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किसानों ने जताया CM योगी का आभार, मिलेंगे प्रति हेक्टेयर ₹71 लाख; सालों से चल रहा आंदोलन खत्म

उत्तर प्रदेश के मानबेला के किसानों का आंदोलन खत्म हो गया है। वे सालों से बढ़े मुआवजे की माँग को लेकर आंदोलनरत थे। जिला न्यायालय का इस मामले में फैसला आने के बाद उन्हें 71 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। किसानों ने इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार मानबेला में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने 215 एकड़ की जमीन अधिग्रहित की थी। 2009 में निर्णय लिया गया था कि किसानों को 18 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से भुगतान किया जाएगा। तब राज्य में बसपा सुप्रीमो मायावती की सरकार थी। किसान इस मुआवजे की राशि से सहमत नहीं थे।

इसके बाद योगी आदित्यनाथ (तब गोरखपुर के सांसद) ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और तय हुआ कि किसानों को 28 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। लगभग 400 किसानों को 18 लाख रुपए की दर पर मुआवजा मिला, जबकि 100 किसानों ने 28 लाख रुपए की दर से हासिल किया। लेकिन, किसानों ने मुआवजे की राशि बढ़ाने को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखी।

इसके कारण प्राधिकरण इन भूमि पर कोई विकास कार्य भी शुरू नहीं कर सका था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुआवजे की राशि बढ़ा कर 71 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर तय की, लेकिन तकनीकी कारणों से इस पर अमल नहीं हो पाया था। इसके बाद 70 किसानों ने न्यायालय की शरण ली। अब न्यायालय ने आदेश दिया है कि किसानों को ब्याज सहित पूरी राशि भुगतान की आए।

जिन भी किसानों ने न्यायालय में याचिका दायर की थी, उनके मुआवजे की रकम न्यायालय में प्रशासन को जमा करानी पड़ेगी और मुआवजा सभी किसानों को मिलेगा। जो किसान याचिकाकर्ता नहीं थे, उन्हें इस आदेश की प्रति के साथ भू- अधिग्रहण की धारा 28 ए के तहत भूमि अध्याप्ति अधिकारी के यहाँ बढ़े मुआवजे के लिए आवेदन देने के लिए कहा गया है। उसके आधार पर उन्हें भुगतान जारी कर दिया जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ 2017 में मुख्यमंत्री का पद सँभालते ही इस मामले में निदान के लिए एक कमिटी का गठन किया था और मुआवजे की मौजूदा दर इस कमिटी ने सुझाई थी। मानबेला किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष बरकत अली ने कहा कि योगी शुरू से ही किसानों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। इन किसानों में कई निषाद और मुस्लिम समाज के हैं। अब GDA की बोर्ड की बैठक में इस सम्बन्ध में कानूनी सलाह लेकर आगे की कार्यवाही होगी।

उत्तराखंड ग्लेशियर हादसा: चमोली में 100-150 लोगों के बहने की आशंका, मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई है। आशंका है कि 100-150 लोग पानी की तेज धार में बह गए हैं। उत्तराखंड के प्रधान सचिव ओम प्रकाश ने यह आशंका जताई है।

चमोली जिले के रेणी गाँव के पास ग्लेशियर के टूटने से कई गाँव वालों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह ग्लेशियर धौली गंगा नदी के किनारे-किनारे बह रहा है। इस आपदा से निपटने के लिए आईटीबीपी के 200 से ज्यादा जवान बचाव कार्य में लगे हुए हैं। 

हेल्पलाइन नंबर जारी

आपदा से निपटने या किसी जानकारी के लिए या किसी जगह की सूचना के लिए राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 1070 या 9557444486 नंबर पर कॉल कर आप इस संबंध में सूचना ले या दे सकते हैं।

इससे पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि चमोली ज़िले से एक आपदा का समाचार मिला है। उन्होंने बताया कि ज़िला प्रशासन, पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन को इस आपदा से निपटने के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार:

“चमोली के रिणी गाँव में ऋषिगंगा प्रोजेक्ट को भारी बारिश व अचानक पानी आने से क्षति की संभावना है। नदी में अचानक पाने आने से अलकनंदा के निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ की संभावना है। तटीय क्षेत्रों में लोगों को अलर्ट किया गया है। नदी किनारे बसे लोगों को क्षेत्र से हटाया जा रहा है। एहतियातन भागीरथी नदी का फ्लो रोक दिया गया है। अलकनन्दा का पानी का बहाव रोका जा सके, इसलिए श्रीनगर डैम तथा ऋषिकेष डैम को खाली करवा दिया है। SDRF अलर्ट पर है। मेरी आपसे विनती है अफवाहें न फैलाएँ। सरकारी प्रमाणिक सूचनाओं पर ही ध्यान दें। मैं स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना हो रहा हूँ।”

ट्विटर इंडिया की पब्लिक पॉलिसी हेड महिमा कौल का इस्तीफा, PM मोदी को लेकर कर चुकी हैं ‘फ# आम आदमी’ वाला ट्वीट

ट्विटर इंडिया की पब्लिक पॉलिसी हेड महिमा कौल ने इस्तीफा दे दिया है। ‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, ट्विटर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने व्यक्तिगत कारणों से महिमा के इस्तीफा देने की पुष्टि की है। कौल ने 2015 में ट्विटर इंडिया ज्वाइन किया था।

इस्तीफे की ये खबर ऐसे समय में आई है, जब ट्विटर ने ‘किसान आंदोलन’ के दौरान अफवाह फैलाने और लोगों को भड़काने वाले ट्वीट्स को भारत सरकार के कहने के बावजूद नहीं हटाया। इसको लेकर Meity (इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) मंत्रालय ने उसे नोटिस भी जारी किया है। ‘इंडिया टुडे’ ने अपने सूत्रों के हवाले से ये भी कहा है कि इस मामले का इस्तीफे से कोई लेना-देना नहीं है और वो अगले कुछ समय तक ट्विटर की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर बनी रहेंगी।

ट्विटर की पब्लिक पॉलिसी के VP मॉनिक मेक ने कहा, “महिमा कौल ने इस वर्ष की शुरुआत में ही ये निर्णय लिया था और उन्हें ब्रेक की ज़रूरत भी है। ये हमारे लिए एक नुकसान की तरह है, लेकिन यहाँ 5 वर्ष कार्यरत रहने के बाद उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण लोगों और परिवार पर ध्यान देने का फैसला लिया है। वे मार्च 2021 के अंत तक इस पद पर बनी रहेंगी और पद के हस्तानांतरण में भूमिका निभाएँगी।”

ट्विटर की वेबसाइट पर इस पद के लिए जॉब भी लिस्ट कर दी गई है और इसे सार्वजनिक कर दिया गया है। कुछ साल पहले महिमा का एक ट्वीट वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “नरेंद्र मोदी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के आगे बम ब्लास्ट, भूकंप और मौत जैसी चीजें दूसरे नंबर पर आती हैं। फ़क आम आदमी।” राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगने के बाद उन्होंने ये ट्वीट डिलीट कर दिया था।

पालघर में ‘लिव इन पार्टनर’ को मारा, बाथरूम की दीवार में चुनवाया: 4 महीने से उसी फ्लैट में रह रहा था प्रेमी

साधुओं की लिंचिंग और हाल में नौसेना के जवान को ज़िंदा जलाने की घटना के बाद पालघर फिर सुर्ख़ियों में है। वहाँ एक व्यक्ति ने अपनी ‘लिव इन पार्टनर’ की कथित तौर पर हत्या की और लाश फ़्लैट की दीवार में चुनवा दी।

घटना महाराष्ट्र के पालघर स्थित वृंदावन दर्शन कॉम्प्लेक्स की है, जिसके बारे में सुनते ही आस-पास के लोग हैरान हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सूरज हरमलकर और उसकी लिव इन पार्टनर अमिता मोहिते वृंदावन दर्शन कॉम्प्लेक्स के फ़्लैट नंबर 101 में रहते थे। 

पिछले कुछ महीनों से अमिता (32) नहीं नज़र आ रही थीं, सिर्फ सूरज ही आते-जाते हुए नज़र आता था। इस बात की शिकायत मिलने पर पुलिस जाँच के लिए फ़्लैट पर पहुँची। इस बीच पुलिस के साथ एम्बुलेंस, पुलिस के फोटोग्राफर और फॉरेंसिक टीम भी आई थी।

पुलिसकर्मियों के साथ मजदूर तक आए थे और यह आस-पास मौजूद लोगों के लिए हैरान करने वाला था। कुछ ही देर में वृंदावन दर्शन कॉम्प्लेक्स के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई लेकिन किसी को घटना समझ नहीं आ रही थी। 

पुलिस ने फ़्लैट के भीतर दाखिल होते ही तोड़-फोड़ शुरू की और थोड़ी देर में पुलिसकर्मी लाश के साथ बाहर आए। इसके बाद आस-पास मौजूद लोगों को पूरा मामला समझ आया। लाश सूरज की लिव इन पार्टनर अमिता की थी, दोनों इस फ़्लैट में साथ ही रहते थे।

पुलिस के मुताबिक़ अमिता का शव फ़्लैट के बाथरूम की दीवार तोड़ कर निकाला गया। लाश लगभग 4 महीने पहले उस दीवार में चुनवाई गई थी। अमिता की आधी लाश सड़ चुकी थी। उसका शव हड्डियों की गठरी बन चुका था। फ़िलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।      

पुलिस ने सूरज से मामले की पूछताछ शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा है कि कथित तौर पर इस हत्या के पीछे सूरज का हाथ है। पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि अमिता की हत्या का असल जिम्मेदार कौन है।

फ़िलहाल इस घटना की वजह से सभी हैरान हैं लेकिन इसके बाद बहुत से सवाल भी खड़े होते हैं। अगर सूरज ने अमिता की हत्या की तो उसके पीछे क्या वजह हो सकती है? जब दोनों काफी समय से साथ रह रहे थे, ऐसे में हत्या का क्या कारण हो सकता है? फ़िलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है, जिसके पूरे होने के बाद ही सच सामने आएगा।  

‘हलाल’ का विरोध करने पर Hindu Aikya Vedi के नेता गिरफ्तार, लगाई गई गैर जमानती धाराएँ

हिन्दूवादी संगठन हिन्दू ऐक्य वेदी (Hindu Aikya Vedi) के नेता आरवी बाबू को शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की वजह ये थी कि उन्होंने एक बेकरी शॉप का ‘हलाल’ मांस बेचने के लिए विरोध किया था। सोमवार (8 फरवरी 2021) को अदालत के सामने पेश होने की शर्त पर संगठन के महासचिव आरवी बाबू को जमानत पर रिहा किया गया। 

केरल की एर्नाकुलम पुलिस का इस घटना पर कहना है कि 29 जनवरी 2021 को इस घटना के सम्बंध में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद आरवी बाबू को नोटिस भेजा गया लेकिन इसके बावजूद पेश नहीं होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें इस शर्त पर रिहा गया कि वह सोमवार को अदालत के सामने पेश होंगे। आरवी बाबू ने सोशल मीडिया पर लोगों से हलाल प्रमाणीकरण का विरोध करने का आह्वान किया था।

इस घटना पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई इस्लामी कट्टरपंथियों के तुष्टिकरण के लिए की गई है। इसके बाद उन्होंने कहा,

“क्या केरल एक इस्लामिक राज्य है, जो ‘हलाल’ के विरोध में बोलने पर पुलिस दबाव बनाने लगती है? केरल के मुख्यमंत्री और सीपीएम (CPM) इस्लामी कट्टरपंथियों का तुष्टिकरण करने में लगे हुए हैं और इस तरह के प्रयास केरल में पिछले कई सालों से हो रहे हैं। यह कार्रवाई सिर्फ उनकी आवाज़ दबाने के लिए की गई है जो सच बोलते हैं, इसका विरोध बहुत ज़रूरी है। इस तरह की कार्रवाई के ज़रिए सीपीएम आगामी चुनावों में अपना हित साधना चाहती है।”      

आरवी बाबू पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो एक गैर जमानती अपराध है। इस गिरफ्तारी के विरोध में हिन्दू ऐक्य वेदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता प्रदेशव्यापी आंदोलन कर रहे हैं।

आरवी बाबू संघ में बतौर प्रचारक काम कर चुके हैं। इसके अलावा वे सामाजिक मंचों पर अक्सर संगठन का पक्ष रखते हैं। दोनों संगठन पिछले कुछ समय से पूरे प्रदेश में हलाल प्रमाणीकरण के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं।   

उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से बाँध टूटने की खबर, तेज आवाज में नदी मचा रही तांडव: CM रावत ने कहा – ‘अफवाहों से बचें’

उत्तराखंड के चमोली से सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें तूफ़ान आने की बातें कही जा रही हैं। मीडिया में कहा जा रहा है कि ग्लेशियर के फटने से पॉवर प्रोजेक्ट का बाँध टूट गया, जिससे ये घटना हुई है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि चमोली ज़िले से एक आपदा का समाचार मिला है। उन्होंने बताया कि ज़िला प्रशासन, पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन को इस आपदा से निपटने की आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार:

“चमोली के रिणी गाँव में ऋषिगंगा प्रोजेक्ट को भारी बारिश व अचानक पानी आने से क्षति की संभावना है। नदी में अचानक पाने आने से अलकनंदा के निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ की संभावना है। तटीय क्षेत्रों में लोगों को अलर्ट किया गया है। नदी किनारे बसे लोगों को क्षेत्र से हटाया जा रहा है। एहतियातन भागीरथी नदी का फ्लो रोक दिया गया है। अलकनन्दा का पानी का बहाव रोका जा सके, इसलिए श्रीनगर डैम तथा ऋषिकेष डैम को खाली करवा दिया है। SDRF अलर्ट पर है। मेरी आपसे विनती है अफवाहें न फैलाएँ। सरकारी प्रमाणिक सूचनाओं पर ही ध्यान दें। मैं स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना हो रहा हूँ।”

मुख्यमंत्री ने लोगों को सलाह दी कि किसी भी प्रकार की अफ़वाहों पर ध्यान ना दें। साथ ही आश्वासन दिया कि सरकार सभी ज़रूरी कदम उठा रही है। NBT की खबर के अनुसार, पानी के तेज बहाव के मद्देनजर कीर्ति नगर, देवप्रयाग, मुनि की रेती इलाकों को अलर्ट पर रहने को कहा गया। पानी के बहाव में कई घरों के बहने की आशंका जताई जा रही है। वीडियोज में पहाड़ों के बीच तेज़ी से बहते पानी को देखा जा सकता है।

साथ ही पानी की लहरों की तेज़ आवाज़ को भी सुना जा सकता है। ऋषिकेश से लेकर हरिद्वार तक अलर्ट जारी किया गया है। ‘ज़ी यूपी-उत्तराखंड’ की खबर के अनुसार, धौली गंगा घाटी स्थित रैनी नामक गाँव में ग्लेशियर फटने की घटना हुई है, जिसके बाद तपोवन क्षेत्र में अलकनंदा नदी पर बना ऋषिगंगा जल विद्युत् परियोजना का बाँध टूट गया। वीडियोज को देखने से लगता है कि स्थानीय लोग घबराए हुए हैं और उन्हें घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी पता नहीं है।

