राजनैतिक मुद्दे

पंजाब कॉन्ग्रेस की लड़ाई में पाकिस्तान की बल्ले-बल्ले: सिद्धू के सलाहकारों का ‘राष्ट्रविरोधी’ भांगड़ा, क्या टूटेगी आलाकमान की चुप्पी

कैप्टन के दो टूक के बाद सवाल यह है कि सिद्धू के सलाहकार के बयानों को कॉन्ग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व कैसे देखता है?

मुहर्रम पर उत्पाती-हमलावर-पाकिस्तान जिंदाबाद वाली भीड़ – OK है… तो सुअरिया मेला में हिंदुओं पर क्यों बरसी पुलिस की लाठी?

रामनवमी हो या काँवड़ यात्रा... पुलिस सक्रिय हो जाती है। जबकि मुहर्रम या बकरीद के दौरान इसी पुलिस की ‘कार्रवाई’ आपको देखने को मिल जाएगी।

कल्याण सिंह एक प्रयोग हैं, प्रयोग मरते नहीं: वह फॉर्मूला जिसके दम पर BJP आज अपराजेय है, जिसने हिंदुओं को जोड़ा

कल्याण सिंह ने राम का स्वप्न पूरा किया। अब कृष्ण और शिव के स्वप्नों को पूरा करने की बारी हमारी और आपकी है।

बंगाल हिंसा पर राजनीतिक बयानों की बेला खत्म: हाईकोर्ट ने दिखाया रास्ता, अब आनाकानी ममता बनर्जी को पड़ सकती है भारी

ऐसा पहली बार हुआ है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और चुनावी हिंसा पर न्यायालय ने किसी उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं।

हिंदुओं के जख्मों पर ‘खेला होबे’: बंगाल ने न डायरेक्ट एक्शन डे से सीखा, न गोपाल पाठा को याद रखा

क्या यह केवल संयोग की बात है कि खेला होबे दिवस मनाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 16 अगस्त को चुना?

क्यों जरूरी है विभाजन के दंश को याद करना, ‘योम हाशाह’ से सीखें हिन्दू: बाबरी का मातम मनाने वाले नहीं समझेंगे

कई देशों में 'National day of mourning', अर्थात शोक का दिवस मनाया जाता है। फिर भारत के हिन्दू/सिख अपने साथ हुई त्रासदी व इसके गुनहगारों को क्यों न याद करें?

अमृत काल में विश्व स्तरीय लक्ष्य: PM मोदी का उद्योग, व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में विकसित देशों की बराबरी का संकल्प

लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना के लिए हमेशा स्थान रहेगा और परंपरा के अनुसार विपक्ष प्रधानमंत्री के भाषण को एक निरुत्साह वाला भाषण भी बता सकता है पर एक आम भारतीय के लिए उनका संबोधन आशा देता है और उसे प्रेरित भी करता है। 

चीनियों पर किसने किया अत्याचार- OK, भारतीयों पर क्या-क्या जुल्म हुए- NOT OK: खूनी इतिहास को पढ़ना इसलिए जरूरी

प्रधानमंत्री का आज का वक्तव्य हमें आशावान बनाता है कि हम भविष्य में दशकों से प्रोपेगेंडा का हिस्सा रहीं कई और स्थापित धारणाओं और मान्यताओं को ध्वस्त होते हुए देखेंगे। 

अफगानिस्तान में इस्लामी सत्ता की मज़हबी लड़ाई! तालिबान पर बगले झाँकते वैश्विक समुदाय को ये चुप्पी भारी पड़ेगी

जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश सुधारों का जोखिम उठा सकते हैं तो पूरी दुनियाँ को सभ्यता सिखाने वाले पश्चिमी देश अफगानिस्तान से आँखें मूँदकर कैसे भाग सकते हैं?

असम में अवैध बांग्लादेशी बदल रहे डेमोग्राफी: जनसंख्या नियंत्रण, गौमांस की बिक्री सहित कई समस्याओं से जूझते हिमंत बिस्वा सरमा

यह दीर्घकालीन लोकतंत्र के हित में है कि अवैध रूप से देश में घुसने और रहने वाले विदेशी नागरिकों की वजह से लगातार बदल रही डेमोग्राफी के संभावित परिणामों पर न केवल बहस हो बल्कि इसे रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाये जाएँ।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें