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माँ-बेटी के साथ दुष्कर्म नहीं कर पाया वार्ड सदस्य खुर्शीद तो दोनों का सर मुंडवा सड़क पर घुमाया

बिहार के वैशाली में भगवानपुर थानाक्षेत्र से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यहाँ कुछ बदमाशों ने घर में घुसकर एक लड़की और उसकी माँ के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया, जब माँ-बेटी ने इसका विरोध किया तो बदमाशों ने पहले उनसे मारपीट की और फिर उनका सिर मुंडवाकर सड़क पर घुमाया।

खबरों के मुताबिक लड़की अपनी माँ के साथ गाँव में अकेली रहती है। उसके पिता भिक्षाटन कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बुधवार (जून 26, 2019) की शाम 5 बदमाश दुष्कर्म करने की नीयत से उनके घर में घुसे, लेकिन माँ-बेटी के विरोध के कारण वह अपने मनसूबों में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद गुस्से में उन्होंने माँ बेटी को पीटा और फिर बदचलनी का आरोप लगाकर नाई को बुलाया और उनके बाल मुंडवा दिए। इसके बाद उन्हें सड़क पर भी घुमाया गया।

हैरानी की बात यह है कि सभी आरोपित उसी गाँव के रहने वाले हैं। आरोपितों में एक वार्ड सदस्य खुर्शीद भी शामिल है। फिर भी गाँव के किसी व्यक्ति ने इन दोनों माँ-बेटी पर हुए अत्याचार का विरोध नहीं किया और सिर्फ़ तमाशबीन बने तमाशा देखते रहे। इस मामले में 5 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित खुर्शीद समेत 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक पीड़ित माँ-बेटी का कहना है कि पड़ोस की रहने वाले बदमाशों ने उनके साथ मनमानी और छेड़खानी करने की कोशिश की, उनके विरोध पर उनके साथ सरेआम अत्याचार हुआ। पुलिस ने इस मामले को गंभीर बताया है और आश्वासन दिया है कि आरोपितों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

बिहार की 3 साल की बच्ची को US ले जाकर मार डाला, ‘अमेरिकी पिता’ को आजीवन कारावास

अमेरिका में डलास की एक अदालत ने तीन साल की भारतीय बच्ची शेरिन मैथ्यूज की मौत के मामले में उसके भारतीय-अमेरिकी पिता वेस्ली मैथ्यूज को बुधवार (26 जून) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 39 वर्षीय मैथ्यूज को सोमवार को शेरीन की मौत के मामले में बच्ची को चोट पहुँचाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। ख़बर के अनुसार, 12 सदस्यीय जूरी ने बुधवार की दोपहर को अपनी गोद ली हुई बेटी शेरिन की मौत के मामले में मैथ्यूज को उम्रक़ैद की सजा सुनाने से पहले लगभग तीन घंटे तक विचार-विमर्श किया। वह 30 साल की सज़ा काटने के बाद वो पैरोल के लिए अनुरोध कर सकता है।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, जब मैथ्यूज को सज़ा सुनाई जा रही थी तब वो जूरी के सदस्यों या न्यायाधीशों की तरफ़ न देखकर सामने की ओर देख रहा था। बता दें कि वर्ष 2016 में मैथ्यूज परिवार ने बिहार के एक अनाथालय से बच्ची को गोद लिया था। अभियोजकों की दलील थी कि केरल के रहने वाले मैथ्यूज ने अक्टूबर 2017 में शेरिन की हत्या की है।

मैथ्यूज ने ख़ुद को बचाने के लिए एक के बाद एक कई झूठे दावे पेश किए। कभी उसने कहा कि बच्ची दूध नहीं पी रही थी इसलिए उसकी मौत हुई, तो कभी कहा कि वो कहीं ग़ायब हो गई थी। मैथ्यूज ने यह भी दावा किया कि अपनी बेटी की आकस्मिक मौत के बाद घबरा गया था और उसने बच्ची के शरीर को नीले कचरे के थैले में लपेटा और पुलिया में फेंक दिया ताकि वह घर के पास रहे। शुरू में मैथ्यूज ने पुलिस को बताया कि शेरिन 7 अक्टूबर, 2017 को लापता हो गई थी। 15 दिन बाद उसका बुरी तरह से क्षत-विक्षत शरीर घर के पास पुलिया में मिला। 

इसके अलावा, 3 साल की मासूम बच्ची की मौत पर एक नई कहानी भी गढ़ी गई। इस कहानी के अनुसार, जब बच्ची दूध नहीं पी रही थी तो उसे सज़ा के तौर पर सुबह 3 बजे घर के पिछले हिस्से में पेड़ के पास खड़ा रहने को कहा गया। 15 मिनट बाद जब बच्ची को वहाँ चेक किया गया, तो वो वहाँ से ग़ायब थी। मैथ्यूज ने जाँचकर्ताओं को यह नहीं बताया कि उनकी बेटी का शरीर कहाँ था। बच्ची का मृत शरीर जिस अवस्था में पाया गया, वो इतनी बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था कि पोस्टमॉर्टम में बच्ची की मृत्यु का कारण ही स्पष्ट नही हो सका था। उसके शरीर में कुछ भी शेष नहीं बचा था, उसके दांत बाहर गिर गए थे।

इसके अलावा अभियोजक पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि तीन साल की मासूम शेरिन ने अमेरिका में रहने के दौरान हर समय दुर्व्यवहार का सामना किया। मेडिकल रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि उसके शरीर में पाँच टूटी हड्डियाँ थीं जिसका उपचार हो रहा था।

सिनी जोकि पंजीकृत नर्स भी हैं, उन्होंने गोद ली हुई बेटी को रात के अँधेरे में अकेला छोड़ दिया और अपनी ख़ुद की बेटी के साथ खाना खाने चली गई थीं। इसके लिए पुलिस ने उन्हें भी दोषी ठहराया। शेरिन की मौत ने भारत सरकार का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा और तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि भारतीय बच्ची (शेरीन) को न्याय मिलना चाहिए। भारत ने शेरिन की दु:खद मौत के बाद गोद लेने की प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है।

ऋतिक की बहन सुनैना को जिस रुहैल अमीन से है प्यार, वो है शादीशुदा और बाल-बच्चे वाला: रिपोर्ट

पिछले काफ़ी समय से सुनैना रोशन और उनके परिवार से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में छाई रहीं। इन ख़बरों में उनके प्रेम-संबंध और पिता राकेश रोशन व भाई ऋतिक रोशन को लेकर बहुत कुछ लिखा गया। सुनैना ने दावा किया था कि एक मुस्लिम शख़्स (रुहैल अमीन) से प्यार करने की वजह से रोशन परिवार द्वारा उनका मानसिक शोषण किया जा रहा है। 

इससे पहले सुनैना ने ट्वीट किया था कि वो ‘एक नरक में रह रही थीं’ और उनका परिवार उनके जीवन को ‘असहनीय’ बना रहा था। सुनैना ने यह भी दावा किया था कि अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल उसे न्याय दिलाने में मदद करने की कोशिश कर रही थीं।

ख़बर के अनुसार, रोशन के एक क़रीबी सूत्र ने बॉलीवुड हंगामा को बताया कि सुनैना रोशन जिससे प्यार करती हैं वो रुहैल अमीन कथित तौर पर पहले से ही शादी-शुदा है और उसके बच्चे भी हैं। रोशन के क़रीबी सूत्रों ने यह भी बताया कि सुनैना के माता-पिता बस अपनी बेटी की रक्षा करना चाहते हैं। ताकि वो कोई ऐसा फैसला न ले लें जिससे जिंदगी भर उन्हें पछताना पड़े।

