क्या दिल्ली में मुफ्त की बिजली पाने वाले उस दर्द को महसूस कर सकते हैं, जो अपने खेत-खलिहान को आँखों के सामने डूबते देखने में होता है? वह दर्द जो अपने बाप-दादाओं के पुश्तैनी घर और अपने आम के बगीचों को डूबते देखने में होता है?
विचारधारा के आधार पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके कारण संपादकीय टीम में एक डर का माहौल है। जो लोग भी बीजेपी के समर्थक समझे जाते हैं उनमें से ज़्यादातर ने सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखना बंद कर दिया है। जबकि वामपंथी, कॉन्ग्रेसी और आम आदमी पार्टी समर्थक माने जाने वालों पर ऐसी कोई पाबंदी लागू नहीं है।
मेहता अपनी किताब में लिखते हैं कि 'मिशन कश्मीर' के लिए स्क्रिप्ट लिखते समय विधु विनोद चोपड़ा समुदाय विशेष की भावनाओं का ख्याल रखने और 'पोलिटिकली करेक्ट' बने रहने पर खासा जोर देते थे। चोपड़ा का मानना है कि भारत सरकार ने कश्मीर में 'रंग में भंग' डाला।
सोचिए इस पर, वरना प्रेम कहानी के चुम्मे में वन्धामा की 23 लाशों की विद्रूपता छुपा दी जाएगी। शिकारे पर बैठी नायिका की काली जुल्फों में सिगरेट से पूरे शरीर को जलाने के बाद, सर्वानंद कौल और उनके पुत्र की आँखें निकाल लेने की इस्लामी कलाकृति गायब कर दी जाएगी।
यही शाहीन बाग़ की भीड़ हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक चिन्हों को गाली देती देखी गई। क्या हिन्दुओं की आस्था को ठेस लगाने के लिए गाय पर चुटकुले बनाने से लेकर हिन्दुओं की कब्र खोदने की धमकी देने वाला यह शाहीन बाग़, एक शव यात्रा के लिए बैरिकेड खोलकर इंसानियत का उदाहरण बन सकता है?
कुणाल कामरा किसी का कहीं भी उत्पीड़न कर सकता है। क्योंकि दो लोगों ने जामिया नगर और शाहीन बाग़ में हवाई फायरिंग कर दी। इसीलिए, हजारों-लाखों मौतों का जिम्मेदार इस्लामी और नक्सल आतंकवाद भी जायज हो जाता है।
यहाँ पर सवाल उठता है कि केजरीवाल ने ऐसा क्यों कहा कि वोट देने से पहले पुरुषों से अवश्य चर्चा करें? क्या उनको आज की नारी पर भरोसा नहीं है? क्या वो पढ़ी-लिखी-समझदार नहीं है? क्या वो भला-बुरा देखकर समझ नहीं सकती? क्या महिलाओं में इतनी समझदारी नहीं है कि वो अपनी समझ से वोट दे सकें?
2015 में करीब 67% मतदान हुआ था। इस बार भी ऐसा हुआ तो एक करोड़ के करीब वोट पड़ेंगे। दिल्ली में इस वक्त भाजपा के सदस्यों की संख्या 62 लाख के करीब है। इन सभी ने बीजेपी के लिए वोट डाले तो 11 फरवरी को करिश्मा तय है।
विवादों में रहने के शौक़ीन कन्हैया कुमार ने धर्म को संघियों के लिए धंधा बताते हुए आज एक विवादित ट्ववीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि जहाँ धर्म हिन्दुओं के लिए आस्था का सवाल है वहीं संघियों के लिए मात्र धंधा।
कॉलेज-ट्यूशन से लेकर शादी-ब्याह तक के बीच एक लड़की के मन में ब्यूटी प्रोडक्ट्स को लेकर चुनाव चलता ही रहता है कि आखिर वो किस तरह समाज के बनाए पैमानों पर निखर पाएगी और कैसे अन्य लड़कियों की तरह खुद को सुंदर बना पाएगी... और कंपनियाँ इसी का फायदा उठाती हैं।