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अमेठी के समीकरणों से परेशान कॉन्ग्रेस, राहुल को केरल से भी लड़ाने की अटकलें

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था ठीक उसी तर्ज पर इस बार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी दो सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। राहुल गाँधी के केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने की जानकारी केरल के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने दी।

उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी द्वारा दूसरी सीट से चुनाव लड़ने पर पिछले क़रीब एक महीने से विचार किया जा रहा था। हालाँकि इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि दो सीट से चुनाव लड़ने के लिए राहुल तैयार नहीं थे, लेकिन काफ़ी समझाने-बुझाने के बाद राहुल इस सीट से लड़ने के लिए तैयार हो गए।

बता दें कि लोकसभा का परिसीमन होने के बाद साल 2008 में केरल की वायनाड सीट अस्तित्व में आई थी। यह सीट कन्नूर, मलाप्पुरम और वायनाड संसदीय क्षेत्र को मिलाकर बनी है। इससे पहले कॉन्ग्रेस के एमएल शाहनवाज़ इस सीट पर दो बार अपनी जीत दर्ज कर चुके हैं।

राहुल के अलावा उनकी दादी इंदिरा गाँधी और माँ सोनिया गाँधी दोनों ही दक्षिण से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। 1978 में इंदिरा गाँधी ने केरल की चिकमगलूर से लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। अपनी सास के नक्शेक़दम पर चलते हुए, राजनीति में आने के तुरंत बाद, सोनिया गाँधी ने 1999 का लोकसभा चुनाव दो सीटों- कर्नाटक की बेल्लारी और उत्तर प्रदेश में अमेठी से लड़ा। उन्होंने बेल्लारी से भाजपा नेता सुषमा स्वराज और अमेठी से संजय सिंह को हराया था।

फ़िलहाल, राहुल द्वारा केरल की सीट पर चुनाव लड़ने को एक डर की तरह देखा जा रहा है कि कहीं उन्हें अपने गढ़ में हारने की संभावना तो नहीं जिससे कॉन्ग्रेस उन्हें दो जगहों से चुनाव लड़ने की जुगत की जा रही है।

कॉन्ग्रेस ने बचपन के दिन याद दिलाए, फिर भी सलमान ने MP में चुनाव प्रचार से किया इनकार

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी ने अभिनेता सलमान खान के ट्वीट पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की अटकलों को ख़ारिज किया गया है। लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ और सलमान खान के बीच एक बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अभिनेता कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले हैं और राज्य में पार्टी के प्रचार में भी शामिल होंगे।

नई दुनिया की ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लोकसभा चुनाव की तारीखों के घोषणा से पहले फिल्म अभिनेता सलमान खान से बात की थी। इस बारे में उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बताया था कि उन्होंने सलमान और मध्य प्रदेश से उनके रिश्ते को याद कराया और मध्य प्रदेश के विकास में उनके योगदान की अपील की थी। योगदान के रूप में सलमान खान को मध्य प्रदेश में पर्यटन प्रमोशन का काम ऑफ़र किया गया था। सीएम कमलनाथ की घोषणा ने अटकलों को हवा दे दी थी कि सलमान खान कॉन्ग्रेस में शामिल होंगे और इंदौर की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

कॉन्ग्रेस नेता पंकज चतुर्वेदी ने दावा किया था कि पार्टी नेताओं ने इंदौर में चुनाव प्रचार के लिए सलमान खान से बात की है। बता दें कि सलमान का जन्म इंदौर के पलासिया इलाक़े में हुआ था और उन्होंने बचपन के कुछ साल इसी शहर में गुजारे थे। 2009 में, सलमान ने एक रोड शो में भाग लिया था और कॉन्ग्रेस के महापौर उम्मीदवार के लिए प्रचार किया था।

इसके बीच मध्य प्रदेश के मांडू शहर में सलमान खान के पहुँचने की ख़बर वायरल हुई तो कयास तेज़ हो गए कि सलमान कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए हैं और वो वहाँ चुनाव प्रचार के लिए आए हैं। हालाँकि, बाद में यह स्पष्ट किया गया कि मांडू में वो केवल शूटिंग शेड्यूल के लिए थे। इन अफ़वाहों पर सलमान खान ने ख़ुद ट्वीट के ज़रिए विराम लगाया और राजनीति में आने संबंधी अफ़वाहों को ख़ारिज किया।

इसके बाद, मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी ने एक स्पष्टीकरण भी जारी किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि सलमान खान को पार्टी से चुनाव लड़ने और चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने के लिए कोई भी प्रस्ताव नहीं दिया गया। बता दें कि सुमित्रा महाजन इंदौर से भाजपा की मौजूदा सांसद हैं।

