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‘घटना के वक्त एक आरोपित गाँव में नहीं था’: पत्रकार का ऑडियो लीक होने के बाद हाथरस केस में इंडिया टुडे का यू-टर्न

हाथरस केस में ऑपइंडिया ने शुक्रवार (अक्टूबर 2, 2020) को कुछ लीक ऑडियो पर रिपोर्ट की थी। इसमें से एक ऑडियो में इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडेय मृतका के भाई संदीप से बातचीत कर रही थीं। इसमें संदीप से तनुश्री ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही थीं, जिसमें मृतका के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

ऑपइंडिया द्वारा इसे उजागर किए जाने के एक दिन बाद इंडिया टुडे ने यू-टर्न ले लिया है। अब, इंडिया टुडे ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि हाथरस मामले का एक आरोपित रामू, घटना के दौरान गाँव में मौजूद नहीं था। 

इंडिया टुडे के हिंदी चैनल ‘आज तक’ के रिपोर्टर ने अपनी रिपोर्ट में हाथरस केस में बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि आरोपित रामू घटना के समय गाँव में नहीं था! जिस डेयरी प्लांट में वो नौकरी करता था उसके मालिक ने बताया कि घटना के वक्त रामू प्लांट पर काम कर रहा था, उसे 25 से भी ज़्यादा लोगों ने प्लांट पर देखा था।

डेयरी प्लांट के मालिक का कहना है कि रामू फैक्ट्री में काम कर रहा था और उस गाँव में मौजूद भी नहीं था जहाँ यह घटना घटी। रामू के बारे में पूछे जाने पर प्लांट के मालिक का कहना है कि रामू को सुनने में थोड़ी कठिनाई है, मगर वह सीधा आदमी है।

Zee News के अनुसार, कारखाने के शिफ्ट मैनेजर मधुसूदन ने कारखाने के इंटर्नल व्हाट्सएप ग्रुप में उस दिन की रामू की तस्वीर भी दिखाई। बता दें कि रामकुमार (रामू) मुख्य आरोपित संदीप का चाचा है।

ज़ी न्यूज़ ने बताया है कि शिफ्ट मैनेजर के अनुसार, रामू की उपस्थिति 14 और 15 सितंबर, दोनों दिन के लिए उपस्थिति कैलेंडर में अंकित है, जो यह साबित करता है कि हाथरस में अपराध के दौरान वह उपस्थित नहीं हो सकता।

रामू के पिता राकेश ने कहा कि उनका बेटा किसी भी कथित बलात्कार या सामूहिक बलात्कार में शामिल नहीं था। एक ही परिवार का होने के कारण उन्हें मामले में फँसाया गया है। हाथरस पीड़िता को अपनी बेटी बताते हुए, राकेश ने ज़ी न्यूज़ से कहा कि अगर उनका बेटा सामूहिक बलात्कार का दोषी है, तो उस पर कोई मुक़दमा चलाने के बजाय गोली मारकर उसकी हत्या कर दी जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वह रामू को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर उसके बेटे के खिलाफ सामूहिक बलात्कार के आरोप साबित होते हैं, तो उसे मार दिया जाना चाहिए।

इसके अलावा, रामू के पिता राकेश कुमार का यह भी कहना है कि रामू को पहले हिरासत में लिया गया था और फिर रिहा कर दिया गया था। हालाँकि, केवल कुछ दिनों बाद जब बलात्कार के आरोप जोड़े गए, तो उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। राकेश कुमार ने एसआईटी पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।

इंडिया टुडे का यू-टर्न एक दिलचस्प मोड़ लाता है। 24 घंटे भी नहीं हुए, जब ऑडियो क्लिप लीक होने के बाद उनके रिपोर्टर को पीड़ित के परिवार पर दबाव डालते हुए उजागर किया गया था। इंडिया टुडे के मामले में यह घटनाक्रम दिलचस्प है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से इंडिया टुडे को इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है कि उन्होंने इस घटना के बारे में जो नैरेटिव सेट किया है और जिस पर कॉन्ग्रेस द्वारा घेराव किया जा रहा है, वह पूरी तरह सच है। हालाँकि, यह इंडिया टुडे और मीडिया रिपोर्टिंग के बारे में कई सवाल उठाता है।

उल्लेखनीय है कि पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। अब इंडिया टुडे के हिंदी चैनल द्वारा किए गए दावे कि एक आरोपित गाँव में मौजूद नहीं था से यह सवाल फिर से खड़ा होता है कि वास्तव में हाथरस में क्या हुआ था।

लीक ऑडियो से इंडिया टुडे और कॉन्ग्रेस कठघरे में

गौरतलब है कि इंडिया टुडे की पत्रकार और मृतका के भाई संदीप की फोन पर बातचीत वायरल हुई। इस ऑडियो को ऑपइंडिया ने भी एक्सेस किया। इसमें सुना जा रहा है कि इंडिया टुडे पत्रकार तनुश्री मृतका के भाई संदीप को ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही हैं, जिसमें लड़की के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।

बातचीत को सुनकर यह साफ पता चलता था कि तनुश्री पीड़िता के भाई से एक निश्चित बयान दिलवाने का प्रयास कर रही हैं और संदीप की दबी आवाज सुनकर लग रहा है जैसे वह ऐसा नहीं करना चाहते। संदीप इस ऑडियो में पहले दबाव की बात कहते हैं। मगर बाद में कहते हैं कि उनके पिता इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं है कि उन पर दबाव बनाया गया या नहीं।

इस बातचीत का मकसद सिर्फ़ मृतका के पिता का वीडियो निकलवाना था, जिसमें पिता किसी भी तरह बस यही बोल दें कि उनपर दबाव बनवाकर बयान दिलवाया गया कि वह संतुष्ट हैं।

तनुश्री को ऑडियो में कहते सुना जा सकता है, “संदीप, प्लीज मेरे लिए एक चीज कर दो। मैं तुमसे वादा करती हूँ कि जब तक तुम्हारे परिवार को इंसाफ नहीं मिल जाता मैं यहाँ से हिलूँगी भी नहीं… संदीप एक वीडियो अपने पिता की बनाओ जिसमें वो कहें- हाँ, मुझ पर ऐसा बयान जारी करने का बहुत प्रेशर था कि मैं संतुष्ट हूँ। मैं जाँच चाहता हूँ क्योंकि हमारी बेटी मरी है और हमें न उसे देखने का मौका मिला और न उसके अंतिम संस्कार का।”

वह आगे कहती हैं, ”सिर्फ 5 मिनट लगेंगे। जल्दी से वीडियो बनाओ और सिर्फ़ मुझे भेज दो।” इस बातचीत में तनुश्री बार-बार संदीप को एसआईटी के ख़िलाफ़ भड़काती है। मगर, लड़की का भाई कहता है कि जाँच टीम सिर्फ़ उसे जरूरी सवाल कर रही थी और फिर वह चली गई।

