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सेक्स चेंज करवाने पर मिलेंगे ₹1.5 लाख रुपए: किन्नरों पर मेहरबान हुई बिहार सरकार

बिहार सरकार ने सेक्स बदलवाने पर वित्तीय मदद देने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने किन्नर कल्याण बोर्ड का भी गठन किया है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि किन्नरों के हितों की रक्षा हर हाल में किए जाएगी। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, “किन्नर हमारे समाज के ही अंग हैं। अगर कोई व्यक्ति सेक्स परिवर्तित कराता है तो बिहार सरकार डेढ़ लाख रुपए वित्तीय मदद के रूप में देगी।

पटना के प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित किन्नर महोत्सव को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति किन्नरों को किराए पर मकान देने से इनकार करता है, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ देने में भेदभाव करता है, इसके अलावा इनके अधिकारों का हनन करता है, तो उन्हें छह माह से लेकर दो साल तक की सज़ा दी जा सकती है।” राज्य सरकार द्वारा नवगठित बोर्ड अन्य राज्यों में किन्नरों को मिल रही सुविधाओं का अध्ययन करेगा। इसके बाद बिहार के किन्नरों को सुविधाएँ देने के लिए योजनाएँ बनाई जाएँगी।

कार्यक्रम के मंच पर किन्नरों ने अपनी कलाकारी दिखाई। कई राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। उद्योग मंत्री श्याम रजक ने इस महोत्सव को किन्नरों को आत्मबल देने वाला कार्यक्रम बताया। किन्नर महोत्सव 2016 से ही प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता रहा है। कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार ने किन्नरों को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताया।

उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा किन्नर महोत्सव को लेकर साझा की गई जानकारियाँ

बता दें कि इंसेफ्लाइटिस के कारण राज्य में 150 से भी अधिक बच्चों की मौत हो गई है और केंद्र से लेकर राज्य स्तर के नेताओं द्वारा दौरे करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नज़र नहीं आया। इसके अलावा गर्मी में लू के कारण भी 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण लोगों के निशाने पर आई बिहार सरकार ने बाढ़ को लेकर भी ज़रूरी इंतजाम नहीं किए हैं। बिहार के कई जिलों में पानी भर चुका है और जल-निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण कई इलाक़े जलमग्न हो चुके हैं।

24 सेकंड का Video वायरल: CRPF जवानों ने 14 साल की नगीना को नदी में डूबने से बचाया

केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के जवानों की बहादुरी के क़िस्से तो हम आए दिन सुनते रहते हैं। देश की सुरक्षा में तो ये जवान मुस्तैदी के साथ खड़े ही रहते हैं, लेकिन मुश्किल में फँसे किसी शख़्स की जान बचाने में भी ये जवान अपने क़दम पीछे नहीं लेते। अपने अदम्य साहस का परिचय कराने की एक ऐसी ही घटना जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सामने आई है। ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया गया है जिसमें एक लड़की को नदी में डूबने से बचाने के लिए वहाँ मौजूद जवानों ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी और लड़की को सही-सलामत बचा लिया।

14 साल की नगीना नाम की लड़की को CRPF कॉन्स्टेबल्स एमजी नायडू और नल्ला उपेंद्र द्वारा (बारामूला, जम्मू-कश्मीर) में नदी में डूबने से बचाया गया। जवानों की इस बहादुरी के लिए CRPF के महानिदेशक द्वारा 176 बटालियन के एमजी नायडू और उपेन्द्र को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है।

ख़बर के अनुसार, सोमवार (15 जुलाई) को दोपहर के समय नगीना बारामुला ज़िले के चनपोरा कुंजर टंगमर्ग गई थी। वहाँ नदी के तट पर वो कपड़े धो रही थी तभी अचानक उसका पाँव फ़िसल गया और वो नदी की तेज़ धाराओं के साथ बहने लगी। इस दौरान वो ज़ोर-ज़ोर से मदद के लिए चिल्लाने लगी। तभी वहाँ ड्यूटी पर तैनात CRPF के जवानों ने उसकी आवाज़ सुनी। उन्होंने बिना देरी किए नगीना को बचाने के लिए नदी में छलाँग लगा दी। 

