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कोई सिख नहीं रहेगा यहाँ, नाम होगा गुलाम-ए-मुस्तफा: ननकाना साहिब में पत्थरबाजी, मारपीट पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे ज़ुल्म थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार (3 जनवरी) को सिखों के पवित्र धर्मस्थल ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाज़ी की, सिखों के साथ मारपीट की और उनके घरों में भी पत्थरबाज़ी की। मुस्लिम भीड़ का उत्पात इस क़दर बढ़ गया कि वहाँ भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी, लेकिन फिर भी हालात तनावपूर्ण ही बने रहे।

पिछले साल ज्ञानी भगवान सिंह की बेटी जगजीत कौर का अपहरण कर उसका धर्मातरण करवाने वाले मोहम्मद हसन के रिश्तेदार राणा मंसूर ने मुस्लिम भीड़ को उकसाया और ननकाना साहिब के गेट पर पत्थरबाज़ी की। इस घटना को अंजाम तब दिया गया, जब मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज अता कर अपने घर लौट रहे थे। ननकाना साहिब में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ननकाना साहिब के मुख्य बाजार में धरना भी दिया। धरने का नेतृत्व राणा मंसूर ने किया।

पाकिस्तान में सिखों के साथ हुई हिंसा पर भारत ने कड़ा रुख़ अख़्तियार किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “पवित्र गुरुद्वारा में अभद्रता करने वाले और अल्पसंख्यक सिख समुदाय के सदस्यों पर हमला करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार पवित्र ननकाना साहिब गुरुद्वारा की पवित्रता की रक्षा और संरक्षण के लिए सभी उपाय करने के आदेश दे।”

ट्विटर पर बीबीसी के पत्रकार रविंद्र सिंह रॉबिन ने इस घटना से जुड़े कई वीडियो पोस्ट किए। उनके द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में दंगाई यह कहते हुए नज़र आ रहे थे कि वे ननकाना साहिब में एक भी सिख को नहीं रहने देंगे और गुरुद्वारे का नाम बदलकर गुलाम-ए-मुस्तफा कर देंगे।

पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमले को लेकर के पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट करके पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने और साथ ही गुरुद्वारे में फँसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने की अपील की।

पाकिस्तान में गुरुद्वारा में हमले के बाद बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को आड़े हाथ लिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि पाकिस्तान में हमारे सिख भाइयों को धमकी दी जा रही है।

वहीं, दिल्ली के राजौरी गार्डन से विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्विटर पर हमले का वीडियो शेयर करते हुए पाकिस्तान के पीएम इमरान खान से तत्काल कार्रवाई की माँग की और लिखा कि ऐसे ही लोगों के कारण पाकिस्तान में सिखों हिन्दुओं की बेटियों का ज़बरन धर्म परिवर्तन हो रहा है! आपने अगर ननकाना साहिब की बेअदबी करने वाले लोगों पर आज एक्शन नहीं लिया तो दुनिया आपको कभी माफ़ नहीं करेगी।

अपने एक अन्य ट्वीट में सिरसा ने कहा कि गुरुद्वारे पर हमले के बाद पूरे पाकिस्तान में सिख समुदाय के बीच दहशत का माहौल है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “पाकिस्तान में मजहबी नफरत का आलम देखिए- ये उग्र भीड़ सिखों को पाकिस्तान से बाहर निकालने के नारे लगा रही है और चिल्ला चिल्लाकर कह रही है कि ननकाना साहब का नाम बदलकर गुलाम-ए-मुस्तफा रख देंगे।”

इनके अलावा, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे ज़ुल्म और ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हुए हमले को पाकिस्तान का असली चेहरा बताते हुए कॉन्ग्रेस पर तंज कसा।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने कहा कि वह सिखों को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने सिखों के ख़िलाफ़ की गई नफ़रत भरी बयानबाजी, पत्थरबाज़ी और नारेबाज़ी की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।

ननकाना साहेब गुरुद्वारे पर मुस्लिमों का हमला, कहा- कोई सिख नहीं रहेगा यहाँ, नाम होगा गुलाम-ए-मुस्तफा