बॉलीवुड हंगामा ने सूत्र के हवाले से लिखा कि सुनैना ने अपने विवाह को लेकर पहले ही भयंकर गलतियाँ की हैं। उनके माता-पिता यह नहीं चाहते कि वो अपने जीवनसाथी के तौर पर ग़लत निर्णय लेकर कोई और ग़लती करें।

कथित तौर पर सुनैना और रुहेल पहली बार तब मिले थे जब वो टाइम्स नाउ के लिए मनोरंजन बीट कवर करते थे। इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से दोनों का पुनः सम्पर्क हुआ। रूहैल ने कहा कि जब उन्होंने सुनैना के माता-पिता से एक बार बात की थी, तो वे ख़ुश नहीं थे। रुहैल ने बताया, “उन्हें हमारी दोस्ती मंज़ूर नहीं थी।”

वेल डन आकाश विजयवर्गीय! आखिर क्यों खुश हैं इंदौर के आम आदमी व नगर निगम के 21 कर्मचारी

इंदौर से आई एक वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय एक नगर निगम के अधिकारी को बल्ले से पीटते हुए नज़र आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद उनकी आलोचना हुई और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आकाश को गिरफ़्तार कर लिया। आकाश द्वारा इस प्रकार के व्यवहार का समर्थन नहीं किया जा सकता। क़ानून अपने हाथ में लेना किसी का भी अधिकार नहीं है, चाहे वह जनप्रतिनिधि ही क्यों न हो। लेकिन, हमें इंदौर के ही रहने वाले अभिषेक सचान ने कुछ ऐसा बताया, जो आपलोगों को जानना ज़रूरी है।

सिर्फ अभिषेक सचान ही नहीं, बल्कि अभी-अभी यह भी ख़बर आई है कि इंदौर म्युनिस्पल कॉर्पोरेशन (IMC) के अधिकारी भी आकाश विजयवर्गीय के समर्थन में उतर आए हैं। कुल 21 कर्मचारियों को आईएमसी ने निलंबित कर दिया है क्योंकि उन्होंने आकाश द्वारा नगर निगम के अधिकारी को पीटे जाने का समर्थन किया है। निगम कमिश्नर ने इस काण्ड की जाँच भी शुरू कर दी है। ऐसे में, यह सवाल उठता है कि क्या कारण है कि कुछ आम लोग और ख़ुद नगर निगम के अधिकारी इसका समर्थन कर रहे हैं, जबकि क़ानून हाथ में लेना ग़लत है, चाहे वह कोई भी हो? इसी कारण को समझने के क्रम में हमें अभिषेक सचान का फेसबुक पोस्ट दिखा।

इंदौर में लम्बे समय से रह रहे अभिषेक ने इस मामले में फेसबुक पर आकाश विजयवर्गीय का समर्थन किया। इसके पीछे उनके कुछ व्यक्तिगत अनुभव थे, जो इंदौर नगर निगम के अधिकारीयों की सच्चाई को बयाँ करते हैं। आकाश विजयवर्गीय की कार्रवाई का समर्थन किए बिना हम आपको अभिषेक से ऑपइंडिया की हुई बातचीत और उनके फेसबुक पोस्ट के आधार पर एक आम आदमी का पक्ष रखना चाहते हैं, ताकि आपको भी पता चले कि आखिर अभिषेक ने आकाश विजयवर्गीय की इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। जैसा कि मीडिया का काम है, हम ग़लत को ग़लत कहते हुए सभी पक्षों को जनता के सामने रख रहे हैं।

सबसे पहले देखिए कि अभिषेक ने अपने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उनका एक काम जो नियमानुसार नगर निगम द्वारा 6 महीने में किया जाना था, उसमें 9 महीने लगाए गए और काम भी नहीं हुआ। उन्होंने स्क्रीनशॉट्स शेयर करते हुए लिखा कि 10 हज़ार रुपए का रसीद जमा कराने के बावजूद उनका कम्पाउंडिंग का कार्य नहीं किया गया। उन्हों लिखा कि इस स्थिति में अगर आकाश जैसा कोई व्यक्ति बल्ला चलाता है तो उनके जैसे आम आदमी को, होली-दीवाली पर बेघर कर दिए गए लोगों को और सड़क पर ठेला लगा कर अपना भरण पोषण करने वाले व्यक्ति को ख़ुशी होती है।

अभिषेक का वो फेसबुक पोस्ट, जिसके बाद हमने मामले की तह तक जाने की सोची

मामले की तह तक जाने के लिए ऑपइंडिया ने अभिषेक सचान से संपर्क किया और उनके व्यक्तिगत अनुभव को विस्तृत रूप से समझ कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें क्या पीड़ा दी, जिसके कारण वे आकाश विजयवर्गीय द्वारा अधिकारी की पिटाई से ख़ुश हुए। उनसे हुई बातचीन के आधार पर उनके व्यक्तिगत अनुभव को हम नीचे साझा कर रहे हैं। ध्यान दीजिए, यह एक आम आदमी का पक्ष है, जिसे हम हूबहू बिना छेड़छाड़ किए आपके सामने रख रहे हैं। नीचे पढ़िए उनका अनुभव अभिषेक सचान के ही शब्दों में:

“मेरा इंदौर में एक मकान है, जिसे बिल्डर ने कुछ अच्छा नहीं बनाया तो उसे रिपेयरिंग की ज़रूरत थी। जैसा कि हर आम आदमी अपने घर में हुई कमी-बेशी को ठीक करता है, हम लोग भी अपने घर का रिनोवेशन करवा रहे थे। हमें अपनी बालकनी में कुछ काम कराने थे। नियमानुसार, हमें इसके लिए नगर निगम से अनुमति की ज़रूरत पड़ती है। जब हम परमिशन लेने गए तो हमें अधिकारियों ने सीधा कहा कि तुम यहाँ से भाग जाओ क्योंकि हाउसिंग के मकान में परमिशन नहीं मिलती। जब मेरे साथ नगर निगम के अधिकारियों ने ऐसा व्यवहार किया तो मैंने समाज के लोगों से राय ली। बुद्धिजीवियों ने कहा कि जब उनका व्यवहार ऐसा है तो आप अपना काम करा लो, छोटा-मोटा ही काम तो है।”

“जब मैंने काम कराना शुरू कर दिया तो मेरे पड़ोसी को इससे आपत्ति हो गई। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से तुम्हारा मकान ज्यादा सुन्दर हो जाएगा और उनका ठीक नहीं दिखेगा। उन्होंने नगर निगम में इसकी शिकायत कर दी कि मैं बिना अनुमति कार्य करा रहा हूँ। इसके बाद नगर निगम के अधिकारी नोटिस के साथ मेरे घर पहुँचे। उन्होंने कहा कि तुम अपना मकान बिना अनुमति बना रहे हो, इसे तोड़ दिया जाएगा। इसके बाद मेरी भाग-दौड़ शुरू हुई। मैं आवेदन लिख कर सारे अधिकारियों के पास जाना शुरू किया। मैं काम क्यों करा रहा हूँ, मेरी स्थिति क्या है?- मैंने ये सारी चीजें उस आवेदन में लिखी और अधिकारियों को दिया। यहाँ तक कि कमिश्नर को भी मैंने 4 बार पत्र लिख कर स्थिति से अवगत कराया।”