लड़की की पहचान नगरोटा (जम्मू-कश्मीर) के मोहम्मद शरीफ़ की बेटी नगीना के रूप में हुई। नगीना को बचाए जाने के बाद, CRPF के जवानों ने उसे इलाज के लिए तुरंत उप-ज़िला अस्पताल टंगमर्ग में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ डॉक्टर्स ने उसकी स्थिति स्थिर बताई। नगीना के परिजनों ने सभी जवानों के तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।

‘सुनने की आदत डालिए ओवैसी साहब, डरा नहीं रहा हूँ लेकिन आपको सुनना पड़ेगा’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में असदुद्दीन ओवैसी के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए उन्हें बुरी तरह झिड़का। दरअसल, आज संसद में एनआईए संशोधन विधेयक पर चर्चा चल रही थी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह खड़े होकर इसी विषय पर बोल रहे थे। इसी दौरान हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने खड़े होकर विरोध करना शुरू कर दिया। बागपत सांसद सत्यपाल सिंह यह कह रहे थे कि आतंकवादी घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे अनुभवी सत्यपाल सिंह ने कहा कि जबकि मुंबई ने भी आतंकवाद ख़ूब झेला है परंतु वहाँ भी इसे राजनीतिक चश्मे से देखा गया। हैदराबाद धमाकों के बारे में बात करते हुए सिंह ने याद दिलाया कि जब पुलिस ने अल्पसंख्यक समुदाय के आरोपितों को पकड़ा, तब सीधे मुख्यमंत्री ने कमिश्नर को धमकी दी कि ऐसा करने से उनकी नौकरी चली जाएगी। इसी बात से ओवैसी नाराज़ नज़र आए।

ओवैसी के रवैये को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष शाह खड़े हुए और उन्होंने ओवैसी को सुनने की आदत डालने की सलाह दी। अमित शाह ने कहा, “जब राजा साहब बोल रहे थे, तब क्यों नहीं खड़े हुए? हम शांति से सुनते हैं। सुनने की आदत डालिए ओवैसी साहब, आपको सुनना पड़ेगा।” बाद में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मैं किसी को डरा नहीं रहा हूँ।

शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि समान विषय पर नीलगिरि के सांसद ए राजा ने भी अपनी बातें रखी और भाजपा नेता सत्यपाल सिंह भी उसी विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने सलाह दी कि जब कोई अपनी बात रख रहा हो तो उसके बीच में नहीं बोला जाना चाहिए।

शैम्पेन खुलते ही टीम छोड़ भागे इंग्लैंड के खिलाड़ी आदिल राशिद और मोईन अली, इमाम ने ली चुटकी

कल रात इंग्लैण्ड के विश्व कप जीतने के बाद उनके जश्न में कुछ ऐसा हुआ जो एक ही साथ हास्यास्पद भी था और आधुनिक समाज, प्रगतिशील मूल्यों के बीच गहराई तक पैवस्त इस्लामी रूढ़िवाद का जीता-जागता सबूत भी। और इस घटना के सांकेतिक महत्व का अंदाज़ा इस चीज़ से लगाया जा सकता है कि इमाम तौहीदी भी इस पर टिप्पणी करने से खुद को नहीं रोक पाए।

शैम्पेन से भागे क्रिकेटर

यह तो आम जानकारी है कि इस्लाम में मदिरा को हराम मानते हैं। इस मजहब के बहुत से अनुयायी इसके सेवन से अपने मज़हबी आग्रह के चलते बचते भी हैं। लेकिन ब्रिटिश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी मोईन अली और आदिल राशिद इस आग्रह को एक ही नहीं, कई कदम आगे ले गए। जब उनके साथी खिलाड़ी बेयरस्टॉ और प्लंकेट जीत की ख़ुशी मनाते हुए शैम्पेन उड़ाने लगे तो दोनों शैम्पेन के स्पर्श से भी बचने के लिए गिरते-पड़ते दूर भागते नज़र आए।

