट टैक्स अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही सेवा से मुक्त किए गए अधिकारियों की संख्या 85 हो जाएगी, जिनमें 64 टैक्स अधिकारी टॉप ग्रेड से हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों की खबर है कि इस मामले राउंड में मुंबई के ऑफिस से तीन, पास के ही ठाणे जिले से दो टैक्स अफसर शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुंबई और ठाणे के अलावा सेवानिवृत्ति पर भेजे गए अधिकारियों में विशाखापटनम, हैदराबाद, राजमुंदरी, झारखंड के हजारीबाग, महाराष्ट्र के नागपुर, गुजरात के राजकोट, राजस्थान के माधोपुर, बीकानेर, जोधपुर तथा मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल के अधिकारी भी इस लिस्ट शामिल हैं।

बता दें कि सरकार के इस फैसले को प्रधानमंत्री मोदी के उस कथन से जोड़कर देखा जा रहा है जो उन्होंने लाल किले की प्राचीर से कहा था। पीएम ने अपने संबोधन में कहा था कि “कुछ काले भेड़ प्रशासन में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और करदाताओं को परेशान किया जाता रहा है, ऐसे अधिकारियों पर हम कार्रवाई कर उन्हें दंडित करेंगे।”

आधे से ज्यादा टैक्स अधिकारियों को सीबीआई ने रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनमें से एक को तो रंगे हाथ पचास हज़ार की घूस लेते हुए पकड़ा गया था। इससे पहले जून और अगस्त में भी कई अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया था। इन अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे थे। इनमें रिश्वत की लेन देन से लेकर क्रिमिनल कांस्पीरेसी जैसे आरोप शामिल थे।

गुड़िया ने गला रेत कर करवाई पति शौकत की हत्या, आशिक इमरान के साथ 5 गिरफ्तार

बिहार के बक्सर जिले में पुलिस ने एक युवक की हत्या का खुलासा करते हुए आरोपित पत्नी और उसके दो प्रेमियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी घटना बक्सर जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र के अहिरौली बाँध के बधार की है। पुलिस ने सोमवार (नवंबर 25, 2019) की सुबह बधार इलाके में एक युवक का शव बरामद किया। साथ ही घटनास्थल से चाकू भी बरामद किया। पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए मृतक की पत्नी सहित पाँच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

मृतक की पहचान भभुआ जिले के शौकत शाह के रूप में हुई है। शौकत शाह की हत्या के आरोप में उसकी पत्नी गुड़िया साह के अलावा इमरान खान, बाबर खान, तवरेज खान और परवेज खान को गिरफ्तार किया गया है। गुड़िया का इमरान खान के अलावा भी एक अन्य के साथ अवैध प्रेम संबंध था। वो दोनों के साथ बातचीत किया करती थी। हालाँकि वो इमरान के साथ शादी करके अलग रहना चाहती थी। इसके बारे में शौकत को पता चल गया था।

वो इस शादी के खिलाफ था। उसने गुड़िया को समझाया-बुझाया भी था और इस बात को लेकर कुछ दिन पहले इमरान और शौकत के बीच लड़ाई भी हुई थी। गुड़िया अपने पति को अपनी राह का रोड़ा मान चुकी थी। शौकत की हत्या करने के बाद वह सोमवार को ही वो प्रेमी के साथ मुंबई भागने की तैयारी में थी। लेकिन स्थानीय लोगों की निशानदेही पर उसे पकड़ लिया गया। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार मालाकार ने बताया कि शौकत की पत्नी गुड़िया ने कबूल किया है कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश की और फिर प्लानिंग के तहत उसकी हत्या कर दी।

हत्यारों ने पुलिस को बताया कि हत्या की प्लानिंग प्रेमी इमरान ने अपने साथियों के साथ मिलकर की। जिसमें तबरेज खान, परवेज खान व बाबर खान शामिल थे। उन्होंने शौकत को अहरौली बाँध के पास बुलाया और मारपीट करने लगे। उसके बाद चारों उसे बधार में ले गए। जहाँ बाबर ने चाकू निकाला और तबरेज व परवेज ने उसके हाथ पैर पकड़ लिए। इमरान व बाबर ने शौकत का गला रेतना शुरू किया। जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