पोस्ट जोशीमठ के हेड कॉन्स्टेबल मंगल सिंह ने जानकारी दी कि रविवार (फ़रवरी 7, 2021) को सुबह के 11 बजे टीम रवाना हुई है। गौचर/श्रीनगर/रतूड़ा टीम को अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ जैसी स्थिति के बाद आपदा प्रबंधन विभाग, जल पुलिस, SDRF और जिला/पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर है। भाजपा ने इस घटना के आलोक में स्कूटर रैली को रद्द कर दिया है। कहा जा रहा है कि उत्तराखंड सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद चमोली में ग्लेशियर फटने के बाद उपजी स्थिति का जायजा लेने पहुँचेंगे।

शिवसेना गुंडों ने बुजुर्ग के साथ मारपीट कर पहनाई साड़ी, बनाया वीडियो: CM ठाकरे की आलोचना पर राजनीतिक गुंडई

महाराष्ट्र में सत्ताधारी पार्टी शिवसेना के गुंडों ने वरिष्ठ नागरिक शिरीष कटेकर के चेहरे पर कालिख पोत दी। शिवसेना कार्यकर्ताओं का आरोप था कि शिरीष कटेकर ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की आलोचना की है। ये घटना पंढरपुर की है।

इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जब शिवसेना के गुंडों ने विरोधियों के बाल मुँड़ दिए हों या फिर उनके चेहरे पर स्याही की पुताई कर दी हो। शिरीष कटेकर न सिर्फ वरिष्ठ नागरिक हैं बल्कि भाजपा के नेता भी हैं।

सार्वजनिक रूप से एक वरिष्ठ नागरिक के साथ मारपीट की जाती है और हद यह कि इस घटना के बारे में शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में भी खबर भी प्रकाशित की गई। इतना ही नहीं, उक्त भाजपा नेता को जबरदस्ती साड़ी भी पहनाया गया।

पीड़ित वरिष्ठ नागरिक और भाजपा नेता का नाम शिरीष कटेकर है, जो जिले में पार्टी के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। भाजपा यहाँ बिजली बिल में बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन कर रही थी, जिसके बाद शिवसेना ने आक्रामक रुख अपना लिया।

पंढरपुर की पुलिस ने बीच-बचाव और हस्तक्षेप किया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। हालाँकि, इस घटना के कारण इलाके में तनाव व्याप्त है। शुक्रवार (फ़रवरी 5, 2021) को पूरे राज्य में भाजपा ने बिल बिल बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन किया था। ‘महाराष्ट्र राज्य विद्युत् वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL)’ के दफ्तरों का घेराव किया गया। इसमें शिरीष कटेकर भी शामिल थे।

उन्होंने भाषण देते हुए आरोप लगाया था कि उद्धव ठाकरे घर में ही बैठे रहते हैं और बाहर नहीं निकलते। इसके बाद कुछ शिवसैनिक पहुँचे और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने पूरे पंढरपुर में भी बंद की चेतावनी दी है।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में भी इस सम्बन्ध में खबर प्रकाशित किया गया। भाजपा का आरोप है कि अब तक किसी शिवसेना नेता द्वारा घटना की निंदा न करना दर्शाता है कि इस घटना को उनका समर्थन प्राप्त है।

इसी तरह दिसंबर 2019 में शिवसेना की एक कार्यकर्ता ने पूरे बोतल भर इंक एक बुजुर्ग व्यक्ति के ऊपर सिर्फ़ इसीलिए उड़ेल दिया था, क्योंकि उसने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए पोस्ट लिखा था। महिला ने जब उस व्यक्ति पर इंक डाला, तब वो फोन से बात कर रहा था।

‘किसान आंदोलन पर क्यों चुप हो’ – बॉलीवुड वालों को नसीरुद्दीन ने ललकारा… लेकिन SSR मामले में खुद चुप रह बताया था बचकाना

