Sunday, July 14, 2024
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सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को सही ठहराया, 58 याचिकाएँ खारिज-चिदंबरम, प्रशांत भूषण की दलीलें फेल: जस्टिस नागरत्ना का फैसला अलग

नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को सुनवाई शुरू हुई थी, जिसके बाद जस्टिस एस अब्दुल नजीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यम और बीवी नागरत्ना की संवैधानिक बेंच ने 7 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज उस पर अपना फैसला सुनाया।

भारत में हुई नोटबंदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज (2 जनवरी 2023) अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने सरकार के निर्णय को उचित बताते हुए कहा कि आर्थिक मामलों से जुड़े फैसलों को नहीं पलटा जा सकता।

कोर्ट ने नोटबंदी को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सरकार द्वारा नोटबंदी का फैसला लेते हुए अपनाई गई प्रक्रिया में कोई कमी नहीं थी इसलिए उस अधिसूचना को रद्द करने की आवश्यकता नहीं है।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को सुनवाई शुरू हुई थी, जिसके बाद जस्टिस एस अब्दुल नजीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यम और बीवी नागरत्ना की संवैधानिक बेंच ने 7 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज उस पर अपना फैसला सुनाया।

फैसले के दौरान बीवी नागरत्ना बाकी जजों के निर्णय से असहमत कहे। लेकिन कोर्ट ने जजों के बहुमत के आधार पर अपना फैसला लिया। कोर्ट ने कहा कहा कि आरबीआई के पास स्वतंत्र रूप से इतनी ताकत नहीं है कि वो नोटबंदी करें। ये फैसला सरकार और आरबीआई के आपसी सलाह-मशवरे के बाद लिया गया।

इस पूरे मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट पी चिदंबरम ने दलील पेश की थी। उनका कहना था कि अगर जो हुआ उसे सही नहीं किया जा सकता तो फिर कोर्ट को भविष्य के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए ताकि ऐसा दुस्साहस दोबारा न हो। पी चिदंबरम की तरह कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रशांत भूषण ने भी दलीलें दी थीं।

हालाँकि भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटमणि ने केंद्र की ओर से कहा कि यह निर्णय काले धन, फर्जी करेंसी और आतंक के वित्त पोषण की बुराइयों को रोकने के लिए लिया गया था। केंद्र की ओर से यह भी बताया गया कि यह निर्णय बहुत सोच समझ कर लिया गया था। नोटबंदी के 9 महीने पहले से इस बारे में आरबीआई से राय-मशवरा लिया जा रहा था। अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणि ने नोटबंदी के पक्ष में ये भी कहा कि ये इससे न केवल डिजिटल इकोनॉमी अच्छी हुई है बल्कि टैक्स कलेक्शन में भी सुधार आया है।

बता दें कि इस मामले में RBI ने भी कोर्ट को बताया कि विमुद्रीकरण से पहले उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी। सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता के माध्यम से उन्होंने कहा कि यह फैसला केंद्र बैंक द्वारा दी गई सिफारिशों पर लिया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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