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जुमे की नमाज के बाद दलित महिला से छेड़छाड़, पति को किया अधमरा

उत्तर प्रदेश के अमेठी में एक दलित महिला के साथ मारपीट और छेड़छाड़ की गई। समुदाय विशेष के व्यक्ति ने पीड़ित महिला के कार्यस्थल पर पहुँचकर उनका कुर्ता फाड़ने की कोशिश की, जब उनके पति ने उन्हें बचाना चाहा तो आरोपित व्यक्ति और उसके साथ के गुंडों ने मिलकर उसे जाति के आधार पर गाली देते हुए लोहे की रॉड से पीटा। इतना ही नहीं, जब पीड़ित व्यक्ति के भाई-बहन ने रोकने का प्रयास किया तो बदमाशों ने उन्हें भी मारा। जब पीड़ित महिला का पति बेहोश हो गया तो वे गुंडे वहाँ से भाग गए।

यह मामला 21 जून का है। इस पूरे घटना का वीडियो भी वायरल हुआ, पुलिस ने इसकी पुष्टि भी की लेकिन मीडिया गिरोह शांत बैठा रहा – कोई डिबेट नहीं, कोई आउटरेज़ नहीं! सरेआम, दिन-दहाड़े ऐसी घटना पर मीडिया की चुप्पी आश्चर्यजनक थी, इसलिए स्वराज्य मैगज़ीन की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद इस मामले में कई नए तथ्य सामने आए हैं। स्वाति गोयल की रिपोर्ट के मुताबिक इस दंपती की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि उन्होंने दलित होने के बावजूद मुस्लिम बहुल क्षेत्र ‘जैस (Jais)’ में कम्प्यूटर कोचिंग सेंटर खोला। यहाँ वे प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया योजना के तहत इच्छुक लोगों को एक महीने का फ्री कंप्यूटर कोर्स करवाते थे।

पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक 21 जून को शशांक पद्मभूषण सोनकर और उसकी पत्नी गायत्री अपने कोचिंग सेंटर में थे कि तभी दोपहर बाद 3:50 बजे मजरुल हसन नाम का शख्य वहाँ आया और गायत्री के साथ बद्तमीजी करने लगा। गायत्री ने शोर मचाया तो शशांक उसे बचाने वहाँ पहुँचा लेकिन हसन उसे “साले खटीक” कहते हुए सेंटर के बाहर खींच कर ले गया।

5 मिनट के भीतर उसके साथ शब्बू, फैजियाब और रेहान नाम के गुंडे जुड़ गए और सोनकार को लोहे की रॉड से तब तक मारा जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। इस दौरान इन्होंने शशांक के भाई-बहन (मयंक और सारिका) पर भी हमला किया।

पुलिस में दर्ज हुई एफआईआर में इन पर आईपीसी धारा-354, 323, 504, 506 के साथ-साथ एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है। लेकिन इस प्राथमिकी में कहीं भी पुलिस ने हमलावरों के उद्देश्य का उल्लेख नहीं किया है। जबकि सोनकर का कहना है कि उसने पुलिस को सब कुछ बताया था, फिर भी उन्होंने उसे एफआईआर में नहीं जोड़ा।

पीड़ित के मुताबिक इलाके में रहने वाले कुछ समुदाय विशेष वाले चाहते थे कि उनका कोचिंग सेंटर बंद हो जाए। स्वाति गोयल की रिपोर्ट के मुताबिक शशांक बताते हैं, “मजरूल और कुछ अन्य लोग मुझ पर लगातार सेंटर बंद करने का दबाव बना रहे थे। उन्हें जलन थी कि मेरे जैसा दलित कैसे सफलतापूर्वक एक कोचिंग सेंटर चला सकता है, जबकि उनके समुदाय के लोग ऐसा करने में विफल रहे।”

सोनकर के अनुसार उन्हें इस हमले का अंदाजा भी नहीं था। वे कहते हैं, “उस दिन शुक्रवार था। नमाज के बाद वो सीधे यहाँ आया, शायद उन्होंने पहले से इस बारे में प्लान बनाया हुआ था।” शशांक की पत्नी गायत्री ने स्वाति गोयल को बताया कि मजरूल ने गंदे ढंग से उन्हें छुआ और फिर उनका कुर्ता फाड़ दिया। छेड़छाड़ करते हुए मजरूल ने यह भी कहा कि वो उनका धर्मांतरण कर देगा।

इस घटना के समय वहाँ दुकान के मालिक आज़ाद महबूब (जिन्होंने सोनकर को सेंटर चलाने के लिए जगह किराए पर दी थी) और एक छात्रा खतीजा बानो मौजूद थे। महबूब बताते हैं कि जिस समय ये सब हुआ, उस वक्त वो अपनी दुकान में नीचे वाले फ्लोर पर बैठे थे, चूँकि सेंटर छत पर था इसलिए उन्हें नहीं मालूम ऊपर क्या हुआ, लेकिन उन्होंने सोनकर को बाहर खींचते हुए और बेहरमी से पीटते हुए दखा।