इमाम ने ली चुटकी

इस्लाम और इस्लामी समाज के कट्टरपंथ से लड़ने के लिए जाने जाने वाले ईरानी-ऑस्ट्रेलियाई इमाम मोहम्मद तौहीदी ने भी इस पर चुटकी ली। इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि इसको देखने के बाद उनकी हँसी रोके नहीं रुक रही है।

इस्लामी मामलों के ‘जानकार’ शराब को लेकर एकमत हैं। उनका मानना है कि यह शैतान का काम है। वे AIDS के पीछे की वजह भी शराब ही बताते हैं। यही वजह है कि कट्टर इस्लामी अनुयायी शराब से दूर रहते हैं। मोईन अली और आदिल रशीद का भागना भी इसी ओर इशारा कर रहा है।

ठग ईसा खान ने पुलिस को कहा- ‘नौकरी करने से ज्यादा ठगी में आता है मजा, इसलिए करता हूँ’

कभी सुना है आपने कि कोई ठग पकड़े जाने पर पुलिस के सामने कहे कि उसे नौकरी करने से ज्यादा ठगी में मजा आता है। अगर नहीं, तो पलवल निवासी (28) ईसा खान की बात सुनिए, जिसने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अपने अपराधों का कारण उससे मिलने वाले मजे को बताया है।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार पलवल निवासी ईसा खान को ओखला इंडस्ट्रियल पुलिस ने 7 जुलाई को ओखला इलाके से गिरफ्तार किया। जहाँ जाँच में उसके पास से 30 हजार रुपए, ठगी के पैसों से खरीदे गए दो महंगे फोन और 20 एटीएम बरामद हुए। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने किसी प्रकार की सफाई देने की बजाए बोला कि उसे नौकरी या कोई और काम करने की बजाए ठगी से कमाई करने में मजा आता है, इसलिए वो इसे करता है। जानकारी के मुताबिक ईसा खान पिछले साल भी गिरफ्तार हो चुका है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

खबर के मुताबिक पुलिस ने बताया कि पिछली 4 जुलाई को तेहखंड निवासी एक महिला ने ठगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने अपनी शिकायत में बताया था कि एटीएम से पैसे निकालते वक्त उसका एटीएम काम नहीं कर रहा था तो पीछे खड़े युवक ने उसे मदद ऑफर की, लेकिन फिर भी एटीएम से कैश नहीं निकला। इसलिए वो घर वापस आ गई। लेकिन घर पहुँचते ही उसके पास कार्ड से 30 हजार के ट्रांजैक्शन का मैसेज आया और थोड़ी देर बाद 42 हजार से अधिक की शॉपिंग का मैसेज आ गया।

महिला ने जब बैंक ग्राहक सेवा केंद्र से बात की तो मालूम चला कि पैसे उनके एटीएम कार्ड से ही निकाले गए हैं, जब महिला ने अपना एटीएम कार्ड चेक किया थो पता चला आरोपित युवक ने उसका कार्ड ही बदल दिया था।

ठगी के इस मामले की खबर मिलते ही ओखला पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज खँगाली गई और आरोपित की पहचान ईसा खान के रूप में हुई। 7 जुलाई को वह पकड़ा गया, जिसके बाद पता चला कि ठगी के लिए वो मदद के बहाने ट्रांजैक्शन के दौरान पिन नंबर देख लेता था, और फिर कार्ड चुराकर उसे इस्तेमाल करता था। बता दें ईसा खान ठगी करने के लिए पलवल से 80 किलोमीटर की दूरी तय करके दिल्ली आता था और काम पूरा करके दोबारा ईएमयू से वापस लौट जाता था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया और ईसा खान पकड़ा गया।

