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फर्जी डिग्री मामला: ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक अदालत में तलब

फर्जी डिग्री मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को समन भेजा है। अदालत ने उन्हें 25 जुलाई को पेश होने को कहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वकील सार्थक चतुर्वेदी ने दायर कर रखा है।

अपनी याचिका में चतुर्वेदी ने कहा है कि अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के नामांकन-पत्र में अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारी दी है। सार्थक के मुताबिक अभिषेक ने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल नामांकन-पत्र में एमबीए की डिग्री जिस यूनिवर्सिटी से लेने की जानकारी दी है, उसे मान्यता प्राप्त नहीं है।

अभिषेक ने 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल एफिडिवेट में बताया है कि उन्होंने एमबीए की डिग्री इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग ऐंड मैनेजमेंट (IIPM) से 2009 में हासिल की थी। सार्थक का आरोप है कि यह डिग्री फर्जी है। इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए विशेष अदालत ने अभिषेक बनर्जी को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। अभिषेक पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर सीट से सांसद हैं।

119410 अफसरों की जाँची गई फाइल: 312 भ्रष्ट अधिकारियों के जबरन रिटायरमेंट के पीछे की कहानी

मोदी सरकार द्वारा केंद्र सरकार के 312 कर्मचारियों को लापरवाही बरतने के चलते नौकरी से हटा देने की ख़बर सामने आई है। सरकार ने इन अधिकारियों को जबरन रिटायर किया है। नौकरी से हटाए गए इन अधिकारियों में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारियों में ज्वॉइंट सेक्ट्रेरी रैंक के अधिकारियों को हटाया गया है। अलग-अलग स्तर की बात करें तो सरकार ने ग्रुप-ए के 125 और ग्रुप-बी के 187 अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट दिया है।

दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस बात की जानकारी डीएमके के सांसद ए राजा के सवाल पर दी। ए राजा ने लोकसभा में सवाल पूछा था कि सरकार ने कितने अधिकारियों को जबरन रिटायर किया और इनके ख़िलाफ़ किस आधार पर एक्शन लिया गया? इसी सवाल के जवाब में जितेंद्र सिंह ने बताया कि लागू अनुशासनात्मक नियमों के अंतर्गत सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई का अधिकार है।

सरकार को पूरा अधिकार है कि वह सार्वजनिक हित को देखते हुए सत्यनिष्ठा की कमी और लापरवाही दिखाने वाले अफसरों पर मौलिक नियमों के प्रावधान (एफआर) 56 (j) (i), केंद्रीय सिविल सर्विस के नियम 48, पेंशन नियम 1972 और सिविल सेवा नियम 16 (3) (संशोधित) के तहत कार्रवाई कर सकती है।

अपने जवाब में केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि जुलाई 2014 से मई 2019 की अवधि में ग्रुप-ए के 36,756 और ग्रुप-बी के 82,654 अधिकारियों की समीक्षा की गई थी। इसके बाद समीक्षा के दौरान दोनों ग्रुप के 312 अधिकारी भ्रष्ट पाए गए। उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद कई अधिकारियों के ख़िलाफ़ एक्शन लिया गया है। कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट पर जाने के लिए कहा गया है।

जबरन रिटायरमेंट दिए जाने वाले अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अक्षमता के आरोप के अलावा कुछ पर यौन उत्पीड़न का भी आरोप है।

गिरिराज के बयान पर आज़म ख़ान का तंज: 2 से अधिक बच्चे पैदा करने पर फाँसी दो

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दो से अधिक बच्चे होने पर माता-पिता का वोटिंग अधिकार ख़त्म करने की वकालत की है। गिरिराज सिंह ने कहा कि चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम, अगर 2 से अधिक बच्चे पैदा करता है तो उसे मताधिकार से वंचित कर देना चाहिए। गिरिराज सिंह ने ये बातें जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कही। वहीं, सपा सांसद आज़म ख़ान ने गिरिराज के इस बयान पर तंज कसते हुए कहा है कि दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर फाँसी ही दे देनी चाहिए। बिहार में भाजपा व जदयू ने गिरिराज के इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण क़ानून देश के हित में है।

वहीं, राजद विधायक भोला यादव ने कहा कि गिरिराज का बयान उनकी ओछी मानसिकता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि गिरिराज सिंह को केंद्र में मंत्री नहीं होना चाहिए। कॉन्ग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्र ने कहा, “गिरिराज सिंह अनाप-शनाप बयान देते रहते हैं। यह मानवाधिकार हनन की बात है। हम किसी के बच्चे कैसे नियंत्रित कर सकते हैं?” विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर गिरिराज सिंह ने कहा:

“बढ़ती जनसंख्या भारत के लिए बड़ी समस्या है और इससे संसाधन और सामाजिक समरसता को ख़तरा पैदा हो गया है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए सख़्त कानून की ज़रूरत है। इसके लिए सड़क से संसद तक प्रयास जरूरी हैं। देश में हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए दो बच्चों का नियम होना चाहिए। वोट के ठेकेदारों ने जनसंख्या को धर्म से जोड़ दिया है।”

केंद्रीय मंत्री ने कई इस्लामी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी जनसंख्या नियंत्रण क़ानून बना है, लेकिन भारत में उसका विरोध किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जहाँ-जहाँ हिन्दुओं की जनसंख्या गिरती है, वहाँ-वहाँ सामाजिक समरसता को ख़तरा पैदा हो जाता है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी का नाम लेते हुए कहा कि उनके जैसे लोग सामाजिक समरसता में सबसे बड़े बाधक हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत 1947 की तरह सांस्कृतिक विभाजन की ओर आगे बढ़ रहा है।

GTA-5 गेम Video को हकीकत मान बैठे PAK सांसद, सोशल मीडिया पर उड़ी खिल्ली

पाकिस्तान की सत्ताधारी दल के वरिष्ठ सांसद खुर्रम नवाज़ ने सोशल मीडिया पर एक एयरक्राफ्ट का वीडियो शेयर करते हुए उसके पायलट की तारीफ की। इस वीडियो में एक प्लेन बिल्डिंग के पास से निकलते हुए जब लैंड करता है, तो सामने एक पेट्रोल टैंकर आ जाता है और जान बचाने के लिए पायलट उसी वक्त टेक ऑफ कर लेता है। खुर्रम द्वारा इस वीडियो को शेयर करने के बाद सोशल मीडिया पर उनका खूब मजाक उड़ रहा है। ऐसा क्यों? आइए आपको बताते हैं।

दरअसल, खुर्रम द्वारा शेयर वीडियो ग्राफिक्स की मदद से तैयार की गई GTA-5 गेम की एक झलक है, जिसे उन्होंने हकीकत मान लिया और पायलट के लिए लिखा, “एक एयरक्राफ्ट बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचा। पायलट का चमत्कारिक प्रजेंस ऑफ माइंड।”

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें खूब ट्रोल किया। इस वीडियो को देखकर कोई बच्चा
भी बता सकता है कि यह वास्तविक घटना का वीडियो नहीं है, बल्कि ग्राफिक्स का खेल है, लेकिन अफसोस खुर्रम इस बात को नहीं समझ पाए और हंसी के पात्र बन गए।

एक यूजर ने उनका मजाक उड़ाते हुए लिखा, आखिरकार पाकिस्तान में जीटीए-5 पहुँच गया। वहीं, किसी ने उन्हें स्टूपिड कहा तो किसी ने कहा कि यह हास्यास्पद है, लेकिन इनसे यही उम्मीद है।

बता दें, बुरी तरह ट्रोल होने के बाद खुर्रम नवाज ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया है। लेकिन Theuigamer चैनल ने इसकी वीडियो को यूट्यूब पर शेयर किया है, आप इस वीडियो को नीचे दिए यूट्यूब लिंक में देख सकते हैं। खुर्रम पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी माने जाते हैं। पूर्व सैन्य अधिकारी खुर्रम फ़िलहाल तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी के महासचिव और नेशनल असेंबली के सदस्य हैं।

‘मेरे 40 करोड़ टोपी वाले भाइयो! अल्लाह से माँगो कि हमको ताकत दे, पूरा हिन्दुस्तान बंद हो जाएगा’

बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रोहतगी को लेकर टिप्पणी करते हुए भड़काऊ बयान देने के कारण चर्चा में आए बॉलीवुड एक्टर एजाज खान इस बार नए वीडियो में हिन्दुओं को अपमानित करते नजर आ रहे हैं। इस बार भी वो अपने बयान को लेकर सोशल मीडिया में छाए हुए हैं। कुछ लोग उनकी बातों का समर्थन कर रहे हैं तो काफी लोग उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने की बात भी लिख रहे हैं।

“जब हम ज्वालामुखी बनकर फटेंगे तो सब कलमा पढ़ने लगेंगे”

फेसबुक पर एजाज खान अपने भड़काऊ वीडियो के माध्यम से समाज में नफरत फैलाने और समुदाय विशेष को उकसाने का प्रयास करते हुए देखे जा रहे हैं। इस बार एजाज खान ने पीएम मोदी पर और RSS पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वो लोगों को ‘जय श्री राम’ बुलवाने और देश का ‘सेक्युलर फ़ेब्रिक’ तोड़ने के लिए उकसा रहे हैं।