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पाक ने फिर की भारत को बदनाम करने की साजिश: इमरान ने पोस्‍ट किया फर्जी वीडियो, फजीहत के बाद किया डिलीट

भारत के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की मुहिम में पाकिस्तान हर सीमा लाँघने में लगा हुआ है। पाकिस्‍तान एक बार फिर अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भारत को बदनाम करने के चक्‍कर में खुद की फजीहत करा बैठा है। इस बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी ने बांग्लादेश का एक वीडियो जारी किया और इसे भारत का बताया। इस वीडियो में उत्तर प्रदेश पुलिस को मुस्लिम युवकों की पिटाई करते हुए दिखाया गया था। भारत की ओर से झूठे वीडियो को लेकर इमरान खान नियाजी को माकूल जवाब दिया गया। सोशल मीडिया साइट पर भी ट्रोल हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री लेकिन पाकिस्तान के लिए इसमें कोई नई बात नहीं है। बस अंतर इतना है कि उनके मंत्री तो ऐसा करते ही थे लेकिन अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी खुलकर ख़ुद फेक न्यूज फैला रहे हैं। वैसे पहले भी इमरान खान ऐसा कर चुके हैं।

कहा जा रहा है कि ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर भीड़ के हमले की घटना से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए इमरान खान ने शुक्रवार (3 जनवरी) की रात को एक के बाद एक कई वीडियो ट्वीट कर ‘भारत में मुस्लिमों पर पुलिस के अत्याचार’ का झूठा दावा किया।

जिस समय ननकाना साहिब में कट्टरपंथियों की भीड़ सिखों को शहर से भगाने की धमकी दे रही थी, उसी वक्त इमरान खान भारत में संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन का हवाला देते हुए ट्विटर पर फेक न्यूज फैला रहे थे। ऐसे ही एक ट्वीट में इमरान खान ने बांग्लादेश का वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि भारतीय पुलिस यूपी में मुस्लिमों पर बर्बरता कर रही है।

वीडियो में इमरान जिन्हें यूपी पुलिस के जवान के तौर पर बता रहे थे, जबकि सच्चाई यह है कि उनकी वर्दी पर बड़े-बड़े अक्षरों में साफ-साफ RAB लिखा हुआ था। RAB यानी रैपिड ऐक्शन बटैलियन जो कि बांग्लादेश पुलिस की ऐंटी-टेररिज्म यूनिट है। इमरान ने जिस वीडियो को ट्वीट किया, वही वीडियो यू-ट्यूब पर 10 सितंबर 2013 को अपलोड किया गया था। वीडियो बांग्लादेश का है। वीडियो के बारे में दावा किया गया है कि हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम रैली पर बांग्लादेशी पुलिस ने बर्बरता की है।

बांग्लादेश के लगभग 7 साल पुराने वीडियो को ट्वीट कर इमरान ने दावा किया कि भारतीय पुलिस मुस्लिमों पर अत्याचार कर रही है। वहीं, यूपी पुलिस ने भी साफ़ कर दिया है कि ये वीडियो फर्जी हैं और उनकी ओर से इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बुरी तरह ट्रोल होने के बाद इमरान ने ये वीडियो हटा लिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी इमरान खान को लताड़ लगाते हुए हुए कहा कि पाकिस्तान की झूठ फ़ैलाने की पुरानी आदत है बड़ी मुश्किल से जाती है।

बता दें कि शुक्रवार (3 जनवरी) को सौ से ज्यादा मुस्लिमों की आक्रोशित भीड़ ने गुरुद्वारे को घेरकर उस पर पत्थरबाज़ी की। ट्विटर पर बीबीसी के पत्रकार रविंद्र सिंह रॉबिन ने इस घटना की वीडियो अपलोड किया। अपने ट्वीट में जानकारी देते हुए रॉबिन ने बताया था कि वीडियो में नजर आ रही मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व सिख लड़की जगजीत कौर का अपहरण कर उसे इस्लाम क़बूल करवाने वाले मोहम्मद हसन के परिजनों ने किया था। उनके ट्वीट्स के मुताबिक़ इस हमले के कारण ननकाना साहिब में करीब 30 सिख फँसे हुए थे। दरअसल, पिछले साल जिस जगजीत कौर का जबरन धर्मांतरण हुआ था, वह ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ही ग्रंथी की बेटी हैं।