TMC ने कॉन्ग्रेस को किया ‘डिलीट’, नया लोगो जारी

1998 में भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC) से अलग अपनी नई पार्टी खड़ी करने वाली ममता बनर्जी ने अब एक बार फिर कॉन्ग्रेस से रिश्‍ता तोड़ लिया है। करीब 21 साल के बाद TMC पार्टी ने अपनी पार्टी के नाम तृणमूल कॉन्ग्रेस से ‘कॉन्ग्रेस’ को अलग कर लिया है। ममता बनर्जी की पार्टी ने नया लोगो जारी किया है, जिसमें पार्टी का नाम सिर्फ ‘तृणमूल’ ही दिया गया है।

पार्टी के नए लोगो में हरे रंग से ‘तृणमूल’ लिखा है, जिसके ऊपर नीले बैकग्राउंड पर दो फूल बने हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इसे अगले एक हफ्ते तक प्रयोग किया जाएगा। पार्टी के नेताओं के अनुसार अब समय बदल रहा है, 21 साल के बाद पार्टी अपने नए नाम के साथ सामने आ रही है।

पार्टी ने अपने सभी बैनर, पोस्‍टर और सभी संचार के साधनों से कॉन्ग्रेस का नाम हटा दिया है। पार्टी के आधिकारिक फेसबुक एवं ट्विटर पेज, मुख्‍यमंत्री, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी और तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नया लोगो लगा लिया है। हालाँकि, चुनाव आयोग में फिलहाल पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नाम से ही रजिस्‍टर रहेगी।

वर्ष 1998 में वर्तमान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कॉन्ग्रेस से अलग हो गई थी और तत्कालीन सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) के साथ मतभेद पर TMC का गठन कर लिया था। करीब 21 साल बाद TMC को अब तृणमूल किया जा रहा है।

NDA बिहार की 40 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान: रवि शंकर प्रसाद अंदर, शत्रुघ्न सिन्हा बाहर

बिहार में एनडीए ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बिहार भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण यादव और एलजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस मौजूद थे।

इस लिस्ट के मुताबिक भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर जबकि लोजपा 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पूर्वी चंपारण से राधामोहन सिंह, दरभंगा से गोपाल जी ठाकुर, बेगूसराय से गिरिराज सिंह, भागलपुर से अजय कुमार मंडल, पटना साहिब से रवि शंकर प्रसाद, औरंगाबाद से सुशील कुमार सिंह, नवादा से संजय कुमार और जमुई से चिराग कुमार पासवान चुनावी मैदान में उतरेंगे।

बता दें कि बिहार बीजेपी के बड़े चेहरे शाहनवाज हुसैन का टिकट इस बार कट गया है। इसके साथ ही पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काटते हुए केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद को चुनावी मैदान में उतारा गया है। वहीं गिरिराज सिंह की सीट नवादा से बदलकर बेगूसराय कर दिया गया है। उनकी जगह नवादा से संजय कुमार को टिकट दिया गया है।

बिहार एनडीए की तरफ से जारी की गई उम्मीदवारों की लिस्ट

गौरतलब है कि इससे पहले बीजेपी ने 36 प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट जारी की थी, जिसमें बड़े नाम के तौर पर भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा का नाम सामने आया, जो ओडिशा के पुरी से चुनाव लड़ेंगे। वहीं भाजपा की पहली लिस्ट में प्रमुख उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई। इस लिस्ट के मुताबिक पीएम मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के स्थान पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर से मैदान में उतरेंगे। गृह मंत्री राजनाथ सिंह अपनी पुरानी सीट लखनऊ से ही लड़ेंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी नागपुर से प्रत्याशी होंगे। वहीं स्मृति ईरानी अमेठी से चुनाव लड़ेंगी।

डॉ. लोहिया के साथ विश्वासघात करने वालों से हम देश सेवा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं : PM मोदी

23 मार्च को डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती है। 1936 में, उन्हें जवाहरलाल नेहरू द्वारा A.I.C.C. के विदेश विभाग के सचिव के रूप में चुना गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज डॉ. लोहिया के साथ-साथ भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्हें 1931 में इस दिन फाँसी दी गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘डॉ. लोहिया की याद में’ शीर्षक से लिखा गया ब्लॉग:—

आज का दिन देश के महान क्रांतिकारियों के सम्मान का दिन है।

माँ भारती के अमर सपूतों वीर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

इसके साथ ही अद्वितीय विचारक, क्रांतिकारी तथा अप्रतिम देशभक्त डॉ. राम मनोहर लोहिया को उनकी जयंती पर सादर नमन।

प्रखर बुद्धि के धनी डॉ. लोहिया में जन सरोकार की राजनीति के प्रति गहरी आस्था थी।

जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के शीर्ष नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया था, तब युवा लोहिया ने आंदोलन की कमान संभाली और डटे रहे। उन्होंने भूमिगत रहते हुए अंडरग्राउंड रेडियो सेवा शुरू की, ताकि आंदोलन की गति धीमी न पड़े।

