लोकतंत्र के चार खम्भे जब गिनवाए जाते हैं तो विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता का नंबर भी आता है। जब पहले तीन से जनता सवाल कर सकती है तो आखिर ऐसा क्यों है कि पत्रकारिता सीजर्स वाइफ की तरह सवालों से बिलकुल परे करार दी जाती है?
रवीश कुमार ने बीजगणित के अध्याय की तरह सब कुछ अब 'मान लिया' है। इससे बड़ी हानि यह है कि वो चाहते हैं कि उनके इसी 'मान लेने' को बाकी लोग भी मान लें, जबकि उनकी यह बीजगणित एकदम ऊसर है, इससे कुछ भी सृजन नहीं हो सकता है।
श्रीनगर के जिलाधिकारी शाहिद चौधरी ने विदेशी मीडिया के तमाम प्रोपेगेंडा का खंडन करते हुए कहा कि वो आधिकारिक और व्यक्तिगत तौर पर सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि कश्मीर में कोई स्वास्थ्य सेवा संकट नहीं है। 94 फीसदी डॉक्टर फिलहाल ड्यूटी पर हैं।
अनिंद्यो चक्रवर्ती रवीश कुमार को समझा रहे हैं कि यदि सरकार खूब सारे रुपए छापकर जनता में बाँट दे तो अर्थव्यवस्था तुरंत ठीक हो सकती है। इस पर रवीश कुमार भी अपनी सहमति दर्ज कराते नजर आए रहे हैं। बता दें कि हाल ही में रवीश कुमार को प्रतिष्ठित रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
आज के प्राइम टाइम में सुप्रीम कोर्ट को भी गोदी बता दिया जाना चाहिए। आज ऑड दिवस है, आज सुप्रीम कोर्ट का निर्णय घोघो रानी के मनमुताबिक़ नहीं है। ऐसा लगता है मानो खेल दिवस पर घोघो रानी खेल कर गई।
ED का ये मामला आयकर विभाग की मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत फाइल की गई चार्जशीट पर आधारित है। इस चार्जशीट में आयकर विभाग ने बहल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लंदन में 2.38 करोड़ मूल्य की संपत्ति खरीदी, जिसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।
श्री-श्री 1008 श्री रवीश कुमार जी महाराज के विरोधियों ने उनके हर पोस्ट और प्राइम टाइम पर कमेंट सेक्शन में लिख कर भक्तों को रवीशिया अफ़ीम की ख़ुमारी से बाहर लाने की कोशिश की लेकिन भक्त तो परमअज्ञान की अवस्था पा चुके थे, उनका उस प्रपंच सागर से बाहर आना नामुमकिन हो चुका था। वो बेचारे सूअरों की तरह कीचड़ में ही आनंद पा रहे थे।
TOI से हमारा सवाल- 'अगर महादलितों की मॉब लिंचिंग हुई है तो SC-ST एक्ट क्यों नहीं लगा?' जवाब यह है कि सभी हत्यारोपित महादलित ही हैं। देखिए किस तरह से ख़बरों को पेश कर फेक नैरेटिव को हवा दी जाती है। मीडिया के नए रूप को आप भी अच्छी तरह समझ लें।
"ये जरूरी है कि कश्मीर की असल तस्वीर लोगों के सामने पेश की जाए क्योंकि बहुत से पाकिस्तानी लड़के है जो सोशल मीडिया पर वायरल होती ऐसी स्टोरी को पढ़ रहे है, आतंकी संगठन ज्वाइन करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं और फिर कश्मीर आकर परेशानी का कारण बन रहे हैं।"
यह मामला रोहिणी सिंह द्वारा 'द वायर' में लिखे गए एक लेख से सम्बंधित है, जिसमें जय शाह के व्यापार को लेकर उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जय शाह ने 'The Wire' के ख़िलाफ़ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का मुक़दमा दायर किया था।