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कौन हैं तमिलनाडु BJP के नए अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन? खुद अन्नामलाई ने रखा प्रस्ताव, अमित शाह ने AIADMK के साथ गठबंधन का किया ऐलान

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने तमिलनाडु इकाई के नए अध्यक्ष के रूप में नैनार नागेंद्रन (Nainar Nagendran) को चुना है। यह फैसला न सिर्फ बीजेपी की रणनीति में बदलाव का संकेत देता है, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनावों में डीएमके-कॉन्ग्रेस गठबंधन को कड़ी टक्कर देने की तैयारी को भी दर्शाता है। नैनार नागेंद्रन के नामांकन में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौजूदा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने खुद उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे पार्टी के बड़े नेताओं ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक नयनार नागेंद्रन ने अकेले इस पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। पार्टी ने कहा कि उनके नाम का प्रस्ताव वर्तमान अध्यक्ष के. अन्नामलई, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, पूर्व केंद्रीय मंत्री पोन राधाकृष्णन और भाजपा विधायक और महिला मोर्चा अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन ने रखा। उनके नाम की घोषणा के लिए खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चेन्नई पहुँचे और नागेंद्रन-अन्नामलाई के साथ नागेंद्रन को तमिलनाडु बीजेपी का अध्यक्ष घोषित किया। यही नहीं, इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने AIADMK के साथ गठबंधन का भी ऐलान कर दिया।

सवाल यह है कि आखिर नैनार नागेंद्रन कौन हैं? वे बीजेपी के लिए तुरुप का इक्का क्यों साबित हो सकते हैं? और कैसे वे बीजेपी और AIADMK के बीच गठबंधन को मजबूत कर सकते हैं? आइए, इस राजनीतिक बदलाव के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।

एक अनुभवी और प्रभावशाली चेहरा

नैनार नागेंद्रन तमिलनाडु की तिरुनेलवेली विधानसभा सीट से बीजेपी के मौजूदा विधायक हैं। दक्षिणी तमिलनाडु में उनकी मजबूत पकड़ और संगठनात्मक क्षमता उन्हें एक जाना-माना नाम बनाती है। हालाँकि उनका सियासी सफर यहीं शुरू नहीं हुआ। नागेंद्रन पहले AIADMK के साथ थे और जयललिता सरकार में 2001 से 2006 तक मंत्री रहे। उन्होंने बिजली और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला और अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया। 2017 में वे बीजेपी में शामिल हुए और जल्द ही पार्टी के भीतर अहम भूमिका में आ गए। अभी तक वे बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और अब उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया है।

नागेंद्रन का सबसे बड़ा ताकतवर पक्ष है उनका थेवर समुदाय से होना। तमिलनाडु में थेवर समुदाय का दक्षिणी जिलों में खासा प्रभाव है। यह समुदाय न सिर्फ सामाजिक रूप से मजबूत है, बल्कि सियासी तौर पर भी वोटों को प्रभावित करने की ताकत रखता है। बीजेपी का मानना है कि नागेंद्रन के नेतृत्व में पार्टी दक्षिणी तमिलनाडु में अपनी पैठ बढ़ा सकती है, जहाँ उसका प्रभाव अभी सीमित है।

क्यों चुने गए नैनार नागेंद्रन?

नैनार नागेंद्रन का चयन बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। तमिलनाडु में बीजेपी अभी चार विधायकों वाली पार्टी है, लेकिन उसका लक्ष्य 2026 में सत्ता पर कब्जा करना है। इसके लिए पार्टी को न सिर्फ संगठन को मजबूत करना है, बल्कि गठबंधन की जमीन भी तैयार करनी है। नागेंद्रन कई मायनों में इस रणनीति के लिए सही चेहरा हैं।

AIADMK के साथ गठबंधन की कड़ी

नागेंद्रन का AIADMK के साथ पुराना नाता है। जयललिता और ओ. पन्नीरसेल्वम के नेतृत्व में उन्होंने मंत्री के रूप में काम किया और पार्टी की संस्कृति व संवेदनशीलता को अच्छी तरह समझते हैं। 2023 में AIADMK और बीजेपी का गठबंधन टूटने की एक बड़ी वजह थी अन्नामलाई की आक्रामक शैली और उनके जयललिता व अन्नादुरई जैसे नेताओं पर तीखे बयान। अन्नामलाई के नेतृत्व में AIADMK के साथ गठबंधन में दिक्कतें आ रही थी, क्योंकि खुद अन्नामलाई ही इसमें सहज नहीं थे।

अब अन्नामलाई संगठन के जरूरी मुद्दों को देख सकेंगे और पार्टी अध्यक्ष होने के नाते नागेंद्रन एआईएडीएमके के साथ बीजेपी के गठबंधन को आगे बढ़ा सकेंगे। चूँकि नागेंद्रन का AIADMK से पुराना कनेक्शन रहा है, ऐसे में ये बीजेपी के लिए गठबंधन की राह आसान कर सकता है।

जातीय समीकरणों का संतुलन

तमिलनाडु की सियासत में जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में बीजेपी अध्यक्ष अन्नामलाई और AIADMK महासचिव ई. पलानीस्वामी दोनों गौंडर समुदाय से हैं, जो पश्चिमी तमिलनाडु में प्रभावशाली है। लेकिन गौंडर नेताओं की मौजूदगी से गठबंधन में संतुलन बिगड़ने का खतरा था। नागेंद्रन थेवर समुदाय से हैं, जिसका प्रभाव दक्षिणी तमिलनाडु में है। बीजेपी का मानना है कि थेवर समुदाय का नेतृत्व गठबंधन को मजबूत करेगा और दोनों पार्टियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकेंगी।

प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता

नागेंद्रन का मंत्री के रूप में अनुभव और बीजेपी में उपाध्यक्ष के तौर पर उनकी सक्रियता उन्हें एक मजबूत नेता बनाती है। 2017 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने दक्षिणी तमिलनाडु में पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। तिरुनेलवेली जैसे क्षेत्रों में उनकी लोकप्रियता बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

अन्नामलाई की जगह लेने की योग्यता

अन्नामलाई ने अपनी आक्रामक शैली और ‘एन मन, एन मक्कल‘ जैसे अभियानों से बीजेपी को तमिलनाडु में नई पहचान दी। लेकिन उनकी शैली AIADMK के साथ तनाव का कारण बनी। नागेंद्रन की शांत और संतुलित छवि गठबंधन के लिए ज्यादा अनुकूल मानी जा रही है। साथ ही अन्नामलाई ने खुद उनके नाम का प्रस्ताव देकर यह संदेश दिया है कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है।

बीजेपी को कैसे होगा फायदा?

