Home Blog Page 6097

मोदी घृणा में मीडिया गिरोह का नया परचम: अरुणाचल प्रदेश की जनजाति को बताया ‘मोर’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से घृणा में मीडिया और विपक्ष किसी भी स्तर तक गिर सकता है। इस बात को साबित करने के लिए कई उदाहरण पिछले कुछ सालों में देखने को मिलते रहे हैं। लेकिन इस घृणा में मीडिया इतना मशगूल हो गया कि उसे इतना ध्यान नहीं रहता है कि वो असल में ग़रीब और वंचितों का मज़ाक बना रहा होता है, जिन्हें सामाजिक पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रयास करते आए हैं।

कभी चाय तो कभी पकौड़े बनाने वाले छोटे उद्ययमियों का उपहास करने वाला मीडिया तंत्र मोदी-घृणा में कल (फरवरी 09, 2019) को एक नए स्तर तक गिर गया जब मीडिया में अरुणाचल प्रदेश की ‘निशि जनजाति’ को ‘मोर’ घोषित कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश की जनता को ‘निशि जनजाति’ का पारम्परिक पहनावा पहनकर सम्बोधित किया। इस पर कॉन्ग्रेस का गुणगान करने वाले ‘नेशनल हेरॉल्ड’ समाचार पत्र की ‘ग्रुप एडिटर’ मृणाल पांडे ने किसी ‘ट्विटर ट्रॉल’ का सहारा लेकर इस जनजाति को ‘मोर’ कहा और नस्लीय टिप्पणी कर मज़ाक भी बनाया।

सस्ती लोकप्रियता के लिए नरेंद्र मोदी की आड़ में आशीष मिश्रा नाम के ट्विटर यूज़र ने अपने ट्वीट में पूर्वोत्तर की इस जनजाति के पहनावे और लोगों की तुलना ‘मोर’ से कर डाली, जिसे मीडिया गिरोहों द्वारा हाथों-हाथ रीट्वीट किया गया। आशीष मिश्रा नाम का यह युवक ‘कटाक्ष’ नाम से ट्विटर और फेसबुक पेज पर सक्रिय है। आशीष मिश्रा ने लोक-लाज के डर से यह ट्विट और फेसबुक पोस्ट तो डिलीट कर दिया, लेकिन वह अरुणाचल प्रदेश की जनजाति पर नस्लीय टिप्पणी कर लोगों को पहले ही बहुत ठेस पहुँचा चुके थे। आशीष मिश्रा के ट्विटर हैंडल पर उपलब्ध जानकारी से पता चला है कि वो पत्रकारिता से जुड़े हैं। लेकिन जनजाति पर नस्लीय टिप्पणी कर के जिस तरह की पतित पत्रकारिता का उदाहरण आशीष मिश्रा ने पेश किया है, इसे ‘पत्रकारिता का समुदाय विशेष’ कहा जा सकता है।

आशीष मिश्रा का वह ट्विट, जिसमें नरेंद्र मोदी के बहाने अरुणांचल प्रदेश की जनजाति को मोर बताया गया है

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल की रैली के दौरान आदिवासियों की एक पारम्परिक टोपी (हेडगेयर) पहन रखा था, जिसे ‘ब्योपा’ कहते हैं। ब्योपा, अरुणाचल प्रदेश की एक बड़ी जनजाति निशि (Nyishi) के पारम्परिक परिधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अरुणाचल के सरकारी कार्यक्रमों में ब्योपा को मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों को उपहार स्वरूप भेंट करने का चलन है।

सोशल मीडिया पर इस जनजाति के अपमान पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी ट्वीट कर आपत्ति जताई। ट्विटर पर निशि जनजाति पर बन रहे इस मज़ाक से आहत अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अपने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, “ईटानगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो भाषण के दौरान पहना हुआ है, वह अरुणाचल प्रदेश की निशि जनजाति का ‘हेडगेयर’ है। घृणा या असहिष्णुता को अपने विवेक पर हावी न होने दें।”

जनजातियों का मज़ाक बनाने के लिए कॉन्ग्रेस और मीडिया गिरोह का यह अकेला क़िस्सा नहीं है। कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर पहले नागा जनजाति का भी मज़ाक बना चुके हैं। मोदी घृणा में मीडिया का किसी भी स्तर तक गिर जाना एक आम बात बनती जा रही है। लेकिन इस बार ‘मोर’ वाली नस्लीय टिप्पणी ने पूर्वोत्तर भारत की आस्था को गहरी चोट पहुँचाई है।

राहुल के कारण पार्टी छोड़ी, देश को पटरी पर लाने के लिए PM मोदी का नेतृत्व ज़रूरी: पूर्व कॉन्ग्रेसी मंत्री

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा जो मनमोहन सरकार में विदेश मंत्री थे, उन्होंने शनिवार (9 फ़रवरी) को राहुल गाँधी को लेकर कहा कि उनके लगातार हस्तक्षेप के कारण न सिर्फ़ उन्होंने विदेश मंत्री का पद छोड़ा बल्कि कॉन्ग्रेस पार्टी से भी नाता तोड़ लिया था। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी के अत्यधिक हस्तक्षेप के चलते वो विदेश मंत्री के पद पर काम करने में ख़ुद को असमर्थ महसूस कर रहे थे।

इसके अलावा उन्होंने राहुल की राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल उठाते हुए कहा कि 10 साल पहले राहुल गाँधी एक सांसद थे और उन्होंने पार्टी का कोई पद नहीं सँभाला, लेकिन सभी मामलों में वे बिना वजह ही हस्तक्षेप करने लगते थे। यह हस्तक्षेप इतना बढ़ गया था कि कृष्णा ने पद छोड़ना ही उचित समझा। हालाँकि जब प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह थे, तब कष्णा ने कई मामलों को राहुल के संज्ञान में लाए बिना ही उन पर कार्रवाई की जिसके परिणामस्वरूप 2जी स्पेक्ट्रम, कॉमनवेल्थ और कोयला घोटाले सामने आए थे। वहीं गठबंधन दलों पर उन्होंने कहा कि इस पर कॉन्ग्रेस का कोई नियंत्रण नहीं था।

एसएम कृष्णा ने कहा कि साल 2009 से 2014 तक जब वे यूपीए सरकार में सत्ता में था, तब वे ख़ुद भी सभी अच्छी और बुरी चीजों के लिए समान रूप से जिम्मेदार थे। साढ़े तीन साल तक कुशलतापूर्वक सेवा देने के बावजूद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था, इसकी वजह राहुल का वो आदेश था जिसके मुताबिक़ जो 80 साल के हो गए हों उन्हें सत्ता में नही रहना चाहिए।

बीजेपी में शामिल होने के बाद, कृष्णा ने काफी हद तक सक्रिय राजनीति से ख़ुद को दूर रखा, लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान पूर्व सीएम सिद्धारमैया के ख़िलाफ़ हो रहे अभियानों में उन्होंने भाग लिया था।

लोकसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ, कृष्णा ने अपने गृह नगर मद्दुर में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए दोबारा आवेदन किया, जहाँ से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कृष्णा ने उनकी तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल से की और कहा कि भारत मोदी शासन के तहत प्रगति की ओर अग्रसर है।

आंध्र प्रदेश दौरे से पहले PM मोदी-विरोधी पोस्टर्स की भरमार

लोकसभा चुनाव के नज़दीक आते-आते सियासी खींचतान ज़ोरो पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी लोकसभा चुनावों को ध्‍यान में रखते हुए 8-12 फ़रवरी के बीच अपने 10 राज्यों के दौरे पर हैं। आज यानी रविवार (10 फ़रवरी) को वो आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जाने वाले हैं। इस दौरे के तहत वे आंध्र प्रदेश के गुंटूर, तमिलनाडु के तिरुपुर और कर्नाटक के हुबली में रैलियाँ करेंगे। इस दौरान वे अपने भाषण को किसानों और युवाओं पर केंद्रित रख सकते हैं। इससे पहले शनिवार (9 फ़रवरी) को वो असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी के आंध्र पहुँचने से पहले वहाँ कई जगहों पर मोदी विरोधी पोस्टर और होर्डिंग्स लगे दिखे। इन पोस्टर पर ‘नो मोर मोदी’, ‘मोदी इज़ ए मिस्टेक’ और ‘मोदी नेवर अगेन’ जैसे विरोधी नारे लिखे हुए थे। फ़िलहाल यह पता नहीं लगाया जा सका है कि ये पोस्टर किसने लगवाए हैं।

बता दें कि जबसे टीडीपी ने बीजेपी से अपना गठबंधन तोड़ा है, उसके बाद आंध्र में पीएम मोदी का यह पहला दौरा है। जहाँ एक तरफ बीजेपी इस दौरे को सफल बनाने की कोशिश में जुटी हुई है, वहीं, टीडीपी ने उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में दिख रही है।