“ऊपर जो कम्पाउंडिंग का जिक्र किया गया है, उसका अर्थ हुआ कि अगर किसी ने अपने घर में बिना अनुमति कुछ ज़रूरी फेरबदल किया है तो उस व्यक्ति का अधिकार है कि वह कम्पाउंडिंग की प्रक्रिया के लिए आवदेन करे। इसके बाद नगर निगम वाले 6 महीने के भीतर इस प्रक्रिया को पूरी करते हैं, ऐसा मध्य प्रदेश का नियम कहता है। नियमानुसार, अगर किसी व्यक्ति ने अपने मकान में 10% फेरबदल किया है तो 6 महीने के भीतर कम्पाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी करनी है। मेरे फेसबुक पोस्ट में उस नियम का स्क्रीनशॉट आप देख सकते हैं। इसके बाद सारा खेल शुरू हुआ। इंदौर के अधिकारी पीएस कुशवाहा का मेरे पास फोन कॉल आया। वो इंदौर से बड़े अधिकारी हैं।”

“कुशवाहा इंदौर के भवन अधिकारी हैं और कमिश्नर के बाद सबसे ताक़तवर अधिकारियों में उनका नाम गिना जाता है। उन्होंने कहा कि पहले आप अपने पड़ोसी के विवाद सुलझाएँ, उसके बाद ही हम कोई कार्रवाई कर पाएँगे। मैंने अपने घर में एक रेनवाटर हार्वेस्टिंग शेड बनाया था क्योंकि हमारे यहाँ फरवरी-मार्च में पानी ख़त्म हो जाता है। पड़ोसी ने मुझे वह भी हटाने को कहा, ऐसे में विवाद कैसे सुलझाया जा सकता है? नगर निगम ने मुझे साफ़-साफ़ कह दिया कि जब तक आप अपने पड़ोसी की ‘टर्म्स एन्ड कंडीशन’ पर नहीं आ जाते, आपका मकान तोड़ना ही पड़ेगा। इसके अलावा उन्होंने मेरे कम्पाउंडिंग के आवेदन को प्रोसेस करने से मना कर दिया।”

“यह सब नियम के ख़िलाफ़ हुआ क्योंकि कम्पाउंडिंग की प्रक्रिया को अधिकारी 6 महीने से ज्यादा नहीं खींच सकते, अपने फेसबुक पोस्ट में मैंने इसका सबूत भी पेश किया है। अर्थात, अधिकारीगण अपने हाथ में क़ानून लेकर बैठे हैं। ऐसे में अगर कुछ लोग कह रहे हैं कि आकाश विजयवर्गीय ने सही किया, तो इसमें क्या ग़लत है? पिछले साल सितंबर में ही मैंने आवेदन किया था, आप गिन लीजिए कितने महीने हो गए? अब नियम यह है कि अगर अधिकारी ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। मैं अपनी शिकायत लेकर सीएम हेल्पलाइन में गया।”

“सीएम हेल्पलाइन में किसी भी शिकायत को 15 दिनों के भीतर निपटाना होता है नहीं तो वो एक लेवल ऊपर चली जाती है और अगर फिर देर हुई तो उसका लेवल बढ़ता चला जाता है। मेरी कंप्लेंट फाइनल और चौथे लेवल पर पहुँच गई लेकिन नगर निगम ने लिखा कि विधि अनुसार कार्रवाई हो रही है, इसीलिए इस कंप्लेंट को ‘फ़ोर्स क्लोज़’ किया जाए। विधि तो कहता है कि 6 महीने में कम्पाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी करनी है, तो कैसी विधि अनुसार कार्रवाई? नगर निगम किसी क़ानून से नहीं चल रहा है बल्कि दादागिरी से चल रहा है। पैरवी से काम होता है। मेरे पड़ोसी का रिश्तेदार कमिश्नर था तो उसके फोन कॉल से काम हो सकता है लेकिन मेरे जैसे आम आदमी का काम नहीं हो सकता।”

“मेरा केस नगर निगम की दादागिरी का जीता-जागता सबूत है। ये रहा मेरा मामला, अब कुछ और बातें भी हैं जो आपके जानने लायक है। इंदौर में अधिकतर अतिक्रमण हटाने का कार्य होली और दिवाली में किया जाता है। आपको पता है क्यों? क्योंकि इस दौरान अदालतें बंद रहती हैं। रविवार के आसपास पर्व-त्योहारों के होने से वकील भी छुट्टी पर होते हैं और अदालतें भी 4-5 दिन बंद रहती हैं। अगर किसी का घर टूट रहा है और वो कोर्ट से स्टे लेना चाहे, तो वो नहीं ले सकता। इसीलिए नहीं ले सकता क्योंकि कोर्ट तो बंद है। रंगपंचमी भी मनाया जाता है, अतः ये सब त्यौहार लम्बे खिंच जाते हैं। ऐसे में नगर निगम का सीधा 3 दिन का नोटिस आता है कि घर तोड़ दिया जाएगा। लोगों के पास कोर्ट जाने का भी विकल्प नहीं बचता।”

“अब सबसे महत्वपूर्ण बात। अगर हिन्दू पर्व-त्योहारों पर लोगों के घर तोड़ दिए जाएँ तो जनता गुस्सा कहाँ निकालेगी? जो लोग महीनों से इन पर्व-त्योहारों को लेकर इन्तजार में रहते हैं, प्लानिंग करते हैं- उनका घर इन्हीं पर्व-त्योहारों के दौरान तोड़ डाला जाता है। स्पष्ट है, उनका गुस्सा हिंदूवादी नेताओं पर निकलेगा। जनता सोचेगी कि हिंदूवादी नेताओं के रहते उनके घर तोड़ दिए जा रहे हैं। इसके बाद जनता स्थानीय नेताओं पर दबाव बनाना शुरू करती है। स्थानीय पार्षद से लेकर विधायक तक के पास लगातार शिकायतें पहुँचती रहती हैं। और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की इज़्ज़त यह है कि उन्हें अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ कर निवेदन करना होता है कि फलाँ काम ज़रूरी है, इसे निपटाया जाए।”

“लोगों को ऐसा लगता है कि स्थानीय विधायक बहुत मजबूत है, उसके हाथ में सब कुछ है। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय के ख़ास लोग भी अगर नगर निगम में बात करते हैं तो कुछ नहीं होता है। अधिकारियों के सामने नेताओं की इज़्ज़त धूल बराबर भी नहीं रह गई है। ऐसा नहीं है कि मैंने कोशिश नहीं की। मैंने कैलाश विजयवर्गीय की तरफ़ से भी अधिकारियों को फोन करवाया लेकिन फिर भी मेरी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई- रत्ती भर भी नहीं। इससे पहले कॉन्ग्रेस के भी कई नेताओं ने अतिक्रमण हटाने गए अधिकारियों को भगाने का काम किया है, यह पहली बार नहीं हुआ है।”

“इंदौर स्वच्छता रैंकिंग में देश में नंबर एक है, क्योंकि यहाँ कॉन्ट्रैक्ट पर साफ़-सफाई के लिए कर्मचारी रखे गए हैं, बहुत सी चीजें प्राइवेट हाथों में दी गई हैं। इसमें किसी भी कार्य के लिए सीधा 30-40 लोग भेजे जाते हैं, वो लोग आकर आपका घर तोड़ देंगे और आप कुछ नहीं कर सकते। इसके अलावा एक मानवीय पहलू भी है। जो भी ठेला लगाने वाले हैं, उन्हें भी नगर निगम द्वारा परेशान किया जाता है। उनके ठेले को सीधा पलट दिया जाता है। रोज़ दिन भर मेहनत कर के घर चलाने वाले लोगों से भी अमानवीय व्यवहार कहाँ तक उचित है? इंदौर से तीसरी बार विधायक बने रमेश मंडोला ने एक ठेले वाले को पत्र लिख कर दिया था ताकि वह नगर निगम की कार्रवाई से बच सके।”