बाइक नहीं मिली तो निकाह के 24 घंटे के भीतर तीन तलाक़, दामाद ने ससुर को दी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में दहेज़ के कारण एक शादी मात्र 24 घंटे के भीतर टूट गई। युवक ने शादी के एक दिन के भीतर अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया। घरवाले चौथे की रस्म की तैयारी में लगे थे, तभी अचानक से उन्हें नवविवाहिता को तीन तलाक दिए जाने की ख़बर मिली, जिसके बाद खलबली मच गई। वधू पक्ष ने लड़के वालों के ख़िलाफ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। नाराज़ लड़की के पिता ने अपनी बेटी के साथ ससुराल वालों द्वारा इस तरह का व्यवहार किए जाने को लेकर अपनी व्यथा स्थानीय पुलिस को बताई

फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के हसनपुर टांडा की रहने वाली रुखसाना बानो का निकाह जहाँगीपुर थाना क्षेत्र में आने वाले सादीपुर गाँव निवासी शाहे आलम के साथ हुआ। निकाह की रस्म 13 जुलाई को पूरी की गई। निकाह के सबकुछ ठीक-ठाक था और लड़की की विदाई भी अच्छी तरह से संपन्न हो गई। असली नाटक इसके बाद शुरू हुआ। रुखसाना के ससुराल से उसके पिता कुतुबुद्दीन को फोन आया कि उनकी बेटी की तबियत काफ़ी ख़राब है, जिसके बाद वह भागे-भागे वहाँ पहुँचे।

जब वह अपनी बेटी के ससुराल पहुँचे तो रुखसाना अपने पिता को देखते ही रोने लगी और ससुराल वालों द्वारा दहेज़ में मोटरसाइकिल के लिए प्रताड़ित किए जाने की बात कही। रुखसाना ने अपने पिता को बताया कि उसके पति व ससुराल के अन्य परिजन दहेज के लिए उसे परेशान कर रहे हैं। जब कुतुबुद्दीन ने अपना दामाद शाहे आलम को समझाना शुरू किया तो उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई।

इसके बाद गुस्साए शाहे आलम ने अपनी बीवी रुखसाना को तीन तलाक दे दिया। ऐसा उसने तीन बार ज़ोर से ‘तलाक-तलाक-तलाक’ बोल किया। साथ ही शाहे आलम ने अपनी बीवी को तुरंत घर से निकल जाने को कहा। ख़बरों के अनुसार, रुखसाना का रो-रो कर बुरा हाल है और शादी के तुरंत बाद तलाक़ के सदमे से वह अभी तक नहीं उबरी हैं।

दैनिक जागरण के बाराबंकी संस्करण में छपी ख़बर

पुलिस ने इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। पुलिस ने बताया कि दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कर आगे की जाँच की जा रही है। सीओ अरविन्द कुमार वर्मा ने आश्वासन दिया कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कठोरतम कार्रवाई होगी।

‘कपिल सिब्बल की पत्नी महिला कर्मचारियों को “कुतिया” या “Bitch” बुलाती थीं’

बीते दिनों तिरंगा टीवी के कुछ पूर्व कर्मचारियों के नौकरी से निकाले जाने वाले दावे के बाद कपिल सिब्बल सोशल मीडिया पर सवालों के घेरे में आ गए थे। पूर्व कर्मचारियों का आरोप था कि कपिल सिब्बल के तिरंगा चैनल ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना कम्पंशेटरी सैलरी दिए नौकरी से निकाल दिया है। जिस कारण इन लोगों ने सोशल मीडिया पर कपिल सिब्बल से इंसाफ़ की गुहार भी लगाई। लेकिन लगता है कि कपिल सिब्बल के कानों में इसकी जूँ तक नहीं रेंगी। तभी तो मीडिया जगत की ‘वरिष्ठ’ पत्रकार और तिरंगा टीवी की मुख्य चेहरा रह चुकीं बरखा दत्त भी आज इन कर्मचारियों की ही भाषा बोलने लगीं।