इस वीडियो में एजाज खान कहते देखे जा सकते हैं कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाले लोग नाथू राम गोडसे को पूजते हैं, जो कि महात्मा गाँधी का हत्यारा है। एजाज खान का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जय श्री राम बोलने वालों को रोकते हैं, तो वो उन्हें ‘आप’ नहीं बल्कि ‘तू’ कहना शुरू कर देंगे।

नाराज एजाज खान लोगों से अपील कर रहे हैं कि ‘जय श्री राम बुलवाने’ वालों को कभी उनसे (खुद एजाज से) ‘जय श्री राम’ बुलवाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके बाद, एजाज खान कह रहे हैं कि वो ‘जय श्री राम’ बुलवाने वाले लोगों से ही अगर ‘अल्लाहु-अकबर’ ना बुलवा दें तो उनका नाम बदल दें। RSS पर ‘जय श्री राम’ कहकर लोगों को भड़काने का आरोप लगाते हुए एजाज खान इस वीडियो में कह रहे हैं, “अब पीर पर्वत सी हो चुकी, अब पिघलनी चाहिए और इनके पिछवाड़े से गंगा निकलनी चाहिए।”

एजाज खान इस वीडियो में कह रहे हैं-

“अल्लाह से माँगो कि हमको ताकत दे। हम लोग सड़क पर नहीं निकले, हमें शर्म आनी चाहिए। हम लोगों में एकता नहीं, हम लोग केकड़े हैं। हम लोग खाली बातों के शेर हैं। 2 दिन सड़क पर उतर आएँ तो हिन्दुस्तान पूरा बंद हो जाए। ये जो हम लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं… मेरे भाइयो ये सब बंद हो जाएगा। खाली एक दिन निकलना है सड़क पर। चालीस करोड़ लोग हैं हम, वैध और अवैध मिलाकर… एक बार निकलना है खाली। मेरे टोपी वाले भाइयो, कब निकलेंगे टोपियाँ पहन-पहनकर सड़क पर। खाली एक दिन काम पर नहीं जाना है।”

कॉन्ग्रेस के डूबने में मोदी-शाह का ही हाथ नहीं, देश की सबसे पुरानी पार्टी की नाव में कई छेद

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस पहले भी कई बार टूट चुकी है। उसके लोग विरोधी दलों में भी जाते रहे हैं। लेकिन, आज जितनी बेबस और लाचार कॉन्ग्रेस पहले कभी नहीं दिखी। एक के बाद एक झटके और दूर-दूर तक दिन बहुरने की उम्मीद नहीं। जब वह कर्नाटक में सरकार बचाने की जद्दोजहद में फँसी थी, तभी गोवा में उसके दो तिहाई विधायक पाला बदल लेते हैं और उसे इसकी भनक तक नहीं लगती। क्या इसका एकमात्र कारण मोदी-शाह की जोड़ी है (जैसा कि कॉन्ग्रेस आरोप लगाती है)? क्या कॉन्ग्रेस कथित धनबल और बाहुबल के आगे पस्त है? यकीनन नहीं!

वैसे, भी भारतीय राजनीति में कॉन्ग्रेस साम, दाम, दंड, भेद की घाघ खिलाड़ी रही है। सो, चुनावी पराजयों से उसके इस हुनर के भोथरा होने की बात मान लेना नासमझी ही कही जा सकती है। असल में कॉन्ग्रेस जिस दम पर (मजबूत संगठन, नेहरू-गांधी परिवार का नेतृत्व और क्षेत्रीय क्षत्रप) अपने पासे चलती थी, आज वही संकट में है। इसलिए ताज्जुब नहीं की पार्टी के कद्दावर नेता रहे जनार्दन द्विवेदी को कहना पड़ा, “हार के कारण पार्टी के भीतर है न कि बाहर।” एक अन्य वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने कॉन्ग्रेस नेताओं की चाटुकारिता पर हमला करते हुए कहा कि नेताओं ने अधिकतर समय राहुल के इस्तीफे के बाद ख़ुशामद में बीता दिया।

वरिष्ठ नेताओं का इस तरह से बयान देना कॉन्ग्रेस के अंदर के घमासान को उजागर करता है। ऐसे में खुद को अलग-थलग और असुरक्षित महसूस कर रहे नेताओं का पलायन चौंकाने वाला नहीं है। मान लें की कुछ नेता सत्ता से ही चिपके रहना चाहते हैं तो फिर कर्नाटक कॉन्ग्रेस में फूट नहीं पड़नी चाहिए थी। वहाँ बीते साल चुनाव हारने के बावजूद जद (एस) के साथ कॉन्ग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही थी।

असल में, शीर्ष पर बैठे कॉन्ग्रेस नेताओं को इनकी फिक्र ही नहीं है। हेमंत बिश्व शर्मा के कॉन्ग्रेस छोड़ने से यह पहले ही जगजाहिर हो चुका है। अभी दिख रही उठापठक भी इससे अलग नहीं है।