बता दें कि इसके बाद और ऑडियो सामने आए थे। इनमें से एक में में एक अज्ञात व्यक्ति संदीप से बात कर रहा है। वह उससे कहता है, “अगर कोई भी तुम्हें कहीं भी लेकर जाता है, तो तुम्हें कहीं नहीं जाना है, अब प्रियंका गाँधी घर आएँगी। कोई कहता है कि तुम्हें हाथरस जाना है, यहाँ जाना है-वहाँ जाना है, तुम्हें कहीं नहीं जाना है। उन्हें (प्रियंका गाँधी को) बताना है- पुलिस प्रशासन दबाव बना रहा है। मीडिया को आने नहीं दे रहा। रिश्तेदारों को आने नहीं दे रहा । कहना है ये हमारे प्रोटेक्शन में लगा रखे हैं या ठाकुरों के प्रोटेक्शन में। ठीक है, ये सब उनको बताना है।”

दलितों को भड़काने की साजिश: हाथरस के बहाने बिहार चुनाव साधने चला विपक्ष, साथ में मीडिया गिरोह भी

सियासत की इस पिच का नाम है बिहार। प्रैक्टिस उत्तर प्रदेश के हाथरस में हो रही। मकसद है दो-दो बार आम चुनावों के पिच पर औंधे मुँह गिरे राहुल गाँधी और उत्तर प्रदेश में ढेर हुई उनकी बहन प्रियंका गाँधी को फिर से लॉन्च करना।

इसके लिए परिवार का वफादार मीडिया गिरोह फिल्डिंग में जुट गया है। ‘दलित प्रेम’ को गेंद बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उछाला जा रहा है, ताकि बीजेपी नीत एनडीए के हाथ से जीती हुई बाजी फिसल जाए।

ऐसा हम नहीं कह रहे। ये मीडिया गिरोह की हालिया रिपोर्टों से झलकता है। हम सिलसिलेवार तरीके से यह जानेंगे कि बिहार चुनाव से ठीक पहले हाथरस केस पर सियासी रोटी सेंकने की कोशिश कैसे हो रही है? सोशल मीडिया में अमेरिका के ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ की तर्ज पर ‘दलित लाइव्स मैटर’ ट्रेंड क्यों कराया जा रहा?

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉएड की मौत के बाद उक्त ट्रेंड चला था, जिसकी नक़ल कर हाथरस केस पर प्रोपेगेंडा फैलाने में की जा रही। विदेशी आन्दोलनों से नक़ल कर सुर्खियाँ बटोरने की ये कवायद जामिया में हुए प्रदर्शनों में भी दिखा था, जब आयशा और लदीदा को पेश किया गया था। दोनों ने हिजाब पहन सूडान की सलाहा की नक़ल कर दीवार पर खड़े होकर स्पीच दी थी।

अब यही कीड़ा बिहार चुनाव से पहले कुलबुलाने लगा है। वैसे तो ‘राहुल गाँधी हैज अराइव्ड’ और ‘राहुल इज बैक’ कर के तो हर साल कई लेखों के जरिए उन्हें लॉन्च किया जाता है। इसी क्रम में इस बार हाथरस को मुद्दा बनाया जा रहा है। ‘इंडिया टुडे’ में एक प्रकाशित खबर में राहुल-प्रियंका की तुलना इंदिरा गाँधी से की गई है, जिन्होंने 1977 में बिहार के बेल्ची में दलितों के नरसंहार के बाद वहाँ भाषण दिया था।

तो क्या ऐसे लेख लिखने वाले मानते हैं कि ये नेतागण सिर्फ वोट्स के लिए ऐसा कर रहे हैं और उन्हें पीड़ितों का दुःख-दर्द सुनने से कोई मतलब नहीं है? और क्या ये मीडिया संस्थान इस चीज का महिमामंडन भी कर रहे? राहुल का हाथरस जाने के क्रम में ‘सुर्खियाँ’ बनने और प्रियंका का वाल्मीकि मंदिर में प्रार्थना करने को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया जा रहा है। साथ ही बिहार में चुनावी नैरेटिव बदलने की बात कही गई है।

तो क्या मान लिया जाए कि ये सब बिहार चुनाव के लिए हो रहा है, पीड़ित परिवार के लिए नहीं? इससे राहुल व प्रियंका गाँधी का गुणगान करने वाले मीडिया संस्थानों को इसलिए कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि इससे बिहार में भाजपा के वोटरों के प्रभावित होने की संभावना है? ‘इंडिया टुडे’ को इस बात का भी अफ़सोस है कि रामविलास पासवान और जीतन राम माँझी जैसे दलित नेता राजग का हिस्सा क्यों हैं। स्पष्ट है, बिहार चुनाव को हाथरस के नाम पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

इसी तरह शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ ने भाजपा नेताओं के हवाले से दावा किया है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का हाथरस मामले में रवैया रहा है, इससे डर है कि बिहार में भाजपा पर प्रभाव पड़ सकता है। एक अनाम भाजपा नेता के हवाले से दावा किया गया है कि सीएम योगी ने तो तेज़ी से एक्शन लिया, लेकिन जिस तरह विपक्ष ने सक्रियता दिखाई है, बिहार में इस मामले को उठाए जाने से भाजपा को खतरा हो सकता है।

हालाँकि, गया के पूर्व सांसद और बिहार के महादलित नेता हरि माँझी को ऐसा नहीं लगता। उन्होंने तो राहुल गाँधी के हाथरस जाने के क्रम में गिरने और प्रियंका गाँधी के बयानों को एक्टिंग करार दिया। वो इन दोनों को ‘पप्पू-पिंकी’ कहते हैं। माँझी कहते हैं कि ‘दलितों पर अत्याचार सिर्फ़ भाजपा शासित राज्य में होता है, बाक़ी ग़ैर भाजपा शासित राज्य में पलकों पर बिठाकर रखते है’- ऐसा वामपंथी-कॉन्ग्रेसी और उनके दरबारी पत्रकारों का तर्क रहता है।

शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ ने भी हाथरस और बिहार चुनाव को जोड़ा

उनका आरोप है कि यही लोग ग़ैर-भाजपा शासित राज्य में दलितों पर हो रहे अत्याचार पर चुप रहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अख़बार की दो कतरनें शेयर कर के हाथरस पर हंगामा करने वालों को आड़े हाथों लिया। इसमें से एक में पिछले एक महीने में नाबालिगों के साथ हुई हैवानियत की 12 घटनाओं का जिक्र था और सभी आरोपित मुस्लिम थे। एक अन्य मेरठ की खबर थी, जहाँ एक सिनेमा हॉल के पास दलित लड़की से गैंगरेप की बात थी और आरोपित मुस्लिम थे।