दरअसल जब शौकत अली रविवार (नवंबर 24, 2019) की देर शाम घर नहीं पहुँचा, तो उसकी पत्नी गुड़िया साह ने इसके बारे में ससुराल वालों को बताया। इसके बाद शौकत के पिता पिता शमशाद साह रात में ही बक्सर पहुँचे और इसकी सूचना औद्योगिक थाने की पुलिस को दी। पुलिस ने जब जाँच शुरू किया तो उन्हें गुड़िया पर शक हुआ।

फिर मामले में इमरान खान और बाबर खान को हिरासत में लिया गया। उन दोनों ने पूछताछ में शौकत की हत्या में गुड़िया का हाथ बताया। जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुड़िया साह, तरवेज और परवेज खान को भी गिरफ्तार कर लिया। एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने ने इस बात की पुष्टि की है कि पत्नी ने अपने प्रेमियों के साथ मिलकर पति की हत्या कराई है।

बैरंग घर लौटेंगी तृप्ति देसाई, अय्यप्पा स्वामी को चुनौती देने की अकड़ साल भर में दूसरी बार हवा

सबरीमाला के देवता स्वामी अय्यप्पा को चुनौती देने और उनके मंदिर के नियम भंग कर प्रवेश करने का तृप्ति देशाई का मंसूबा एक साल में दूसरी बार धराशायी हो गया है। उन्होंने इसका ठीकरा केरल पुलिस पर कथित तौर पर फोड़ा है और कहा है कि पुलिस उन्हें सुरक्षा नहीं दे रही है। मीडिया खबरों के अनुसार तृप्ति देसाई कोच्चि हवाई अड्डे से अपने गृह नगर पुणे बैरंग लौट रही हैं। इसके पहले आज (मंगलवार, 26 जुलाई, 2019 को) सुबह वे इस घोषणा के साथ कोच्चि पहुँची थीं कि चाहे सुरक्षा मिले या न मिले, वे मंदिर में घुस कर रहेंगी।

उन्होंने यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के आलोक में की थी, जिसमें पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के अंतिम मुकदमे में करीब दो हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट के ही पिछले आदेश को पलट दिया था। उनकी अध्यक्षता में पाँच जजों की बेंच ने अपने सितंबर, 2018 के फैसले पर प्रभावी रूप से रोक लगाते हुए मंदिर की प्रथा को तात्कालिक रूप से बहाल कर दिया था और अंतिम निर्णय के लिए मुकदमे को बड़ी बेंच के पास पास भेज दिया था। गौरतलब है कि प्रथा के अनुसार 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की (रजस्वला उम्र की) महिलाएँ सबरीमाला के मंदिर में प्रवेश नहीं करती हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनकी उपस्थिति से मंदिर के देवता स्वामी अय्यप्पा की नैष्ठिक ब्रह्मचारी साधना में विघ्न पड़ता है।

वहीं तृप्ति देसाई और अन्य नारीवादियों का गिरोह इसे पीरियड्स से जोड़कर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव, अन्धविश्वास आदि बताता रहा है। महाराष्ट्र के शनि शिगनापुर में भी आध्यात्मिक कारणों से महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक का अपमान कर मंदिर में जबरन घुस चुकीं तृप्ति ने नवंबर, 2018 में सबरीमाला में जबरन प्रवेश की घोषणा की थी। लेकिन जब वे कोच्चि पहुँचीं, तो उन्हें लोगों के विरोध के कारण वहीं से उलटे पैर लौटना पड़ा था।

