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गोधरा नरसंहार के चश्मदीद ईसाई शख्स का वो पत्र, जिसने 23 साल पहले ही खोल दी थी साजिश की पोल: पढ़ लें ‘L2: एम्पुरान’ बनाने वाले

गुरुवार (27 मार्च, 2025) को मोहनलाल की मलयालम फिल्म ‘L2: एम्पुरान’ रिलीज़ हुई, लेकिन यह फिल्म कुछ ही घंटों में गंभीर आलोचनाओं का शिकार हो गई। इसका कारण था – फिल्म के भीतर 2002 के गोधरा दंगों का गलत चित्रण किया जाना। फिल्म में हिंदुओं को संवेदनहीन और बेरहम दिखाने के साथ-साथ गोधरा दंगों के संदर्भ में एक हिंदू-विरोधी संदेश भी दिया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म के एक दृश्य में एक मुस्लिम परिवार को हिंदू दक्षिणपंथी चरमपंथियों द्वारा बर्बरता से मारे जाते हुए दिखाया गया है, जो कि विवाद का कारण बना।

इस भारी आलोचना के बाद, मोहनलाल ने रविवार (30 मार्च, 2025) को एक सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने ये स्वीकार किया कि फिल्म के कुछ हिस्सों से उनके कई प्रशंसकों को ठेस पहुँची है। अभिनेता ने यह स्पष्ट किया कि फिल्म में जो कुछ भी गलत तरीके से दिखाया गया, वह हटा दिया जाएगा।

मोहलाल ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “मुझे यह जानकारी मिली है कि लूसिफ़र फ़्रैंचाइज़ के दूसरे भाग ‘एम्पुरान’ में शामिल कुछ राजनीतिक और सामाजिक प्रसंगों के कारण मेरे कुछ चाहने वाले परेशान हैं।” उन्होंने आगे कहा, “एक कलाकार के तौर पर मेरा यह कर्तव्य है कि मैं यह सुनिश्चित करूँ कि मेरी फिल्मों से किसी भी राजनीतिक विचारधारा, आंदोलन या धार्मिक समूह के खिलाफ नफरत या नकारात्मकता न फैले। इसलिए, मैं और मेरी फिल्म की पूरी टीम इस आपकी इस नाराज़गी के लिए सच्चे दिल से खेद व्यक्त करते हैं और इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। हमने यह निर्णय लिया है कि ऐसे विषयों को फिल्म से हटा दिया जाएगा।”

इस प्रकार मोहनलाल और फिल्म टीम ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए, इस विवाद को शान्त करने के लिए फिल्म में आवश्यक बदलाव करने का निर्णय लिया।

फिल्म ‘L2: एम्पुरान’ में मोहनलाल के सहायक अभिनेता सुकुमारन ने जायद मसूद नामक किरदार को निभाया था, उनके किरदार को गोधरा दंगों से जोड़ा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म में गोधरा दंगों से संबंधित कुछ दृश्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। खासतौर पर, सुकुमारन के किरदार की पृष्ठभूमि में गोधरा दंगों का संदर्भ दिया गया है, जिसके चलते फिल्म को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।

इस फिल्म में यह भी दर्शाया गया है कि कैसे 2002 के गोधरा दंगों के दौरान गुजरात की तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी, भाजपा, और उनके नेता नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया। फिल्म की शुरुआत एक परेशान करने वाले दृश्य से होती है, जिसमें गोधरा दंगों के बाद एक मुस्लिम गाँव को जलाए जाने का दृश्य प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद, फिल्म में कुछ और ग्राफिक और हिंसक दृश्य दिखाए जाते हैं, जिनमें एक मुस्लिम बच्चे को हिंदू पुरुषों द्वारा बेरहमी से पीटे जाते हुए और एक गर्भवती मुस्लिम महिला के साथ हिंसा करते हुए दिखाया गया है।

फिल्म को लेकर चल रहे इस विवाद के बीच, एक पुराना पत्र फिर से सामने आया है, जो जॉर्ज जोसेफ नामक एक ईसाई व्यक्ति ने 2002 में ‘मातृभूमि’ अख़बार में लिखा था। इस पत्र में गोधरा दंगों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं का जिक्र किया गया था, जो आज भी इस पूरे मुद्दे पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

फिल्म में दिखाए गए इन विवादित दृश्यों ने न केवल दर्शकों बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

पत्र में गोधरा कांड में पूर्व नियोजित साजिश का खुलासा किया

20 अप्रैल, 2002 को, गोधरा ट्रेन अग्निकांड के लगभग दो महीने बाद, जिसमें अयोध्या से लौट रहे 59 हिंदू कारसेवकों की मौत हो गई थी, पझूर के जॉर्ज जोसेफ नामक एक ईसाई व्यक्ति ने ‘मातृभूमि’ डेली को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने घटना के दिन की अपनी आँखों-देखी गवाही दी, जो बाद में मलयालम अखबार में प्रकाशित हुई।

जॉर्ज जोसेफ 12 साल से गोधरा रेलवे स्टेशन के पास एक छोटा व्यवसाय चला रहे थे, और वह 2002 के गोधरा कांड के प्रत्यक्षदर्शी थे। पत्र में जॉर्ज ने उस दिन की घटनाओं का विस्तृत वर्णन किया, जिससे गोधरा कांड की वास्तविक तस्वीर सामने आई। उनके इस पत्र ने वामपंथी और लिबरल मीडिया द्वारा पिछले दो दशकों से फैलाए गए झूठ को उजागर किया है।

जॉर्ज जोसेफ द्वारा मातृभूमि दैनिक को लिखा गया पत्र (स्रोत: रामिथ18/X)

जॉर्ज ने लिखा कि गोधरा में एक लंबे समय से सांप्रदायिक तनाव था, और यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल था। उन्होंने आरोप लगाया था कि गोधरा कांड एक पूर्व नियोजित साजिश थी, जिसका मुख्य उद्देश्य तब के राजनीतिक वातावरण में अपनी ताक़त को साबित करना था। जॉर्ज ने यह भी खुलासा किया कि गोधरा कांड के बाद कॉन्ग्रेस के एक पार्षद और उसके गुंडों का हाथ था, जो स्टेशन के पास के इलाके में कई बार हिंसक घटनाओं को अंजाम देते थे।

पत्र में जॉर्ज ने यह भी बताया कि कैसे गोधरा कांड के बाद पुलिस ने कोई सख्त कदम नहीं उठाए और मुख्य आरोपी, जो एक कांग्रेस पार्षद था, के खिलाफ कार्रवाई करने से भी पुलिस हिचकिचाती रही। उनका यह पत्र न केवल गोधरा कांड की असली तस्वीर को पेश करता है, बल्कि उन लोगों को भी जवाब देता है जिन्होंने इस घटना के पीछे के वास्तविक कारणों को छिपाया है।

जॉर्ज जोसेफ द्वारा ‘मातृभूमि डेली’ को लिखा गया पत्र
स्रोत: रामिथ18/X

जॉर्ज जोसेफ ने पत्र में कहा कि गोधरा एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र था, और इसलिए वहाँ कई वर्षों से सांप्रदायिक तनाव और विभाजन की स्थिति बनी रही थी। गैर-मुस्लिम लोग इस क्षेत्र में अत्यधिक डर और निरंतर तनाव में रहते थे, क्योंकि देश में कहीं भी सांप्रदायिक अशांति होती, तो उसका गोधरा पर गंभीर असर पड़ता था। जॉर्ज के अनुसार, गोधरा नरसंहार के पीछे मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस के पार्षद थे। उनके साथियों ने स्टेशन के पास कई बार हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। जॉर्ज ने दावा किया कि वो ख़ुद इन घटनाओं के गवाह थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर उन्होंने इनके खिलाफ शिकायत दर्ज की होती, तो वह आज जीवित नहीं होते और यह पत्र न लिख पाते।

जॉर्ज ने यह भी खुलासा किया कि ‘साबरमती एक्सप्रेस’ पर हमला एक पूरी तरह से पूर्व-नियोजित साजिश थी, जिसे कई हफ्तों पहले से योजना बनाई गई थी। उन्होंने लिखा, “उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन रेलवे स्टेशन के आसपास हजारों लोग बाबरी मस्जिद के पक्ष में नारे लगाते हुए मौजूद थे। पुलिस ने उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास क्यों नहीं किया? इसका मुख्य कारण कॉन्ग्रेस पार्षद था। यहाँ तक कि पुलिस भी उसे छूने की हिम्मत नहीं करती थी।”

पत्र में जॉर्ज ने यह भी बताया कि जलती हुई बोगी से कूदने में सफल रहे यात्री, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, उन्हें भीड़ ने बेरहमी से पत्थरों से मारा। जॉर्ज को अपनी जान बचाने के लिए वहाँ से भागना पड़ा, क्योंकि वहाँ रहकर इन घटनाएँ देख को पाना असंभव था। उन्होंने सवाल उठाया, “कॉन्ग्रेस पार्टी दोषियों की निंदा करने और उनके असली चेहरे को उजागर करने के लिए क्यों तैयार नहीं है? मीडिया हमारे जैसे प्रत्यक्षदर्शियों से क्यों बच रही है?” अंत में उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि यह सब वोट की राजनीति का हिस्सा है।

जॉर्ज ने लिखा था कि जब तक गोधरा की समस्याएँ हल नहीं हो जातीं, वे वहाँ वापस लौटने का विचार नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, गोधरा में केवल मुस्लिम ही शांति से रह सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, “जब सांप्रदायिक विवाद होते हैं, तो बिना समस्या की असली जड़ का विश्लेषण किए पूर्वाग्रह बनाना उचित नहीं है। आज भी कई लोग ‘साबरमती एक्सप्रेस’ के यात्रियों को केरोसिन और पेट्रोल से जिंदा जलाने जैसे निर्दयी कृत्यों को सही ठहराते हैं।”

पत्र का शब्दशः अनुवाद

शनिवार, 20 अप्रैल
गोधरा में क्या हुआ…

पिछले 12 वर्षों से, मैं गुजरात के गोधरा में रेलवे स्टेशन के पास एक छोटा सा व्यवसाय चला रहा हूँ। मैं उन घटनाओं के बारे में लिख रहा हूँ, जो मैंने अखबारों और सार्वजनिक बयानों में लगातार पढ़ी और सुनी हैं। मैं गोधरा कांड का चश्मदीद गवाह था।

जब हम गोधरा की बात करते हैं, तो यह स्थान वर्षों से सांप्रदायिक तनाव से घिरा हुआ रहा है, यह मुस्लिम बहुल इलाका भी है। यही कारण है कि हमारे जैसे गैर-मुस्लिमों के लिए यह बहुत भयावह स्थान बन जाता है। भारत में कहीं भी सांप्रदायिक मुद्दे उठते हैं, उनकी गूँज यहाँ भी महसूस होती है।