आंध्र में रैली से पहले मोदी विरोधी पोस्टर लगाए गए
आंध्र में मोदी विरोधी पोस्टर लगाए गए

जानकारी के मुताबिक़, पीएम मोदी यहाँ जिस गन्नावरम एयरपोर्ट पर लैंड करने वाले हैं, उसके सामने भी बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स लगाई गई हैं। पीएम को गुंटूर में एक रैली में भाग लेना है। इसके अलावा उन्हें वहाँ येताकुर बाइपास पर कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन भी करना है, उसके बाद वो एक जनसभा को संबोधित करेंगे।

बता दें कि इससे पहले शनिवार को कुछ विरोध प्रदर्शन भी किए गए थे, जिसकी शिक़ायत बीजेपी ने पुलिस में दर्ज कराई थी और साथ ही होर्डिंग लगाने वालों पर कार्रवाई किए जाने की माँग भी की थी।

प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ अपने विरोधी सुर को स्पष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने कार्यकर्ताओं को आसमान में काले-पीले गुब्बारे छोड़ने और काले-पीले रंग की शर्ट पहनने को कहा है।

बता दें कि नायडू के ये तेवर इसलिए भाी प्रबल हैं क्योंकि वो आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की माँग काफी समय से कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा इस माँग को ठुकरा दिए जाने के बाद से ही नायडू ने अपने विरोध को और तेज़ कर दिया। इसलिए उन्होंने बीजेपी का साथ छोड़कर एनडीए से हाथ मिलाया। आगामी लोकसभा चुनाव में वो महागठबंधन का साथ देकर बीजेपी के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताएँगे।

बता दें कि बीजेपी के ख़िलाफ़ इस विरोध प्रदर्शन में टीडीपी कार्यकर्ता, टीडीपी यूथ विंग, कॉन्ग्रेस, लेफ्ट विंग पार्टियों के नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

रॉबर्ट वाड्रा को ‘सत्य की जीत’ की याद आई, ईडी लगातार कर रही है पूछताछ

प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पिछले कुछ दिनों में ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और विदेश में बदनामी संपत्तियों को लेकर लम्बी पूछताछ के लिए बुलाए जा चुके हैं। शनिवार को भी उनसे कई घंटे पूछताछ की गई। आज (जनवरी 10, 2019) को उन्होंने सुबह में एक फ़ेसबुक पोस्ट लिखा है जिसमें सत्य की जीत की बात की है। 

वाड्रा ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में अपनी एक तस्वीर लगाई है और लिखा है, “सुप्रभात! मैं पूरे देश के अपने तमाम मित्रों और शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा जो इस समय में मेरे साथ खड़े हैं। मैं ठीक-ठाक हूँ और किसी भी परिस्थिति का सामना करने में मैं अपने आप को सक्षम पाता हूँ। सत्य की हमेशा जीत होती है। आप सबों का रविवार अच्छा बीते और आपका ये सप्ताह स्वास्थ्य और ख़ुशियाँ लाए।”

https://m.facebook.com/764044809/posts/10157100535029810

मनी लॉन्ड्रिंग और ज़मीन घोटालों को लकेर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली समेत लंदन में हुए लैंड स्कैम को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनसे लगातार पूछताछ में जुटा है। शनिवार यानी 9 फ़रवरी को उनसे इस मामले में तीसरी बार पूछताछ हुई।

वाड्रा को अब 12 फ़रवरी को अपनी माँ मौरीन के साथ जयपुर स्थित ईडी के ऑफ़िस में पूछताछ के लिए पेश होना पड़ेगा। वाड्रा यहाँ ईडी निदेशालय के सामने बीकानेर के कोलायत में हुए ज़मीन ख़रीद के मामले में अपना पक्ष रखेंगे।

ख़बर की मानें तो राजस्थान हाईकोर्ट ने बीकानेर ज़िले के कोलायत क्षेत्र में 275 बीघा ज़मीन ख़रीद के मामले में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी माँ को ईडी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। बता दें कि ईडी ने पिछले साल नवंबर के अंतिम सप्ताह में वाड्रा को तीसरी बार समन जारी किया था, लेकिन उन्होंने उसकी अनदेखी की थी।

पेशी को लेकर वाड्रा के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल जाँच में सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन अभी वो अपनी बेटी के इलाज के लिए इंग्लैंड जा रहे हैं। जिस पर न्यायलय ने कहा था कि दोनों पक्षों के वकील पेशी की तारीख़ खु़द तय कर लें। जिसके बाद 12 फ़रवरी को वाड्रा और उनकी माँ को इस मामले में पेशी का आदेश दिया गया।

