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मणिशंकर अय्यर ने पकड़े पाँव: माफ़ कीजिए, मुझे कुछ याद नहीं, मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर अपने उस विवादित बयान से एकदम से पलट गए हैं, जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी को कॉन्ग्रेस के कार्यक्रम में चाय बाँटने की सलाह दी थी। उन्होंने मोदी को ‘चायवाला’ कहा था। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने न सिर्फ़ अपने इस बयान के बारे में बात करने से इनकार कर दिया, बल्कि पत्रकार से कहा कि वह केवल जम्मू-कश्मीर पर ही सवाल पूछें।

इंटरव्यू के दौरान एक रोचक मौका तब आया, जब मणिशंकर अय्यर अजीब सी आवाज बना कर पत्रकार के पाँव छूने लगे। इंटरव्यू ले रहे पत्रकार ने मणिशंकर अय्यर से कहा कि वो इतने बड़े राजनेता हैं और राजनयिक भी रह चुके हैं, ऐसे में वो उनकी बहुत इज्जत करते हैं। इसके बाद अजीब सी आवाज बनाते हुए अय्यर ने कहा, “बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। आपने मेरी प्रशंसा की। मैं आपके पाँव छूता हूँ।“‘

पत्रकार ने जब अय्यर को उनके ‘चायवाला’ बयान की याद दिलाई तो पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें कुछ याद नहीं है। उन्होंने कहा, “माफ़ कीजिए। मुझे कुछ याद नहीं है। मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा।” अय्यर इस बात से नाराज़ दिखे कि उनसे 5 वर्ष बाद भी उसी बयान को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। बता दें कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, तब मणिशंकर अय्यर ने कॉन्ग्रेस अधिवेशन के दौरान कटाक्ष करते हुए कहा था:

“21वीं शताब्दी में वह (नरेंद्र मोदी) प्रधानमंत्री बन पाएँ, ऐसा कतई मुमकिन नहीं है। लेकिन, यदि वह यहाँ (कॉन्ग्रेस अधिवेशन में) आकर चाय बेचना चाहें तो हम उनके लिए जगह बना सकते हैं।”

इंटरव्यू के दौरान इस बारे में सवाल किए जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अय्यर ने हाथ जोड़ पत्रकार के पाँव छू लिए। अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले अय्यर ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के विभाजन को कॉन्ग्रेस की रणनीतिक भूल करार दिया था। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का राजनीतिक करियर ख़त्म होने के लिए भी इसी निर्णय को दोषी ठहराया था।

इस्लाम से भी पुराना है हिन्दुस्तान, कभी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा कश्मीर: ऑस्ट्रेलियाई इमाम

धर्म के नाम पर कश्मीर में आतंक को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को एक इस्लामी विद्वान ने खरी-खरी सुनाई है।
ऑस्ट्रेलियाई इस्लामिक विद्वान इमाम मुहम्मद तौहीदी ने कहा है कि कश्मीर न कभी पाकिस्तान का हिस्सा रहा है और न कभी उसका हिस्सा बनेगा।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के मामले पर ट्विटर पर अपनी राय रखते हुए इमाम ने यह बात कही है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि हिन्दुस्तान इस्लाम से भी पुराना है।

उन्होंने ट्वीट किया है, “पाकिस्तान और कश्मीर दोनों भारत के हैं। हिन्दुओं के धर्म बदलकर मुस्लिम बनने से इस सच को झुठलाया नहीं जा सकता कि वह पूरा इलाका हिन्दू भूमि है। हिन्दुस्तान इस्लाम से भी पुराना है।”

तौहीदी ने 11 अगस्त 2019 को यह ट्वीट किया था। अपने हालिया ट्वीट में उन्होंने लोकतंत्र का हवाला देते हुए पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी का भी समर्थन किया है। उन्होंने वहाँ महिलाओं की किडनैपिंग और उन पर अत्याचार को लेकर चिंता जताई है। साथ ही बलूचिस्तान को पाकिस्तान की सरकार और आईएसआई की कैद से छुटकारा दिलाने की बात भी कही है।