गोधरा कांड का मुख्य आरोपित, जिसे कॉन्ग्रेस का पार्षद बताया जाता है, एक अपराधी किस्म का व्यक्ति था। मैंने खुद देखा था कि उसका समूह स्टेशन के आसपास किस तरह की अराजकता फैलाता था। अगर मैंने इसका विरोध किया या शिकायत दर्ज की होती, तो शायद मैं आज इस पत्र को लिखने के लिए जीवित न होता।

‘साबरमती एक्सप्रेस’ पर हमला एक पूर्व नियोजित साजिश थी। हमले से कई सप्ताह पहले ही इसकी तैयारी शुरू हो चुकी थी। उस दिन जो कुछ हुआ, वह किसी भी इंसान के देखने लायक नहीं था। उस दिन हजारों लोग बाबरी मस्जिद के पक्ष में नारे लगाते हुए रेलवे स्टेशन के आसपास इकट्ठा हो गए थे। पुलिस ने उन्हें क्यों नहीं रोका? इसका मुख्य कारण कॉन्ग्रेस का पार्षद था। पुलिस में भी उसे छूने की हिम्मत नहीं थी। जो लोग जलती हुई ट्रेन से कूदने में सफल हुए, उन पर पटरियों से पत्थर फेंके गए। बच्चों को भी इस निर्दयता से नहीं छोड़ा गया। मुझे अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा, क्योंकि घटनास्थल पर रुकना असंभव था।

कॉन्ग्रेस पार्टी इस जघन्य अपराध में शामिल लोगों की क्रूरता की कड़ी निंदा क्यों नहीं करती, या उनके असली चेहरे को उजागर क्यों नहीं करती? मीडिया हमारे जैसे चश्मदीदों को क्यों नज़रअंदाज़ करती है? सब कुछ वोट की राजनीति के लिए है।

जब तक गुजरात के मुद्दों का समाधान नहीं होता, मैं वहाँ वापस जाने को तैयार नहीं हूँ। गोधरा में सिर्फ मुस्लिम ही शांति से रह सकते हैं। मैं यह अपनी व्यक्तिगत अनुभव से कह रहा हूँ। जब सांप्रदायिक तनाव बढ़ता है, तो पूर्वाग्रह खतरनाक हो जाते हैं। हमें असली मुद्दों की जांच करनी चाहिए। गोधरा में लोग निर्दोष रेल यात्रियों को केरोसिन और पेट्रोल से जिंदा जलाने को सही ठहराने के लिए तैयार थे – चाहे इसका कोई भी कारण हो।

मैं यह सब इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि मुझे कोई भी मीडिया आउटलेट सच्चाई को रिपोर्ट करते हुए नहीं मिला। आज भी, ‘मातृभूमि’ जैसे निर्भीक मीडिया संस्थानों को जाति या धर्म की परवाह किए बिना वास्तविक मुद्दों को उजागर करने के लिए आगे आना चाहिए।

जॉर्ज जोसेफ, पझूर

गोधरा दंगों की सच्चाई

गोधरा दंगे देश के सांप्रदायिक दंगों के इतिहास में शायद सबसे अधिक गलत तरीके से पेश किए गए और राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए गए घटनाओं में से एक हैं। जहाँ एक तरफ दंगों का इस्तेमाल विभिन्न राजनीतिक दलों, मीडिया घरानों और वामपंथी विचारधारा के समर्थकों द्वारा हिंदू विरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए किया गया, वहीं दूसरी तरफ गोधरा दंगों के पूर्व हुए नरसंहार – जिसमें मुस्लिम भीड़ द्वारा साबरमती एक्सप्रेस के कोच में आग लगाई गई – इसका कभी उस पक्ष में उल्लेख नहीं किया गया।

बुधवार (27 फरवरी, 2002) को, ‘साबरमती एक्सप्रेस’ अपनी चार घंटे की देरी के बाद गोधरा स्टेशन पर सुबह 7:40 बजे पहुँची। उस समय ट्रेन के कोच S6 में 59 कारसेवक सवार थे, जो अयोध्या के रामजन्मभूमि स्थल से लौट रहे थे। ट्रेन के स्टेशन पर पहुँचने के कुछ ही मिनटों में, सिग्नल फलिया के मुस्लिम बहुल क्षेत्र से लगभग 2000 मुस्लिमों की भीड़ ने उस कोच को घेर लिया और उसमें आग लगा दी। ट्रेन के अंदर मौजूद सभी 59 कारसेवक, जिनमें 25 महिलाएँ और 15 बच्चे भी शामिल थे, जिंदा जल गए।

इसके बाद कई सालों तक चलने वाली न्यायिक सुनवाई में, ट्रायल कोर्ट ने 22 फरवरी, 2011 को गोधरा हत्याकांड के लिए 31 मुस्लिमों को दोषी ठहराया। 2017 में गुजरात उच्च न्यायालय ने भी इन दोषियों को दोषी ठहराया। इसके अलावा, फरवरी 2003 में एक आरोपित ने न्यायिक स्वीकारोक्ति दी, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया कि गोधरा कांड एक पूर्व नियोजित हमले का हिस्सा था।

(यह रिपोर्ट हमारी ही इंग्लिश टीम (ऑपइंडिया) के अनुराग द्वारा की गई है, इसे पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते है।)

‘अंबेडकर की सारी मूर्तियाँ तोड़ेंगे’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने वीडियो में दी धमकी, पंजाब में बाबासाहब की प्रतिमा पर लिखा – ‘SFJ ज़िंदाबाद’

प्रतिबंधित आतंकी संगठन SFJ (सिख्स फॉर जस्टिस) के सबसे बड़े सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अब बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ दिया है। पंजाब के जालंधर स्थित फिल्लौर में एक घटना के बाद राज्य भर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। नांगेल गाँव में डॉ अंबेडकर की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की गई है। पन्नू ने इसका वीडियो जारी किया। डॉ अंबेडकर की प्रतिमा के ऊपर अलगाववादी तत्वों ने ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ लिख दिया गया। SFJ की इस दलित विरोधी करतूत के कारण दलितों में आक्रोश है। फिल्लौर पुलिस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

डॉ अंबेडकर की प्रतिमा के पास खालिस्तानी झंडा फहराया गया, साथ ही ‘सिख हिन्दू नहीं हैं’ और ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ व ‘SFJ ज़िंदाबाद’ जैसे भड़काऊ नारे लिख डाले गए। हालाँकि, हम पन्नू द्वारा जारी किए गए वीडियो की पुष्टि नहीं करते हैं। इतना ही नहीं, पन्नू ने ये ऐलान तक कर दिया है कि आगामी 14 अप्रैल को राज्य भर में बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों को हटाया जाए। इसके पीछे उसकी दलील है कि ये भारत का संविधान ही है जिसके कारण सिखों को इस देश में कोई अधिकार नहीं मिला। अलगावादी पन्नू अक्सर ऐसे भड़काऊ वीडियो जारी करता रहता है।

हाल ही में एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वो बुलेटप्रूफ जैकेट पहन कर जिम करता हुआ दिखाई दे रहा था। वो फ़िलहाल अमेरिका के न्यूयॉर्क में रह रहा है। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने पन्नू की हत्या का आरोप भारत के एक पूर्व ख़ुफ़िया एजेंट पर लगाया था। कहा जा रहा है कि इसके बाद से ही पन्नू डरा-सहमा हुआ है और बाहर नहीं निकलता। कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से ही वो खौफ में था। ताज़ा घटना की बात करें तो फिल्लौर पुलिस फ़िलहाल इससे इनकार कर रही है।

पुलिस का कहना है कि पन्नू की वीडियो कहाँ की है, इसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है और जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। ये ऐसी पहली घटना नहीं है। इसी साल जनवरी में अमृतसर में बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को खंडित कर दिया गया था। इसे लेकर कई जमकर राजनीति भी हुई थी। हालाँकि, इस करतूत को अंजाम देने वाला दलित ही निकला था। आकाशदीप सिंह नामक उस शख्स का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वो मूर्ति पर चढ़कर हथौड़े से वार करता हुआ दिखाई दे रहा था। उसे हिरासत में लेकर पुलिस ने FIR दर्ज की थी।

इस घटना पर इसीलिए भी ख़ूब हंगामा हुआ था, क्योंकि स्वर्ण मंदिर की तरफ जाने वाली हेरिटेज स्ट्रीट पर स्थित टाउन में ये घटना हुई थी। वहाँ से गोल्डन टेम्पल की दूरी बहुत अधिक नहीं है। ये अमृतसर में डॉ अंबेडकर की सबसे लंबी प्रतिमा थी। इस घटना को लेकर भाजपा ने राज्य की सत्ताधारी AAP पर निशाना साधा था। भाजपा ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल की अनुमति के बिना ऐसी घटना संभव नहीं है। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने संसद में अंबेडकर के अपमान का आरोप लगाते हुए इसे मुद्दा बनाया था और अमित शाह को घेरा था।

आग वाली रात मेरे घर में किसी ने नहीं देखा नोटों का बंडल, मुझे जले हुए नोटों की बोरियाँ भी नहीं दिखाई: रिपोर्ट में दावा- जस्टिस यशवंत वर्मा ने कैश की बात नकारी, CJI ने पूछे थे 3 सवाल

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने घर से कैश मिलने की बात को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने CJI संजीव खन्ना को दिए गए जवाब में बताया है कि घर पर नोट मिलने की बात सही नहीं है। उन्होंने नोट मिलने के दौरान खुद के घर में मौजूद होने की बात भी नकार दी है।

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा से तीन स्पष्ट प्रश्न पूछे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से यह प्रश्न दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय के माध्यम से पूछे हैं। इसको लेकर उन्होंने एक पत्र डीके उपाध्याय को लिखा है।

CJI खन्ना ने यह प्रश्न जस्टिस डीके उपाध्याय द्वारा प्राप्त इस मामले में रिपोर्ट के बाद पूछे थे। यह जवाब उन्हें 22 मार्च, 2025 तक देने थे। इसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था। उनके खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमिटी जाँच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा से अपना फोन और उसका डाटा सुरक्षित रखने को कहा है।

CJI ने पूछे ये तीन सवाल

CJI खन्ना ने जस्टिस उपाध्याय से जस्टिस वर्मा से यह तीन प्रश्न पूछने को कहा था-

1- वह अपने परिसर में स्थित कमरे में धन/नकदी की उपस्थिति का हिसाब कैसे देते हैं?

2- उस कमरे में मिले धन/नकदी का स्रोत क्या है, इसके विषय में भी बताएँ।

3- वह व्यक्ति कौन है जिसने 15 मार्च, 2025 की सुबह कमरे से जले हुए पैसे/नकदी को निकाला था?

फोटो साभार: News18 India

जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया जवाब

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इन तीनों सवालों के जवाब CJI को भेज दिए थे। उन्होंने क्रमिक तरीके से यह उत्तर दिए थे। उन्होंने अपने जवाब में कहा।

1- पहले प्रश्न के उत्तर में जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा, “मुझे कभी भी घर के स्टोर रूम में पड़े किसी पैसे या नगदी के बारे में जानकारी नहीं थी। ना तो मुझे और न ही मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को कैश यानी नकदी के बारे में कोई जानकारी थी। ना ही इसका मुझसे या मेरे परिवार से कोई संबंध है। मेरे परिवार के सदस्यों या कर्मचारियों को जिस रात को आग लगी उस रात को ऐसी कोई मुद्रा या नकदी दिखाई नहीं गई।”

2- दूसरे सवाल का जवाब देते हुए जस्टिस वर्मा ने कहा, “पहले प्रश्न के जवाब से साफ तौर पर जाहिर है कि दूसरे सवाल का जवाब यानी नकदी का स्रोत स्पष्ट करने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता है।

3- तीसरे प्रश्न के उत्तर में जस्टिस यशवंत वर्मा ने बताया, “मैं इस आरोप को बिलकुल नकारता हूँ कि हमने कोई नोट स्टोररूम से निकाले हैं। जैसा कि मैंने ऊपर वाले प्रश्न में बताया है कि हमें जले हुए नोटों की बोरियाँ न दिखाई गईं और न ही सौंपी गई। कमरे के अंदर आग लगने के बाद जिस मलबे को बचाया गया वह भी घर में एक जगह मौजूद है।”

जस्टिस वर्मा ने बताया कि वह और उनकी पत्नी भोपाल से 15 मार्च को लौटे थे और कुछ भी हटाए जाने सम्बन्धी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया है कि घटना के दौरान उनके कर्मचारियों को कोई नकदी या मुद्रा मिली थी।

होली वाले दिन लगी थी आग

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर होली वाले दिन (14 मार्च, 2025) को आग लग गई थी। इसके बाद अग्निशमनकर्मियों को बुलाया गया था। उन्हें आग बुझाने के दौरान घर के एक कमरे से बड़ी मात्रा में नकद मिला था।

इसका वीडियो भी सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने उनके विषय में एक रिपोर्ट भी जारी की थी। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने उनका ट्रांसफर इस घटना के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जाँच कमिटी बना दी है, इसमें तीन जस्टिस शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट आने तक तक यशवंत वर्मा को न्यायिक काम से हटा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा ने खिलाफ FIR की माँग करने वाली याचिका को भी सुनने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अभी FIR दर्ज करने का समय नहीं है।

हरिद्वार का औरंगजेबपुर बना शिवाजी नगर, मियांवाला हुआ रामवाला… उत्तराखंड में 17 जगहों के बदले नाम: बोले CM धामी- भारतीय संस्कृति-विरासत के आधार पर किया बदलाव

उत्तराखंड में 4 जिलों के 17 जगहों के नाम में बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सोमवार (31 मार्च 2025) को बदले हुए नामों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और विरासत को ध्यान में रखते हुए नाम बदले गए हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस ने फैसले को बीजेपी द्वारा जनता का असली मुद्दे से ध्यान भटकाने का नाटक करार दिया।

प्रदेश में बदले गए स्थानों की लिस्ट मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अपने अधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर पोस्ट की। सीएम ने लिखा, “हरिद्वार जनपद का औरंगज़ेबपुर अब शिवाजी नगर के नाम से जाना जाएगा…जनभावनाओं के अनुरूप हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उद्धम सिंह नगर जनपदों में स्थित विभिन्न स्थानों के नाम परिवर्तित किए गए हैं।”

सूची के मुताबिक, हरिद्वार जिले में औरंगजेबपुर का नाम शिवाजी नगर गाजीवाली का नाम आर्यनगर, चांदपुर का नाम ज्योतिबा फुले नगर, मोहम्मदपुर जट का नाम मोहनपुर जट, खानपुर कुर्सली का नाम अंबेडकर नगर, इदरीशपुर का नाम नंदपुर, खानपुर का नाम श्री कृष्णपुर, अकबरपुर फाजलपुर का नाम विजयनगर, आसफनगर का नाम देवनारायण नगर और सलेमपुर राजपूताना का नाम शूरसेन नगर रखा गया है।

देहरादून जिले में वर्तमान स्थान मियांवाला का नाम रामजीवाला, पीरवाला का नाम केसरी नगर, चांदपुर खुर्द का नाम पृथ्वीराज नगर और अब्दुल्लापुर का नाम अब दक्षनगर किया गया है।

नैनीताल जिले में नवाबी रोड अब अटल मार्ग और पनचक्की से आईटीआई मार्ग को गुरु गोवलकर मार्ग नाम से जाना जाएगा। साथ ही उधम सिंह नगर जिले में नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी का नाम बदलकर अब कौशल्या पूरी हो गया है।

बीजेपी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उत्तराखंड के मीडिया सचिव मनवीर चौहान ने कहा कि विभिन्न स्थानों के नाम बदलने का काम जनभावना और भारतीय संस्कृति एवं विरासत के अनुरूप किया जा रहा है। इससे लोग भारतीय संस्कृति और इसके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सकेंगे।

वहीं, कॉन्ग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “नाम बदलना बीजेपी का एजेंडा बन गया है क्योंकि उनके पास असली काम दिखाने के लिए कुछ नहीं है। पिछले आठ साल विफल रहे हैं। अब जनता उनसे सवाल कर रही है। सवालों से ध्यान भटकाने के लिए वे नाम बदलने का नाटक कर रहे हैं।”

जिसे काटना चाहता था शरजील इमाम, जिसे काटने आए थे बांग्लादेशी आतंकी, अब वहीं मोहम्मद यूनुस ने चीन को दी दावत: क्या है ‘चिकन नेक’, क्या हैं इसके रणनीतिक मायने

बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चीन को रिझाने के लिए भारत के खिलाफ एक बार भी जहर उगला है। मोहम्मद यूनुस ने दावा किया है कि बंगाल की खाड़ी के अकेले मालिक वही हैं और भारत का इस इलाके से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने उत्तर पूर्व के राज्यों (सेवेन सिस्टर्स) के भारत से केवल जमीन के रास्ते जुड़े होने की तरफ इशारा किया है।

यह सारी बातें मोहम्मद यूनुस ने हाल ही में अपने चीन दौरे में कही हैं। उनका यह बयान उनके आधिकारिक पेज से पोस्ट किया गया था। मोहम्मद यूनुस ने इस दौरान चीन को उत्तर पूर्व के राज्यों के पास के इलाके में आकर निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है, जो कि भारत के लिए एक रणनीतिक खतरा है।

मोहम्मद यूनुस क्या बोला?

मोहम्मद यूनुस ने अपने बयान में कहा, “भारत के सात राज्य, भारत का पूर्वी भाग, जिसे सेवेन सिस्टर्स कहा जाता है, वे जमीन से घिरे हैं… उनके पास समुद्र का कोई रास्ता नहीं है।” मोहम्मद यूनुस ने आगे दावा किया कि इस इलाके में समुद्र के वह एक मात्र संरक्षक हैं।

उन्होंने कहा, “इसलिए यह एक बड़ी संभावनाएँ सामने लाता है। यह चीनी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हो सकता है। चीन यहाँ आकर चीजें बनाएँ, उनका उत्पादन और बिक्री करे… यहाँ से चीन में ले जाए और उन्हें पूरी दुनिया म निर्यात करे।”

मोहम्मद यूनुस ने भले ही समुद्र की बात की हो लेकिन उनका इशारा उस ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ की तरफ था, जो भारत के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बताया जाता रहा है। चिकन नेक कॉरिडोर लगभग 20 किलोमीटर चौड़ा जमीन का वह हिस्सा है जो शेष भारत को उत्तर पूर्व के बाकी 8 राज्यों से जोड़ता है।

क्या है चिकन नेक कॉरिडोर?

चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र को भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग है। इसकी चौड़ाई मात्र 22 किलोमीटर है और यह भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से सटा हुआ है।

अगर इस क्षेत्र में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है, तो पूरे पूर्वोत्तर भारत का बाकी देश से संपर्क टूट सकता है। इस वजह से आतंकियों के लिए यह क्षेत्र हमेशा से एक संवेदनशील लक्ष्य रहा है।रणनीतिकार मानते हैं कि युद्ध की स्थिति में यह हिस्सा उत्तर-पूर्व में सेना की गतिविधि को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

इसके कट जाने से देश के बाकी हिस्सों का उत्तर पूर्व से सम्पर्क नहीं रह जाएगा। यूनुस ने अपने बयान में इशारा कर दिया है कि वह इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पट्टी के पास चीन को लेकर आएँगे। इससे पहले देश के भीतर से भी इस हिस्से को देश से अलग करने की योजनाएँ बनती रही है।

शरजील भी इसे काटने की बात कह चुका

दिल्ली में दंगे भड़काने वाला शरजील इमाम भी इस हिस्से को भारत से अलग करने की सलाह मुस्लिमों को दे चुका है। उसने यह बयान एक सार्वजनिक सभा में दिया था। उसने शाहीन बाग़ में कहा था कि चिकन नेक मुस्लिम बहुल इलाका है और उसे भारत से काट दिया जाए।

शरजील इमाम ने 5 लाख मुस्लिमों को इकट्ठा करके असम और भारत को काट कर अलग कर देने और सेना ना पहुँचने देने की बात कही थी। इसके बाद उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ था। वह वर्तमान में जेल में है। शरजील इमाम ही नहीं इस्लामी आतंकी भी इस जुगत में हैं कि वह चिकन नेक को काट कर भारत को तोड़ सकें।

हाल ही में पश्चिम बंगाल पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार-उल-इस्लाम बांग्लादेश के 2 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों का लक्ष्य था पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और पूर्वोत्तर के सात राज्यों को जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ इलाके में बड़े पैमाने पर अस्थिरता फैलाना।

मुर्शिदाबाद में गिरफ्तार यह आतंकी एक स्लीपर सेल का हिस्सा थे जो दक्षिण और उत्तर बंगाल के संवेदनशील इलाकों में अस्थिरता पैदा करने के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत में भी आतंक फैलाने की योजना बना रहे थे। इनके पास से इस योजना की एक पेनड्राइव भी बरामद हुई थी।

असम के मुख्यमंत्री ने जताई चिंता

मोहम्मद यूनुस के बयान का जवाब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दिया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “बांग्लादेश की तथाकथित अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस द्वारा दिया गया बयान, जिसमें उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के सेवेन सिस्टर्स राज्यों को जमीन से घिरा हुआ बताया है और बांग्लादेश को उनके समुद्री पहुँच के रूप में पेश किया है, अपमानजनक और अत्यधिक निंदनीय है। यह टिप्पणी भारत के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ गलियारे से जुड़ी लगातार खतरे की कहानी को बता रही है।”

उन्होंने आगे लिखा, “ऐतिहासिक रूप से, भारत के भीतर के लोगों ने भी पूर्वोत्तर को बाक़ी देश से अलग करने के लिए रास्ते को काटने की सलाह दी है। इसलिए, चिकन नेक कॉरिडोर के नीचे और आसपास अधिक मजबूत रेलवे और सड़क नेटवर्क विकसित करना जरूरी है। इसके अलावा, चिकन नेक को प्रभावी ढंग से दरकिनार करते हुए पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि भारत से जोड़ने वाले दूसरे सड़क मार्गों की खोज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”

