जिन NDTV के लिए पसीना बहा कर प्रोपेगेंडा फैलाते-फैलाते बाल सफ़ेद कर दिए, अब उसी NDTV ने रवीश के ब्लॉग को वेबसाइट पर एक कोने में छोटी सी जगह में ढकेल दिया है। क्या रवीश के शो की गिरती TRP के कारण उन्हें अपने ही संस्थान में किनारे किया जा रहा है? दुःखद। निंदनीय।
विवादों में रहने के शौक़ीन कन्हैया कुमार ने धर्म को संघियों के लिए धंधा बताते हुए आज एक विवादित ट्ववीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि जहाँ धर्म हिन्दुओं के लिए आस्था का सवाल है वहीं संघियों के लिए मात्र धंधा।
देश में एक ऐसा प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है, जहाँ वामपंथियों ने JNU से भी ज़्यादा तबाही मचा रखी है। निर्भया का बलात्कारियों के समर्थन से लेकर सेना को बलात्कारी और हिंसक बता तक, वहाँ के वामपंथी छात्र और प्रोफेसर घृणा की नई इबारत लिख रहे हैं। TISS में वामपंथियों की साज़िश का भंडाफोड़।
लम्बे समय से स्थगन का शिकार ज्ञानवापी मस्जिद मामला कोर्ट में कानूनी लड़ाई के लिए वापस आ गया है। वामपंथियों को सूजन होने के आसार क्योंकि दूसरे पक्ष की याचिका हुई खारिज।
"अब ये प्रोटेस्ट CAA-NRC के विरूद्ध नहीं है। ये एक मौका है BJP और RSS के नेताओं को ये दिखा देने का कि मुस्लिम कितना संगठित है। अब वो दिन दूर नहीं जब सब जगह हमारे लोग होंगे या हम जिसे चाहेंगे, जो हमारे लिए काम करेगा, उसी की सरकार बनेगी, हम सरकार बनाएँगे भी और गिराएँगे भी।"
पीड़िता दलित नाबालिग लड़की उन दरिंदों को "भैया आप मुझे जानते हो, अल्लाह के लिए छोड़ दो” कह-कहकर गिड़गिड़ा रही थी। मगर फिर भी दरिंदों को रहम नहीं आया। वह रोती, चीखती, चिल्लाती रही और आदिल, नजिक जैसे दरिंदे उसकी चीख को फिल्माते रहे।
कॉलेज-ट्यूशन से लेकर शादी-ब्याह तक के बीच एक लड़की के मन में ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लेकर चुनाव चलता ही रहता है कि आखिर वो किस तरह समाज के बनाए पैमानों पर निखर पाएगी और कैसे अन्य लड़कियों की तरह खुद को सुंदर बना पाएगी... और कंपनियाँ इसी का फायदा उठाती हैं।
"ज्ञानवापी में सतयुग से ही भगवान विश्वेश्वर विराजमान हैं, एएसआई के सर्वे के बाद इस मामले में सच्चाई समाने आ जाएगी। परिसर के मालिक भी भगवान विश्वेश्वर ही हैं। एक मंडप को तोड़ कर औरंगज़ेब ने मस्जिद खड़ी कर दी थी।"
"शरद पवार हमेशा से हिन्दू विरोधी। वे कभी रामायण पर कटाक्ष करते हैं तो कभी उसको अप्रासंगिक बताते हैं। और न ही वे पांडुरंग की पूजा में शामिल होते हैं। पवार नास्तिक मंडलियों के साथ हैं। और ऐसे में अगर पैसों के लालच में उन्हें कोई कार्यक्रमों में बुलाता है तो यह अधार्मिक ही है।"
"हम अगर उसी तरीके से चलते, जिस तरीके से आप लोग चलते हैं तो इस देश से अनुच्छेद 370 नहीं हटता, मुस्लिम बहनों को तीन तलाक की तलवार आज भी डराती रहती, नाबालिग से रेप के मामले में फाँसी की सजा का कानून नहीं बनता, राम जन्मभूमि आज भी विवादों में रहती, करतारपुर कॉरिडोर कभी नहीं बनता, भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद कभी नहीं सुधरता।"