'कब्रगाह' साबित हो रहा कोटा का अस्पताल, 14 और मौत के साथ एक महीने में 91 बच्चों की गई जान। NCPCR की टीम ने हॉस्पिटल में देखा कि ख़िड़कियों में शीशे नहीं, दरवाजे टूटे हुए हैं। अस्पताल के कैंपस में ही सुअर घूमते हैं।
वक्त है चेत जाने का। खुद की आवाज बनने का। गिरोह घात लगाए बैठा है। उसे नहीं कुचला तो वह गजवा-ए-हिंद के ख्वाब बुनने वालों के पीठ पर हाथ फेरेगा और आपको भगवा आतंकवादी घोषित कर देगा।
"पुलिस ने धैर्य दिखाया और गोली नहीं चलाई। लखनऊ में 56 पुलिसकर्मियों पर गोली किसने चलाई? जो लोग कह रहे हैं कि उनके पास कोई कागज़ ही नहीं हैं, वो आख़िर हैं कौन? 6000 साल से भी ज़्यादा पुराने बाकू के फायर टेम्पल पहुँचे एक पाकिस्तानी युवक की दर्दनाक कहानी सुनिए..."
ऑपइंडिया ले कर आया है इस वर्ष की नृशंस अपराधों की टॉप-10 ख़बरें, जिन्हें वामपंथी मीडिया ने छिपाने की भरसक कोशिश की। ये ऐसी ख़बरें हैं, जिन्हें मीडिया के एक वर्ग ने छिपाना चाहा। साल की ऐसी सभी 10 ख़बरों को आप एक साथ यहाँ पढ़ सकते हैं।
ऑपइंडिया ने एक साल पूरे किए और लगभग 10,000 लेख हमने खबरों, विचार और विश्लेषण के रूप में आप तक पहुँचाया। लेकिन इसमें सिर्फ ऑपइंडिया की सम्पादकीय टीम का ही योगदान नहीं रहा, बल्कि पाठकों में से भी कई लोगों ने अपने लेखों और विश्लेषणों से हमारे प्लेटफ़ॉर्म को बेहतर बनाया। उन सभी का शुक्रिया, बार-बार धन्यवाद!
वर्ष 2019 जाने वाला है और इसी के साथ ऑपइंडिया हिन्दी के भी एक साल पूरे हो रहे हैं। इस साल राजनीति और समाज से ले कर न्यायपालिका और मीडिया से जुड़ी कई ऐसी खबरें थीं, जिन्हें पाठकों ने खूब पढ़ा और पसंद किया। 2020 में हम और भी उत्साह से बने रहेंगे आपके साथ।
आरोप है कि इन लोगों ने ईसाई धर्म की पवित्र पुस्तक बाइबल की शब्दावली का मज़ाक उड़ाया। फराह ख़ान ने बाइबिल का एक शब्द बोला और भारती सिंह को ब्लैकबोर्ड पर लिखने को कहा। आरोप लगाया गया है कि शो में बाइबिल के शब्द को अश्लील रूप में पेश किया गया।
"जो भी व्यक्ति संविधान के खिलाफ जाकर हिंसात्मक रवैया अपनाएगा, उसके ख़िलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई करने में प्रदेश सरकार पूरी तरह सक्षम है। आगे दंगाइयों पर ऐसी कार्रवाइयाँ होनी हैं कि उनकी सात पुश्तें याद रखेंगी। उनकी सात पुश्तें गुंडई और दंगा करने से डरेंगी।"
"बाबरी मस्जिद के मलबे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। ऐसे में मलबे के हटाने के समय उसका अनादर किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि हम तीन शताब्दी से इस मस्जिद में नमाज पढ़ते आ रहे थे, इसलिए इसके मलबे पर हम अपने हक के लिए याचिका दायर करेंगे।"
महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार से पहले छोटे दलों के साथ कोई बातचीत नहीं की गई। इससे यह दल खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। महा विकास अघाड़ी में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन, शेकाप, समाजवादी पार्टी, सीपीएम, बहुजन विकास अघाड़ी, प्रहार और जोगेंद्र कवाडे की रिपल्बिकन पार्टी शामिल है।