गोवा मुक्ति आंदोलन के इतिहास में डॉ. लोहिया का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

जहाँ कहीं भी गरीबों, शोषितों, वंचितों को मदद की ज़रूरत पड़ती, वहाँ डॉ. लोहिया मौजूद होते थे।  

डॉ. लोहिया के विचार आज भी हमें प्रेरित करते हैं। उन्होंने कृषि को आधुनिक बनाने तथा अन्नदाताओं के सशक्तीकरण को लेकर काफी कुछ लिखा। उनके इन्हीं विचारों के अनुरूप एनडीए सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि सिंचाई योजना, e-Nam, सॉयल हेल्थ कार्ड और अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों के हित में काम कर रही है।   

डॉ. लोहिया समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और महिलाओं एवं पुरुषों के बीच की असमानता को देखकर बेहद दुखी होते थे। ‘सबका साथ, सबका विकास’ का हमारा मंत्र तथा पिछले पाँच सालों का हमारा ट्रैक रिकॉर्ड यह दिखाता है कि हमने डॉ. लोहिया के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। अगर आज वे होते तो एनडीए सरकार के कार्यों को देखकर निश्चित रूप से उन्हें गर्व की अनुभूति होती।

जब कभी भी डॉ. लोहिया संसद के भीतर या बाहर बोलते थे, तो कॉन्ग्रेस में इसका भय साफ़ नज़र आता था।

देश के लिए कॉन्ग्रेस कितनी घातक हो चुकी है, इसे डॉ. लोहिया भलीभाँति समझते थे। 1962 में उन्होंने कहा था, “कॉन्ग्रेस शासन में कृषि हो या उद्योग या फिर सेना, किसी भी क्षेत्र में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

उनके ये शब्द कॉन्ग्रेस की बाद की सरकारों पर भी अक्षरश: लागू होते रहे। बाद के कॉन्ग्रेस शासनकालों में भी किसानों को परेशान किया गया, उद्योगों को हतोत्साहित किया गया (सिर्फ़ कॉन्ग्रेस नेताओं के दोस्तों और रिश्तेदारों के उद्योगों को छोड़कर) और राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी की गई।

कॉन्ग्रेसवाद का विरोध डॉ. लोहिया के हृदय में रचा-बसा था। उनके प्रयासों की वजह से ही 1967 के आम चुनावों में सर्वसाधन संपन्न और ताकतवर कॉन्ग्रेस को करारा झटका लगा था। उस समय अटल जी ने कहा था – डॉ. लोहिया की कोशिशों का ही परिणाम है कि हावड़ा-अमृतसर मेल से पूरी यात्रा बिना किसी कॉन्ग्रेस शासित राज्य से गुजरे की जा सकती है !

दुर्भाग्य की बात है कि राजनीति में आज ऐसे घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखकर डॉ. लोहिया भी विचलित, व्यथित हो जाते।  

वे दल जो डॉ. लोहिया को अपना आदर्श बताते हुए नहीं थकते, उन्होंने पूरी तरह से उनके सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है। यहाँ तक कि ये दल डॉ. लोहिया को अपमानित करने का कोई भी कोई मौका नहीं छोड़ते।

ओडिशा के वरिष्ठ समाजवादी नेता श्री सुरेन्द्रनाथ द्विवेदी ने कहा था,“डॉ. लोहिया अंग्रेजों के शासनकाल में जितनी बार जेल गए, उससे कहीं अधिक बार उन्हें कॉन्ग्रेस की सरकारों ने जेल भेजा।”

आज उसी कॉन्ग्रेस के साथ तथाकथित लोहियावादी पार्टियाँ अवसरवादी महामिलावटी गठबंधन बनाने को बेचैन हैं। यह विडंबना हास्यास्पद भी है और निंदनीय भी है।

डॉ. लोहिया वंशवादी राजनीति को हमेशा लोकतंत्र के लिए घातक मानते थे। आज वे यह देखकर ज़रूर हैरान-परेशान होते कि उनके ‘अनुयायी’ के लिए अपने परिवारों के हित देशहित से ऊपर हैं।

डॉ. लोहिया का मानना था कि जो व्यक्ति ‘समता’, ‘समानता’ और ‘समत्व भाव’ से कार्य करता है, वह योगी है। दु:ख की बात है कि स्वयं को लोहियावादी कहने वाली पार्टियों ने इस सिद्धांत को भुला दिया। वे ‘सत्ता’, ‘स्वार्थ’ और ‘शोषण’ में विश्वास करती हैं। इन पार्टियों को जैसे तैसे सत्ता हथियाने, जनता की धन-संपत्ति को लूटने और शोषण में महारत हासिल है। गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित समुदाय के लोगों के साथ ही महिलाएँ इनके शासन में ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं, क्योंकि ये पार्टियाँ अपराधी और असामाजिक तत्त्वों को खुली छूट देने का काम करती हैं।

