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लप्रेकी रवीश कुमार! घर लौट आओ, तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा

व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के परम सम्मानित जातिवाचक कुलपति महोदय को ज्ञानवाचक का नमस्कार। क्योंकि मैं आपसे अक्सर सवाल पूछता रहता हूँ, इस कारण आपके अनुसार मैं स्वतः ही एक ट्रॉल भी हो जाता हूँ। लेकिन क्या आपने कभी ख़ुद भी सोचा था कि आपको सुरक्षा कारणों से ड्राइव करते समय ईयरफ़ोन लगाने होंगे और जवाबों की कमी के चलते किसी को ट्रॉल कहना पड़ेगा? ये ट्रॉल आज आपको बताना चाहता है कि यूँ ही नहीं वो ट्रॉल बन जाता है बल्कि वो आप से निराश होने के बाद ही ट्रॉल बनकर उभरा है।

पत्रकारिता के उस सुनहरे दौर को याद करते हैं, यानी वर्ष 2004 से 2014 तक का दशक, जब देश में चुनाव का माहौल नहीं हुआ करता था, प्राइम टाइम में किसी मनगढंत घोटाले के ख़िलाफ़ अख़बार की फ़र्ज़ी अधूरी कटिंग मुद्दा नहीं हुआ करती थी, प्रिंस पूरा दिन गड्ढे में गिरा रहता था, दिल्ली में बर्फ़ गिर जाया करती थी और दर्शकों को बाद में पता चलता था कि दिल्ली में बर्फ़ आसमान से नहीं बल्कि चुस्की बनाने वाली बर्फ़ की सिल्ली गिरी थी।

ये वो समय था जब ‘उभरते हुए कहानीकारों’ की जगह न्यूज़ रूम और अख़बारों में नहीं बल्कि बॉलीवुड और साहित्य में हुआ करती थी। इन सब के बीच दर्शकों को एक राहत की साँस मिली थी, रवीश की रिपोर्ट से। रवीश उस दौर में बहुत ख़ुश रहा करते थे। आपने गिर रही बर्फ़ के बीच गिर रही पत्रकारिता को दिशा दे डाली थी।

उस समय को याद करने में भी गौरव महसूस होता है, जब आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा के लिए नहीं बल्कि ‘लप्रेक’ लिखने के लिए किया करते थे। आप TV देखने पर ज़ोर दिया करते थे, क्योंकि आप जानते थे कि दर्शक TV पर रवीश को देखना चाहते थे। आपको ‘अटेंशन’ के लिए स्टूडियो में कलाकारों को नहीं लाना होता था। ‘साँय-साँय’ की हवा सिर्फ़ मौसम सम्बंधित ख़बरों तक सीमित हुआ करती थी।

अचानक आप नींद से जागे, देश में राजनीति होने लगी। सत्ता के ध्रुव और हेडक्वार्टर बदल गए, और रवीश के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वो छटपटाहट में इधर-उधर भागने लगा। मानो सत्ता नहीं रवीश के सर से आसमान सरक गया हो। उसका शब्दों का जादूगर रवीश कुमार माइक लेकर ग़रीबों की बस्ती और खेतों से उठकर किरण बेदी के क़िस्सों के बारे में रूचि लेने लगा, ख़ासकर कुछ ऐसे क़िस्सों में, जिन्होंने उन्हें एक मज़बूत महिला की छवि दी और अन्य महिलाओं को भी आगे आने लिए प्रेरणा बनाया। रवीश केजरीवाल जैसे अदाकार की खाँसी दिखाने लगा।

कॉन्ग्रेस के हाथों से सत्ता छूटी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री क्या बने कि आप ग़रीबों को भूल गए, लप्रेक की जगह आप मनुस्मृति ढूँढ-ढूँढ़कर पढ़ने लगे, वामपंथियों में आप और ज़्यादा रूचि लेने लगे। आप मेरे जैसे युवा की प्रेरणा हुआ करते थे, लेकिन जिस तरह से आप सरकार और संस्थाओं को नीचा दिखाने के लिए उन पर बेवजह लगातार आरोप लगाने के लिए प्रयासरत रहा करते हैं, उसने मुझे निराश किया है।  

आप ‘ऑड डेज़’ पर संविधान, संस्थान और लोकतंत्र में यक़ीन रखने को कहते हैं और ‘इवन डेज़’ पर कहते हैं कि ये सब संस्थाएँ बिक चुकी हैं। आप एक दिन कहते हैं कि TV मत देखिए, लेकिन दूसरे दिन रोते हैं कि NDTV की TRP नहीं आ रही है, फिर आप कहते हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह लोगों की छत पर चढ़कर उनकी केबल के तार काट रहे हैं और लोग TV नहीं देख पा रहे हैं।

हालात ये हो चुके हैं कि आप में और ‘यो बिक गई गोरमिंट’ वाली काकी में अब फ़र्क़ ख़त्म हो चुका है।आप शादी-विवाहों में दूल्हे के वो फूफा बनकर रह गए हैं, जिसकी ज़िन्दगी का बस ‘एक्के’ मक़सद रह गया है और वो है खिसियाए रहना।