“उस पत्र में लिखा था कि अमुक ठेले वाले के दिल में छेद है, अतः उसे ठेला लगाने दिया जाए। यह उसके भरण-पोषण के लिए ज़रूरी है। उस व्यक्ति के पास आय कमाने का कोई दूसरा स्रोत नहीं था। जब उसने नगर निगम के अधिकारियों को विधायक की चिट्ठी दिखाई तो भी उसके ठेले को पलट दिया गया और उसका सामान बिखेड़ दिया गया। ग़रीबों से इस प्रकार के व्यवहार के कारण इंदौरवासी नगर निगम के अधिकारियों से क्रोधित हैं। इसी से समझ लीजिए कि वहाँ जनप्रतिनिधियों की इज़्ज़त क्या है? इंदौर में साफ़-सफाई का सिस्टम प्राइवेट हाथों में है, जिस कारण स्वच्छता के मामले में यह नंबर एक है।”

“जो सही है, उसे सही कहना चाहिए। नगर निगम ने स्वच्छता के मामले में अच्छा काम किया है। अगर किसी के घर के बाहर कचरा पड़ा हुआ है तो उसके एक फोन कॉल से उसे हटा दिया जाता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारियों व निचले लेवल के अधिकारियों पर कार्रवाई हो जाती है। इस कारण वे काफ़ी तेज़ी से कार्य निपटाते हैं। अगर एक बार साफ़-सफाई का अच्छा माहौल बना दिया जाए तो उसके बाद आम नागरिक भी जागरूक हो जाता है और जनता भी सहयोग करने लगती है, गंदगी नहीं फैलाती। लेकिन, इसका अर्थ ये नहीं कि नगर निगम भ्रष्टाचार से परे है। मकान बनवाने के लिए और मकान टूटने से बचाने के लिए, इन दोनों ही स्थितियों में नगर निगम के अधिकारी घूस से अच्छा-ख़ासा रुपया कमाते हैं।”

“स्थिति यह है कि बिना घूस खिलाए आप न नया मकान बनवा सकते हैं और न पुराने मकान को टूटने से बचा सकते हैं। अगर आपको एक खिड़की तक बनवानी है (ऐसे जो भी कार्य, जिसमें सीमेंट और ईंट का प्रयोग किया जाता है), तो आपको घूस देना होगा। अगर आप बिल्डिंग परमिशन के लिए नगर निगम जाते हैं तो वहाँ आपसे नक्शा माँगा जाएगा और कहा जाएगा कि बाहर सिविल इंजीनियर बैठे हैं, उनसे नक्शा बनवा कर लाओ। जब आप बाहर जाते हैं तो सिविल इंजीनियर आपके मकान का पूरा पता पूछेगा, जिसके बाद यह कि किस-किस को रुपए खिलाने हैं। 10-15 हज़ार रुपए तो सिविल इंजीनियर अपनी फी बोल कर ही ऐंठ लेते हैं।”

“बाकी जिसको भी लगता है कि मैं ग़लत बोल रहा हूँ, वो इंदौर आए और मेरा अधूरा कार्य करवा दे, मैं मान जाऊँगा कि मैं ग़लत हूँ। इसीलिए मैं कहता हूँ- ‘वेल डन आकाश विजयवर्गीय’। मैं इसीलिए हवा में न्यूज़ देख कर अपना ओपिनियन नहीं बनाता हूँ। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है, जिसके कारण मैंने विधायक आकाश की इस कार्रवाई को जायज ठहराया है।”

अंग्रेज अफसर के टकले पर गुलाल मलने वाले सिख महाराजा का पाकिस्तान में बना स्मारक

19वीं सदी में पंजाब पर शासन करने वाले महाराजा रणजीत सिंह की 180वीं पुण्यतिथि (जो कि 29 जून को है) के मौक़े पर लाहौर में आज (जून 27, 2019) उनके स्मारक का अनावरण होगा। महाराजा ने 40 साल तक शासन किया था।

महाराजा रणजीत सिंह का जीवन स्मारक

यह स्मारक लाहौर किले में माई जिंदियन हवेली के बाहर एक खुली जगह में बना है, जहाँ रणजीत सिंह की समाधि और गुरु अर्जुन देव के गुरुद्वारा डेरा साहिब की इमारत भी है। यह हवेली रणजीत सिंह की सबसे छोटी रानी के नाम पर है जहाँ पर सिख कलाकृतियों की एक स्थायी प्रदर्शनी है, जिसे सिख गैलरी कहा जाता है।

आयोजन के निमंत्रण पत्र के अनुसार, रणजीत सिंह की 8 फीट ऊँची प्रतिमा, जिसमें उन्हें घोड़े पर चढ़ा हुआ दिखाया गया है वह लाहौर के Walled City of Lahore Authority (WCLA) के तत्वाधन में स्थापित किया जा रहा है और यह सब ब्रिटेन स्थित सिख संस्था, एसके फाउंडेशन के सहयोग से हो रहा है।

दैनिक जागरण खबर के मुताबिक शहर के महानिदेशक कामरान लशैरी ने बताया है, “जैसा कि आप जानते हैं धार्मिक पर्यटन हमारी सरकार के मुख्य विषयों में से एक है। करतारपुर साहिब, ननकाना साहिब को इस सरकार से अधिक ध्यान मिला है। रणजीत सिंह की प्रतिमा भी उसी का एक हिस्सा है।”

लशैरी ने इंडियन एक्सप्रेस से हुई फोन पर बातचीत में बताया कि यह सही है कि प्रतिमा का अनावरण लाहौर में किया जा रहा है, जहाँ रणजीत सिंह ने 1801-1939 तक पंजाब पर शासन किया। इसके आयोजन में पाकिस्तान सरकार ने रणजीत सिंह की पुण्यतिथि के लिए भारत के सिख तीर्थ यात्रियों को 450 से अधिक वीजा भी जारी किए हैं। जबकि खबरों के अनुसार इस्लामाबाद में मौजूद इंडियन हाई कमीशन के किसी भी प्रतिनिधि को आयोजन में आमंत्रित नहीं किया गया है।

महाराजा रणजीत सिंह

बता दें रणजीत सिंह का स्मारक फ़कीर सैयद सैफ़ुद्दीन के निर्देशन में लाहौर के नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट और नक़्श स्कूल ऑफ़ आर्ट के तीन कलाकार-मूर्तिकारों द्वारा बनाया गया था। सैफ़ुद्दीन के मुताबिक यह स्मारक कोल्ड ब्रोंज तकनीक के इस्तेमाल से बनाया गया है, जिसे बनने में लगभग 8 महीने लगे और जो अमृतसर और दिल्ली में मौजूद रणजीत सिंह के स्मारकों से भी ज्यादा खूबसूरत है।

महाराजा रणजीत सिंह से जुड़ा एक किस्सा बहुत फेमस है। उन्हें होली मनाना अच्छा लगता था। इसके लिए बाग में बड़े-बड़े टेंट लगाए जाते थे, इन टेंट्स को काफ़ी अच्छे से सजाया जाता था और दोनों तरफ से सैनिकों से सुसज्जित रखा जाता था। उस दिन बाग की शोभा देखते ही बनती थी। रणजीत सिंह की होली पर अंग्रेज अधिकारी भी आमंत्रित रहते थे। अक्सर होली पर महाराजा सर हेनरी नाम के एक अंग्रेज अफसर के टकले पर गुलाल मल दिया करते थे।