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कॉन्ग्रेस से गठबंधन के चलते CM उद्धव के पास वीर सावरकर के लिए समय नहीं, रंजीत सावरकर लौटे खाली हाथ

कॉन्ग्रेस सेवादल द्वारा वीर सावरकर पर विवादित बुकलेट का मुद्दा गर्माने के बाद सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने इस पर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने माँग की है कि इस मामले के संबंध में राहुल गाँधी समेत कॉन्ग्रेस के कई लोगों पर मामला दर्ज होना चाहिए।

एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “सावरकर जी पर लगाए आरोपों के मामले में राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस सेवा दल समेत कई लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज होना चाहिए।”

गौरतलब है कि शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में गठबंधन की सहयोगी पार्टी कॉन्ग्रेस द्वारा की गई सावरकर पर ओछी हरकत के खिलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए रंजीत सावरकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलने पहुँचे थे। लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें एक मिनट बात करने का समय तक भी नहीं दिया।

मीडिया से बात करते हुए रंजीत सावरकर ने कहा,“मैं यहाँ मुख्यमंत्री से मिलने आया। मैंने उनसे मिलने हेतु अपॉइंटमेंट के लिए कई गुजारिश की। लेकिन मैं उनसे नहीं मिल सका। सावरकर जी की इज्जत का मामला होने के बाद भी उनके (मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे) पास मुझसे बात करने के लिए एक मिनट का समय नहीं हैं। मैं बहुत आहत हूँ। ये सावरकर जी का अपमान है। “

उल्लेखनीय है कि वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने इस विवादित पुस्तिका पर रोक लगाने की माँग की है। साथ ही रंजीत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अपील की है कि वह राज्य में इस किताब पर बैन लगा दें। रंजीत सावरकर ने अपील की है कि इस मामले में सेक्शन 120, 500, 503, 504, 505 और 506 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे को भी इस मामले में दखल देना चाहिए और एक्शन लिया जाना चाहिए। रंजीत सावरकर ने कहा कि मध्य प्रदेश में ऐसी किताबें कॉन्ग्रेस ही बाँट रही है, उनकी ओर से सावरकर को बदनाम करने का लगातार इस तरह का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में शिवसेना को कॉन्ग्रेस के सामने आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।

ननकाना साहेब गुरुद्वारे पर मुस्लिमों का हमला, कहा- कोई सिख नहीं रहेगा यहाँ, नाम होगा गुलाम-ए-मुस्तफा

पाकिस्तान से एक बार फिर अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थल को निशाना बनाने की खबर आ रही है। मामला ननकाना साहेब गुरुद्वारे का है। जहाँ आज यानी शुक्रवार को सौ से ज्यादा मुस्लिमों की आक्रोशित भीड़ गुरुद्वारे को घेरकर उसपर पत्थरबाजी कर रही है। ट्विटर पर बीबीसी के पत्रकार रविंद्र सिंह रॉबिन ने इस घटना की वीडियो डाली है। वे लगातार इस मामले पर जानकारी दे रहे हैं।

अपने ट्वीट में जानकारी देते हुए रॉबिन ने बताया कि वीडियो में नजर आ रही मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व सिख लड़की जगजीत कौर का अपहरण कर उसे इस्लाम कबूल करवाने वाले मोहम्मद हसन के परिजनों ने किया है। उनके ट्विट्स के मुताबिक इस हमले के कारण ननकाना साहिब में करीब 30 सिख फँसे हुए हैं।

