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बेटी से छेड़खानी की शिकायत की तो नूर आलम और तार मोहम्मद ने पीट-पीटकर मार डाला

बिहार के सीवान में एक बाप को अपनी बेटी के साथ हुई छेड़खानी की शिकायत करना भारी पड़ गया। बेटी की छेड़खानी की शिकायत करने पर उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। अहमद अली की बेटी 20 दिसंबर की सुबह 7 बजे टहलने निकली थी। इसी दौरान गाँव के ही नूर आलम के पुत्र जुबरे आलम और गुड्डू ने उसके साथ छेड़खानी की।

बेटी ने जब इस घटना के बारे में बताया तो अहमद शिकायत लेकर नूर आलम के घर गया। जब अहमद ने नूर से उसके बेटे जुबरे आलम की करतूत की शिकायत की तो वह आग-बबूला हो गया। नूर आलम ने तार मोहम्मद के साथ मिलकर अहमद के साथ गाली-गलौज की और फिर उसको मारने भी लगे। अहमद के बेटे अरशद ने इस घटना के बार में प्रभात खबर को बताते हुए कहा कि नूर आलम ने अहमद को जान से मारने की नीयत से उसकी गर्दन पर जानलेवा प्रहार किया। ये वार इतना तगड़ा था कि अहमद मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ा।

अरशद ने बताया कि जब उसे इस बारे में पता चला तो वह भी मौके पर पहुँचा। उसके वहाँ पहुँचने पर उनलोगों ने अरशद की भी पिटाई करनी शुरू कर दी। अरशद का कहना है कि नूर आलम और तार मोहम्मद ने उसके सिर पर इतनी जोर से वार किया कि उसका सिर फट गया और वो घायल हो गया। इसके बाद स्थानीय लोग इकट्ठा होने लगे, जिसे देखकर दोनों वहाँ से फरार हो गए।

ग्रामीणों ने अहमद और अरशद को गुठनी पीएचसी में भर्ती करवाया। अरशद ने बताया कि दोनों की हालत देखते हुए सीवान सदर के लिए रेफर कर दिया गया। वहाँ पर भी हालत में सुधार न होने पर पटना पीएमसीएच में भर्ती करवाया गया। जहाँ अहमद की रात 8:30 बजे मौत हो गई।

कॉन्ग्रेस नेता उमर पठान ने पोस्ट किया था फर्जी वीडियो, शाह-ए-आलम हिंसा में 15 और दंगाई गिरफ़्तार

अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता उमर ख़ान पठान को गिरफ्तार किया है। शाह-ए-आलम क्षेत्र में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में उसकी गिरफ्तारी हुई है। पठान पर सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी वीडियो पोस्ट करने का आरोप है।

कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नगर सचिव उमर ख़ान पठान ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक फ़र्ज़ी वीडियो पोस्ट किया था। इसमें लखनऊ में हिंसक दंगाइयों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा गया था कि पत्थरबाज़ी की घटना से पहले अहमदाबाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। 19 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शाह-ए-आलम इलाक़े में हुई हिंसा के दौरान 26 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

विशेष पुलिस आयुक्त अजय तोमर ने बताया था कि साइबर पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की थी और पठान से जवाब माँगा गया था। इसके बाद भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में उसे गिरफ़्तार किया गया।

इससे पहले, पुलिस आयुक्त आशीष भाटिया ने बताया था कि CAA/ NRC का विरोध करने के लिए राज्य के कुछ हिस्सों में हालिया हिंसा के मद्देनज़र अफ़वाह फैलाने वाले दो सोशल मीडिया पोस्टों को ट्रैक किया गया है और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसी भ्रामक ख़बरों पर ध्यान न दें। पुलिस आयुक्त ने कहा था कि फ़र्ज़ी वीडियो पोस्ट कर उन्हें वायरल करना अपराध की श्रेणी में आता है ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी।

ख़बर के अनुसार, गुजरात में विशेष पुलिस आयुक्त अजय तोमर ने बताया कि अहमदाबाद शहर के शाह-ए-आलम इलाक़े में CAA/NRC के विरोध के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में 15 और लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस हिंसा में 15 नक़ाबपोश दंगाई सीधे तौर पर पथराव में शामिल थे। अब तक गिरफ़्तार किए गए कुल दंगाइयों की संख्या 64 हो गई है।

