प्रधाममंत्री मोदी द्वारा बुधवार (फरवरी, 27 2019) को नेशनल यूथ पार्लियामेंट फेस्टीवल के मौके पर नई दिल्ली में ‘खेलो इंडिया ऐप’ को लॉन्च किया गया था। इस एप्लीकेशन का उद्देश्य देश के लोगों के भीतर खेल और फिटनेस को लेकर जागरूकता फैलाने से संबंधित है। लेकिन, इस ऐप के लॉन्च से कुछ विशेष समुदाय के लोग बहुत आहत हुए और उन्होंने ट्वीट के ज़रिए पीएम को बताया कि उन्हें कुछ समय तक के लिए इसे टाल देना चाहिए था।
इस प्रकार की सलाह देने वालों में एक नाम बरखा दत्त का भी है। जिन्होंने ट्वीट किया है कि उन्हें लगता है कि पीएम मोदी को इस ऐप को लॉन्च करने का कार्यक्रम कुछ समय के लिए टाल देना चाहिए था क्योंकि इस समय हमारा एक युवा पायलट पाकिस्तान के पास है।
With respect, I do feel the launch of this Khel App could have been postponed given that one of our young pilots is in Pakistan custody. I know the forces have a free hand but more communication and sensitivity from GOI called for https://t.co/Mt8w4EgQHH
बरखा के इस ट्वीट के जवाब में भारत की बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल ने लिखा कि खेलो इंडिया ऐप की लॉन्चिंग यूथ पार्लियमेंट फेस्टीवल का हिस्सा थी। इसकी लॉन्चिंग का मकसद युवाओं को सांस्कृतिक, भौगोलिक और आर्थिक रूप से जोड़ना था। सायना ने लिखा कि सभी को एक जुट करने के लिए इससे अच्छा समय और क्या हो सकता है। सायना ने बरखा की इस आलोचना को पूर्ण रूप से अनावश्यक बताया।
The launch of the Khelo India App was part of the Youth Parliament Fest, which was organised to appeal to the youth to unite India geographically, culturally and economically. What better time than now to strengthen the unity of our youth? This criticism is uncalled for ..
इस ऐप की लॉन्चिंग पर खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का कहना है कि भारत ने खेलों की दिशा में आज लंबी छलांग लगाई है। साथ ही उन्होंने इस ऐप को देश में फिटनेस और खेल के पहलू के लिहाज़ से ज़रूरी बताया। उनका मानना है कि इससे छोटी उम्र में प्रतिभा की पहचान करने और उसे निखारने में मदद मिलेगी।
बरखा के इस ट्वीट पर न केवल सायना ने बल्कि बहुत से लोगों ने खेलो इंडिया ऐप के लॉन्च का समर्थन किया और उनके ट्वीट को अनावश्यक बताया। दरअसल, जिस समय प्रधानमंत्री को विंग कमांडर के पाकिस्तान में होने की सूचना दी गई, उस समय वह ऐप लॉन्च हो चुकी थी और प्रधानमंत्री जनता को संबोधित कर रहे थे। लेकिन, जैसे ही उन्हें यह ख़बर मिली उन्होंने जल्द से जल्द कार्यक्रम खत्म किया और विज्ञान भवन पहुँचे।
“Khelo India” app was launched and then as he was finishing his audience interactions, he was informed of the action on the border. He quickly finished the program and left VigyanBhawan
लेकिन, बरखा दत्त और पत्रकारिता के गिरोह से जुड़े कुछ ख़ास लोग इसकी आलोचना करने से बाज नहीं आ रहे हैं। शाह फैसल ने अपने बौद्धिक स्तर पर इस ऐप के उपयोग सिर्फ़ PubG खेलने तक के लिए ही सोच पाए।
While the soldiers are forced to go for war, the politicians and newsanchors of this country will play PubG on KheloIndiaApp.