कॉन्ग्रेस के लिए इसकी शुरुआत 2011 से ही होने लगी थी जब अन्ना हज़ारे और बाबा रामदेव के आन्दोलनों से देश भ्रष्टाचार और परिवारवाद के ख़िलाफ़ आक्रोशित था और कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। इस पर बहुतों बार लिखा जा चुका है कि कैसे आंदोलन को कुचलने की कोशिश में पार्टी ने अपनी विश्वसनीयता खो दी।

इसके बाद 2012 में गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की लगातार तीसरी जीत ने देश के सारे राजनीतिक समीकरण पलट कर रख दिए। इस पर भी विस्तृत बहस हो चुकी है कि किस तरह आज़ादी के बाद से चले आ रहे कॉन्ग्रेसी वर्चस्व को उन्होंने धीरे-धीरे ऐसे ख़त्म कर दिया कि यह भारत के इतिहास में हमेशा एक नए समय की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। आख़िर कॉन्ग्रेस की आज ऐसी हालत क्यों है?

नीचे संलग्न वीडियो को देखिए। लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी बोल रहे हैं लेकिन उनके पीछे बेंच खाली पड़ी हुई है। उनके ख़ुद की ही पार्टी के नेता उन्हें सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में, अगर किसी सक्षम व्यक्ति को पार्टी में अहम पद दिया भी जाए तो उसका कोई महत्व नहीं रह जाएगा। लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी को कॉन्ग्रेस ने अपना नेता तो चुन लिया, लेकिन उनकी बात सुनने का समय उसके संसद नहीं निकाल पा रहे।

दूसरी बात, क्या कॉन्ग्रेस टिकट देते समय नेताओं की विश्वसनीयता को नहीं परखती? क्या ऐसे नेताओं को टिकट दे दिया जाता है जो दलबदलू होते हैं और जिनकी कोई विचारधारा नहीं होती? क्या कॉन्ग्रेस के विधायक बिकाऊ हैं? अगर ऐसा है तो शाह क्या कोई भी विपक्षी पार्टी का अध्यक्ष उन्हें ख़रीद लेगा। क्या कॉन्ग्रेस के विधायकों का स्तर इतना नीचे गिर गया है कि उनके सिर पर बोर्ड चस्पा है- “यह विधायक बिकाऊ है।

सोनिया गाँधी द्वारा अपनी सक्रियता कम करने के बाद कॉन्ग्रेस में ऐसा पहली बार हो रहा है जब पार्टी में नेताओं को एक रखने के लिए कोई सक्षम नेता मौजूद नहीं है। जब कॉन्ग्रेस दो धड़ो में बँट गई थी, तब भी इंदिरा ने उसे संभाल लिया था। आज ऐसा कोई सक्षम नेता नहीं है। राहुल गाँधी के बारे में तो बात ही न की जाए तो अच्छा है क्योंकि एक ही झूठ को सच साबित करने की कोशिश करने वाला नेता कभी भी दूरदर्शी नहीं हो सकता। हाँ, उसकी बातों से जनता चिढ़ेगी ज़रूर।

और कॉन्ग्रेस किस नैतिकता की बात करती है। कर्नाटक की जनता ने उसे विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया था। लेकिन भाजपा को रोकने के नाम पर उसने एक कामचलाऊ सरकार बनाई, जिसकी अकाल मौत की अटकलें उसके बनने के बाद ही शुरू हो गई थी।

आज हरियाणा में भी ऐसा ही हाल है। प्रदेश अध्यक्ष अशोक तँवर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच ऐसी गुटबाजी चल रही है कि वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद की भी कोई नहीं सुन रहा। वहाँ भी कल को ऐसे ही हालत पैदा होंगे और फिर भाजपा को दोष दिया जाएगा। पंजाब में केंद्रीय नेतृत्व के लाडले सिद्धू दफ्तर छोड़ कर ही गायब हैं और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से उनकी उठापटक जारी है। बिहार में जदयू महागठबंधन से अलग क्या हुई, कॉंग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ही नीतीश के साथ हो लिए। उत्तर प्रदेश में तो कलह का आलम यह है कि वहाँ प्रियंका और सिंधिया भी लाचार नज़र आए। गुजरात में एक-एक कर विधायक पाला बदल रहे हैं।

और यह केवल बाहुबल या धनबल का ही कमाल नहीं। अगर ऐसा होता तो गोवा में पार्टी छोड़ने वाले विधायकों ने अलग दल बनाया होता ताकि भविष्य में भी भाजपा के साथ मोल-भाव कर सकें। लेकिन, उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। आखिर क्यों? असल में, आज भाजपा के अलावा नेताओं को कोई दूसरा दल नहीं दिख रहा जहां वे खुद का भविष्य सुरक्षित मान सके और मोदी के अलावा कोई दूसरा नेता नहीं दिखता जिसमें अपने लोगों की नैया पार लगाने की कूवत हो।