ईद मुबारक! कहीं मंदिर पर पत्थरबाजी तो कहीं भीड़ बन हिंदुओं पर टूट पड़े, रेप से लेकर धर्मांतरण तक… 70 घटनाएँ जो बताती हैं माह-ए-रमजान में भी नहीं थमे मुस्लिम कट्टरपंथी

मुस्लिम समुदाय ने इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान 2025 को 1 मार्च 2025 से 30 मार्च 2025 तक मनाया। यह ‘पाक’ माना जाने वाला महीना आमतौर पर शांति, आत्म-चिंतन और ‘रोजा’ के लिए जाना जाता है। हालाँकि, इस रिपोर्ट में रमजान 2025 के दौरान भारत और बांग्लादेश में मुस्लिमों द्वारा किए गए अपराधों और विशेष रूप से हिंदुओं पर हुए हमलों की 70 प्रमुख घटनाओं को लिस्ट किया गया है। इन घटनाओं में सुनियोजित हमले, हत्याएँ, लव जिहाद, मंदिरों पर हमले, बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराध, जबरन धर्मांतरण और अन्य संगीन अपराध शामिल हैं।

ये रिपोर्ट विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, जो इस दौरान हुई हिंसा और अशांति की गंभीरता को उजागर करता है। ऑपइंडिया ऐसी घटनाओं को दे रहा है, जो रमजान के दौरान हुईं।

हिंदुओं पर हमले

1- मामूली विवाद में हिंदू युवक की चाकू से हत्या

बिहार के सारण में 28 मार्च 2025 को सलखुआ गाँव में राकेश कुमार (18) की हत्या कर दी गई। वकील शाह, शकील शाह और महमूद आलम ने आपसी झगड़े में उसे चाकू मार दिया। पुलिस ने मृतक के भाई राजन के बयान पर पाँच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया

2- ‘ईशनिंदा’ के आरोप में हिंदू पर हमला

बांग्लादेश के तंगेल में 28 मार्च 2025 को साखीपुर इलाके में मुस्लिम भीड़ ने शंकर साहा पर हमला कर दिया। फेसबुक पर इस्लाम के खिलाफ पोस्ट लिखने का आरोप लगाकर उसके घर में तोड़फोड़ की और देवी लक्ष्मी की तस्वीर जला दी। यह हमला जुमे की नमाज के बाद हुआ।

3- हिंदू दुकानों और गाड़ियों में आगजनी

पश्चिम बंगाल के मालदा में 26 मार्च 2025 को मोथाबारी इलाके में मुस्लिम उपद्रवियों ने हिंदू दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी। रामनवमी से पहले हुए इस हमले में इस्लामिक झंडों के साथ तोड़फोड़ का वीडियो वायरल हुआ। पुलिस ने हालात काबू में किए। इस मामले में 34 लोग गिरफ्तार किए गए

4- मंदिर में कीर्तन के दौरान पथराव

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 25 मार्च 2025 को बहादुरपुर गाँव में एक कुत्ता मस्जिद में घुस गया। इसके बाद असलम, ईशान, शरीफ और रफीक ने मंदिर में कीर्तन कर रहे हिंदुओं पर पत्थर और लाठियाँ बरसाईं। इस घटना में दो लोग घायल हो गए, पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

5- हिंदू लड़के को बंधक बनाकर पीटा

तेलंगाना के हानमकोंडा में 23 मार्च 2025 को मोहम्मद अजीम और 8 अन्य ने साई चरण को अगवा कर बुरी तरह पीटा। वजह थी एक मुस्लिम लड़की से नौकरी की बात करना। उसे घंटों बंधक रखा गया। पुलिस ने 9 लोगों पर केस दर्ज किया।

6- हिंदू व्यक्ति की चाकू से हत्या

दिल्ली के वजीरपुर में 21 मार्च 2025 को जेजे कॉलोनी में इरशाद ने राधेश्याम (65) को चाकू मारकर मार डाला। बच्चों के झगड़े को सुलझाने की कोशिश में ये हत्याकांड हुआ। मृतक राधेश्याम के दो बेटे हैं।

7- 1000+ कट्टरपंथियों का हिंदुओं पर हमला

महाराष्ट्र के नागपुर में 17 मार्च 2025 को महल इलाके में 1000 से ज्यादा मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया। कुरान फाड़ने की अफवाह पर फहीम खान और अन्य ने 40 गाड़ियाँ जला दीं। पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हमले में हिंदुओं के घरों, दुकानों, गाड़ियों को निशाना बनाकर हमला किया गया था।

8- हिंदू प्रोफेसर को बंधक बनाया

बांग्लादेश के ढाका में 16 मार्च 2025 को मेडिकल यूनिवर्सिटी में डॉ. अनिंदिता दत्ता को बीएनपी छात्रों ने बंधक बनाया। उनके पिता अवामी लीग के सांसद रहे, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया। धमकियाँ भी दी गईं। उन्हें छुड़ाने के लिए सेना को भी बुलाना पड़ा था।

9- मामूली बहस पर हिंदू की हत्या

मुंबई के सांताक्रूज ईस्ट में 16 मार्च 2025 को हमद अंसारी और उसकी बीवी ने ओम प्रकाश शर्मा (40) को सीमेंट ब्लॉक से मार डाला। गाड़ी लापरवाही से चलाने की बात पर विवाद हुआ था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

10- भारत की जीत के जश्न पर हमला

मध्य प्रदेश के इंदौर में 9 मार्च 2025 को चैंपियंस ट्रॉफी जीत का जश्न मना रहे हिंदुओं पर सोहेल और एजाज की अगुवाई में भीड़ ने हमला किया। दुकानों और गाड़ियों में आग लगाई गई। पुलिस ने कई हमलावरों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पुलिस ने रासुका भी लगाई है।

11- हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या

दिल्ली के गाजीपुर में 9 मार्च 2025 को नसीम और तारिक ने रोहित चावड़ा (32) को गोली मार दी। नशे के धंधे का विरोध करने पर ये हत्या हुई। दोनों हत्यारों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

12- हिंदू युवक पर चाकू से हमला

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 3 मार्च 2025 को शोएब ने बजरंग दल के एक कार्यकर्ता पर चाकू से हमला किया। उसकी गर्दन पर गहरी चोट लगी। पुलिस ने शोएब को गिरफ्तार कर लिया।

13- पटाखों पर हिंदुओं पर हमला

गुजरात में 2 मार्च 2025 को हिंदुओं पर हमला हुआ। द्वारका के खंभालिया इलाके में स्थित श्रीनाथजी हवेली में पटाखे फोड़ने पर मकसूद, तौसीफ और मोइन ने हिंदुओं पर लाठियों से हमला किया। तीन लोग घायल हुए, चारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

हिंदू लड़कियों से दुष्कर्म और हत्या (लव जिहाद)

14- नाबालिग का अपहरण और गैंगरेप

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में नदीम ने एक नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर अपने दोस्त के साथ मिलकर रेप किया। उसे नशीला पदार्थ खिलाया गया और बदहवास छोड़ दिया गया। नदीम पकड़ा गया। ये घटनाक्रम 24 मार्च 2025 को प्रकाश में आया।

15- हिंदू लड़की का अपहरण और बलात्कार

उत्तर प्रदेश के महराजगंज में कुर्बान (23) ने एक हिंदू लड़की को अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। ये खबर 26 मार्च 2025 को सामने आई, जबकि घटनाक्रम 5 मार्च 2025 का है।

16- दोस्ती में फंसाकर गैंगरेप

गाजियाबाद के मोदीनगर में इस्राइल और अशरफ ने 17 साल की हिंदू लड़की को इंस्टाग्राम पर फँसाया। उसे कब्रिस्तान ले जाकर रेप किया और पीटा। दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया। ये घटनाक्रम 24 मार्च 2025 को प्रकाश में आया।

17- नाबालिग को फँसाकर फरार

उत्तर प्रदेश के मऊ में युसूफ ने 16 साल की हिंदू लड़की को प्रेमजाल में फँसाकर भगा लिया। पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर युसूफ को पकड़ लिया। परिवार ने शिकायत दर्ज की थी। ये घटनाक्रम 23 मार्च 2025 को सामने आया।

18- 3 मुस्लिम युवकों ने किया गैंगरेप

बांग्लादेश के बारीसाल में 22 मार्च 2025 को रफीकुल इस्लाम, मोहम्मद सुमन और स्वाधीन ने एक हिंदू किशोरी से दुकान में रेप किया। रफीकुल पकड़ा गया, बाकी फरार हैं। पुलिस जाँच कर रही है।

19- हिंदू बनकर शादी और धोखा

देहरादून में नदीम ने खुद को नवीन बताकर एक हिंदू लड़की से शादी की। फर्जी दस्तावेज बनाए और गवाह खरीदे। हिंदू संगठनों के विरोध के बाद उसे पकड़ा गया। ये घटनाक्रम 20 मार्च 2025 को सामने आया, जिसके बाद लोगों ने देहरादून में हंगामा भी किया था।

20- हिंदू लड़की को भगाकर धमकी

उत्तर प्रदेश के बरेली में 21 मार्च 2025 को तरबेज ने एक हिंदू लड़की को जेवरात मँगवाकर भगा लिया। फिर परिवार को धमकी दी कि पुलिस में गए तो लड़की के टुकड़े कर देगा। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

21- लव जिहाद में हिंदू लड़की की हत्या

दिल्ली के सीमापुरी में 12 मार्च 2025 को आसिफ ने कोमल को फँसाकर उसका शोषण किया। शादी से इनकार करने पर उसकी हत्या कर शव नहर में फेंक दिया। पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

22- हिंदू युवती की संदिग्ध हत्या

मध्य प्रदेश के विदिशा में 18 मार्च 2025 को 19 साल की हिंदू लड़की का शव फंदे पर लटका मिला। भाई का कहना है कि मुबारक खान ने रेप के बाद हत्या कर दी थी। इस मामले की पुलिस जाँच कर रही हैं।

23- अपहरण कर 2 दिन तक गैंगरेप

राजस्थान के अजमेर में रेहान खान और इमरान अली ने 14 साल की हिंदू छात्रा को अगवा कर 2 दिन तक रेप किया। पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। पीड़िता 8वीं कक्षा की थी। ये घटनाक्रम 16 मार्च 2025 को सामने आया।

24- बिहार में 80 साल की महिला से गैंगरेप

बिहार के गोपालगंज में 14 मार्च 2025 को सैय्यद अली और 6 अन्य ने 80 साल की हिंदू महिला से गैंगरेप किया। उसकी आँखें फोड़ने की कोशिश की और मरा समझकर छोड़ दिया। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया।

