विचार

लव जिहाद पर हिंदू चुप रहें, क्योंकि सागरिका घोष ऐसा ही चाहती हैं, उन्होंने तुर्किश शो भी देखी है

ग्रूमिंग जिहाद के नाम पर हिंदू महिलाओं के भयावह अनुभव को सागरिका घोष मुस्लिम दामादों के प्रति 'मानसिक उन्माद' बताकर खारिज कर देती हैं।

तीस हजार बाबरी बाकी है, और हम उसे ले कर रहेंगे

हर राष्ट्र में कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से होता है और अल्पसंख्यकों को उसी दायरे के अनुकूल बनना पड़ता है। यहाँ हमेशा उल्टा होता आया है क्योंकि सर्वसमावेशन और सहिष्णुता की बात सिर्फ हिन्दुओं की ही जिम्मेदारी बन गई है।

नारीवादियो तेरा कुछ नहीं जाता, पर सितारा परवीन जैसों के लिए बेड़ी बन जाती है जायरा वसीम और सना खान की ‘घर वापसी’

नारीवाद का झंडा बुलंद करने वालों को सना, जायरा वसीम, हलीमा के फैसलों में पितृसत्ता क्यों नहीं दिखती?

‘बाबरी मस्जिद… भगवान का घर तोड़ना पाप’ – शब्दों से खेल रही स्वरा भास्कर की हिंदी कमजोर या है पाखंड?

स्वरा जैसों का प्रयास आज भी वही है कि राम मंदिर बनने के बाद सेकुलर हिंदू उसमें जाए और मंदिर में बैठकर अल्लाह से माफी माँगे।

रोशनी एक्ट मतलब जम्मू का ‘इस्लामीकरण’: रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में बसाने की साजिश

रोशनी एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया। इस भूमि घोटाले और जम्मू संभाग के इस्लामीकरण की जेहादी साजिश की जाँच CBI को...

प्यारे हिन्दुओ! बच्चों को सिखाना कि 400 साल पहले कुछ आतंकियों ने हमारे मंदिर पर पूरी मस्जिद ही रख दी थी

बाबरी मस्जिद में किसी ने मूर्तियाँ रखी तो इतिहास और भूगोल गिन रहे हो, अयोध्या में राम जन्मभूमि पर कोई पूरी मस्जिद रख गया, उसका क्या?

अब ‘नए जिन्ना’ के साथ खुल कर ‘इलू-इलू’ करेंगे ‘कार वाले साहब’? GHMC चुनाव के बाद BJP के लिए खुला दक्षिण का रास्ता

हैदराबाद निकाय चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि हिंदी पट्टी से बाहर निकल कर उत्तर-पूर्व में दबदबा बनाने वाली बीजेपी अब बंगाल और दक्षिण में एंट्री ले रही है।

हैदराबाद में केवल ओवैसी को घेरने गई है BJP या कोई और है निशाना: नड्डा, योगी और शाह के उतरने का कुछ अलग ही...

हैदराबाद के सहारे भाजपा को दक्षिण में मिलेगी एंट्री? GHMC के चुनाव में भाजपा ने नड्डा, योगी और शाह को क्यों उतारा? समझिए, इस दिलचस्प चुनाव का पूरा गणित।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का समुदाय विशेष वालों द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में खास मजहब का लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

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