‘इंडिया टुडे’ ने भी फैलाया ‘दलित लाइव्स मैटर’ का हौवा

गया से लगातार 10 वर्ष सांसद रह चुके हरि माँझी ने पूछा कि दलितों के ठेकेदार इन ख़बरों पर क्यूँ नहीं बोलते? मायावती से लेकर रावण, उदित राज तक सब चुप रहेंगे। उन्होंने कहा कि इन पर बोलने से इनका राजनीतिक करियर और खोखला सेक्युलरिज़म ख़तरे में आ जाएगा। बिहार चुनाव पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लोग अभी और खिसियाएँगे, क्योंकि आगामी बिहार चुनाव में उन्हें नील बटे सन्नाटा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि उन्हें सुनने में आया है एक दलित ठेकेदार पार्टी के प्रचार के लिए बिहार आए हुए हैं जो, कि कुछ दिन पहले भाजपा में थे। साथ ही तंज कसा कि वो जैसे ही कॉन्ग्रेस में गए, उनका हश्र क्या हुआ हम सभी जानते है। ज्ञात हो कि कॉन्ग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदित राज फ़िलहाल बिहार दौरे पर हैं। बिहार में लगे सारे ‘कल कारखानों’ और ‘विकास कार्यों’ का श्रेय कॉन्ग्रेस को देते फिर रहे हैं।

‘बिहार में डरे हुए हैं भाजपा के दलित नेता’: ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने फैलाया डर

बता दें कि बिहार के तीन बड़े दलित नेताओं का राजग के पाले में आना विपक्षी पार्टियों को अखर रहा है और इसके जरिए दलित मतों को भाजपा से तोड़ने की कोशिश के तहत ये सब किया जा रहा है। बिहार में दलित वोटरों की संख्या 16% है, जो किसी भी सीट पर हार-जीत का समीकरण तय करने में सक्षम है। लगभग इतनी ही संख्या मुस्लिम वोटरों की है और 12% यादव हैं। ऐसे में राजद-कॉन्ग्रेस अपने लिए 28% ‘माई’ वोटरों के अलावे दलितों का वोट भी काटना चाहती है।

‘मनी कण्ट्रोल’ ने भी बिहार में दलितों को लेकर हाथरस को जोड़ा

पहले बड़े नेता हैं रामविलास पासवान और अब उनके पुत्र चिराग पासवान भी राजनीति में अच्छी तरह सक्रिय हैं, जो आजकल लोजपा के सारे निर्णय ले रहे हैं। लोजपा के राजग में होने से बिहार में 5% पासवान वोटरों के लोजपा के साथ होने का भय इन दलों को सता रहा है, क्योंकि रामविलास इस वर्ग के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, जो कांशीराम और मायावती से भी 15 वर्ष पहले राजनीति में आए थे।

दूसरे तुरुप का इक्का हैं जीतन राम माँझी, जो बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और अपनी अलग पार्टी बना कर चुनावी मैदान में उतरते रहे हैं। चुनाव के ऐन वक़्त पर उन्हें अपने पाले में कर नीतीश कुमार ने महादलितों के वोट्स को साधने में मजबूती हासिल कर ली है। खासकर गया और जहानाबाद व उससे सटे जिलों में माँझी से चुनाव प्रचार करवाया जाएगा। वो अपने बयानों के कारण पहले से ही सुर्ख़ियों में रहते हैं।

बिहार में तीसरे जिस वाइल्ड कार्ड की एंट्री हुई है, वो हैं अशोक चौधरी। बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी को नीतीश कुमार ने जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष का बड़ा पद देकर एक बड़ा दाँव खेला है। कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक चौधरी राबड़ी मंत्रिमंडल का भी हिस्सा रहे हैं और उन्होंने प्रदेश में कॉन्ग्रेस को मजबूत करने के लिए काफी मेहनत की थी। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के नीचे अब वो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

ये तीन इक्के कॉन्ग्रेस-राजद के लिए परेशानी का सबब हैं और बिहार चुनाव से पहले ये लोग किसी ऐसे मुद्दे को उठाने की फ़िराक में थे, जिससे बिहार में दलितों को भड़काया जा सके। हाथरस के रूप में उन्हें ये मुद्दा मिला, वरना बलरामपुर में भी एक दलित समुदाय की लड़की का गैंगरेप हुआ और इनमें से कोई पूछने तक नहीं गया, क्योंकि आरोपित मुस्लिम हैं। हाथरस के नाम पर अब मीडिया भी माहौल बना रहा।

‘मनी कण्ट्रोल’ लिखता है कि चुनाव से पहले बिहार में हाथरस मुद्दे को लेकर आक्रोश है और बिहार के 243 में से उन 38 सीटों पर राजग को परेशानी हो सकती है, जो दलितों के लिए आरक्षित हैं। इसमें तेजस्वी यादव के बयान का जिक्र है, जिन्होंने भाजपा सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान पर तंज कसते हुए भाजपा को दलित-विरोधी और महिला-विरोधी पार्टी बताया। राजद के बाकी नेता भी यही राग अलाप रहे हैं।

इसी तरह ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ भी लिखता है कि बिहार में भाजपा के दलित नेता हाथरस मामले के उठने के बाद डरे हुए हैं। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान का बयान है, जिन्होंने कहा है कि पीएम मोदी ने सीएम योगी को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की बात कह के अपना काम कर दिया है। उनका कहना है कि हाथरस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और स्पष्ट है कि इसमें मीडिया ट्रायल चल रहा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि जब प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई करने को कहा है, तो हमें इंतजार करना चाहिए। उन्होंने इस मामले को सोशल मीडिया पर पोर्नोग्राफिक कंटेंट्स को भी जोड़ कर देखा और कहा कि सोशल मीडिया पर अनुशासन की त्वरित ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जाँच तो होनी चाहिए लेकिन मीडिया ट्रायल को टाला जा सकता था। एक अन्य दलित नेता का बयान लेकर डराने की कोशिश की गई है।

इसी तरह सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान को लेकर 2015 बिहार चुनाव में डर फैलाया गया था। ये हौवा फैलाया गया कि भाजपा आरक्षण ख़त्म कर देगी। साथ ही पूरे चुनाव में इसी को मुद्दा बनाया गया। उस समय भाजपा और जदयू का साथ नहीं था, और भाजपा को हार का मुँह देखना पड़ा। जैसे पिछले बार ‘आरक्षण ख़त्म होने’ की बात की गई, इस बार ‘भाजपा शासित राज्यों में दलित लड़की से कथित बलात्कार’ को भुनाने की कोशिश हो रही।

आगरा में वाल्मीकि समाज के लोगों ने हाथरस केस में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर किया पर पथराव, लाठीचार्ज

उत्तर प्रदेश के आगरा में हाथरस कांड को लेकर सफाई कर्मचारियों ने जमकर बवाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, अनिश्चित कालीन हड़ताल स्थगित करने के वाल्मीकि समाज के फैसले के विरोध में सफाई कर्मचारी सड़क पर उतर आए। नगर निगम अधिकारियों द्वारा कूड़ा उठाने वाले गाड़ियाँ निकलवाने के मामले ने उग्र रूप ले लिया।