पत्रकार महोदय, आपने अपने विशेष मीडिया गिरोहों, जैसे कारवाँ , द वायर, ऑल्टन्यूज़ आदि से सनसनी मचाते हुए ख़ुलासे किए, लेकिन सबका नतीजा शून्य ही रहा। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट इन सभी से विनती कर चुकी है कि संस्थाओं का समय बर्बाद ना करें और सलाह दी कि पत्रकारिता में ज़िम्मेदारी को समझें।  

इसके बाद सनसनीखेज़ ख़ुलासे और आरोपों को ठीक से जाँच परख करने के बाद ही जनता के समक्ष लाने के बजाए आपने ‘डिस्क्लेमर’ लगाना बेहतर समझा। ताकि ‘प्रोपेगैंडा ऊँचा रहे हमारा’ की क्रान्ति जारी रहे। आप दर्शकों के इस मनोविज्ञान में अब महारत हासिल कर चुके हैं। आप जानते हैं कि आपको पढ़ने वाले सब भटके हुए और मनचले युवा हैं और जो भी भविष्यवाणी आप उगलेंगे, उसे ‘ब्रह्मवाक्य’ मानकर वो लोगों को गाली देना और नीचा दिखाना शुरू कर देंगे।

हाल ही में राफ़ेल डील की आधी जानकारी को लेकर आपके चरमोत्कर्ष को देखना सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। कॉन्ग्रेस पार्टी की मोदी सरकार को लेकर छटपटाहट एक बार के लिए स्वीकार्य है, क्योंकि वो आम चुनाव से पहले किसी ना किसी तरह से मोदी सरकार को घेरने के लिए कोई न कोई घोटाले का आरोप लगाना चाहते हैं। प्रोपेगैंडा पत्रकारिता का समुदाय विशेष दिन-रात इस मशक्कत में जुटा होने के बावजूद भी इन चार सालों में अब तक विपक्ष के पास कोई भी ऐसा घोटाला नहीं आ पाया है, जिसे लेकर वो मोदी सरकार को घेर सकें।

मोदी सरकार को घेरने के लिए अनाप-सनाप सुबूत हाथ आते ही रवीश कुमार उत्तेजित होकर उन्हें  तुरंत ‘नई सड़क ‘पर खींच लाते हैं

विपक्ष के दलों की छटपटाहट एक बार के लिए वाजिब है, लेकिन एक स्थापित पत्रकार होने के बाद भी राहुल गाँधी जैसे मनचले चिरयुवा के बचपने पर देश और दुनिया को गुमराह करना आपको शोभा नहीं देता था, फिर भी आप राफ़ेल डील पर ‘द हिन्दू’ अख़बार की एक टुकड़ी लेकर लहरा गए। आप जानते हैं कि आपके सारे बयान और प्राइम टाइम बेबुनियाद हैं, फिर भी आप छाती चौड़ी कर के रोज नया प्रोपेगैंडा लेकर बैठ जाते हैं। अगर शाहरुख़ ख़ान की एक के बाद एक फ़्लॉप फ़िल्मों का मुक़ाबला आपके फ़्लॉप प्रोपेगैंडा की सीरीज़ से की जाए तो आप नि:संदेह आगे निकल जाएँगे।

आपने मुझे एक इंटरनेट ट्रॉल की संज्ञा दी है, मेरा स्तर आपको समझाने-बुझाने के लिए बेहद छोटा है, लेकिन फिर भी कोशिश कर के देखिए। आप ग़रीबों की नहीं बल्कि विचारधारा और अहंकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज जो रवीश कुमार लाल माइक पकड़ता है, उसका मुद्दा ग़रीब और विद्यार्थी नहीं बल्कि टकराव है। इस रवीश की कलम लप्रेक नहीं बल्कि चुनावी बागों में बहार तलाश रही है और इस काम के लिए ये किसी भी हद तक जाने के लिए आतुर दिखता है।

रवीश जी, आपकी पत्रकारिता में विश्वास करने वाले युवा का हाल मुहब्बत में धोखा खाए हुए लड़के जैसा हो चुका है, वो चाहकर भी अब मोहब्बत करने को राजी नहीं है। उसे अब किसी भी तरह के लिबास में रंगी गई पत्रकारिता और मीडिया में यकीन नहीं रह गया है। वो बदहवास हालात में न्यूज़ डिबेट्स से लेकर कारवाँ और वायर तक में सत्य ढूँढ रहा है, लेकिन सत्य है कि मिलता नहीं। उसका मन प्रोपेगैंडों से आतंकित है, उसका मानना है कि अगर सस्ती लोकप्रियता के लिए रवीश कुमार प्रोपगैंडा के लिए काम करते हैं, तो फिर किसी और में किस तरह यक़ीन किया जाए?

