कॉन्ग्रेस को शाहरुख याद नहीं है। लेकिन, जामिया में गोली चलाने वाले नाबालिग का चेहरा दिखाने से उसे गुरेज नहीं। क्यों? सिर्फ इसलिए कि वह नाबालिग एक हिंदू था।
इन कानूनों का धरातल पर उतरने के बाद ही उनका विश्लेषण किया जा सकता है। उससे पहले, केंद्र और राज्यों के संबंधों को कमजोर करना अथवा संसद द्वारा पारित कानूनों को फाड़ना कोई लोकतांत्रिक अधिकार नही बल्कि अराजकता है।
जिन्ना शराब पीता था, सूअर का माँस खाता था, उर्दू नहीं बोलता था और नमाज तक पढ़ना नहीं जानता था। तमाम मजहबी विरोधाभासों के बावजूद उन्हें समुदाय विशेष ने प्रेम किया, यह चौंकाने वाली बात जरूर है।
MSP की गारंटी से महँगाई बढ़ेगी, निर्यात पर असर पड़ेगा, छोटे किसानों के उत्पाद गारंटी कानून के कारण घरों में सड़ जाएँगे, और भारत की अर्थव्यवस्था इससे हिल जाएगी।