गौरतलब है कि ट्विटर पर पत्रकार ने इस संबंध में मुस्लिम भीड़ की एक वी़डियो भी जारी की है। जिसमें दंगाई कहते नजर आ रहे हैं कि वे ननकाना साहिब में एक भी सिख को नहीं रहने देंगे और गुरुद्वारे का नाम बदलकर गुलाम-ए-मुस्तफा कर देंगे।

बता दें, पत्रकार द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि ननकाना साहिब में मुस्लिम भीड़ कितनी उग्र है। जिसमें एक मुस्लिम युवक सिख लड़की (जगजीत कौर) का अपहरण कर उसे इस्लाम कबूल करवाकर निकाह करने के मामले पर खुलेआम बातें कर रहा है और बाकी मुस्लिम पीछे उसके नारे लगा रहे हैं।

इनका आरोप है कि ‘अपनी मर्जी से इस्लाम कबूलने’ और ‘शादी करने वाली’ लड़कियों को लेकर सिख समुदाय बेवजह हंगामा खड़ा करता है। बता दें कि पिछले साल जिस जगजीत कौर का जबरन धर्मांतरण हुआ था, वह ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ही ग्रंथी की बेटी हैं।

ताजा जानकारी के अनुसार इस उग्र भीड़ ने शाम होते-होते भी ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेर रखा है। वहीं, पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोग बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर अंदर छिपे हुए हैं।

अगवा सिख लड़की पहुँची घर, हाफ़िज़ सईद के आतंकी संगठन के मो. हसन से करवाया गया था निकाह

शिवसेना के आदित्य ठाकरे करेंगे ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ उमर खालिद के साथ CAA-NRC विरोधी आयोजन में शिरकत

हिंदूहृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे ने शिवसेना की नींव हिंदुत्व के आधार पर रखी थी। लेकिन आज कुर्सी के लोभ में कॉन्ग्रेस-एनसीपी से गठबंधन कर न केवल पार्टी और उसके नेता उस बिंदु से भटक गए। बल्कि बालासाहेब का खुद का पोता आदित्य ठाकरे भी राजनीति करते-करते, टुकड़े-टुकड़े गैंग के उमर खालिद जैसे कई सदस्यों के साथ मंच साझा करने के लिए तैयार हो गया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर छात्र भारती विद्यार्थी संगठन द्वारा आय़ोजित किए जाने वाले कार्यक्रम का एक पोस्टर सामने आया है। जिसके ऊपर CAA, NRC विरोधी छात्र परिषद लिखा हुआ है। और नीचे पोस्टर में उमर खालिद, ऋचा सिंह, AMUSU अध्यक्ष सलमान इम्तियाज, जावेद अख्तर, जामिया छात्र नेता हम्मादुररहमान, सादिया शेख जैसे लोगों के साथ शिवसेना से आदित्य ठाकरे का नाम भी शामिल है।

हालाँकि, इस सूची में टुकड़े-टुकड़े गैंग का मुख्य चेहरा रहे उमर खालिद के अलावा AMUSU अध्यक्ष सलमान इम्तियाज, जावेद अख्तर, जामिया छात्र नेता हम्मादुररहमान का नाम हैरानी की बात नहीं है। क्योंकि इनमें जावेद अख्तर जैसे लोग वो चेहरा हैं जो अफजल गुरु की दया याचिका तक पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। लेकिन यहाँ पर आदित्य ठाकरे की उपस्थिति किसी अचंभे से कम नहीं है।

आदित्य ठाकरे एक ऐसे शख्स के पोते हैं। जिन्होंने अपना पूरा जीवन हिंदुत्व के नाम पर जिया और हमेशा कट्टर हिंदू के रूप में पहचाने जाते रहे। मगर, अब उनकी गैर-उपस्थिति में उनकी पार्टी, उनका बेटा और उनका पोता सब उनके दिखाए रास्ते से भटक गए हैं। जो खुद को सेकुलर दिखाने के लिए वामपंथियों द्वारा आयोजित मंच को देश विरोधी नारे लगाने वालों के साथ साझा करने को तैयार हैं।