आज के दिन पर आपको पढ़ने-देखने वालों के दिमाग में बस प्रोपेगैंडा और दिल में ग़ालिब बज रहा है, “ख़ुदा के वास्ते पर्दा न काबे का उठा ज़ालिम, कहीं ऐसा न हो यां भी वही क़ाफ़िर सनम निकले।”

हम सबकी आपसे विनती है: “हे रवीश कुमार, आप भटक चुके हैं। आप घर लौट आइए, आपको कोई कुछ नहीं कहेगा।” हे राजा रवीश कुमार, परमादरणीय रवीश कुमार! अपना ‘कारवाँ’ रोक दीजिए, आपको हिंदी पत्रकारिता का वास्ता। लप्रेक लिखने और पढ़ने वाली प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है, उसे बचा लीजिए। जिस तरह तमाम माया-मोह को त्यागकर अर्जुन ने गाण्डीव उठाया था, आप क़लम उठाइये, आप शब्दों के जादूगर हैं। राजनीति नहीं, बस अपने हिस्से की पत्रकारिता शुरू कर दीजिए, TV पर सच सुनने और मीडिया में सच पढ़ने के इच्छुक व्यक्ति की ये बहुत बड़ी जीत होगी।

आपका प्रशंसक: ज्ञानवाचक

IIT बॉम्बे की खोजः कचरे से बनेगा फ़्यूल सेल, घर होंगे रौशन

विज्ञान और तक़नीकी क्षेत्र में हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। देश के वैज्ञानिक तमाम शोध के ज़रिए असंभव होने वाली बात को भी संभव बना रहे हैं। आपने गोबर गैस के ज़रिए बल्ब जलते हुए देखा होगा, लेकिन शायद ही आपने यह सोचा हो कि एक दिन आपके द्वारा फेंके जाने वाले कचरे के जरिए बिजली बनाई जाएगी और इससे हजारों घर रोशन हो सकेंगे। लेकिन यह कल्पना अब सच हो गई है, भविष्य में हम कचरे के ढेर से साफ़ पानी और बिजली पैदा कर सकेंगे।

IIT बॉम्बे के एनर्जी डिपार्टमेंट के प्रोफे़सर प्रकाश घोष और उनकी टीम ने इस सपने को साकार किया है। उनकी टीम ने एक ऐसा Microbial (माइक्रोबियल) Fuel Cell बनाया है, जिससे कचरे से निकलने वाले ख़तरनाक लिक्विड से बिजली बनाई जा सकती है।

आपने अक़्सर कचरा जमा किए जाने वाले डंपिंग ग्राउंड्स में एक काले रंग का लिक्विड रिसता हुए देखा होगा, इसे लीचेट कहा जाता है। लीचेट में कई सारे जैविक और अकार्बनिक तत्व पाए जाते हैं, जो ऊर्जा उत्पादन में सहायक होते हैं। इसके अलावा इस तरह के लीचेट में कई बैक्टीरिया भी होते हैं।

बता दें कि, एक पाइप के ज़रिए लीचेट को इस (माइक्रोबियल) Fuel Cell में डालते हैं, जिसके बाद इसमें मौजूद बैक्टेरिया आर्गेनिक तत्वों को अपने आप खाने लगता है। इस दौरान नेगेटिव और पॉजिटिव पार्टिकल्स पैदा होते है, जो इलेक्ट्रोड पर इकट्ठा होने लगते है। ये दोनों पार्टिकल्स अपने विपरीत आवेश वाले अंत की और आगे बढ़ते है और बस इसी से ऊर्जा यानी इलेक्ट्रिसिटी बनती है।

सोच से परे की बात ऐसे हुई सच

इसके एक्सपेरिमेंट के लिए तीन अलग अलग MFC को लिया गया था, जिनमें 17 दिन का एक साईकिल रखी गई थी। जिसमें अधिकतम बिजली 1.23 V, 1.2 V और 1.29 V बनी थी, ये दुनिया में पहली बार Microbial Fuel Cell (एमएफसी) से बनी उच्चतम बिजली है। इसके बाद प्रोफ़ेसर और उनकी टीम ने 18 Microbial Fuel Cell (एमएफसी) का बड़ा सिस्टम बनाया, जिसमें कुल 12 V बिजली बनी और इससे एक LED लाइट को भी जलाया गया था।

प्रोफ़ेसर प्रकाश घोष के मुताबिक़ “ये किसी की सोच से भी परे की बात है की उनका फेंका हुआ कचरा ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है, ये भविष्य की ऊर्जा है, नतीजे बेहद चौंकाने वाले और उत्साह भरने वाले हैं, अब हमें इनके व्यवसायिक उत्पादन और उसके आर्थिक पहलू पर भी काम करने की ज़रूरत है जिससे सस्ती ऊर्जा भारत के लोगो को दी जा सके।”

हिन्दी ने अबू धाबी में बनाई पहचान, तीसरी क़ानूनी भाषा के रूप में मिली मान्यता

हिंदी भाषा बोलने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए, न्याय तक पहुँच बढ़ने के लिए, अबू धाबी में हिंदी भाषा को लेकर ऐतिहासिक क़दम उठाया गया है। दरअसल, अबू धाबी ने अब अरबी और अंग्रेज़ी के बाद हिंदी भाषा को अपनी अदालतों में तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल कर लिया है। इस फै़सले से जहाँ हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल सकेगा, वहीं इसके साथ ही वहाँ रहने वाले हिंदी भाषाई लोगों के लिए इसके ज़रिए न्यायिक प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी।