सितंबर, 2018 के मंदिर की प्रथा को अमान्य करार देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर की परंपराओं को जबरन तोड़ने के लिए केरल की कम्युनिस्ट राज्य सरकार द्वारा बिंदू और कनकदुर्गा नाम की एक अन्य महिला को सबरीमाला मंदिर में घुसा दिया गया था। वे दोनों कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ता थीं और उनके साथ पुलिसकर्मी भी थे, जो धर्मस्थल के अंदर सादे कपड़ों में थे। सबरीमाला मंदिर में उपस्थित भक्तों ने आरोप लगाया था कि इन दोनों को इस साल 2 जनवरी को सुबह-सुबह वीआईपी प्रवेश द्वार से चोरी-छिपे आँख बचाकर प्रवेश करवाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला आने के बाद एक बार फिर तृप्ति ने 15 नवंबर को कहा था कि वो 20 नवंबर के बाद सबरीमाला जाएँगी। आज कोच्चि पहुँचने तृप्ति ने कहा था, “हम आज संविधान दिवस पर सबरीमाला मंदिर जाएँगे। हमें मंदिर जाने से न तो राज्य सरकार और न ही पुलिस रोक सकती है। चाहे हमें सुरक्षा मिले या न मिले, हम आज मंदिर जाएँगे।” लेकिन आज भी उनका मंसूबा पिछले नवंबर की तरह अय्यप्पा भक्तों ने पूरा नहीं होने दिया।

लुंगी पहन कर राजस्व दफ़्तर पहुँचा ग्रामीण तो अधिकारियों ने भगाया, कहा- तुम्हारी समस्या नहीं सुनेंगे

बिहार के अररिया में नरपतगंज स्थित मधुरा दक्षिणी प्रखंड के अधिकारी को लुंगी पसंद नहीं आई। उक्त अधिकारी का नाम दिलीप करन है। दरअसल, हुआ यूँ कि एक ग्रामीण किसी कार्य से कचहरी पहुँचा लेकिन अधिकारी दिलीप उसे देख कर आग-बबूला हो गए। उनके गुस्से का कारण ये था कि वो ग्रामीण लुंगी में दफ्तर में घुस गया था। इसे लोग उनकी मनमानी बता कर आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने उस व्यक्ति की समस्या भी नहीं सुनी और उसे फटकार लगाई। इसके बाद उसे अपने कार्यालय से भगा भी दिया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि ‘कर्मचारी साहेब’ ने उक्त ग्रामीण से कहा– “हमारे कचहरी में आना हो तो लुंगी पहन कर मत आइए।” इसके बाद अपनी समस्या लेकर आया उक्त व्यक्ति वापस अपने घर लौट गया। इस बाबत सीओ निशांत कुमार को लिखित आवेदन दिया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस घटना की जानकारी दी गई है। लोगों ने कर्मचारी के इस व्यवहार पर आपत्ति जताई है।

पीड़िता का नाम रामस्वरूप महतो है। वह वह मधुरा दक्षिणी पंचायत के वार्ड संख्या 7 में स्थित कोसी कॉलोनी में रहता है। उसके पिता का नाम गणेश महतो है। वह बुधवार (नवंबर 20, 2019) को अपनी वंशावली सम्बंधित जानकारियाँ निकलवाने के लिए राजस्व कार्यालय गया। वहाँ कर्मचारियों के साथ-साथ कई ‘बाबू’ लोग भी मौजूद थे। पीड़ित की बस इतनी ही ग़लती थी कि वो लुंगी पहन कर वहाँ पहुँच गया था।

उसे लुंगी में देखते राजस्व कार्यालय के अधिकारियों ने फटकार लगाते हुए वापस जाने को कहा। अधिकारियों ने कहा कि वो कपड़े बदल कर आए, तब उसकी समस्या सुनी जाएगी। इस मामले को लेकर अभी तक सीओ की तरफ़ से कोई टिप्पणी नहीं आई है।

…वो शख्स जिसने चूस लिया अजित पवार का पावर: 3 दिन में सरकार गिरने की अंदरुनी कहानी!

महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में एक और नया अध्याय जुड़ गया। जिस अजित पवार के भरोसे पर भाजपा राज्य में अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही थी, उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

इससे पहले 24 नवम्बर की सुबह देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसी शपथ ग्रहण में अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की भी शपथ ली थी। दूसरी ओर महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के बीच भी लम्बे समय से खिचड़ी पाक रही थी।

हालाँकि जब अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो शरद पवार ने खुद को उनके इस फैसले से दूर रखा था। उनको पार्टी से तो नहीं हटाया गया था लेकिन पद से जरूर हटा दिया था। इस राजनीतिक समीकरण के बाद से तीनों पार्टियाँ (शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस) अपने-अपने विधायकों को इकठ्ठा करने में लग गई थीं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के इस सियासी संकट में सबसे हैरान कर देने वाली घटना तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सदन में 27 नवम्बर को होने वाले फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले अजित पवार ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 नवम्बर को फ्लोर टेस्ट का आदेश आने के बाद अजित पवार ने उनसे खुद संपर्क किया और कहा कि वह इस गठबंधन को आगे अपना समर्थन नहीं दे पाएँगे। इसके बाद ही देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय कर लिया। आने वाले समय में सरकार बनाने वालों को उन्होंने अपनी शुभकामनाएँ दीं। हालाँकि इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी के नेतृत्व में शपथ ले लेने की ओर इशारा करते हुए शिवसेना पर निशाना भी साधा।

टाइम्स नाउ की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी सीएम पद से अजीत पवार के इस्तीफे के पीछे तीन कारण हो सकते हैं। दरअसल अजित को उम्मीद थी कि भाजपा संग उनके गठबंधन को समर्थन देने के लिए कम से कम 30 विधायक ज़रूर साथ होंगे हालाँकि अंत तक उन्हें सिर्फ 12 विधायकों का ही समर्थन मिल सका। इस सियासी घटनाक्रम में धनंजय मुंडे द्वारा यू-टर्न ले लेने से पवार के फैसले पर काफी असर पड़ा। 24 नवम्बर को ही धनंजय मुंडे ने ट्वीट कर यह साफ कर दिया था कि शरद पवार का समर्थन करेंगे।

महाराष्ट्र की सियासत के इन बदलावों के बाद संजय राउत ने कहा है कि अजित पवार शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस गठबंधन के साथ हैं। उन्होंने कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के बाद उद्धव ठाकरे पूरे पाँच साल के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया इस्तीफा, डिप्टी CM अजित पवार ने भी पद छोड़ा

भाजपा को सरकार बनाने से रोकने की वो साजिश जब डिप्टी सीएम को हवाई जहाज पर छापेमारी के लिए भेजा गया

41 सालों में 4 बार CM रहे लेकिन कभी जनता ने शरद पवार को बहुमत नहीं दिया: बोया पेड़ बबूल का…

19 साल बाद बीवी और 4 बच्चों के साथ फिर से हिंदू बना सलीम, पड़ोसी दे रहे जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के शामली में एक युवक ने हिंदू धर्म अपना लिया है। 27 वर्षीय सलीम पत्नी व चार बच्चों के साथ इस्लाम छोड़ हिंदू बना है। इसके बाद से उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। उसने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस से गुहार लगाई है। पीड़ित की तहरीर के बाद पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सरवरपीर का है। दरअसल, सलीम के बचपन का नाम सुशील था। बाद में मुस्लिम धर्म अपना कर वह सलीम बन गया था। उसने बताया कि उसकी पैदाइश हिंदू परिवार में हुई थी। जब वह आठ साल का था तो उसके माता-पिता की मौत हो गई। इसके बाद एक मुस्लिम ट्रक चालक सबदर ने उसका पालन-पोषण किया।

