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‘अगर पाकिस्तान के मुस्लिम भारत आकर रहेंगे, तो विभाजन का क्या मतलब, पूरे को हिन्दुस्तान घोषित कर दो’

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ हो रहे देशभर में हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। इस दौरान ऐसे कई और वीडियो और ख़बरे सामने आईं हैं जहाँ पुलिस पर हमलावर हुई उग्र भीड़ ने तेज़ाब और पेट्रोल बम से हमले किए तो कहीं, सार्वजनिक सम्पति को इस क़दर क्षति पहुँचाई कि यूपी के मुख्यमंत्री को यह कहना पड़ा कि सभी सार्वजनिक क्षति की भरपाई दंगाइयों की सम्पत्ति की कुर्की करके की जाएगी।

इसी बीच एक ऐसा वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें एक बुज़ुर्ग भारतीय मुस्लिम कह रहे हैं कि अगर पाकिस्तान के मुस्लिम भारतीय नागरिक बन जाएँगे तो फिर विभाजन का क्या मतलब रह जाएगा। उन्होंने तल्ख़ अंदाज़ में कहा, “पाकिस्तान से जब मुस्लिम ही यहाँ आकर बसने लगेंगे, तो उनको रहने के लिए पाकिस्तान क्यों दे रहे हो, फिर उसे (पाकिस्तान को) हिन्दुस्तान में शामिल कर लो।” उन्होंने कहा कि अगर अफ़ग़ानिस्तान से आकर सब भारत की नागरिकता लेंगे तो पूरे को हिन्दुस्तान घोषित कर दो।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर जो मुस्लिम भ्रमित हैं, असल में वो ग़लती उनकी नहीं है बल्कि हमारे रहनुमाओं (नेताओं) की है। असल में दोषी वही हैं जो मुस्लिमों को उकसा रहे हैं, उनकी वजह से भारत के मुस्लिम आवेश में हैं। उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि कि हमारे मुस्लिमों में उतना पढ़ा-लिखा समाज नहीं है। इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिम गुमराह हैं और इसलिए वो विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा बन जाते हैं और हाथ में हथियार उठा लेते हैं।

ग़ौरतलब है कि विपक्ष के विरोध के बावजूद नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। मौजूदा क़ानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहाँ रहना अनिवार्य था। नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर 6 साल कर दी गई है। मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था।

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UP में हुए बवाल में सामने आया केरल के कट्टरपंथी संगठन PFI का हाथ: नदीम, वसीम,अश्फाक गिरफ्तार

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ उत्तरप्रदेश के अधिकांश जिलों में हुई हिंसा के पीछे केरल के कट्टरपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया का नाम सामने आया है। पुलिस ने जिसकी जाँच में नदीम, वसीम, अश्फाक नामक तीन युवकों को गिरफ्तार भी किया। पुलिस के अनुसार प्रदेश के अन्य जिलों में हुई गिरफ्तारियों में भी इसी संगठन के उपद्रवी पुलिस के हत्थे चढे़ हैं। इसके अलावा सिमी से जुड़े कुछ लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश के कानपुर में हुई हिंसा में सिमी और AIMIM से जुड़े नेताओं का नाम शामिल होने की बात पहले ही सामने आ चुकी थी। लेकिन अब इसमें पीएफआई के नाम खुलासा हुआ है। पीएफआई सिमी का ही लघु संगठन है। जिसके कई लोग पहले सिमी के साथ जुड़े रहे हैं।

प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी रविवार को मीडिया से बातचीच में कह चुके हैं कि हिंसा में शामिल लोग प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के हैं। जिन्हें पश्चिम के मालदा से गिरफ्तार किया गया है।

यहाँ बता दें कि अभी तक जाँच के आधार पर बताया जा रहा है कि प्रदेश में हिंसा के लिए भीड़ जुटाने और लोगों को भड़काने के लिए 15-20 दिन से काम किया जा रहा था। कई स्लीपर सेल चमनगंज, बेकनगंज, यतीमखाना, बाबूपुरवा, बगाही और ग्वालटोली जैसे क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानों पर कम उम्र के लड़कों और बच्चों को भड़का रहे थे। इनका भरोसा जीतने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक पोस्ट के प्रिंट की फोटोकॉपी भी लोगों में बाँटी जा रही थीं। इसीलिए दोनों दिन हुए प्रदर्शनों में ज्यादातर युवकों के पास छपे हुए प्लेकार्ड और पोस्टर्स थे।

इसके अलावा कानपुर के ही एक स्थानीय संगठन ने ही 13 दिसंबर को शुक्रवार के दिन युवकों को इकट्ठा करने के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए थे। लेकिन हिंसक भीड़ का नेतृत्व बाहरी लोगों ने किया था। स्थानीय लोगों ने खुद इस बात को कहा था कि वे उनमें से ज्यादातर को पहचानते ही नहीं थे।

बता दें, प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा को लेकर अब तक 164 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में नामजद 880 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं 5312 लोगों को हिरासत में लेकर निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। इसके अलावा अपनी जाँच में पुलिस बड़े पैमाने पर सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरे और मोबाइल से ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर उपद्रवियों की शिनाख्त करने में जुटी है।

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जादवपुर विश्वविद्यालय में राज्यपाल धनखड़ को छात्रों ने घेरा, दिखाए काले झंडे, कहा-BJP कार्यकर्ता वापस जाओ

पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में राज्यपाल जगदीप धनखड़ के साथ सोमवार (दिसंबर 23, 2019) को फिर से बदसलूकी की गई। जगदीप धनखड़ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को लेकर बुलाई गई बैठक में शामिल होने के लिए पहुँचे थे। राज्यपाल जैसे ही विश्वविद्यालय पहुँचे, छात्रों ने उनकी गाड़ी रोक ली। राज्यपाल की गाड़ी के सामने छात्रों ने विरोध प्रदर्शन करने लगे। गो बैक के नारे लगाए। छात्रों ने उन्हें काले झंडे और पोस्टर्स दिखाए और साथ ही ‘भाजपा कार्यकर्ता जगदीप धनखड़ वापस जाओ’ के नारे भी लगाए।

राज्यपाल धनखड़ जादवपुर यूनिवर्सिटी में चांसलर के तौर पर बैठक में हिस्सा लेने गए थे लेकिन छात्रों ने इसका बहिष्कार किया। छात्रों ने अचानक राज्यपाल की कार घेर ली और नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान राज्यपाल तकरीबन 45 मिनट अपनी कार में ही बंद रहे। बाद में सुरक्षा गार्ड उन्हें निकाल कर बाहर ले गए।

राज्यपाल धनखड़ ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) को एक ट्वीट में लिखा था, “सोमवार को जादवपुर यूनिवर्सिटी के 9वें कोर्ट की 10वीं बैठक होनी है। मैं चांसलर के तौर पर इसकी अध्यक्षता करूँगा। 23 दिसंबर दिन सोमवार को 2 बजे दिन में यूनिवर्सिटी के कमेटी रूम नंबर 1 में बैठक होगी।” सोमवार को अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल यूनिवर्सिटी पहुँचे लेकिन उनके खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले विश्वविद्यालय में छात्रों ने केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का घेराव किया था। बाबुल सुप्रियो के कहने के बावजूद वाइस चांसलर ने कैंपस में पुलिस बुलाने से इनकार किया था और जब खुद राज्यपाल उन्हें छुड़ाने गए थे तो छात्रों ने उनका भी घेराव किया था। इससे पहले राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने आरोप लगाया था कि कोलकता में दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी की उपस्थिति में उन्हें सरेआम अपमानित किया गया, जिससे वह व्यथित हैं और इसका उन्हें बहुत दुःख हुआ है।

उन्होंने बताया था कि उन्हें पूजा महोत्सव के दौरान न तो मंच पर जगह दी गई और न ही टीवी पर एक सेकंड के लिए भी दिखाया गया। कार्यक्रम में पूरी कोशिश की गई कि उन्हें कैमरा फुटेज न मिले। जबकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अन्य नेताओं व अधिकारियों के साथ मंचासीन थीं।

‘गुरुजी के गढ़’ में बेटा आगे और बहू पीछे, दुमका की राजनीति में लम्बे समय बाद शिबू का ‘चौका’