अबू धाबी न्याय विभाग (एडीजेडी) ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि उसने श्रम मामलों में अरबी और अंग्रेज़ी के साथ हिंदी भाषा को शामिल करके अदालतों के समक्ष दावों के बयान के लिए भाषा के माध्यम का विस्तार कर दिया है। विभाग ने कहा कि इसका मक़सद हिंदी भाषी लोगों को मुक़दमे की प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सीखने में मदद करना है।

संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं 26 लाख भारतीय

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात की आबादी में क़रीब दो तिहाई हिस्सा विदेशों के प्रवासी लोगों का है। वहीं भारतीय लोगों की सँख्या 26 लाख है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 30% है। बता दें कि यह अबू धाबी का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय भी है।

एडीजेडी के अपर सचिव युसूफ़ सईद अल अब्री ने कहा, “दावा शीट, शिक़ायतों और अनुरोधों के लिए बहुभाषा लागू करने का मक़सद प्लान 2021 की तर्ज पर न्यायिक सेवाओं को बढ़ावा देना और मुक़दमे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।”

भ्रष्टाचार से जुड़े हर शख़्स का रिश्ता कॉन्ग्रेस से होता है: तमिलनाडु से PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (फरवरी 10, 2019) को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में रैली के बाद तमिलनाडु के तिरुपुर पहुँच गए हैं और लोगों को संबोधित कर रहे हैं। वे इस दौरान कई परियोजनाओं का उद्धघाटन करेंगे।

तमिलनाडु के तिरुप्पुर में भी नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने मध्यम वर्ग को हमेशा नकारा है इसलिए जनता ने उन्हें नकार दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की प्रमुख बातें:

  • तिरुप्पुर की भूमि को मैं नमन करता हूँ, यह वीरों की भूमि है।
  • कुछ क्षण पहले ही कई डेवेलपमेंट प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन किया गया है और कई सारे प्रॉजेक्ट्स की आधारशिला रखी गई है।
  • तिरुप्पुर का असंगठित क्षेत्र और एसएसएमई सेक्टर से नाता है। इस बार के बजट में फैक्ट्री, घर, स्मॉल इंटस्ट्री आदि में काम करने वालों की सुरक्षा के लिए ₹3000 तक की पेंशन सुनिश्चित करने का ऐलान किया गया।
  • NDA की सरकार के काम करने का तरीका अलग है, जिसने पिछले कई सालों तक देश पर राज किया उसने डिफेंस सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया केवल अपने लोगों की मदद और दलाली की गई।
  • ऐसा क्यों है कि भ्रष्टाचार से जुड़े हर आदमी का रिश्ता कांग्रेस या उसके किसी नेता से मिलता है।
  • जब एक राष्ट्र स्वस्थ होता है तो वह तेजी से विकास करता है, आयुष्मान भारत योजना का लाभ अब तक 11 लाख लोग ले चुके हैं। 18000 गाँवों में बजली पहुँचाई गई है। 2022 तक देश के सभी के लिए घर देने का लक्ष्य है, 1.3 करोड़ घर अभी तैयार हैं।
  • भारत के विकास पर आज के वक्त में पूरी दुनिया की नज़र है, यह करोड़ों ईमानदार टैक्सपेयर्स के सहयोग की वजह से संभव हुआ है। ₹5 लाख तक की सालाना आय पर टैक्स नहीं लगाने का इस बार के बजट में ऐलान किया गया है। यह मिडिल क्लास की सालों पुरानी माँग थी।
  • यूपीए के वक्त में एक बहुत ही बुद्धिमान मंत्री तमिलनाडु से थे, वह रिकाउंटिंग मिनिस्टर थे। उन्हें लगता था वही सबसे ज़्यादा समझदार हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि मिडिल क्लास क्यों डरा हुआ है, मिडिल क्लास तो महँगी आइसक्रीम खाता है और मिनरल वॉटर पीता है। उन्हें मैें कहना चाहता हूँ कि मिडिल क्लास ने आपको रिजेक्ट कर दिया है और वे ऐसा करते रहेंगे।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने सर्जिकल स्‍ट्राइक पर सवाल उठा कर सेना के उत्‍साह को घटाने का काम किया। उन्होंने कहा,”एनडीए सरकार देश के सभी लोगों की सरकार है, सरकार ने 2014 के बाद इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर को बेहतर बनाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। भारतमाला, सागर, मेट्रो प्रोजेक्‍ट के माध्‍यम से देश को परिवहन के क्षेत्र में जोड़ने का काम किया है। 2022 तक देश के सभी लोगों के लिए मकान उपलब्ध कराएँगे। भारत के विकास को पूरी दुनिया ने सकारात्‍मक रूप से लिया है।”

UPSC के इंटरव्यू राउंड के असफल छात्रों को मिलेगी नौकरी, जानने के लिए पढ़ें पूरी ख़बर