सुशील के मुताबिक सबदर ने उसका धर्म परिवर्तन करा उसे सलीम बना दिया। सबदर ने उसका निकाह भी इस्लामी तरीके से करवाया। सुशील के अनुसार जब उसका धर्म बदला गया तो उसे उतनी समझ नहीं थी। अपने अतीत की जानकारी होने के बाद उसने दोबारा से हिंदू धर्म अपना लिया और सलीम से एक बार फिर सुशील बन गया। लेकिन उसका ऐसा करना पड़ोसियों का नागवार लग रहा है और वे उसे धमकी दे रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पड़ोसी राशिद के खिलाफ उसने पुलिस से शिकायत भी की है। राशिद से पुलिस पूछताछ कर रही है। सीओ सिटी जितेंद कुमार का कहना है कि सलीम ने धर्म परिवर्तन करने को लेकर जानकारी दी थी। उसका आरोप है कि इसके बाद से कुछ लोग उसे अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।

ईसाई स्कूल में जबरन धर्म परिवर्तन, विरोध करने पर वार्डन ने 9वीं के लड़के को इतना मारा कि वो मर गया

मुस्लिमों के ख़ौफ़ से 150 हिन्दू धर्मांतरण और पलायन को मजबूर: रिपोर्ट्स

98 ईसाई आदिवासियों ने पुनः अपनाया हिंदू धर्म, 9 साल पहले प्रलोभन से कराया गया था धर्मान्तरण

6 महीने में 2 करोड़ रुपए की ठगी: बांग्लादेशी सलीम मोहम्मद को CCTV की मदद से पुलिस ने दबोचा

कई व्यापारियों से पैसा ऐंठने के आरोप में कोलकाता पुलिस ने बांग्लादेश के सलीम मोहम्मद को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल आरोपित सलीम पिछले कई महीनों से शहर की बुर्राबाज़ार, न्यू मार्केट समेत कई बाजारों की दुकानों के मालिकों से ठगी कर पैसे लूट रहा था। पुलिस को जब पैसा लूटे जाने की इन घटनाओं की खबर मिली तो उनका पहला शक बांग्लादेशी मूल के सलीम मोहम्मद पर ही गया।

मामले की जाँच करते हुए जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया तो उनका शक यकीन में बदल गया। कुछ ही दिन पहले पुलिस ने फुटेज खंगालते वक़्त देखा कि दो अलग-अलग घटनाओं के दौरान आरोपित शख्स ने दो व्यापारियों को अपनी ठगी का शिकार बनाया। इसी के बाद पुलिस ने सलीम को कोलकाता के बो-बाज़ार के एक होटल से धर लिया।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पुलिस के सूत्रों के मुताबिक सलीम ने अपनी इस करतूत को अजमाते हुए पिछले छः महीने में करीब दो करोड़ रुपए जमा कर लिए थे। घटना को अंजाम देने के लिए सलीम शाम को बंद होती दुकानों पर अपनी नज़र रखता था। सलीम दुकानदारों की आवाजाही पर पूरी नज़र रखता था। एक बार जब उसे इस बात का अंदाज़ा हो जाता कि कौन दुकानदार दिन भर की कमाई अपने साथ लेकर अपने साथ जाने वाला है, दुकान बंद करते वक़्त सलीम किसी बहाने से उसका ध्यान भटकाता और दुकान के मालिक का ध्यान भटकते ही उसका बैग लेकर रफू-चक्कर हो जाता। कभी-कभी तो वह पैसों वाला बैग उठाकर उसकी जगह वैसा ही एक डुप्लीकेट बैग छोड़ जाता था। सलीम की इस चाल से दुकानदार को ठगे जाने का तुरंत पता तक नहीं चलता था।

पुलिस द्वारा धरा गया आरोपित सलीम मोहम्मद बांग्लादेश की राजधानी ढाका के नारायणगंज का रहने वाला है। कई होटलों में रहने के दौरान उसने अपना पासपोर्ट और वीजा आईडी प्रूफ के तौर पर पेश किया था। हालाँकि इन सब कागजातों के बावजूद भारत में सलीम गैरकानूनी तरीके से घुसा था और अपने ठगी के काम से इकट्ठा किए पैसों को मणि ट्रान्सफर सर्विस के ज़रिये बांग्लादेश भेज दिया करता था। बता दें कि गिरफ़्तारी के वक़्त सलीम के पास से लाखों रुपए बरामद हुए थे, वहीं पुलिस के मुताबिक सलीम ने पिछले छ: महीने में पैसों से भरे तकरीबन 40 बैग चुराए।

