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वायरस आपसे कितना दूर, जानना हुआ आसान: कोरोना संक्रमित मरीज अब गूगल मैप पर चिन्हित, गुजरात में तकनीक का सहारा

इस तरह कोरोना संक्रमित लोगों को मैप पर पिन करने से आसपास मौजूद व्यक्तियों के लिए यह समझना और आसान हो जाता है कि यह खतरा कितना वास्तविक और कितना नजदीक है।

गुजरात के सूरत और अहमदाबाद शहर प्रशासन ने अपने प्रतिदिन के कोरोना वायरस बुलेटिन में उन लोगों के बारे में जानकारी देना शुरू किया है, जो COVID-19 से संक्रमित पाए गए हैं। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के रिहायशी पतों को गूगल मैप्स पर पिन करना भी शुरू के दिया है, जिससे आस-पास रहने वाले लोग सतर्क रह सकें।

सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने मैप पर कोरोना वायरस पॉजिटिव केसेस को पिन किया है

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी प्रकार अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने भी कोरोना पॉजिटिव केसेस की जानकारी देनी शुरू कर दी है। क्योंकि कॉर्पोरेशन के पास कोई आधिकारिक मैप नहीं है, इसलिए अहमदाबाद में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों ने बतौर वॉलंटियर कोरोना संक्रमित लोगों की लोकेशंस को गूगल मैप पर पिन करना शुरू कर दिया है।

गूगल मैप्स पर कोरोना वायरस लाइव पॉजिटिव केसेस , अहमदाबाद

इन वॉलंटियर्स में से एक अभय जानी हैं, जिन्होंने उपरोक्त मैप बनाया है, वो कहते हैं कि उन्होंने यह मैप अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा रिलीज किए गए डेटा से तैयार किया है।

कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी इस तरह पब्लिक डोमेन में साझा करने से कुछ सवाल भी उठे हैं, जो मरीजों के सामुदायिक जीवन में इस मर्ज के कारण लग सकते कलंक की तरफ इंगित करते हैं। हालाँकि जानी के अनुसार इस कदम से एक साझा हित सधता है। उन्होंने कहा, “मैं इन डेटा को डिलीट कर दूँगा यदि ऑथॉरिटीज इस विषय में चिंता जाहिर करती हैं, पर इस तरह कोरोना संक्रमित लोगों को मैप पर पिन करने से आसपास मौजूद व्यक्तियों के लिए यह समझना और आसान हो जाता है कि यह खतरा कितना वास्तविक और कितना नजदीक है।

उन्होंने बताया, “मैंने यहाँ अथॉरिटीज के साथ काम कर रहे लोगों और जर्नलिस्ट्स वगैरह से बात की है और उन्होंने मुझे बताया है कि नागरिकों की निजता सबसे अहम है। हालाँकि जब वे जानकारियों को पब्लिक के साथ साझा कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि वे सख्त कदम उठा रहे हैं और चाहते हैं कि ऐसे लोग सामने आएँ जो कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आए हैं। सबसे अच्छा तो यह है कि ‘रेड जोंस’ यानी ऐसे इलाके जहाँ से ज्यादा मामले आए हैं, में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर मत निकलें।”

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने किराने के सामान की होम डिलीवरी के लिए कुछ हेल्पलाइन्स भी बनाई है, जिससे लोगों को घरों से बाहर निकलने की जरूरत न पड़े।

अधिकारी हवाई निगरानी के लिए ड्रोन्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे जो लोग धारा 144 का उल्लंघन कर रहे हैं और अपने घरों की छतों पर एकत्र हो रहे हैं, उन पर केस दर्ज किए जा सकें।

अहमदाबाद में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। वहाँ 1000 से ज्यादा टीमों को निगरानी के लिए तैनात किया गया है।

देश के दूसरे भागों में भी प्राधिकारी कोरोना संक्रमित मरीजों पर नजर रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इस महामारी को रोका जा सके। उदाहरण के लिए दिल्ली पुलिस होम क्वारंटीन किए गए 25000 लोगों के फोनों को ट्रैक कर रही है। अभी हाल ही में दिल्ली पुलिस ने होम क्वारंटीन किए गए 198 लोगों पर होम क्वारंटीन भंग करने के कारण एफआईआर दर्ज करवाई है, जिसमें से 176 पर एफआईआर फोन ट्रैकिंग और आकस्मिक निरीक्षण के आधार पर दर्ज हुई।

कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में अधिकारियों की मदद कर रहे एक दूसरे वॉलंटियर ने बताया कि निगरानी वगैरह के कारण जिन इलाकों में ज्यादा खतरा है कोरोना से संक्रमित होने का, लोगों ने मैप की वजह से उन इलाकों की तरफ जाना बंद कर दिया है। इसी तरह के स्टेप विश्व के कई हिस्सों में उठाए गए हैं, जिनमें से दक्षिण कोरिया ने ताजा आँकड़ों के अनुसार चाइनीज कोरोना वायरस से संबंधित ग्राफ को ‘फ्लैट’ करने में काफी सफलता हासिल की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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