दिन-रात मेहनत करके संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अच्छी ख़बर है। दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में चूकने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी मिल सके इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग ने एक नई पहल की है, जिससे अभ्यर्थियों को नौकरी मिल सकेगी। आयोग ने केंद्र सरकार से उसके मंत्रालयों में सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में फेल होने वाले आवेदकों को भर्ती करने की सिफ़ारिश की है।

UPSC चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने की पहल

अब अगर सरकार इस सिफ़ारिश को मान लेती है तो बड़ी संख्या में नौकरी से वंचित रहे युवाओं का सरकारी नौकरी मिल सकेगी। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ओडिशा में आयोजित राज्य लोक सेवा आयोग के 23वें सम्मेलन में UPSC के चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने बताया है कि हमने केंद्र सरकार और मंत्रालयों से सिफ़ारिश की है, कि वे सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में फेल होने वाले उम्मीदवारों की भर्ती करें।

उन्होंने जानकारी दी कि हर साल क़रीब 11 लाख उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। जिसमें से विभिन्न चरणों से गुजरते हुए केवल 600 उम्मीदवारों का चयन हो पाता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उम्मीदवारों को दूसरे मंत्रालयों/विभागों में भर्ती पर विचार करती है तो इससे युवाओं का तनाव कम होगा।

दक्षिण कश्मीर में 5 आतंकी ढेर, 4 जवान घायल

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले में सुरक्षा बलों को बड़ी क़ामयाबी मिली है। मुठभेड़ में सेना के जवानों ने 5 आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों के पास से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है।

ख़बर की मानें तो सुबह 5 बजे के आसपास आतंकियों के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। 6 घंटे बीतने के बाद सेना ने यहाँ के दो घरों को उड़ा दिया, जिसमें मकान के अंदर छिपे हुए 5 आतंकी मौके पर ही ढेर हो गए। सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन के बाद इसकी पुष्टी करते हुए सभी आतंकियों के शव के साथ भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सामान बरामद किया। बताया जा रहा है कि मारे गए आतंकियों में एक मोस्ट वॉन्टेड कमांडर भी शामिल है।

ऑपरेशन में ख़लल डालने के लिए की गई पत्थरबाज़ी

आतंकियों पर की गई कार्रवाई के बाद इलाक़े में भारी हिंसक प्रदर्शन हुए। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कुछ उपद्रवियों ने ख़लल डालने के लिए पत्थरबाज़ी भी की। जवाब में सीआरपीएफ के जवानों ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आँसू गैस के गोले दागे। भारी पथराव के चलते 4 सीआरपीएफ जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की बात भी सामने आई है।

बंद की गई इंटरनेट सेवा

सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन के बाद इलाक़े में तनाव बना हुआ है, जिसको देखते हुए कुलगाम में मुठभेड़ की शुरुआत से ही इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा बनिहाल से बारामुला के बीच चलने वाली रेल सर्विसेज़ को भी बंद करने का आदेश दिया गया है। बताया जा रहा है कि हिंसा के हालात को देखते हुए सीआरपीएफ और पुलिस की अतिरिक्त टीमों को भी तैनात किया गया है।

शारदा चिट-फंड घोटाला: CBI ने SIT की जाँच पर उठाए सवाल

करोड़ों रुपये के शारदा चिट-फंड घोटाले के सिलसिले में कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार आज लगातार दूसरे दिन पूछताछ के लिए शिलॉन्ग स्थित सीबीआई कार्यालय पहुँचे। कुमार से सीबीआई ने कल आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी और टीएमसी के पूर्व सांसद कुणाल घोष को भी पूछताछ के लिए सीबीआई कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था।

सीबीआई द्वारा कुमार से कई कड़े सवाल पूछे जाने की संभावना है। सीबीआई कुमार को कुणाल घोष जैसे प्रमुख अभियुक्तों के बयानों के साथ मिलान करेगी, जिन्होंने दावा था किया कि पुलिस आयुक्त जाँच के सभी पहलुओं में बहुत सक्रिय थे।

सीबीआई यह भी जानना चाहती है कि मई 2014 तक दर्ज किए गए 75 मामलों में से जब यह मामला सीबीआई को स्थानांतरित किया गया, तो एसआईटी ने केवल शारदा मामले को ही क्यों लिया और बाकी सभी को क्यों छोड़ दिया? क्या ऐसा किसी राजनीतिक नेतृत्व के निर्देश पर किया गया था? सीबीआई के अनुसार एसआईटी की जाँच में गैप है, क्योंकि जाँच से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों को एसआईटी द्वारा कभी बुलाया ही नहीं गया। एजेंसी यह भी पता लगाना चाहती है कि कहीं राजीव कुमार किसी के निर्देशों के तहत तो ऐसा नही कर रहे थे?