महबूब के मुताबिक उन्होंने हमलावरों को रोकने के लिए उनके बीच जाकर उनसे दो बार रॉड भी छीनी, लेकिन वो नहीं रुके। महबूब कहते हैं कि उन्हें अब तक नहीं पता चला कि उस दिन उन लोगों में क्या हुआ था।

महबूब बताते हैं कि मजरूल की खुद की बेटी भी सोनकर के सेंटर में पढ़ने आती थी। जिसके कारण मजरूल ने अपने अपराध को ढकने के लिए सोनकार पर आरोप लगाया कि शशांक ने उसकी बेटी का शोषण किया था, लेकिन जब लड़की से इस बारे में पूछा गया तो उसने इनकार कर दिया।

वहीं दूसरी चश्मदीद खातीजा के मुताबिक मजरूल की बेटी वहाँ पढ़ती जरूर थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वो ऐबसेंट चल रही थी। रिपोर्ट के मुताबकि खातीजा कहती हैं कि उसने मजरुल को सेंटर में घुसकर गायत्री के साथ बद्तमीजी करते देखा, लेकिन उसे याद नहीं कि उसने उन्हें जाति से संबंधी गाली दी या नहीं।

इस पूरे मामले पर इलाके के एसएचओ गजेंद्र सिंह ने स्वाति गोयल को बताया कि उन्होंने मजरूल और फैजियाब को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक हमले की वजह क्या थी इसका पता नहीं चल पाया है। आरोपितों ने मामले में आगे बोलने से मना कर दिया है, लेकिन जाँच जारी है।

गौतलब है कि इस मामले से संबंधी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। अमेठी की सांसद स्मृति इरानी ने भी इसे अपने सोशल मीडिया से शेयर किया है। इस मामले को अधिकार संस्थान ‘अग्निवीर’ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक लेकर पहुँचे हैं और आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस इस मामले को बहुत हल्के में ले रही है।

अग्निवीर के संस्थापक संजीव कुमार ने स्वाति गोयल को बताया कि दलित अत्याचार मामलों में बहुत वृद्धि हो रही है। उनके मुताबिक नमाज पढ़ने के बाद उन लोगों ने दलित महिला का शोषण किया और फिर मॉब लिंचर बन गए। उन्हें बिलकुल महसूस नहीं हुआ कि सोनकर अपने सेंटर के जरिए सिर्फ़ मुस्लिम युवक-युवतियों की मदद करने की कोशिश कर रहा था।

संजीव का कहना है कि पुलिस इस मामले को बहुत हल्के में ले रही है। उन्होंने अमेठी पुलिस को ट्वीट भी किया है और पूछा है कि मामले में इतनी कमजोर धाराओं को क्यों लगाया गया है? आखिर क्यों हत्या का मामला दर्ज नहीं किया गया है?

बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की प्रतिक्रिया आनी अभी बाकी है।

डॉक्टर से रंगदारी और मारी गोली… क्योंकि अम्मी के कैंसर का ठीक इलाज नहीं किया: सरफ़राज़, शाहिद गिरफ़्तार

झारखंड के जमशेदपुर में एमजीएम अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एसके कुंडू से रंगदारी माँगने और फिर उन पर फायरिंग करने वाले दो आरोपितों के पुलिस ने अपनी गिरफ़्त में ले लिया है। दोनों में से एक की पहचान सरफ़राज़ आलम उर्फ़ छोटू (22 वर्ष) और दूसरे की पहचान शाहिद ख़ान उर्फ़ शहज़ादा (19 वर्ष) के रूप में हुई है। आरोपितों ने बैलून फोड़ने वाले एयरगन और पिस्टल लाइटर से डॉक्टर पर एपेक्स अस्पताल के सामने फायरिंग की थी। पुलिस ने उनके पास से इन हथियारों को भी बरामद किया है। साथ ही उस बाइक को भी हिरासत में ले लिया है जिसका इस्तेमाल आरोपितों ने फायरिंग के लिए किया था।

एसएसपी अनूप बिरथरे ने रविवार (14 जुलाई 2019) को अपने कार्यालय के सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि सरफ़राज़ आज़ादनगर हुसैनी मोहल्ला क्रॉस रोड नम्बर-19, और शाहिद ख़ान कपाली, बंधुगोड़ा स्कूल के पास का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि दोनों बदमाशों ने पहले तो ₹5 लाख की रंगदारी माँगी उसके बाद रक़म दोगुनी करते हुए ₹10 लाख कर दी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट के अलावा अन्य पुलिस अधिकारी भी शामिल थे।