एक तरफ पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार के दंगे फसाद को रोकने की पुरजोर कोशिश में लगी है वहीं वाल्मीकि समाज के लोगों ने आज विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर पथराव और लाठीचार्ज किया।

तनाव इस कदर बढ़ गया कि आगरा में मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात करना पड़ा। वहीं एसपी सिटी ने पथराव करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

बता दें यूपी में जगह-जगह हाथरस कांड को लेकर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे है। उसी कड़ी में आगरा में भी हाथरस मामले को लेकर सफाई कर्मचारियों ने जमकर प्रदर्शन किया। अनिश्चितकालीन हड़ताल स्थगित करने के वाल्मीकि समाज के फैसले के विरोध में सफाई कर्मचारी सड़क पर उतर आए। उसी दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया।

इस घटना पर एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद का कहना है कि पथराव करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। पथराव करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नजर रखी जा रही है।

हाथरस- तीन लीक ऑडियो क्लिप, दो वीडियो और नई बातें: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras Case leaked audio clips

एक ऑडियो क्लिप लीक हुआ है। इसमें इंडिया टुडे की एक पत्रकार हाथरस पीड़िता के भाई से कहती है, “संदीप, प्लीज मुझे अपने पिता का एक 5 मिनट का एक छोटा सा वीडियो दिलवा दो, जिसमें वो कह रहे हों कि प्रशासन ने उन पर झूठ बोलने के लिए दबाव डाला है।” इसके बाद दो और ऑडियो लीक हुआ। एक प्रियंका गाँधी की टीम के एक लड़के का है, जो पीड़िता के भाई को समझा रहा है कि प्रियंका के आने पर उसे क्या-क्या बोलना है।

तीसरे ऑडियो क्लिप में लड़के की एक जानकार उसे समझा रही है कि मोदी तुम्हें 25 के बदले 50 लाख दे, तो भी फैसला मत करना। वहीं लोगों का कहना है कि मीडिया को इस मामले में घुसने क्यों नहीं दिया जा रहा है। तो इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। एक वजह ये है कि प्रशासन नहीं चाहती हो कि इनके आने से मामला और बिगड़े और जिस तरह से मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है, उस पर रोक लग सके।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

ठहाके लगाते हुए हाथरस जाते राहुल-प्रियंका का वीडियो वायरल, महादलित नेता ने कहा- हमारी भावनाओं से मत खेलिए

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी कार से हाथरस जाते हुए दिख रहे हैं। हाथरस के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी इस वीडियो में ठहाके लगाते हुए दिख रहे हैं। ऐसे में लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि ऐसे वक़्त पर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी इस तरह संवेदनहीन होकर हँसी-मजाक करते हुए कैसे जा यात्रा कर सकते हैं?

शनिवार (अक्टूबर 3, 2020) की सुबह ही पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया था कि उन्हें हाथरस के पीड़ित परिवार से मिलने से दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती है। इससे पहले भी वो हाथरस जाने की कोशिश करते हुए पुलिस से झड़प के दौरान गिर पड़े थे, जिसे कई लोगों ने ‘नाटक’ करार दिया था। प्रियंका गाँधी भी इस दौरान खासी सक्रिय रही थी। अब हाथरस जाते हुए दोनों भाई-बहन हँसी-ठिठोली करते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि ये बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि हाथरस की बेटी के लिए ग़म और शोक मनाने निकले ‘भइया-बहना’ का असली चेहरा देख लीजिए, देखिए कि कैमरा देखते ही मातम मनाने वाले राहु़ल, प्रियंका गाड़ी में कैसे हँसी-ठहाके लगाते और मस्ती करते हाथरस आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दरअसल ये ख़ुशी यूपी में नफरत की आग फैलाने को लेकर है, हाथरस बहाना है, यूपी जलाना है।

वहीं गया के पूर्व-सांसद और महादलित नेता हरि माँझी ने तंज कसते हुए कहा, “दलित भाइयों-बहनों का दुःख बाँटने जा रहे हैं दोनों भाई-बहन। इनको इतना दुःख है कि ये लोग ठहाका लगाकर दुःख बाँटने हाथरस जा रहे हैं।आपको हक़ नहीं कि हम दलित हिंदुओं के भावनाओं के साथ खेलें।” साथ ही भाजपा नेता ने सलाह दी कि कभी राजस्थान भी हो लीजिए।

हम नहीं चाहते सीबीआई जाँच करे, नार्को टेस्ट भी नहीं देंगे: हाथरस केस में मृतका की माँ का बयान

हाथरस की घटना ने देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लोगों को आक्रोशित कर दिया है। मामले की तह तक जाने के लिए हर कोई गहन जाँच की माँग कर रहा है। हालाँकि पीड़ित परिवार ने मामले में सीबीआई जाँच और खुद के नार्को टेस्ट से साफ इनकार किया है।

आजतक की एक पत्रकार से बात करते हुए मृतका की माँ ने मामले की सीबीआई जाँच से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार सीबीआई जाँच नहीं चाहता है और इसके बजाय वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में एक टीम से जाँच चाहती है।

मृतका की माँ से जब पत्रकार ने पूछा कि क्या हाथरस मामले को देश की प्रमुख जाँच एजेंसी को ट्रांसफर किया जाना चाहिए? तो उन्होंने जवाब दिया, “नहीं, हम नहीं चाहते कि सीबीआई मामले की जाँच करे। हम चाहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में एक टीम इस मामले की जाँच करे।”

बता दें कि कल उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने इस केस से जुड़े सभी पक्षों का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने का फैसला किया था। लेकिन मृतका की माँ ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उनका परिवार नार्को टेस्ट से नहीं गुजरेगा।

मृतका की माँ के इनकार करने पर आजतक के रिपोर्टर ने दुखी माँ पर दबाव बनाते हुए इस बात पर जोर दिया कि नार्को टेस्ट से मामले के छिपे हुए तथ्यों का पता लगाया जाएगा, उसके बावजूद माँ ने जवाब दिया, “हमें नहीं पता कि नार्को टेस्ट क्या है और हम इसे नहीं कराना चाहते हैं।”

वहीं जब पीड़ित परिवार द्वारा दिए गए शुरुआती बयानों के बारे में माँ से पूछा गया, जिसमें उन्होंने सिर्फ हमले के बारे में पुष्टि की थी और यौन उत्पीड़न को लेकर कुछ नहीं कहा था, तो उन्होंने खुद का बचाव करते हुए कहा कि वह इस घटना से बहुत दुखी थी और घबराई हुई थी।

गौरतलब है कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस की कथित सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत हो गई थी। खबरों के अनुसार, उसके साथ दो सप्ताह पहले कथित तौर पर बलात्कार किया गया था। वहीं लोगों का गुस्सा तब और भड़क गया जब सोशल मीडिया पर यह भ्रामक चलाई गई कि हाथरस पुलिस ने परिवार के सदस्यों की सहमति के बिना लड़की का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। हालाँकि पुलिस ने बाद में खबरों को खरिज करते हुए कहा था कि दाह संस्कार के दौरान मृतका के पिता मौजूद थे।