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घोटाला सामने आने पर राज्य पुलिस पहले शारदा समूह के परिसर में प्रवेश करने वाली थी। इस पर सीबीआई ने आरोप लगाया है कि सबूतों को दबाने के लिए मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों को वहाँ से हटाया गया है।

नामदारों के सामने सर झुकाकर बैठ गए नायडू, विकास भूलकर मोदी को गाली देने का चल रहा कॉम्पिटिशन

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक जनसभा को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस और प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू पर जमकर निशाना साधा। एक दिवसीय दौरे पर आंध्र प्रदेश आए पीएम मोदी ने श्रीकृष्णपट्टनम में भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड के तटीय टर्मिनल की आधारशिला रखी। इस परियोजना पर ₹2,280 करोड़ ख़र्च होंगे।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान सीएम नायडू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के ग़रीबों के लिए नई योजनाएँ चलाने का वादा किया था, लेकिन मोदी की योजनाओं पर ही अपना स्टीकर लगा दिया। पीएम ने कहा कि नायडू ने अपने ससुर (एनटी रामाराव) की पीठ पर छुरा घोंपा है। इसके अलाव पीएम ने वहाँ पर लगाए गए #GoBackModi के पोस्टरों की चुटकी लेते हुए कहा कि मैं टीडीपी का आभारी हूँ कि वे मुझे दोबारा दिल्ली जाने को कह रहे हैं।

पीएम ने कहा, “जिन लोगों ने देश को धुएँ में जीने के लिए छोड़ दिया था वो अब देश में झूठ का धुआँ फैलाने में जुटे हैं। संगत का असर ऐसा है कि यहाँ के सीएम भी आंध्र के विकास के विजन को भूलकर मोदी को गाली देने के कॉम्पिटिशन में कूद गए हैं।”

‘आंध्र की जनता की तिजोरी से चंद्रबाबू निकाल रहे पैसा’

प्रधानमंत्री ने नायडू पर तंज कसते हुए कहा, “डिक्शनरी में जितनी भी गाली है वो मोदी के लिए रिजर्व है। हर रोज नई गाली देते हैं। क्या उनको आंध्र के संस्कारों को इस तरह बदनाम करने का अधिकार है। यह (चंद्रबाबू नायडू) कल फोटो खिंचवाने के लिए दिल्ली जाने वाले हैं, बड़े हुजू़म लेकर जाने वाले हैं, पार्टी का बिगुल बजाने। लेकिन बीजेपी जैसे अपने कार्यकर्ताओं के पैसे से कार्यक्रम करा रही है, वो आंध्र की जनता की तिजोरी से पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘क्या मज़बूरी है कि वह नामदारों के सामने सर झुकाकर बैठ गए हैं। नामदारों ने हमेशा राज्यों के नेताओं का अपमान किया है। एमटीआर ने आंध्र को कॉन्ग्रेस मुक्त करने का वादा किया था। उस समय आंध्र प्रदेश का अपमान करने वाले दल को एनटीआर को दुष्ट कहते थे और आज नायडू को उन्हीं को दोस्त बनाकर बैठे हैं।’

‘झूठ के बड़े अभियान पर लगाना चाहता हूँ लगाम’

पीएम मोदी ने कहा कि गुंटूर से एक झूठ के बड़े अभियान पर विराम लगाना चाहता हूँ। केंद्र ने आंध्र के लिए पिछले 55 महीने में कोई कमी नहीं छोड़ी। लेकिन कमी सिर्फ़ इतनी रही कि केंद्र से जो पैसा आया वो यहाँ कि सरकार ने आपको बताया नहीं। यहाँ खर्च़ नहीं किया।

पीएम ने कहा कि NTR की विरासत संभाल रहे नेता अपनी कमियों को छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है। जब कोई मुख्यमंत्री सत्य की बजाय झूठ बोले, तो मान लेना चाहिए कि उनपर से जनता का विश्वास उठ चुका है।

‘मुझे गालियाँ देने से पहले आंध्र के लोगों का हिसाब करें नायडू’

पीएम ने कहा कि मैंने सुना है कि वे अब दिल्ली आने की योजना बना रहे हैं। मैं जोर देकर कहूँगा कि दिल्ली आने से पहले उन्हें आंध्र के लोगों को अपने खर्च का ब्योरा देना चाहिए। मुझे गालियाँ देने से पहले, आप आंध्र प्रदेश के लोगों को अपने खर्चे का हिसाब देकर जरूर आएँ।

‘सरकार दिए 13 करोड़ नए गैस कनेक्शन’

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में गैस कनेक्शन देना 1955 में शुरू हुआ। इसके बाद 60 सालों में 12 करोड़ गैस कनेक्शन दिए हए। हमारी सरकार 13 करोड़ नए गैस कनेक्शन दे चुकी है। इसी का नतीजा है, जहाँ साल 2014 में देश के सिर्फ 25% लोगों के पास गैस कनेक्शन था। वहीं, आज यह दायरा बढ़कर 90% हो चुका है।

पीएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने “हृदय योजना” के तहत अमरावती को हेरिटेज सिटी के रूप में चुना है। अमरावती को “ऑक्सफोर्ड” भी कहा जाता है और विभिन्न स्थानों के युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए यहाँ आते हैं।

प्रिय मृणाल पांडे, आपकी बातें सड़क पर नाइदो तनियम जैसी हत्या करा सकती हैं! सँभालिए खुद को

