ममता जी, अपराधी मुसलमानों को इसलिए मत बख़्श दीजिए क्योंकि वो मुस्लिम हैं: बंगाल के मुस्लिम

पत्र के अनुसार, लोगों के बीच यह मत पुष्ट होता जा रहा है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण राज्य उन सभी अपराधियों को खुली छूट दे रही है जो मुस्लिम समुदाय से आते हैं। ऐसे आरोपितों को राज्य द्वारा सिर्फ उनके मुस्लिम होने के कारण बच के निकल जाने दिया जा रहा है या उन्हें कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

पश्चिम बंगाल में लगातार हो रहे घटनाक्रमों के बीच ममता बनर्जी बुरी तरह फँस गई हैं। लोकसभा चुनावों में बीजेपी के 18 सीट जीतने के बाद तो उनकी पकड़ पश्चिम बंगाल पर दिनों-दिन और ढीली पड़ती जा रही है। एक तरफ डॉक्टरों के हड़ताल और दूसरी तरफ वहाँ के नागरिकों द्वारा ‘जय श्री राम’ के जयघोष कई अवसरों पर प्रोटेस्ट करने वालों ने लगाए, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती ही जा रही है। डॉक्टरों पर मुसलमानों की भीड़ द्वारा किए हमले के बाद, अभी हाल ही में मिस इंडिया यूनिवर्स की घटना में भी मुस्लिमों का ही हाथ सामने आया है।

वह लगातार असमंजस में हैं कि कार्रवाई करें तो करें कैसे? अब उनकी मुश्किल थोड़ी आसान की है वहाँ के कुछ मुस्लिमों ने ही। कोलकाता के कुछ मुस्लिमों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर हाल की घटनाओं पर अपनी नाराजगी ज़ाहिर की है।

कोलकाता के मुस्लिमों द्वारा ममता बनर्जी को लिखा गया पत्र

पत्र में लिखा गया है कि लिखनेवाले कोलकाता में रहने वाले मुसलमान हैं, जो दशकों से यहाँ रह रहे हैं और हालिया दो घटनाओं से बेहद आहत हैं- पहला डॉक्टरों पर हमला और दूसरा पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स उशोषी सेनगुप्ता पर हमला।

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उनका कहना है कि इन दोनों घटनाओं में शामिल आरोपित मुस्लिम हैं। वे उनके ही मजहब के हैं, इससे वे और भी ज़्यादा आहत और खीझ से भरे हैं।

इसके बाद पत्र में उन्होंने अपने तरफ से ममता बनर्जी को दो रास्ते सुझाएँ हैं जिससे इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। पत्र के अनुसार, पहला अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए। न केवल इस मामले में बल्कि उन सभी मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया जाए जहाँ दोषी या आरोपित मुस्लिम हैं। उन्हें अवश्य गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि लोगों के बीच यह मत पुष्ट होता जा रहा है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण राज्य उन सभी अपराधियों को खुली छूट दे रही है जो मुस्लिम समुदाय से आते हैं। ऐसे आरोपितों को राज्य द्वारा सिर्फ उनके मुस्लिम होने के कारण बच के निकल जाने दिया जा रहा है या उन्हें कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

दूसरा सलाह है कि मुस्लिम बहुल इलाकों में ऐसे प्रोग्राम चलाए जाने चाहिए जिससे मुस्लिम युवाओं में संवेदनशीलता और जागरूकता पैदा हो, खासतौर से जेंडर सेंसिटिविटी, कानूनों के प्रति जागरूकता के क्षेत्र में। बेशक यह एक लम्बी प्रक्रिया है लेकिन इसकी शुरुआत होनी चाहिए।

दोनों मामलों में एक मामला पूर्व मिस इंडिया का है जिसमें, पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स उशोषी सेनगुप्ता ने खुद फेसबुक पर अपनी दास्ताँ बयाँ की है, और बताया है कि कैसे 6 लड़कों ने उनकी गाड़ी के साथ अपनी बाइक भिड़ाने के बाद उनके ऊबर कैब के ड्राइवर को बेरहमी से पीटा, उसकी गाड़ी तोड़ दी और उशोषी के भी साथ बदतमीज़ी की। और इस दौरान कोलकाता की पुलिस मूकदर्शक बनी ज्यूरिस्डिक्शन-ज्यूरिस्डिक्शन (मेरा एरिया-उनका एरिया) खेलती रही। यहाँ तक कि मामले की प्राथमिकी दर्ज करने से भी इनकार किया और मामला तूल पकड़ने के बाद ही ढंग से प्राथमिकी हुई

इसी मामले में, उशोषी ने तंज कसते हुए यह भी कहा, “अगर आपके साथ मारपीट, बदसलूकी, छेड़खानी या फिर मर्डर की घटना हो, तब पुलिस के पास जाने से पहले उनके सीमा क्षेत्र के बारे में जान लें, क्योंकि घटनास्थल पुलिस थाने की सीमा से 100 मीटर भी बाहर हुआ, तो वे मदद नहीं करेंगे।”

इसके अलावा व्यापक आक्रोश का मुद्दा बना डॉक्टरों के ऊपर हमला, कोलकाता स्थित नील रतन सरकार (NRS) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टरों की मानें तो करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए थे।

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अमित शाह, राज्यसभा
गृहमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष इस वक़्त तक 802 पत्थरबाजी की घटनाएँ हुई थीं लेकिन इस साल ये आँकड़ा उससे कम होकर 544 पर जा पहुँचा है। उन्होंने बताया कि सभी 20,400 स्कूल खुले हैं। उन्होंने कहा कि 50,000 से भी अधिक (99.48%) छात्रों ने 11वीं की परीक्षा दी है।

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