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा की तस्वीर अगले कुछ घंटों में पूरी तरह साफ हो जाएगी। अब तक के रूझानों में झामुमो-कॉन्ग्रेस-राजद को गठबंधन को भाजपा पर स्पष्ट बढ़त दिख रही है। राज्य की राजनीति के सबसे पुराने धुरंधर पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के घर के हालात जाने बिना इन नतीजों का विश्लेषण अधूरा रह जाएगा। हालाँकि, पिछले कुछ चुनावों की तरह ‘गुरुजी’ इस बार उतने सक्रिय नहीं रहे। उन्होंने कुछेक रैलियॉं ही की। आइए, जानते हैं क्या है ‘गुरुजी के गढ़’ दुमका का चुनावी हालचाल।

दुमका से ख़ुद झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन मैदान में थे। पिछले चुनाव में उन्हें भाजपा की डॉक्टर लुइस मरांडी ने पटखनी दी थी। झारखण्ड भाजपा महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रहीं लुइस मरांडी ने रघुवर मंत्रिमंडल में कई अहम मंत्रालय भी सँभाले। दुमका और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के रिश्ते का अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि वो इस लोकसभा क्षेत्र से 8 बार सांसद रह चुके हैं। 1980 में यहाँ से पहली बार जीतने वाले सोरेन को 2019 में भाजपा के सुनील सोरेन ने चित कर दिया था।

हालाँकि, इससे झारखंड अथवा दुमका की राजनीति में शिबू सोरेन की हस्ती कम नहीं हो जाती। हाँ, उनकी सक्रियता कम होने और स्वास्थ्य ख़राब होने की वजह से उनका प्रभाव ज़रूर धीरे-धीरे कम हो गया। दुमका की सभी 6 विधानसभा सीटों के परिणाम व ट्रेंड्स पर एक नज़र डालिए:

दुमका: झामुमो
शिकारीपाड़ा: झामुमो
नाला: झामुमो
जामताड़ा: कॉन्ग्रेस
सारठ: भाजपा
जामा: भाजपा

जैसा कि आप देख सकते है, 4 सीटों पर झामुमो गठबंधन आगे चल रहा है, वहीं 2 सीटों पर भाजपा बढ़त बनाए हुए है। जामा से हेमंत की भाभी सीता सोरेन काँटे की टक्कर में पीछे चल रही हैं। यहाँ से झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की बहू व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन चुनावी मैदान में थीं। हेमंत सोरेन दुमका के अलावा साहिबगंज के बड़हेट से भी चुनावी ताल ठोक रहे थे।

मैंने मूर्तियों पर लात मारी, मुझे बहुत ख़ुशी मिली, अब तक सैकड़ों क्राइस्ट गाँव बनाए: पादरी का क़बूलनामा

प्रवीण चक्रवर्ती नाम के एक पादरी, जो कथित तौर पर सिलोम ब्लाइंड सेंटर नामक एक संगठन के प्रमुख है, उसे एक वीडियो में यह स्वीकारते हुए देखा-सुना जा सकता है कि उसने किस तरह से एक पूरे गाँव को ‘ईसाई धर्म’ में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों के सिर पर लात मारी थी।

हालाँकि, ‘Legal Righs Ptotection Forum’ नाम के NGO ने इस वीडियो को 5 दिसंबर को सोशल मीडिया पर शेयर किया था, लेकिन यह वीडियो आज भी बड़ी तेज़ी के साथ लोगों तक अपनी पहुँच बना रहा है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि पादरी अपने इस कृत्य को बड़े मज़े से बखान कर रहा है, जिससे पता चलता है कि उसके द्वारा किए गए कृत्य पर उसे बहुत घमंड है।

इस वीडियो में चक्रवर्ती को इस बात का उल्लेख करते हुए देखा-सुना जा सकता है कि कैसे वह एक पूरे गाँव को ईसाई धर्म में परिवर्तित करता है। इस दौरान वो यह भी बताता है कि जब गाँव पूरी तरह से ‘ईसाई गाँव’ में परिवर्तित हो जाता था, तो गाँव के लोग ईसा मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लेते थे।