नीरव मोदी और बहन के स्विस खाते फ्रीज़, अवैध रूप से लगभग ₹300 करोड़ हैं जमा

हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी हीरा व्यापारी नीरव मोदी को बड़ा झटका लगा है। नीरव मोदी और उसकी बहन के चार बैंक खातों को स्विट्जरलैंड में फ्रीज कर दिया गया है जिनमें अरबों रुपये जमा हैं। 

स्विस अधिकारियों ने नीरव मोदी और उसकी बहन पूर्वी मोदी के खातों को फ्रीज किया है जिनमें करीब 283.16 करोड़ रुपये की राशि जमा है। स्विट्जरलैंड ने यह कार्रवाई भारतीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अपील पर की है। ED ने कहा था कि इन खातों में भारतीय बैंकों से अवैध तरीके से धन ट्रांसफर किया गया है। 

देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले का आरोपी नीरव मोदी इस समय ब्रिटेन की जेल में बंद है। उसे मार्च में गिरफ्तार किया गया था। भगोड़े हीरा कारोबारी को आज लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में नियमित हिरासत पर सुनवाई के लिए पेश किया जाएगा।

हरियाणा कॉन्ग्रेस नेता विकास चौधरी की गोली मारकर हत्या

हरियाणा कॉन्ग्रेस नेता विकास चौधरी की आज (जून 27, 2019) सुबह फरीदाबाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

जानकारी के अनुसार, सुबह जिम से निकलते समय उन्हें अज्ञात बदमाशों ने 10 गोलियाँ मारीं। ये घटना सेक्टर-9 स्थित पीएचसी जिम के बाहर हुई, जहाँ विकास प्रतिदिन एक्सरसाइज करने के लिए आते थे। 

घटना के तुरंत बाद ही सेक्टर-9 के कुछ दुकानदारों के सहयोग से उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बता दें कि विकास चौधरी हाल ही में इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) को छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हुए थे।

असहिष्णुता? ‘हेट क्राइम’ की दर्जन भर घटनाएँ, जो फर्ज़ी साबित हुईं – लक्ष्य था हिंदुओं को बुरा दिखाना

हाल-फिलहाल में ऐसी कई फर्ज़ी ‘हेट क्राइम’ की घटनाएँ रिपोर्ट हुईं और उन्हें ठीक-ठाक मीडिया कवरेज भी दिया गया। क्यों? इस पर चर्चा बाद में, फिलहाल, इतनी मीडिया हाइप के बाद भी उसमें से अधिकांश ‘हेट क्राइम’ की घटनाएँ फर्ज़ी साबित हुई। हालाँकि, ऐसे ताबड़तोड़ मीडिया कवरेज ने ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ वाले नैरेटिव को बिल्डअप करने में बड़ी भूमिका निभाई जबकि हिन्दुओं के साथ घटित वास्तविक ‘हेट क्राइम’ की घटनाओं का इस पूरे मीडिया गिरोह द्वारा जमकर अनदेखी की गई।

यहाँ ऐसे ही कुछ ‘हेट क्राइम की लिस्ट’ है जो बाद में पूरी तरह झूठी निकली

1. गुरुग्राम हेट क्राइम (मई 2019)

“मुस्लिम युवक बरक़त अली की गुरुग्राम के सदर बाजार में कुछ हिन्दुओं ने की पिटाई” की खबर सोशल मीडिया के साथ मुख्यधारा की मीडिया में भी तेजी से वायरल हुई। जैसे ही बीजेपी के नवनिर्वाचित सांसद गौतम गंभीर ने इस घटना को ‘हेट क्राइम’ की संज्ञा और ‘सेक्युलरिज़्म’ का पाठ पढ़ाते हुए ट्वीट किया, इस मामले ने और भी जोर पकड़ लिया।

कई मुख्यधारा के मीडिया चैनलों और पूरे मीडिया गिरोह ने इस घटना को मुस्लिम विरोधी ‘हेट क्राइम’ के रूप में रिपोर्ट किया था। सोशल मीडिया पर, इस घटना को कई प्रभावशाली लोगों द्वारा समुदाय विशेष के खिलाफ बढ़ती ‘असहिष्णुता’ और हिंसा के मामले के रूप में परोसा गया था।

इस मामले में, कथित पीड़ित, बरकत अली ने दावा किया कि उसकी पिटाई करने वाले लोगों के एक समूह ने उसकी ‘टोपी’ निकाल दी थी और दावा किया था कि उसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा गया था। हालाँकि, पुलिस ने इस मामले के तथ्यों की छानबीन के बाद कहा कि यह ‘हेट क्राइम’ नहीं था। गुरुग्राम पुलिस ने यह भी कहा था कि यह घटना, शराब पीकर एक मामूली विवाद का था।

हालाँकि, पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। पीड़ित द्वारा दिए गए बयान में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए उसे मजबूर नहीं किया गया था और ना ही उसे सूअर का मांस खिलाने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने यह भी कहा था कि सीसीटीवी फुटेज से यह देखा जा सकता है कि पूरी घटना महज एक मिनट के भीतर खत्म हो गई थी। पुलिस ने कहा था कि कुछ ‘असामाजिक तत्व’ घटना को सांप्रदायिक रंग में रंगने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस ने यह भी कहा कि पूरी घटना को सांप्रदायिक स्पिन देने के लिए बरकत अली को शायद समझाया गया होगा। सीसीटीवी फुटेज से यह भी पता चला कि किसी ने भी जानबूझकर उसकी टोपी नहीं निकाली थी और यह गलती से गिर गया था। एक मिनट के भीतर ही पूरी बात खत्म हो गई थी।

2. गुरुग्राम सड़क पर झड़प की घटना (मई 2019)

रोड रेज की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, गुरुग्राम में एक डॉ. नारुल को भीड़ द्वारा पीटा गया जब वह इफ्तार के लिए दूध खरीदने गए थे। हालाँकि, टाइम्स समूह की वेबसाइट IndiaTimes.com ने अपनी रिपोर्ट में थोड़ा सा ट्विस्ट देकर इसे सांप्रदायिक एंगल देने के लिए रोड रेज को ‘हेट क्राइम’ घोषित करने का फैसला कर लिया।

डॉ. नारुल अपनी बलेनो कार से दूध खरीदने के लिए रात करीब 8 बजे अर्डी सिटी गए थे जहाँ दो लोग अपनी फॉर्च्यूनर कार से उतरकर उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगते हैं। डॉ. नारुल का कहना था कि जब उन्होंने उन्हें बताया कि वे सड़क के गलत साइड से आ रहे हैं, तो दोनों ने कुछ अन्य लोगों को फोन किया, जिन्होंने उनके साथ मारपीट की, यह घटना, स्पष्ट रूप से रोड रेज का मामला प्रतीत हो रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि जब उन्हें पीटा जा रहा था, तो उन्होंने किसी को यह कहते सुना कि वह (डॉ. नारुल) एक मुस्लिम हैं और इसलिए उन्हें (कथित तौर पर पिटाई करने वाले पुरुष) को छोड़ देना चाहिए क्योंकि इस घटना से सांप्रदायिक दंगे हो सकते हैं।

