राजनैतिक मुद्दे

चुनाव में नकारे दलों, वामपंथियों की साजिश है ‘किसान आंदोलन’: लोकतंत्र को भीड़तंत्र से बचाना जरूरी

भारत सहित दुनिया के लोकतंत्रों को सबसे बड़ा खतरा इस समय चीन की अधिनायकवादी व्यवस्था से नहीं बल्कि अपने ही भीतर बसे इन तत्वों से है जो सड़कों पर आकर भीड़ की लाठी से देश को हाँकना चाहते हैं।

जो ट्रम्प के साथ हुआ, वो भारत में हिन्दुओं के साथ भी हो सकता है: फेसबुक-ट्विटर को सामानांतर सरकार बनने से रोकिए

आप किसी साधु की तस्वीर डालते हैं। ट्विटर-फेसबुक उसे कट्टर बताते हुए सेंसर कर दें। आप वेद-पुराणों से उद्धरण डालते हैं। उन्हें अन्धविश्वास की केटेगरी में रख दिया जाए। खुश मत होइए, भारत में ये दिन जल्द ही देखने को मिल सकता है।

KHAM, यानी हिंदुओं को बाँटो-मुस्लिमों को पालोः माधव सिंह सोलंकी ने जो बोया, कॉन्ग्रेस को गुजरात में उसी ने चाटा

माधव सिंह सोलंकी का 9 जनवरी को निधन हो गया। इसके साथ ही उनके 'खाम' फॉर्मूले का यशोगान शुरू हो गया है। जानिए, क्या था KHAM और कैसे था हिंदू विरोधी?

सतपाल निश्चल की हत्या का पाकिस्तान ही जिम्मेदार नहीं, भारत का ​सेक्युलर-लिबरल पॉलिटिक्स भी दोषी

जम्मू-कश्मीर में बीते दिनों आतंकवादियों ने सतपाल निश्चल की गोली मार कर हत्या कर दी। उन्हें हाल ही में डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिला था।

मुनव्वर फारूकी अगर ‘शार्ली एब्दो’ होता तो उसकी गर्दन नीचे पड़ी होती… लटर-पटर बंद करो लिबरलों

लिबरलों द्वारा मुनव्वर फारूकी की गिरफ्तारी की शार्ली एब्दो नरसंहार से तुलना करना, बताता है कि इनके तर्क कितने वाहियात हैं।

वाकई मुसलमान भारत में अल्पसंख्यक हैं, अलग-थलग हैं?

शेखर गुप्ता अकेले नहीं हैं। राजदीप से लेकर रवीश कुमार तक एक हरी-भरी जमात है, जिसके लिए अल्पसंख्यक की बातों का मतलब मुस्लिमपरस्ती है।

दिल्ली पुलिस पर रिवॉल्वर तानने वाले शाहरुख को भूली कॉन्ग्रेस, जामिया फायरिंग के नाबालिग को ‘उग्र दक्षिणपंथी’ बता दिखाया

कॉन्ग्रेस को शाहरुख याद नहीं है। लेकिन, जामिया में गोली चलाने वाले नाबालिग का चेहरा दिखाने से उसे गुरेज नहीं। क्यों? सिर्फ इसलिए कि वह नाबालिग एक हिंदू था।

सिखों की लाश पर PM बने, मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए हदें पार की: कॉन्ग्रेस का ‘मिस्टर क्लीन’… लेकिन कहे गए ‘बोफोर्स चोर’

भारत में अगर किसी पार्टी को कभी सबसे ज्यादा सीटें मिलीं तो वो थी 1984 में कॉन्ग्रेस को मिली 414 सीट। इसके बाद राजीव गाँधी प्रधानमंत्री बने।

बुलेट का जवाब बैलेट से: जम्मू-कश्मीर में भारत, भारतीयों और लोकतंत्र की जीत, भाजपा का उदय है बड़ा संदेश

सन 2021 की ‘पूर्वसंध्या’ में आए ये चुनाव परिणाम बहुत कुछ कहते हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की पूर्वपीठिका निर्मित करते हैं।

लोकतंत्र का ककहरा सीखें राहुल गाँधी, क्योंकि यह परिवार का विशेषाधिकार सुरक्षित रखना नहीं

लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सब रखते हैं। लेकिन विरोध का ये अधिकार जब गुंडागर्दी और अराजकता में बदल जाए तो इसे लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र कहते हैं।

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