पादरी ने बताया कि जब धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो ग्रामीण “पेड़ और पत्थर की मूर्तियों” को हटा देते हैं। चक्रवर्ती के अनुसार कई अवसरों पर उन्होंने ग्रामीणों के सामने हिन्दू देवताओं की मूर्तियों को लात भी मारी।

महज़ 1 मिनट 03 सेकंड के इस वीडियो में, देवी-देवताओं की मूर्तियों पर लात मारने की बात कहते हुए पादरी ने बताया, “ऐसा कई बार हुआ जब मैंने देवताओं की मूर्तियों के सिर पर लात मारी, ऐसा करके मुझे बेहद ख़ुशी मिली।” साथ ही पादरी ने दावा किया कि उसने अब तक सैकड़ों क्राइस्ट गाँव बनाए हैं और वो अभी भी अपने इस मिशन को जारी रखे हुए है।

ख़बर के अनुसार, वीडियो पोस्ट करने के बाद, Legal Righs Ptotection Forum ने घोषणा की कि उन्होंने पादरी के ख़िलाफ़ केंद्रीय गृह सचिव और FCRA प्रभाग (MHA) में ईसाई धर्मांतरण के सन्दर्भ में शिक़ायत दर्ज़ करवाई है।

शिक़ायत में माँग की गई है कि ईसाई संगठन के FCRA लाइसेंस को रद्द किया जाए, साथ ही इसके बैंक खातों को ज़ब्त किया जाए और इसकी अन्य गतिविधियों की जाँच प्रक्रिया शुरू की जाए।

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झारखंड की उन 15 सीटों का हाल जहाँ मोदी, राहुल और प्रियंका ने रैली की

झारखंड विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस-झामुमो गठबंधन जीत की ओर अग्रसर है। जहाँ कॉन्ग्रेस 13 सीटें जीत रही है, वहीं झामुमो 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरती दिख रही है। एक सीट पर राजद आगे है। तीनों दलों का गठबंधन खबर लिखे जाने तक 41 सीटों पर आगे था।

अब एक नजर उन सीटों पर डालते हैं जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रैली की। राहुल गाँधी ने 2 दिसंबर को सिमडेगा में चुनावी जनसभा की। 9 दिसंबर को बड़कागाँव और राँची में उनकी रैली हुई। 12 दिसंबर को उन्होंने राजमहल और महगामा में अपनी पार्टी व गठबंधन के कैडर में जान फूँकने का काम किया। आइए, देखते हैं कि उन सीटों पर फिलहाल क्या स्थिति है;

सिमडेगा: भाजपा
बड़कागाँव: कॉन्ग्रेस
राँची: भाजपा
राजमहल: भाजपा
महगामा: झामुमो

प्रियंका गाँधी ने एकमात्र जनसभा पाकुड़ में की। वहाँ के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो कॉन्ग्रेस के आलमगीर आलम बड़ी जीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन जगहों पर अपनी जनसभा की, उस पर एक नज़र दाल लेते हैं। उन्होंने 25 नवंबर को मेदिनीनगर और गुमला में रैली की। प्रधानमंत्री 2 दिसंबर को जमशेदपुर व खूँटी पहुँचे। 9 दिसंबर को बरही और बोकारो में उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की हौसला आफजाई की। 12 दिसंबर को धनबाद और 15 दिसंबर को दुमका में पीएम की रैली हुई। प्रधानमंत्री ने 17 दिसंबर को विपक्षी गठबंधन के सीएम उम्मीदवार हेमंत सोरेन के क्षेत्र बरहेट से अपनी चुनावी कैम्पेन का समापन किया। इस सीटों की स्थिति ऐसी है;

डाल्टेनगंज: भाजपा
गुमला: झामुमो
जमशेदपुर: निर्दलीय
खूँटी: भाजपा
बरही: कॉन्ग्रेस
बोकारो: कॉन्ग्रेस
धनबाद: भाजपा
दुमका: झामुमो
बरहेट: झामुमो