टाइम्स की एक अन्य वेबसाइट इंडियाटाइम्स ने इस कहानी को एक सांप्रदायिक एंगल देकर पुन: पेश किया। हेडलाइन में लिखा, “मुस्लिमों को छोड़ देना चाहिए” चिल्लाते हुए भीड़ ने डॉ. नारुल की पिटाई की”, जबकि वास्तव में, वे उस समय भाग गए जब उन्हें एहसास हुआ कि वे जिस व्यक्ति की पिटाई कर रहे थे, वह मुस्लिम था। हालाँकि, इस पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद, इंडियाटाइम्स ने बाद में अपना शीर्षक बदल दिया।

3. दिल्ली मदरसा टीचर की घटना (जून 2019)

21 जून को एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा दावा किया गया था कि ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने से इनकार करने के बाद उसे एक कार द्वारा कथित रूप से धक्का दे दिया गया था, इसके बाद एक और विवाद छिड़ गया था। मोहम्मद मोमिन नामक एक मदरसा शिक्षक ने आरोप लगाया था कि दिल्ली के रोहिणी सेक्टर में हिंदू धार्मिक नारे लगाने से इनकार करने के कारण उसके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और फिर वे कार से भाग गए।

हालाँकि, चश्मदीदों ने मोमिन के आरोपों को गलत बताया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “घटना के कुछ चश्मदीदों द्वारा दिए गए बयान पीड़ित द्वारा किए गए दावों की पुष्टि नहीं करते हैं लेकिन जाँच जारी है”। अपराध स्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज भी आरोपों को साबित नहीं कर पाए हैं।

इस घटना के बाद भी, ‘लिबरल-सेक्युलर’ मीडिया गिरोह ने मदरसा शिक्षक पर हमला करने के लिए हिंदुओं पर हमला करना शुरू कर दिया था। सेक्युलर मीडिया ने मोमिन में एक नया शिकार ढूँढ लिया था, जिसका इस्तेमाल वे आगे चलकर ‘मुस्लिम पीड़ितों’ के बारे में एक झूठी कहानी गढ़ने के लिए करने वाले थे।

4. आपराधिक घटना को दिया सांप्रदायिक मोड़, (जून 2017)

यह घटना राजस्थान के नागौर जिले की है, जहाँ लोगो के एक समूह ने अपने चेहरे छुपाते हुए कुछ लोगों को कैमरे पर गाली-गलौज करते हुए और एक महिला को प्लास्टिक के पाइप से पीटते हुए, उसे जबरन धार्मिक नारे लगाने के लिए दबाव डालते हुए रिकॉर्ड किया। यह स्पष्ट नहीं था कि इस घटना को किसने रिकॉर्ड किया था, लेकिन वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि लोग महिला को ‘अल्लाह’ और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर कर रहे थे।

इस घटना में भी, मीडिया गिरोह के लोगों ने ‘अल्लाह’ वाले हिस्से को आसानी से अनदेखा कर दिया और पूरी घटना को सांप्रदायिक स्पिन देने के लिए केवल ‘जय श्री राम’ भाग पर ध्यान केंद्रित किया। जबकि, यह घटना पूरी तरह से आपराधिक थी और सांप्रदायिक स्पिन के बिना भी अपने आप में काफी भयावह थी।

5. जुनैद की घटना (जून 2017)

22 जून को 17 वर्षीय जुनैद दिल्ली में ईद की खरीदारी के बाद अपने भाइयों के साथ घर लौट रहा था। कथित रूप से उसे बल्लभगढ़ और मथुरा स्टेशनों के बीच दिल्ली-मथुरा पैसेंजर ट्रेन में आपसी झड़प में चाकू मार दिया गया था।

यह लड़ाई सीट पर बैठने को लेकर शुरू हुई थी और बाद में इस घटना में धार्मिक एंगल को भी इस लड़ाई का हिस्सा बना दिया गया था, लेकिन अधिकांश मीडिया रिपोर्टों ने इस मामले को ‘बीफ’ से संबंधित लिंचिंग के रूप में उजागर किया। इस मामले में पुलिस जाँच में पता चला था कि न तो शिकायतकर्ता और न ही आरोपित ने गोमांस के बारे में बात की थी।

जबकि, कई मीडिया हाउस ने दावा किया था कि जुनैद को इस संदेह के कारण मारा गया था कि वह ‘गोमांस’ ले जा रहा था। फिर क्या था देश का तथाकथित लिबरल और अभिजात्य वर्ग ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बवाल काट दिया था।

उच्च न्यायालय ने 28 मार्च 2018 को अपने आदेश में पुष्टि की कि लड़ाई सीट विवाद को लेकर शुरू हुई थी और अपराध का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं था। फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि लड़ाई सीटों और “जाति” के झगड़े पर शुरू हुई थी। उच्च न्यायालय के अनुसार, हिंसा के कारण के रूप में गोमांस या मजहबी दृष्टिकोण का कोई उल्लेख नहीं है।

6. तिहाड़ जेल की झूठी हेट क्राइम (अप्रैल 2019)

अप्रैल में तिहाड़ जेल में एक मुस्लिम कैदी, नब्बीर ने दावा किया था कि जेल अधीक्षक द्वारा उसकी पीठ पर ’ओम’ चिन्ह लगा दिया गया था। उसने यह भी दावा किया था कि अधिकारियों ने उसे नवरात्रि के दौरान उपवास करने के लिए मजबूर किया था और इसके लिए उसे पीटा गया था। उसने ये आरोप मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋचा परिहार के सामने लगाए थे जिन्होंने पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए थे।

जबकि, जाँच में यह बात स्पष्ट हो गई कि वास्तव में, नब्बीर अपने किसी सहयोगी द्वारा सिखाया-पढ़ाया गया था। नब्बीर ने जेल अधीक्षक को फँसाने और जेल अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए ये झूठे दावे किए थे।

07. मेरठ लॉ कॉलेज की छात्रा का झूठा दावा, मुस्लिम होने के कारण किया गया परेशान (अप्रैल 2019)

ट्विटर पर एक लॉ स्टूडेंट, उमाम खानम ने अपने साथी छात्रों और अपने फैकल्टी के सदस्यों के ख़िलाफ़ परेशान किए जाने संबंधी गंभीर आरोप लगाए थे। अपने ट्वीट्स में खानम ने दावा किया था कि परेशान करने वाले छात्र शराब के नशे में थे और छात्रों ने उसे बीजेपी की टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। खानम ने कहा कि उसे इसलिए परेशान किया गया क्योंकि उसने वो टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। साथ ही, खानम ने वहाँ मौजूद पुरुष अध्यापकों पर भी इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करने के झूठे आरोप लगाए थे।

इस मामले की जाँच करने पर चिंतित नेटिजन्स ने पाया कि उनके ट्वीट थ्रेड में जिन पुरुष अध्यापकों का उल्लेख किया गया है, वह मेरठ के दीवान लॉ कॉलेज के विभागाध्यक्ष थे। इसके बाद जब H.O.D अम्बुज शर्मा से संपर्क किया तो पता चला कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था। H.O.D शर्मा ने पुष्टि की कि खानम वास्तव में कॉलेज की छात्रा हैं और वह ख़ुद इस ट्रिप पर जाने वाले शिक्षकों में से एक था। उन्होंने यह भी दावा किया कि खानम के आरोप बेबुनियाद हैं। उसका सच से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था।

08. दिल्ली मालवीय नगर की घटना (अक्टूबर 2018)