छात्र भारती का फेसबुक पोस्ट

याद दिला दें, अभी बीते अक्टूबर में विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने सत्ता पाने के लिए लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को भाजपा के साथ तोड़ लिया था और एनसीपी-कॉन्ग्रेस के साथ गठजोड़ किया था। शिवसेना के इस कदम को मतदाताओं को दिए धोखे के रूप में परखा गया था।

मगर, शिवसेना द्वारा सरकार बनाने के बाद उम्मीद की गई थी कि जिस तरह पार्टी ने भाजपा को धोखा दिया, वे उस तरह हिंदुत्व यानी पार्टी की विचारधारा के साथ बेईमानी न करें। लेकिन अब आदित्य ठाकरे के ऐसे समारोह में शामिल होने की खबर देखकर लग रहा है कि शिवसेना अपनी मूल विचारधारा पर भी पानी फेरने को तैयार है।

बता दें छात्र भारती द्वारा करवाया जा रहा ये कार्यक्रम यशवंत राव चवन सेंटर में 5 जनवरी को मुंबई में आयोजित होगा। जिसमें अलग-अलग संगठन और संस्थान से आए मुस्लिम युवा नेताओं के साथ वामपंथी लोग शामिल होंगे। पोस्टर में प्रकाशित जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम को एसएफआई जैसे वामपंथी संगठनों का सहयोग प्राप्त हैं।

मवाना में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम उपद्रवियों ने फिर लगाए ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे, प्रशासन मुस्तैद

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ हिंसक हुए विरोध-प्रदर्शनों को शांत कराने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस तंत्र मुस्तैदी के साथ जुटा हुआ है। इस तरह की ख़बरें भी सामने आईं जिसमें जगह-जगह होने वाले विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर उपद्रवी पुलिसकर्मियों की जान लेने तक पर उतारू रहे। 

इस बीच, मेरठ के मवाना में पुलिस ने थोड़ी सी ढील क्या छोड़ी कि कुछ दंगाई मोहल्ला तिहाई स्थित मस्जिद के बाहर नमाज के बाद सड़क पर उतर आए। इसके बाद उन्होंने विरोध के नाम पर ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इससे पहले कि माहौल बिगड़ता घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम ऋषिराज, सीओ यूएम मिश्रा पुलिस दल-बल के साथ घटना-स्थल पर पहुँचे। पुलिस के आते ही सभी उपद्रवियों ने अपने घरों और गलियों में घुसना शुरू कर दिया और ग़ायब हो गए।   

वहीं, एडीजी प्रशांत कुमार (मेरठ) ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाने की ख़बरों पर कहा, “एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है और बाक़ी लोगों को भी गिरफ़्तार किया जाएगा। किसी को भी राष्ट्र-विरोधी कार्य करने की छूट नहीं दी जाएगी।”

इससे पहले, उत्तर प्रदेश में मेरठ के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का एक वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति तेज़ हो गई थी। जहाँ, एक तरफ प्रियंका गाँधी ने उस वीडियो को ट्वीट करते हुए सवाल खड़ा किया, तो वहीं दूसरी तरफ़ एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने कहा था कि उन्होंने पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने वाले उपद्रवियों को वहाँ से भगाया था।

इस मामले पर एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि पुलिसकर्मियों की तरफ़ से कोई गोलीबारी नहीं हुई थी। उन्होंने एसपी का बचाव करते हुए कहा था कि वायरल हुआ वीडियो बीते 20 दिसंबर को मेरठ शहर में हुए उपद्रव के बाद का है। उन्होंने बताया कि इसमें तथ्य यह है कि वहाँ भारत-विरोधी और पड़ोसी देश पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे और कुछ लोग पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के आपत्त्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे।

इसके बाद, इसी मामले पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था, “उन्‍होंने (एसपी ने) सभी मुस्लिमों के बारे में यह नहीं कहा था। जो लोग पत्‍थरबाजी के दौरान पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उन्‍हें कहा था। जो लोग इस तरह की गतिविधि में शामिल हैं, उनके लिए एसपी सिटी का बयान ग़लत नहीं है।”

