Wednesday, September 22, 2021
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जब बार-बार लुटयन मीडिया ने राहुल गाँधी के राफ़ेल झूठ पर कहा ‘जिने मेरा दिल लुटया, ओहो!’

संसद में आँख मारने वाले राहुल गाँधी का आचरण इतना ख़राब था कि अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को कहना पड़ा, "यदि आपको सुनना नहीं हैं, तो आपको प्रश्न नहीं पूछने चाहिए।"

आपने अंग्रेजी मेनस्ट्रीम मीडिया में पढ़ा होगा कि संसद में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को “दिन में पाँच झूठ बोलने वाला” कहा, खासकर राफ़ेल सौदे के बारे में। लेकिन मुझे यक़ीन है कि आपने जेटली द्वारा अपने बात के समर्थन में उल्लेखित उदाहरणों को नहीं पढ़ा होगा। चाहे वो इंडियन एक्सप्रेस हो, हिंदुस्तान टाइम्स हो, द हिंदू, या द टाइम्स ऑफ़ इंडिया, सभी लुटयन मेनस्ट्रीम मीडिया ने उन “उदाहरणों” को अपने रिपोर्ट्स से ग़ायब कर दिया।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है – लुटयन मीडिया कभी भी राहुल गाँधी को उनके झूठ पर घेरकर नहीं पटकती। राहुल गाँधी को ठीक से पता है कि वह बहुत सहजता से झूठ बोल सकते हैं और अंग्रेजी मेन स्ट्रीम मीडिया ऐसे समय मदहोश रहती है। उसे कुछ भी दिखाई-सुनाई नहीं देता। उनकी माँ सोनिया गाँधी के दो दशक के कार्यकाल पर, उनके ख़िलाफ़ एक शब्द भी नहीं निकला। और न ही पिछले पाँच सालों में राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ कुछ ऐसा जिसे आप आलोचना की श्रेणी में भी रख सकें। आप वित्तमंत्री जेटली के राफ़ेल पर 2 जनवरी को संसद में दिए ज़वाब के इस वीडियो (नीचे संलग्न) को देख सकते हैं और जज कर सकते हैं कि आपका न्यूज़ पेपर हर दिन आपको कैसे बेवकूफ़ बनाता है, और राहुल गाँधी का इस तरह बचाव करता है जैसे उनके ही अधीन हो।

मैं शर्त लगा सकता हूँ कि अरुण जेटली द्वारा ऑफ़सेट भागीदारों पर राहुल गाँधी के झूठ और अनिल अंबानी के रिलायंस को दिए गए फ़ेवर के बारे में दिए बयान को किसी भी मेनस्ट्रीम मीडिया में, आपने कभी पढ़ा हो। जेटली ने कहा: “राहुल गाँधी 1.30 लाख करोड़ रुपए (फ़ेवर की राशि) का हवाला देते रहते हैं। यह UPA ही थी जिसने 2005 में निर्णय लिया कि भारत में ऑफ़सेट भागीदारों को कुल ख़र्च का 30-50 प्रतिशत ही प्राप्त होगा। चूँकि, कुल सौदा ही जब 58,000 करोड़ रुपए का है, तो इस हिसाब से यह 29,000 करोड़ रुपए बैठता है। दसाँ (Dasault) ने कहा है कि रिलायंस के साथ व्यापार 10 वर्षों में, केवल 3-4 प्रतिशत या 800 करोड़ रुपए के आसपास आता है। फिर ये 1.30 लाख रुपए का आँकड़ा कहाँ से उद्धृत किया जाता है जब पूरी डील ही केवल 58,000 करोड़ रुपये की है?” क्या आपने इस तथ्य को कभी किसी मेन स्ट्रीम मीडिया में पढ़ा है?

जेटली ने राहुल गाँधी को पीएम मोदी को गलत तरीक़े से राफ़ेल सौदे में घसीटने के लिए भी लताड़ा: “(राहुल ने कहा कि) ये पूरी प्रक्रिया ही ग़लत है। दोनों पक्षों के समितियों के बीच जब कुल 74 बैठकें हुई थी, फ़िर भी न कोई निगोशिएशन समिति, न कोई रक्षा अधिग्रहण परिषद, न सुरक्षा पर कोई कैबिनेट समिति। झूठा और मनगढ़ंत आरोप सिर्फ़ एक आदमी (पीएम नरेंद्र मोदी) पर। समितियों के बैठकों के बीच ये कैसे संभव है? जबकि हमने पूरी प्रक्रिया का विवरण सर्वोच्च न्यायालय में  प्रस्तुत किया था। SC ने अपने निर्णय में कहा कि वह पूरी प्रक्रिया से संतुष्ट है।” क्या आपने इसे अपने मेन स्ट्रीम मीडिया के किसी भी न्यूज़ पेपर में पाया?