नैनार नागेंद्रन का अध्यक्ष बनना बीजेपी के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है। पहला और सबसे बड़ा फायदा है AIADMK के साथ गठबंधन, जिसका ऐलान खुद अमित शाह ने कर दिया है। । तमिलनाडु में डीएमके और कॉन्ग्रेस का गठबंधन मजबूत है। 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन ने 234 में से 133 सीटें जीतीं, जबकि AIADMK-बीजेपी गठबंधन को 75 सीटें मिलीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को एक भी सीट नहीं मिली, जिसने गठबंधन की जरूरत को और मजबूत किया। नागेंद्रन के नेतृत्व में बीजेपी और AIADMK साथ आ चुके हैं, ऐसे में ये गठबंधन डीएमके के खिलाफ मजबूत विकल्प बन चुका है।

दूसरा- नागेंद्रन की थेवर समुदाय से होने की वजह से बीजेपी को दक्षिणी तमिलनाडु में नया आधार मिलेगा। अभी बीजेपी का प्रभाव पश्चिमी तमिलनाडु तक सीमित है। थेवर समुदाय के वोटों का समर्थन बीजेपी को 60 विधानसभा सीटों वाले दक्षिणी क्षेत्र में मजबूती दे सकता है।

तीसरा- नागेंद्रन की प्रशासनिक छवि और अनुभव बीजेपी को एक भरोसेमंद चेहरा देता है। तमिलनाडु की जनता क्षेत्रीय दलों को तरजीह देती है, लेकिन नागेंद्रन का AIADMK बैकग्राउंड और बीजेपी में उनकी सक्रियता उन्हें दोनों तरह के वोटरों से जोड़ सकती है।

2026 के विधानसभा चुनाव में तुरुप का इक्का

साल 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु में बीजेपी के लिए करो या मरो की स्थिति है। डीएमके की मजबूत संगठनात्मक ताकत और सामाजिक न्याय के एजेंडे ने उसे सत्ता में बनाए रखा है। बीजेपी को अगर उसे चुनौती देनी है, तो उसे गठबंधन और स्थानीय मुद्दों पर फोकस करना होगा। नागेंद्रन इस रणनीति का अहम हिस्सा हो सकते हैं।

उनका AIADMK के साथ पुराना रिश्ता गठबंधन को न सिर्फ आसान बनाएगा, बल्कि दोनों पार्टियों के बीच सीट बँटवारे और रणनीति में सामंजस्य लाएगा। साथ ही उनकी थेवर समुदाय की पकड़ बीजेपी को नए वोटरों तक पहुँचाएगी। अन्नामलाई ने बीजेपी को पश्चिमी तमिलनाडु में 54 सीटों पर मजबूत किया था। अगर नागेंद्रन दक्षिणी क्षेत्र की 60 सीटों पर ऐसा ही असर दिखा पाए, तो बीजेपी और एआईएडीएमके मिलकर 150 सीटों का आँकड़ा पार कर सकते हैं, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी भी है।

बीजेपी की नई रणनीति का दूरगामी असर

नैनार नागेंद्रन का चयन बीजेपी की तमिलनाडु में नई शुरुआत का संकेत है। उनकी थेवर समुदाय से होने, AIADMK के साथ पुराने रिश्ते और प्रशासनिक अनुभव उन्हें गठबंधन और विस्तार के लिए सही चेहरा बनाते हैं। अन्नामलाई ने पार्टी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया, लेकिन गठबंधन की जरूरत ने नागेंद्रन को मौका दिया। 2026 में डीएमके-कॉन्ग्रेस को हराने के लिए बीजेपी और AIADMK का गठबंधन के बीच नागेंद्रन इसकी धुरी बन सकते हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो नागेंद्रन न सिर्फ बीजेपी के लिए तुरुप का इक्का साबित होंगे, बल्कि तमिलनाडु की सियासत में नया इतिहास भी रच सकते हैं।

सीधा या लेटा… ‘हिंदू तिलक’ की तुलना सेक्स पोजिशन से: DMK मंत्री ने महिलाओं के सामने दिया विवादित उदाहरण, पार्टी ने उपमहासचिव पद से हटाया पर मंत्री अब भी

तमिलनाडु के वन मंत्री और डीएमके के वरिष्ठ नेता के पोनमुडी एक विवादित बयान के चलते मुश्किल में फँस गए हैं। उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा मजाक किया, जिसमें हिंदू धर्म के तिलकों (तिलक चिह्न) की तुलना अश्लील यौन मुद्राओं से की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद भारी विरोध शुरू हो गया।

पोनमुडी ने क्या कहा?

वायरल वीडियो में मंत्री पोनमुडी एक मजाक सुनाते नजर आते हैं। वह कहते हैं, ‘महिलाएँ गलत मत समझिए’, फिर वह एक कहानी सुनाते हैं जिसमें एक व्यक्ति एक सेक्स वर्कर के पास जाता है। सेक्स वर्कर उससे पूछती है– “तुम शैव हो या वैष्णव?” जब वह व्यक्ति नहीं समझता, तो वह तिलक की बात करके समझाती है– “क्या तुम पाट्टई (आड़ा टीका) लगाते हो या नामम (सीधा टीका)?”

महिला उसे समझाती है कि अगर आप शैव हैं तो स्थिति लेटी हुई है। अगर वैष्णव हैं तो खड़ी स्थिति हुई।

विवादित बयान के बाद पार्टी ने की कार्रवाई

डीएमके पार्टी ने पोनमुडी को उनके बयान के बाद पार्टी के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी के पद से हटा दिया है। हालाँकि वह राज्य सरकार में अब भी मंत्री बने हुए हैं।

इन नेताओं और हस्तियों ने की आलोचना

DMK मंत्री के बयान के बाद कई लोगों ने इस बयान की आलोचना की। इसमें खुद डीएमके नेता भी हैं। वहीं अभिनेत्री और बीजेपी नेता खुशबू सुंदर ने भी तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन से पूछा, “क्या आपके पास इतना साहस है कि आप उन्हें मंत्री पद से भी हटाएँ? या फिर आपकी पार्टी महिलाओं और हिंदू धर्म का अपमान करके मजा लेती है?”

वहीं गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी इस बयान पर गुस्सा जताया और लिखा– “कोई आश्चर्य नहीं कि वे सभी छेड़छाड़ करने वाले कवियों के साथ हाथ मिला रहे हैं। कोई न कोई देवता या देवी या भगवान अवश्य होगा जो इसे दंडित करेगा और इसे नष्ट कर देगा। लेकिन ऐसा नहीं लगता कि भगवान मौजूद है।”

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इसे हिंदू धर्म पर डीएमके के कथित हमलों की अगली कड़ी बताया। सनातन धर्म के बारे में उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई पिछली टिप्पणियों का हवाला देते हुए मालवीय ने कहा, “चाहे वह डीएमके हो, कॉन्ग्रेस हो, टीएमसी हो या आरजेडी हो, भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के सदस्य विचारधारा से नहीं, बल्कि हिंदू मान्यताओं के प्रति साझा तिरस्कार से एकजुट दिखते हैं।”

इन प्रतिक्रियाओं के बाद DMK ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पोनमुडी को पार्टी के उपमहासचिव पद से हटा दिया। अब पोनमुडी की जगह तिरुचि एन शिवा को नियुक्त किया गया है।

‘भारत के लोग इसी क़ाबिल थे’: 26/11 के मृतकों के बारे में बोला था तहव्वुर राणा, मुंबई हमले के गुनहगारों को दिलाना चाहता था पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले का साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा से राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अपने मुख्यालय में पूछताछ कर रही है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित NIA की विशेष अदालत ने गुरुवार (10 अप्रैल 2025) को उसे 18 दिनों की रिमांड पर भेजा है। अमेरिकी जस्टिस विभाग के अनुसार, तहव्वुर ने अपने आतंकी दोस्त कोलमैन हेडली से कहा था कि हमले में मरने वाले इसी काबिल थे।

मुंबई हमलों में वांछित तहव्वुर को भारत प्रत्यर्पित करने के बाद अमेरिका के न्याय विभाग ने एक बयान जारी किया। इस बयान में तहव्वुर राणा के गुनाहों और भारत में मुंबई हमलों के दौरान उसके द्वारा किए गए सहयोगों के बारे में बताया गया है। न्याय विभाग के अनुसार, भारत में मुंबई हमलों के मामले में मुकदमा चलाने के लिए पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर को भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया है।

तहव्वुर पर 10 चार्जेज हैं। मुंबई हमले में 6 अमेरिकी नागरिक सहित कई विदेशी भी मारे गए थे। तहव्वुर भारत में मुंबई आतंकी हमलों से संबंधित मामले में साजिश रचने, हत्या, जालसाजी, आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोपित है। पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा अंजाम दिए गए इस हमले में 1.5 बिलियन डॉलर (12,900 करोड़ रुपए) की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

इस हमले को अंजाम देने के बाद तहव्वुर हुसैन ने पाकिस्तानी मूल के अपने आतंकी दोस्त डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी से कहा था कि भारत के लोग इसी के काबिल थे। उसके कहने का अर्थ था कि भारत के लोग मारे जाने के ही काबिल हैं। हेडली के साथ बातचीत को इंटरसेप्ट किया गया था। इसमें तहव्वुर ने हमले के दौरान मारे गए नौ आतंकियों की खूब सराहना की थी।

उसने कहा था कि लश्कर के इन सभी नौ आतंकियों को निशान-ए-हैदर दिया जाना चाहिए। निशान-ए-हैदर पाकिस्तान का सबसे सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, जो युद्ध में मारे जाने वाले वहाँ के फौजियों को दिया जाता है। बता दें कि कुल 10 आतंकी समुद्र के रास्ते भारत में घुसे थे। भारतीय सुरक्षा बलों ने 9 आतंकियों को मार गिराया था और एक आतंकी अजमल कसाब को पकड़ लिया था। कसाब को बाद में फाँसी दे दी गई थी।

कौन है तहव्वुर हुसैन राणा

मुंबई हमले की जाँच करने वाली एजेंसी NIA ने 405 पन्नों की चार्जशीट में तहव्वुर राणा को आरोपित बनाया है। चार्जशीट में कहा गया है कि वह हमले का सरगना डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद सईद गिलानी की मदद कर रहा था। तहव्वुर और हेडली ने मुंबई हमले का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। तहव्वुर ने आतंकियों को बताया था कि मुंबई में आतंकियों को कहाँ ठहरना है और कहाँ-कहाँ हमले करने हैं।

तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे जानकारी थी कि हेडली किससे मिल रहा है और उनसे क्या बात कर रहा है। उसे हमले की योजना और टारगेट के बारे में भी बता था। तहव्वुर राणा अपने बचपन के दोस्त और आतंकियों के मददगार डेविड कोलमैन हेडली की आर्थिक सहित हर तरह से मदद करके इस्लामी आतंकियों का सपोर्ट कर रहा था।

कनाडाई-अमेरिकी नागरिक हेडली की माँ अमेरिका और उसके अब्बू पाकिस्तानी मूल के थे। अमेरिकी अधिकारियों ने अक्टूबर 2009 में हेडली को अमेरिका के शिकागो से गिरफ्तार किया था। अमेरिकी कोर्ट ने 24 जनवरी 2013 को मुंबई में आतंकी हमलों में शामिल होने का दोषी मानते हुए हेडली को 35 साल जेल की सजा सुनाई थी। भारत हेडली के प्रत्यर्पण की भी लगातार माँग कर रहा है।

तहव्वुर और हेडली बचपन के दोस्त हैं। हेडली भी शुरुआती 5 साल की पढ़ाई पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में की है। इसके बाद वह परिवार के साथ अमेरिका चला गया। तहव्वुर राणा भी इसी स्कूल में पढ़ा है। बाद में वह पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के रूप में काम करने लगा। फिर वह कनाडा चला गया। कुछ साल के बाद उसे कनाडा की नागरिकता मिल गई।

तहव्वुर की ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम की कंसल्टेंसी फर्म की एक शाखा मुंबई में भी थी। इसी फर्म के सहारे कोलमैन हेडली हेडली भारत आया था और हमले करने वाली जगहों की रेकी की थी। तहव्वुर राणा फिलहाल अमेरिका के लॉस एंजिल्स के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में हिरासत में है। उसे एफबीआई ने साल 2009 में शिकागो से दबोचा था। 

बता दें कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई के लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज पैलेस, होटल ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज ने निशाना बनाया था। वे अपने साथ भारी मारा मात्रा में IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और AK-47 लेकर आए थे।

इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 300 लोग घायल हुए थे। मृतकों में अमेरिकी सहित कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इन आतंकियों के खिलाफ NSG, मरीन कमांडो फोर्स, मुंबई पुलिस, RAF, CRPF, मुंबई फायर ब्रिगेड और रेलवे पुलिस फोर्स ने ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया था। साल 2012 में उसे फाँसी दी दे गई थी।

₹3900 करोड़ की 44 परियोजनाएँ, संस्थाओं को GI टैग, बुजुर्गों को ‘आयुष्मान कार्ड’, डेयरी किसानों को बोनस: काशी के 50वें दौरे पर PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का 50वाँ दौरा किया, जिसमें उन्होंने काशीवासियों को कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। सुबह 9:45 बजे लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने के बाद, प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर से मेहंदीगंज पहुँचे, जहाँ उन्होंने विशाल जनसभा को संबोधित किया।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कुल 3884.18 करोड़ रुपए की 44 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया गया, जिनमें बुनियादी ढाँचे, पर्यटन, तकनीकी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, ऊर्जा और परिवहन से संबंधित योजनाएँ शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने मंच पर ही वाराणसी की तीन संस्थाओं को GI टैग प्रमाणपत्र प्रदान किए और ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के तीन बुजुर्गों को स्वास्थ्य कार्ड सौंपे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रदेश की सभी डेयरियों को दूध आपूर्ति करने वाले किसानों को 101 करोड़ रुपए का बोनस भी दिया।

अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने ‘काशी हिंदू विश्वविद्यालय’ (BHU) में सांसद ज्ञान प्रतियोगिता, सांसद फोटोग्राफी प्रतियोगिता और सांसद संस्कृत प्रतियोगिता के प्रतिभागियों से भी संवाद किया और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने संत गुरु रविदास की जन्मस्थली पर पूजा-अर्चना की और उनकी 647वीं जयंती समारोह में हिस्सा लिया।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि पिछले 9 वर्षों में काशी में संपर्क सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और पर्यटन में वृद्धि हुई है। उन्होंने काशीवासियों से अपील की कि वे इस विकास यात्रा में सक्रिय रूप से शामिल हों और वाराणसी के विकास में योगदान दें।

इस दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “लोग सत्ता पाने के लिए खेल खेलते रहते हैं, लेकिन मेरा लक्ष्य है – परिवार का साथ परिवार का विकास। मेरा लक्ष्य है – ‘सबका साथ सबका विकास’। इस दिशा में ही बोनस (डेयरी किसानों को) वितरित किया गया है। यह उपहार नहीं आपकी तपस्या का परिणाम है। आपके पसीने का, आपके परिश्रम का तोहफा है।” पीएम मोदी ने इस दौरान काशीवासियों को हनुमान जयंती की बधाई भी दी।

‘च**रों को मार देंगे’: सलमान ने दलित प्रियांशु का काट दिया गला, बचाने आए दोस्त को भी किया लहूलुहान; पीड़ित बोले- पूरे परिवार को मार डालने की धमकी दी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में मंगलवार (8 अप्रैल 2025) रात करीब 10 बजे सलमान ने प्रियांशु गौतम की गर्दन पर चापड़ (धारदार हथियार) मार दिया। हमले में 17 वर्षीय पीड़ित के गर्दन की मुख्य नस कट गई है। प्रियांशु को बचाने आए आनंद पर भी सलमान ने हमला कर दिया और फरार हो गया। पुलिस ने दोनों युवकों को अस्पताल में भर्ती कराया है।

दलित समुदाय के प्रियांशु गौतम को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया है। लखनऊ पुलिस के आरोपित सलमान को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। इसको देखते हुए डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी बाजार खाला, एसीपी मलिहाबाद समेत समित तमाम अधिकारी मौके पर पहुँचे। इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

क्या है मामला?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद में मंगलवार (8 अप्रैल 2025) रात करीब 10 बजे प्रियांशु गौतम खाना खाकर अपने घर के बाहर टहलने के लिए निकला था। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियांशु के नाना चंद्रिका ने बताया कि पीड़ित अपने दोस्त आनंद के साथ चबूतरे पर बैठकर बातें कर रहा था। उसी दौरान उनका पड़ोसी सलमान आया और आनंद से मसाला (संभवत: गुटखा) लाने के लिए कहा।

आनंद ने मसाला लाने से इनकार कर दिया। इसके बाद सलमान उन दोनों के साथ गाली-गलौज करने लगा। प्रियांशु ने इसका विरोध किया तो सलमान ने उसे धक्का देकर गिरा दिया। उसके बाद उसके सीने पर बैठकर गर्दन पर वार करने लगा। उसने प्रियांशु का सिर भी फोड़ दिया। आसपास के लोग शोर सुनकर मौके पर भागते हुए आए। लोगों को आता देखकर सलमान वहाँ से भाग गया।

कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि हमला चाकू से किया गया है और कुछ में कहा गया है कि हमला बेल्चा से किया गया है। सलमान द्वारा प्रियांशु के गर्दन पर किए गए कई वार से गर्दन की मुख्य नस कट गई है। वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। परिजनों का कहना है कि गर्दन पर तीन वार किए गए हैं। प्रियांशु को बचाने में सलमान ने आनंद पर भी हमला कर दिया।

लोगों ने लखनऊ पुलिस को हमले की सूचना दी। सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस मौके पर पहुँची और घायलों को अस्पताल भेज दिया। पीड़ित प्रियांशु गौतम को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया है। प्रियांशु की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। वहीं उसके दोस्त की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। दो समुदायों से जुड़ा मामला होने के कारण इलाके में भारी पुलिस बल और PAC की तैनाती की गई है।

परिजनों का कहना है कि सलमान हत्या के इरादे से तैयार होकर आया था। परिजनों का यह भी कहना है कि सलमान बेहद आवारा किस्म का मनबढ़ अपराधी है। वह आए दिन किसी ना किसी के साथ गाली-गलौच और मारपीट करता रहता है। कई बार उसने बच्चों को पीटा है। जब लोग उसकी शिकायत लेकर उसके परिजन के पास जाते हैं तो वे शिकायत करने वालों से झगड़ा करने लगते हैं।