ग़ौरतलब है कि स्थानीय कॉन्ग्रेस पार्षद सहित कुल 50 नामजद अभियुक्तों कल गिरफ़्तार किया गया था। 19 दिसंबर को हुई हिंसा के मामले में 5000 अज्ञात दंगाइयों को भी आरोपित बनाया गया। मुस्लिम बहुल इलाक़े में उपद्रवियों द्वारा पथराव में डीसीपी, एसीपी, पीआई और पीएसआई रैंक के अधिकारियों सहित कुल 26 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। यहाँ बिना इजाजत के ही CAA/ NRC के ख़िलाफ़ रैली निकाली गई थी।

घटना के बाद उपद्रवियों ने पुलिस अधिकारियों पर निर्दयतापूर्वक पथराव किया था, इस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सामने आ चुके हैं। इसानपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसमें हत्या, दंगा और सार्वजनिक सम्पत्ति अधिनियम और गुजरात पुलिस अधिनियम के तहत नुक़सान पहुँचाने का प्रयास भी शामिल था। दानिलिमदा से कॉन्ग्रेस पार्षद शहज़ाद ख़ान पठान को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है।

हिंसक घटना में शामिल अन्य दंगाइयों की धर-पकड़ के लिए छापेमारी की जा रही है। अन्य दोषियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज को FSL भेजा गया है। दंगाइयों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले और लाठीचार्ज करना पड़ा। 49 आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

कॉन्ग्रेस कॉरपोरेटर शहज़ाद ख़ान समेत 49 दंगाई हिरासत में: शाह-ए-आलम में पुलिस पर हुआ था जानलेवा हमला

कॉन्ग्रेस पार्षद शहजाद खान ने पुलिस को मारने के लिए भीड़ को उकसाया, कहा- एक भी पुलिस वाले को मत छोड़ना

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

CAA के बारे में जानते ही नहीं मुस्लिम, वोट बैंक समझते हैं सियासी दल: शाही इमाम

जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर मुस्लिमों को ही फिर से आईना दिखाया है। बुख़ारी ने कहा कि मुस्लिम ये समझ ही नहीं रहे हैं कि इस क़ानून का किसी भी भारतीय नागरिक से कुछ लेना-देना ही नहीं है, चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम। बुखारी ने चीजें स्पष्ट करते हुए समझाया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून तो उनलोगों के लिए है, जो पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से भारत में आकर शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। साथ ही बुखारी ने सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिमों के बीच फ़ैल रहे अफवाह से बचने की सलाह दी।

सैयद अहमद बुखारी ने ‘दैनिक जागरण’ में प्रकाशित एक लेख में कहा है कि मुस्लिमों को मुल्क़ में अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए 70 साल हो गए, लेकिन सभी राजनीतिक दलों ने उनका सिर्फ़ सत्ता के लिए इस्तेमाल किया। बुखारी ने कहा है कि राजनेताओं ने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर, मुस्लिमों से झूठे वादे कर सत्ता तो पा ली लेकिन बाद में वादाखिलाफी पर उतर आए। शाही इमाम मानते हैं कि जो नेता आज तक मुस्लिमों के वोट लेते रहे, उन्होंने सत्ता मिलते ही मुस्लिमों से मुँह फेर लिया।

शाही इमाम ने बताया कि उन्होंने सीएए को लेकर काफ़ी लोगों से बात की और उनका अनुभव ये रहा कि अधिकतर लोगों को इसके बारे में कुछ पता ही नहीं है। सैयद अहमद बुखारी ने मुस्लिमों को समझाते हुए अपने लेख में कहा है;

कई लोग ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं कि मुस्लिमों को हिंदुस्ताान से बाहर भेजा जा रहा है। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि इस कानून में नागरिकता देने की बात हो रही है, लेने की नहीं। लेकिन, युवाओं को यह डर है कि उन्हें हिंदुस्तान से बाहर भेज दिया जाएगा। हकीकत में नागरिकता कानून एनआरसी से अलग है और भारत के मुस्लिमों से संबंधित नहीं है। लोगों को सीएए और एनआरसी के बीच का अंतर समझना चाहिए।

सैयद अहमद बुखारी ने लोगों को ये भी याद दिलाया कि पूरे देश में एनआरसी लागू करने जैसी कोई चीज अभी आई ही नहीं है। उन्होंने बताया कि सीएए तो एक्ट अर्थात क़ानून बन चुका है लेकिन एनआरसी के नियम-कायदे अभी तय ही नहीं हुए हैं तो विरोध क्यों? उन्होंने कहा कि पहले बैठकें होती थी, जिसमें इलाके के मौलाना, पार्षद, विधायक समेत आम लोग शामिल होते थे। सब कुछ तय किया जाता था कि उपद्रवी प्रदर्शन में शामिल न हों। लेकिन, अभी जब नमाज हो रही थी तो मैंने देखा कि एक तरफ नमाज हो रही थी दूसरी तरफ पीछे से नारे लग रहे थे। उन्होंने कहा है कि कोई भी तहरीर तब तक सफल नहीं होती जब तक कि जिम्मेदारों को ना जोड़ा जाए।उन्होंने सलाह दी कि विरोध संयमित तरीके से होना चाहिए। उन्होंने उनलोगों से भी आपत्ति जताई, जो जबरन दुकानें बंद करा रहे हैं।

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CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के नाम पर दंगा भड़काने की साज़िश: व्हाट्सप्प ग्रुप से हुआ कॉन्ग्रेस नेताओं का पर्दाफाश

जामा मस्जिद के शाही इमाम ने कहा- CAA से मुस्लिमों का लेना-देना नहीं, कौमी ठेकेदारों ने बताया जाहिल

फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी के साथ बांग्लादेशी मोहम्मद बिलाल धनबाद से गिरफ्तार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) को लेकर देश भर में हो रहे विरोध के बीच एक बांग्लादेशी शख्स को फर्जी आधार कार्ड और भारतीय मतदाता पहचान पत्र के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। बांग्लादेशी युवक को झारखंड के धनबाद से गिरफ्तार किया गया है। 

राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को यह जानकारी दी। GRP इंस्पेक्टर हरिनारायण सिंह ने कहा कि बांग्लादेश के सिलहट जिले के तेजपुर निवासी मोहम्मद बिलाल को अमृतसर-कोलकाता दुर्गयाना एक्सप्रेस में बिना टिकट सफर करने के लिए गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि बिलाल को धनबाद रेलवे स्टेशन पर टिकट जाँच के दौरान शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को गिरफ्तार किया गया। हरिनारायण सिंह ने बताया कि मोहम्मद बिलाल के पास से तीन बांग्लादेशी पासपोर्ट, बांग्लादेशी मुद्रा और अमेरिकी डॉलर जब्त किए गए हैं।

सिंह ने इंडिया टुडे को बताया, “आरोपित ने पहले दावा किया कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का निवासी है लेकिन टीटीई ने उसके पास बांग्लादेशी पासपोर्ट देखे और आरपीएफ कर्मियों को सूचित किया जिन्होंने बिलाल को हिरासत में ले लिया।”

उन्होंने कहा कि बिलाल लखनऊ में ट्रेन पर चढ़ा था और कोलकाता जा रहा था, जहाँ से उसकी बांग्लादेश जाने की योजना थी। अधिकारी ने बताया कि मोहम्मद बिलाल का बड़ा भाई लखनऊ की जेल में बंद है। पूछताछ के दौरान आरोपित ने स्वीकार किया कि वह बांग्लादेशी नागरिक है और उसने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में फर्जी आधार और भारतीय मतदाता पहचान पत्र बनवाए थे।

इंस्पेक्टर हरिनारायण  सिंह ने कहा कि बिलाल को विशेष रेलवे न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया जिन्होंने उसे 14 दिनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।

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लौट के अवॉर्ड वापसी गैंग साहित्य अकादमी में आया, क्या ‘सहिष्णु’ हो गए मोदी?

साहित्य अकादमी पुरस्कार का विवादों से पुराना नाता रहा है। न सिर्फ़ पुरस्कार, बल्कि पुरस्कार इसे लेने वाले भी विवाद खड़ा करने में अव्वल रहे हैं। इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही हुआ। साहित्य अकादमी पुरस्कार का इंतजार देश भर के लोगों को था और जब इसकी घोषणा हुई तो फिर विवाद हुए। विवाद की शुरुआत तभी हो गई थी, जब मैथिली भाषा के संयोजक प्रेम मोहन मिश्र ने इस्तीफे का मेल भेजा। उन्हें इस पुरस्कार को देने की प्रक्रिया पर संदेह था और उन्होंने जूरी पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका आरोप था कि जूरी के गठन को लेकर एक रैकेट सक्रिय है।

मिश्रा का आरोप था कि पुरस्कार किसे दिया जाना है, इस वर्ष यह सब पूर्व-निर्धारित था। उनकी माँग है कि जूरी के चयन और पुरस्कार की प्रक्रिया गोपनीय रखी जानी चाहिए। वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार अनंत विजय ने ‘दैनिक जागरण’ में रविवार (दिसंबर 22, 2019) को एक लेख लिखा, जिसमें इस पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। अनंत विजय ने इस लेख में बताया है कि साहित्य अकादमी में हर भाषा के प्रतिनिधि ही अब तक जूरी के सदस्यों के नाम प्रस्तावित करते रहे हैं। इसमें इसका ध्यान रखा जाता है कि एक ही सदस्य दो साल तक जूरी में न रहे। इसका अर्थ है कि आरोप लगाने वाले मिश्रा ने भी जूरी के एक सदस्य का नाम प्रस्तावित किया होगा।