डॉ. लोहिया जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं के बीच बराबरी के पक्षधर रहे। लेकिन, वोट बैंक की पॉलिटिक्स में आकंठ डूबी पार्टियों का आचरण इससे अलग रहा। यही वजह है कि तथाकथित लोहियावादी पार्टियों ने तीन तलाक़ की अमानवीय प्रथा को ख़त्म करने के एनडीए सरकार के प्रयास का विरोध किया।

इन पार्टियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इनके लिए डॉ. लोहिया के विचार और आदर्श बडे़ हैं या फिर वोट बैंक की राजनीति?

आज 130 करोड़ भारतीयों के सामने यह सवाल मुँह बाए खड़ा है कि – जिन लोगों ने डॉ. लोहिया तक से विश्वासघात किया, उनसे हम देश सेवा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

ज़ाहिर है, जिन लोगों ने डॉ. लोहिया के सिद्धांतों से छल किया है, वे लोग हमेशा की तरह देशवासियों से भी छल करेंगे।

PM नरेंद्र मोदी ने Pak के ‘नेशनल डे’ पर नहीं दी बधाई: झूठ बोल रहे इमरान खान

जेहादियों को गोद में बिठाकर पाकिस्तान अपना ‘नेशनल डे’ मना रहा है जिसका भारत ने सभी मंचों से बॉयकॉट करने का निर्णय लिया है। फिर भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर यह कहा कि नरेंद्र मोदी ने नेशनल डे की बधाई दी है। इसकी सच्चाई को जानने के लिए थोड़ी ऐतिहासिक जानकारी आवश्यक है।

पाकिस्तान प्रतिवर्ष 23 मार्च को उसी प्रकार नेशनल डे मनाता है जैसे भारत में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। भारत में गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 26 जनवरी 1929 को पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी और 1950 में उसी दिन संविधान भी लागू हुआ था।

पाकिस्तान भी अपना नेशनल डे उसी तर्ज पर मनाता है। 23 मार्च 1940 को ऑल इंडिया मुस्लिम लीग द्वारा लाहौर प्रस्ताव पास किया गया था जिसमें भारत के उत्तर पश्चिमी और पूर्वी भाग के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए अलग स्वायत्त राज्य की मांग की गई थी। सन 1956 में 23 मार्च के दिन ही पाकिस्तान का संविधान भी लागू हुआ था। लेकिन इतने कानूनी तामझाम करने के बाद भी विश्व का पहला इस्लामिक रिपब्लिक सभ्य और प्रगतिशील नहीं हो पाया। भारत के विरुद्ध आतंकवाद की नीति जारी रखने के कारण आज पाकिस्तान से लगभग सभी देश किनारा कर रहे हैं।

भारत ने पुलवामा हमले का बदला एयर स्ट्राइक से लेने के बाद अब पाकिस्तान के नेशनल डे का भी बहिष्कार कर दिया है क्योंकि पाकिस्तान ने नेशनल डे पर हुर्रियत के नेताओं को भी निमंत्रण दिया था। भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन में नेशनल डे पर आमंत्रित सभी लोगों से आग्रह किया है कि वे पुलवामा हमले के आलोक में पाकिस्तानी नेशनल डे का बहिष्कार करें।

पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर सरकारी अधिकारी सभी को इस बात की सूचना दे रहे हैं कि भारत पाकिस्तान के नेशनल डे का बहिष्कार करता है और जो भी इस आयोजन में आमंत्रित हैं वे अपने विवेकानुसार निर्णय करें कि उन्हें पुलवामा हमले के दोषी देश के समारोह में जाना चाहिए या नहीं।

इमरान खान का ट्वीट पढ़कर मीडिया ने खबर उड़ाई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को नेशनल डे की बधाई व्यक्तिगत रूप से दी है। लेकिन इसमें कोई सच्चाई नज़र नहीं आती क्योंकि नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक ट्वीट से ऐसा कोई ट्वीट अभी तक नहीं किया है।

हालाँकि पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग ने औपचारिकता निभाने के लिए बिना हस्ताक्षर का एक पत्र पाकिस्तान सरकार को भेजा था जिसे इमरान खान ने नरेंद्र मोदी की तरफ से बधाई के तौर पर प्रचारित किया। ध्यान रहे कि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास और उच्चायोग के अधिकारियों को इस प्रकार की औपचारिकताएँ निभानी पड़ती हैं लेकिन इमरान खान ने इसे भारतीय प्रधानमंत्री की ओर से प्राप्त हुई बधाई के रूप में प्रचारित करते हुए ट्वीट किया। उस पत्र में दक्षिण एशिया में आतंकवाद को समाप्त करने की बात भी लिखी थी जिसे छिपाकर इमरान खान ने अपने हिसाब से व्याख्या की और बधाई स्वीकार करने का नाटक किया।