पीड़ित के दादा ने टाइम्स नाऊ नवभारत को बताया, “जैसे हमारे लड़के को काटा है, वैसे ही उसे (सलमान) को भी फाँसी सजा दी जाए। उसे जब पुलिस ले गई थी, तब कह कर गया था कि किसी को जिंदा नहीं छोडूँगा।” प्रियांशु की माँ ने कहा, “हम चाहते हैं कि उसके घर पर बुलडोजर चलवा दिया जाए। उसे यहाँ से साफ कर दिया जाए।”

पीड़ित की माँ ने आरोपित सलमान और उसके परिजनों द्वारा दी गई धमकी को लेकर कहा, “वो (सलमान) कहता है कि हम आएँगे तो किसी को नहीं छोड़ेंगे। उसने कहा कि (दलित) च**रों को हम मार देंगे। च**रों क्यों हैं यहाँ?” पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रियांशु को मारने के बाद सलमान अपने घर गया और अपने परिजनों से कहा कि उसने एक काट डाला है। इसके बाद उसके घरवाले उसे छिपा दिए।

प्रियांश गौतम मलिहाबादा के मोहम्मडन टोला में रहता है। उसके घर से सिर्फ 10 कदम की दूरी पर ही सलमान का घर है। प्रियांशु गौतम के नाना चंद्रिका ने पुलिस थाने में सलमान के खिलाफ शिकायत दी है। उसके आधार पर पुलिस ने हत्या की कोशिश सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बुधवार (9 अप्रैल) को पुलिस ने सलमान को गिरफ्तार कर लिया।

सलमान अपना मोबाइल स्वीच ऑफ करके भूसे वाली कोठरी में जाकर छिपा हुआ था। पुलिस ने पहुँचकर उसे दबोच लिया। वहीं, घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन ने पुलिस से आरोपित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की माँग की है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को हर तरह की सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

2 बच्चों के अब्बा रजा खान ने जिम में हिंदू लड़की को फँसाया, राजा नाम बताकर किया रेप: पीड़िता बोली- धर्मांतरण का भी था दबाव, अलीगढ़ में केस दर्ज

यूपी में लव जिहाद का एक अलग तरह का मामला सामने आया है। एक जिम जाने वाली हिन्दू लड़की को जिम संचालक रजा खान ने पहले अपने प्रेम जाल में फँसाया। लड़की का रेप किया और पहचान उजागर होने पर मुस्लिम बनने के लिए मजबूर करने लगा।

प्रेम में फँसा कर रेप, वीडियो बना कर ब्लैकमेल

अलीगढ़ के थाना रोरावर पुलिस ने जिम संचालक रजा खान के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। पीड़िता ने ये एफआईआर दर्ज कराते हुए पुलिस को सारी कहानी बयाँ की। पीड़िता ने कहा कि जिम संचालकर रजा खान ने अपना नाम छिपाया और राजा के रूप में उससे मिला फिर होटल ले जाकर रेप किया।

पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बनाया और जब उसे रजा खान की असलियत का पता चल गया तो लड़की पर धर्म बदलकर मुसलमान बनने और उसके साथ निकाह करने का दबाव भी बनाने लगा।

नाम बदलकर रजा खान ने की दोस्ती

रजा खान शादीशुदा होने के साथ- साथ दो बच्चों का बाप भी है। पीड़िता ने कहा कि जब उसने जिम जाना शुरू किया तो वहाँ रजा खान ट्रेनिंग दिया करता था। बातचीत आगे बढ़ी और उसने अपना नाम राजा बताया। इस दौरान वो एकाध बार उसके साथ बाहर भी गई।

पीड़िता का कहना है कि जिम चलाने वाला रजा खान अपने नाम और धर्म छिपाकर दोस्ती की थी और होटल ले जाकर उसके साथ रेप किया। इस दौरान उसने अश्लील वीडियो फोटो बनाया। पहचान उजागर होने पर उसने पीड़िता को वीडियो दिखा कर ब्लैकमेल करने लगा। रजा खान पीड़िता को निकाह करने के लिए जोर देने लगा। रजा खान चाहता था कि पीड़िता नमाज पढ़ना शुरू कर दे।

पीड़िता ने उससे पीछा छुड़ाने की कोशिश की। उसके घरवालों ने उसकी शादी किसी दूसरी जगह तय कर दी इससे गुस्साए रजा खान ने लड़की की शादी जहां हो रही थी उन्हें वीडियो-फोटो भेज दिया। इससे रिश्ता टूट गया। तंग आकर घरवालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

हेडली कनेक्शन से लेकर फिदायीन हमलावरों की ट्रेनिंग तक: तहव्वुर राणा से 18 दिन होंगे ताबड़तोड़ सवाल, कोर्ट ने 26/11 के साजिशकर्ता को NIA की रिमांड में भेजा

26/11 मुंबई आतंकी हमले का साजिशकर्ता तहव्वुर राणा को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 18 दिनों की रिमांड पर भेज दिया। 11 अप्रैल से एनआईए पूछताछ में जुट गई है। एनआईए ने तहव्वुर राणा की 20 दिन की रिमांड मांगी थी जिसे आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कोर्ट ने 18 दिनों की रिमांड पर भेज दिया। इसके बाद राणा की रात एनआईए मुख्यालय में कटी।

तहव्वुर का NIA के सवालों से सामना

मुंबई हमले से जुड़े सवालों की बात करें तो एनआईए इन अहम सवालों को तहव्वुर राणा से पूछ सकती है। तहव्वुर राणा 8 से 21 नवंबर 2008 के बीच क्यों आया था भारत? भारत के किन किन क्षेत्रों में गया और किन-किन लोगों से मुलाकात की? मुंबई हमले का एक और गुनहगार डेविड हेडली से राणा कब और कहाँ मिला, उनके बीच क्या बातें हुई? उन दोनों की पहली मुलाकात कब हुई थी?

एनआईए ये भी जानने की कोशिश करेगी कि क्या मुंबई के अलावा दूसरी जगहों पर भी आतंकी हमले की साजिश थी? किन-किन पाकिस्तानी अधिकारियों के संपर्क में आए और क्या निर्देश मिले?