जैसा कि आप देख सकते हैं, पीएम मोदी ने 9 सीटों पर रैलियाँ की, जिनमें से 3 पर भाजपा आगे चल रही है। वहीं 2 सीटों से ख़ुद पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगे चल रहे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास को निर्दलीय सरयू राय पटखनी देते दिख रहे हैं। भाजपा के बागी नेता सरयू राय टिकट काटे जाने से नाराज़ होकर मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ निर्दलीय मैदान में उतर आए थे। ये अंतिम नतीजे नहीं हैं। वोटो की गिनती चल रही है। कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के बीच फासला बेहद कम है।

मैं पंकज तिवारी… अल्लाह कसम मैं पत्थर नहीं चला रहा था: गोरखपुर के एक पत्थरबाज का ‘कबूलनामा’

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नाम पर हिंसक प्रदर्शनों के पीछे की मंशा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सोशल मीडिया में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें ऐसे प्रदर्शनों में शामिल लोगों को यह तक नहीं मालूम था कि आखिर वे क्यों इकट्ठा हो रहे हैं? समुदाय विशेष के लोगों को भड़काने की बातें भी सामने आई है। हिंसा का दोष हिंदुओं और भाजपा के मत्थे मढ़ने की कोशिश भी हुई है। इसी कड़ी में गोरखपुर से एक घटना सामने आई है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद यहॉं हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान पुलिस ने एक पत्थरबाज को पकड़ा। पुलिस को झॉंसा देने के लिए उसने अपना नाम पंकज तिवारी बताया। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसके मुँह से ‘अल्लाह कसम’ निकल गया।

दैनिक जगारण की रिपोर्ट के अनुसार बवाल पर काबू पाने के बाद पुलिस पत्थरबाजों की धर-पकड़ में जुटी थी। पुलिस की एक टीम में सदर तहसीलदार भी शामिल थे। संदेह होने पर उन्होंने एक युवक को रोका। पूछने पर उसने अपना नाम पंकज तिवारी बताया। जब उससे पिता नाम पूछा गया तो थोड़ी देर सोचने के बाद उसने गौरी तिवारी बताया। हालॉंकि एक पुलिसकर्मी ने उसे पत्थर फेंकते देखा था। उसने कहा- साहब यह भी पत्थरबाजी कर रहा था। पथराव करते इसे मैंने खुद देखा है। सिपाही ने जैसे ही यह बात कही खुद को पंकज तिवारी बताने वाला युवक बोल पड़ा- अल्लाह कसम मैं पत्थर नहीं चला रहा था। इससे उसका भेद खुल गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दैनिक जागरण के गोरखपुर संस्करण में प्रकाशित खबर

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर में हिंसा भड़कने के पीछे बाहरी लोगों का हाथ होने का संदेह भी है। बताया गया है कि शुक्रवार की सुबह से ही शहर के शाहमारूफ इलाके में युवकों का कुछ समूह सक्रिय था। पहले इन्होंने दुकानें बंद कराई फिर काली पट्टी लगाकर नमाज अदा करने का फैसला किया। ये युवक एक-दूसरे के हाथ में काली पट्टी बॉंधने लगे। पुलिस ने इन पर नजर बना रखी थी। बाद में ये युवक जामा मस्जिद के पास भी लोगों को काली पट्टी बॉंधते दिखे।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार यह देख एलआइयू की टीम ने अधिकारियों को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसमें कहा गया था कि कुछ बाहरी युवक लोगों को काली पट्टी बॉंध भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। तय किया गया कि नमाज के बाद ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन, उससे पहले ही बवाल शुरू हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस की जॉंच से यह बात सामने आई है कि बाहरी तत्व पिछले कई दिनों से कुछ खास व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालकर गोरखपुर के युवकों के संपर्क में थे। कुछ युवकों को फोन कर भी उकसाया गया था। बाहरी लोग सीएए पर दूसरे शहरों में हुए बवाल का हवाला देकर लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। जॉंच में यह बात भी सामने आई है कि पत्थरबाजी के लिए ऐसी ईंटे जमा की गई थी जिसे थोड़ी सी ऊंचाई से गिराने पर भी कई टुकड़े हो जाएँ ताकि पथराव के दौरान उनका आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

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‘उद्धव के खिलाफ टिप्पणी करने पर शिवसैनिकों ने मार कर कान का पर्दा फाड़ा, जबरन कराया मुंडन’