किसान आंदोलन पर हर क्षेत्र के लोगों का प्रोपेगेंडा और प्रचार जारी है। हाल ही में इस तथाकथित ‘आंदोलन’ को भारत के खिलाफ़ दुष्प्रचार का ज़रिया बना दिया गया। ताज़ा मामले में बॉलीवुड के कई नाम भी इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने के लिए आगे आए हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड कलाकार नसीरुद्दीन शाह ने ‘किसान आंदोलन’ पर अपनी राय पेश की। नसीरुद्दीन के मुताबिक़ बॉलीवुड के अन्य कलाकारों को भी इस पर बात करनी चाहिए। 

सोशल मीडिया पर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह कहते हैं, “खामोश रहना, जुल्म सहना, जुल्म करने के बराबर ही है। और हमारे बड़े-बड़े जो धुरंधर लोग हैं फिल्म इंडस्ट्री के, वो खामोश बैठे हैं। इसलिए क्योंकि उन्हें लगता है कि वो बहुत कुछ खो सकते हैं। अरे भाई, जब आपने इतना धन कमा लिया है कि 7 पुश्तें बैठ कर खा सकती हैं तो कितना खो लोगे अब।”

एक साक्षात्कार में बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह आगे कहते हैं, “जब सब कुछ तबाह हो चुका होगा तो आपको अपने दुश्मनों का शोर सुनाई नहीं देगा। बल्कि अपने दोस्तों की खामोशी ज़्यादा चुभेगी। मुझ पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, यह कहने से काम नहीं चलेगा। अगर किसान कड़कड़ाती सर्दी में बैठे हैं तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, यह नहीं कह सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि किसानों का ये आंदोलन फैलेगा और आम लोग भी इसमें शामिल होंगे। खामोश रहना जुल्म करने वाले की तरफदारी करना है।” 

किसान आंदोलन के मुद्दे पर बॉलीवुड कलाकारों से बात करने की अपील करने वाले नसीरुद्दीन शाह कुछ दिन पहले सुशांत सिंह राजपूत मामले पर बहस को बचकाना बता चुके हैं। तब पता नहीं क्यों… लेकिन उन्होंने इसे अनावश्यक बताया था। इंग्लिश में इसके लिए उन्होंने बोला था – ‘Why are we washing dirty underwear in public?’

जानने लायक बात यह है कि सुशांत सिंह राजपूत हत्या/आत्महत्या मामले में ड्रग्स एंगल भी निकल कर सामने आया है। कई लोग (नामी-गिरामी) इसके चपेट में आए हैं, पुलिस और नारकोटिक्स ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं। जानने लायक बात यह भी है अनुपम खेर ने नसीरुद्दीन शाह को सुशांत सिंह राजपूत मामले के दौरान ही जम कर लताड़ा था। तब अनुपम खेर ने कहा था, “आप जिन पदार्थों का सेवन करते हैं, उसके चलते आप निर्णय नहीं कर पाते कि देश में क्या सही है और क्या ग़लत।”

जहाँ एक तरफ नसीरुद्दीन शाह, पंजाबी गायक/अभिनेता दिलजीत दोसांझ और जैज़ी बी जैसे लोग किसान आंदोलन को लेकर पूरे ज़ोर-शोर से मिथ्या प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड के कई बड़े नामों ने इसकी आड़ में हो रहे प्रपंच को भी निशाना बनाया है। 

अभिनेता अक्षय कुमार ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “किसान देश का अभिन्न अंग हैं। उनकी समस्याओं को हल करने के प्रयास जारी हैं। किसी भेद पैदा करने वाले की बातों पर ध्यान देने की जगह हम मिल कर एक सौहार्दपूर्ण संकल्प का समर्थन करते हैं।” 

इसके अलावा बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने भी किसान आंदोलन की आड़ में हो रहे दुष्प्रचार को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “भारत या भारत की नीतियों के खिलाफ हो रहे किसी भी तरह के प्रोपेगेंडा में फँसने की ज़रूरत नहीं है। एक साथ खड़े रहना हमारे लिए फ़िलहाल बहुत ज़रूरी है।”      

‘मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद को पूरी तरह हटाया जाए’: अदालत ने स्वीकार की याचिका, सभी पक्षों को नोटिस

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का अतिक्रमण कर औरंगज़ेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए दायर की गई याचिका को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही अब इस मामले में अन्य पक्षकारों के जुड़ने के बाद सुनवाई चालू हो जाएगी। कोर्ट ने शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) को शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, मथुरा में जिला राजकीय अधिवक्ता संजय गौड़ ने जानकारी दी है कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवकांत शुक्ला ने याचिका को सुनवाई हेतु स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने वाद को स्वीकार करने योग्य माना और इसकी विस्तृत सुनवाई भी होगी। सभी पक्षों को मार्च 8, 2021 तक अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना पड़ेगा।

जिन्हें समन जारी किया गया है, उनमें उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, शाही ईदगाह प्रबंधन समिति के सचिव, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रबंधन न्यासी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव शामिल हैं। ज्ञात हो कि पुराने केशवदेव मंदिर के देवता ठाकुर केशव देव जी महाराज विराजमान की तरफ से उनके सेवायत पवन कुमार शास्त्री/गोस्वामी ने ये याचिका अदालत में दायर की है। याचिका में 3 अनुरोध किए गए हैं:

  • शाही ईदगाह मस्जिद वाली जमीन समेत कटरा केशव देव मंदिर परिसर के संपूर्ण 13.7 एकड़ जमीन पर दावा। पूरे मंदिर परिसर के प्रबंधन का अधिकार मिले। दलील दी गई है कि उनके पूर्वज दशकों से बतौर पुजारी भगवान की सेवा में लगे हैं। उन्होंने खुद को मंदिर का वास्तविक सेवायत बताते हुए इसकी विरासत के प्रबंधन योग्य बताया।
  • श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान एवं शाही ईदगाह प्रबंधन समिति के बीच हुए समझौते का अनुमोदन करने वाले मथुरा अदालत के 1967 के फैसले को रद्द किया जाए। इसके तहत ही मस्जिद को मंदिर के नजदीक बनाए रखने की अनुमति दी गई थी।
  • शाही ईदगाह प्रबंधन समिति एवं लखनऊ स्थित सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष को मौजूदा स्थान से मस्जिद को हटाने का निर्देश दिया जाए।

इससे पहले जिला जज मथुरा साधनी रानी ठाकुर की कोर्ट में 12 अक्टूबर को इस सम्बन्ध में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13 एकड़ के कटरा केशव देव मंदिर के परिसर पर 17वीं शताब्दी में शाही ईदगाह बनाया गया था। उनका कहना था कि इस समय जहाँ मस्जिद है, कभी वहाँ कंस का कारागार था और वहीं पर कृष्ण का मंदिर था। मुगलों ने इसे तुड़वा कर वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी।

‘कॉन्ग्रेस ने किसानों की हत्या करवाई, देश विरोधी ताकतों से फंडिंग, राकेश टिकैत दुर्योधन’: बाबा टिकैत के दोस्त

दिवंगत किसान नेता महेंद्र टिकैत के सहयोगी रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह ने आजकल चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को खरी-खरी सुनाई है। बुजुर्ग किसान नेता ने महेंद्र टिकैत के बेटे राकेश टिकैत की भी आलोचना की। चौधरी ने ‘आज तक’ पर रोहित सरदाना के शो में कहा कि महेंद्र टिकैत उनके पिता तुल्य थे और जब वो उनके साथ आंदोलन करते थे, तब राकेश टिकैत पुलिसकर्मी हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि 1988 में जब बिजली और पानी बिल के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे थे, वो अब तक का सबसे बड़ा किसान आंदोलन था।