पाँच साल पहले की बात है, 29 जनवरी 2014 की। अरुणाचल प्रदेश का एक लड़का था, उम्र 19 साल। दिल्ली के लाजपत नगर में किसी जगह का पता खोज रहा था। एक मिठाई की दुकान थी, वहाँ से किसी ने उसके बालों का मजाक उड़ाया। उसने बाल सुनहरे रंग से रंग रखे थे, वो औरों से अलग दिखता था। इतना काफी था उसे छेड़ने और उकसाने के लिए।

मजाक और उपहास का पात्र बनने पर उसे गुस्सा आया। कहा-सुनी हुई। उसके बाद भरी दोपहरी में रॉड और डंडों से पीटा गया। फिर पुलिस आ गई। कथित तौर पर पुलिस की उपस्थिति में भी उसे पीटा गया। किसी तरह अपनी जान बचाकर वो अपनी बहन के घर पहुँचा। वहाँ रात में सोया और सुबह जगा नहीं। उसके दिमाग और फेफड़ों में अंदरूनी चोट पहुँचने के कारण वो मर गया। नाइदो तनियम अरुणाचल प्रदेश के कॉन्ग्रेस विधायक के पुत्र थे।

कल नरेन्द्र मोदी अरुणाचल प्रदेश में थे। वहाँ रैली में भाषण देते वक्त उन्होंने अरुणाचली जनजातीय परम्परा में पहनी जानी वाली टोपी सर पर पहन रखी था। जब उनके भाषण की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई तो एक ट्विटर यूज़र, आशीष मिश्रा (@ktakshish), ने उपहास करते हुए लिखा, “आज दुग्गल साहब मोर बने हैं।” 

हालाँकि, ट्विटर पर इस तरह की बातें होती रहती हैं, और पीएम का मजाक आए दिन खूब उड़ता है। लेकिन ऐसे घटिया विचार वाले लोगों को मृणाल पांडे जैसे लोग शह देते हों, तो लगता है कि किसी एक प्रदेश की वेशभूषा को लेकर इनके मन में कितना कूड़ा भरा है। आशीष मिश्रा ने माफ़ी माँगते हुए अपना ट्वीट मिटा दिया है, लेकिन माफ़ी में भी यह लिखा कि ‘नॉर्थ ईस्ट वालों को रेसिस्ट लग रहा था’। ज़ाहिर है कि इन्हें ये रियलाइजेशन नहीं हुआ कि वो ट्वीट कैसा था। ख़ैर, उनको रहने देते हैं, क्योंकि उनका महत्त्व माध्यम होने भर का ही है, उससे ज़्यादा नहीं।

जबकि मृणाल पांडे ने उस ट्वीट के जवाब में जो ट्वीट लिखा वो और भी बेकार था, लेकिन अभी भी मौजूद है। उसमें मोदी की तरफ इशारा करते हुए एक मुर्ग़े को कोट पहनाया हुआ दिखाया गया है। 

मृणाल पांडे उसी गिरोह से आती हैं जो पत्रकारिता के नाम पर विचारधारा परोसने में व्यस्त हैं। विचारधारा के लिए भी किसी को कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि सबकी होती है। लेकिन घृणा और भेदभाव के साथ भारत की विविधता का उपहास करना बताता है कि मानसिक रूप से कुछ लोग कितना नीचे गिर सकते हैं। 

मृणाल पांडे एक साहित्यकार भी रह चुकी हैं (‘चुकी हैं’ क्योंकि अभी तो वैसे लक्षण नहीं दिख रहे, साहित्य तो चुक ही गया है)। उनकी माताजी हिन्दी का एक चमकता सितारा थीं। साहित्यकार संवेदनशील होता है। साहित्यकार अपने समाज को, दूसरे समाजों को, बाकी लोगों से बेहतर तरीके से देखने और समझने में सक्षम होता है। लिखने वाले लोगों से अपेक्षा की जाती है कि अपने शब्दों से हमें घर बैठे दुनिया की सैर करा दें।

लेकिन मृणाल पांडे, जो वैचारिक असहमति की राह से उतरकर घृणा और द्वेष की कुंठा का विष उगलती आगे बढ़ रही हैं, उनमें साहित्यकार या पत्रकार होने की संवेदना का घोर अभाव है। विचारधारा से घृणा उचित है, व्यक्ति से भी घृणा करना संदर्भों में उचित जान पड़ता है (लेकिन बता दें कि आलोचना नहीं, घृणा ही है), लेकिन एक समाज की विविधता का उपहास! ये तो नीचे गिरते जाने की सीढ़ी है जहाँ आपने सर पर इतनी घृणा लाद रखी है कि ऊपर आना मुश्किल दिखता है।

मोदी के सर पर जो टोपी थी, वो अरुणाचल प्रदेश की निशि जनजाति द्वारा पहनी जाने वाली पारम्परिक टोपी है। उसमें हॉर्नबिल नामक चिड़िया को जनजातीय कलाकृति के अद्भुत नमूने के रूप में दर्शाया गया था। देश की स्वतंत्रता के इतने सालों बाद पहली बार कोई प्रधानमंत्री आया है जो लगातार भारत के उत्तर-पूर्व हिस्सों में लगातार जाता है, उनकी परम्पराओं को सम्मान देता है, उनके क्षेत्र के विकास पर ध्यान देता है, तो भी कुछ लोगों को सिर्फ़ मजाक ही सूझता है!