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ जामिया मिलिया में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही की तुलना 1919 में हुए जलियांवाला बाग से की। मुख्यमंत्री ने कहा था कि युवा छात्र बम की तरह होते हैं।

ठाकरे के इस विवादित बयान को लेकर महाराष्ट्र के वडाला के रहने वाला एक शख्स ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी। जो कि उसे काफी महँगा साबित हुआ और उसे इसका खामियाजा शिवसैनिकों के गुंडागर्दी के रूप में भुगतना पड़ा। बताया जा रहा है कि राहुल तिवारी नाम के फेसबुक प्रोफाइल से टिप्पणी की गई है, जबकि उसका असली नाम हीरामणि तिवारी है।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी करने पर शिवसेना सैनिकों ने उसके साथ बदसलूकी की, हाथापाई, मारपीट की और फिर जबरन उसका मुंडन करा दिया। पीड़ित व्यक्ति ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिनलोगों ने उनके साथ मारपीट की है, वो उनको अच्छी तरह से जानते हैं। उनका कहना है कि सभी शिव सैनिकों ने मिलकर उन्हें पीटा। उन्होंने बताया कि दो शाखा प्रमुख ने मिलकर उनकी पिटाई की।

आगे हीरामणि तिवारी ने कहा, “मुझे पता चला कि शिव सैनिकों ने मुझे पीटने के लिए अलग से एक महिला टीम को भी तैयार कर रखा था। अगर मेरी तरफ से कोई महिला पलटवार करती तो वो उनसे निपटतीं। जहाँ तक मुझे जानकारी मिली है शिवसैनिकों ने ये सब कुछ प्लानिंग के साथ किया है। उन्होंने शिवसेना शाखा के पास पुलिस खड़ी कर रखी थी, जो कि घटना के 2-3 मिनट बाद ही वहाँ पहुँची।”

आगे हीरामणि तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनलोगों ने उनके अकेले होने का फायदा उठाया है। उनको सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनलोगों ने उन्हें इतनी बुरी तरह से पीटा कि उनके कान का पर्दा फट गया है। उन्होंने शिवसेना सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है, ताकि फिर किसी को इस तरह से पीटने की हिम्मत न हो।

BJP छीन लेगी आदिवासियों की ज़मीनें: पत्थलगड़ी में ‘डर’ दिखाने वाली कॉन्ग्रेस गठबंधन को बढ़त

झारखण्ड को जानने-समझने वाले लोगों ने पत्थलगड़ी का नाम ज़रूर सुना होगा। आदिवासियों के इस मूवमेंट को कुछ मिशनरियों व कट्टरवादियों का समर्थन मिला, जिससे इसे सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई का एक प्रतीक बना दिया गया। हालाँकि, आज स्थिति सामान्य है लेकिन फिर भी खूँटी और गुमला जैसे जिलों में चुनाव के दौरान स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण रही। एक समय यह आंदोलन लोहरदगा, राँची और सिमडेगा तक फैल गया था। नक्सलियों के उभार के बाद ये हिंसक हो गया था और मिशनरियों के साथ के कारण ग़ैर-क़ानूनी रूप से इसके तहत ‘स्वतंत्र सरकार’ स्थापित करने का प्रयास किया गया था – अर्थात, सामानांतर सरकार।

नक्सल समर्थित इस मूवमेंट वाले इलाक़ों में मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ ख़ूब दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। लोगों के बीच अफवाह फैलाई गई कि भाजपा आदिवासी विरोधी है, इसीलिए उसने 2014 में जीतने के बाद एक गैर-आदिवासी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया। क्या नक्सलियों की ये साज़िश कामयाब रही? इसके लिए खूँटी लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 6 विधानसभा क्षेत्रों के ट्रेंड देखिए क्योंकि पत्थलगड़ी मूवमेंट का एक तरह से यही गढ़ रहा है:

खरसावाँ: (2014: झामुमो) अब- झामुमो
तमाड़: (2014:आजसू) अब- झामुमो
तोरपा: (2014: झामुमो) अब- भाजपा
खूँटी: (2014: भाजपा) अब- भाजपा
कोलेबिरा: (2018: कॉन्ग्रेस) अब- कॉन्ग्रेस
सिमडेगा: (2014: भाजपा) अब- कॉन्ग्रेस