खुद को सुधारवादी बताने वाले इमाम तौहीदी अपनी चर्चित किताब ‘फॉर लेफ्ट, फॉर राइट, कीप अ बैलेंस इन लाइफ’ में कट्टरपंथ को सिरे से खारिज कर चुके हैं। अपने हालिया ट्वीट में उन्होंने बताया था कि उनके अधिकतर अनुयायी अच्छे लोग हैं, जिसके कारण उन्हें कट्टरपंथियों से लड़ने की ताकत मिलती है।

कश्मीर पर ओवैसी को याद आए कौरव-पांडव, कहा- मोदी में नेहरू जैसी सूझबूझ नहीं

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त किए जाने को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। विवादित बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले ओवैसी ने इस बार नरेंद्र मोदी की बौद्धिक क्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ओवैसी ने कहा कि मोदी की राजनीतिक बौद्धिक क्षमता उतनी नहीं है, जितनी नेहरू और पटेल की थी।

‘ईद मिलाप’ के मौके पर अपनी पार्टी एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए ओवैसी ने दुहराया कि भारत सरकार का जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 को लेकर उठाया गया क़दम संवैधानिक संधि का उल्लंघन है। ओवैसी ने कहा, “मोदी जी, आपके पास नेहरू और सरदार पटेल जैसी बुद्धिमत्ता नहीं है। जब अनुच्छेद 370 को लागू किया गया था तब इन नेताओं ने सारे पहलुओं पर विचार करने के बाद ही ऐसा किया होगा।

ओवैसी ने संसद में अधिक संख्या में बिल पेश किए जाने को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि भाजपा एक दिन में 30-35 बिल संसद में पेश करती है और इससे सांसदों को उन्हें पढ़ने का समय ही नहीं मिलता है। उन्होंने पूछा, “भाजपा कैसे यह आशा कर सकती है कि इतने कम समय में इतनी अधिक संख्या में पेश किए गए बिल को सांसद पढ़ लें?” असदुद्दीन ओवैसी को इस बात से परेशानी है कि संसद में इतनी तेज़ी से काम क्यों हो रहा है?

साथ ही असदुद्दीन ओवैसी ने रजनीकांत के उस बयान पर भी तंज कसा जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर क्रन्तिकारी निर्णय लेने के लिए मोदी-शाह की तुलना कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी से की थी। ओवैसी ने पूछा कि अगर मोदी-शाह को कृष्ण अर्जुन कहा जा रहा है तो पांडव और कौरव कौन हैं? क्या आप देश में एक और महाभारत देखना चाहते हैं?

ओवैसी ने मोदी की बुद्धिमत्ता को नेहरू से कमतर तो बता दिया लेकिन शायद वह भूल गए कि उन्हीं नेहरू के कार्यकाल में अनुच्छेद 370 के साथ ‘अस्थायी’ शब्द जोड़ा गया था, अर्थात यह हमेशा के लिए नहीं लाया गया था। इसे कभी न कभी ख़त्म होना था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में बार-बार समझाया जा चुका है कि अनुच्छेद 370 के साथ जुड़े ‘अस्थायी’ शब्द का मतलब क्या है? अगर ओवैसी को इतना भी नहीं पता तो उन्हें अपने भाषणों व टीवी चर्चाओं में संविधान की दुहाई देना छोड़ देना चाहिए। नेहरू की बुद्धिमत्ता के तो कहने ही क्या? वो तो उतने बुद्धिमान थे कि उन्होंने सेना तक की ज़रूरत से इनकार कर दिया था। नेहरू की बुद्धिमत्ता तो इतनी है कि आज कोई भी विपक्षी नेता यह नहीं बता पाते कि अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर की जनता को क्या फायदा हुआ?