उत्तर-पूर्व के लोगों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश के लिए जहाँ दिल्ली पुलिस में वहाँ के लोगों की भर्ती की जा रही है, जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहाँ कॉन्ग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की एडिटर के इस तरह के विचार दुःखद और निंदनीय हैं। यही कारण है कि ऊपर से फैलाई जा रही इस तरह की घृणा नीचे सड़कों तक उतरती है और कभी नाइदो तनियम मारा जाता है, कभी लोयथम रिचर्ड।

वो अलग दिखते हैं, क्योंकि उनकी परम्पराएँ अलग है। उनके लिए हम अलग हैं, अलग दिखते हैं। भारत विविधताओं से भरा देश है, और हमें एक-दूसरे की विविधता का सम्मान करना सिखाया जाता है। यही हमारी धरोहर है, और हमारी पहचान भी। यहाँ पर कभी थरूर द्वारा नागा जनजातीय वेशभूषा का उपहास करना, तो कभी उसी कॉन्ग्रेसी विचारधारा के मुखपत्र की एडिटर का अरुणाचल की वेशभूषा का मजाक बनाना बताता है कि अभिजात्य मानसिकता के कैंसर का कोई इलाज नहीं।

कितनी अजीब बात है कि कोई व्यक्ति अपने पद का इस्तेमाल लोगों को जोड़ने में कर रहा है, और आपके पास उसकी नीतियों को लेकर, उसके कार्य को लेकर कुछ कहने को नहीं है, तो आप उसकी उस कोशिश का उपहास करते हैं जहाँ वो किसी जनजाति की परम्परा का सम्मान कर रहा होता है! ये बताता है कि आपकी चर्चा का स्तर कितना गिर चुका है। 

सड़क पर हो रहे भेदभाव को आग मत दीजिए मृणाल जी, इसकी लपटें जब उठेंगी तो आपकी जैसी विकृत मानसिकता वाले लोग मिठाई के दुकान के बाहर किसी अरुणाचली को रॉड और लातों से इतना मारेंगे कि उसकी छाती की हड्डियाँ टूट जाएँगी, दिमाग को चोट पहुँचेगी और फेफड़ों में ख़ून उतरने के कारण उसकी मृत्यु हो जाएगी।

पुलिसकर्मी पर गौ तस्करों ने चढ़ाई गाड़ी, आरोपित मुजीब गिरफ़्तार

हरियाणा के फिरोज़पुर झिरका थाना इलाक़े में बेख़ौफ़ गौ तस्करों द्वारा पुलिस बेरिकेड तोड़कर भागने और पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाने का मामला सामने आया है। गौ तस्करों ने एक एएसआई को गौ-वंशों से लदे कैंटर को चढ़ाकर कुचलने की कोशिश की, जिसमें एएसआई गंभीर रूप से घायल हो गए।

गाय की तस्करी से जुड़ा यह मामला कोई पहला नहीं हैं। इससे पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा है, ये और बात है कि इनमें से केवल कुछ ही मामले सामने आते हैं और बाक़ी हवा हो जाते हैं।

ख़बर की मानें तो पुलिस ने तस्करों द्वारा अवैध रूप से कैंटर में ले जाए जा रहे गौ-वंशों को जब रोकने की कोशिश की तो, उन्होंने फ़ायरिंग की। जिसके बाद पुलिस ने जवाबी फ़ायरिंग करते हुए कैंटर सहित एक गौ तस्कर मुजीब को दबोच लिया।

कैंटर में कुल 8 गौ-वंश बरामद किए गए हैं। इन्हें राजस्थान ले जाया जा रहा था। मामले में फिरोज़पुर झिरका थाने में 2 लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है। गिरफ़्तार किए गए गो तस्कर मुजीब की पहचान पुन्हाना थाना एरिया के पैमाखेड़ा निवासी के तौर पर हुई है।

बाल-बाल बचे कई पुलिसकर्मी

गौ तस्कर 8 गौ-वंशो को कटी घाटी के रास्ते राजस्थान वध के लिए ले जाए जा रहे थे, तभी पुलिस को मुख़बिर से तस्करों के बारे में सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस की टीम शाहपुर खेड़ा गाँव के पास बेरिकेड लगाकर चेकिंग शुरू की।

इसी बीच गौ-वंशों से लदे एक कैंटर को पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन कैंटर चालक गाड़ी रोकने के बजाय पुलिस का बेरिकेड तोड़कर एक एएसआई पर गाड़ी चढ़ा दी। जबकि अन्य पुलिसकर्मियों बाल-बाल बच गए। बताया जा रहा है कि एक गौ तस्कर भागने में क़ामयाब रहा। फ़िलहाल छुड़ाए गए गौ-वंशों को तिजारा रोड स्थित मेवात क्षेत्र की गौ-शाला में भेजा दिया गया।