दरअसल डॉ. कुंडू सरफ़राज़ की माँ के कैंसर का इलाज लंबे समय से कर रहे थे। माँ के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने से सरफ़राज़ खिन्न था। इसके बाद वो अपनी माँ को मुंबई ले गया जहाँ उसे पता चला कि उसकी माँ को ग़लत कीमो दिया गया था। इसके कुछ रोज बाद उसकी माँ का देहांंत हो गया। इलाज में काफ़ी रुपया खर्च हो गया था जिससे सरफ़राज़ तंगी के दौर से गुज़र रहा था। डॉ. से बदला लेने की उसकी इच्छा दिन-प्रतिदिन परवान चढ़ती जा रही थी। इसके बाद उसने शाहिद के साथ मिलकर रंगदारी और फायरिंग की योजना बनाकर उसे अंजाम दिया।

वहीं, आइएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) महासचिव का कहना है कि सरफ़राज़ झूठ बोल रहा है क्योंकि उसकी माँ के कैंसर का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ था, इसलिए इलाज में कोई खर्चा नहीं आया था। 

सरफ़राज को डॉ. कुंडू की पूरी दिनचर्या अच्छी तरह से पता थी। एसएसपी ने जानकारी दी कि सरफ़राज़ डॉक्टर से रंगदारी माँगने के लिए जिस फोन का इस्तेमाल करता था वो उसने किसी राह चलते व्यक्ति से छीना था। वो इसी फोन से सिर्फ़ डॉक्टर से बात करता था। 7 जुलाई 2019 की रात 7.30 बजे डॉ. एस के कुंडू को फोन कर सरफ़राज़ और शाहिद ने पाँच लाख रुपए की रंगदारी माँगी, इसके बाद रक़म बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दी। 10 जुलाई को एपेक्स अस्पलात के नज़दीक दोपहर 3:15 बजे उन पर नकली हथियार से फायरिंग कर दी।

दलित की दाढ़ी से तौलिए गंदे होंगे, फिर दूसरे मजहब वाले कैसे बाल बनवाएँगे: रियाज़, इशाक़, जाहिद के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के पीपलसना गाँव में समुदाय विशेष नाइयों द्वारा दलितों के बाल-दाढ़ी बनाने से इनकार करने की ख़बर शनिवार (13 जुलाई 2019) को सामने आई थी। इस मामले में ताज़ा समाचार यह है कि तीन नाइयों जिनमें रियाज़ आलम, इशाक़ और जाहिद शामिल हैं, उनके ख़िलाफ़ रविवार (14 जुलाई 2019) को FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

ख़बर के अनुसार, यह कार्रवाई 45 वर्षीय महेश चंद्र की दर्ज कराई शिक़ायत के आधार पर हुई है क्योंकि वो जातिगत भेदभाव को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “यह कई वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब हमने अपनी आवाज़ उठाने का फैसला किया है।”

दरअसल, समुदाय विशेष के नाइयों ने दलितों के बाल-दाढ़ी बनाने को लेकर यहाँ तक कह दिया था कि दलितों के बाल-दाढ़ी नहीं बनाने का सिलसिला काफ़ी पुराना है और यह आगे भी जारी रहेगा। इसके अलावा इन नाइयों ने न केवल खुद दलितों की बाल-दाढ़ी बनाने से मना किया बल्कि जो उनके बाल-दाढ़ी बनाते हैं उनकी भी दुकान बंद करवा देते हैं। इससे तंग आकर गाँव के दलितों ने भोजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जॉंच के लिए टीम का गठन किया गया। पुलिस का कहना था कि आरोप सही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

गाँव के दलित समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह भेदभाव वे अरसे से झेलते आ रहे हैं। लेकिन, चाहते हैं कि उनकी नई पीढ़ी को इससे आजादी मिले। इसलिए जाति के आधार पर भेदभाव अब खत्म होना चाहिए।

पीड़ितों का आरोप है कि यहाँ लोग पढ़-लिख ज़रूर गए हैं, लेकिन अपनी पुरानी सोच बदलने को तैयार नहीं हैं। 

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक गाँव के कल्लन ने बताया कि वे लोग दलितों से नफ़रत करते हैं इसलिए अपनी दुकानें बंद कर रखी हैं। वे उन लोगों के बाल नहीं काटते। जिसके कारण उनके घर कोई रिश्तेदारी नहीं करता, कोई लड़की नहीं देता और बेतरतीब बाल-दाढ़ी के कारण उनसे घृणा करते हैं।

आरोपित नाइयों के अनुसार पहले गाँव के दलित बाहर से बाल कटा के आ जाया करते थे, लेकिन अब वे यहाँ बाल कटाने पर अमादा हैं। एक ग्रामीण के मुताबिक नाई समाज का ये मानना है कि अगर वे दलितों के बाल काटेंगे तो उनके यहाँ समुदाय विशेष के लोग बाल नहीं कटवाएँगे और अगर वे दलितों के बाल नहीं काटते तो वे प्रशासन से उनकी शिकायत कर देंगे।

इस मामले में स्थानीय निवासी नौशाद ने इंडिया टुडे को बताया कि दलित पहले कभी भी गाँव में नाई की दुकान पर नहीं जाते थे। वे बाल कटाने और दाढ़ी बनवाने के लिए भोजपुर जाया करते थे।

नौशाद के मुताबिक़ जब पुलिस ने नाइयों को हिरासत में लिया उस समय उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि गाँव के दलितों ने उनके ख़िलाफ़ शिकायत की है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने 45 साल की उम्र में किसी दलित को गाँव की दुकानों पर बाल कटाते नहीं देखा। उनका कहना है, अगर दलित गाँव की इन दुकानों पर आकर बाल कटाएँगे और दाढ़ी बनवाएँगे तो तौलिए गंदे हो जाएँगे , फिर बाद में उनके मजहब वाले कैसे अपने बाल बनवाएँगे ?