अपने ट्विट्स के जरिए बरखा दत्त ने आज सोशल मीडिया पर कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी की हकीकत को खोल कर रख दिया। बरखा दत्त ने अपने ट्विटर पर कपिल सिब्बल को निशाना बनाते हुए लिखा कि वे और उनकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे तिरंगा टीवी में भयावह स्थिति है। यहाँ 200 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना 6 महीने की सैलरी दिए निकाल दिया गया है। उनका कपिल सिब्बल को लेकर कहना है कि एक व्यक्ति जो जनता के बीच में खुद को बिलकुल साफ़ दिखाता है, वो पत्रकारों के साथ घिनौना बर्ताव कर रहा है।

बरखा के ट्वीट में उन्होंने बताया कि तिरंगा टीवी में काम करने वाले अधिकतर लोग यहाँ अच्छी नौकरी के ऑफर ठुकराकर या फिर जमी-जमाई नौकरी छोड़कर आए थे, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया था कि चैनल को कम से कम 2 साल तक चलाया जाएगा। लेकिन जब कर्मचारियों को निकाला गया तो न कपिल सिब्बल ने स्टाफ से बात की और न ही उनकी पत्नी ने। बल्कि सभी लाइव प्रोग्रामिंग को 48 घंटों के लिए रद्द कर दिया गया।

कपिल सिब्बल की पत्नी के रवैये को बरखा ने आधार बनाकर कहा कि मीट फैक्टरी चलाने वाली कपिल सिब्बल की पत्नी तिरंगा TV के ऑफिस में चिल्लाकर कहती थीं कि उन्होंने मजदूरों को एक पैसा दिए बिना फैक्टरी बंद कर दी थी तो ये पत्रकार कौन होते हैं 6 महीने की सैलरी माँगने वाले!

बरखा ने इस मामले को शर्मनाक बताते हुए लिखा है कि कपिल सिब्बल हर दिन करोड़ो रुपए कमाते हैं, लेकिन कंपनी नॉर्म के मुताबिक वो 200 कर्मचारियों को उनका 6 या फिर कम से कम 3 महीने का वेतन नहीं दे सकते हैं। वह 200 से अधिक जिंदगियों को बर्बाद कर रहे हैं।

‘वरिष्ठ’ महिला पत्रकार बरखा का कहना है कि कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी कर्मचारियों से चैनल के ठप्प हो जाने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी को वजह बताते हैं। जबकि ये बिलकुल झूठ है, भारत सरकार ने कुछ नहीं किया है। इन पति-पत्नी ने स्टाफ़ से मिलने की कोशिश तक नहीं की और चैनल बंद करके लंदन चले गए, जिस कारण मैं इन्हें माल्या बुलाने पर मजबूर हूँ।

अपने ट्वीट में बरखा ने ये भी बताया है, “स्टाफ के अधिकारों के लिए लड़ने पर मुझे मानहानि की धमकी दी गई और कपिल सिब्बल की तुलना माल्या से करने पर मुझे ‘मेरे ईमेल वापस लेने’ का भी आदेश दिया गया है, लेकिन मैंने इससे मना कर दिया है। मै तिरंगा टीवी के पत्रकारों के समर्थन में हूँ और उन्हें कानूनी रूप से लड़ने में मदद करूँगी।”

अपने ट्वीट में बरखा ने इस बात की भी जानकारी दी है कि कपिल सिब्बल की पत्नी महिला कर्मचारियों को “कुतिया” या “बिच” बुलाती थीं। इस संबंध में उन्होंने महिला आयोग को भी टैग कर उनका ध्यान इस बात पर दिलाया है। साथ ही इतनी घिनौनी बात को साबित करने के लिए यह भी कहा है कि इस संबंध में उनके पास हस्ताक्षर किए हुए हलफनामे भी हैं।