न्यूज़ीलैंड की मस्जिद पर हमले से दु:खी बांग्लादेशी क्रिकेटर ने अपनी ‘Cousin’ से किया निकाह

बांग्लादेश में क्रिकेट का मैदान मानो शादी की शहनाई से गूँज उठा हो क्योंकि पेसर मुस्तफ़िज़ुर रहमान ने ढाका विश्वविद्यालय की छात्रा सामिया परवीन के साथ निकाह के बंधन में बंध गए जो रिश्ते में उनकी कज़िन लगती हैं। चूँकि कज़िन (cousin) शब्द का अर्थ चचेरा, ममेरा, फुफेरा कुछ भी हो सकता है इसलिए यह निश्चित नहीं है कि सामिया के साथ मुस्तफिजुर का रिश्ता क्या कहलाता है। बता दें कि इस्लाम में कज़िन के साथ निकाह किया जाना जायज़ माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक़ निकाह शुक्रवार शाम को बांग्लादेश के सातखिरा के हादीपुर में सम्पन्न हुआ, जहाँ दूल्हा दुल्हन के परिवार समेत अन्य रिश्तेदार भी मौजूद थे। मुस्तफिजुर के भाई, महफ़ूज़ुर रहमान मिठू ने देशवासियों से नव-दंपत्ति के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

मिठू ने कहा, “न्यूज़ीलैंड में हुई घटना के बाद मुस्तफिजुर घर आने के बाद बहुत परेशान था। इसीलिए हमने उससे शादी करने के लिए कहा। निकाह का यह निर्णय मेरी माँ ने लिया था। फ़िलहाल निकाह का रिसेप्शन विश्व कप के बाद होगा।”

बांग्लादेशी क्रिकेटर पेसर मुस्तफ़िज़ुर रहमान के निकाह की ख़बर जैसे ही लोगों की नज़र में आई वैसे ही सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तफ़री ली गई। किसी ने लिखा कि ख़ुशी में शायद तलाक़ लेंगे और किसी ने लिखा कि ये क्या सच में कोई न्यूज़ है, या कोई मज़ाक है वरना ”ऐसा कौन करता है भई”।

बता दें कि बीते शुक्रवार (15 मार्च) की सुबह न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर के अल नूर मस्जिद में गोलीबारी हुई थी जिसमें कई लोगों के हताहत होने की ख़बर थी। इस घटना के बारे में न्यूज़ीलैंड पुलिस ने अपने बयान में क्राइस्टचर्च में गंभीर स्थिति पैदा होने की स्थिति को स्वीकारा था हमले से बिगड़ते हालात में शहर के सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया था और भीड़भाड़ वाले इलाक़े से बचने की सलाह दी गई थी।

कन्हैया को 3 साल स्टेज पर परफ़ॉर्म करवाकर, महागठबंधन ने कहा- आगे बढ़ो!

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव के बीच पिछले कुछ महीनों से काफी नज़दीकियाँ देखी जा रही थी। दोनों साथ में मंच साझा करते और एक दूसरे के पक्ष में बोलते नज़र आ रहे थे जिसको लेकर ये कयास लगाया जा रहा था कि तेजस्वी, कन्हैया कुमार को गठबंधन में शामिल करेंगे या टिकट देंगे। लेकिन बिहार में महागठबंधन के बीच सीटों के बँटवारे के साथ ही ये साफ हो गया कि महागठबंधन ने कन्हैया को दूध में गिरी मक्खी की तरह निकालकर फेंक दिया। महागठबंधन ने कन्हैया को 3 साल चुनावी मंच पर परफ़ॉर्म करवाकर आगे का रास्ता दिखा दिया है।

महागठबंधन में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) को भी जगह नहीं मिली। लिहाज़ा कन्हैया कुमार का राजनीतिक भविष्य अंधेरे में जाता दिख रहा है। दरअसल कन्हैया सोच रहे थे कि आरजेडी के नेतृत्व में महागठबंधन में सीपीआई शामिल होगी और उनको आसानी से लोक सभा का रास्ता मिल जाएगा। मगर क्रिकेट की तरह राजनीति भी अनिश्चितताओं का खेल है, जहाँ कई बार वह नहीं होता जिसकी उम्मीद की जाती है।