दरअसल, सोशल मीडिया पर 20 दिसंबर का एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह हिंसा के दौरान गली के अंदर भाग रहे कुछ उपद्रवियों से कहा था कि जहाँ जाओगे, चले जाओ। हम ठीक कर देंगे। काली पट्टी बाँधकर विरोध जता रहे हो, खाओगे यहाँ और गाओगे वहाँ का। एसपी का ये बयान वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने दावा किया था कि कुछ उपद्रवियों ने काली पट्टी बाँधकर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।

वे देश विरोधी नारे लगा रहे थे, आपत्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे: ‘पाकिस्तान चले जाओ’ पर ADG

‘…जो पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उनके लिए था मेरठ SP का बयान, यह ग़लत नहीं’

UP पुलिस को गुमराह कर रहे मुसलमान, दंगाइयों को सुपुर्द करने का वादा भी नहीं किया पूरा

दिल्ली में हुई हिंसा में 15 से ज्यादा बांग्लादेशी भी थे शामिल, शिकंजा कसने की तैयारी में SIT

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन्स (NRC) के विरोध के नाम पर दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर SIT ने बड़ा खुलासा किया है। एसआईटी के अनुसार हिंसा में 15 से ज्यादा बांग्लादेशी शामिल थे। ये गैर कानूनी तरीके से सीमापुरी इलाके में छिपकर रह रहे थे। इन बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर ली गई है। इनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। SIT ने कहा है कि जल्द ही ये लोग पुलिस हिरासत में होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली दंगों की जाँच में जुटी एसआईटी टीम ने अपनी पड़ताल के बाद खुलासा करते हुए बताया कि सीमापुरी इलाके में शुक्रवार (20 दिसम्बर 2019) को जुमे की नमाज के बाद भड़के दंगों में उपद्रवियों की भीड़ में करीब 15 से ज्यादा बांग्लादेशी शामिल थे।

इस मामले की जाँच क्राइम ब्रांच की SIT कर रह है। टीम तिहाड़ जेल जाकर दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार करीब 55 आरोपितों से भी पूछताछ करेगी।

एसआईटी ने दावा किया है कि दिल्ली दंगों में इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के करीब 15 कार्यकताओं के भी नाम सामने आए हैं, जिनसे जल्द पूछताछ हो सकती है। फिलहाल, इन लोगों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है ताकि दिल्ली दंगों के वक्त इन लोगों की लोकेशन को ट्रेस किया जा सके। यहाँ बता दें, कहा जा रहा है कि एसआईटी को पूरी जाँच में फंडिग और लॉजिस्टिक स्पोर्ट के भी कुछ सुराग हाथ लगे हैं। जिनका खुलासा जाँच टीम जल्द करेगी।

उल्लेखनीय है कि यूपी के विभिन्न शहरों में हुई हिंसा में भी PFI की संलिप्तता उजागर हुई है। यूपी के डीजपी ओपी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि हालिया हिंसा में इस कट्टरपंथी समूह के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी थी। इस समूह के 25 सदस्य अब तक गिरफ्तार किए गए है। उन्होंने बताया कि इनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से की गई है।

CAA विरोध के नाम पर अब बंगाल को जलाएगा PFI, ममता के सांसद अबू ताहिर भी होंगे साथ!

PFI के 150 कट्टरपंथी इस्लामी अलग-अलग राज्यों से जब आते हैं दिल्ली तो होता है जामिया दंगा: DP का खुलासा

UP में हुए बवाल में सामने आया केरल के कट्टरपंथी संगठन PFI का हाथ: नदीम, वसीम,अश्फाक गिरफ्तार

जमात-ए-इस्लामी के प्रोग्राम को शिवसेना का साथ: CAA के विरोध में संजय राउत ‘हिंदू-विरोधी’ कोलसे के साथ होंगे शामिल

देश के अलग-अलग राज्यों में इस्लामिक संगठनों द्वारा सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस कड़ी में जमात-ए-इस्लामी ने भी शिवसेना की सहायता से मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया है। जिसमें पार्टी के दिग्गज नेता संजय राउत खुद शिरकत करेंगे।