राणा से ये भी पूछा जा सकता है कि लश्कर ए तैयबा और हाफिज सईद के साथ उसके संबंध कब से थे? हाफिज से कब मिला था? लश्कर और दूसरे आतंकी संगठनों के किस-किस लोगों से मिला है? डॉक्टर होने के बावजूद मेडिकल का पेशा छोड़कर आतंकी क्यों बना? एनआईए ऐसे सवालों के जवाब किसी भी हाल में राणा से निकलवाना चाहेगी। जाहिर तौर पर राणा के जवाब पाकिस्तान के लिए मुश्किलें पैदा करेंगी ।

तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पण के बाद अमेरिका से भारत लाया गया है। कई सालों की लंबी कानूनी लड़ाई और भारत-अमेरिका संबंध की वजह से ये संभव हो पाया। 10 अप्रैल 2025 को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उसे एनआईए ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया। इस दौरान एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि मुंबई हमले की तह तक जाने के लिए राणा से हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है ।

मुंबई आने से पहले हेडली मिला था राणा से

एनआईए ने कोर्ट को बताया कि साजिशकर्ता डेविड हेडली के भारत आने से पहले तहव्वुर राणा ने उससे बात की थी। हेडली अपने सामान और संपत्तियों का ब्यौरा एक ईमेल के जरिए राणा को बताया था। राणा की साजिश में इलियास कश्मीरी और अब्दुल रहमान भी शामिल था। अब पूरी साजिश पर तहव्वुर राणा से एनआईए पूछताछ करेगी।

मोदी सरकार ने कर दिखाया… कौन है आतंकी तहव्वुर राणा, 26/11 की कैसे रची साजिश; कैसे दबोचकर लाई NIA

साल 2008 में हुए मुंबई में आतंकी हमलों का सरगना तहव्वुर राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित करके गुरुवार (10 अप्रैल 2025) को लाया गया है। भारत पहुँचते ही NIA ने उसे आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। हवाई अड्डे पर ही डॉक्टरों की एक पैनल ने उसका मेडिकल किया। इसके बाद उसे पाटियाला हाउस स्थित NIA कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए गए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 64 साल के तहव्वुर को NIA के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष अमेरिकी विमान से लॉस एंजिल्स से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लाया गया। यह विमान गल्फस्ट्रीम है, जिसका कॉल साइन AOJ 96M है। दिल्ली एयरपोर्ट पर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के SWAT कमांडो तैनात हैं। इसके अलावा, सुरक्षा को देखते हुए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है।

NIA की DIG जया राय, IG आशीष बत्रा और SP प्रभात कुमार एनआईए की टीम को लीड कर रहे है। इनकी अगुवाई में तहव्वुर को पाटियाला हाउस कोर्ट में लाया जाएगा। कोर्ट को खाली करा लिया गया है। कोर्ट के आसपास किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। एनआईए मुख्यालय को भी सेनेटाइज कर लिया गया है। जगह-जगह डॉग स्क्वॉयड तैनात किए गए हैं।

वहीं, तहव्वुर की ओर से एडवोकेट पीयूष सचदेवा कोर्ट में पैरवी करेंगे। दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सचदेवा को नियुक्त किया है। पीयूष सचदेवा ने सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए अपनी तस्वीरें प्रसारित नहीं करने का मीडिया से अनुरोध किया है। तहव्वुर को NIA के विशेष जज चंद्रजीत सिंह की कोर्ट में पेश किया जाएगा। एडवोकेट सचदेवा और NIA के वकील नरेंद्र मान भी कोर्ट पहुँच चुके हैं।

तिहाड़ के हाई सिक्योरिटी सेल में रखा जाएगा तहव्वुर

अमेरिका से प्रत्यर्पित तहव्वुर राणा को दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में एक हाई सुरक्षा वार्ड में रखा जाएगा। उसके रखने के लिए जेल में सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। उसे तिहाड़ के अंडा सेल में रखा जाएगा। यह सेल हर तरफ से सुरक्षित मानी जाती है। इस सेल का आकार अंडे की तरह होता है, इसलिए अंडा सेल कहा जाता है।

अंडा सेल खूंखार अपराधियों एवं आतंकियों तथा हाई रिस्क वाले कैदियों के लिए बनाया गया है। इस सेल में कोई खिड़की भी नहीं होती है। सुरक्षा को देखते हुए इसमें बिजली भी नहीं होती है। इसलिए इसमें आमतौर पर दिन में भी अंधेरा जैसा होता है। इसकी दीवारों बेहद मोटी और लोहे-स्टील की मोटी-मोटी चादरों से बनी होती हैं।

कहा जाता है कि इस सेल पर बम का भी कम प्रभाव पड़ता है। इसमें कोई बाहर से हमला ना कर सके, इसको देखते हुए इसके चारों तरफ करंट वाले तार लगाए गए होते हैं। इस सेल के आसपास के हर क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाती है और अपराधी पर 24 घंटे नजर रखी जाती है। इसकी निगरानी तिहाड़ में बने कंट्रोल रूम से की जाती है।

पीएम मोदी के प्रयासों से लाया गया खतरनाक आतंकी

मुंबई हमलों के इस मास्टरमाइंड को भारत लाने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। अमेरिका में जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने तो इस प्रक्रिया में तेजी आ गई। फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वॉशिंगटन में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया था।

उस समय डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “तहव्वुर राणा को भारत भेजा जाएगा, जहाँ उसे इंसाफ मिलेगा।” तहव्वुर राणा ने अपने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए कई उपाय किए थे। वह लगातार अमेरिकी कोर्ट का चक्कर लगा रहा था। हालाँकि, उसे राहत नहीं मिली। तहव्वुर ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 27 फरवरी 2025 को ‘इमरजेंसी एप्लिकेशन फॉर स्टे’ दायर की थी।

यह याचिका जस्टिस एलेना कागन के पास भेजी गई थी, जो सुप्रीम कोर्ट की एसोसिएट जस्टिस और नाइंथ सर्किट की जस्टिस हैं। तहव्वुर ने दावा किया था कि भारत आने पर उसकी जान को खतरा है और उसे टॉर्चर का शिकार होना पड़ सकता है। उसने दलील थी कि उसका पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम होना उसे भारत में खतरे में डाल सकता है।

हालाँकि, जस्टिस कागन ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने फिर से कोशिश की थी, लेकिन उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने इस आतंकी को कोई राहत नहीं दी। बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि है। इसी संधि के तहत यह निर्णय लिया गया है। हालाँकि, उसके प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका द्वारा कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं।

शर्तों के तहत तहव्वुरा राणा का प्रत्यर्पण

तहव्वुर राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण साल 1997 के भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत हुआ है। इस संधि के तहत भारत सरकार कुछ सख्त नियमों एवं शर्तों से बँधी हुई है। संधि के अनुसार, जिस व्यक्ति या अभियुक्त का प्रत्यर्पण होगा, उसके अधिकारों का सम्मान किया जाएगा। इसके तहत तहव्वुर राणा को भारत में केवल उसी अपराध के लिए मुकदमा चलाया जाएगा, जिसके लिए प्रत्यर्पण हुआ है।