कॉन्ग्रेस पार्टी कई बार टूटी। 1956 में सी राजगोपालचारी ने अलग पार्टी बना ली। 1967 में चरण सिंह ने कॉन्ग्रेस को तोड़ कर अलग पार्टी बनाई। इंदिरा के समय भी कॉन्ग्रेस टूटी। 1977 में आपातकाल के बाद जगजीवन राम अलग पार्टी बना कर छिटक गए। दक्षिण में एके एंटनी, बंगाल में प्रणव मुखर्जी, महाराष्ट्र में शरद पवार, छत्तीसगढ़ में अजित जोगी और हरियाणा में बंसीलाल के नेतृत्व में समय-समय पर कॉन्ग्रेस विभाजित हुई। लेकिन यहाँ सवाल यह है कि अब पार्टी के विधायक अलग होकर नई पार्टी क्यों नहीं बना रहे? वे भाजपा के साथ ही क्यों जा रहे हैं? अगर वो नया दल बना लें तो वे ज्यादा मोलभाव करने की स्थिति में होंगे।

सार यह कि अब कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई ख़ास कैडर नहीं रहा। नैरेटिव के इस दौर में लगातार ग़लत क़दम उठा कर जनता के बीच ग़लत सन्देश देने पर उसके बुरे परिणाम आपको भुगतने पड़ेंगे, भले ही इसमें समय लगे। मई 2018 में हुई ग़लती का परिणाम जुलाई 2019 में निकल कर आ रहा है। ऐसे में, पार्टी को एक ऐसा अध्यक्ष चाहिए जो क्षत्रपों को एक रखने के साथ-साथ सही निर्णय लेने की क्षमता रखता हो। अध्यक्ष के साथ नेताओं की एक ऐसी टीम चाहिए, जो सही रणनीति बना सके। अगर ऐसा नहीं होता है तो गाँधी के आदर्शों पर चलने का दावा करने वाली कॉन्ग्रेस शायद देश के राजनीतिक पटल से गायब ही न हो जाए।

‘जय श्री राम’ बोलने पर पश्चिम बंगाल के स्कूल में घुसकर छात्रों की लाठी-डंडों से पिटाई

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ का नारा किसी अपराध से कम नहीं है। फिर चाहे ‘जय श्री राम’ का ये नारा कोई बड़ा-बुज़ुर्ग लगाए या स्कूल के छात्र। इस अपराध की सज़ा हर किसी को भुगतनी पड़ती है। ताज़ा मामला कोलकाता के दक्षिण 24 परगना ज़िले के विष्णुपुर थानांतर्गत बाखराहट उच्च विद्यालय का है। यहाँ पर छात्रों द्वारा ‘जय श्री राम’ बोले जाने पर स्थानीय गुंडों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। 

दैंनिक जागरण के ई-पेपर में छपी ख़बर का स्क्रीनशॉट

इस घटना की सूचना जब पुलिस को मिली तो वो मौक़े पर पहुँची। वहाँ हालात इतने बेक़ाबू थे कि स्कूल में घुसे गुंडे तत्व के लोगों को खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ गया। वहीं, दूसरी तरफ़ घटना के प्रतिवाद में छात्रों और उनके अभिभावकों ने सड़क अवरोध कर विरोध-प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच में जुट गई है।

ख़बर के अनुसार, बुधवार की सुबह बाखराहाट उच्च विद्यालय में कुछ छात्र ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे थे। थोड़ी देर बाद वहाँ कुछ गुंडे पहुँचे और उन्होंने लाठी-डंडों के साथ स्कूल में धावा बोल दिया। स्कूल में ज़बरदस्ती घुसकर ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्रों की लाठी-डंडों से पिटाई शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से स्कूल में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया और चारों तरफ़ चीखों की आवाज़ आने लगीं। सूचना पाकर विष्णुपुर थाने की पुलिस मौक़े पर पहुँची।

पुलिस के वहाँ पहुँचने पर भी मामला शांत नहीं हुआ क्योंकि उनकी मौजूदगी में भी ये लोग स्कूल के अंदर हंगामा मचाते रहे। स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्च करना पड़ा, उसके बाद ही इन गुंडों को स्कूल के बाहर निकाला जा सका। इसके बाद घटना के विरोध में अभिभावकों ने विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने हमलावरों की गिरफ़्तारी की माँग उठाई। पुलिस ने उन्हें उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, जब जाकर अवरोध समाप्त हुआ।