अवैध शराब से 102 मौतें, 184 भेजे गए जेल, 346 पर केस दर्ज

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और उत्तराखंड के हरिद्वार जिलों में ज़हरीली शराब पीने से 102 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ते दबाव के कारण दोनों ही राज्य की सरकारों ने शनिवार को कई जगह छापे मारे और 346 मामले दर्ज किए।

दोनों राज्यों में लगभग 10,000 लीटर से ज़्यादा अवैध शराब और 75,000 किलो से ज़्यादा लहन पकड़ी गई। छापेमारी के दौरान 184 लोग गिरफ़्तारी के बाद जेल भेजे जा चुके हैं। मरने वालों में 70 सहारनपुर और 32 हरिद्वार जिले के हैं।

एक तरफ जहाँ इन घटनाओं से प्रदेश में दहशत फैली हुई है और प्रशासन में भी हड़कंप मचा हुआ था, वहीं मौके का फ़ायदा उठाते हुए पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस मामले पर भी एक संवेदनहीन बयान दिया था। ज़हरीली शराब के कारण लगातार हो रहीं मौतों के बीच अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए इन मौतों का ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री योगी और उनकी सरकार को बताया था।

अखिलेश के बयान पर बात करने से पहले बता दें कि कुछ दिनों पहले यूपी सरकार ने पूरे राज्य में गोशालाएँ बनाने के लिए गौ कल्याण उपकर (सेस) लगाने का फ़ैसला किया था। इसके तहत 0.5 प्रतिशत सेस शराब के अलावा यह ‘कर’ उन सभी वस्तुओं पर है, जो उत्पाद कर के दायरे में आती हैं। लेकिन अखिलेश ने सरकार के फैसले को अपने बयान के साथ खूब तोड़-मरोड़ कर पेश किया।

अखिलेश ने लखनऊ स्थित सपा के दफ्तर में कहा कि योगी सरकार ने शराब पर गौ कल्याण टैक्स लगाया है। सरकार ने लोगों को लालच दिया है कि गाय सेवा सिर्फ़ तभी अच्छी होगी जब लोग शराब ज्यादा पिएँगे। अखिलेश का कहना है कि ग़रीब को नहीं पता है कि उसे कौन-सी शराब पीनी है। लेकिन सरकार को सब पता है, शराब पीने वालों को बढ़ाना चाहती है। उनका मानना है कि सरकार को यह भी पता है कि कौन ऐसी ज़हरीली शराब बना रहा है।

अखिलेश यादव के ऐसे बयानों को सुनकर लगता है कि योगी सरकार पर लगातार किसी भी मामले में, किसी भी तरह से आरोप लगाने वाले पूर्व सीएम अपना समय भूल गए हैं। योगी सरकार पर उँगली उठाने वाले अखिलेश भूल रहे हैं कि उनके राज में उन्नाव और लखनऊ में 33 लोगों की मौतें ज़हरीली शराब पीने से हुई थी। इसके बाद तात्कालीन सरकार और प्रशासन की ओर से काफ़ी बड़े-बडे़ दावे भी किए गए थे।

ऐसे में अखिलेश का इस मामले पर योगी सरकार को घेरना बेहद शर्मनाक है क्योंकि अखिलेश भी ऐसी स्थिति का सामना अपने शासनकाल में कर चुके हैं। जिनका सामना आज योगी आदित्यनाथ की सरकार कर रही है। अगर कोई शख़्स अपने घर पर शराब पी ले और उसे कुछ हो जाए तो उसकी ज़िम्मेदारी राज्य की नहीं होती। स्थिति को सुधारने पर बात करने से ज़्यादा अखिलेश का सरकार पर आरोप मढ़ना दर्शाता है कि वो सिर्फ़ मौक़ापरस्त राजनीति को हवा दे रहे हैं।

अमेरिका की पहली हिन्दू सांसद तुलसी गबार्ड ने मनाई सरस्वती पूजा, कहा गर्व है हिन्दू होने पर

शिकागो में ‘काली बाड़ी’ द्वारा आयोजित सरस्वती पूजा में शामिल हुई डेमोक्रेट सांसद तुलसी गबार्ड ने पूजा के आयोजन के वक्त अपनी हिन्दू जड़ों को याद करते हुए कहा कि उन्हें संसद में जाने वाली पहली हिन्दू होने पर गर्व है। साथ ही, उन्होंने कहा कि संसद बनने की शपथ उन्होंने भगवद् गीता पर हाथ रखकर ली थी। 2020 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने जा रहीं डेमोक्रैटिक पार्टी की सांसद तुलसी गबार्ड ने अपने छोटे भाषण में हिन्दू समुदाय द्वारा किए जा रहे कार्य को सराहा।