इस मामले में सोमवार को आरोपित सलीम मोहम्मद को कोलकाता की एक स्थानीय अदालत बैंकशाल कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सलीम को 30 नवम्बर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। वहीं पुलिस इस बात की छानबीन में जुटी है कि सलीम अकेले ही इस धंधे में काम करता था या वह किसी गिरोह का एक सदस्य है।

तृप्ति देसाई का सबरीमाला में घुसना बड़ी साज़िश: वामपंथी मंत्री ने कहा- एक्टिविस्ट पर हमला ड्रामा

केरल सरकार ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास करने वाली महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी लेने से इनकार कर दिया था। इस कारण सीपीआई पोलित ब्यूरो की बैठक में मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को अन्य वामपंथी नेताओं का कोपभाजन बनना पड़ा था। बाद में सरकार ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के हिसाब से सभी काम किए जाएँगे। अब केरल सरकार के मंत्री का बड़ा बयान आया है। केरल देवस्वोम बोर्ड के मंत्री कदकामपल्ली सुरेंद्रन ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन चला रहीं तृप्ति देसाई पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तृप्ति देसाई और उनके नेतृत्व वाला गैंग केरल में शांति-व्यवस्था भंग करना चाहता है।

केरल के मंत्री ने कहा कि तृप्ति देसाई के आंदोलन के पीछे एक बहुत बड़ी साज़िश है। उन्होंने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए हंगामा करने वाली अन्य महिलाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। सुरेंद्रन केरल के पर्यटन मंत्री भी हैं। उन्होंने एक्टिविस्ट बिंदु अम्मिणी पर हुए हमले को भी एक साज़िश करार दिया। उन्होंने कहा कि ये सब पूर्व-नियोजित ड्रामा था। बता दें कि बिंदु सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने के लिए जा रही थीं, तभी किसी व्यक्ति ने उनपर मिर्ची स्प्रे से हमला कर दिया था। केरल के मंत्री ने इसे नाटक करार दिया।

वामपंथी मंत्री ने कहा कि शांति-व्यवस्था भंग करने की इन कोशिशों को केरल सरकार सफल नहीं होने देगी। उन्होंने साफ़ कर दिया कि अगर कोई महिला सबरीमाला में जबरन प्रवेश करना चाहती हैं तो सरकार उसे कोई स्पेशल प्रोटेक्शन नहीं देगी। मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को देसाई सहित 5 अन्य महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर के भीतर घुसने की फिर से चेष्टा की।

तृप्ति देसाई सहित 6 महिलाएँ कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में काफ़ी देर तक बैठी रहीं। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री पर लगी रोक को हटा दिया था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भारी विरोध-प्रदर्शन किया। वामपंथी सरकार की पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं की पिटाई की कई घटनाएँ सामने आईं। सुप्रीम कोर्ट में कई समीक्षा याचिकाएँ दाखिल की गईं। इन याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी।

सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली महिला पर फेंका गया मिर्च पाउडर, दर्शन करने पहुँचीं तृप्ति देसाई

सबरीमाला मंदिर में घुस रही थीं 50 से कम उम्र की 10 महिलाएँ: केरल पुलिस ने भगाया

SC ने सबरीमाला मामले में 2018 के फ़ैसले को प्रभावी रूप से ख़ारिज कर दिया: एडवोकेट जे साई दीपक

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया इस्तीफा, डिप्टी CM अजित पवार ने भी पद छोड़ा

महाराष्ट्र में पल-पल बदल रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ख़ुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के मीडिया को सम्बोधित किया। 2-4 मिनट के संबोधन के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया।