एडीजी प्रशांत कुमार ने एएनआई से बात करते हुए बताया था कि फोरेंसिक रिपोर्ट मिल गई है और उसके मुताबिक़ लड़की के साथ बलात्कार की घटना नहीं हुई थी। पीड़िता के साथ किसी भी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ था। मौत का कारण गला दबाना और रीढ़ की हड्डी में लगी चोटें थीं।

पुलिस ने कहा था कि हमलावरों का विरोध करने के दौरान पीड़िता की जीभ कट गई थी और गला घोंटने की वजह से उसकी रीढ़ पर चोटें आई थी। पीड़िता ने बाद में पुलिस को बताया था कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था। हालाँकि, यूपी पुलिस ने कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी किसी भी चोट का जिक्र नहीं किया गया है, जिसमे बलात्कार या यौन उत्पीड़न का संकेत दिया गया हो।

वहीं हाथरस मामले में योगी सरकार ने प्राथमिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए हाथरस के एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का भी निर्देश दिया था।

उल्लेखनीय है कि यूपी प्रशासन ने मीडिया को अनुमति दे दी है कि वह पीड़ित परिवार वालों से मिलकर बात कर सकते हैं। एसडीएम ने कहा, “इस मामले में एसआईटी की जाँच पूरी हो चुकी है इसलिए मीडिया के लिए लगाई गई पाबंदी भी हटा दी गई है। फ़िलहाल उस इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लागू है, इसलिए एक समय पर 5 से अधिक मीडियाकर्मी मौजूद नहीं रह सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “अभी वहाँ सिर्फ मीडियाकर्मियों को जाने की अनुमति है। जब प्रतिनिधिमंडल के लिए हरी झंडी दिखाई जाएगी तब हम सभी को प्रवेश करने की अनुमति देंगे। इस तरह के जितने भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पीड़िता के परिवार वालों के फोन लिए जा चुके हैं या उन्हें घर में बंद करके रखा गया है, यह सभी आरोप बेबुनियाद है।” उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर इस तरह के आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने पीड़िता के परिवार वालों के फोन जब्त कर लिए हैं।

गलवान में बलिदान हुए भारत के 20 सैनिकों की याद में लद्दाख में बना वॉर मेमोरियल: चीनी सैनिकों को पहुँचाई थी भारी क्षति

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए 20 भारतीय सैनिकों के नाम हमेशा के लिए अमर हो गए हैं। पूर्वी लद्दाख में बलिदान हुए सैनिकों के लिए युद्ध स्मारक (War memorial) बनाया गया है, जिसमें 20 जवानों के नाम अंकित किए गए हैं।

वीरगति को प्राप्त हुए ये 20 सैनिक वे हैं, जिन्होंने भारतीय सीमा की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योच्छावर कर दिए। यह स्मारक KM-120 पोस्ट के पास यूनिट लेवल पर बनाया गया है। यह पोस्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी की स्ट्रेटजिक रोड पर स्थित है।

स्मारक पर लगाए गए ऑपरेशन डीटेल्स के अनुसार, “15 जून, 2020 को गलवान घाटी में 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी संतोष बाबू के नेतृत्व में क्विक रिएक्शन फोर्स का गठन किया गया और टुकड़ी को जनरल Y नाला से PLA सैनिकों को बेदखल कर पेट्रोलिंग पॉइंट 14 की तरफ बढ़ने का काम सौंपा।”

ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत वाई-जंक्शन क्षेत्र के पास ये सैनिक विरगति को प्राप्त हो गए थे। लद्दाख की गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत Y-जंक्शन के पास चीन की PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) को ऑब्जर्वेशन पोस्ट से हटाने के बाद भारत और चीन के बीच जो कुछ हुआ वह किसी छोटे युद्ध से कम नहीं था। भले इस लड़ाई में गोली-बम नहीं चले लेकिन फिर भी दोनों देशों ने अपने सैनिक गँवा दिए। हालाँकि, चीन ने अपने बलिदान सैनिकों को किसी प्रकार का सम्मान नहीं दिया।

बता दें भारत और चीन के बीच अप्रैल-मई से लद्दाख में तनातनी बनी हुई है। लद्दाख की गलवान घाटी में 15-16 जून की रात दोनों देशों के बीच की ये तनातनी हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए। चीन को भी इसमें अच्छा खासा नुकसान पहुँचा।

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच वार्ता का क्रम भी जारी है। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद पर हाल ही में एक और दौर की कूटनीतिक वार्ता की। दोनों देशों ने गलतफहमी को टालने तथा जमीन पर स्थिरता कायम रखने के लिए छठे दौर की सैन्य वार्ता में लिए गए फैसलों को क्रियान्वित करने पर जोर दिया।

हाथरस केस में नार्को टेस्ट रुकवाने हाई कोर्ट पहुँचा कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले

कॉन्ग्रेस के वफादार साकेत गोखले ने हाथरस केस से जुड़े लोगों के नार्को/पॉलीग्राफ टेस्ट पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया है। बता दें, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार (2 अक्टूबर 2020) को इस मामले के शिकायतकर्ता, आरोपितों और इससे जुड़े पुलिसकर्मियों के टेस्ट का ऑर्डर दिया था।

गोखले ने अपनी याचिका में अदालत से हाथरस मामले के पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया है।

साकेत गोखले द्वारा कोर्ट में दायर याचिका
साकेत गोखले द्वारा कोर्ट में दायर याचिका

कॉन्ग्रेस समर्थक गोखले के अनुसार नार्को टेस्ट एक तरह से पीड़ित परिवार के साथ जबरदस्ती करना है। इसका मकसद कोर्ट के समक्ष गवाही के वक्त उन्हें भयभीत करना है।ताकि परिवारवालों को न्यायालय के सामने गवाही के समय भयभीत किया जा सके। गोखले ने कहा कि यह “जबरदस्ती” न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है।दायर याचिका में कहा गया है, “पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट प्राकृतिक न्याय के सभी सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि उन पर कोई आरोप नहीं है। पीड़ित परिवार के साथ ऐसा करना एक तरह की जोर-जबरदस्ती है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई की तारीख 12 अक्टूबर तय की है। उम्मीद है कि इस दिन गवाही देने के पीड़ित परिवार अदालत में पेश होंगे।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले में निष्पक्ष और गहन जाँच को सुनिश्चित करने के लिए मामले में शामिल सभी लोगों पर नार्को टेस्ट कराने का फैसला किया था।

सीएम योगी ने कल ही ट्वीट कर कहा था कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं को किसी भी प्रकार की नुकसान पहुँचाने की सोच रखने वालों को किसी तरह बख्शा नहीं जाएगा।