It can’t get more ridiculous than that.#SayNoToWar
आज देश आतंकवाद को लेकर एक निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। 14 फरवरी के दिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले में हमारे 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। जब मीडिया का एक वर्ग बलिदानी जवानों की जाति खोज रहा था, तब हमारे नीति नियंता और सेना इस योजना पर कार्य कर रही थी कि इस आतंकी हमले का जवाब कैसे देना है? हमारे जवान वापस नहीं आ सकते लेकिन दोषियों को सज़ा देना सरकार का कार्य है, जनता की माँग है। सरकार ने डॉक्टर मनमोहन सिंह वाला रुख न अपना कर आतंकियों को सबक सिखाने की ठानी और मंगलवार (फरवरी 26, 2019) को पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक के जरिए कड़ी कार्रवाई की।
पल-पल बदलता घटनाक्रम
भारत ने पिछले पाँच दशक में पहली बार पाकिस्तानी सीमा पार कर सैंकड़ों आतंकियों को जहन्नुम पहुँचा दिया। पल पल बदल रहे घटनाक्रम के बीच बौखलाए पाकिस्तान ने भारत स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में भारतीय वायु सेना ने एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराया। इतना कुछ होने के बाद इमरान ख़ान भी निकले और उन्होंने पुलवामा हमले की जाँच की बात कह शांति एवं बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। विडंबना यह कि सुबह में पाकिस्तानी सेना भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करती है और शाम को उस देश का मुखिया शांति की अपील करता है।
We said #SayNoToWar, didn’t save the innocents who lost their lives on 26/11. We said #SayNoToWar, didn’t save the lives of the 44 CRPF soldiers whose bodies were mangled beyond recognition. Your enemy won’t stop if you concede. He will push you to concede even more. #NationFirst
इस घटनाक्रम के बीच भारतीय लिबरल गैंग के एक समूह विशेष को ख़ास तवज्जोह नहीं मिल पा रही थी। पुलवामा हमले के बाद उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए जवानों की जान न बचा पाने का दोष मढ़ा था। सरकार की सक्रियता, प्रधानमंत्री की निर्णायक क्षमता और सेना के शौर्य का मिला जुला उदाहरण हमें ‘सर्जिकल स्ट्राइक 2’ के रूप में देखने को मिला। लिबरल गैंग ने इसके बाद वायुसेना की प्रशंसा करनी शुरू कर दी (जो होनी भी चाहिए)। लेकिन, हमने याद दिलाया कि कैसे डॉक्टर मनमोहन सिंह के समय भी यही वायुसेना थी, हमारे जवान तब भी साहसी, तैयार और शौर्यवान थे, यही मिराज 2000 था- लेकिन मुंबई हमलों में मारे गए पौने दो सौ लोगों के हत्यारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हमने बताया कि कैसे डॉक्टर सिंह ने तत्कालीन वायुसेना प्रमुख को एयर स्ट्राइक करने से मना कर दिया था और युद्ध के भय से सीमा पार खुले साँढ़ की तरह विचर रहे आतंकियों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने की कोई ज़रूरत नहीं समझी गई। जबकि इस सरकार ने कड़ा निर्णय लिया। पाकिस्तानी जवाबी कार्रवाई के बाद लिबरल गैंग सक्रिय हो उठा और उसने #SayNoToWar ट्रेंड कराना शुरू कर दिया। युद्ध के ख़िलाफ़ दलीलें दी जाने लगीं और युद्ध से बर्बाद हुए शहरों की तस्वीरों के जरिए जनता की भावनाओं को अपने पक्ष में करने की कोशिशें की जाने लगी। जनता को डराया जाने लगा कि युद्ध हुआ तो उनका और उनके इलाक़े का बुरा हाल होगा।
लिबरल गैंग की टाइमिंग और उनका कुटिल अभियान
सबसे बड़ी विडंबना तो यह कि युद्ध के ख़िलाफ़ रोना रोने वालों में वह भी शामिल हैं जो बन्दूक की नोक पर लाल सलाम बोल कर आज़ादी लेने की बात करते हैं। ये वो गैंग है, जो यूँ तो कभी शांति की बातें नहीं करेगा लेकिन ऐसे निर्णायक मौक़ों पर भारतीय हितों की परवाह किए बिना अपना घटिया एजेंडा चलाएगा। ऐसे समय पर जब हमारे देश की सेना पैंतरेबाज़ पाकिस्तान के किसी भी हमले का कड़ा प्रत्युत्तर देने के लिए तैयार बैठी है, युद्ध को लेकर हौवा फैलाने वालों को क्या सबसे पहले यह नहीं सोचना चाहिए कि यह सब शुरू कहाँ से हुआ? क्या आतंकियों पर कार्रवाई युद्ध को बढ़ावा देना है?