झूठ बोलते हैं महबूबा-अब्दुल्ला, अमरनाथ यात्रा की वजह से कश्मीरियों को मिलते हैं रोज़गार के अवसर

अमरनाथ यात्रा पूरे जोर-शोर से चल रही है। पहले 8 दिनों एक लाख से भी अधिक लोगों ने दर्शन किए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। ख़ुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर सम्बंधित अधिकारियों से बैठकें कर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। अस्थिर मौसम को देखते हुए तकनीक का भी सहारा लिया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी व्यवस्थाएँ की गई हैं। राज्यपाल सत्यपाल मालिक ने कैम्प्स का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। लेकिन, कश्मीर के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती ने इस पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि इस यात्रा के लिए किए गए इंतजामों से कश्मीरियों को दिक्कत हो रही है।

लेकिन, ऐसा नहीं है। असल में अमरनाथ यात्रा से कश्मीरियों का फायदा होता है। इससे उन्हें रुपए कमाने के अवसर मिलते हैं। इसके अलावा, इससे उन्हें रोज़गार के अवसर भी मिलते हैं। अमरनाथ यात्रा कश्मीरियों के लिए वरदान बन कर आती है; उन कश्मीरियों के लिए, जिनका नाम लेकर महबूबा-अब्दुल्ला राजनीति करते हैं, जिन्हें अलगाववादी भड़काते हैं, जिन्हें आतंकी बरगलाकर अपने संगठन में शामिल करते हैं। दरअसल, जम्मू कश्मीर में नेता, अलगाववादी और आतंकी, ये तीनों ही कभी नहीं चाहेंगे कि वहाँ की जनता को रोज़गार मिले और उसका कारण एक हिन्दू तीर्थयात्रा हो।

आगे बढ़ने से पहले जानते हैं कि किस तरह से कश्मीरी जनता को अमरनाथ यात्रा से फायदा मिलता है। जुलाई 2017 में ट्रिब्यून इंडिया की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कश्मीरियों के लिए अमरनाथ यात्रा द्वारा पैदा होने वाले एक ऐसे रोज़गार के बारे में बताया गया था, जिसको हम-आप नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन, यही उनकी कमाई का एक बड़ा जरिया है। कई ऐसे श्रद्धालु हैं, जो 22 किलोमीटर तक पद यात्रा कर बाबा बर्फानी के दर्शन करने जाते हैं। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में कई ऐसे लोग हैं, जो यात्रा के मौसम में ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ‘वॉकिंग स्टिक’ यानी लाठी तैयार करते हैं, जिसके सहारे पदयात्री बाबा के धाम तक पहुँचते हैं।

पूरी अमरनाथ यात्रा के रास्ते में सैकड़ों ऐसे दुकानदार हैं, जिनकी रोज़ी-रोटी अमरनाथ यात्रा से चलती है। स्थानीय मुस्लिमों के हवाले से ट्रिब्यून इंडिया ने अपनी उस रिपोर्ट में लिखा था कि वे लोग हर साल बड़ी उम्मीद से इस यात्रा का इन्तजार करते हैं। कई ऐसी दुकानें हैं, जो पहले से चल रही होती हैं। वहीं, यात्रा के मौसम में कई अस्थाई दुकानें भी स्थापित हो जाती हैं, जिनकी पूरी कमाई इस यात्रा पर निर्भर है। कई तरह के पूजा के सामान भी वहाँ की स्थानीय दुकानदारों द्वारा यात्रियों को बेचीं जाती हैं, जिससे निश्चित तौर पर उनकी अच्छी-ख़ासी आमदनी होती है।

जैकेट, रेनकोट, हैट इत्यादि की दुकानें भी खुल जाती हैं। ये सभी अस्थाई होती हैं। अर्थात, आम दिनों में शायद ही ऐसे सामान बिकते हों, लेकिन यात्रा के दौरान इन दुकानदारों की चाँदी रहती है। इसके अलावा कई स्थानीय लोग अपने घोड़ों को इस यात्रा में शामिल करते हैं और कमाते हैं। कई अन्य लोग पालकियाँ ढो कर कमाई करते हैं। यह एक व्यापारिक रिश्ता है जो अमरनाथ के यात्रियों और स्थानीय जनता के बीच विकसित हो गया है। महबूबा-अब्दुल्ला भले ही इसे देखना न चाहें, लेकिन अमरनाथ यात्रा से कश्मीरियों को काफ़ी फायदा होता है, उन्हें रोज़गार के अवसर मिलते हैं।

