कला-साहित्य

अमेज़न पर आउट ऑफ स्टॉक हुई राहुल रौशन की किताब- ‘संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा’

राहुल रौशन ने हिंदुत्व को एक विचारधारा के रूप में क्यों विश्लेषित किया है? यह विश्लेषण करते हुए 'संघी' बनने की अपनी पेचीदा यात्रा को उन्होंने साझा किया है- अपनी किताब 'संघी हू नेवर वेंट टू अ शाखा' में…"

क्या विभाजन की विचारधारा आज भी जिन्दा है: अजीत भारती और संजय दीक्षित के बीच बातचीत

संजय दीक्षित की पुस्तक 'Nullifying article 370 and enacting CAA' पर अजीत भारती और संजय दीक्षित के बीच भारत में रह रहे कथित अल्पसंख्यकों के विभाजन की विचारधारा पर बातचीत हुई।

जब अटल बिहारी वाजपेयी की कविता के लिए शाहरुख से लेकर अमिताभ और जगजीत सिंह एक मंच पर आए

अटल बिहारी वाजपेयी के कविता संग्रह 'संवेदना' को वर्ष 2002 में म्यूजिक एल्बम के रूप में लाया गया था, जिसे अमिताभ बच्चन, जगजीत सिंह ने अपनी आवाज दी और शाहरुख़ खान ने इस गीत में अभिनय किया था।

काहे के महानायक: अमिताभ बच्चन ने चोरी की कविता की अपने नाम से पोस्ट, लेकिन दूसरों को भेजते हैं नोटिस!

अमिताभ बच्चन ने जो कविता अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर की है, उसकी वास्तविक रचनाकार ने अमिताभ बच्चन से इसे लेकर आपत्ति दर्ज की है।

90 के हिन्दू नरसंहार से एयर स्ट्राइक, प्रेम, कौम और राजनीति तक, ‘बाला सेक्टर’ में सब दर्ज हैं

'बाला सेक्टर' उसी 1990 के भयानक रक्तपात से शुरू होती है। जेहादियों के दल ने अपने ही रक्षक को कैसे मौत के घाट उतारा.. ये सब आपको पहले ही खण्ड में मिल जाएगा।

मैं मुन्ना हूँ: कहानी उस बच्चे की जो कभी अंधेरी कोठरी में दाखिल होकर अपनी आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया...

उपन्यास के नायक मुन्ना की कहानी आरंभ होती है उसके श्रापित बचपन से जहाँ वह शारीरिक, मानसिक झंझावतों से जूझता किशोरवय के अल्हड़पन को पार कर प्रेम की अनकही गुत्थियों को सुलझाता जीवन यात्रा में आगे बढ़ता रहा।

मैं मुन्ना हूँ: उपन्यास पर मसान फिल्म के निर्माता मनीष मुंद्रा ने स्कैच के जरिए रखी अपनी कहानी

मसान और आँखों देखी फिल्मों के प्रोड्यूसर मनीष मुंद्रा, जो राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त निर्माता निर्देशक हैं, ने 'मैं मुन्ना हूँ' उपन्यास को लेकर एक स्केच बना कर ट्विटर किया है।

‘सेकुलर’ प्रोपेगेंडा को ‘राष्ट्रवादी’ कार्टूनों से ध्वस्त करता नवयुवक; हिन्दुओं के नरसंहार ने बनाया आर्टिस्ट

इस कलाकार के इरादे इस दिशा में तब और मजबूत हुए, जब 19 जनवरी को उन्होंने कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार पर 30 साल बीत जाने पर भी लोगों को चुप देखा।

उम्माह के पैरोकार इक़बाल ने कैसे बदल दिया था ‘सारे जहाँ से अच्छा’ तराना: कट्टरपंथी थे Pak के जनक

अगर आप इस्लामी कट्टरपंथी अल्लामा इक़बाल का 'सारे जहाँ से अच्छा' गाते हैं तो आपको 'तराना-ए-मिल्ली' के बारे में जरूर जानना चाहिए।

तुम देखोगे? हम दिखाएँगे…: लिबरलों, वामपंथियों के लिए दंगा साहित्य से उपजी एक कविता

ये हरा-हरा सा एक फिल्टर जो तुमने चढ़ा कर रक्खा है उससे भगवा छँट जाता है हिन्दू गायब हो जाता है दिखता है बस इमरान-जुबैर अंकित-दीपक छुप जाता है ओ वामपंथ के रखवाले ओ लम्पट लिबरल तुम साले! दिल्ली दंगो की व्यथा सुनाती इस कविता को पढ़ें, सुनें औरों तक पहुँचाएँ। आप इसे अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर आगे बढ़ाएँ।

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