किस्सा चाहे गुरमीत राम रहीम का हो या फिर संजय दत्त जैसे लोगों का, यह पैरोल ताकतवरों का आसान हथियार साबित होती जा रही है, जिससे उन नामी अपराधियों के अपने हितों के साथ उनके 'अच्छे आचरण' का हवाला देने वालों के हित भी सलामत रहें।
इंस्पेक्टर नज़ीर अली ख़ान ने बताया कि आरोपितों द्वारा इस्तेमाल की गई बन्दूक नकली है और उसे मेले से ख़रीदा गया है। लेकिन, लोगों का कहना है कि उन पिस्टलों से असली बन्दूक की तरह धुआँ निकलता दिख रहा था। हिंदुस्तान में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के दावों में झूठ ज्यादा दिखाई दे रहा है।
2 महीने पहले आरोपित इमरान के भाई गुड्डू ने भी बच्ची का बलात्कार करने की कोशिश की थी और उसे फुसला कर ले जा रहा था। वह बच्ची को रुपए का लालच देकर ले जा रहा था लेकिन तभी बच्ची की सौतेली माँ ने यह देख लिया और बच्ची को बचाया जा सका।
पुलिस को शक है कि कहीं खुशबू ने ही तो अपने किसी परिचित को नहीं बुलाया था? पुलिस की थ्योरी के अनुसार, हो सकता है कि दोनों में विवाद हुआ हो और हत्यारे ने खुशबू की हत्या करने के बाद ख़ुद के बचने के लिए बुजुर्ग दम्पति की भी हत्या कर दी हो!
बलिराम की छोटी बेटी गीता (बदला हुआ नाम) का अपहरण होजई के जमुनामुख से जाबेद अहमद ने कर लिया था। काफ़ी खोजबीन के बाद असम पुलिस ने लड़की को नासिक के एक होटल से सुरक्षित बचा लिया।
...इसके बाद सईदुल ने अलग तरीका निकाला। उसके पास उसकी पत्नी के साथ कुछ अंतरंग तस्वीरें थीं, जिसे उसने वायरल करने की धमकी अपने ससुराल वालों को दी। उसने अपनी बीवी के मायके के तरफ़ के रिश्तेदारों को धमकी दी कि उसे दहेज़ में रुपए दिए जाएँ और केस वापस लिया जाए वरना...
गंगाराम ने पुलिस में शिकायत की थी कि दानिश, उनके पड़ोसी सफ़ायत हुसैन के बेटे ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया था। शिक़ायत के बारे में सुनकर दानिश के कई रिश्तेदार गंगाराम के घर गए। वहाँ कथित तौर पर गंगाराम और उसके परिवार पर उन्होंने लाठियाँ बरसाई।
सच्चाई बताने के बाद भी डॉक्टरों ने फैसला किया कि आगे की जाँच के लिए उसे तीन दिन तक अस्पताल में रखा जाएगा। जाँच पूरी होने के बाद 18 जून को उसे कोर्ट में हाजिर किया गया जहाँ ससून के डॉक्टर ने फ़िरोज़ को मानसिक रूप से स्वस्थ करार दिया। इसके बाद उसे दो दिन की पुलिस कस्टडी में रखा गया।
1990 में भारत बंद के दौरान गुजरात के जामनगर में हिंसा हुई थी। उस समय संजीव भट्ट वहाँ पर एएसपी के रूप में पदस्थापित थे। उस दौरान पुलिस ने 133 लोगों को गिरफ़्तार किया था, जिसमें से 25 घायल हुए थे। उस दौरान प्रभुदास नामक व्यक्ति की हिरासत में ही मौत हो गई थी।