कई स्थानीय युवा ‘पिठ्ठू’ बनकर कमाई करते हैं। पहलगाम के आसपास के टैक्सी ड्राइवरों की भी चाँदी रहती है। यात्रा के दौरान उनकी भी अच्छी-ख़ासी कमाई होती है। लेकिन, सोशल मीडिया पर ऐसी कुछ तस्वीरों को उठा कर यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि स्थानीय मुस्लिम यात्रियों की मदद कर रहे हैं और यात्रा में उनकी सहायता कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे कश्मीर की ख़ासियत के रूप में प्रचारित किया जाता है। यह ऐसा ही है, जैसे कुछ मुस्लिमों ने हिन्दुओं को खाना परोस दिया और उस तस्वीर को वायरल कर यह दिखाया गया कि मुस्लिम कितने दरियादिल हैं।

असल में कश्मीर में अगर अमरनाथ यात्रा रुक जाए, तो इसका सबसे बड़ा फायदा वहाँ के नेताओं, अलगाववादियों व आतंकियों को होगा। नेताओं को भारत सरकार व शेष भारत को गाली देकर वोट बटोरने का मौका मिलेगा। अलगाववादी पूरी दुनिया में यह प्रचार करेंगे कि कश्मीरियों को रोज़गार के अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। आतंकी यह चाहेंगे कि रुपए की कमी से जूझ रहे युवा उनके संगठन में भर्ती हो जाएँ। इन तीनों के प्रयासों में सबसे बड़ा घाटा कश्मीरी जनता का है।

जिन कश्मीरियों को अमरनाथ यात्रा से रोज़गार मिल रहा है, क्या वे कभी भी चाहेंगे कि उनके रोज़गार का अवसर छिन जाए? अब महबूबा और अब्दुल्ला के बयानों को देख कर समझा जा सकता है कि ये लोग कश्मीरी जनता की भावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करते, बल्कि उल्टी गंगा बहाते हैं। अगर अमरनाथ जाने वाले यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो इनकी वजह से होने वाली कमाई में भी वृद्धि होगी, जो कि कश्मीरियों के लिए एक अच्छी बात है।

पायल रोहतगी को ब्लॉक करने पर FoE वाले ‘निष्पक्ष पत्रकार’ कर रहे हैं मुंबई पुलिस का समर्थन

सोशल मीडिया पर सक्रियता के कारण मुंबई पुलिस अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। ट्विटर के जरिए मुंबई पुलिस द्वारा अक्सर लोगों को जिम्मेदार नागरिक बनने की सलाह भी दी जाती है। हालाँकि, आज मुंबई पुलिस अन्य कारणों से चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल, मुंबई पुलिस ने ट्विटर पर अभिनेत्री पायल रोहतगी को ब्लॉक कर दिया है।

पायल रोहतगी को अक्सर हिन्दू हितों के बारे सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए देखा जाता है। आज सुबह पायल रोहतगी ने एक ट्वीट के जरिए जानकारी दी कि मुंबई पुलिस द्वारा उनके ट्विटर एकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया है। अभिनेत्री ने लिखा है कि शायद यही वजह है कि उनका परिवार उन्हें हिन्दुओं के बारे में बात करने से रोकता है। साथ ही, पायल ने मुंबई पुलिस पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का भी आरोप लगाते हुए लिखा कि इसी कारण से वो हिन्दू होने के नाते इस देश में असुरक्षित महसूस करती हैं।

पायल रोहतगी के पति और प्रसिद्ध रेसलर संग्राम सिंह ने भी मुंबई पुलिस को इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की है।

पुलिस का कर्तव्य नागरिकों की रक्षा करना, चाहे वो पायल रोहतगी हो या कोई और

पुलिस विभाग का दायित्व नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे वो उनकी बातों से सहमत हों या नहीं। वर्तमान समय में यह अक्सर देखा भी गया है कि सोशल मीडिया के जरिए ही कई बार लोगों को गंभीर हालातों में मदद उपलब्ध करवाई गई है। सोचिए, यदि किसी व्यक्ति को सच में मदद की जरूरत हो और वो पुलिस को आपात स्थिति में इसकी सूचना देना चाहता हो, लेकिन पुलिस विभाग द्वारा उससे संपर्क करने के तरीके पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया हो! क्योंकि मुंबई पुलिस एक सार्वजानिक संस्थान है, इस वजह से यह किसी भी तरह से संवैधानिक नहीं है कि वो किसी व्यक्ति (जो नागरिक भी है) को सेवाएँ देने से वंचित करे।

FoE वाले पत्रकार खुश हैं कि पुलिस अपने नागरिकों को ब्लॉक कर रही है

यह देखना आश्चर्यजनक (लेकिन दुखद) है कि अक्सर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की बात करने वाले स्वघोषित पत्रकार और लेखक मुंबई पुलिस की इस हरकत से खुश हैं –

वहीं, कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय मीडिया कॉर्डिनेटर भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखने से खुद को नहीं रोक पाईं।