अली अहमद का कहना है कि इस गाँव में 95 प्रतिशतदूसरे समुदाय के हैं। आज दलित नाई की दुकान में जाने की माँग कर रहे हैं, कल को शादी-घर बुक करने की माँग करेंगे। ये लोग यहाँ अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। यहाँ दशकों से शांति बनी हुई थी। इस मामले को गलत मक़सद से हवा दी जा रही है।

कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं से हमें खतरा: मल्लिकार्जुन खड़गे और गुलाब नबी आजाद का नाम ले पुलिस से माँगी सुरक्षा

कर्नाटक की राजनीति में बीते दिनों बहुत उठा-पटक देखने को मिला। यह अभी भी जारी है। राज्य के बागी विधायक कॉन्ग्रेस नेताओं के ख़िलाफ़ एक बार फिर से कोर्ट की ओर रुख कर सकते हैं। बागी विधायकों का कहना है कि कॉन्ग्रेस नेता उन्हें कई तरह से प्रभावित करने और डराने की कोशिश कर रहे हैं। इस कारण से उन्होंने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर अपने लिए सुरक्षा की भी माँग की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे किसी भी कॉन्ग्रेस नेता से नहीं मिलना चाहते हैं क्योंकि उनसे उन्हें (विधायकों को) खतरा है। उल्लेखनीय है कि बागी विधायक इससे पहले भी मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर सुरक्षा की माँग कर चुके हैं।

इन नेताओं ने कॉन्ग्रेस के महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे और कॉन्ग्रेस नेता गुलाब नबी आजाद का नाम देते हुए पुलिस को पत्र लिखा है। पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में बीसी पाटिल, महेश के, विश्वनाथ, नारायण गौड़ा, एच नागेश, आर शंकर, गोपालैया, रमेश जे, एमटीबी नागराज, बासवराज, सोमेश्वर और शिवराम हेब्बर का नाम शामिल है। इन विधायकों ने पत्र में साफ़ किया है कि उनका गुलाम नबी आजाद या महाराष्ट्र या फिर कर्नाटक के किसी भी कॉन्ग्रेस नेता से मिलने का कोई इरादा नहीं हैं।

खबरों के मुताबिक एक ओर जहाँ ये विधायक किसी भी कॉन्ग्रेस नेता से नहीं मिलना चाहते हैं वहीं आज (जुलाई 15, 2019) मल्लिकार्जुन खड़गे और कर्नाटक के डेप्युटी सीएम जी परमेश्वर मुंबई पहुँचकर इन बागी विधायकों से मिलने का प्रयास कर सकते हैं। उनकी कोशिश इन विधायकों को मनाकर राज्य की सरकार को बचाने की होगी। बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस के डीके शिवकुमार भी इन विधायकों को मनाने के लिए मुंबई गए थे लेकिन विधायकों ने उनसे मिलने से ही इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस अपने बागी विधायकों को मनाने में नाकाम होती दिख रही हैं, वहीं भाजपा इस राजनीतिक उठा-पटक पर नजर बनाए हुए है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने रविवार (जुलाई 14, 2019) को राज्य की स्थिति के मद्देनजर बयान दिया, “मैं मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से तुरंत इस्तीफा देने का अनुरोध करूँगा क्योंकि जेडीएस और कॉन्ग्रेस के 15 से अधिक विधायक और दो निर्दलीय मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह जाहिर किया है कि वे भाजपा का समर्थन करेंगे। मैं बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक में कुमारस्वामी को सलाह दूँगा कि वे विश्वास प्रस्ताव साबित करें या इस्तीफा दे दें।”

गोवंशों की मौत पर भड़के CM योगी, 8 अफसर सस्पेंड: निराश्रित गोवंश को पालने पर मिलेंगे ₹900/माह

उत्तर प्रदेश के अयोध्या और मिर्जापुर में गोवंशों की लगातार होती मौत से नाराज़ होकर योगी आदित्यनाथ ने 8 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन अधिकारियों में मिर्जापुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अयोध्या के बीडीओ का नाम भी शामिल है। इसके अलावा योगी सरकार ने प्रयागराज व मिर्जापुर के कमिश्ननर से इस मामले की जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दे दिए हैं।