प्रेम मोहन मिश्र कहते हैं कि उन्होंने आपत्ति जताई थी। लेकिन, उन्होंने तब आपत्ति जताई थी जब पुरस्कार के लिए चयन की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। अनंत विजय कहते हैं कि वामपंथियों के दबदबे वाले जमाने में जूरी के गठन व पुरस्कार दिए जाने में एक रैकेट ज़रूर सक्रिय रहता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से ऐसा देखने को नहीं मिला है। उस वक़्त लोगों को महीनों पहले पता चल जाता था कि पुरस्कार किसे मिलेगा? तो क्या अब वामपंथियों और विपक्ष के इस आरोप में दम है कि मोदी सरकार स्वायत्त संस्थाओं को नष्ट कर रही है और तानाशाही भरे रवैये से उन्हें प्रशासित कर रही है?

इस आरोप की हवा निकालने के लिए एक उदाहरण देखते हैं। अगर ऐसा होता तो क्या इस वर्ष तिरुअनंतपुरम से सांसद और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर को उनकी पुस्तक ‘एन एरा ऑफ डार्कनेस’ के लिए पुरस्कार मिलता? आप साहित्य अकादमी के पिछले 6 दशक का इतिहास उठाइए। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी विपक्षी सांसद को अवॉर्ड मिला हो। अनंत विजय लिखते हैं कि आरएसएस से जुड़े लोगों या लेखकों को तो छोड़िए, भारतीयता की बात करने वालों तक के नामों पर भी इस पुरस्कार हेतु विचार नहीं किया जाता था। ऐसा हिन्दू कौन हुआ फिर? अपनी विचारधारा दूसरों पर कौन थोपता था, स्पष्ट दिख जाता है।

आपको 2015 बिहार विधानसभा चुनाव याद होगा। तब उदय प्रकाश, मंगलेश डबराल और अशोक वाजपेयी जैसे लेखकों ने अवॉर्ड-वापसी में हिस्सा लिया था। लेकिन, यही लेखक अकादमी अवॉर्ड्स मिलने की बात अपनी शान में गर्व से प्रस्तुत करते हैं। अनंत विजय लिखते हैं कि उनलोगों का एक ही लक्ष्य था- चुनाव से पहले भाजपा के ख़िलाफ़ माहौल बनाना। इस बार ऐसे सभी लेखक बेनकाब हो गए हैं। जैसे- सच्चिदानंद सिंह। उन्होंने तब विरोधस्वरूप सलाहकार समिति से इस्तीफा दे दिया था लेकिन इस वर्ष वो जूरी में शामिल रहे। सोचिए, इसी व्यक्ति ने तब ऐलान किया था कि वो साहित्य अकादमी से किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं रखेंगे।

जीएन देवी और सुकान्त चौधरी जैसे ऐसे और भी नाम हैं। एक और नाम है- नन्द भारद्वाज। इस आदमी ने पुरस्कार वापसी कर के रुपए भी लौटा दिए लेकिन बाद में जो चेक लौटाया था, उसे वापस भी ले लिया। ये सब गुपचुप तरीके से हुआ। अनंत विजय पूछते हैं कि जिन लेखकों को मोदी सरकार से डर लगता था, क्या उनका डर अब ख़त्म हो गया है? वो पूछते हैं कि क्या इन लेखकों के पास नैतिकता नहीं है या फिर उस नैतिकता को स्वार्थ और लोभ ने ढक लिया है?

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पीड़ित दलितों को नागरिकता मिल रही तो विरोध क्यों? अफवाह से बाज आएँ अर्बन नक्सल: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई जनसभा में पुलिस के योगदान की सराहना की और आरोप लगाया कि कुछ लोग परदे के पीछे से पुलिसकर्मियों पर हो रहे हमलों की साज़िश रच रहे हैं। पीएम मोदी ने वहाँ उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या पुलिस का आदर नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने “शहीदों, अमर रहो” का नारा लगवाया। उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि वो पुलिस का सम्मान करें, शहीदों का सम्मान करें और पुलिस से भाईचारा बढ़ाएँ। पीएम मोदी ने कहा कि हिंसा फैलाने वाले दो तरह के लोग हैं:

  • एक वो जिनकी राजनीति दशकों तक झूठ फैलाने पर ही टिकी हुई है।
  • दूसरे वो लोग जो समझते थे कि वो ही सरकार हैं और वो जो इतिहास बताएँगे, वही सच माना जाएगा। ख़ुद को भारत भाग्य विधाता मानने वालों ने अब बाँटो और राज़ करो वाली नीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

सीएए के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये क़ानून भारत के किसी नागरिक के लिए है ही नहीं, चाहे वो हिन्दू-मुस्लिम हो या सिख-ईसाई। उन्होंने कहा कि देश के 130 करोड़ लोगों से इसका कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि एनआरसी कॉन्ग्रेस ने बनाया था। उन्होंने कहा कि उस एनआरसी को लेकर हौवा खड़ा किया जा रहा है, जो न कैबिनेट में आया है और न ही उसके नियम-कायदे तय हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जिस सरकार ने लोगों को घर दिया है, वो कैसे किसी को निकाल सकती है?

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने लोगों को चीख-चीख कर बताया है कि कौवा कान लेकर उड़ गया और कुछ लोग कौवे के पीछे भाग निकले। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों को कौवे के पीछे भागने से पहले अपना कान तो चेक कर लेना चाहिए। पीएम मोदी ने लोगों को समझाया कि एनआरसी पूरे देश में आया ही नहीं है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केवल असम में आया है। पीएम ने कहा कि कुछ पढ़े-लिखे नक्सली, अर्बन नक्सल अफवाह फैला रहे हैं कि सारे कथित अल्पसंख्यकों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अफवाह के बाद पढ़े-लिखे लोग भी पूछ रहे हैं ये डिटेंशन सेंटर क्या होता है?

पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वो सीएए क्या है, एक बार पढ़ लें। पीएम मोदी ने कहा कि जो देश की मिट्टी के मुस्लिम हैं, उन्हें कहीं नहीं भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अर्बन नक्सल्स के अफवाहों के उलट देश में कोई डिटेंशन सेंटर है ही नहीं। उन्होंने कहा कि झूठ फैलाया जा रहा है कि जो लोग बाहर से आएँगे, वो देश के लोगों का हक़ छीन लेंगे। पीएम ने समझाया कि ये एक्ट उन लोगों के लिए है, जो वर्षों से भारत में रह रहे हैं। किसी नए शरणार्थी को इस क़ानून का फ़ायदा नहीं मिलेगा।

पीएम ने कहा कि पाकिस्तान से भारत आए अधिकतर शरणार्थी दलित हैं, जिन्हें अधिकार मिला है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि कुछ दलित नेता भी सीएए का विरोध कर रहे हैं। पीएम ने बताया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बहू-बेटियों को बेचा जाता है, उनसे जबरन शादियाँ की जाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रताड़ित लोग भाग कर भारत आए और वो पहले से ही भारत में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस समय ये साबित करना चाहिए था कि पाकिस्तान कैसे मानवाधिकार हनन करता है और वहाँ अल्पसंख्यकों की क्या परिस्थिति है, लेकिन देश के बदले दल देखने वाले लोगों ने ये मौक़ा गँवा दिया।

पीएम ने जिक्र किया कि कुछ दिनों पहले दिल्ली के ही एक शरणार्थी कैम्प में जन्म हुआ, जिसका नाम नागरिकता गया। पीएम मोदी ने हुड़दंग मचाने वालों से पूछा कि उत्पीड़ित दलितों को नागरिकता मिल रही है तो इससे हुड़दंगियों को क्या दुश्मनी है? पीएम ने इस दौरान अवैध घुसपैठियों की भी बात की। उन्होंने लोगों को पीड़ित शरणार्थी और घुसपैठियों के बीच अंतर समझने की अपील की।

जिस पुलिस ने ‘अनाज मंडी आग’ से बचाया, उन्हीं पर पत्थर? – मोदी के सवाल पर गूँजा दिल्ली पुलिस जिंदाबाद

CAA के समर्थन में खड़ा हुआ पूरा रामलीला मैदान, मोदी रैली में गूँजा- ‘2 लाख जय श्री राम’

बुलेट प्रूफ जैकेट को चीरती हुई निकली दंगाई की गोली, जेब में विराजमान शिवजी ने बचाई कॉन्स्टेबल की जान

मुस्लिम मॉब ने मंदिर में की तोड़-फोड़ और आगजनी: पटना में स्थानीय लोग और पुलिस इनके सामने असहाय