सीपीआई ने पहले ही कन्हैया कुमार को बेगूसराय से उम्मीदवार घोषित कर दिया था, तो अब ऐसे में बेगूसराय सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने वाला है। एक तरफ आरजेडी बेगूसराय सीट से तनवीर हसन को मोर्चे पर उतारेगी, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की तरफ से गिरिराज सिंह को उतारा जाएगा। इन दोनों दिग्गज नेताओं के बीच में से बेगूसराय सीट निकाल पाना कन्हैया के लिए काफी मुश्किल होगा।

बिहार के महागठबंधन में सीपीआई को शामिल नहीं किए जाने पर पार्टी के महासचिव सुधाकर रेड्डी ने दुख जताते हुए कहा कि इस मामले में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद से सहमति कायम होने के बावजूद उन्होंने इस पर अमल नहीं किया, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।

बता दें कि लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में महागठबंधन के बीच सीटों के बँटवारे का ऐलान हो गया है। आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राजद 20, कॉन्गेस 9, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) को 5, जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को 3 और मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को 3 सीटें दी गई है।

इस बीच कुछ विवादित सीटों को लेकर मामले सुलझाने की कोशिश की जा रही है। माले और रालोसपा, काराकाट सीट के लिए अड़े हुए हैं। वहीं वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी दरभंगा सीट चाहते है, जबकि कॉन्ग्रेस इस सीट पर कीर्ति आजाद को उतारना चाहती है। इसके साथ ही खबर है कि भाजपा के बागी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा 24 मार्च को कॉन्ग्रेस में शामिल हो सकते हैं और पार्टी की तरफ से उन्हें पटना साहिब सीट से उतारा जा सकता है। हालाँकि पहले शत्रुघ्न सिंहा के राजद में शामिल होने की खबरें आ रही थी। वहीं शरद यादव राजद की टिकट पर मधेपुरा से चुनाव लड़ेंगे। राजद एवं कॉन्ग्रेस के बीच चार या पाँच सीटों को लेकर मामला फंसा हुआ है। जिस पर सहमति बनने के बाद दूसरे फेज में इसकी घोषणा की जाएगी।


BJP ने जारी की लोकसभा प्रत्याशियों की दूसरी लिस्ट, संबित पात्रा पुरी से लड़ेंगे चुनाव

लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र बीजेपी ने देर रात अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट के जरिए आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा की सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में हुई पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की चौथी बैठक के बाद इन 36 उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगी।

इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम भाजपा के तेज़ तर्रार राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा का है, जो ओडिशा की धार्मिक नगरी पुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले पुरी की सीट से इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लड़ने की खूब चर्चा थी, मगर इस लिस्ट के जरिए बीजेपी ने इन अटकलों पर भी विराम लगा दिया। इसके साथ ही दूसरी लिस्ट में गिरीश बापट का नाम भी शामिल है, जो महाराष्ट्र की पुणे लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। जारी की गई 36 उम्मीदवारों की लिस्ट में 23 उम्मीदवार आंध्र प्रदेश के हैं, जहाँ पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होगा। महाराष्ट्र से 6 और ओडिशा के 5 उम्मीदवारों के नाम है। इसके अलावा असम और मेघालय से भी एक-एक नाम शामिल है।

गौरतलब है कि बीजेपी ने गुरुवार (21 मार्च 2019) को 184 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। जिसमें प्रमुख उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई। इस लिस्ट के मुताबिक पीएम मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के स्थान पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर से मैदान में उतरेंगे। गृह मंत्री राजनाथ सिंह अपनी पुरानी सीट लखनऊ से ही लड़ेंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी नागपुर से प्रत्याशी होंगे। वहीं स्मृति ईरानी अमेठी से चुनाव लड़ेंगी।

बता दें कि बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के अलावा तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए भी उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 51 उम्मीदवारों, ओडिशा विधानसभा चुनाव के लिए 22 उम्मीदवारों और मेघालय के सेलसेला विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए एक उम्मीदवार की लिस्ट जारी की है।

राबर्ट ठठेरा की ‘लाल डायरी’ लगी ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल के हाथ, गंभीर खुलासे

अस्सी और नब्बे के दशक की बॉलीवुड की फिल्मों में एक ख़ास बात हुआ करती थी कि विलेन चाहे शक्ल से चांदनी चौक पर झालमुड़ी बेचने वाले जितना बेबस, लाचार और दीन-हीन ही क्यों न दिखता हो, लेकिन उस ‘डागर साब’ के पास एक लाल डायरी और अटैची जरुर हुआ करती थी। इस लाल डायरी के साथ अगर विलेन गंजा भी हो, तो ये घातक मिश्रण उसे सारी कायनात के साथ मिलकर सदी का सबसे खतरनाक विलेन साबित कर देने में जुट जाती थी।

