ये वही इलाक़ा है, जहाँ एक वर्ष पूर्व मिन्हाज अंसारी नामक व्यक्ति ने बीफ का फोटो और भड़काऊ बयान शेयर किया था। बाद में पुलिस की हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। कॉन्ग्रेस विधायक डॉक्टर इरफ़ान अंसारी ने 'दहशतगर्दों पर कार्रवाई' की बात कही है।
जहाँ पढ़ने जाती थी हिंदू नाबालिग लड़की, उसी कोचिंग सेंटर के मालिक ने उसको अपने प्रेम जाल में फँसाया। फिर 17 साल की लड़की को फर्जी ऐफिडेविट से 19 साल का बनाया। अंततः लड़की के साथ मस्जिद में निकाह की खबर के बाद फरार...
मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद वहाँ बुधवार को मस्जिद के निर्माण का काम फिर से शुरू हो गया। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना जब पुलिस को दी तो हयात नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अफ़सर (SHO) रवीन्द्र कुमार मौक़े पर पहुँचे और परिसर में ताला लगा दिया गया।
"एक महिला ज़िले हुमा के नेतृत्व में लगभग 110 मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों ने ग़ैर-क़ानूनी रूप से इकट्ठा होकर ईदगाह मैदान में एकत्र होकर नमाज अता की। लगभग 20 मिनट की नमाज पूरी होने के बाद, हुमा ने माइक सँभाला और देश-विरोधी नारे लगाए।"
देश के कई मुस्लिम आज भी कबायली प्रवृतियों का अनुसरण करते नजर आते हैं। अल्पसंख्यक इलाकों में अशिक्षा, भुखमरी, दरिद्रता और तमाम प्रकार की गरीबी आज भी उसी तरह से नजर आती है, जिस हाल में बहादुर शाह जफ़र छोड़कर गए थे।
हिंसक लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की जिसमें पुलिस की कई गाड़ियाँ और एक दमकल की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गए। दंगाई इतने पर भी नहीं रुके, और 2 बाइकों को भी आग के हवाले कर के ही माने। उनमें से एक बाइक को तो मस्जिद के सामने ही आग लगाई गई।
कुछ दिन पहले बिजनौर के कूकड़ा इस्लामपुर में शरारती तत्वों ने शिव मंदिर में घुसकर मूर्तियाँ तोड़ दी थी। शरारती तत्वों ने पहले मंदिर की मूर्तियों को खंडित किया और बाद भगवान शिव का त्रिशूल भी उखाड़ कर फेंक दिया था।
कर्फ़्यू को कथित रूप से तोड़ने के लिए गोली से मारे जाने के बाद भारतीय नागरिक सूरज कुमार पांडेय की मौत हो गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दो धार्मिक समुदायों के बीच तनाव बढ़ने के बाद हुए झड़प में उग्र भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में कई पुलिस कर्मी भी घायल हो गए।
झारखंड में पलामू के विश्रामपुर में लक्ष्मी पूजन के बाद मूर्ति विसर्जन करने जा रहे लोगों को दर्जी मोहल्ले में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा रोक दिया गया। जिससे दोनों पक्षों के बीच झड़प की नौबत आ गई। आस्था में पैदा हुए इस व्यवधान से हिन्दू पक्ष के लोगों में काफ़ी आक्रोश फैल गया.....
मेरे खुद के मुस्लिम और 'सेक्युलर' थियेटर वाले दोस्त सोशल मीडिया पर वे आर्टिकल भेज रहे हैं, जिनमें मुझे झूठा बताया गया है। वे मुझसे पूछ रहे हैं कि मैंने झूठ क्यों बोला। और यह सब इसलिए हुआ क्योंकि क्विंट ने मेरी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।