जिस पुलिस ने ‘अनाज मंडी आग’ से बचाया, उन्हीं पर पत्थर? – मोदी के सवाल पर गूँजा दिल्ली पुलिस जिंदाबाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) को रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई राजनीतिक दल भ्रम फैला कर लोगों की भावनाओं को भड़का रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जब केंद्र सरकार ने दिल्ली के सैंकड़ों कॉलनियों को वैध करने का काम किया तो क्या किसी से भी उनका धर्म पूछा था? मोदी ने कहा कि किसी से क्या सबूत माँगा गया था कि वो किस पार्टी को वोट देते हैं? उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को इसका लाभ मिला, क्योंकि भाजपा देश से लगाव के कारण जीती है और वो ख़ुद देश के विकास के मंत्र के प्रति समर्पित हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि एक ही स्तर में दो बिल पारित हुए, जिनमें से एक क़ानून से 40 लाख लोगों को अधिकार दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष अफवाह फैला रहा है कि भाजपा सरकार अधिकार छीनने वाला काम कर रही है। पीएम ने कहा कि उज्ज्वला के तहत 8 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला लेकिन किसी ने न जाति पूछी गई, न नागरिकता का प्रमाण माँगा गया और न ही मजहब पूछा गया। पीएम मोदी ने कहा कि आगे भी हर ग़रीब परिवार को उज्ज्वला योजना का लाभ पहुँचाया जाएगा।

पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने 1.5 करोड़ लोगों को घर दिया लेकिन किसी लाभार्थी से उसका जाति-धर्म नहीं पूछा गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘कागज़-कागज़’ और ‘सर्टिफिकेट-सर्टिफिकेट’ रट रहे हैं और मुस्लिमों को भड़का रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आयुष्मान योजना में बिना किसी का धर्म पूछे गरीबों का इलाज हो रहा है। पीएम ने कहा कि झूठे आरोप लगा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करने की साज़िश हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में अराजकता का माहौल फैलाया जा रहा है। पीएम ने कहा:

“लोगों की गाड़ियों पर हमले किए गए। छोटी-छोटी दुकानों को जलाया गया है। सरकारी संपत्ति को आग में ख़ाक कर दिया गया है। उनकी राजनीति और इरादे कैसे हैं, ये देश भली-भाँति समझ चुका है। मैं ऐसे लोगों से कहता चाहता हूँ- जब मैं पहली बार जीत कर आया तो कुछ लोगों को ये समझ ही नहीं आया कि ये कैसे हो गया। दूसरी बार मुझे हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा कर झूठ फैलाया गया लेकिन देश की जनता ने पहले से ज्यादा आशीर्वाद दे दिया। ये सदमा कुछ लोग अभी भी सहन नहीं कर पा रहे कि मोदी दोबारा कैसे आ गया? जिस दिन से नतीजे आ गए हैं, तभी से देश में तूफ़ान खड़ा करने के इरादे हैं। अगर आपको मोदी पसंद नहीं है तो मोदी को गाली दो, मोदी का पुतला जलाओ, जूते मारो लेकिन देश की सम्पत्ति मत जलाओ।”

पीएम ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसा कर उन्हें जख्मी किया जा रहा है, उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि पुलिसवालों के साथ हिंसा कर के उन्हें कर क्या मिलेगा? उन्होंने बताया कि पुलिसवाले किसी के दुश्मन नहीं होते, सरकारें बदलती हैं। उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक 33,000 पुलिसकर्मियों ने देश के लिए बलिदान दिया है। मोदी के ऐसा कहते ही ‘मोदी तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ के नारे से लोगों ने उनकी हौसला-आफजाई की। पीएम मोदी ने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेरहमी से मारा जा रहा है, जो बिना मौसम देखे हुए दिन-रात लोगों के भले के लिए खड़े रहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब दिल्ली की मंडी में आग लगी थी, तब पुलिस वालों ने बिना महजब देखे ही लोगों को बचाया था। बता दें कि रानी झाँसी रोड में लगी आग में यूपी-बिहार के कई लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों ने तुम्हें बचाया, उन्हीं पर पत्थर चलाया जा रहे हो?

43 की मौत के बाद फैक्ट्री मालिक रेहान के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, पुलिस ने किया गिरफ्तार, पूछताछ जारी

…जिस बिल्डिंग ने लील लीं 43 जिंदगियाँ, फिर लगी वहीं आग: हर तरफ धुआँ, मौके पर दमकल की 4 गाड़ियाँ

सुबह 43 परिवार उजड़ गए, शाम को ‘बधाई’ कार्यक्रम में दिखे दिल्ली के CM केजरीवाल

‘भैया मैं साँस नहीं ले पा रहा, मेरे बच्चों का ख्याल रखना’ – मौत से पहले आखिरी कॉल का दर्दनाक Audio

यूपी पुलिस ने चौराहे पर टाँगी दंगाइयों की तस्वीर, कहा- बवालियों की पहचान कर फ़ौरन खबर करें