गौरतलब है कि बरखा ने कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी से जुड़ी हकीकतों को पर्दाफाश करने के साथ-साथ अपने ट्वीट के जरिए मीडिया से संबंधी लोगों से कपिल सिब्बल के ख़िलाफ़ आवाज उठाने की माँग की है ताकि उन कर्मचारियों को इंसाफ़ मिल सके, जिन्हें सिर्फ एक महीने की सैलरी देकर संस्थान से निकाल दिया गया।

ऐसे पागल कुत्तों के लिए क़ानून कब बनेगा: हिंदू-विरोधी TikTok वीडियो पर चैंपियन रेसलर योगेश्वर दत्त को आया गुस्सा

2012 के लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक, 2014 में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में गोल्ड पदक जीत कर अपनी उपलब्धि के जरिए कई बार देश का नाम रौशन करने वाले रेसलर योगेश्वर दत्त ने वायरल हो रहे एक टिक-टॉक वीडियो पर ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “ऐसे पागल कुत्तों के लिए क़ानून कब बनेगा अगर अभी इनका अच्छे से इलाज नहीं हुआ तो आने वाले कुछ सालों में देश के हालात बहुत बिगड़ने वाले हैं। समय रहते हालात को ठीक करना बहुत ज़रूरी है।”

कृपया ध्यान दें: नीचे के वीडियो में गालियाँ हैं, बहुत गंदी गालियाँ हैं। भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

दरअसल, योगेश्वर दत्त ने मधुपूर्णिमा किश्वर के द्वारा ट्वीट किए गए एक वीडियो पर ये लिखा है। इस वीडियो में दो लड़के खुद को तबरेज अंसारी का ‘भाई’ और समर्थक बताते हुए हिंदुओं को गालियाँ दे रहे हैं। ये गालियाँ इतनी गंदी और भद्दी हैं कि उसे लिखा जाना संभव नहीं और शायद उचित भी नहीं है। गंदी-गंदी गालियों के साथ वो हिंदुओं को धमकी देते हुए कहते हैं, “भले ही सरकार तुम्हारी है, लेकिन हुकूमत हमारा चलता है। हमारी वजह से तुम्हारा हिंदुस्तान बसा हुआ है। तुम कितना भी कुछ कर लो, पलड़ा हम मुस्लिमों का ही भारी है और अगर हम अपने पर आ गए, तो तुम्हारे घर के बच्चों को भी नहीं छोड़ेंगे।”

योगेश्वर दत्त जैसे महान और सम्मानित खिलाड़ी के द्वारा किसी के लिए ‘पागल कुत्ता’ लिखना अजीब लगता है और उन्हें ये शोभा भी नहीं देता है। हालाँकि, इस बात की समझ उन्हें भी है, मगर इतना सम्मानित इंसान अगर इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है तो निश्चित ही इसके पीछे बड़ी वजह है। वीडियो को देखने के बाद यह समझना आसान है कि कोई क्यों इतने गुस्से में इस तरह की भाषा लिखने को मजबूर हुआ! उनके ट्वीट के शब्दों से साफ जाहिर हो रहा है कि उनके भीतर इन जैसे अराजक तत्वों को लेकर इतना ज्यादा गुस्सा और आक्रोश भरा हुआ है कि वो खुद को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए रोक नहीं सके।

मधुपूर्णिमा किश्वर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को टैग करते हुए ये वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा है कि  इस तरह की घटिया मानसिकता भारत में मदरसा में प्रशिक्षित किए गए समुदाय विशेष के बीच आम बात है। किश्वर का कहना है कि लड़कों ने जो कुछ भी कहा है, वो सीधे सीधे भाजपा और आरएसएस के नेताओं को संबोधित किया गया है। मजहब विशेष के इन दो लड़कों का मानना है कि उनका जन्म हिंदुओं पर शासन करने के लिए ही हुआ है। किश्वर ने इस वीडियो की तरफ प्रधानमंत्री का ध्यान दिलाने की कोशिश की, ताकि वो इस पर संज्ञान ले सकें।