UP में अब रोड पर नहीं पढ़ सकेंगे नमाज, धार्मिक आयोजनों के लिए भी प्रशासन से लेनी होगी अनुमति

उत्तर प्रदेश में प्रशासन ने जनसुविधा का ख्याल रखते हुए फैसला लिया है कि अब न सड़कों पर नमाज पढ़ी जाएगी और न ही किसी प्रकार का धार्मिक आयोजन होगा। मेरठ और अलीगढ़ में हाल में ही यह पाबंदी लगाई गई थी। प्रशासन ने अब यह मॉडल पूरे राज्य में लागू करने का फैसला किया है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने बताया है कि अब सड़क पर ऐसे किसी धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं होगी, जिससे लोगों को असुविधा हो। खबर की मानें तो कुछ लोगों द्वारा सड़क पर नमाज पढ़ने से रोकने पर विरोध किया गया, लेकिन कई जगह ऐसी भी सुनने में आई जहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने व्यापक स्तर पर इस पहल का स्वागत किया।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं। जिसके मुताबिक कहा गया है कि अलीगढ़ व मेरठ की तरह सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे धार्मिक आयोजन न हों, जिससे व्यवधान पैदा हो और यातायात प्रभावित हो।

डीजीपी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के साथ सभी स्थानों पर सघन चेकिंग करने फुट पेट्रोलिंग किए जाने व हर संदिग्ध पर कड़ी निगाह रखे जाने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का निर्देश भी दिया गया है।

गौरतलब है कि बीते दिनों अलीगढ़ में सड़कों पर नमाज पढ़ने के विरोध में मंगलवार को सड़क पर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू हो गया था। जिससे आमजन को यातायात संबंधी काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा शांति-व्यवस्था के बिगड़ने का भी खतरा बना रहता था।

2 महीने पहले 9 जून को अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र में सड़क पर आरती से जाम लग गया था, जिसके बाद डीएम चंद्रभूषण सिंह ने सड़क पर नमाज व आरती पर रोक लगा दी थी।

इस फैसले के बाद कई जगह पर नमाज पढ़ने को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा प्रदर्शन किया गया था। साथ ही हिंदू समुदाय के लोगों ने भी सड़कों पर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया था।

बीते सोमवार (अगस्त 12, 2019) को तो आगरा में नमाज के लिए सड़क जाम किए जाने से गुस्साए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर ही हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया था।

X सिक्योरिटी वाली शेहला रशीद कश्मीर पर फैला रही प्रोपगेंडा, सोशल मीडिया में लगी लताड़

पत्रकारों पर सरकार से सुविधाएँ लेने का आरोप लगाना शेहला रशीद उलटा पड़ गया। शेहला ने ट्विटर पर लिखा कि जो पत्रकार जम्मू-कश्मीर में सबकुछ सामान्य होने की बात कह रहे हैं, वो प्रोपगेंडा फैला रहे हैं। शेहला के अनुसार, ऐसे पत्रकारों को कश्मीर में घूमने के लिए बुलेट-प्रूफ गाड़ी, सेना के हेलीकॉप्टर और सरकार द्वारा इंटरनेट सहित कई सुविधाएँ दी जा रही हैं। शेहला ने लिखा कि यह सब इसीलिए किया जा रहा है ताकि वे जम्मू-कश्मीर में स्थिति को सामान्य बता सकें।

इसके बाद शेहला ने राज्य के लोगों का सरकार द्वारा दमन करने की पाकिस्तान की बात को दुहराया। शेहला की इस ट्वीट के बाद आंतरिक सुरक्षा मामलों के जानकार आदित्य राज कौल ने कुछ ऐसा खुलासा किया, जो शायद बहुत से लोगों को न पता हो। कौल ने शेहला रशीद को याद दिलाते हुए लिखा, “तुम्हें जम्मू कश्मीर पुलिस से X-2 सिक्योरिटी सुरक्षा हासिल है और तुम दो PSO के साथ घूमती हो।

आदित्य राज कौल ने प्रधानमंत्री ऑफिस और गृह मंत्रालय से अपील करते हुए लिखा कि शेहला रशीद की सुरक्षा वापस ली जाए। साथ ही उन्होंने शेहला पर पत्रकारों को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। बता दें कि कई ऐसे लोग हैं जिन्हें जम्मू-कश्मीर में शांति अखर रही है और वे लगातार इस प्रयास में लगे हैं कि वहाँ की हर छोटी-बड़ी घटना को अलग एंगल देकर पेश किया जाए ताकि लोगों को लगे कि कश्मीर उबल रहा है। हालाँकि, गृह मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद कश्मीर में एक भी बुलेट फायर नहीं की गई है।

एक ट्विटर यूजर ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए लिखा कि शेहला रशीद जैसे लोगों को सुरक्षा कवर देना जनता के टैक्स का ग़लत इस्तेमाल है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि अब जब जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र सरकार के अधीन होगी, क्या शेहला रशीद अपनी सुरक्षा वापस कर देगी? जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद आजकल आईएएस से नेता बने शाह फैसल की सहयोगी हैं। फैसल बौखलाहट में बदला लेने की धमकी दे रहे हैं।

पाकिस्तान, चीन का धौंस दिखा बोले दिग्विजय सिंह- संकट में है देश

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के फैसले के बहाने लोगों को डराने और भड़काने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। अब उन्होंने पड़ोसी देशों का हवाला देकर कश्मीर पर लिए फैसले को देश के लिए खतरनाक बताया है। इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि मोदी सरकार के फैसले के बाद कश्मीर जल रहा है।

दिग्विजय सिंह ने कहा है, “कश्मीर के लोगों को भरोसे में लिए बिना फैसला लेना सही नहीं है। इससे खतरा बढ़ेगा। मत भूलें एक ओर चीन , दूसरी ओर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान भी है। आपने देश को किस मुसीबत में डाल दिया है।”

दिग्विजय सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा, “हमें आपत्ति अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने से उतनी नहीं है। यह जिस तरीके से किया गया, उसको लेकर आपत्ति है।”

गौरतलब है इससे पहले दिग्विजय सिंह ने 11 अगस्त को सीहोर जिले के दौरे के दौरान अनुच्छेद 370 के बारे में बात करते हुए कहा था, “मैंने आप लोगों से कहा था कि अगर धारा 370 हटी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, देखिए आज कश्मीर जल रहा है। इन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) अपने हाथ आग में झुलसा लिए हैं। कश्मीर को बचाना हमारी प्राथमिकता है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से अपील करता हूँ कि इस समस्या को जल्दी हल कराइए, नहीं तो कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा।”

बता दें कि विपक्ष की तरफ से लगातार उलूल-जुलूल बयानबाजी से पाकिस्तान और अलगाववादियों को भी शह मिल रही है। इसके कारण सोशल मीडिया में यूजर्स जमकर विपक्ष पर निशाना साध रहे हैं और कह रहे हैं कि देश के विपक्षी नेताओं ने अपने रुख से पाकिस्तान को भी हैरान कर दिया है।

शाह फैसल ने कहा ‘कश्मीर भभक उठेगा’ और शुरू हो गई पत्थरबाजी: रायटर्स के पत्रकार का दावा

जम्मू-कश्मीर पर प्रोपेगंडा फैलाने वाले अंतररष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टलों में सिर्फ़ बीबीसी और अल जज़ीरा ही शामिल नहीं है बल्कि रायटर्स भी इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है। जम्मू-कश्मीर पर कई विवादित ख़बरें प्रकाशित होने के बाद सरकार ने बीबीसी और अलजज़ीरा से सबूत के रूप में वीडियो माँगे, लेकिन वे अभी तक इसे पेश करने में अक्षम रहे हैं। ट्विटर पर रायटर्स के एक पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर लम्बा-चौड़ा थ्रेड लिखते हुए पाकिस्तानी राग अलापा है।

इस थ्रेड में पत्रकार देवज्योत घोषाल ने दावा किया है कि कश्मीर में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है और राज्य पूरी तरह लॉकडाउन के शिकंजे में है। उन्होंने दावा किया है कि कश्मीर में एक चिंगारी की ज़रूरत भर है और आग लग जाएगी। राज्य में हालत सामान्य न होने का दावा करते हुए घोषाल ने शाह फ़ैसल के बारे में भी चौंकाने वाला दावा किया है। घोषाल ने लिखा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद वह श्रीनगर के दौरे पर गए।