25- धर्म परिवर्तन से इनकार पर हत्या

उत्तर प्रदेश के संभल में जीशान और रियाज ने नर्स निकिता को धर्म बदलने का दबाव डाला। इनकार करने पर छत से गिराकर मार डाला। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये घटनाक्रम 11 मार्च 2025 को सामने आया।

26- रिश्ता तोड़ने पर किया रेप, जान से मार डाला

पंजाब के मोहाली में सुल्तान मोहम्मद ने मिताली को रेप के बाद मार डाला। शव को नाले में फेंक दिया। इस मामले में पुलिस ने सुल्तान मोहम्मद और उसके दो दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया। ये घटनाक्रम 7 मार्च 2025 को सामने आया।

27- शादी का दबाव बनाने पर हत्या

कर्नाटक के हावेरी में नयाज ने स्वाती से रेप किया और शादी का दबाव बनाने पर उसकी हत्या कर शव नदी में फेंक दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस घटना का पर्दाफाश 6 मार्च 2025 को हुआ।

हिंदू लड़कियों के खिलाफ अन्य अपराध

28- लव जिहाद में अशरफ ने नर्क बनाई जिंदगी

उत्तर प्रदेश के बस्ती में अशरफ नाम के ड्राइवर ने हिंदू परिवार की लड़की के साथ लव जिहाद किया। पहले रेप करके उसे चुप कराया, फिर उसे गहनों, नकदी समेत लेकर फरार हो गया। तीन बार गर्भपात भी कराया। ये मामला 28 मार्च 2025 को सामने आया।

29- हिंदू छात्राओं से छेड़छाड़

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में स्कूल के हेडमास्टर मो. रउफ ने 19 हिंदू छात्राओं से छेड़छाड़ की। इस मामले में 9 छात्राओं ने शिकायत की थी, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। ये पूरा मामला 24 मार्च 2025 को सामने आया।

30- नाबालिग को बेचने का धंधा

झारखंड के साहिबगंज में खालिक अंसारी नाबालिग लड़कियों को दिल्ली बेच रहा था। पुलिस ने उसे पकड़कर एक लड़की को छुड़ाया। ये मामला 16 मार्च 2025 को प्रकाश में आया और मीडिया की सुर्खियों में रहा।

31- छेड़छाड़ का विरोध करने पर हिंदू परिवार पर हमला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मोनीश और अरीश ने नाबालिग हिंदू लड़की से छेड़छाड़ की। विरोध करने पर 10 लोगों ने पीड़ित परिवार पर ही हमला कर दिया। उन्होंने गर्म तेल डाल दिया। पुलिस ने बाद में आरोपितों के खिलाफ केस कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ये घटनाक्रम 20 मार्च 2025 को सामने आया।

हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण

32- नाबालिग हिंदू का जबरन खतना

मुजफ्फरनगर में इमरान और नूर अली ने 15 साल के हिंदू लड़के को डराकर धर्म बदलवाया और खतना कराया। उसे सऊदी भेजने की बात कही। ये घटनाक्रम 27 मार्च 2025 को सामने आया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

33- महिला और बच्ची पर धर्मांतरण का दबाव

भोपाल में माजिद ने अपनी हिंदू बीवी और बेटी पर धर्म बदलने का दबाव डाला। वो अलग रहता था, इसके बाद भी धमकी देकर धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहा था। ये घटनाक्रम 16 मार्च 2025 को सामने आया।

34- नाबालिग को रोजा और नमाज के लिए उकसाया

झाँसी में शहनाज को पुलिस ने उसके साथी के साथ 12 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर लिया। शहनाज ने 16 साल की हिंदू लड़की को रोजा रखने और नमाज पढ़ने के लिए बहकाया।

35- हिंदू लड़की का अपहरण और धर्मांतरण

बांग्लादेश के ठाकुरगाँव में 17 साल की श्राबनी सेन को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाया गया। उसे ढाका के मदरसे में रखा गया। ये घटनाक्रम 18 मार्च 2025 को सामने आया।

36- हिंदू युवक का जबरन निकाह

फतेहपुर में आजम खान और 3 अन्य ने एक हिंदू युवक को बंधक बनाकर धर्म बदलवाया और निकाह कराया। पुलिस ने चारों पर केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ये घटनाक्रम रमजान के पहले ही दिन 1 मार्च 2025 का है।

37- हिंदू लड़के को जंजीरों में बाँधा

मध्य प्रदेश के खंडवा में रऊफ ने एक हिंदू विधवा से शादी की और उसके 17 साल के बेटे को धर्म बदलने के लिए जंजीरों से बाँधा। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। ये घटनाक्रम 5 मार्च 2025 को सामने आया।

हिंदू मंदिरों पर हमला

38- कर्नाटक में मंदिर पर पथराव

19 मार्च 2025 को कर्नाटक के बेलगावी में याशिर ने अश्वत्थामा मंदिर पर पत्थर फेंके। लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस को सौंपा। कोई वजह नहीं बताई गई, बल्कि ये बताया गया कि याशिर को मंदिर को देखकर गुस्सा आता था।

39- मंदिर में आगजनी, मूर्ति तोड़ी

पश्चिम बंगाल के दक्षिण परगना में शेख इंदू ने शीतला मंदिर में आग लगा दी। मूर्ति तोड़ी गई। 7 मार्च 2025 को लोगों ने उसे पुलिस को दिया। पुलिस ने उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ करार दिया।

40- होली पर मंदिर पर हमला

14 मार्च 2025 को बांग्लादेश के लक्ष्मीपुर में नकाबपोशों ने महामाया मंदिर पर हमला कर मूर्ति तोड़ दी। सीसीटीवी में घटना रिकॉर्ड हुई। इसके बावजूद पुलिस ने क्या कार्रवाई की, ये पता नहीं चल पाया है।

41- मंगला जुलूस पर पत्थरबाजी

झारखंड के हजारीबाग में 25 मार्च 2025 को जामा मस्जिद के पास मंगला जुलूस पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थर फेंके। गानों पर विवाद के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

होली पर हमले

42- होली पर हिंदुओं पर हमला

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में मुस्लिम भीड़ ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने पर हिंदुओं पर हमला कर दिया। 15 मार्च 2025 को वायरल हुए वीडियो में हिंदुओं को मुस्लिमों ने धमकियाँ दी।

43- होली मनाने पर हमला

14 मार्च 2025 को एटा में शम्शाद, मुश्ताक और इमरान पर उनके ही समुदाय के लोगों यानी मुस्लिमों ने ही हमला कर दिया। हमलावरों ने उन्हें गाँव से निकालने की धमकी दी।

44- काशी विद्यापीठ में पथराव

11 मार्च 2025 को वाराणसी के काशी विद्यापीठ में होली समारोह पर बाहरी लोगों ने पथराव किया। इस दौरान करीब 45 मिनट तक बवाल चला। कई लोग पथराव में घायल हो गए।

45- होली पर पत्थरबाजी

होली के दिन 14 मार्च 2025 को बिहार के बाढ़ में दो पक्षों में होली के दौरान पत्थरबाजी हुई। पुलिस पर भी हमला हुआ।

46- डीजे पर हमला और धमकी

14 मार्च 2025 को उन्नाव में मोहम्मद आरिफ ने अजय के घर में घुसकर डीजे बंद करने को कहा और जान से मारने की धमकी दी। मना करने पर जमकर पिटाई की।

47- होली पर हमला

14 मार्च 2025 को शाहगंज में मुस्लिम पक्ष ने घाट पर होली मनाने का विरोध कर हिंदुओं पर हमला किया। पुलिस ने कुछ हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया।

48- जुलूस पर बोतल बम से हमला

14 मार्च 2025 को झारखंड के गिरिडीह में मुस्लिम भीड़ ने होली जुलूस पर पत्थर और बोतल बम फेंके। दुकानों और गाड़ियों में आग लगाई।

49- लुधियाना में डीजे पर पत्थरबाजी

पंजाब में 14 मार्च 2025 को लुधियाना में मस्जिद के सामने डीजे बजाने पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थर फेंके। पुलिस सीसीटीवी से अपराधियों की पहचान करने में जुटी थी।

50- होली पर धमकी

उत्तर प्रदेश के बरेली में अयान, सलमान और अन्य ने हिंदुओं को होली न मनाने की धमकी दी। पुलिस ने 6 पर केस दर्ज किया था।

51- AMU में होली पर हंगामा

3 मार्च 2025 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिंदू छात्रों को होली की इजाजत नहीं मिली। विरोध के बाद 13-14 मार्च को अनुमति दी गई।

52- पानी के गुब्बारे पर हमला

12 मार्च 2025 को जोधपुर में मुस्लिम भीड़ ने पानी का गुब्बारा लगने पर एक दलित लड़के को बुरी तरह पीटा। सिर में चाबी धँस गई। वो बुरी तरह से घायल हो गया। इसके बाद इलाके में तनाव भी फैला था।

53- ‘जय श्री राम’ पर हमला

15 मार्च 2025 को बीरभूम में मुस्लिम भीड़ ने होली के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने पर हिंदुओं पर हमला किया। वीडियो वायरल हुआ।

मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ अपराध

54- बीवी ने पैसे माँगे तो पिटाई

जम्मू-कश्मीर के कोट बलवाल में एक मुस्लिम शख्स ने अपनी पत्नी को पैसे माँगने पर डंडे से पीटा। बेटी ने उसे बचाने के लिए हल्ला मचाया और लोगों ने पुलिस को बुलाया, जिसके बाद उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये घटनाक्रम 19 मार्च 2025 को सामने आया।

बच्चों के खिलाफ अपराध

55- 2 मासूम बच्चियों की हत्या

महाराष्ट्र में 25 मार्च 2025 को नवी मुंबई में मोहम्मद अंसारी ने 2 और 10 महीने की हिंदू बच्चियों की हत्या कर शव छिपा दिए। पुलिस ने 24 घंटे में उसे पकड़ा।

56- हिंदू बच्चियों से दुष्कर्म

उत्तर प्रदेश में 23 मार्च 2025 को हाथरस में बोबी कुरैशी ने 8 साल की 2 हिंदू बच्चियों से रेप किया। पुलिस ने उसे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया।

57- नाबालिग को भगाकर ले गया इमाम

उत्तर प्रदेश में 15 मार्च 2025 को रामपुर में मस्जिद का इमाम अब्दुल हफीज एक नाबालिग लड़की को भगा ले गया। पुलिस ने उसके चाचा और बहनोई पर भी केस दर्ज किया।

58- 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म

15 मार्च 2025 को हाथरस में अमन ने 7 साल की हिंदू बच्ची को अगवाकर रेप किया। उसे बेहोश छोड़कर भागा। पुलिस ने एनकाउंटर में पकड़ा।

59- नाबालिग से बलात्कार

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में शफीक अली ने 10 मार्च 2025 को पड़ोस की नाबालिग से रेप किया। पुलिस ने उसे अगले दिन उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

60- हिंदू बच्ची का धर्मांतरण

4 मार्च 2025 को मध्य प्रदेश के सागर में शबाना ने एक मृत हिंदू महिला की ढाई महीने की बच्ची चुराकर उसका नाम फातिमा रखा। पुलिस ने बच्ची छुड़ाई। शबाना ने बच्ची का धर्मांतरण भी कराया।