जैसा कि आप देख सकते हैं, इस चुनाव से पहले खूँटी की 2 सीटें भाजपा व 2 सीटें कॉन्ग्रेस के पास थीं। अब 4 सीटें कॉन्ग्रेस व झामुमो के पास हैं। इससे पहले कि आपके मन में सवाल उठे, बता दें कि आदिवासियों द्वारा शिलालेख पर अपने पूवजों व बलिदानियों के नाम लिखने की परंपरा है, जो पत्थलगड़ी कहलाई। आदिवासियों के बीच डर बैठाया गया है कि सरकार उनकी ज़मीन छीन लेगी, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। खूँटी में विपक्षियों ने रघुवर दास पर उनकी रैली में चप्पल-जूते भी फेंके थे।

पत्थलगड़ी मूवमेंट को देखते हुए ही हिंसा रोकने हेतु चुनाव के दौरान इन क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। चुनाव के दौरान गाँव-गाँव तक में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखी गई थी। हिंसा फैलाने वाले उपद्रवियों के ख़िलाफ़ सैंकड़ों मामले दर्ज हैं, जो चुनाव का मुद्दा भी बनी। इस संबंध में कुल 19 मामलों में 172 नामजद आरोपित हैं। भाजपा के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार का एक मुद्दा यह भी रहा। हालाँकि, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के जरिए इन इलाक़ों को साधने का प्रयास भी किया। पूरे आंदोलन के दौरान मुंडा ने इसके विरोध में कुछ नहीं बोला। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा खूँटी से ही सांसद हैं, ऐसे में उनके गढ़ में भाजपा के लिए स्थिति कैसी रही, यह परिणाम से पता चल जाता है।

मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ गुस्सा क्यों था? ये इसीलिए, क्योंकि उनकी सरकार ने 2016 के अंत में एक संशोधन क़ानून पास किया था, जिसके तहत ट्राइबल क्षेत्रों की ज़मीन का भी विकास कार्यों के लिए अधिग्रहण किया जाना था। पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपित और विकास के लिए आदिवासियों का जमीन अधिग्रहण- इन दो फैक्टरों को मिला दें और झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन का बयान देखें… तो इस क्षेत्र की राजनीति साफ हो जाएगी। शिबू सोरेन ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि उनकी सरकार बनते ही पत्थलगड़ी हिंसा के आरोपितों पर से सभी केस हटा लिए जाएँगे। और फिर खूँटी का महत्व इसीलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहाँ से चुनाव प्रचार किया था।

ममता के गढ़ में CAA के समर्थन में रैली को संबोधित करने पहुँचे BJP के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में बुलाए गए मार्च को संबोधित करने के लिए पश्चिम बंगाल के कोलकाता पहुँच गए हैं। उनका स्वागत कैलाश विजयवर्गीय ने किया जो पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं।

जानकारी के अनुसार, भाजपा की रैली का मार्ग बदलकर हिन्द सिनेमा से सीआर एवेन्यू कर दिया गया। रैली का समापन श्यामबाजार में होगा, जहाँ भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। पहले यह रैली रानी रश्मोनी रोड से शुरू होकर स्वामी विवेकानंद के आवास पर समाप्त होने वाली थी।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व वाम दलों द्वारा इस क़ानून के विरोध में जारी विरोध-प्रदर्शन के कारण राज्य की राजनीति गर्म होती जा रही है। इस बीच राज्य के लोगों को नागरिकता संशोधन क़ानून से अवगत कराने व इस क़ानून को लेकर फैलाए जा रहे अफ़वाहों को ख़त्म करने को प्रदेश भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने इस क़ानून के समर्थन में जुलूस निकालकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने का निर्णय लिया।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लड़ाई लड़ रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी को CAA और NRC के खिलाफ लगाए गए सभी विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2020 को होगी। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने टीवी चैनलों पर नागरिकता कानून और NRC नहीं लागू करने का विज्ञापन दिया था। ममता बनर्जी खुद यह कहते हुए दिखीं कि बंगाल के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्य में NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा।

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