पाकिस्तानी चैनलों पर बरखा दत्त की दलीलें चलाई जा रही हैं। पाकिस्तानी पत्रकार भारतीय चैनलों पर आकर राजदीप सरदेसाई के विचारों का हवाला देते हैं। जो अपने देश, सरकार और सेना के साथ ही नहीं खड़ा है, उसके साथ क्या किया जाना चाहिए? सवाल पूछे जाने चाहिए, चर्चाएँ होनी चाहिए लेकिन देशहित की क़ीमत पर नहीं। लिबरल गैंग से हमारा पहला सवाल- क्या पाकिस्तानी आतंकी दशकों से भारत में जो कर रहे हैं, वो युद्ध नहीं है क्या? अगर वो युद्ध नहीं है तो आपको युद्ध की परिभाषा समझने की ज़रूरत है। इसके लिए हम अपना समय व्यर्थ नहीं करेंगे बल्कि वो आपको ख़ुद डिक्शनरी में जाकर देखना पड़ेगा।
युद्ध तो कब से चल रहा है…
आँकड़े बोलते हैं और कभी-कभी तमाचों का काम करते हैं। हालाँकि, यहाँ जिन आँकड़ों का जिक्र हम करने जा रहे हैं, वे हरेक भारतीय के लिए दुःखदाई है लेकिन हालात को पूरी तरह समझे बिना टिप्पणी नहीं की जा सकती। पिछले 27 वर्षों में जम्मू-कश्मीर में 41,000 जानें गई हैं। सरकारी डेटा के अनुसार, कश्मीर में प्रत्येक वर्ष औसत 1500 से भी अधिक जानें जाती हैं, यानी 1 दिन में क़रीब 4 लोग काल के गाल में समा जाते हैं। हमारे 14,000 नागरिक मारे गए और 5000 से भी अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हुए- क्या यह युद्ध नहीं है क्या? जवाबी कार्रवाइयों में 22,000 आतंकियों को मौत के घात उतारा गया।
आत्मघाती हमले, बम विस्फोट, हिंदुत्व के ख़िलाफ़ जिहाद का प्रशिक्षण, पाकिस्तान में भारत विरोधी भाषणों का खुलेआम प्रचार-प्रसार, भारत के सार्वजनिक स्थलों पर हमले, घुसपैठ, सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन, भारतीय मुस्लिम युवकों को बहकना, अलगाववाद की बात, कश्मीर की कथित आज़ादी के लिए ख़ूनी अभियान, भारतीय जवानों के ऊपर हमले पर हमले- यह सब क्या है? कौन कर रहा है? इसके मास्टरमाइंड कहाँ बैठे हैं? ये बातें लगभग सभी को पता है लेकिन युद्ध तो भारत भड़का रहा है न! बिना युद्ध के हमारे 5000 से भी अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं तो ठीक लेकिन 350 आतंकियों को मौत के घाट क्या उतारा गया, लिबरल गैंग की तो नींद ही उड़ गई।
Indian #SayNoToWar media activists are part of Pakistan’s 3rd front against India. We are already at war. More soldiers have died in this “peace” than the declared war. #SayNoToWar wallas want Pakistan to have a free hand to continue its terror war, don’t want to raise its costs. https://t.co/OganOv15Eh
1993 में मुंबई में बम ब्लास्ट, 1998 कोयम्बटूर बॉम्बिंग्स, 2001 में भारत की संसद पर हमला, 2002 में अक्षरधाम जैसे पवित्र स्थल को निशाना बनाया गया, 2003 और 2006 में मुंबई में ब्लास्ट्स, 2005 में दिल्ली में, 2006 में बनारस में, 2007 में समझौता एक्सप्रेस में धमाके, हैदराबाद में आतंकी कार्रवाई, 2008 में दिल दहला देने वाला 26/11, 2016 में उरी और पठानकोट- यह सब क्या था? क्या यह सब भारत के ख़िलाफ़ युद्ध नहीं था? लगातार एक पर एक हमले और बम ब्लास्ट कर भारतीय नागरिकों और जवानों को नुक़सान पहुँचाने के साथ-साथ भारत के बड़े सार्वजनिक स्थलों को बर्बाद करने की कोशिशें- इस से बढ़ कर युद्ध क्या होता है? उन्हें शांति का पाठ पढ़ाया आपने?