दीमक, दोगली, बिकाऊ, 10वीं फेल, सूडो लिबरल, नालायकों, देशद्रोहियों… मीडिया के एक सेक्शन पर कंगना

मीडिया के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। फ़िल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के सॉन्ग लॉन्च इवेंट के दौरान हुई घटना पर इस फ़िल्म के निर्माताओं की सफ़ाई और माफ़ीनामे के बाद अब कंगना का एक वीडियो सामने आया है। इसमें कंगना ने भारतीय मीडिया के प्रति आभार जताते हुए कुछ लोगों का विरोध किया है और उन्हें देशद्रोही करार दिया है। उन्होंने कहा:

“मीडिया का एक सेक्शन है जो दीमक की तरह हमारे देश में लगा है और धीरे-धीरे देश की गरिमा को, अस्मिता को, एकता को आए दिन अटैक करता रहता है..झूठी अफ़वाहें फैलाता रहता है। गंदे, भद्दे, देशद्रोह के विचार खुले तौर पर सबके सामने रखता है। इनके ख़िलाफ़ हमारे संविधान में किसी भी तरह की न तो कोई पेनल्टी है और न ही कोई सज़ा है। इस चीज से मुझे बहुत ज़्यादा ठेस लगी और मैंने ख़ुद से निर्धारित कर लिया कि ये जो दोगली मीडिया है बिकाऊ मीडिया है जो ख़ुद को लिबरल कहती है सेकुलर कहती है और कुछ भी नहीं है जो दसवीं फेल है… ये लोग सूडो लिबरल हैं और ये लोग बिल्कुल भी सेकुलर नहीं हैं। अगर ये लोग सेकुलर होते तो हमेशा धार्मिक चीजों को लेकर देश की एकता पर प्रहार नहीं करते।”

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वीडियो में कंगना ने उस पत्रकार के बारे में कहा:

“ऐसे ही एक चिंदी से जर्नलिस्ट को मैं एक-दो दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिली। विश्व पर्यावरण दिवस के दिन मैंने प्लास्टिक बैन को लेकर कैंपेन किया था, जिसमें मैंने प्लास्टिक बैन को लेकर कुछ एक्टिविटीज की थी, इस जर्नलिस्ट को मैंने खिल्ली उड़ाते हुए देखा था। इसके बाद मैंने काऊ स्लाटर के अगेंस्ट, एनिमल क्रूलिटी के अगेंस्ट कैंपेन किया उसका भी यह मजाक उड़ा रहा था।”

इसके आगे फ़िल्म एक्ट्रेस ने कहा, “मेरे पास किसी भी तरह के देशद्रोही के लिए जीरो परसेंट टॉलरेंस है, तीन -चार लोगों ने मिलकर मेरे ख़िलाफ़ एक कोई गिल्ड बनाई जो अभी शायद कल ही बनी है। उसकी कोई मान्यता ही नहीं है। तो उस गिल्ड के चलते लोगों ने मुझे धमकी देना शुरू किया है कि मुझे बैन कर देंगे या मुझे कवर नहीं करेंगे, या मेरा करियर बर्बाद कर देंगे। अरे नालायकों, देशद्रोहियों, बिकाऊ लोगों तुम लोगों को ख़रीदने के लिए लाखों भी नहीं चाहिए। तुम लोग तो इतने सस्ते हो कि पचास-साठ रुपए में बिछ जाते हो, जो अपने देश के साथ गद्दारी करते हैं, जिसमें खाते हैं उसी में छेद करते हैं। तुम जैसे नालायक मुझे बर्बाद करेंगे , तुम लोगों के बाप-दादाओं को भी मैंने लोहे के चने चबवाएँ हैं।”

दरअसल, कुछ दिनों पहले फ़िल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के सॉन्ग लॉन्च इवेंट में कंगना रनौत और एक पत्रकार के बीच तीखी बहस हो गई थी। इस दौरान कंगना ने उस पत्रकार पर ख़ुद के ख़िलाफ़ कैंपेन चलाने और जान-बूझकर उनकी फ़िल्मों की बुराई करने का आरोप लगाया था। इसके बाद एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने एक बयान जारी कर कंगना रनौत के बायकॉट करने की बात कही। फ़िल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने इस मामले पर लिखित तौर पर माफ़ी माँगी है।

एकता के क़दम की तारीफ़ करते हुए गिल्ड ने कंगना का बायकॉट जारी रखने की बात कही है। अपने ऑफिशियल रिस्पॉन्स में लिखा, “एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड एकता कपूर के सहयोग की तारीफ करता है और अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट के जरिए सही के साथ खड़े होने की सराहना करते हैं। हालाँकि, हम सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंगना रनौत पर बैन जारी रखेंगे।”

एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड का स्टेटमेंट