वहीं हाथरस मामले में योगी सरकार ने प्राथमिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए हाथरस के एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का भी निर्देश दिया था।

उल्लेखनीय है कल हाथरस केस में कुछ ऑडियो भी लीक हुए थे। इनमें हुई बातचीत से पता चलता है कि राज्य में भाजपा सरकार को नीचा दिखाने के लिए राजनेता और मीडिया इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में हमने खुलासा किया था कि किस तरह इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडे द्वारा मृतका के भाई को झूठ और भावनात्मक ब्लैकमेल के साथ उकसाने का प्रयास किया गया था।

वहीं एक अन्य ऑडियो में एक अज्ञात व्यक्ति मृतका के भाई संदीप से बात कर रहा है। वह उनसे कह रहा है कि वो घर से कहीं न जाएँ, क्योंकि कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गाँधी उनके घर आने वाली हैं। इस बातचीत में व्यक्ति यह भी कहते सुना जा सकता है:

“अगर कोई भी तुम्हें कहीं भी लेकर जाता है, तो तुम्हें कहीं नहीं जाना है, अब प्रियंका गाँधी घर आएँगी। कोई कहता है कि तुम्हें हाथरस जाना है, यहाँ जाना है -वहाँ जाना है, तुम्हें कहीं नहीं जाना है। उन्हें (प्रियंका गाँधी को) बताना है- पुलिस प्रशासन दबाव बना रहा है। मीडिया को आने नहीं दे रहा। रिश्तेदारों को आने नहीं दे रहा । कहना है ये हमारे प्रोटेक्शन में लगा रखे हैं या ठाकुरों के प्रोटेक्शन में। ठीक है, ये सब उनको बताना है।”

बातचीत की शुरुआत में ही संदीप इस व्यक्ति को कहता है कि “एसआईटी उनके घर आई हुई और कोई ‘संजय भैया’, संदीप के पिता और दो अन्य लोग कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ उनके पास बैठे हैं। फिर वह आदमी संदीप से कहता है, “ठीक है, कहीं मत जाना। अब प्रियंका गाँधी आएँगी और उन्हें बताना कि तुम पर दबाव बनाया गया है और तुम इसका वीडियो बनाना चाहते हो।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब गोखले ने इस तरह की याचिका कोर्ट में दायर की है। इससे पहले भी गोखले ने राम मंदिर भूमिपूजन को रोकने के लिए कोर्ट का रुख लिया था। स्वघोषित पत्रकार साकेत गोखले की ओर से दाखिल PIL में कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कोरोना के अनलॉक-2 गाइडलाइन का उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि याचिका केवल आशंकाओं पर आधारित है, इसमें तथ्य नहीं हैं।

हाथरस कांड- राहुल-प्रियंका और बिहार चुनाव के लिए अखलाक की खोज: अजीत भारती का वीडियो | Rahul-Priyanka exploit Hathras Case

हाथरस केस हर बीतते घंटे और दिन के साथ नया रूप लेता जा रहा है। नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं। कुछ पत्रकार और नेता इसे वैसा ही बनाना चाहते हैं, जैसा कि इन्होंने ठीक 5 साल पहले 2015 के 28 सितंबर को अखलाक की लिंचिंग केस में किया था। 29 सितंबर से इस देश की जनता अचानक से अहिष्णु हो गई थी, क्योंकि आगे बिहार का चुनाव था।

सपा की सरकार थी, लेकिन दोष मढ़ा गया बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर। फिर जनवरी 2016 में रोहित वेमुला कांड होता है। इसके बाद असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में हुए चुनाव में अखलाक और रोहित वेमुला केस को लगातार भुनाया गया। हाथरस कांड में सामने आई मेडिकल और बॉडी स्टेटस में अब तक रेप की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन केस को हाथरस की ‘निर्भया’ बनाया जा रहा है। आप सोचिए, निर्भया कांड क्या था और इसमें तो अभी तक रेप की पुष्टि भी नहीं हुई है। 

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

बेगूसराय में बजरंग दल कार्यकर्ता की मॉब लिंचिंग की कोशिश, हथियारों के साथ 400 की मुस्लिम भीड़ ने घेरा

असहाय, बेबस और कथिततौर पर लव जिहाद का शिकार हुई पीड़िता की मदद करना, बिहार के बेगूसराय में बजरंग दल कार्यकर्ताओं को मॉब लिंचिंग की कगार पर लाकर खड़ा कर देगा, यह शुभम भारद्वाज, पंकज सिंह, विकास भारती ने कभी सोचा भी नहीं था। उनके पास तो बस कल (2 अक्टूबर 2020) सुबह-सुबह करीब 8:32 पर एक हिंदू महिला का फोन का आया और उसने बहुत घबराई आवाज में मदद माँगी।

पीड़िता ने कहा कि उसका पति आफताब आलम उसके साथ घर आकर बहुत मारपीट कर रहा है और उसे बस किसी तरह बचा लिया जाए। पीड़िता की बात सुनते ही 8-9 किमी दूर से प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज अपने सभी काम छोड़ कर नवाब चौक से थोड़ी दूर पोखरिया स्थित महिला के घर सुबह करीब 10 बजे पहुँचे। उनके साथ विभाग संयोजक पंकज सिंह और वीएचपी जिला मंत्री विकास भारती भी थे। 

महिला की स्थिति देखकर तीनों को आफताब पर बहुत गुस्सा आया। तीनों ने आफताब से मारपीट को लेकर सवाल करने शुरू किए। इसी बीच शुभम फेसबुक पर लाइव आ गए और दुनिया को उसका घिनौना चेहरा बताने लगे। लाइव खत्म हुए कुछ समय ही हुआ होगा कि उन्होंने देखा अचानक 300-400 लोगों की भीड़ घर के बाहर इकट्ठा हो गई। यह भीड़ समुदाय विशेष की थी। इनमें से कुछ के हाथ में पिस्टल थी। कुछ के हाथ में बकरा काटने का धारधार हथियार (छूरा) था। बार-बार यह लोग सिर्फ़ बजरंग दल के प्रदेश सह संयोजक शुभम भारद्वाज को अपने पास बुला रहे थे और कह रहे थे आज इसे खत्म कर देंगे।

घटना के बाद कार्यकर्ताओं की बैठक की तस्वीर

शुभम भारद्वाज इस पूरी घटना की बाबत दो बार फेसबुक लाइव आए। इसमें उन्होंने जानकारी दी कि उनकी हत्या करने की कोशिश चल रही है। सैंकड़ों लोगों की भीड़ घर के बाहर है और वह लोग किसी तरह गेट को मजबूती से बंद करके अपनी जान बचा रहे हैं।

