रेणुका चौधरी ने वादा किया था कि नाइक को वायरा विधानसभा सीट से टिकट दिलाएँगी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और रेणुका ने पैसे वापस करने से भी इनकार कर दिया। धोखाधड़ी की वजह से नाइक की तबियत ख़राब रहने लगी और 14 अक्टूबर 2018 को उनकी मौत हो गई।
"यदि सिंधिया को मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर किया गया तो 500 कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली के 10 जनपद स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय जाकर प्रदर्शन करेंगे और फिर भी अगर बात नहीं मानी गई तो सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफ़ा दे देंगे।"
2017 में एक छापेमारी के दौरान डीके शिवकुमार की सम्पत्तियों में गड़बड़ी मिली थी, जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ जाँच की जा रही है। शिवकुमार के साथ-साथ चार अन्य को भी इस मामले में पूछताछ के लिए ED से नोटिस मिला है, जिसे रद्द कराने का अनुरोध लेकर वह......
झुठलाने को इसे भी "IT सेल वालों ने रेड मार दी" कहकर झुठलाने की भरसक कोशिश की गई, ठीक उसी तरह जैसे कॉन्ग्रेस दीवार पर लिखी लोकसभा नतीजों की इबारत को आखिरी समय तक EVM पर सवाल उठाकर झुठलाने की कोशिश करती रही। लेकिन...
मध्य प्रदेश में हालाँकि इस पद के दावेदार केवल सिंधिया ही नहीं हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह भी इस कतार में खड़े हैं। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह उनका समर्थन कर रहे हैं। इन सबके मद्देनज़र...
पी चिदंबरम की अग्रिम ज़मानत याचिका और गिरफ़्तारी से राहत प्रदान करने का निवेदन, जस्टिस गौड़ ने दोनों खारिज़ कर दी। कॉन्ग्रेस आज उन पर आरोप लगा रही है लेकिन 4 साल पहले सोनिया-राहुल चाहते थे कि जस्टिस गौड़ ही नेशनल हेराल्ड मामले को सुनें। समझें पूरा मसला यहाँ।
स्टर्लिंग ग्रुप के मालिक नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा ने पैसे विदेश ले जाने के लिए करीब 300 मुखौटा कंपनियॉं बनाई। पूछताछ से इस घोटाले में अहमद पटेल, उनके बेटे फैसल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी की संलिप्तता सामने आई।
मोइली ने कहा कि जयराम रमेश ऐसे बयान देकर कॉन्ग्रेस का नुक़सान पहुँचा रहे हैं। उनके जैसे नेता पार्टी जब जीतती है तो सत्ता भोगते हैं और जब विपक्ष में रहती है तो सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में बोलते हैं। लगता है उन्होंने भाजपा से समझौता कर लिया है।
राहुल गॉंधी की बाल बुद्धि और बाल हठ से देश अरसे से परिचित है। जब से उन्हें मोदी के मुकाबिल खड़ा करने की कोशिश की गई उनका यह गुण बार-बार प्रकट होने लगा और हर बार वे 'गलती हो गई माफ कर दो' वाले भाव में आ जाते हैं। यह और बात है कि यूपीए काल में उनकी यह हरकत 'वाह जहॉंपनाह' के शोर में दब जाया करती थी।
"मैं नरेंद्र मोदी सरकार का एक कठोर आलोचक रहा हूँ और मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक आलोचक रहा हूँ। समावेशी मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के कारण ही मैंने लगातार 3 बार चुनाव जीता है। मैं अपने कॉन्ग्रेस के साथियों से निवेदन करता हूँ कि मेरे विचारों की कद्र करें, यदि वे उससे सहमत नहीं हैं, तब भी।"