ऐसी ही एक ‘लाल डायरी’ ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल के हाथों लगी है, जिसके पन्नों की गहराई में जाने से ये संकेत मिलता है कि ये कोई आजादी के बाद से ही शाही शरण प्राप्त भूमिभक्षी दामाद रहा होगा। इस लाल डायरी में वर्णित सभी लेखों को पढ़ने के बाद आपके अंदर भी ऐसी तीव्र कामना जन्म ले बैठेगी, जो आपको भी राबर्ट ठठेरा के दिव्य दर्शन प्राप्त करने के लिए व्याकुल कर देगी।

इस डायरी में लिखे गए खुलासों से यह महसूस होता है कि विलक्षण प्रतिभा के धनी इस भूमिभक्षी राबर्ट ठठेरा की नज़र जहाँ पड़ती है, वह ज़मीन फ़ौरन उसके नाम हो जाती है। इस डायरी को पढ़कर आपके मुँह से बस एक ही शब्द निकलेगा, वो है ‘नमन’।

जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए ‘सॉल्ट न्यूज़’ से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके ‘वायरल’ होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया। साथ ही उन्होंने ‘एक्सपोज़’ करते हुए ये भी बताया कि उनके नाम 2019 के लोकसभा चुनाव तक उभरता हुआ ‘इंटरनेट ट्रॉल’ बनने का आदेश जिस पत्र में आया था, उसमें भी इसी डायरी की सौंधी-सौंधी महक थी।

देखते हैं कि अपने सुख-दुःख को इस ‘भूमिभक्षी’ साहित्यकार किसान, यानि राबर्ट ठठेरा ने किस प्रकार से सुन्दर पंक्तियों में अपनी इस लाल डायरी में पिरोया है।

प्रियंका बनेगी महासचिव 2009

डायरी के पहले पन्ने  से खुलासा हुआ है कि किसी ‘प्रियंका’ नाम की महिला को यह लेखक महासचिव बनता देखना चाहता था। सॉल्ट न्यूज़ ने इस पन्ने की कार्बन डेटिंग निकालकर बताया कि इस पन्ने के ऊपर ही 20 अक्टूबर 2003 की तारीख लिखी गई थी, जिसका मतलब है कि ये लेख जरुर 20 अक्टूबर 2003 को ही लिखा गया होगा।

15 लोगों को पद्म श्री और 18 को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिलाने की थी योजना

12 अप्रैल 2011 को लिखे गए इस पन्ने में किसान राबर्ट ठंठेरा ने ‘लगभग’ 15 लोगों को पद्म पुरस्कार और 18 लोगों को साहित्य अकादमी पुरस्कार का टेंडर पीएमओ को भेजने का जिक्र किया है। साथ ही इस टेंडर के पीछे कारणों  के बारे में लिखा गया है कि भविष्य में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के कारण आने वाले कठिन दिनों में, थोक में बाँटे गए इन पुरुस्कारों द्वारा तैयार की गई ये ‘बुद्दिजीवी टुकड़ियाँ’ इन्हीं पुरस्कारों को लौटाकर भाजपा को लोकतंत्र की हत्या करने से रोकने के काम आएँगी।

लोकसभा चुनाव 2019 की बना रहा था प्लानिंग

लाल डायरी से होने वाले खुलासों में सबसे तगड़ा खुलासा 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर है। राबर्ट ठठेरा नाम के इस किसान लेखक ने इस पन्ने में अपने मन की बात लिखी है। 02 अक्टूबर 2018 को लिखे गए इस पन्ने में लेखक ने फ्लेक्स और बैनर मुरादबाद से लेकर गाजियाबाद तक के कार्यकर्ताओं को सौंपकर उन्हें 2019 के चुनाव से पहले वायरल करने का जिक्र किया है। इस में यह भी लिखा गया है कि वो 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

चंद्रयान में भेजना चाहते हैं ‘अपना आदमी’ #लॉन्गटर्म_गोल्स

राबर्ट ठठेरा नाम के इस व्यक्ति के पत्रों में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जैसी दूरदर्शी नजर देखने को मिली है। 15 दिसंबर 2017 के दिन इस डायरी में जिक्र किया गया है कि चंद्रयान-II के जरिए चन्द्रमा पर अपना आदमी भेजकर जमीन बुक करवाई जाएगी। समकालीन साहित्यकारों से प्रभावित होकर उन्होंने अपने लेख के अंत में कुछ हैशटैग भी लगाए हैं, जिनमे लिखा है कि ये उनके लॉन्ग टर्म गोल्स हैं। शायद यह किसान चाँद पर जमीन बुक कर के वहाँ भी ‘खेती’ करना चाहता था।