जेटली ने साफ़-साफ़ बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को एक ऑफ़सेट साझेदार के रूप में क्यों नहीं चुना गया? “यूपीए ने ही HAL को अनुबंध देने से मना कर दिया था। HAL ने काम के लिए आवश्यक “2.7 घण्टे ज़्यादा मानव श्रम” की बात पर बल दिया था। जिससे न केवल कीमत बढ़ती बल्कि समय बढ़ने से पाकिस्तान और चीन भी भारत से आगे निकल जाते।” क्या आपने इसे भी कहीं पढ़ा?

“सौदे के बाद, जो प्रेस विज्ञप्ति आई थी उसमें कहा गया कि यह दो सरकारों के बीच का समझौता (inter-governmental agreement) था। यह उस कीमत से सस्ता है, जिस पर यूपीए ने बातचीत की थी।” क्या आपने इसे भी कहीं पढ़ा है?

जेटली ने राफ़ेल मूल्य निर्धारण पर झूठ बोलने के लिए कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर को फटकार लगाई और कहा था कि कम से कम बाद में तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले पढ़ लिए होते। “सुप्रीम कोर्ट ने कीमत माँगी, हमने उन्हें सीलबंद लिफाफा में दिया। उन्होंने इसे खोला और फिर निर्णय दिया कि वह मूल्य निर्धारण की न्यायिक समीक्षा से संतुष्ट है।”

जेटली ने उल्लेख किया कि राफ़ेल जेट विमानों के पहले बैच की डिलीवरी के लिए यूपीए ने 11 वर्षों के लिए अनुबंध किया था, “और वे हमसे पूछ रहे हैं कि 2016 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने पर 2018 में कोई राफ़ेल जेट क्यों नहीं दिया गया।”

जेटली ने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की जाँच को सिरे से खारिज़ कर दिया, “जेपीसी नीति के मामलों में ज़रूरी है, जाँच के लिए नहीं।” इसके अलावा, जेटली ने कहा कि जेपीसी का रवैया “पक्षपातपूर्ण पार्टी लाइनों” पर है। उन्होंने बोफ़ोर्स का हवाला दिया जहाँ किकबैक को भी जेपीसी ने “रिश्वत” नहीं कहा था, और सभी आरोपों को रफ़ा-दफ़ा कर दिया था।

वित्तमंत्री जेटली ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और उनकी पार्टी ने द्वारा फैलाए गए झूठे आरोपों की कड़ी निन्दा की, “उन्होंने (राहुल गाँधी) कहा कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्राँ ने ख़ुद (रिलायंस के ऑफ़सेट पार्टनर के बारे में) उनसे कहा था। मगर फ़्रांस सरकार ने इससे इनकार कर दिया।” अरुण जेटली ने कॉन्ग्रेस द्वारा फ़र्ज़ी काग़ज़ात पेश करने के मामले का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि (पूर्व पीएम) वीपी सिंह के बेटे का सेंट किट्स में एक विदेशी बैंक खाता भी था। पाठकों, आपको यह भी पता नहीं नहीं होगा।

जेटली ने कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं को याद दिलाया। कि ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने मनमोहन सिंह के बारे में लिखा था, “जो प्रधानमंत्री पद पर हैं, लेकिन सत्ता में नहीं।” अरुण जेटली ने फिर याद दिलाया, “यह आदमी (राहुल गाँधी) बार-बार झूठ बोलता है। वह दिन में पाँच बार झूठ बोलने वाले हैं।”

संसद सत्र के दौरान कॉन्ग्रेस के सांसदों और उनके अध्यक्ष का आचरण इतना ख़राब था कि अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने हंगामा करते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से कहा, “यदि आपको सुनना नहीं हैं, तो आपको प्रश्न नहीं पूछने चाहिए।” कल फ़िर से वही सवाल दोहराएँगे।

हाँ, राहुल गाँधी ने ही राफ़ेल पर बार-बार विवाद खड़ा किया, झूठे आरोप लगाए और अब ज़वाब सुनने के लिए भी तैयार नहीं। धन्यवाद, मेनस्ट्रीम मीडिया, इस तरह से राहुल गाँधी का बार-बार ढाल बनने के लिए। उनके हर झूठ पर पर्दा डालने के लिए। आप नहीं जानते होंगे पर ऐसा मेनस्ट्रीम अंग्रेजी मीडिया अपने संपादकीय नीति के तहत ही करता है।

वित्तमंत्री अरुण जेटली के भाषण का वीडियो :

मूलतः हमारी अंग्रेज़ी साइट पर लिखे गए इस लेख का अनुवाद रवि अग्रहरि ने किया है।

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Ashish Shuklahttp://ashishshukla.net/
Author of "How United States Shot Humanity", Senior Journalist, TV Presenter

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