शुभम भारद्वाज ने रेस्कयू के बाद कहा- नहीं देखी थी कभी ऐसी स्थिति

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी पाते ही शुभम भारद्वाज से बात करने का प्रयास किया। शुभम ने महादेव को धन्यवाद कहते हुए हमें बताया कि उन्हें कल के बाद बस जीवनदान मिला है। इससे पहले उन्होंने अपने जीवन में ऐसी स्थिति नहीं देखी थी। हर ओर मुस्लिम लोगों की भीड़ थी और आवाज आ रही थी कि शुभम को बस नीचे भेज दो। यह भीड़ इतनी उग्र थी कि इन्होंने लोहे का गेट तक तोड़ दिया था और कैसे भी करके अंदर आना चाह रही थी।

उन्होंने बताया कि घटना के समय उनके साथ पंकज सिंह, विकास भारती, महिला के पिता व 1-2 और लोग थे। सबने मिलकर गेट को धक्का देकर बंद किया हुआ था ताकि भीड़ अंदर न आ सके। मगर, उग्र भीड़ लगातार अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी और हथौड़े से गेट तोड़ रही थी। 

पीड़ित महिला की मदद करने पहुँचे शुभम और उनके साथियों को सारा माहौल देखकर मृत्यु बहुत करीब लग रही थी। मगर, फिर भी एक उम्मीद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों को दोबारा फोन किया और थोड़ी देर के लिए फेसबुक लाइव आकर बाकी लोगों को यह जानकारी दी कि नवाब चौक इलाके में रहने वाली बहुसंख्यक आबादी क्या करने की फिराक में है।

फेसबुक लाइव से लिया गया स्क्रीनशॉट

वह अनुमान लगाते हुए कहते हैं कि शायद आफताब आलम ने भीड़ को पहले ही बता रखा था कि वह जाकर अपनी पत्नी से मारपीट करेगा और पत्नी उनको बुलाएगी। इसके बाद यह सब होगा। वह बताते हैं कि सीएए एनसारसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसी नवाब चौक इलाके से खुलेआम उनकी मॉब लिंचिंग करने की धमकी दी गई थी और कल यह घटना भी हो गई।

मौत के मुँह से निकलने के बाद शुभम भारद्वाज (ग्रे टीशर्ट) और पंकज सिंह (पीली टीशर्ट)

वह कहते हैं कि बस महादेव ने उनकी सुरक्षा की और थाना प्रभारी अमरेंद्र झा मौके पर पहुँच गए। उन्होंने भीड़ को हटाकर घर में फँसे सभी लोगों का रेस्क्यू किया और आफताब को मौके से गिरफ्तार किया। घटना के बाद शुभम आज बुखार में तप रहे हैं। उनकी आँखों के सामने शायद वह भीड़ रह रह कर आ रही होगी। जिसे देख वह तो घबराए ही थे और उन लोगों के बीच में रहने वाली पीड़िता खुद बार-बार कह रही थी- “मार देगा भैया… अब क्या करें भैया..क्या करें।”

शुभम कहते हैं कि उनकी जान को खतरा देखकर पहले उनके पास सिक्योरिटी थी। मगर, एक वंचित समाज की महिला को न्याय दिलाने के लिए जब उन्होंने कुछ समय पहले आंदोलन किया तो उसके बाद उनसे वो सिक्योरिटी वापस ले ली गई। बाद में कई पत्र लिख कर प्रशासन से सुरक्षा वापस माँगी गई। मगर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वह कहते हैं चाहे कुछ भी हो जाए वह इस दिशा में अपना कर्तव्य पालन आगे भी करते रहेंगे।

भीड़ के हाथ में बकरा काटने वाला धारधार हथियार और पिस्टल थी: बजरंग दल विभाग संयोजक पंकज सिंह

इस घटना के समय शुभम के साथ घर में मौजूद बजरंग दल के विभाग संयोजक पंकज सिंह नवाब चौक को बेगूसराय में पाकिस्तान का कराची बताते हैं। वह कहते हैं कि सभी समुदाय विशेष के कई रसूख वाले लोग इस इलाके में रहते हैं और यह काफी संवेदनशील इलाका है। उनके मुताबिक, शुभम भारद्वाज ने उन्हें कॉल करके घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद वह और वीएचपी जिला मंत्री विकास भारती भी पीड़िता के घर पहुँचे। 

पंकज के अनुसार घटनास्थल पर पहुँचने से पहले ही उन लोगों ने पुलिस प्रशासन को जानकारी दे दी थी और पुलिस ने कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है, टीम पहुँच रही है। हालाँकि, कार्यकर्ताओं के पहुँचने के बाद भी पुलिस वहाँ नहीं आई थी। पंकज बताते हैं, जब शुभम लाइव आए और लोगों को आफताब के कुकर्म से अवगत कराने लगे, तभी भीड़ को उनके वहाँ होने की जानकारी हुई और सब हथियार लेकर इकट्ठा हो गए। उन लोगों ने जब घर पर देखा तो एकदम से चौंक गए। उन लोगों की यह सब पहले से प्लॉनिंग थी।

कार्यकर्ताओं के साथ विभाग संयोजक पंकज सिंह

सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों में शुभम भारद्वाज को मिली धमकियों का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, “मॉब लिंचिंग को लेकर धमकाना तो पहले से ही चल रहा था, पर कल जैसे ही फेसबुक लाइव देखा तो इन लोगों को मौका मिल गया। इन्हें लगा कि इनके इलाके में हम अकेले हैं, तो हमें घेर लिया गया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों के हाथ में बकरा काटने वाला धारधार हथियार था। पिस्टल थी। हमने घबराकर प्रशासन को फोन किया। यही लगा कि पिछले 2 घंटे में जब कोई पुलिस नहीं आई तो अब कैसे आएगी। इसलिए हमने अपने कार्यकर्ताओं को फोन किया और फेसबुक लाइव के कारण भी कई लोग मौके पर पहुँच गए। दूसरी ओर प्रशासन भी सकते में आ गया। नतीजन जो पुलिस दो घंटे में नहीं पहुँची, वो पुलिस पूरी फोर्स के साथ 7-8 मिनट में वहाँ थी।”

पंकज सिंह द्वारा साझा की गई जानकारी

वह कहते हैं, “इस बीच भीड़ भी लोहे का गेट तोड़ चुकी थी और ऊपर आकर कह रही थी कि आज यहाँ से बच कर कोई नहीं जाना चाहिए।” हालाँकि, इसी बीच पुलिस के पहुँच जाने से वह लोग तितर-बितर हुए और घर के अंदर फँसे सभी लोगों का रेस्क्यू किया। पुलिस ने उनसे कहा, ‘यह पति-पत्नी का मामला था। आप लोगों को इसमें नहीं पड़ना चाहिए था।’ पंकज पूछते हैं, “अगर कोई लव जिहाद की पीड़िता हमें मदद के लिए कहेगी तो हम क्या करेंगे? इंतजार करेंगे? हम वैसे भी पहले ही पुलिस को सूचना दे चुके थे।”