बिहार का राज्यपाल क्या एक ‘कठपुतली’ मात्र है- BPSC परीक्षा में पूछा गया विवादास्पद प्रश्न

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की मुख्य परीक्षा में एक विवादास्पद सवाल पूछे जाने की ख़बर सुर्खि़यों में है। दरअसल, रविवार (14 जुलाई 2019) को आयोजित BPSC की मुख्य परीक्षा के सामान्य ज्ञान के दूसरे पेपर में एक सवाल पूछा गया:

“भारत में राज्य की राजनीति में राज्यपाल की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से बिहार के संदर्भ में। क्या वह केवल एक कठपुतली हैं?”

न केवल इस प्रश्न पर BPSC की चौतरफ़ा किरकिरी हो रही है और परीक्षा के बाद यह प्रश्न परीक्षार्थियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा, बल्कि अधिकारियों ने भी माना कि राज्यपाल के संवैधानिक पद के लिए ‘कठपुतली’ शब्द का प्रयोग न होना बेहतर होता। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के सवाल तो पहले भी पूछे जाते रहे हैं। मीडिया से हुई बातचीत में BPSC के परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार ने यह भी जोड़ा कि आयोग के सदस्यों या अधिकारियों को इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि प्रश्न-पत्र में क्या-क्या सवाल पूछे जा रहे हैं।


बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की मुख्य परीक्षा में पूछा गया विवादास्पद प्रश्न (तस्वीर सौजन्य: अमर उजाला)

बिहार के प्रतियोगी विशेषज्ञ डॉ एम रहमान ने भी हालाँकि इसकी तस्दीक की कि इस तरह के प्रश्न पहले भी पूछे जाते थे, मगर उनके भी मतानुसार विशेषकर बिहार लिखकर इंगित करने या राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद के संदर्भ में ‘कठपुतली’ जैसे शब्द के इस्तेमाल से बचा जा सकता था। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रारूप के प्रश्नों का मकसद छात्रों की अवधारणा को जानने का होता है। कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, आर्टस एंड साइंस के प्राचार्य डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने भी कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद है। BPSC द्वारा इस तरह का सवाल पूछा जाना उचित नहीं है।

सभी मर्द एक जैसे… जबरन ब्रम्हचर्य ले डूबता है? – कंगना के बहाने कहानी चर्च और हॉलीवुड की

“सभी मर्द एक जैसे होते हैं!” फिल्मों का ये जाना माना जुमला एक बार फिर याद आ गया जब कंगना रनौत विवादों में फिर से आईं। संभवतः ये जुमला 1921 में आई सॉमरसेट मॉम की कहानी “द रेन” से शुरू हुआ होगा। ये बड़ी रोचक सी कहानी है, जिसे हमने सॉमरसेट की दूसरी कई कहानियों की ही तरह सिर्फ एक बार ही पढ़ा, कभी दोबारा नहीं पढ़ा। अच्छी लघु-कथाओं या उपन्यासों के लक्षण जैसा इसमें भी चार-छह किरदार ही हैं। अक्सर आलोचक ऐसा मानते हैं कि ज्यादा किरदार हों तो पाठक की रूचि कहानी से हट जाती है।

कहानी एक जहाज से शुरू होती है जो किसी किनारे पर रुकती है और वहाँ मीज़ल्स (खसरा रोग) फैला होता है। जब तक ये पक्का पता नहीं चल जाता कि यात्रियों में से किसी को ये बीमारी नहीं लगी, तब तक जहाज को आगे जाने से रोक लिया जाता है। इस मज़बूरी में जहाज के चार यात्री- एक डॉक्टर, उसकी बीवी, एक मिशनरी और उसकी बीवी भी फँस जाते हैं। वो लोग एक होटल में कमरा लेते हैं। उसी होटल में जहाज की एक और यात्री मिस थॉम्पसन भी रुकी होती है। मिस थॉम्पसन के कमरे से अक्सर ग्रामोफ़ोन बजने और मर्दों की आवाजें आती रहती हैं।