मीडिया ने बताया कि मोहम्मद अजीम नाम के 8 साल के मदरसा छात्र को कथित तौर पर कुछ युवाओं ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। यह मामला दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के बेगमपुर का था। JNU छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद ने नदीम खान के फेसबुक विडियो का लिंक ट्वीट करते हुए लिखा, ‘भारत में मुस्लिमों के साथ हेट क्राइम बढ़ रहे हैं। एक हैरान कर देने वाली घटना के तहत साढ़े सात साल के बच्चे अजीम को दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर में लिंच किया गया।’ शेहला ने अपने ट्वीट में पीएम नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा।

लेकिन खुद अजीम के पिता ने बताया था कि यह मामला दो गुटों के बच्चों के बीच झगड़े का है, जिसमें उनके बेटे को मैदान में खड़ी बाइक पर फेंका गया और अंदरूनी चोट से उसकी जान चली गई। उन्होंने कहा- “यह सांप्रदायिक झड़प नहीं थी। मेरे बेटे की मौत दुर्घटनावश हुई। कृपया इस मामले का राजनीतिकरण न करें।” देश भर में ‘डरा हुआ मुस्लिम’ नाम का प्रपंच रचने वाले स्वघोषित एक्टिविस्ट्स ने जब इसे ‘लिंचिंग’ और ‘हेट क्राइम’ साबित करने का प्रयास किया तो ऑपइंडिया ने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन से जानकारी में पाया कि यह हेट क्राइम का मामला था ही नहीं।

09. मणिपुर में गाय चोरी के आरोप में मदरसा के हेडमास्टर की हत्या (नवंबर 2015)

मणिपुर के पूर्वी इंफाल जिले के केइराओ गांव में 55 साल के मोहम्मद हसमद अली का शव उनके घर से 5 किलोमीटर की दूरी पर बरामद किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, गाय का बछड़ा चुराने के आरोप में स्कूल के हेडमास्टर हसमद अली की हत्या की गई। जबकि हसमद अली के बड़े बेटे का कहना था कि यह जमीन विवाद के कारण की गई हत्या थी और यह आरोप दूसरे धर्म पर थोप दिया ताकि वो खुद बच सके।

हेडमास्टर के बेटे ने आरोप लगाते हुए यह भी स्पष्ट बताया था कि उसके पड़ोसी मुहम्मद अमु और उसके भाई के साथ जमीन विवाद के चलते यह हत्या की गई थी। इसके बाद गाँव वालों ने मुहम्मद अमु के घर को भी आग के हवाले कर दिया था।

10: जय श्री राम: फर्जी हेट क्राइम, तेलंगाना (जून 2019)

भूतपूर्व AIMIM के नेता, जो कि अब मजलिस बचाव तहरीक के नेता हैं, ने ट्विटर पर एक ट्वीट शेयर करते हुए कहा था कि तेलंगाना के करीमनगर में एक मुस्लिम युवक ‘जय श्री राम’ ना बोलने के कारण पीटा गया। यह ट्वीट अन्य सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी शेयर किया था।

हालाँकि, करीमनगर पुलिस कमिश्नर ने एक वीडियो शेयर करते हुए स्पष्ट किया था कि यह मुस्लिम युवक आपसी विवाद के कारण पीटा गया था ना कि ‘जय श्री राम’ ना बोलने की वजह से। उन्होंने यह भी बताया कि एक टीनएजर युवती से छेड़खानी करने के कारण उस पर पहले से ही FIR भी दर्ज है। इस मुस्लिम युवक के पिता ने भी स्वयं बाद में मीडिया को बताया कि उनके बेटे को उसकी गलती की वजह से पीटा गया, ना कि किसी साम्प्रदायिक वजह से।

11. रानाघाट, कोलकाता नन बलात्कार (मार्च 2015)

मार्च 14, 2015 को बांग्लादेशी अपराधियों के एक गिरोह ने कोलकाता के नदिया जिले में रानाघाट स्थित जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट पर हमला कर वहाँ लूटपाट की थी और इसका विरोध करने पर 71 साल की एक नन के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। इस घटना में बांग्लादेश के एक गिरोह का हाथ था जो अवैध तरीके से भारत में रह रहा था। इस केस में मोहम्मद सलीम शेख़ को उसके अन्य 5 साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन इस पूरे प्रकरण में मेनस्ट्रीम मीडिया ने बलात्कार को किनारे रखकर इसके लिए आरएसएस और हिंदुत्व के विचारकों को जिम्मदार बताया था।

12. बरुन कश्यप काण्ड (2016)

मुंबई के रहने वाले फिल्म एग्जीक्यूटिव बरूण कश्यप के साथ अगस्त 2016 के दौरान मुंबई में गोरक्षकों द्वारा दुर्व्यवहार का बेहद हास्यास्पद मामला सामने आया था। बरुन एक प्रोडक्शन हाउस में क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। बरूण ने आरोप लगाया था कि एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने उसके चमड़े के बैग को देखकर यह कहते हुए उसके साथ अभद्रता की थी कि उसका बैग गाय के चमड़े से बना है।

बरूण ने इस ‘चमड़ा बैग प्रकरण’ की जानकारी तब फेसबुक के जरिए दी थी। वरूण ने मुंबई के डीएन नगर में इस मामले में 19 अगस्त को एक एफआईआर भी दर्ज कराई थी। लेकिन तुरंत इस प्रकरण की सच्चाई सामने निकलकर आई। दरअसल, वरूण कश्यप ने पुलिस के सामने कबूल किया कि वह हिंदुओं से नफरत करता है, इसीलिए उसने सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश की थी। पुलिस ने बताया कि बरुन जानबूझकर पीड़ित बना था और गौरक्षकों की हिंसा का शिकार होने का नाटक कर वह न सिर्फ मुंबई में बल्कि पूरे देश में सांप्रदायिक सदभाव बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था।

इस बीच सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स ने बरुन की इस झूठी स्टोरी से जमकर उपद्रव मचाया। बरुन कश्यप को 4 अक्टूबर 2016 को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिस पर IPC की धारा 153A (समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और 182B ( झूठी एफआईआर दर्ज कराने) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

पहली बार मौका है, दूसरा संयोग है, तीसरा एक पैटर्न है और जब एक दर्जन बार हो तो क्या मतलब है?

जैसा कि स्पष्ट है, यहाँ एक निश्चित पैटर्न उभर रहा है। ये उनमें से केवल दर्जन भर घटनाएँ हैं। ‘हेट-ट्रैकर’ के माध्यम से नकली ‘हेट क्राइम’ के निर्माण के लिए ये फेक घटानएँ पूरी तरह समर्पित हैं, जो डाटा और फैक्ट को तोड़ मरोड़कर, ट्वीस्ट देकर लोगों को ठगती है और मुस्लिमों को बारहमासी पीड़ित और हिंदुओं को निर्दयी हमलावरों के रूप में चित्रित करने के लिए ऐसी घटनाओं में तमाम तरह की हेरफेर की जाती है।

वास्तविकता, हालाँकि, काफी अलग है। हमने 2016 से मुस्लिमों द्वारा किए गए हिंदुओं के खिलाफ 50 हेट क्राइम की एक सूची प्रकाशित की, जिसमें से एक या दो को छोड़कर, ऊपर वर्णित फर्ज़ी ‘हेट क्राइम’ का बहुत थोड़ा हिस्सा भी पत्रकारिता के इस गिरोह ने रिपोर्ट नहीं किया, क्योंकि यह इनके नैरेटिव को शूट नहीं करता।

इसलिए, किसी को आश्चर्य होता है कि यहाँ एंडगेम क्या है? पहला, निश्चित रूप से, सांप्रदायिक हिंसा विधेयक के कार्यान्वयन को देखने की इच्छा हो सकती है, जो स्वाभाविक रूप से हिंदुओं को अपराधी और समुदाय विशेष को हर बार पीड़ित ही मानता है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ‘हेट क्राइम’ के लिए एक नया कानून बनाने का भी वादा किया था।