यहाँ एनसीपी-कॉन्ग्रेस के साथ गठजोड़ कर सरकार बनाने के बाद दिलचस्प चीज़ ये देखने को मिल रही है कि हिंदुत्व की बुनियाद पर पहचान बनाने वाली पार्टी के दिग्गज नेता, इस समारोह में हिंदू विरोधी विचार रखने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश बीजी कोलसे के साथ दिखाई देंगे। इनके अलावा वरिष्ठ वकील मिहीर देसाई और यूसुफ मुछाला भी अपनी बात रखेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुंबई अध्यक्ष ने खुद बताया कि शिवसेना नेता संजय राउत ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है और कहा है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आएँगे।

बता दें, सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर जमात-ए-इस्लामी हिंद मुंबई, मराठी पत्रकार संघ और एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) के संयुक्त कार्यक्रम मुंबई वीटी स्टेशन के नजदीक पत्रकार भवन में शनिवार शाम को रखा गया है। हालाँकि, इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे शिवसेना नेता संजय राउत पर सबकी निगाहें होंगी, लेकिन रिटॉयर्ड जज कोलसे के बयान पर भी सुर्खियाँ बनने की पूरी संभावना है।

रिटॉयर्ड जज कोलसे पाटिल के बारे में बता दें कि कोलसे मीटू आंदोलन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपित हैं। जिनपर आरोप है कि एक महिला उनका साक्षात्कार लेने उनके घर गईं थी। जहाँ उन्होंने इंटरव्यू खत्म होने के बाद महिला से पूछा था कि उसके कुर्ते के ऊपर का बटन क्यों खुला हैं और कहा था कि उसे लगता है वे दोनों दोस्त बन सकते हैं।

इतना ही नहीं, कोलसे को पिछले साल महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगाँव दंगों के लिए भी एक आयोजक बताया जाता है। साथ ही उन्हें हिंदू विरोधी और जातिगत भाषण देने के लिए भी पहचाना जाता है। साल 2016 में उन्होंने अपनी एक स्पीच में आरएसएस पर खुलेआम ‘हिंदू आतंकवाद’ फैलाने का आरोप लगाया था। वहीं दूसरी स्पीच में उन्होंने कहा था कि आरएसएस भारत की सबसे बड़ी दुश्मन है। इसलिए सबकों मिलकर इस जहरीली विचारधारा से वैचारिक स्तर पर लड़ना चाहिए।

यहाँ बता दें कि शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल पर लोकसभा में समर्थन किया था, लेकिन राज्यसभा में मतदान के दौरान वाकआउट कर गई थी। वहीं, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि महाराष्ट्र में एनआरसी को लागू नहीं किया जाएगा और साथ ही सीएए पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही निर्णय लेने की बात कही थी। संजय राउत लगातार सीएए और एनआरसी के खिलाफ मोदी सरकार पर हमलावर हैं।

मेरठ में दंगाइयों ने की थी 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश: पुलिस ने जारी किए वीडियो

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर गुंडई हो रही है। जान लेने पर उतारू उन्मादी भीड़ को देखकर यह किसी भी तरह से नहीं लगता कि यह कोई विरोध-प्रदर्शन है। विरोध में शामिल इन लोगों को दंगाई न कहा जाए तो भला और क्या कहा जाए। इस उग्र भीड़ के इरादे इतने ख़ौफ़नाक हैं कि इसका अंदाज़ा लगाना लगभग असंभव ही है। 

दरअसल, मेरठ पुलिस ने दंगाइयो के सिर पर ख़ून सवार होने से जुड़े दो ऐसे वीडियो जारी किए हैं, जिसमें यह साफ़तौर पर देखा जा सकता है कि वो किस तरह से दंगे के दौरान 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश में थे। इन वीडियो को देखकर आप ख़ुद इस बात का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के नाम पर दंगाई किस तरह से अपने ख़ौफ़नाक इरादों को अंजाम देने की फ़िराक में था, लेकिन वक़्त रहते उन्हें अपने इरादों में क़ामयाब होने से रोक लिया गया और सभी पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