गौवंशों की बड़ी संख्या में होती मौत को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर अधिकारियों की लापरवाही से गायों की मौत हुई है तो दोषियों के ख़िलाफ़ गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई भी होगी। 

मुख्यमंत्री ने इस मामले को संजीदगी से लेते हुए सभी जिलों के डीएम से रविवार (जुलाई 14, 2019) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने इस दौरान अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार सीएम योगी ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए मिल्कीपुर के बीडीओ, मिल्कीपुर के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पलियामाफी के ग्राम पंचायत अधिकारी, अयोध्या नगर निगम के कांजी हाउस प्रभारी डॉ. उपेंद्र कुमार और डॉ विजेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया।

इधर, इस मामले के मद्देनजर मिर्जापुर में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ एके सिंह, नगर पालिका के प्रभारी अधिशासी अधिकारी मुकेश कुमार और नगर अभियंता रामजी उपाध्याय को भी निलंबित कर दिया गया है।

साथ ही लखनऊ में विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश आवास विकास और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अर्जुनगंज, शहीद पथ और शहर के अन्य हिस्सों में निराश्रित गोवंशों को कान्हा उपवन में रखने की व्यवस्था कराएँ।

कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोवंश के आश्रय स्थल के संचालन, निरीक्षण व भरण पोषण की जिम्मेदारी डीएम व सीवीओ की होगी। उन्होंने सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया कि वे गौशालाओं का निरीक्षण कर उनकी व्यवस्था को दुरुस्त करें। इसके अलावा जो गौ पालक दूध निकाल कर पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं, उनके ख़िलाफ़ भी जुर्माने और दंड की सख्त कार्रवाई हो और निराश्रित गोवंश रखने वालों को 900 रुपए प्रतिमाह दिए जाएँ।

गौरतलब है कि बीते दिनों प्रदेश के कई इलाकों जैसे बाराबंकी, रायबरेली, हरदोई, जौनपुर, आजमगढ़, सुलतानपुर, सीतापुर, बलरामपुर और प्रयागराज में गौशालाओं में बदइंतजामी के चलते गायों की मौतें हो गई थीं। जिससे नाराज़ होकर सीएम योगी ने अपना यह फैसला लिया है।

14 और 15 साल के दो बच्चों के नाखून उखाड़े, ब्लेड से चीरकर रगड़ा नमक: MP में दहशत में पूरा परिवार

मध्य प्रदेश के सतना ज़िले से 14 और 15 साल के दो बच्चों को दर्दनाक सज़ा देने की ख़बर सामने आई है। साइकिल चोरी का आरोप लगाकर उन्हें बेरहमी से न सिर्फ़ पीटा गया बल्कि उन्हें बंधक बनाकर उनके साथ जानवरों से भी बदतर बर्ताव किया। मामला चित्रकूट के सिकरौं गाँव का है। दो नाबालिग लड़कों को कुछ दबंगों ने बंधक बनाया और फिर उनके नाखून उखाड़ लिए। इतने पर भी जब दबंगों के कलेजे को ठंडक नहीं मिली तो उन्होंने मासूमों के शरीर पर जगह-जगह ब्लेड मारकर उन्हें लहूलुहान कर दिया, और फिर उन्हीं ज़ख़्मों पर नमक लगा दिया।

ख़बर के अनुसार, सिकरौं गाँव के निवासी राजेंद्र निषाद ने बताया कि ब्रजेश का 14 वर्षीय बेटा अपनी बड़ी माँ के साथ जामुन के बगीचे में पहुँचा ही था कि गाँव के दबंगों ने वहाँ अचानक लाठी-डंडों के साथ धावा बोल दिया। गाँव के इन दबंगों में प्रद्युम्न पांडेय, रज्जू, मनोज, विनीत और मुन्ना के नाम शामिल हैं। इन सभी ने उस बच्चे की बड़ी के माँ सामने ही उन्हें ज़बरदस्ती अपने घर उठा ले गए।

वहीं, बच्चे के पिता ने इस बात की जानकारी दी कि गाँव के दबंग केवल उनके बेटे को ही नहीं बल्कि उनके 15 वर्षीय भतीजे को भी साथ ले गए। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बच्चों को बंधक बनाकर न सिर्फ़ बेरहमी से उन्हें पीटा बल्कि गाँव के नाले के पास ले जाकर अपने वहशीपन की हद पार करते हुए उन्होंने मासूमों के हाथों की उंगलियों के नाखून तक उखाड़ डाले और ब्लेड से चीरा लगाकर उसमें नमक भर दिया।

बच्चों के साथ ऐसी दरिंदगी से पूरा परिवार दहशत के साये में हैं। मऊ पुलिस के अनुसार, आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है। एसपी मनोज कुमार झा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। फ़िलहाल, आरोपित प्रद्युम्न को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

