लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।
लोगों में एकता की पहल करना समाजसेवा है। 'लव जिहाद' के खिलाफ आवाज़ उठाना महिला अधिकारों की लड़ाई है। गोरक्षा पशु अधिकार की सुरक्षा है। वामपंथी इन्हीं अधिकारों के लिए लड़ने का दावा करते हैं तो फिर इनसे नफरत क्यों?
जंगलराज जैसे नाम आँकड़ों पर नहीं, लोगों के भीतर अपराध को ले कर जगे डर के कारण मिलते हैं। जब पुलिस केस दर्ज न करे, केस दर्ज करने पर आपकी हालत चंदा बाबू जैसी हो जाए, तो वो डेटा में नहीं लिखा जाता।
जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुमसे या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?