ख़बर के अनुसार, एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि घटना थाना लिसाड़ी की है, जब 20 दिसंबर (शुक्रवार) को जुमे की नमाज के लिए पुलिस और आरएएफ की ड्यूटी लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि क़रीब 30 पुलिसकर्मी एक दुकान में बैठे हुए थे, तभी एक षणयंत्र के तहत उपद्रवियों ने उन्हें इस दुकान के अंदर बंद कर दिया और फिर उन्हें ज़िंदा जलाने के मक़सद से दुकान को आग लगा दी।

दरअसल, 20 दिसंबर के दंगे की इस घटना की सूचना जब एसएसपी को लगी थी तो वो बिना देरी किए अपनी फ़ोर्स के साथ घटना-स्थल पर पहुँचे। वहाँ उपद्रवियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, इसी गोलीबारी में आरएएफ के दो जवान उपद्रवियों की गोली का निशाना बन गए। कड़ी मशक्कत के बाद दुकान के अंदर बंद पुलिस की टीम को आग से बचाया जा सका। इस गंभीर मामले पर मुक़दमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है। बता दें कि इस मामले में पुलिस ने 13 मुकदमें दर्ज कर क़रीब 148 उपद्रवियों को नामजद किया और 500 से अधिक लोग अज्ञात हैं। पुलिस ने दंगे में शामिल उपद्रवियों की फोटो और वीडियो के आधार पर उनकी पहचान की है। साथ ही दंगाइयों के पोस्टर्स भी शहर भर में लगाए गए हैं।

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राहुल बाबा कानून नहीं पढ़ा तो इटैलियन में अनुवाद कर भेज दूँ: अमित शाह ने CAA पर दी बहस की चुनौती

केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को राजस्थान के जोधपुर में रैली की। इस दौरान नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने को लेकर कॉन्ग्रेस पर तीखे हमले किए। उन्होंने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को इस मसले पर कहीं भी बहस करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा, “राहुल बाबा कानून पढ़ा है तो कहीं पर भी चर्चा करने के लिए आ जाइए। नहीं पढ़ा है तो मैं इटैलियन में इसका अनुवाद करके भेज देता हूँ। उसे पढ़ लीजिए।”

शाह ने कॉन्ग्रेस पर वोट बैंक के लिए सीएए लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस कानून के समर्थन में भाजपा को जनजागरण अभियान की शुरुआत करनी पड़ी। शाह ने कहा कि विपक्ष चाहे जितनी अफवाहें फैला लें कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि सभी दल भी साथ आ जाएँ तो भी भाजपा सीएए पर एक इंच पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग देश को गुमराह कर रहे हैं कि इससे भारत के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। मैं सबको आश्वस्त करना चाहता हूॅं ये क़ानून नागरिकता देने का है। किसी की नागरिकता छीनने का नहीं।

शाह ने कहा कि वोट बैंक के लिए कॉन्ग्रेस वीर सावरकर जैसी महान शख्सियत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है। कॉन्ग्रेसियों को इसके लिए शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा, “वीर सावरकर जैसे इस देश के महान सपूत और बलिदानी का भी कॉन्ग्रेस पार्टी विरोध कर रही है। कॉन्ग्रेसियों शर्म करो। वोट बैंक के लालच की भी हद होती है।”

कोटा के जेके लोन अस्पताल में नवजातों की मौत को लेकर उन्होंने प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा। कहा कि सीएए का विरोध करने की बजाए वह इस मसले पर ध्यान केंद्रित करें। शाह ने कहा, “गहलोत साहब, हमने तो आपके घोषणा पत्र से एक प्वाइंट उठाकर उस पर अमल कर लिया और आप उसका विरोध कर रहे हैं। ये सब बाद में करिएगा। कोटा में जो बच्चे हर रोज मर रहे हैं उसकी चिंता कर लीजिए। माताओं की हाय लग रही है।”