करतारपुर कॉरिडोर: 5000 लोगों को प्रतिदिन दर्शन करने की माँग पर पाकिस्तान सहमत

भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर को लेकर एक बार फिर अहम बैठक हुई। इस बैठक में कई मुद्दों पर गहनता से विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से रोजाना 5,000 श्रद्धालुओं को गुरुद्वारे में दर्शन करने की अनुमति देने की माँग की। वहीं, पाकिस्तान से अनुरोध किया गया है कि 10,000 अतिरिक्त तीर्थयात्रियों को विशेष अवसरों पर जाने की अनुमति दी जाए। 

ख़बर के अनुसार, भारत की यह माँग पूरी करते हुए प्रतिदिन 5000 तीर्थयात्रियों को वीज़ा-मुक्त करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने की अनुमति पाकिस्तान ने दे दी है। एक बयान में कहा गया कि तीर्थयात्रियों को व्यक्तिगत या समूह के रूप में या फिर पैदल यात्रा करने की भी अनुमति दी जाएगी।

इसके अलावा भारत की ओर से बनाए जा रहे पुल का विवरण साझा किया गया और पाकिस्तान से उनकी तरफ़ से पुल बनाने का आग्रह किया गया है। इससे बाढ़ संबंधी समस्याएँ दूर होंगी और तीर्थ यात्रा सकुशल पूरा होगा। पाकिस्तान इस पुल निर्माण के लिए सहमत है।

इसके अलावा भारत ने यह अनुरोध भी किया कि केवल भारतीय नागरिकों को ही नहीं, बल्कि OCI कार्ड रखने वाले भारतीय मूल (PIO) के व्यक्तियों को भी करतारपुर सुविधा का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए।  

करतारपुर कॉरिडोर खोले जाने की तारीख़ निर्धारित है। भारत ने नवंबर 2019 में गुरूनानक देव जी की 550वीं जयंती के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए गलियारे को चालू करने की पेशकश की थी।

इस बैठक से पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता और 13 सदस्यीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के नेता मोहम्मद फैसल ने कहा, “हमें मामलों पर उपयोगी वार्ता होने और समाधान मिलने की उम्मीद है। गलियारे का 70% काम पूरा हो गया है।”

आख़िर क्यों ख़ास है करतारपुर कॉरिडोर

दरअसल, यह गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर साहिब को गुरदासपुर ज़िले के डेरा बाबा नानक मंदिर से जोड़ेगा और भारत के सिख तीर्थयात्रियों को वीज़ा-मुक्त आने-जाने की सुविधा भी देगा। इस कॉरिडोर को लेकर पहले दौर की वार्ता 14 मार्च 2019 को अटारी-वाघा बॉर्डर के भारतीय हिस्से अटारी में हुई थी। इस वार्ता में दोनों देशों के मध्य ड्राफ़्ट समझौते को अंतिम रूप देने के मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा सत्ता पर काबिज़ होने के बाद दूसरे दौर की वार्ता की घोषणा की गई थी।

बता दें कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा) एससीएल दास, विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (PAI-पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और ईरान) दीपक मित्तल कर रहे थे। वहीं, इस बैठक में पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फैसल की अध्यक्षता में 20 पाकिस्तानी अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल शामिल था।

गाने को लेकर हुआ झगड़ा: SFI सदस्य ने SFI सदस्य को मारा चाकू, मुख्य आरोपित नसीम फरार

तिरुवनंतपुरम में SFI की कॉलेज इकाई के सदस्यों ने कथित तौर पर एक छात्र को सीने में चाकू मार दिया। शनिवार (14 जुलाई, 2019) सुबह की इस घटना के बाद से आरोपित छात्र पुलिस की गिरफ़्त से फ़रार है। पीड़ित अखिल तृतीय वर्ष का बीए (राजनीति) का छात्र है और बताया जा रहा है कि मामला मामूली झगड़े से शुरू हुआ था। अखिल को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

गाने को लेकर हुआ झगड़ा?

ऐसी जानकारी आ रही है कि घायल अखिल समेत मामले के सभी पक्ष SFI से ही ताल्लुक रखते हैं। जानकारी के अनुसार अखिल और उसके मित्र कॉलेज कैंटीन में गाते-बजाते थे, जो कैंटीन के बगल में ही स्थित SFI की स्थानीय इकाई के कमरे में रहने वाली एक महिला SFI सदस्या को पसंद नहीं आया। उसने SFI की स्थानीय इकाई में गाना बंद कराने की शिकायत कर दी और इसके चलते अखिल की SFI के बाकी सदस्यों से जुबानी जंग कई दिन तक चली। इसके बाद 10 जुलाई को एक छोटी-मोटी हाथापाई हुई लेकिन शुक्रवार को समझौते के लिए बैठक बुलाई गई थी

लेकिन सुलह के बुलाई गई इस बैठक में मामला हाथ से निकलता गया और देखते-ही-देखते अखिल के एक दोस्त पर हमला हो गया। इसके बाद बाहर से भी एक बड़ा गुट अंदर आया और अखिल के ग्रुप धावा बोल दिया। इस हाथापाई में अखिल को चाकू मार दिया गया।