कुछ दिनों पहले तुलसी को कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थानों और लोगों ने ‘हिन्दू’ होने को लेकर निशाना बनाया था जब उन्हें बार-बार ‘हिन्दू-अमेरिकन’ कहकर ऐसे दिखाया जा रहा था मानो हिन्दू होना अपराध हो। इस पर उन्होंने आलोचकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति को उसकी किसी भी तरह की पहचान को लेकर निशाना बनाना गलत है। गबार्ड ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात को इस बात के साक्ष्य के लिए दर्शाया गया, जबकि किसी पीएम से मिलने वाले गैर हिंदू नेताओं पर कोई सवाल नहीं उठाया गया।

तुलसी ने कहा कि इससे पहले पीएम मोदी से राष्ट्रपति ओबामा, मंत्री (हिलेरी) क्लिंटन, राष्ट्रपति (डॉनल्ड ) ट्रंप और कॉन्ग्रेस के मेरे कई साथी मिल चुके हैं लेकिन उनको लेकर किसी ने कोई टिपप्णी नहीं की थी। यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है। बता दें कि, 37 साल की तुलसी ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फै़सला किया है, और ऐसा करने वाली वह अमेरिकी इतिहास में पहली हिंदू हैं।

अमेरिका कॉन्ग्रेस में चुनी गई पहली हिंदू महिला हैं तुलसी

बता दें कि तुलसी अमेरिकी कॉन्ग्रेस में चुनी जाने वाली न सिर्फ पहली हिन्दू महिला हैं बल्कि राष्ट्रपति की दावेदारी पेश करने वाली पहली हिंदू-अमेरिकी दावेदार भी हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-अमेरिकी दावेदार होने का मुझे गर्व है।

बता दें कि, ‘रिलिजियस न्यूस सर्विसेज’ में एक संपादकीय में उनके, समर्थकों एवं दानकर्ताओं को टार्गेट करते हुए उन्हें हिंदू अमेरिकी बताया गया था। जिसपर उन्होंने कहा कि उनको, और उनके समर्थकों को, टार्गेट करते हुए ‘हिंदू अमेरिकी’ का टैग लगाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या धर्म के आधार पर हमें बाँटना ठीक है? कल क्या किसी को यहूदी या मुस्लिम अमेरिकी कहना सही होगा? इन सभी बातों से केवल धार्मिक भेदभाव की ही बात सामने आती है।

प्रियंका गाँधी के आने से सोनिया को हुआ ‘जबरदस्त’ घाटा: पोस्टर-गणित से समझें राजनीति का खेल

“एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है।” प्रियंका गाँधी वाड्रा की एक पोस्टर को देखते हुए अचानक मेरे दिमाग में यह पंक्ति याद आ गई। इसके बाद मैंने सोचा कि भारतीय राजनीति में ट्रेंड कर रहीं प्रियंका गाँधी की पॉलिटिक्स को तस्वीर व पोस्टरों की मदद से समझा जाए। यहाँ एक जरूरी बात यह है कि जैसे बिना किसी पूर्वग्रह से ग्रसित हुए मैंने यह लेख लिखा है, आप भी बिनी किसी पूर्वग्रह के पूरा लेख पढ़ जाइए। आधा लेख पढ़कर कंफ्यूजन में पड़ने के बजाय नहीं पढ़ना ज्यादा बेहतर होगा।

यह संभव है कि मैंने इन पोस्टरों के जरिए जितना कुछ भी समझा है, आप उससे थोड़ा ज्यादा या कम समझ सकते हैं। यह पूरी तरह से आपकी कल्पनाशीलता पर निर्भर करता है। मैंने प्रियंका गाँधी वाड्रा से जुड़े तीन पोस्टर को लेकर यह आर्टिकल लिखा है। यह तीनों ही पोस्टर प्रियंका गाँधी वाड्रा के प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में आने से पहले और आने के बाद की है।

