इस बार विद्यालय के बच्चों ने सरस्वती पूजा को लेकर ब्लॉक ऑफिस और स्थानीय पुलिस स्टेशन में आवेदन दिया। इसके बाद प्रशासन ने सरस्वती पूजा के एक दिन पहले ही विद्यालय में जवानों की तैनाती कर दी।
सीएए के समर्थन में आयोजित रैली में शामिल नीरज प्रजापति मुस्लिमों की हिंसा का शिकार बने थे। परिजनों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस व प्रशासन ने जल्दी-जल्दी अंतिम संस्कार कराने के चक्कर में धार्मिक रीति-रिवाज भी पूरा नहीं करने दिया।
हिजाब और बुर्का पहनी महिला इस वीडियो में कहती है कि आजकल आ रहा हर क़ानून मोदी का है, ऐसा कौन सा क़ानून है जो दूसरे का है? जब बुर्कानशीं महिला को याद दिलाया जाता है कि इस मामले में अभी कोर्ट ने कोई फ़ैसला नहीं दिया है तो वो कहती है कि कोर्ट भी तो 'उन्हीं' का है।
....चोट लगने की वजह दो छात्रों की नाक से ख़ून निकल रहा था और उन्हें प्राथमिक इलाज दिया गया। इंग्लिश के एक अध्यापक गणेश सरदार ने आरोप लगाया कि भीड़ उन्हें ढूँढ रही थी, उन्हें टॉयलेट के अंदर छिपा दिया गया था। अगर ज़िला प्रशासन समय पर आकर कार्रवाई न करता तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
अचानक कुछ मुस्लिम युवक बिना साइलेंसर वाली मोटरसाइकल चलाकर हल्ला करने लगे। रात का समय होने के कारण इलाके में रह रहे हिंदुओं को इससे परेशानी होने लगी। उन्होंने आपत्ति जताई तो विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते मुस्लिम समुदाय के लोगों ने...
तेलंगाना के एकमात्र भाजपा विधायक राजा सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया है। वो भैंसा के पीड़ित हिन्दुओं से मिलने के लिए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के इशारे पर उन्हें हिन्दू वाहिनी के पीड़ित लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
एक पूर्व-बैंकर ने बताया कि 'इज्तेमा' के कारण कई बाहरी लोग इस इलाक़े में आए हुए थे। इज्तेमा में हज़ारों-लाखों की संख्या में मुस्लिम जुटते हैं और अपने मजहबी रीति-रिवाज वगैरह को पूरा करते हैं। इस घटना में 11 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 3 पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
सिर्फ मूर्तियों को नष्ट किए जाने की कल्पना मात्र और केवल अल्लाह का नाम ही इस दुनिया में रहना चाहिए, ये सोच मात्र ही इस कविता का विरोध करने के लिए काफी होना चाहिए ना? या फिर लिबरल्स को ये लगता है कि उनकी भावनाएँ दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हैं?
"मेरी माँ ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' के दौर को तब देखा था, जब वह एक बच्ची थीं और उन्हें गहरा आघात पहुँचा था। उन्होंने देखा था कि पार्क सर्कस में अपने घर के पास मुसलमानों द्वारा एक हिन्दू को कैसे मार दिया गया था।"
पत्थरबाजी के कारण पप्पू राठौर की हत्या होती है। 43 लोगों पर केस होता है लेकिन पकड़े जाते हैं सिर्फ पप्पू खां और हाशिम, बाकि सभी फरार। इसके बाद पीड़ित परिवार पर केस वापस लेने का दबाव, और इनकार करने पर धमकी के साथ-साथ उनके बच्चों से मारपीट, बहू-बेटियों से छेड़छाड़। हार मान कर सभी घर बेचने को तैयार!