पंकज कहते हैं कि कल फेसबुक लाइव के माध्यम से सैंकड़ों लोग वहाँ नहीं आते और पुलिस समय से नहीं पहुँचती तो हम लोग जा चुके होते। बकौल पंकज, “कल पूरी रात वही भीड़ और उनकी आवाज सोते टाइम भी सामने आती रही। इतने साल संगठन में हो गए मगर ऐसा पहले कभी कुछ नहीं देखा था। कई लोगों को हमने बचाया है। मगर जैसे कल खुद को अकेले घिरा पाया, सब पहली बार था। अगर हम मॉब का वीडियो बनाते तो शायद दरवाजा तोड़ कर वो भीड़ हमें मार देती।”

कल हो जाती हम सबकी मॉब लिंचिंग: पीड़ित हिंदू महिला

इस घटना पर ऑपइंडिया ने पीड़िता से बात की। पीड़िता ने बताया कि कल की घटना के बाद कह सकते हैं कि उन्हें नई जिंदगी मिली है। अगर भीड़ अंदर घुस आती तो न शुभम भारद्वाज को छोड़ती, न उनको छोड़ती और न उनकी दोनों बच्चियों को बख्शती। सब मारे जाते। वह कहती हैं कि कल सुबग 7-8 बजे आफताब उनके घर के बाहर आकर गंदी-गंदी गालियाँ दे रहा था। उस समय उसके साथ उसका दोस्त भी था।

बाद में दोनों घर में आकर पीड़िता से मारपीट करने लगे। आफताब उनके सीने पर चढ़ कर उनका गला दबाने की कोशिश करने लगा और उसके दोस्त ने पिस्टल निकाल कर गोली चला देने की बात भी की। किसी तरह पीड़ित महिला ने खुद को बचाते हुए पुलिस को फोन किया। मगर जब पुलिस समय पर नहीं पहुँची, तब उन्होंने शुभम भारद्वाज से मदद माँगी। इसके बाद शुभम अपने साथियों के साथ वहाँ आए।

वह कहती हैं कि उन लोगों के आते ही बाहर माहौल गरमा गया। आवाज आने लगी, ‘शुभम बाहर निकल आज तुझे नहीं छोड़ेगें।’ वह लोग उन्हें पिस्टल दिखाने लगे। उन्होंने हालात बिगड़ता देख थाना प्रभारी को फोन किया और कहा, “सर प्लीज बचाइए। अब हम लोग नहीं बचेंगे।” इसके बाद वह लोग वहाँ पहुँचे जबकि पहली पुलिस की गाड़ी यह कहती रही कि घर ही नहीं मिल रहा।

बजरंग दल कार्यकर्ताओं की लिंचिंग के लिए इक्कट्ठा हुई उग्र भीड़ का उत्पात, लोहे का दरवाजा तक तोड़ डाला

हिंदू पीड़िता के अनुसार, समुदाय विशेष की भीड़ ने उनके घर के दरवाजे और लॉक आदि सब तोड़ दिए। उनकी पूरी प्लॉनिंग थी कि दरवाजा टूटेगा और वह अंदर के लोगों को मार देंगे। महिला कहती है कि भीड़ को देखकर आफताब की हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि वह बार बार कह रहा था ‘घुसो..घुसो अंदर घुसो…घर पर चढ़ जाओ…सबको मार दो।’ वह बताती हैं कि उनके घर के दरवाजों में दरारे आ गई हैं। वह टूट चुके हैं। इसके अलावा फिलहाल उन्होंने पुलिस द्वारा रेस्क्यू किए जाने के बाद थाने में केस दर्ज करवा दिया है और आफताब गिरफ्तार भी हो चुका है। उनका कहना है, “कल हम लोगों की मॉब लिंचिंग हो गई हो गई होती। वो क्षण वही था।” उनके अनुसार, उनकी बेटी को लग रहा था कि सब लोग पागल हो गए हैं। उसे मासूमियत में समझ नहीं आ रहा था कि अगर आज गेट टूट गया तो सब मार दिए जाएँगे।

घर के भीतर से भीड़ को उकसाने वाला आफताब

महिला ने हमले के बाद अपने घर की एक वीडियो भी हमसे साझा की है। इस वीडियो में लोहे का गेट टूटा हुआ साफ देखा जा सकता है। ईंट-पत्थर भी हर जगह पड़े नजर आ रहे हैं। घर की चीजें इधर-उधर बिखरी हुई हैं। लकड़ी के गेट पर पर हमले के निशान और दरारे भी वीडियो में स्पष्ट तौर पर नजर आ रही हैं।

क्या है आफताब आलम और हिंदू महिला का पूरा मामला?

कुछ दिन पहले बेगूसराय जिले के बजरंग दल प्रदेश सह संयोजक शुभम से पूजा (बदला हुआ नाम) नामक हिंदू महिला ने पत्र लिख कर मदद की गुहार लगाई थी। उसने अपने पत्र में बताया था कि उन्हें अपने पति आफताब से तलाक चाहिए। उन्होंने यह भी लिखा था कि शादी से पहले उन्हें नहीं पता था कि आफ़ताब को शराब की लत है, लेकिन धीरे-धीरे जब वह साथ रहने लगीं तो उन्हें यह सब पता चला।

बजरंग दल के पास आई शिकायत

महिला ने बताया था कि इसके बाद से उनका पति नशे में धुत होकर उन्हें मारता और गाली गलौच करता। इसलिए अब उन्हें अपनी जान का खतरा सताने लगा है और आगे वह आफताब के साथ नहीं रहना चाहतीं। मगर, उनका पति उन्हें तलाक देने से मना कर रहा है। पीड़िता ने बजरंग दल को ऐसे सबूत भी पेश किए थे जिनमें आरोपित के संबंध दूसरी औरतों से साफ देखे जा सकते हैं।

दूसरी महिला के साथ आफताब आलम

इस मामले के संज्ञान में आने के बाद से लगातार बजरंग दल सोशल मीडिया पर पीड़िता के साथ खड़े होने की बात कर रहा था। इस बाबत आफताब ने एक बार शुभम को कॉल भी किया, मगर उन्होंने उसे डाँट कर फोन रख दिया। इस बीच आफताब ने एक बार दोबारा आकर घर के नीचे जाकर पीड़िता से गाली गलौच की थी और शुक्रवार को उसे मारने के लिहाज से उस पर हमला बोल दिया।

पुलिस कार्रवाई

बता दें कि पुलिस ने शुक्रवार को हुई घटना पर मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नगर थाना अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार झा ने बताया कि आफताब आलम पर उनकी पत्नी जानलेवा हमला समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज करवाया है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी शहर में अपने घर में शराब पीकर हंगामा करने के आरोप में पुलिस ने कई शराब बोतलों के साथ आफताब आलम को गिरफ्तार किया था। 14 सितंबर को उसकी पत्नी ने कई संगीन धाराओं में उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया था।

नोट: महिला और आफताब के बीच का पूरा विवाद आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। ऑपइंडिया ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट की है।