रायटर्स के पत्रकार घोषाल के अनुसार, उन्होंने इस दौरान आईएएस से नेता बने शाह फैसल से बात की। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में ‘संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प’ होने का दावा करते हुए लिखा है कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई।

पत्रकार घोषाल ने लिखा कि कश्मीरी इस फैसले को लेकर गुस्सा में हैं और हताश हैं। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के एजेंडे को भी खुल कर आगे बढ़ाया है। उन्होंने पाकिस्तान के कई नेताओं व पत्रकारों के सुर में सुर मिलाते हुए लिखा कि मोदी द्वारा देश को सम्बोधित किए जाने के अगले दिन श्रीनगर के ऊपर एक फाइटर जेट मँडरा रहा था। हालाँकि, अभी तक इस सम्बन्ध में कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। जम्मू-कश्मीर पर घोषाल के दावों से यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अनजाने में ही उन्होंने शाह फैसल की पोल खोल दी है?

रायटर्स के पत्रकार की फैसल से बात होती है और वो धमकी देते हैं कि सुरक्षा में ढील होते ही लोगों का गुस्सा भभक कर सामने आएगा और फिर पत्थरबाजी शुरू हो जाती है, ऐसा ख़ुद पत्रकार ने दावा किया है। तो क्या शाह फैसल की धमकी और पत्थरबाजी के बीच कुछ सम्बन्ध है? शाह फैसल पहले भी धमकी देते रहे हैं। उनके हाल के बयान पर गौर करें तो पता चलता है कि उन्होंने ख़ुद को अलगाववादी घोषित कर दिया है। आईएएस अधिकारी से नेता बने शाह फैसल ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर में या तो आप कठपुतली हैं या फिर अलगाववादी। एक अन्य बयान में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काने की कोशिश करते हुए कहा कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक बेइज्जती का बदला नहीं ले लेते।

मीका सिंह का बॉयकॉट करेगा बॉलीवुड, कराची में ‘जुम्मे की रात’ पड़ा महँगा

कराची में एक पाकिस्तानी अरबपति के घर के कार्यक्रम में परफॉर्म करना सिंगर मीका सिंह को महँगा पड़ा है। सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना के बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने उन पर बैन लगा दिया है। उनका भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से बॉयकॉट करने का फैसला किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मीका का सभी म्यूजिक कंपनी, मूवी प्रोडक्शन हाउस और ऑनलाइन म्यूजिक कंटेंट प्रोवाइडर द्वारा बॉयकॉट किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तान की तरफ से जारी गीदड़ भभकियों के बीच 8 अगस्त को मीका ने कराची में परफॉर्म किया था। कराची में जिस व्यक्ति के यहाँ मीका ने परफॉर्म किया, वह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का कजन भाई है। इसके कारण सोशल मीडिया में नाराज़गी जताते हुए फैंस ने मीका को काफी भला-बुरा कहा। इस कार्यक्रम के वायरल हुए वीडियो में मीका ‘जुम्मे की रात’ गाते हुए नजर आ रहे हैं।

ट्विटर पर भारतीय लोगों का कहना है कि जब पाकिस्तान ने भारतीय फिल्मों पर रोक लगा दी है और भारतीय गानों व अन्य मीडिया कंटेंट को भी प्रतिबंधित कर दिया है तो मीका को पाकिस्तान जाने की क्या ज़रूरत थी? वहीं पाकिस्तान के लोगों ने अपनी सरकार से नाराज़गी जताते हुए पूछा कि भारतीय गायक को वीजा क्यों दिया गया?