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने हिंसा और आगजनी की। इन दंगाइयों पर यूपी पुलिस लगातार शिंकजा कसने में लगी है। इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस ने शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वालों की तस्वीर जारी की है। इनकी तस्वीर वाले पोस्टर चौराहे पर लगाए हैं और लोगों से इनकी पहचान कर जानकारी देने की अपील की है।

प्रदर्शन के दौरान जिले के लोनी थाना क्षेत्र में उपद्रवियों ने काफी हिंसा की थी। इनकी पहचान के लिए तस्वीरों वाले पोस्टर बीच चौराहों पर लगाए गए हैं। इनके बारे में सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

शुक्रवार को CAA ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद पत्थरबाज़ी और बवाल काटने के मामले में जिले के 4 थानों में 451 ज्ञात समेत क़रीब 5000 अज्ञात पर मुक़दमा दर्ज किया गया है। इनमें पूर्व विधायक ज़ाकिर अली, सभासद सलाउद्दीन, सपा नेता रिज़वान सैफी, आरिफ़ के नाम भी शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, एसएसपी ने बताया कि फ़िलहाल साहिबाबाद से 44, मुरादनगर से 17 और लोनी से 4 आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया है। अज्ञात दंगाइयों की पहचान के लिए सामने आई फ़ोटो और वीडियो फुटेज के माध्यम से की जा रही है। बता दें कि शुक्रवार को हुए बवाल में दंगाइयों ने जमकर पत्थरबाज़ी की थी। 

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने देर रात घंटाघर कोतवाली, मुरादनगर, लोनी बॉर्डर और साहिबाबाद में सात मुक़दमे दर्ज किए थे। ग़ौर करने वाली बात यह है सबसे ज़्यादा मुक़दमे लोनी क्षेत्र में दर्ज हुए। लोनी औक लोनी बॉर्डर में ही 3200 से अधिक ज्ञात और अज्ञात दंगाइयों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है। वहीं, सबसे अधिक गिरफ़्तारियाँ साहिबाबाद क्षेत्र में हुई। कुल मिलाकर अब तक गाज़ियाबाद में 135 से अधिक उद्रवियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

इससे पहले गोरखपुर में पुलिस ने उपद्रवियों की फ़ोटो सोशल मीडिया पर जारी की थी। गोरखपुर पुलिस ने भी कहा था कि दंगाइयों के संबंध में सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा और सहयोग करने वालों को उचित ईनाम भी दिया जाएगा। एक्शन में आई योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ के खदरा इलाक़े में हिंसक विरोध-प्रदर्शन के दौरान उपद्रव मचाने वाले दंगाइयों के स्कैच जारी किए थे।

लखनऊ हिंसा में 250 लोग गिरफ्तार (तस्वीर साभार: News-18)

शनिवार (21 दिसंबर) को लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया था कि 250 दंगाइयों को वीडियो फ़ुटेज और फ़ोटो के आधार पर पहचान कर गिरफ़्तार किया गया। उन्होंने बताया था कि दंगाइयों की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी जारी है। इसके अलावा पुलिस प्रशासन आरोपितों पर रासुका (NSA) और सम्पत्ति कुर्क की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

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CAA के समर्थन में खड़ा हुआ पूरा रामलीला मैदान, मोदी रैली में गूँजा- ‘2 लाख जय श्री राम’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रामलीला मैदान में विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीएए और दिल्ली की अनधिकृत कॉलनियों को लेकर बड़ा बयान दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने दिल्ली के 40 लाख लोगों के जीवन में नया सवेरा लाने का काम किया है। पीएम मोदी ने कहा कि अनधिकृत कॉलनियों को पक्की किए जाने के फ़ैसले के बाद दिल्ली के लोगों के मन में अपने घरों को लेकर जो अनिश्चितता थी, वो ख़त्म हो गई। अपने सम्बोधन की शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा कि जीवन से जब अनिश्चितता निकल जाती है, एक बड़ी चिंता हट जाती है तो उसका प्रभाव क्या होता है, ये मैं आज आप सभी के चेहरों पर देख रहा हूँ। इसके बाद लोगों ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे से पीएम की इस बात का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि दिल्ली की 1700 से ज़्यादा कॉलनियों की बाउंड्री चिह्नित करने का काम पूरा किया जा चुका है और 1200 से ज़्यादा कॉलनियों के नक़्शे डिजिटल रूप से डाले जा चुके हैं। पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों से दिल्ली ने कॉलनियों को पक्का करने की माँग की थी, उन लोगों ने दिल्ली के सबसे आलिशान इलाक़ों में 2000 से ज़्यादा बँगले अवैध तरीके से अपने कारोबारियों को दे रखे थे। पीएम ने कहा कि इन बँगलों के बदले किसे क्या मिला, ये सबको पता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब केंद्र सरकार ने ग़रीबों को उनका घर देने का निर्णय लिया, तब रोड़े अटका रहे थे। पीएम ने कहा- “उन्हें शायद पता नहीं था। ये मोदी है।” उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने 40 लाख से ज्यादा लोगों को उनके घर का हक़ दिया। पीएम ने इस दौरान दिल्ली मेट्रो के विस्तार पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले इस नेटवर्क में 14 किलोमीटर प्रति वर्ष की रफ़्तार से विस्तार हो रहा था। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार आने के बाद केजरीवाल सरकार के अवरोधों के बाद प्रतिवर्ष 25 किलोमीटर नए मेट्रो रूट बन रहे हैं। पिछले 5 वर्ष में 116 किलोमीटर नई लाइनें शुरू हैं और 170 किलोमीटर नए रूट पर काम हो रहा है।