इन तीनों ही पोस्टरों से जो संकेत मिल रहे हैं उसे समझने की कोशिश करेंगे यहाँ। प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में आने से पहले प्रियंका रायबरेली और अमेठी में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए प्रचार करती रही हैं। ऐसी बात भी नहीं है कि प्रियंका सिर्फ अपने भाई और माँ के लिए ही इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करती हैं। बल्कि यह कहा जाता है कि प्रियंका ने 1999 में रायबरेली से कॉन्ग्रेसी उम्मीदवार सतीश शर्मा के लिए पहली बार खुल कर चुनाव प्रचार किया था।

प्रियंका ने इस चुनाव प्रचार के दौरान कई बार कहा, “रायबरेली इंदिरा गाँधी की कर्मभूमि है। भारत की उस बेटी की कर्मभूमि, जिसे मैं सबसे ज्यादा सम्मान करती हूँ।”

1999 के लोकसभा चुनाव में अरूण नेहरू जैसे कद्दावर नेता को हराना कॉन्ग्रेसी उम्मीदवार सतीश शर्मा के लिए संभव नहीं होता, यदि प्रियंका मैदान में नहीं उतरतीं। इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि प्रियंका के दिल में रायबरेली के लिए ख़ास जगह है।

दरअसल आपको हम यहाँ इस बात को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रियंका को रायबरेली से इतना प्रेम क्यों है? शायद इसलिए क्योंकि प्रियंका मानती हैं कि यह लोकसभा क्षेत्र उनकी दादी इंदिरा की कर्म भूमि है, लेकिन अक्टूबर 2018 में छपे एक पोस्टर से यह ज़ाहिर हो गया कि प्रियंका का रायबरेली से भावनात्मक जुड़ाव तो नहीं है।

यह सोचने वाली बात है कि जिस रायबरेली के बारे में प्रियंका कहती रही हैं कि यह क्षेत्र मेरे दिल के करीब है, लेकिन रायबरेली में हरचंपुर रेल हादसा, ऊँचाहार दुर्घटना और रालपुर हादसे में दर्जनों लोगों की मौत के बाद भी प्रियंका पीड़ित लोगों से मिलने भी नहीं पहुँचती हैं। इस बात से रायबरेली को लेकर उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को आसानी से समझा जा सकता है।

रायबरेली में प्रियंका का पोस्टर

मानवीय तौर पर सोनिया, राहुल व प्रियंका तीनों को उन पीड़ित परिवारों से तुरंत मिलना चाहिए था। ऐसा करके शायद प्रियंका पीड़ित परिवार के दिल में अमिट छाप छोड़ पातीं, लेकिन ऐसा नहीं करके उन्होंने एक बड़ी गलती की।

अब बात दूसरे तस्वीर की करते हैं, जो पोस्टर कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा प्रियंका गाँधी को पूर्वी यूपी के महासचिव बनने की घोषणा से पहले की है। इस तस्वीर से साफ़ होता है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे पार्टी में प्रियंका का कद बढ़ेगा, पोस्टरों में सोनिया की तस्वीर छोटी होती चली जाएगी।

प्रियंका के कॉन्ग्रेस पार्टी में महासचिव बनने से पहले के पोस्टर की तस्वीर

एक माँ के लिए बेटी के बढ़ते कद को देखना अच्छी बात हो सकती है। लेकिन मामला देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार से जुड़ा है, इसलिए कॉन्ग्रेस पोस्टर से सोनिया की तस्वीर का अचानक छोटा और फिर गुम हो जाना एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है। संकेत यह है कि अपनी बेटी के ही आगे सोनिया का राजनीतिक कद पार्टी में और आम लोगों के बीच कम होता जा रहा है।

पटना में जन आकांक्षा रैली के पोस्टर की तस्वीर, जिसमें सोनिया नहीं दिख रही हैं

अब बात तीसरी तस्वीर की। दूसरी तस्वीर में हमने देखा कि प्रियंका के आने से सोनिया का राजनीतिक कद कम हुआ। लेकिन पटना जन अकांक्षा रैली के पोस्टर में सोनिया का ना होना, एक बड़ा संकेत देता है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रियंका के आने से भाजपा पर क्या असर पड़ेगा यह बाद की बात है, लेकिन इसका सीधा असर सोनिया पर जरूर पड़ा है।

ब्रह्माण्ड में आदिकाल से अविरल बहती ‘सरस्वती’

सरस्वती केवल पृथ्वी पर विलुप्त हो चुकी एक नदी का नाम ही नहीं है। दो साल पहले भारत के वैज्ञानिकों के एक दल ने ब्रह्माण्ड में मंदाकिनियों के एक बड़े समूह का पता लगाया था और उसे ‘सरस्वती’ नाम दिया था। कल्पना से भी बड़े गैलेक्सी के इन समूहों को सुपर क्लस्टर कहा जाता है।