61- छात्रा से बलात्कार का प्रयास

बांग्लादेश के रंगपुर में शिक्षक सैफुल इस्लाम ने 12 साल की छात्रा से रेप की कोशिश की। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। ये घटनाक्रम 7 मार्च 2025 को सामने आया।

62- नाबालिग से आपत्तिजनक हरकत

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में दुकानदार रफीक ने 15 साल की हिंदू लड़की को अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया। भीड़ ने हंगामा किया और मस्जिद को भी घेर लिया। इस दौरान लोगों ने हाइवे को जाम करके प्रदर्शन किया। ये घटनाक्रम 10 मार्च 2025 को सामने आया।

63- उत्तर प्रदेश में कानपुर में 13 साल के लड़के की हत्या

6 मार्च 2025 को कानपुर में अजहर और नजर अली ने 13 साल के लड़के से कुकर्म कर हत्या की। शव कुएँ में फेंका। दोनों पकड़े गए। इस मामले में हत्यारोपी ने कहा कि उसकी गर्लफ्रेंड उससे रमजान में संबंध नहीं बनाती, इसलिए उसने ऐसा किया।

मुस्लिमों द्वारा मुस्लिमों की हत्या

64- ‘भाई’ कहने पर हत्या

बिहार में 25 मार्च 2025 को मधुबनी के मोहम्मद शाहनवाज ने मोहम्मद दिलकश (17) को ‘भाई’ कहने पर चाकू मारकर मार डाला। पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

65- रील पर कमेंट को लेकर हत्या

उत्तर प्रदेश में 3 मार्च 2025 को अलीगढ़ में अयान, शोएब, मजहर और फराज ने मोहम्मद कैफ को व्हाट्सएप रील पर कमेंट के लिए चाकू मारकर मार डाला। चारों पकड़े गए।

66- युवती की हत्या और शव लटकाया

रमजान की शुरुआत में ही 2 मार्च 2025 को बिहार के पूर्वी चंपारण में मोबस्सिर खान ने अपनी बीवी सबूतरा खातून की हत्या कर शव लटका दिया। भाई का कहना है ससुरालवालों ने ऐसा किया।

इस्लामिक जिहाद

67- जागरण में थूककर रोटी बनाने की घटना

उत्तर प्रदेश में 25 मार्च 2025 को गाजियाबाद में शावेज जागरण में थूककर रोटी बनाते पकड़ा गया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। शावेज को जागरण में ही हिंदू लोगों ने पकड़ लिया था और पुलिस को सौंप दिया था।

68- होटल में थूककर रोटी बना रहा था इसरार

उत्तर प्रदेश में 16 मार्च 2025 को गाजियाबाद के मुरादनगर में इसरार होटल में थूककर रोटी बनाते वायरल हुआ। पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

69- फैक्ट्री में पाकिस्तान के समर्थक में नारे

कर्नाटक में 19 मार्च 2025 को बेंगलुरु में हैमद हुसैन और सादिक ने फैक्ट्री की दीवारों पर पाकिस्तान समर्थक नारे लिखे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

70- रेल को पटरी से उतारने की साजिश

उत्तर प्रदेश में 1 मार्च 2025 को हरदोई में इबादुल्लाह (15) और अनवारुल (16) ने ट्रैक पर बोल्ट रखकर ट्रेन पलटाने की कोशिश की। पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया।

सिकंदर लोदी ने ज्वालादेवी की मूर्ति के टुकड़े कर उससे मांस तौलवाए, बेटे इब्राहिम ने अपने भाइयों को भी मरवाया: राणा सांगा की मेवाड़ी तलवार के सामने दोनों ने टेक दिए थे घुटने

सन 1526 ईस्वी में बाबर के साथ हुई पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी की हार ने दिल्ली पर लोदी वंश का सफाया कर दिया। लोदी खानदान दिल्ली सल्तनत का अंतिम शाही घराना था। उसके बाद दिल्ली पर मुगलों का अधिकार हो गया। इब्राहिम लोदी की सनक और हमेशा की तरह उसके दरबारियों की साजिश ने और मेवाड़ जैसा ताकतवर दुश्मन के सैन्य अभियानों से कमजोर लोदी वंश खत्म हो गया।

लोदी वंश की स्थापना बहलोल लोदी ने 1451 ईस्वी में की थी। बहलोल की 1489 में मौत के बाद उसका बेटा निजाम खान दिल्ली की गद्दी पर सुल्तान सिकंदर लोदी के नाम से बैठा। वह बेरहम शासक था। उसने कई प्रसिद्ध मंदिरों को नष्ट करवा दिया। ये वही सिकंदर लोदी था, जिसने नगरकोट के ज्वालादेवी मंदिर को विग्रह को टुकड़े-टुकड़े करवाकर उसे कसाइयों को मांस तोलने के लिए दे दिया।

उसने ग्वालियर किले पर 5 बार हमला किया, लेकिन वहाँ के क्षत्रिय शासक राजा मान सिंह ने उसे हर बार हराया। सिकंदर लोदी हिंदुओं और मूर्तिपूजा से सख्त नफरत करता था। उसने बोधन नाम के एक हिंदू की इसलिए हत्या करवा दी, उसने कहा था कि हिंदू भी इस्लाम की तरह ही सच्चा धर्म है। सिकंदर के शासनकाल में हिंदुओं पर फिर से जजिया लगाया गया और जबरन धर्मांतरण हुआ।

उसने हिंदुओं को थानेश्वर के पवित्र तालाब और यमुना में स्नान करने पर रोक लगा दी। आखिरकार सन 1517 ईस्वी में सिकंदर लोदी की मौत हो गई। सिकंदर लोदी की मौत के बाद उसका सबसे छोटा बेटा इब्राहिम लोदी दिल्ली की गद्दी पर बैठा। हालाँकि, इब्राहिम लोदी अच्छा प्रशासक साबित नहीं हुआ और सत्ता सँभाल नहीं पाया। वह सरदारों और गवर्नरों के प्रति ज्यादा कठोरता दिखाने लगा।

सत्ता संभालते ही इब्राहिम लोदी ने अपने अब्बू सिकंदर लोदी के वजीर रहे मियाँ भुआ को सबसे पहले जेल में डाला। इसके बाद शराब में जहर देकर मरवा दिया। आजम हुमायूँ, दरिया खान और हुसैन खान फरमूली जैसे नामी दरबारियों की उसने हत्या करवा दी। बाद में दरिया खान के बेटे बहादुर खान ने मुहम्मद शाह के नाम से बगावत कर दिया।

बहादुर शाह ने पूरे ऊपरी गंगा क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। यह इलाका बिहार से लेकर दिल्ली से लगभग 80 मील दूर संभल तक के क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया। समय के साथ उसने सुल्तान मुहम्मद शाह की उपाधि धारण करके राज किया। उसने दिल्ली की सेनाओं के खिलाफ कई लड़ाइयाँ लड़ीं, जिनमें वह हमेशा विजयी हुआ।

इब्राहिम लोदी दरबारियों का खुलेआम अपमान करता था। जिस पर शक होता, उसे कैद कर लेता या फिर मरवा दिया। इससे दरबारियों में यह बात बैठ गई कि उनमें से किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। इससे उसके दरबार में असंतोष पैदा हो गया। इन सब में उसका भाई और चाचा भी था। भाई जलाल की हत्या के बाद उसका जमींदार चाचा आलम खान काबुल भाग गया।

बड़े भाई जलाल खान की बगावत

सिकंदर लोदी की मौत के बाद उसके दरबार के कुलीन लोगों ने जौनपुर से ग्वालियर होते हुए लाहौर तक फैले लोदी साम्राज्य को दो हिस्सों में बाँटने के प्रयास किया। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि सिकंदर लोदी के दो बेटों- जलाल खान और इब्राहिम खान के बीच खूनी जंग में सल्तनत का खात्मा ना हो। दरबारियों ने जलाल खान को जौनपुर ले जाकर उसे वहाँ का राजा बना दिया।

हालाँकि, रापरी के गवर्नर खान जहान लोहानी ने इस रणनीति की निंदा की थी। उन्हें डर था कि पड़ोस के राजपूताना से मिल रही टक्कर में लोदी वंश खत्म हो जाएगा। सोच-विचार कर दरबारियों ने जलाल खान को जौनपुर छोड़ने के लिए मनाने के लिए हैबत खान को भेजा। ‘भेड़िया-हत्यारा’ के नाम से कुख्यात हैबत खान ने से जलाल खान ने साफ कह दिया कि वह जौनपुर नहीं छोड़ेगा।

इसके बाद इब्राहिम ने एक फ़रमान पेश किया जिसमें उन्होंने अमीरों को जलाल खान का अनुसरण न करने की चेतावनी दी। इब्राहिम का विरोधी आजम हुमायूँ खुलकर जलाल खान के पक्ष में आ गया। आखिरकार ने इब्राहिम लोदी ने अपने सभी भाई-बहनों को हाँसी के किले में कैद करवा दिया। इसके बाद उसने जलाल खान पर हमला कर दिया। कालपी की घेराबंदी कर किले को नष्ट कर दिया।

इसकी जानकारी जैसे ही जलाल खान को लगी, वह आगरा की ओर भाग गया। उसे जब पता चला कि इब्राहिम ने उसकी हत्या का आदेश दिया है तो वह ग्वालियर के राजा पहुँचा और सुरक्षा की माँग की।ग्वालियर किले पर कब्जा होने पर वह मालवा वापस चला गया। गोंडवाना में उसे पकड़ लिया गया और आखिरकार हाँसी ले जाने के जाने के दौरान रास्ते में ही जलाल खान की हत्या कर दी गई।

जलाल के सहयोगी के खिलाफ जंग का ऐलान

इब्राहिम लोदी को शक था कि वह जलाल खान का सहयोगी है। इसके बाद उसने ग्वालियर के आजम हुमायूँ को बुलाया। आजम अपने बेटे फ़तेह खान के साथ इब्राहिम से मिलने के लिए आया । इब्राहिम लोदी ने दोनों को कैद करवा लिया। इसके साथ ही आजम हुमायूँ के दूसरे बेटे इस्लाम खान को कड़ा-मानिकपुर के गवर्नर पद से हटा दिया। आजम हुमायूँ के साथ जो कुछ हुआ, उससे दरबारियों में गुस्सा था।

इसके बाद बगावत करने वालों ने 40,000 घुड़सवार और 500 हाथी वाले सहित बड़ी संख्या में पैदल सैनिकों वाले एक बड़ी सेना तैयार की। इसकी जानकारी मिलते ही इस्लामी मौलाना शेख रजा बुखारी ने दोनों के बीच समझौता कराने की कोशिश की। हालाँकि, इब्राहिम ने उनकी माँग को ठुकरा दिया कि आजम हुमायूँ को रिहा किया जाए। इसे लड़ाई में इब्राहिम खान जीत गया।