‘हम फिर भी समर्थक लेकिन फ़ासिस्ट SFI’

इस घटना की जानकारी फैलते ही छात्रों का एक बड़ा समूह SFI के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने लगा। प्रदर्शन करने वालों में SFI के भी सदस्य थे। उनका कहना था कि कॉलेज में SFI के 13 यूनिट सदस्यों का व्यवहार फासिस्टों जैसा ही है, हालाँकि वे SFI समर्थक हैं। छात्रों को कॉलेज में अपनी मर्ज़ी से कहीं भी आने-जाने की अनुमति नहीं है और कहीं भी वे पेड़ों के आस-पास बैठें या गाना गाएँ तो उन्हें मार-पीटकर भगा दिया जाता है।

नसीम SFI रूम का करता है पुलिस से छिपने के लिए इस्तेमाल’

इस बीच यूनिवर्सिटी कॉलेज की पूर्व छात्रा निखिला ने अखिल के मामले के मुख्य आरोपी नसीम समेत SFI से जुड़े कई मुद्दों पर मीडिया से बात की। उनके मुताबिक उन्हें SFI सदस्यों के हाथों शोषण का शिकार होना पड़ा, जिससे उन्होंने आत्महत्या का भी प्रयास किया था। अंत में उन्हें कॉलेज छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा। नसीम के बारे में निखिला ने बताया कि नसीम ने कॉलेज के SFI यूनियन रूम का इस्तेमाल पिछले साल पुलिस से बचने के लिए किया था जब दिसम्बर-जनवरी में दो ट्रैफिक पुलिसवालों के साथ मार-पीट के मामले में पुलिस उसको तलाश रही थी

Exclusive: इमाम से नहीं बुलवाया गया ‘जय श्री राम’, न नोची गई दाढ़ी: SP ने मीडिया रिपोर्ट्स का किया खंडन

पीटीआई के हवाले से आज कई मीडिया संस्थानों ने ख़बर चलाई कि इमाम इमलाकुर रहमान नामक व्यक्ति को प्रताड़ित किया गया और उसे ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर किया गया। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि आरोपितों ने उसकी दाढ़ी खींची और इस मामले में कुल 12 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। अब पता चला है कि यह भी एक फेक ‘हेट क्राइम’ था क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। बागपत के एसपी ने ऐसी किसी भी रिपोर्ट को ग़लत ठहराया है और साफ़-साफ़ कहा है कि इमलाकुर रहमान को किसी ने भी ‘जय श्री राम’ बोलने को बाध्य नहीं किया।

एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इमलाकुर रहमान को जबरन ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर नहीं किया गया, उसकी दाढ़ी नहीं खींची गई और उसके साथ हुए दुर्व्यवहार में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। यह कुछ लोगों और इमाम के बीच हुआ एक वाद-विवाद था, इसमें मज़हब के आधार पर ‘हेट क्राइम’ जैसा कुछ भी नहीं था।

इमाम और सभी आरोपित मुज़फ्फरनगर के हैं। एसपी पांडेय ने बताया कि इस झगड़े के बाद इमाम अपने सहयोगियों के साथ मुजफ्फरनगर थाना पहुँचे और शिकायत दर्ज कराई। उस दौरान इमाम ने जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने या फिर दाढ़ी खींचे जाने का कोई जिक्र नहीं किया। इमाम को बताया गया कि जहाँ घटना हुई, वह क्षेत्र बागपत पुलिस के अंतर्गत आता है। जब वह बागपत थाना पहुँचा, तब उसने अपनी शिकायत में ‘जय श्री राम’ वाली बात जोड़ी।

एसपी पांडेय ने मुज़फ्फरनगर पुलिस से बात की तो उन्हें पता चला कि शुरुआती एफआईआर में कहीं भी जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने का जिक्र नहीं किया गया था। जब इमाम ने मुज़फ्फरनगर पुलिस स्टेशन में अपनी आपबीती सुनाई, तब उसके पूरे बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई थी। एसपी पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया कि उक्त वीडियो फुटेज देखने के बाद यह साफ़ हो गया कि उसने अपनी शिकायत में जबरन ‘जय श्री राम’ बोलने को मजबूर करने वाली बात नहीं कही थी। अर्थात, इसे बाद में मैनुफैक्चर किया गया।

जब बागपत एसपी से यह पूछा गया कि आखिर इमाम ने बाद में अपनी शिकायत में ‘जय श्री राम’ वाली बात क्यों जोड़ी, तो उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों के प्रभाव में आने के बाद उसने ऐसा किया। एसपी ने अंदेशा जताया कि उसके मित्रों ने उसे सलाह दी होगी कि जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवाने वाली बात शिकायत में जोड़ देने के बाद मीडिया इस घटना को ज्यादा महत्त्व देगा और इसे फैलाया जाएगा। इसे सांप्रदायिक एंगल देने से ज्यादा गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी, ऐसा उसका सोचना था।