सोशल मीडिया में कुछ लोगों ने मीका सिंह का समर्थन भी किया है। कुछ ट्विटर यूजर्स ने लिखा है कि मीका एक कलाकार हैं और एक कलाकार के लिए बाउंड्री मायने नहीं रखता। कुछ यूजर्स ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए लिखा है कि पाकिस्तान बॉलीवुड कलाकारों के बिना रह ही नहीं सकता।

हाथी-मगरमच्छ की कहानी से समझें कश्मीरियत का दर्द सुनाने वालों ने लद्दाख जाना क्यों उचित नहीं समझा

सुदूर केरल अपने वनों के सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है और आम तौर पर पर्यटन विभाग भी इसे “गॉड्स ओन कंट्री” के तौर पर प्रचारित करते दिखते हैं। कुछ सौ साल पहले जब त्रावनकोर राजवंश शासन में था, तब यहाँ एक छोटा सा महल बनवाना शुरू किया गया था। समय बीतने के साथ-साथ (संभवतः 1728 से 1758 के बीच) केरल के कायमकुलम में स्थित ये कृष्णापुरम महल अपने पूरे स्वरूप में आया।

आजकल इस महल का इस्तेमाल संग्रहालय के तौर पर होता है। संग्रहालय की प्रसिद्धि यहाँ के “कायामकुलम वाळ” (दोधारी तलवार/खांडा) और इसी जिले में पाई गई एक बुद्ध की मूर्ति के यहाँ होने की वजह से भी है। इसकी असली प्रसिद्धि यहाँ मौजूद “गजेन्द्र मोक्ष” की मुरल पेंटिंग की वजह से है। ये अपने तरीके की सबसे बड़ी पेंटिंग है।

दक्षिण भारत के ही तमिलनाडु में “गजेन्द्र मोक्ष” से जुड़ा गजेन्द्र वर्धा पेरूमल मंदिर भी है। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि एक बार हनुमान जी ने यहाँ भगवान विष्णु की उपासना की ताकि वो “गजेन्द्र मोक्ष” का दृश्य देख सकें। उनके यहाँ “गजेन्द्र मोक्ष” का दर्शन करने के कारण इस जगह को “कबीस्थलम” भी कहा जाता है। छठी से नौवीं शताब्दी के बीच के तमिल संतों ने “दिव्य प्रबंध” में इस मंदिर की काफी प्रशंसा की है। आजकल ये दूसरे कई मंदिरों की ही तरह, ‘सेक्युलर सरकार बहादुर’ के नियंत्रण में है, इसलिए इसकी अभी की दशा पर चर्चा जाने देते हैं। जुलाई-अगस्त के समय तमिल मास “आदि” चल रहा होता है और इसी समय इस मंदिर में कुछ विशेष अनुष्ठान भी होते हैं।

अब वापस अगर इन स्थलों से जुड़ी कहानी, यानी “गजेन्द्र मोक्ष” पर चलें तो ये कई जन्मों की कहानी है। जैसा कि गजेन्द्र नाम से ही जाहिर है, कथा में एक हाथी है। अपने पूर्व जन्म में ये हाथी, इंद्रदयुम्न नाम के एक विष्णु भक्त राजा थे। एक बार जब इनके दरबार में अगस्त्य ऋषि आए तो ये उनके स्वागत में उठकर खड़े नहीं हुए। इस पर क्रुद्ध ऋषि ने उन्हें शाप दे डाला कि अगर इतने भारी हो गए हो कि उठ भी नहीं सकते तो अगले जन्म में तुम हाथी के रूप में ही पैदा हो और फिर समझो कि शरीर का बोझ कैसा होता है। कहानी के दूसरे मुख्य किरदार मगरमच्छ भी पिछले जन्म में हुहू नाम के एक गंधर्व राजा थे। एक बार ऋषि देवल के साथ स्नान करते समय उन्हें ठिठोली सूझी।

जैसे ही ऋषि देवल नदी में स्नान करते समय सूर्य को जल अर्पण करने लगे, हुहू पानी के अन्दर घुसकर उनका पैर कुछ ऐसे खींचने लगे जैसे कोई मगरमच्छ हो! इससे क्रुद्ध देवल ऋषि ने उन्हें मगरमच्छ हो जाने का शाप दिया। काफी अनुनय विनय के बाद जब देवल ऋषि माने तो उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु आकर तुम्हें इस शाप से मुक्ति दिलाएंगे। शापों के मुताबिक, हाथी और मगरमच्छ अपना जीवन-यापन कर रहे होते हैं।