बता दें कि तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार को किसानों की 35 सूत्री माँग के आगे झुकना पड़ा था। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उस वक़्त की कॉन्ग्रेस सरकार ने आंदोलन की भोजन-पानी की सप्लाई-लाइन तोड़ दी थीं और ट्रैक्टर से भोजन ले कर आ रहे किसानों की हत्या करा दी गई थी। उन्होंने कहा कि तब कई घायल भी हुए थे। उन्होंने इसे याददाश्त में रखने की नसीहत देते हुए कहा कि प्रियंका गाँधी मुजफ्फरनगर जा रही हैं तो राजेंद्र नामक दिवंगत किसान के परिजनों से भी मिलें, जिसकी तब ‘पुलिस ने हत्या कर दी’ थी।

महेंद्र टिकैत के सलाहकार रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह ने प्रियंका गाँधी से माफी माँगने की माँग की। उन्होंने बताया कि अब जब रोज महापंचायत हो रही है, हरियाणा का दर्द कुछ और है। उन्होंने कहा कि उनके यहाँ रिवाज है कि अगर बहू को कुछ कहना होता है तो लड़कियों के द्वारा कहवाया जाता है। उन्होंने कहा कि ये कहीं पंचायत कर लें और राजनीति कर लें लेकिन हमें ये याद रखना चाहिए कि राकेश टिकैत अपने पिता की मौजूदगी में 2 चुनाव लड़ चुके हैं। उनके अनुसार,

“दिल्ली में धरना देकर बैठ जाओ या कहीं बैठ जाओ, किसान अन्नदाता तो है लेकिन वो अन्न के साथ-साथ ऐसे जवान भी पैदा करता है, जो सीमा पर पहरे देते हैं। हम ठेकेदार नहीं पैदा करते। हमारा निवेदन राकेश टिकैत से है कि वापस आकर मिल-बैठ कर बात कर लीजिए। हर लड़ाई में युद्ध-विराम होता है। ईराक और यमन में भी हुआ था। दोबारा सोचो कि तुमने क्या खोया, क्या पाया। मैं इन कृषि कानूनों के समर्थन में हूँ। मंडी समिति वाले शिकारी कुत्ते बन गए थे। हमें इन कानूनों से अब फायदा महसूस हो रहा है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग तो हमारी पहले से हो रही है? MSP तो अनिवार्य है, लेकिन गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?”

चौधरी वीरेंद्र सिंह ने ‘किसान आंदोलन’ को लेकर रखी अपनी बात (देखें 33:30 के बाद से)

वीरेंद्र सिंह ने इससे पहले भी कहा था कि राकेश टिकैत में दुर्योधन की आत्मा आ गई है और अभी श्रीकृष्ण स्वयं आ जाएँ तब भी वो कुछ नहीं सुनेंगे। 1992-2002 तक भारतीय किसान यूनियन के मुजफ्फरनगर इकाई के जिलाध्यक्ष रहे वीरेंद्र ने कहा कि इन आंदोलन को वही देश विरोधी ताकतें फंडिंग कर रही है, जो CAA विरोधी प्रदर्शनों को कर रही थी। उन्होंने इसे जिद, बालहठ और बचकाना बताते हुए कहा कि ‘बाबा टिकैत’ ज़िंदा होते तो लाल किले पर 26 जनवरी को जो हुआ, वो न होता।

उन्होंने राकेश टिकैत को 26 जनवरी की घटना के लिए आत्मसमर्पण करने की सलाह देते हुए कहा था कि उन्हें केंद्र सरकार किसान समझ रही है, लेकिन वो किसान हैं ही नहीं। उन्होंने कहा कि देश के साथ गद्दारी हो रही है। उन्होंने कहा कि बाबा टिकैत के कुर्ते में जेब नहीं थी, जबकि आजकल के किसान नेताओं के पास कई-कई जेबें हैं। उन्होंने दावा किया कि इन किसान नेताओं के पास सरकार से वार्ता के लिए कोई तर्क ही नहीं है।