जुलाई 2017 में पुणे स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स (IUCAA) के वैज्ञानिकों ने सरस्वती सुपर क्लस्टर की खोज की थी। यह सुपर क्लस्टर हमसे 4 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। दूरी की गणना की जाए तो एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश एक वर्ष में तय करता है। प्रकाश एक सेकंड में 3 लाख किमी दूरी तय करता है। इस हिसाब से वह एक वर्ष में लगभग 10 खरब किमी तय करेगा।

इस छोटी सी गणित को समझा जाए तो हमें पता चलेगा कि हम सरस्वती सुपर क्लस्टर की जो तस्वीर देख रहे हैं वह आजकल या कुछ साल पहले की नहीं बल्कि उस समय की है जब ब्रह्माण्ड में बड़ी संरचनाएँ जन्म ले रही थीं। उस कालखंड को वैज्ञानिक ‘Large Structure Formation’ की संज्ञा देते हैं। यह बिग बैंग से एक अरब वर्ष बाद का समय था जब बड़ी संरचनाएँ उत्पन्न हुईं। सरस्वती सुपर क्लस्टर आज से 4 अरब वर्ष पहले निर्मित हुआ था।

बिग बैंग से एक लाख वर्ष बाद ब्रह्माण्ड में केवल तरंगें ही व्याप्त थीं, कोई पदार्थ नहीं बना था। इन तरंगों को ‘कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन’ (CMBR) कहा जाता है। इन तरंगों की खोज भी अकस्मात हुई थी। दरअसल 1964-65 में अमेरिका में आर्नो पेंजियास और रॉबर्ट विल्सन एंटीना पर कुछ प्रयोग कर रहे थे कि तभी उन्हें कुछ विचित्र आवाज़ सुनाई दी। जब उन्होंने उसका स्रोत जानने का प्रयास किया तो पाया कि वे तरंगें धरती पर कहीं से नहीं आ रही थीं। वास्तव में वे तरंगें सुदूर अंतरिक्ष में अरबों वर्षों से व्याप्त थीं जब ब्रह्माण्ड अपने शैशवकाल से निकलकर किशोरावस्था में प्रवेश कर रहा था।

कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन ने बिग बैंग थ्योरी को प्रमाणित किया। लेकिन जब मंदाकिनियों के अपनी धुरी पर घूमने की गति मापी गई तो पता चला कि गति के हिसाब से उनका द्रव्यमान (mass) अत्यधिक है। एक गैलेक्सी के सभी तारों, गैस इत्यादि पदार्थों का द्रव्यमान जोड़ा गया तो वह बहुत कम था। अपनी आकाशगंगा की ही बात करें तो उसमें जितना पदार्थ हम देख पाते हैं वह गणितीय आकलन द्वारा प्राप्त द्रव्यमान का मात्र 10% है। तब प्रश्न उठा कि बाकी 90% भार या द्रव्यमान किस वस्तु का है। गैलेक्सी में ऐसी कौन सी वस्तु है जो हमें दिखाई नहीं देती लेकिन उसका भार है।  

तब एक थ्योरी आई जिसे हम डार्क मैटर कहते हैं। डार्क मैटर दो प्रकार के बताए गए- कोल्ड डार्क मैटर और हॉट डार्क मैटर। ब्रह्माण्ड में बड़ी संरचनाएँ कैसे बनीं इसकी सर्वाधिक प्रचलित थ्योरी कोल्ड डार्क मैटर थ्योरी है। कोल्ड डार्क मैटर थ्योरी के अनुसार ब्रह्माण्ड के जन्म के 1 अरब वर्ष बाद तारे और छोटी गैलेक्सी उत्पन्न हुईं। आज से 4 अरब वर्ष पहले तक ब्रह्माण्ड में सरस्वती जैसे सुपर क्लस्टर का निर्माण कोल्ड डार्क मैटर थ्योरी के अनुसार नहीं हुआ होगा।