दूसरी संभावना कहीं अधिक भयावह है। मुख्यधारा के मीडिया का उद्देश्य वस्तुनिष्ठ सत्य को रिपोर्ट करना नहीं है, इसका प्राथमिक उद्देश्य उन घटनाओं से ध्यान हटाना है, जो यह फर्ज़ी नैरेटिव सेट करने वाली शक्तियाँ नहीं चाहतीं कि जनता इन पर ध्यान केंद्रित करे। इसलिए, ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यधारा का मीडिया इन फर्ज़ी हेट क्राइम की कहानियों को हिंदुओं के खिलाफ होने वाले वास्तविक घृणित अपराधों से ध्यान हटाने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ और किसी भी आलोचना से अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ वर्गों की विषाक्त मान्यताओं को ढालने के उद्देश्य से कर रहा है।

इन संभावनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। नकली ‘हेट क्राइम’ की कहानियों में हालिया स्पाइक यौन अपराधों और मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ किए गए हेट क्राइम के साथ मेल खाता है। इस प्रकार, यह प्रतीत होता है कि इन वास्तविक घटनाओं की खबरों को दबाने के लिए नकली हेट क्राइम की फर्ज़ी कहानियों का आविष्कार किया जाता है।

इसमें राजनीतिक मंशा भी शामिल है। लेकिन यह तथ्य है कि फर्ज़ी हेट क्राइम की घटनाएँ हिंदुओं के खिलाफ की गई हेट क्राइम की श्रृंखला से अधिक ध्यान आकर्षित करते हैं, यह पैटर्न वास्तव में गहरी चिंता का विषय है।

CM आदित्यनाथ योगी का आदेश, 9 बजे तक दफ़्तर पहुँच जाएँ वरना नपेंगे अफसर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश सरकार के सभी अधिकारियों को सुबह नौ बजे तक कार्यालय पहुँचने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री का सख़्त आदेश है कि प्रदेश के सभी कार्यालयों में इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाए। इस जानकारी को ट्विटर पर शेयर किया गया है, इसमें साफ़तौर पर लिखा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने सूबे के अधिकारियों-ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हर हाल में सुबह नौ बजे तक दफ़्तर पहुँचने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सख़्त निर्देश दिए कि सभी अधिकारी तत्काल प्रभाव से इसका पालन करें और ऐसा नहीं होने पर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है। 

ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरिद्वार प्रवास के दौरान अलकनंदा घाट के किनारे यूपी पर्यटन निगम द्वारा निर्माणाधीन पर्यटक गृह भागीरथी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से इसके डिज़ाइन को लेकर जानकारी प्राप्त की। बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने 29 मई 2018 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति में अलकनंदा होटल के पास अलकनंदा घाट के किनारे 41 करोड़ की लागत से बनने वाले 100 कमरों के पर्यटक आवास गृह भागीरथी की आधारशिला रखी थी।

लोकसभा चुनाव 2019 के बाद से ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का कड़ा रुख़ देखने को मिल रहा है। प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए उन्होंने एक के बाद एक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अभी हाल ही में उन्होंने पुलिस विभाग को भी फ़टकार लगाते हुए सख़्त रवैया अपनाया था। आज़मगढ़ ज़िले की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा था कि पुलिस प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि वर्दी के नाम पर कलंक बन चुके पुलिसकर्मियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है।

कड़ा रुख़ अपनाते हुए उन्होंने 50 के पार हो चुके नकारा पुलिसकर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का रास्ता दिखा दिया था। इसी संदर्भ में एडीजी स्थापना पीयूष आनन्द ने पुलिस की सभी इकाईयों के प्रमुखों, सभी आईजी रेंज और एडीजी ज़ोन को ऐसे नकारा पुलिसवालों की सूची 30 जून तक भेजने का पत्र लिखा है।

इसके अलावा यूपी के सीएम ने भ्रष्टाचार और बेईमान अफ़सरों के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाते हुए फ़रमान जारी किया था कि ऐसे अधिकारियों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है। भ्रष्ट और बेईमान अधिकारियों के संदर्भ में उन्होंने कहा था कि ऐसे अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले अन्यथा उन्हें सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के सख़्त रवैये के बाद सचिवालय प्रशासन द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए 30 भ्रष्ट अधिकारियों के नाम छाँटे जा चुके हैं।

पहली पत्नी के मरने पर शकील अंसारी ने की 4 महीने में 2 नई शादी: बेटी को घर से निकालने के लिए की मारपीट

दिल्ली में एक 55 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी ही बेटी को घर से निकाल बाहर करने की कोशिश की है। यह हाल ही में रणवीर सिंह की आई फ़िल्म ‘गल्ली बॉय’ की कहानी नहीं है बल्कि एक वास्तविक ख़बर है। ‘गल्ली बॉय’ में आफताब अहमद (विजय राज) एक जवान बेटा होने के बावजूद दूसरी बीवी ले आते हैं और इस कारण से उनकी बीवी और बेटे मुराद अहमद (रणवीर सिंह) को दूसरे घर में रहना पड़ता है। खैर, यह कहानी तो मुंबई की थी और थी भी तो फिल्मी थी। लेकिन ताज़ा ख़बर नोएडा से है।

नोएडा के मोहम्मद शकील अंसारी ने अपनी 28 साल की बेटी पर हमला किया और उसके साथ गाली-गलौज भी की। इतना ही नहीं, उसने अपने बेटी-दामाद को तुरंत घर छोड़ कर चले जाने को कहा। आरोपित की बेटी ने कहा कि उनकी माँ की मृत्यु इस साल फ़रवरी में हो गई थी। इसके तुरंत बाद उसके पिता ने 16 वर्षीय लड़की शहनाज़ के साथ शादी की। इस सप्ताह अंसारी ने अचानक बताया कि उसने एक और लड़की से शादी कर ली है और घर में 2 बीवियों के लिए पर्याप्त जगह बनाने के लिए बेटी-दामाद को घर से निकलना होगा।

बहलोलपुर गाँव निवासी आरोपित मोहम्मद शकील अंसारी दुकानदार है। उसकी बेटी ने बताया उन्हें उनके पिता की दूसरी शादी के बारे में तभी पता चला जब वह शहनाज़ को घर लेकर आए। इसके बाद वह व्यक्ति अपनी बेटी से लगातार कहने लगा कि उसे उसकी बीवी के लिए घर में पर्याप्त जगह चाहिए, इसीलिए बेटी-दामाद को जाना होगा। लेकिन बेटी-दामाद का मानना था कि यह शादी उनके परिवार की प्रतिष्ठा के खिलाफ है और लोग इसे ग़लत नज़रों से देख रहे हैं।

पीड़िता जन्नती ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके पिता ने उनके साथ मीरपीट भी की। दामाद ने बताया कि 2007 में जब यह प्लॉट ख़रीदा गया था, तब उन्होंने 2 लाख रुपए दिए थे और घर बनाने के लिए बाद में 5 लाख रुपए और दिए।

इस बीच आरोपित अंसारी का कहना है कि उसकी दूसरी बीवी शहनाज़ दूकान पर ही रहती है, जबकि तीसरी वाली (नई शादी, जो इस हफ्ते की) घर में रहेगी। बेटी-दामाद की शिकायत पर पुलिस ने अंसारी को हिरासत में ले लिया है।