अगर भारत सरकार किसी अन्य अपराध के लिए तहव्वुर पर कार्रवाई करना चाहती है तो यह संभव नहीं होगा। संधि की एक शर्त यह भी है कि प्रत्यर्पण से पहले किए गए किसी भी अपराध के लिए तहव्वुर राणा को किसी तीसरे देश के हवाले नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, उसे उसके खिलाफ लगाए आरोपों की भी निष्पक्ष सुनवाई की जाएगी, यह संधि की शर्त है।

संधि के तहत फाँसी की सजा पर भी रोक का प्रावधान है। संधि के अनुच्छेद-8 की धारा-1 में कहा गया है कि जिस मामले में प्रत्यर्पण की माँग की जा रही है, अगर उसमें प्रत्यर्पण की माँग करने वाले देश में मौत की सजा का प्रावधान है और जिस देश से प्रत्यर्पित किया जाना है, उसमें मौत की सजा का प्रावधान नहीं है तो प्रत्यर्पण की अपील खारिज की जा सकती है।

समझौते के पैराग्राफ-1(B) में कहा गया है कि प्रत्यर्पण की माँग करने वाले देश को यह आश्वासन देना होगा कि आरोपित को फाँसी की सजा सुनाए जाने की दशा में सजा पर अमल नहीं होगा। इस अनुच्छेद की धारा-2 में कहा गया है कि प्रत्यर्पण की माँग करने वाले देश को आश्वासन देना होगा कि अगर उनकी कोर्ट की ओर से आरोपित को मौत की सजा देती है तो उस पर अमल नहीं किया जाएगा। 

कौन है तहव्वुर राणा और उसका साथी कोलमैन हेडली

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी के अंतिम सप्ताह में तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दी थी। तहव्वुर पाकिस्तानी मूल का कनाडाई/अमेरिकी व्यवसायी है। वह शिकागो में ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम की फर्म चलाता था। तहव्वुर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI और वहाँ से संचालिक इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का वह सक्रिय सदस्य है।

मुंबई हमले की जाँच करने वाली एजेंसी NIA ने 405 पन्नों की चार्जशीट में तहव्वुर राणा को आरोपित बनाया है। चार्जशीट में कहा गया है कि वह हमले का सरगना डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद सईद गिलानी की मदद कर रहा था। तहव्वुर और हेडली ने मुंबई हमले का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। तहव्वुर ने आतंकियों को बताया था कि मुंबई में आतंकियों को कहाँ ठहरना है और कहाँ-कहाँ हमले करने हैं।

तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे जानकारी थी कि हेडली किससे मिल रहा है और उनसे क्या बात कर रहा है। उसे हमले की योजना और टारगेट के बारे में भी बता था। तहव्वुर राणा अपने बचपन के दोस्त और आतंकियों के मददगार डेविड कोलमैन हेडली की आर्थिक सहित हर तरह से मदद करके इस्लामी आतंकियों का सपोर्ट कर रहा था।

कनाडाई-अमेरिकी नागरिक हेडली की माँ अमेरिका और उसके अब्बू पाकिस्तानी मूल के थे। अमेरिकी अधिकारियों ने अक्टूबर 2009 में हेडली को अमेरिका के शिकागो से गिरफ्तार किया था। अमेरिकी कोर्ट ने 24 जनवरी 2013 को मुंबई में आतंकी हमलों में शामिल होने का दोषी मानते हुए हेडली को 35 साल जेल की सजा सुनाई थी। भारत हेडली के प्रत्यर्पण की भी लगातार माँग कर रहा है।

तहव्वुर और हेडली बचपन के दोस्त हैं। हेडली भी शुरुआती 5 साल की पढ़ाई पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में की है। इसके बाद वह परिवार के साथ अमेरिका चला गया। तहव्वुर राणा भी इसी स्कूल में पढ़ा है। बाद में वह पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के रूप में काम करने लगा। फिर वह कनाडा चला गया। कुछ साल के बाद उसे कनाडा की नागरिकता मिल गई।

तहव्वुर की ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम की कंसल्टेंसी फर्म की एक शाखा मुंबई में भी थी। इसी फर्म के सहारे कोलमैन हेडली हेडली भारत आया था और हमले करने वाली जगहों की रेकी की थी। तहव्वुर राणा फिलहाल अमेरिका के लॉस एंजिल्स के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में हिरासत में है। उसे एफबीआई ने साल 2009 में शिकागो से दबोचा था। 

बता दें कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई के लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज पैलेस, होटल ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज ने निशाना बनाया था। वे अपने साथ भारी मारा मात्रा में IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और AK-47 लेकर आए थे।

इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 300 लोग मारे गए थे। मृतकों में अमेरिकी सहित कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इन आतंकियों के खिलाफ NSG, मरीन कमांडो फोर्स, मुंबई पुलिस, RAF, CRPF, मुंबई फायर ब्रिगेड और रेलवे पुलिस फोर्स ने ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया था। साल 2012 में उसे फाँसी दी दे गई थी।

IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयराम रमेश के दावे की निकाली हवा, कहा- डेटा प्रोटेक्शन कानून से RTI खत्म नहीं हुआ: कॉन्ग्रेस नेता ने कहा था- आरटीआई कानून को बर्बाद कर रही सरकार

केंद्रीय सूचना और तकनीक मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार (10 अप्रैल 2025) को कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश के उस दावे का जवाब दिया, जिसमें रमेश ने कहा था कि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 की धारा 44(3) ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई एक्ट 2005) को बर्बाद कर दिया है।

जयराम रमेश ने अपनी चिट्ठी में आईटी मंत्री से माँग की थी कि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 की धारा 44(3) को हटा दिया जाए, क्योंकि ये आरटीआई एक्ट 2005 को खत्म कर देता है। रमेश ने लिखा था, “आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 8(1)(j) में एक नियम था, जो आम लोगों को अपने विधायकों जितना ही सूचना का हक देता था, वो अब पूरी तरह से हट गया है।”

23 मार्च 2025 को लिखी गई जयराम रमेश की चिट्ठी का जवाब देते हुए आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 “पुट्टस्वामी फैसले में दी गई निजता के सिद्धांतों और आरटीआई एक्ट में तय की गई पारदर्शिता के सिद्धांतों के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।”

अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निजता का अधिकार जिंदगी के अधिकार का अहम हिस्सा है, जो संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मौलिक अधिकार है। ये निजता का अधिकार निजी जानकारी की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

वैष्णव ने अपनी चिट्ठी में लिखा, “इसलिए, समाज के लोगों और संसद के कई मंचों के साथ लंबी बातचीत के बाद ये साफ हुआ कि सूचना के अधिकार और निजता के अधिकार में संतुलन जरूरी है। डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, जिसे संसद ने पास किया, इस जरूरत को पूरा करता है और साथ ही जनजीवन में पारदर्शिता भी बनाए रखता है। ये सब डेटा प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 3 के जरिए सुनिश्चित किया गया है।”

उन्होंने ये भी लिखा, “इस कानून के नियमों के तहत, ये लागू नहीं होगा… (c) ऐसी निजी जानकारी पर, जो… (B) किसी ऐसे शख्स द्वारा सार्वजनिक की गई हो, जिसे भारत में मौजूदा किसी कानून के तहत वो जानकारी सबके सामने लानी ही थी।”

आईटी मंत्री ने आगे कहा कि जो भी निजी जानकारी हमारे जनप्रतिनिधियों या कल्याणकारी योजनाओं जैसे मनरेगा आदि को चलाने वाले कानूनों के तहत सबके सामने लानी जरूरी है, वो आरटीआई एक्ट के तहत अब भी सामने आएगी। उन्होंने ये भी जोड़ा कि ये बदलाव निजी जानकारी को छुपाने के लिए नहीं है, बल्कि लोगों के निजता के अधिकार को मजबूत करने और कानून के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए है।

बंगाल में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुआ हिंसक, तोड़फोड़ और भगवा झंडे फेंके गए: मंत्री सिद्दीकुल्लाह ने कोलकाता ठप करने की दी धमकी, CM ममता ने मुस्लिमों की संपत्ति बचाने की खाई थी कसम

पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन बिल के पार्लियामेंट में पास होने के बाद से कई जगहों पर हिंसा हो रही है। प्रदर्शनकारी उस वक्त और जोश में आ गए, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुलकर वक्फ कानून का विरोध किया और अपने राज्य के मुस्लिमों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार वक्फ की संपत्तियों को बचाएगी। पहले मुर्शिदाबाद, नदिया और मालदा में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों की हिंसा की खबरें आई थीं। अब सांतरागाछी और कोलकाता से भी ऐसी ही घटनाएँ सामने आ रही हैं।

बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने हिंसा की घटनाओं से जुड़े वीडियो शेयर किए हैं, जो सांतरागाछी और कोलकाता में हुईं। मालवीय द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में एक बस ड्राइवर अपनी गाड़ी से भगवा झंडा हटाता दिख रहा है।

मालवीय का कहना है कि इस्लामवादी प्रदर्शनकारियों ने बस ड्राइवर पर इतना दबाव डाला कि वो भगवा झंडा हटा दे। वीडियो में बस ड्राइवर के चारों तरफ ढेर सारे मुस्लिम प्रदर्शनकारी दिख रहे हैं, जो वक्फ कानून के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। वहाँ कुछ पुलिसवाले भी खड़े हैं, और जब ड्राइवर भगवा झंडा हटाता है तो प्रदर्शनकारी चिल्लाते और तालियाँ बजाते हैं।

मालवीय के मुताबिक, ये घटना कोलकाता में हुई। उन्होंने एक्स पर लिखा, “भगवा सिर्फ एक रंग नहीं है – ये हमारी हस्ती और विरोध का प्रतीक है। इसे स्वामी विवेकानंद, स्वामी प्रणवानंद और न जाने कितने संतों ने गर्व से पहना, जिन्होंने इंसानियत की सेवा के लिए अपनी जिंदगी लगा दी। हमारे देश के झंडे में ये हिम्मत और कुर्बानी को दिखाता है। लेकिन कोलकाता में एक परेशान करने वाली घटना सामने आई है। एक बस ड्राइवर, जो अपना काम कर रहा था और यात्रियों को ले जा रहा था, उसे कथित तौर पर इस्लामिस्टों ने दबाव डालकर भगवा झंडा हटाने के लिए मजबूर किया, वो भी पुलिस की मौजूदगी में। क्या पश्चिम बंगाल में हिंदू होना गुनाह बन गया है, ममता बनर्जी?” मालवीय ने घटना का वीडियो भी शेयर किया।

अमित मालवीय ने एक और एक्स पोस्ट में दावा किया, “पश्चिम बंगाल के राज्य मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी कोलकाता को ठप करने की धमकी दे रहे हैं। उनका कहना है, ‘अगर हम चाहें तो कोलकाता को बंद कर सकते हैं। हम आसानी से शहर में ट्रैफिक जाम कर सकते हैं। हम कोलकाता को मुरमुरे, गुड़ और मिठाइयों से जाम कर देंगे। जिलों के बाद अब कोलकाता पर हम अपनी पकड़ मजबूत करेंगे। अभी तक हमने ऐसा नहीं किया, लेकिन आगे करेंगे।’ और वो ये सब ममता बनर्जी के पूरे समर्थन से बोल रहे हैं।”

मालवीय ने जो दूसरा वीडियो शेयर किया, उसमें कुछ मुस्लिम लोग, जिनके सिर पर टोपी है, एक कार को तोड़ते दिख रहे हैं। उस कार पर हिंदू धार्मिक चिन्ह लगा हुआ था। मालवीय का कहना है कि ये घटना सांतरागाछी में हुई। वीडियो में कुछ पुलिसवाले दिखते हैं, जो हमलावरों को रोकने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

मालवीय ने लिखा, “देखिए सांतरागाछी, पश्चिम बंगाल में क्या हो रहा है – वक्फ विरोध के बहाने हिंदुओं की कारों को तोड़ा जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि पुलिसवाले वहाँ मौजूद हैं, लेकिन चुपचाप देख रहे हैं। जिन गाड़ियों पर महादेव के स्टिकर लगे हैं, उन्हें खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है, यहाँ तक कि लातें मारी जा रही हैं। ये सब ममता बनर्जी की अगुवाई में हो रहा है।”

हालाँकि, मालवीय ने जिस रिपोर्ट का हवाला दिया, उसमें कहा गया कि उस गाड़ी पर हमला तब हुआ, जब प्रदर्शनकारियों की तरफ बंदूक तान दी गई थी।