पीएम मोदी ने दिल्ली की बसों की खस्ता हालत को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। प्रदूषण ख़त्म करने की दिशा में हो रहे प्रयासों के बारे में बताते हुए पीएम ने कहा कि सैंकड़ों नए सीएनजी स्टेशन बने हैं, कई उद्योगों को पीएनजी पर लाया गया है और हज़ारों ईंट-भट्ठों को नई तकनीक से जोड़ा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार राज्य की सबसे बड़ी समस्या, अर्थात पीने की पानी की समस्या से आँख मूँद कर बैठी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि घरों में गन्दा पानी आने की वजह से लोग या तो वाटर प्यूरीफायर लगा रहे हैं या फिर बोतल ख़रीद रहे हैं।

सीएए को लेकर हुए उपद्रव पर बोलते हुए पीएम ने कहा कि कौन लोग आग लगाने का काम कर रहे हैं, ये जनता को बखूबी पता है। पीएम ने कहा कि दलितों और शोषितों के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून लाया गया है। इसके बाद लोगों ने खड़े होकर देश की संसद के सम्मान में ‘जय श्री राम’ का नारा लगा कर सीएए का स्वागत किया। पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्री राम’ के नारों से गूँज उठा।

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SIMI, ओवैसी की पार्टी से जुड़े कानपुर हिंसा के तार, ममता बनर्जी के नेता नहीं कर पाएँगे लखनऊ में प्रवेश

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर यूपी में हो रहे हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए कानपुर में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शनिवार को दोपहर बाद उपद्रवियों ने यतीमखाना पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया था। इस मामले में आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं 15 अन्य को हिरासत में लिया गया है।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि यतीमखाने में हुई हिंसा में आतंकवादी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का हाथ है। साथ ही इस घटना को अंजाम देने वालों में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से जुड़े नेता का नाम भी सामने आ रहा है। इस बीच, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं के लखनऊ में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है।

कानपुर (पूर्व) के एसपी ने कहा, “12 लोगों को गिरफ्तार किया है और 15 अन्य को हिरासत में लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हम लोगों से अपील करते हैं कि अफवाहों पर विश्वास न करें और शांति बनाए रखें।”

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि शनिवार को यतीमखाना में दंगा भड़काने के आरोप में सुन्नी उलमा काउन्सिल के महामंत्री हाजी सलीस समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है। हाजी सलीस आतंकवादी संगठन SIMI से भी जुड़ा रहा है। साथ ही एडीजी प्रेम प्रकाश के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस की जाँच में सामने आया है कि उपद्रव करने वालों में तमाम लोग AIMIM से जुड़े हैं। गिरफ्तार होने वालों में मोहम्मद यासीन, अब्दुल रहमान, मोहम्मद मुस्तफा, परवेज खान, मोहम्मद अरमान, नदीम, मोहसिन, मोहम्मद ताहिर और मोहम्मद अहसान का नाम शामिल है।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने इस बाबत कहा, “हमें पता चला है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कुछ राजनीतिक नेता यहाँ (लखनऊ) आना चाहते हैं। हम उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि क्षेत्र में धारा 144 लागू है और उनका यहाँ आना माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है।”

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों में भड़की आग शनिवार को भी सुलगती रही। कानपुर में दूसरे दिन भी यह आग धधक उठी और उग्र भीड़ ने यतीमखाना पुलिस चौकी पर हमला करते हुए जमकर पत्थरबाजी और आगजनी की। पेट्रोल व देसी बम भी फेंके।

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