बाकी यात्रियों को शक था कि मिस थॉम्पसन जिस्म-फरोशी के धंधे में हैं। मिशनरी उसे सुधार कर उसकी “आत्मा को सही रास्ते पर लाने” के लिए अड़ा होता है। इस दिशा में वो प्रयास भी शुरू कर देता है। डॉक्टर और उसकी पत्नी मानने लगते हैं कि मिशनरी धीरे-धीरे अपना जाल बुन रहा है और सही वक्त आते ही वो मिस थॉम्पसन को सही रास्ते पर ले आएगा। मिशनरी और मिस थॉम्पसन में नजदीकियाँ बढ़ने लगती हैं। मिस थॉम्पसन अब नित नए पुरुषों से भी कम मिलती हैं और शोर-शराबा भी घटने लगता है।

मिशनरी ने द्वीप के गवर्नर पर भी दबाव बनाया होता है, ताकि न सुधरने में मिस थॉम्पसन को वापस भेजा जा सके। इन सब के बीच द्वीप पर लगातार बारिश हो रही थी। कुछ दिन ऐसा ही चलता रहता है और एक दिन अचानक मिशनरी लापता हो जाता है। उसकी लाश समुद्र किनारे मिलती है। उसने अपना ही गला काट लिया था। आत्महत्या से व्यथित डॉक्टर कुछ समझ नहीं पाता और उलझन में होटल लौटता है। वहाँ पहुँचने पर जैसे ही उसकी आँखें खुलती हैं! मिस थॉम्पसन अब अपने पुराने रंगीले रूप में थी!

मिस थॉम्पसन अब अपने पुराने रूप में डॉक्टर और उसके दूसरे साथियों की खिल्ली उड़ाने वाली हँसी हँसती है और कहती है “तुम मर्द, सब बिलकुल सूअर हो, एकदम एक जैसे!”

कहानी यहीं, इसी वाक्य पर ख़त्म हो जाती है और पाठकों को सोचने के लिए छोड़ देती है। कैथोलिक पादरियों में अविवाहित रहने जैसी परम्परा चलती है। ईसाईयों के अन्य मत; जैसे प्रोटेस्टेंट या ऑर्थोडॉक्स इस सेलीबेसी (celibacy) जैसे सिद्धांत को नहीं मानते। भारतीय आध्यात्मिक धाराओं के हठयोग जैसी परम्पराओं में बहुत थोड़े से लोगों को इसकी अनुमति होती है। ये इतना मुश्किल सिद्धांत है, जिसे मानना आम लोगों के लिए लगभग नामुमकिन होता है। इसे जबरन लोगों पर थोपने के नतीजे बिलकुल वैसे ही होंगे जैसे चर्च के लिए हुए हैं।

जबरन ब्रम्हचर्य को धर्म और आध्यात्म से काटना कुछ-कुछ वैसा ही है जैसे योग को हिन्दुओं के धर्म से अलग कोई चीज़ घोषित करना। इसके पूरे-पूरे नतीजे नहीं निकल सकते। योग के आठ अंगों में से एक में ब्रम्हचर्य भी आ जाता है। सिर्फ आसन से जैसे कुछ शारीरिक लाभ होंगे भी तो उचित तरीके से करने पर ही होंगे, जैसे-तैसे करने पर नहीं, वैसे ही ब्रम्हचर्य में भी होगा। जबरन इसे किसी सामाजिक संस्था पर थोप देना, जिसका मुख्य उद्देश्य कुछ और है, वैसे ही हानिकारक परिणाम देगा, जैसे गलत तरीके से किए गए आसनों से होगा। जड़ों से कटकर कौन सा पेड़ उपजा है?

बाकी अगर बाल या यौन शोषण जैसे मामलों में चर्च जितने ही जुर्माने भरने का सामर्थ्य हो, या इच्छा हो तो जारी रखिए। भावनाओं का उद्वेग कौन से बाँध मानता है, ये किसने नहीं देखा?