एक दिन जब हाथी पानी पीने आता है तो मगरमच्छ उसे दबोचकर पानी के अन्दर खींचने लगता है। हाथी अपने आप को छुड़ाने का खूब प्रयास करता है, मगर वो पानी में मगरमच्छ से जीत नहीं पाता। आख़िरकार वहीं के एक कमल के फूल को भगवान विष्णु को अर्पित करते हुए वो उनसे मदद मांगता है। इस वैष्णव कथा के मुताबिक भक्त की पुकार पर भगवान फ़ौरन दौड़े आते हैं और सुदर्शन चक्र चलाकर भक्त को बचाते हैं।

वैष्णव मान्यताओं में इस कहानी की प्रतीकों के रूप में मान्यता भी है। ऐसा माना जाता है कि हाथी यहाँ जीव का स्वरूप है, मगरमच्छ उसके पाप और माया हैं, जिस नदी के कीचड़ जैसे स्थान में हाथी मगरमच्छ के जबड़े में फँसा है, वो कीचड़ संसार है। विकट परिस्थितियों में फँसे लोगों को अक्सर “गजेन्द्र मोक्ष” पढ़ने की सलाह दी जाती है।

शुक्लांबरधरं विष्णुं शशि वर्णं चतुर्भुजं ।
प्रसन्न वदनं ध्यायेत सर्व विघ्नोपशान्तये ।।

बाकी हालिया राजनीति में रूचि रखने वालों के लिए शायद लद्दाख का कश्मीरियत के जबड़े से छूटना कुछ ऐसा ही दृश्य उपस्थित करता होगा। जामयांग सृंग नामग्याल द्वारा लद्दाखी जनता की ओर से दिया गया आभार भी मिलता-जुलता लगता है। आप ये मान सकते हैं कि भगवान हैं, तो “भक्तों” की पुकार भी सुनते होंगे। कश्मीरियत का दर्द सुनाने वालों ने लद्दाख जाना क्यों उचित नहीं समझा, ये भी एक बड़ा सवाल हो सकता है। मेरे विचार से धर्म को आम भारतीय लोगों की तरह राजनीति को दिशा-निर्देश करते रहना चाहिए।

दुर्गा पूजा पंडालों को कोई IT नोटिस नहीं, सिर्फ TDS के बारे में पूछा: TMC का प्रोपेगेंडा CBDT से ख़ारिज

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने तृणमूल कॉन्ग्रेस और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने किसी दुर्गा पूजा समिति को आयकर नोटिस भेजा ही नहीं। उन्होंने तो TDS काटे जाने की जानकारी भर माँगी थी।

दिसंबर, 2018 में भेजी थीं TDS नोटिसें

CBDT के अनुसार उसने केवल दिसंबर, 2018 में करीब 30 दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस भेज कर यह पूछा था कि उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्टरों और इवेंट मैनेजरों के भुगतान में जो TDS काटा था, उसका क्या ब्यौरा है। इसके अलावा मीडिया रिपोर्टों में लगाए जा रहे दुर्गा पूजा समितियों को इनकम टैक्स नोटिस के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। इस वर्ष दुर्गा पूजा समिति फ़ोरम को कोई नोटिस जारी ही नहीं हुआ है।

अपने कथन में आयकर विभाग की चोटी की संस्था ने कहा कि यह TDS नोटिसें कॉन्ट्रैक्टरों और इवेंट मैनेजरों के टैक्स भुगतान सुनिश्चित करने के लिए थीं। और बहुत सारी समितियों ने टीडीएस काटने और उसे सरकारी खजाने में जमा किए जाने का सबूत भी दिया

अब क्या कहेगी तृणमूल?

तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह दुर्गा पूजा समितियों जैसे स्थानीय संगठनों को भाजपा के लिए काम करने पर मजबूर करना चाहती है, इसीलिए उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है। उनका दावा था कि आयकर विभाग (IT विभाग) ने दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस भेज कर टैक्स देने के लिए कहा है।