फडणवीस ने कहा कि जनता ने गठबंधन को बहुमत दिया लेकिन शिवसेना ऐसी बात पर अड़ी रही, जिसकी कोई बात ही नहीं हुई थी। शिवसेना को लगा कि उसके पास संख्या बल इतना है, जिससे वो मोलभाव कर सके। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव के पहले और बाद में हर इंटरव्यू में बताया कि भाजपा का सीएम होगा। फडणवीस ने कहा कि भाजपा का ये मत था कि जो तय नहीं हुआ, वो नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना ने भाजपा के बजाय एनसीपी से बात शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मातोश्री से न निकलने वाले लोग वहाँ से बाहर जाकर होटलों में बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि संख्या बल न होने के कारण राज्यपाल के बुलावे के बावजूद भाजपा ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया क्योंकि संख्याबल नहीं था। इसके बाद शिवसेना को आमंत्रित किया गया लेकिन उन्होंने ज्यादा समय माँगा। एनसीपी ने भी कुछ ऐसा ही किया। उन्होंने कहा कि तीन ऐसी पार्टियाँ साथ आ गई हैं, जिनकी विचारधारा में कोई मेल नहीं है। उनका ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ एक ही था- भाजपा को सत्ता से बाहर रखना। उनके पास इसके अलावा कोई प्रोग्राम नहीं था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा-

“एनसीपी के कुछ नेता हमारे साथ चर्चा में आएँ और उन्होंने हमे समर्थन पत्र दिया, जिसके आधार पर हमने सरकार बनाई। अब हमारे पास बहुमत नहीं है। अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया है। हम भी कोई हॉर्स ट्रेडिंग नहीं करेंगे और मैं भी इस्तीफा दूँगा। “

इससे पहले उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की इस्तीफे की ख़बर आई। एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि उन्हें मीडिया के के माध्यम से ये बातें पता चली हैं और वो पूरी जानकारी लेने के बाद ही इसपर टिप्पणी करेंगे। हालाँकि, अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने अपने पिता के इस्तीफे की ख़बरों को नकार दिया।

संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चैंबर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की। भाजपा नेता राम माधव ने ग्रैंड हयात होटल में एनसीपी, शिवसेना और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा कि बहुमत होटलों में या अन्य जगहों पर नहीं बल्कि सदन के फ्लोर पर साबित किया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा बहुमत साबित कर देगी और इसे लेकर वो आश्वस्त हैं। उधर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि अजित पवार अपने गुट के विधायक लेकर आएँगे और भाजपा आसानी से बहुमत साबित कर देगी।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि देवेंद्र फडणवीस बुधवार (नवंबर 27, 2019) को सदन में बहुमत साबित करें। साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का भी आदेश दिया गया है। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उनकी पार्टी 30 मिनट के भीतर बहुमत साबित कर के दिखा देगी।

अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, बेटे ने मीडिया रिपोर्ट्स को नकारा

‘अजित पवार की बगावत बालू पर गधे के मूतने पर हुई गंदगी जैसी हो गई है’

अब साल भर तक सरकारी घर में रह सकेंगे वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिवार

युद्ध में या जिहादियों के साथ मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त होने वाले सैनिकों के परिजनों के लिए सरकारी आवास रखने की समय सीमा को रक्षा मंत्रालय ने बढ़ाकर एक साल तक कर दिया है। इसके पहले यह समय सीमा महज़ तीन महीने की थी। इससे संबंधित प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंज़ूरी दे दी है।

रक्षा मंत्रालय ने आज (मंगलवार, 26 नवंबर, 2019 को) ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी है। यह निर्णय थलसेना के अलावा नौसेना (नेवी) और वायुसेना पर भी लागू होगा।

ट्विटर पर मंत्रालय ने यह भी बताया कि यह निर्णय सैन्य बलों की माँग और ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके अलावा यह भी बताया है कि यह कदम सैनिकों के मनोबल में बढ़ोतरी के लिए उठाया गया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के उनसे बात करते हुए कहा कि यह निर्णय केवल मनोबल में बढ़ोतरी से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि परिवार की आय के मुख्य स्रोत रहे इंसान की मौत के बाद इतनी जल्दी मकान बदल पाना कई बार बेहद मुश्किल भी हो जाता है।