दौलत खान का बगावत

हालात देखकर उधर दौलत खान भी बगावत की तैयारी करने लगा। उसने इब्राहिम लोदी को कर का भुगतान करना बंद कर दिया। दौलत खान तातार खान का बेटा था, जो सिकंदर लोदी के अधीन 20 से अधिक वर्षों तक पंजाब का गवर्नर रहा था और उसने सल्तनत के लिए उत्तर-पश्चिमी सीमा को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखा था। आखिरकार, इब्राहिम लोदी ने दौलत खान को बुलवाया लिया।

दौलत खान जानता था कि कई दरबारियों की हत्या की जा चुकी है। इसलिए उसे लगा कि इब्राहिम लोदी उसको लेकर ठीक खरादे नहीं रखता। इसके बाद उसने अपने बेटे दिलावर खान को उसकी जगह आगरा भेज दिया। उस समय दिल्ली सल्तनत की राजधानी दिल्ली से आगरा आ गई थी। जब इब्राहिम ने देखा कि दौलत खान की जगह उसका बेटा आया है तो वह क्रोधित हो गया।

उसने आदेश का पालन नहीं करने पर बेटे और उसके अब्बू को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उस दौरान दिलावर खान को अत्याचार के भयानक दृश्य दिखाए गए, जो बगावत करने वालों पर ढाए जा रहे थे। इससे दिलावर डर गया। इब्राहिम ने दिलावर को कैद भी करा दिया। हालाँकि, किसी तरह दिलावर खान भागने में कामयाब रहा और अपने अब्बू दौलत खान को सारी बातें बताईं।

इसके बाद दौलत खान ने इब्राहिम लोदी से नाराज उसके चाचा आलम खान से संपर्क किया। इन लोगों ने लोग इब्राहिम लोदी के शासन को चुनौती देने के लिए उसकी मदद माँगी थी। इसके पहले बाबर ने 1503, फिर 1504, सन 1518 और 1519 में हमला किया था, लेकिन सफल नहीं हो पाया था। वह पंजाब के छोटे-मोटे हिस्से को ही लूटपाट कर लौट गया था।

इस बार उसे इब्राहिम के बेहद ताकतवर गवर्नर का ऑफर मिला तो वह खुश हो गया। आलम खान तो बाबर के दरबार में काबुल भी गया। वहाँ आलम खान ने बाबर से भारत में राजनीतिक अस्थिरता के बारे में बताया था। इसके बाद बाबर ने पंजाब में अपने दूत को भेजा। अपने दूत की रिपोर्ट आलम खान की बात को सही बताया। इसके बाद बाबर इब्राहिम लोदी पर हमला करने के लिए तैयार हो गया।

दौलत खान का असली लक्ष्य बाबर को मोहरे के रूप में इस्तेमाल करना था। उसे लगा था कि बाबर लुटेरा है और लूटकर वापस चला जाएगा। वह पंजाब और दिल्ली में अपने मोहरे को बैठाकर अपना प्रभुत्व जमा लेगा। इसमें तय हुआ था कि पंजाब दौलत खान के पास रहेगा और इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खान को दिल्ली दी जाएगी। आलम खान ने बिना गद्दी के ही अपना नाम सुल्तान अलाउद्दीन रख भी लिया।

निमंत्रण मिलने के बाद बाबर ने 1524 में खैबर दर्रे से होते हुए लाहौर तक मार्च किया। रास्ते में जीतने वाले सभी गाँवों-कस्बों को उसने जला दिया। लाहौर में तैनात इब्राहिम की सेना बाबर से हार गई। बाबर ने लाहौर को चार दिनों तक लूटा और फिर उसे जला दिया। इसके बाद वह देवपालपुर चला गया। वहाँ बाबर ने पूरी सेना को मौत के घाट उतार दिया।

बाबर से दौलत खान देवपालपुर में मिला। दौलत इस बात से निराश था कि बाबर ने लाहौर को लूटकर जला दिया। हालाँकि, बाबर ने उसकी एक नहीं सुनी। अब उसे अहसास हो रहा था कि क्या होने वाला है। उधर बाबर ने पंजाब जीतने के बाद उसे अपने राज्य में मिला लिया दौलत खान को बाबर ने जालंधर और सुल्तानपुर की ज़मीनें दीं।

हालाँकि, बाद में दौलत खान के बुरे व्यवहार के कारण ये जमीनें लेकर उसके सबसे बड़े बेटे दिलावर खान को सौंप दी। पंजाब में शासन की तैयारियाँ करने के बाद बाबर काबुल लौट गया। बाबर के जाते ही दौलत खान ने सुल्तानपुर से अपने बेटे की जागीर हटा ली और दीपालपुर से आलम खान को निकाल दिया।

बिना ताज और गद्दी के सुल्तान अलाउद्दीन बनकर घूम रहा आलम खान काबुल में बाबर के पास फिर गया और दौलत खान की शिकायत की। इसके बाद बाबर 1526 ईस्वी में भारत आया और पंजाब होते हुए इस बार सीधे दिल्ली पर हमला किया। पानीपत की इस पहली लड़ाई में इब्राहिम मारा गया। इस तरह मुगल वंश की शुरुआत हुई।

राणा सांगा से युद्ध

मेवाड़ उस समय का सबसे शक्तिशाली देश था। महाराणा संग्राम सिंह उर्फ राणा सांगा अपनी बहादुरी, नेतृत्व कौशल और अपनी रणनीतिक चतुराई के लिए पूरे उपमहाद्वीप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने पूर्वज बप्पा रावल के बाद दूसरी बार सभी हिंदू राजाओं को एक छत्र के नीचे लाने का काम किया था। मालवा, गुजरात और दिल्ली जैसे शक्तिशाली मुस्लिम सुल्तानों से घिरे होने के बावजूद राणा सांगा मेवाड़ के अलावा अन्य राजपूत क्षेत्रों को बचाने में कामयाब रहे थे।

राणा सांगा इब्राहिम लोदी के अब्बू सिकंदर लोदी को भी हरा चुके थे। मालवा में गृह युद्ध हुआ तो राणा सांगा मेदिनी राय के पक्ष लिया। वहीं, सिकंदर लोदी ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय का समर्थन किया। युद्ध की नौबत आई तो मालवा के सुल्तान खिलजी ने गुजरात से मदद माँगी। राणा सांगा ने तीनों सुल्तानों की संयुक्त सेना को हराया और मेदिनी राय को मालवा की गद्दी पर बैठाया।

इसके बाद सिकंदर लोदी की इब्राहिम लोदी को मेवाड़ से दुश्मनी विरासत में मिली थी। राणा सांगा ने दिल्ली के कई इलाकों को अपने राज्य में मिला लिया था। इसके बाद इब्राहिम ने मेवाड़ के खिलाफ़ चढ़ाई की। सन 1517 में ग्वालियर के पास खतौली में हुई लड़ाई में राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को बुरी तरह हराया। इसी युद्ध में राणा सांगा ने अपना बायाँ हाथ और एक पैर खो दिया।

इस दौरान राजपूत सेना ने लोदी घराने के एक राजकुमार ग़ियासुद्दीन को पकड़ लिया। इसके बाद 1518-19 में इब्राहिम ने फिर से मेवाड़ पर हमला करने का दुस्साहस किया। उसने मेवाड़ पर हमले के लिए एक बड़ी सेना भेजी। धौलपुर में दोनों सेनाएँ आमने-सामने आईं। राजपूत सेना से हुआ। इसमें भी लोदी सेना को करारी हार का सामना करना पड़ा। राणा सांगा की सेना ने बयाना तक उसका पीछा किया।

बाद में राणा सांगा ने इब्राहिम के अंतर्गत आने वाले चंदेरी को अपने राज्य में मिला लिया, लेकिन इब्राहिम इसका विरोध करने का भी साहस नहीं जुटा सका। चंदेरी के नुकसान के साथ ही इब्राहिम लोदी की सबसे दक्षिणी चौकी चली गई। इतिहासकार टॉड के अनुसार, गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा, मालवा के सुल्तान महमूद और दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ राणा सांगा ने 18 युद्ध लड़े और जीता।

इसमें बकरोल और घाटोली और खतौली का युद्ध प्रमुख है। मेवाड़ के साथ इस लंबे युद्ध में इब्राहिम लोदी भारी हानि हुई। कहा जाता है कि महाराणा सांगा ने अपने जीवन में 100 से अधिक लड़ाइयाँ लड़ी थीं और खानवा के युद्ध को छोड़कर उन्होंने सारी जीती थीं। राणा सांगा ने दिल्ली सल्तनत के साथ मालवा के बड़े हिस्से को मेवाड़ में मिला लिया था।

मेवाड़ के साथ युद्ध में इब्राहिम को ना सिर्फ भूभाग, बल्कि संसाधन और मान-सम्मान भी खोना पड़ा। बार-बार के युद्ध में इब्राहिम लोदी कमजोर हो चुका था। उधर, मौके की तलाश में बैठा बाबर तुरंत आया 1526 में पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर उसे मारकर मुगल वंश की नींव रख दी। बता दें कि राणा सांगा बयाना के युद्ध में बाबर को भी बुरी तरह हरा चुके थे।

वक्फ बिल को अजमेर दरगाह से लेकर केरल के पादरी संगठन तक से मिला समर्थन: ‘काली पट्टी गैंग’ को नसरुद्दीन चिश्ती ने गिनाए फायदे, कहा- इससे आएगी पारदर्शिता

वक्फ कानून में संशोधन को मुस्लिमों का एक बड़ा तबका समर्थन दे रहा है। अजमेर दरगाह के प्रमुख ने कहा है कि नए संशोधन से वक्फ में पारदर्शिता आएगी। मुस्लिमों के अलावा इसे ईसाइयों के एक संगठन का भी समर्थन मिला है। ईसाई संगठन ने केरल के सांसदों को इस संबंध में पत्र लिखा है।

ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के प्रमुख सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने मोदी सरकार के कदम को सही ठहराया है। सोमवार (31 मार्च, 2025) को ईद के मौके पर उन्होंने वक्फ बिल में संशोधन के कई फायदे गिनाए हैं।

उन्होंने कहा, “विरोध-समर्थन लोकतंत्र का हिस्सा है। जहाँ तक मेरा मानना है कि वक्फ में बदलाव की जरूरत है। वक्फ कानून से मस्जिदें छिन जाएँगी, कब्रिस्तान छिन जाएँगे, यह कहना गलत है… सरकार को कोई जल्दबाजी नहीं है। सरकार तसल्ली से इस बिल को लाई थी। सरकार ने इसे जेपीसी में दिया था।”

उन्होंने आगे कहा, “इस जेपीसी ने सबको सुना है। और इसको अब पेश किया जाएगा। मुझे पूरा यकीन है कि ये बिल आने के बाद वक्फ मामले में पारदर्शिता आएगी। इससे वक्फ संपत्तियों का किराया बढ़ेगा, जो कौम के काम आएगा।”

नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि वक्फ को लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वक्फ के मामले में सरकार कोई दखल नहीं दे रही बल्कि उसके प्रबंधन को और सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने पीएम मोदी का सौगात-ए-मोदी को लेकर धन्यवाद किया।

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती के साथ ही केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) ने केरल के सांसदों से अनुरोध किया है कि जब यह बिल चर्चा के लिए संसद में पेश किया जाए तो वे इसके पक्ष में वोट करें। इसको लेकर KCBC ने 29 मार्च, 2025 को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।

प्रेस विज्ञप्ति में KCBC के अध्यक्ष कार्डिनल क्लेमिस कथोलिका बावा, उपाध्यक्ष बिशप पॉली कन्नूक्कटन और महासचिव बिशप एलेक्स वडक्कुमथला ने केरल के सांसदों से वक्फ अधिनियम के “आपत्तिजनक” हिस्सों में संशोधन के समर्थन करने का आग्रह किया है।

इस प्रेस विज्ञप्ति में मुनंबन जमीन पर वक्फ को लेकर चल रहे बवाल का भी जिक्र किया गया है। गौरलतब है कि केरल वक्फ बोर्ड ने एर्नाकुलम जिले के मुनंबम में लगभग 404 एकड़ भूमि पर दावा किया हुआ है। इस जमीन पर रहने वाले अधिकांश लोग ईसाई और हिन्दू हैं। इस पर विवाद लगातार जारी है।

इससे पहले आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिमों से वक्फ का विरोध करने के लिए काली पट्टी पहन नमाज पढ़ने को कहा था।

माह-ए-रमजान में 60 मस्जिद तबाह, 700 नमाजी की मौत: मुस्लिम संगठनों ने बताया म्यांमार भूकंप से हुआ कितना नुकसान, जुमे पर नमाज पढ़ने को जुटे थे लोग

म्यांमार में शुक्रवार (28 मार्च, 2025) को आए भूकंप के चलते 700 मुस्लिम मारे गए हैं। भूकंप आने के दौरान यह लोग जुमे की नमाज पढ़ने मस्जिद गए हुए थे। मस्जिदों को हुए नुकसान के चलते इनकी मौतें हुईं। घायल होने वालों में भी बड़ी तादाद मुस्लिमों की है। कई नमाजियों की दबे होने की आशंका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, म्यांमार के एक मुस्लिम संगठन ने 700 नमाजियों के मारे जाने का आँकड़ा दिया है। उन्होंने बताया है कि इस भूकंप के चलते म्यांमार के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 60 मस्जिदें तबाह हो गई हैं। कई पूरी तरह से ढह गई हैं।

इनमें से कई मस्जिदें ऐसी हैं, जो 18वीं शताब्दी में बनी थीं। सबसे अधिक नुकसान मांडले में हुआ है। भूकंप का सबसे ज्यादा प्रभाव यहीं पड़ा था। इसके अलावा सगैंग इलाके में भी बड़ा नुकसान हुआ है। भूकंप के दौरान नमाज पढ़ने गए मुस्लिमों की इधर उधर भागने और चीखने-चिल्लाने की वीडियो भी सामने आई हैं।

एक वीडियो में बड़ी संख्या में नमाजी एक मस्जिद के भीतर इकट्ठा हुए हैं और पूरी इमारत हिलती है। यहाँ वजू के लिए बनाए गए जलाशय में भी इस दौरान तेज हरकत होती है। कई जगह मस्जिदों के गिरने और उनमें से नमाजियों को बचाने जाने के वीडियो सामने आए हैं।

मस्जिदों में बड़ी संख्या में मौतें होने के पीछे उनकी जीर्ण शीर्ण हालत होना कारण बताया जा रहा है। इसके अलावा शुक्रवार (जुमा) का दिन और रमजान का महीना होने के चलते मुस्लिम और बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थे, इससे भी आँकड़ा बढ़ा। कई इलाकों में हुए नुकसान की जानकारी तक सामने नहीं आई है।

म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया है कि अब तक 1600 लोग इस भूकंप के चलते मारे गए हैं जबकि 300 का पता नहीं लगाया जा सका है। 3400 से अधिक गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज चल रहा है। म्यांमार की मदद के लिए भारत, चीन और रूस जैसे देश आगे आए हैं।

म्यांमार में अभी राहत-बचाव का काम चल रहा है। म्यांमार में आए इस भूकंप का असर पड़ोसी देश थाईलैंड पर भी हुआ है।

‘ऐसी बमबारी करेंगे, जैसा देखा नहीं होगा’: 2018 में डील तोड़ने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब क्यों चाहते हैं परमाणु समझौता, सीधी बातचीत से क्यों भाग रहा ईरान?

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि अगर ऐसा नहीं होता तो वह ईरान पर बम बरसाएँगे। ईरान ने इस बीच अमेरिका से सीधे बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

क्या बोले ट्रम्प?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार (30 मार्च, 2025) को कहा, “यदि ईरान कोई समझौता नहीं करता, तो बम बरसाए जाएँगे… यह ऐसी बमबारी होगी, जैसी उन्होंने पहले कभी जीवन में नहीं देखी होगी।” राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने का भी इशारा किया।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह चेतावनी एक टीवी इंटरव्यू में दी। ट्रम्प ने एक और बातचीत के दौरान कहा है कि वह कुछ सप्ताह तक ईरान का रुख परखेंगे और अगर इसमें कुछ सकारात्मक नहीं पाते तो नए प्रतिबंधों की घोषणा कर देंगे। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में लिए गए ऐसे ही एक्शन की याद दिलाई।

ईरान ने क्या कहा?

ईरान ने राष्ट्रपति ट्रम्प की इस चेतावनी का जवाब दे दिया है। ईरान के राष्ट्रपति मंजूर पेजेश्कियाँ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर सीधी बातचीत नहीं करने वाले हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत करता रहेगा।

राष्ट्रपति पेजेश्कियाँ ने कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खुमैनी भी अमेरिका से अप्रत्यक्ष बातचीत के पक्ष में हैं और यह जारी रहेगी। अप्रत्यक्ष बातचीत का मतलब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दूसरे देशों के माध्यम से है। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत अभी ओमान के माध्यम से हो रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसका भी जवाब दिया है और स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान को परमाणु समझौता करने पर मजबूर कर दे। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति ने ईरान के साथ समझौते पर चर्चा करने की इच्छा जताई थी।अगर ईरान समझौता नहीं चाहता है, तो राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अन्य विकल्पों पर विचार करेंगे, यह ईरान के लिए बुरा होगा।”

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार नहीं हासिल करने देंगे। वहीं राष्ट्रपति ट्रम्प की बमबारी की धमकी का कोई स्पष्ट जवाब ईरान ने नहीं दिया है। हालाँकि, वह कुछ दिन पहले अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है।

ईरान ने कहा था कि अगर अमेरिका उसके ऊपर हमला करता है तो वह इस इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि वह सैन्य दबाव में आकर बातचीत की मेज पर नहीं बैठेंगे।

कहाँ से शुरू हुई समझौते की बात?

ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर यह बयानों की अदलाबदली राष्ट्रपति ट्रम्प के पत्र से चालू हुई थी। उन्होंने मार्च, 2025 के पहले सप्ताह में ईरान की सरकार को एक पत्र लिखा था, इसमें उन्होंने ईरान को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था ईरान के लिए यह समझौता करना काफी लाभदायक होगा। उन्होंने कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं हासिल करने दिया जा सकता। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने इस पत्र को बातचीत का आखिरी कदम बताया था।

इस पत्र का जवाब भी ईरान ने ओमान के माध्यम से दिया था। हालाँकि, ईरान ने समझौते की बात नहीं मानी। पश्चिमी देशों को डर है कि ईरान जल्द ही परमाणु हथियार हासिल कर लेगा और उसे तत्काल रोके जाने की आवश्यकता है।

2015 का समझौता ट्रम्प ने ही तोड़ा

ईरान वर्तमान में तमाम प्रतिबंधों से जूझ रहा है। उस पर यहाँ प्रतिबंध अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों ने लगाए हैं। ईरान बीते लगभग ढाई दशक से परमाणु हथियार बनाने का प्रयास कर रहा है। यह बात कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सर्वे में स्पष्ट हो चुकी है।

ईरान परमाणु हथियार को अपनी संप्रुभता के लिए जरूरी बताता है। हालाँकि, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए 2015 में बराक ओबामा प्रशासन के दौरान एक समझौता हुआ था। इस समझौते में ईरान और अमेरिका के साथ ही रूस, फ्रांस, जर्मनी, चीन, ब्रिटेन औए यूरोपियन यूनियन भी शामिल थे।

इस समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी यूरेनियम का भण्डार 98% कम करना था। इसके अलावा ईरान को इस यूरेनियम का उपयोग भी सीमित करना था, जिससे परमाणु बम बनाने के लिए प्रयोग में ना लाया जाए।

यूरेनियम के कणों को तोड़ने के लिए इस्तेमाल के लिए जाने वाले सेंट्रीफ्यूज भी ईरान को एक तिहाई पर लाने थे। इसके बदले इन देशों ने ईरान को प्रतिबंधों से राहत देने का वादा किया था। ईरान को इसके बाद वैश्विक बाजार में तेल बेचने की सहूलियत भी मिल गई थी। हालाँकि, यह ज्यादा दिन नहीं चल पाया।

2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद से लगातार डोनाल्ड ट्रम्प इस समझौते की आलोचना करते आए थे। उन्होंने 2018 में इस समझौते को खत्म करने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा था कि यह समझौता बहुत कमजोर था और ईरान के परमाणु हथियार प्रोग्राम पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

अब क्यों समझौता चाह रहे हैं ट्रम्प?

ट्रम्प के नए समझौते के लिए ईरान पर दबाव बनाने और जल्दबाजी दिखाने पर अब प्रश्न उठ रहे हैं। लोगों का पूछना है कि पिछली बार एक झटके में समझौता खत्म करने वाले राष्ट्रपति ट्रम्प इस अबकी से इतने आतुर क्यों हैं। वैसे तो इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, लेकिन यह कदम उनकी इस बार की नीति से मेल खाता है।

2025 में राष्ट्रपति ट्रम्प की नीति पिछले कार्यकाल से थोड़ी सी अलग है। उन्होंने सत्ता में आते ही पहले इजरायल और हमास के बीच सीजफायर करवाया था। इसके बाद उन्होंने यूक्रेन और रूस के बीच भी युद्धबंदी करवाई है। उनका फोकस मुख्य रूप से अरब देशों में शांति पर है।

इसी कड़ी में वह इजरायल पर दबाव घटाने के लिए ईरान से यह समझौता करना चाह रहे हैं। अगर यह समझौता होता है, तो इस इलाके में अमेरिका के हितों को भी लाभ होगा और उसे यहाँ से अपनी सैन्य तैनाती में कमी करने की जगह मिल सकेगी। हालाँकि, समझौते को लेकर अभी कोई सहमति नहीं बन पाई है।