लेकिन अब जब एक सामान्य गैलेक्सी से सैकड़ों गुना बड़ी सरस्वती जैसी बड़ी संरचना खोज ली गई है जो कई मंदाकिनियों का समूह है, तब वैज्ञानिकों को ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और कोल्ड डार्क मैटर थ्योरी पर पुनर्विचार करना होगा। अब तक तो यही माना जाता रहा कि ब्रह्माण्ड एक जाल की तरह है जिसके तंतु गैलेक्सी हैं। ये मंदाकिनियाँ आपस में जुड़ कर गैलेक्सी की चादर (sheet) बनाती हैं। कोल्ड डार्क मैटर थ्योरी के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के आरंभ में छोटी गैलेक्सी बनी होंगी। कालांतर में वे जुड़कर क्लस्टर और सुपर क्लस्टर बनी होंगी, लेकिन 250,000 प्रकाश वर्ष बड़ी सरस्वती की खोज ने इन मान्यताओं को धराशाई कर दिया है।   


चुनाव आयोग ने दी वोटर्स को सावधान रहने की सलाह, नहीं कटे हैं मतदाता सूची से नाम

कुछ दिन पहले खबरें आई थी कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरफ से नागरिकों को एक अलग ही तरह की कॉल की आ रही है। इस कॉल में लोगों से कहा जा रहा था कि उनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया था लेकिन दिल्ली मुख्यमंत्री ने उनका नाम दोबारा से वोटर लिस्ट में जुड़वा दिया है। झूठे फोन कॉल का मामला चर्चा में आने के बाद चुनाव आयोग के पास इसकी शिकायतें पहुँचनी शुरू हुईं।

ऐसे में चुनाव आयोग ने दिल्ली की जनता को भ्रमित करने वाले फोन कॉल्स से सावधान करते हुए आश्वासन दिया है कि वो इस तरह की बातों पर यकीन न करें। शनिवार (फरवरी 9, 2019) को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के हवाले से आयोग द्वारा यह बात कही गई है।

आयोग ने इस बात को साफ़ किया है कि अज्ञात व्यक्तियों और संस्थाओं की ओर से काफ़ी सँख्या में लोगों को भ्रमित करने वाली फोन कॉल्स आ रही हैं। जिसमें लोगों को बताया जा रहा है कि उनका नाम मतदाता सूची से काट दिया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग ने बताया कि इन मामलों में मिली शिकायतों पर क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस बात को स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का एकमात्र अधिकार केवल निर्वाचक पंजीयक अधिकार के पास ही होता है।

इसलिए, किसी व्यक्ति अथवा संस्था की ओर से आने वाली फोन कॉल से स्थानीय नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। साथ ही जनता को मतदाता सूची से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 पर फोन करने की सलाह दी।

साथ ही मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने पर आयोग ने बताया है कि आयोग की वेबसाइट पर मौजूद फॉर्म 6 के ज़रिए आवेदन किया जा सकता है।

रामलिंगम हत्या: एस निजाम अली, सरबुद्दीन, रिज़वान, मोहम्मद अज़रुद्दीन और मोहम्मद रैयाज़ गिरफ़्तार

तमिलनाडु में कुंभकोणम पुलिस ने गुरुवार को एक्टिविस्ट रामलिंगम की हत्या मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े एक सदस्य समेत पाँच लोगों को कुंभकोणम पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है।

ख़बर के अनुसार, मामले में आरोपितों को गिरफ़्तार करने के लिए गठित एक विशेष टीम ने 42 वर्षीय कार्यकर्ता और पीएमके (पट्टाली मक्कल काची) नेता वी रामलिंगम की जघन्य हत्या मामले में पाँच लोगों को हिरासत में लिया है। गिरफ़्तार लोगों की पहचान एस निजाम अली, सरबुद्दीन, रिज़वान, मोहम्मद अज़रुद्दीन और मोहम्मद रैयाज़ के रूप में की गई है।

कथित तौर पर, धार्मिक रूपांतरण का विरोध करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों के एक समूह द्वारा उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

5 फरवरी को रामलिंगम ने देखा कि कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से संबंधित एक समूह द्वारा दलित बहुल पड़ोस में धर्मांतरण की प्रक्रिया चलाई जा रही थी। रामलिंगम ने उसी का विरोध किया, जिससे प्रचारकों और रामलिंगम के बीच विवाद शुरू हो गया। हालाँकि बाद में इस मुद्दे को कुछ मुस्लिम मौलवियों द्वारा सुलझा लिया गया था।

इस घटना के बाद अपने मिनीवैन में जब रामलिंगम घर वापस जा रहे थे तब चार लोगों के गिरोह ने कार से बाहर निकालकर रामलिंगम के हाथों पर धारदार हथियार से हमला किया और उनका हाथ काट दिया। गंभीर रूप से घायल रामलिंगम को कुंभकोणम के एक सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। बाद में उन्हें तंजावुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।