राहुल को ATM जाता देख फूट-फूटकर रोए थे राबर्ट ठठेरा #नोटबंदी

इस पन्ने पर लिखे गए इन अश्रुपूरित कालजयी शब्दों को देखकर पता चलता है कि यह किसी फासिस्ट सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के दौरान लिखी गईं थी। राबर्ट ठठेरा का दुःख इसमें खुद को लेकर नहीं बल्कि राहुल गाँधी जी को उस लम्बी कतारों में लगते देखकर उमड़ा है, जिसके बारे में सक्रिय मीडिया गिरोह ने भी लिखा था। गुस्से में राबर्ट ठठेरा ने मंगल ग्रह पर जमीन खरीदने का भी निर्णय लिया है। जिस तरह से साबू को गुस्सा आने पर बृहस्पति ग्रह पर ज्वालामुखी फूटता था उसी तरह से राबर्ट ठठेरा को जब भी गुस्सा आता है, तो किसी ना किसी ग्रह पर जमीन इसके नाम हो जाती है। ऐसे आँकड़ें वास्तविक हैं या नहीं लेकिन 9 बजे के विशेष समय में टेलीविजन ना देखने की सिफारिश करने वाले एक मनचले पत्रकार का कहना है, “हें हें हें, ये सच है।”

राहुल गाँधी के विवाह की चिंता

लाल डायरी के लेखक राबर्ट ठठेरा की चिंता सिर्फ प्रियंका तक ही सीमित नहीं, बल्कि देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी के चिरयुवा की शादी को लेकर भी थी। इस पन्ने की यदि तारीख देखी जाए, तो पता चलेगा की 22 मार्च 2001 के दिन भी राहुल गाँधी युवा थे और अब समय के साथ वे ‘चिर युवा’ हो चुके हैं। शायद वो NDTV पर नजर आने वाले पतंजलि के विज्ञापनों और उन के उत्पादों का भरपूर प्रयोग करते हैं, जो 48 की उम्र में भी उनके ‘चिर युवा’ विशेषण को बनाए रखने में सहायता कर रहा है। वरना अगर देखा जाए तो आम आदमी पार्टी अध्यक्ष और मौका देखते ही धरना देने की क्षमता रखने वाले सर अरविन्द केजरीवाल (50) और राहुल गाँधी (48) की उम्र में मात्र 2 वर्ष का ही तो अंतर है।

अमेरिका में बैठे देसी मूल के टेक एक्सपर्ट को भेजना था पैसा

शूजा नाम के किसी टेक एक्सपर्ट को EVM सम्बंधित कामों का ठेका देने के लिए पैसा देने की बात इस लाल डायरी में 03 जनवरी  2019 को लिखी गई है। इससे पता चलता है कि यह किसान राबर्ट ठठेरा सिर्फ भूमि में ही नहीं बल्कि देश में टेक्नोलॉजी के बढ़ावे के प्रति भी संवेदनशील था। इसका कहाँ है कि यदि यह विदेश में बैठकर लाइव प्रसारण कर दे तो वो खुद ही टेक एक्सपर्ट कहलाएगा।

वीरप्पन और चंदन के जंगल

चंदन तस्कर वीरप्पन की मौत पर राबर्ट ठठेरा ने ख़ुशी जताई है, लेकिन साथ ही ‘डेविल इमोजी’ बनाकर चन्दन के जंगलों के भविष्य को लेकर प्रश्नवाचक चिह्नों के ज़रिये अपने विचार भी जाहिर किए हैं।

BJP जॉइन कर होना चाहते हैं भगवा, आखिर क्यों?

मार्च 2019 में लिखे गए इस नोट में राबर्ट ठठेरा ने भाजपा जॉइन करने की इच्छा जताई है। इसके पीछे उनकी मोटिवेशन उनकी ‘पिंक कलर’ की पैंट नजर आ रही है। रंगीन मिजाज राबर्ट वाड्रा के पास इस तरह से ‘ऑफ पिंक’ और ‘लाईट भगवा’ का मिश्रण हो जाएगा और साथ ही उसको लगता है कि ऐसा करने से उसे रोजाना ED दफ्तर के चक्कर से छुटकारा मिल पाएगा और उन्हें सोशल मीडिया पर अपनी बूढ़ी मम्मी के साथ वाली तस्वीरें भी नहीं डालनी पड़ेंगी।

हवा पर अधिकार करने की महत्वकांक्षा के चलते 2G को समझने की प्रबल इच्छा

लग्नशील राबर्ट वाड्रा के संज्ञान में जब 2G पहली बार आया था तब उसने उसी दिन से इस पार आगे काम करने की इच्छा इस डायरी के पन्नों में जाहिर कर दी थी। जमीन घोटालों से शायद वो उसी दौरान ऊब चुके थे और ‘फॉर अ चेंज’ हवा पर कब्जा कर के अपने सपनों को नई ऊँचाई देना उनका सपना बन चुका था। राबर्ट ठठेरा को बचपन में ही उनकी आई ने सीख दी थी कि कोई भी धंधा बड़ा या छोटा नहीं होता।