एसपी ने ऑपइंडिया को बताया कि अभी शहर में माहौल पूरी तरह शांत है और पुलिस इस झगड़े की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। एसपी ने बताया कि अभी तक किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं किया गया है। उसका बयान उन मीडिया रिपोर्ट्स के उलट था, जिसमें 12 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज होने की बात कही जा रही थी।

मेरे भाई को थाने में मार डाला, बीवी का गैंगरेप किया, नाखून उखाड़ दिए: राजस्थान पुलिस पर गंभीर आरोप

राजस्थान के चुरु जिले में दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया है। परिजनों ने दोनों ही मामले में सीबीआई से जाँच करवाने की माँग की है। पीड़िता एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।

परिवारवालों का कहना है कि पुलिस ने महिला के साथ गैंगरेप किया और चोरी के एक मामले में अवैध रूप से तकरीबन 8 दिनों तक उसे हिरासत में रखा। इसके साथ ही पीड़िता ने ये भी आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने जबरन कुछ कागजातों पर अँगूठा लगवाया, इसके अलावा बलात्कार और देवर की हत्या वाली बात किसी को नहीं बताने की धमकी भी दी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 6 जुलाई को महिला के देवर को गिरफ्तार किया गया और उसी रात उसकी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले की न्यायिक जाँच की जा रही है। महिला के पति ने शनिवार (13 जुलाई, 2019) को जयपुर में पत्रकारों को बताया,

“30 जून को चोरी के एक केस में पुलिस मेरे 22 वर्षीय भाई को पकड़ कर ले गई। 3 जुलाई को पुलिस उसे वापस घर ले आई मगर उसी दिन फिर से उठाकर ले गई। पुलिस मेरी पत्नी को भी साथ ले गए। बाद में 6-7 जुलाई की रात पुलिस ने मेरे भाई पर खूब अत्याचार किए और उसकी हत्या कर दी। मेरी पत्नी जो इस अत्याचार की गवाह थी, उसके साथ पुलिस ने गैंगरेप किया। उन्होंने उसके नाखून उखाड़ दिए। उसकी आँखों और उंगलियों को चोट पहुँचाई।”

महिला के पति ने यह भी बताया कि उसके भाई की हत्या के बाद भी पुलिस ने जबरन उसकी पत्नी को 10 जुलाई तक पुलिस हिरासत मे रखा।

महिला के परिवार द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद कार्मिक विभाग ने शुक्रवार देर रात एक आदेश जारी किया। जिसके बाद चुरु के एसपी राजेंद्र कुमार शर्मा को हटा दिया गया। इसके अलावा संबंधित पुलिस सर्कल के अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया। इससे पहले दलित की पुलिस हिरासत में मौत के बाद एसपी ने उस पुलिस स्टेशन के एसएचओ, एक हेड कांस्टेबल और 6 कांस्टेबल को निलंबित कर दिया था।

पीड़ित महिला के एक अन्य देवर ने बताया कि 6 जुलाई को जब पुलिस उसके भाई को गाँव से ले जा रही थी, तब उसने कहा था कि वो आखिरी बार अपने परिवार को देख रहा था और 8 दिन तक हिरासत में रहने के बाद जब उसकी भाभी घर वापस आई, तो उनकी हालत बेहद खराब थी। जिसके बाद 11 जुलाई को महिला को जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उसके परिवार ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में कार्रवाई की माँग की।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध), बीएल सोनी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि पीड़ित महिला का बयान दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने दावों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जाँच क्राइम ब्राँच को सौंप दी है।” इस मामले में जहाँ एक ओर महिला के परिवार वाले दावा कर रहे हैं कि पुलिस हिरासत में मरने वाले व्यक्ति को 30 जून को गिरफ्तार किया गया था, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि उसे 3 जुलाई को हिरासत में लिया गया था, फिर छोड़ दिया गया। इसके बाद उसे दोबारा 6 जुलाई को गिरफ्तार किया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार शर्मा ने बताया,

“3 जुलाई को पुलिस के पास सूचना आई की गाँव में एक संदिग्ध चोर को पकड़ा गया है। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुँची तो देखा कि गाँव वालों ने चोर की बुरी तरह पिटाई की थी। फिर उसे पुलिस थाने लाया गया, जहाँ पता चला कि पिछले साल चोरी के एक मामले में की गई एफआईआर में उसका नाम शामिल था। हालाँकि इस मामले में कोई चार्जशीट फाइल नहीं की गई थी।”

प्रकाश कुमार शर्मा ने कहा कि स्थानीय पुलिस के मुताबिक उसे 6 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। थाने के पुलिसकर्मियों ने बताया कि रात को तकरीबन 1:45 बजे उस युवक की तबियत बिगड़ी थी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ रात को 2:15 बजे उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत हृदय गति रुक जाने से हुई थी। हालाँकि, व्यक्ति की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की न्यायिक जाँच की जा रही है।