We said #SayNoToWar, didn’t save the innocents who lost their lives on 26/11. We said #SayNoToWar, didn’t save the lives of the 44 CRPF soldiers whose bodies were mangled beyond recognition. Your enemy won’t stop if you concede. He will push you to concede even more. #NationFirst
यह एक एकतरफा युद्ध है। आतंकियों और उनके पोषकों द्वारा भारत के ख़िलाफ़ चलाया जा रहा एकतरफा युद्ध। भारत तो बस आतंकियों पर कार्रवाई करता है, जो लिबरल गैंग की नज़र में युद्ध है। भारत की भूमि पर हुए हर एक आतंकी हमले के बाद अगर यहाँ के लिबरल्स ने ‘से नो टू वॉर’ ट्रेंड कराया होता तो शायद भारतीयों का मनोबल बढ़ता और आतंकियों के हौंसले पस्त होते। लेकिन, ऐसा न हो सका। उन्हें युद्ध के ख़िलाफ़ दलीलें तभी याद आई जब सरकार आतंकियों पर कड़े प्रहार करने का निश्चय कर चुकी है, कर रही है और आगे भी आतंकियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरतने की बात हो रही है।
क्या आतंकियों के हाथों हमारी क्षति तुम्हें सुकून देती है?
लिबरल गैंग से हमारा दूसरा सवाल- क्या आतंकियों को खुली छूट दे दी जाए कि वे जब चाहे आएँ और हम में से किसी की भी हत्या कर चलते बनें? हमारे ख़ुफ़िया तंत्र को सटीक जानकारी है कि वे आतंकी कहाँ छिपे हैं (एयर स्ट्राइक के दौरान बनाए गए सटीक निशानों को ही ले लीजिए), और यह सब जान कर भी सरकार अपने लोगों और जवानों को मरने के लिए छोड़ देती है तो फिर सरकार का औचित्य ही क्या? यह सही है कि युद्ध समस्या का हल नहीं है लेकिन आतंकियों का सफाया करना सरकार का दायित्व है, यह युद्ध नहीं है। युद्ध वो है जिसे आतंकियों द्वारा छेड़ा गया है, भारत के ख़िलाफ़। युद्ध वो है जो पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को संरक्षण और समर्थन देकर शुरू किया गया है।
बन्दूक की नाली पर सत्ता लेने की बात करने वाले जब #SayNoToWar का रोना रोने लगे, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है। इन्हें हमारे जवानों की चिंता तब नहीं सताती जब दंतेवाड़ा में नक्सलियों द्वारा धोखे से हमारे 76 सीआरपीएफ जवानों को मार दिया जाता है। इन्हें तब हमारे जवानों की चिंता नहीं सताती जब पुलवामा में एक साथ 40 जवानों को बम से उड़ा दिया जाता है। तब ऐसे अभियान नहीं चलाए जाते। तब युद्ध के ख़िलाफ़ दलीलें नहीं दी जाती। लेकिन, जैसे ही आतंकियों पर कार्रवाई का समय आता है, ये अपने बिल से निकल आते हैं और युद्ध बनाम शांति की बहस क्रिएट कर उसमें कूद पड़ते हैं।
Mistakes committed by Prithviraj Chauhan, Jawaharlal Nehru, Lal Bahadur Shashtri, Indira Gandhi, Atal Bihari Vajpayee & Manmohan Singh will not b repeated by PM @narendamodi who is determined to end Terroristan. It will b suicidal to #SayNoToWar. Its Fight to Finish: #NoworNever.
अभी समय है देशवासियों का मनोबल ऊँचा रखने का। अभी समय है ऐसा कोई भी पब्लिक परसेप्शन नहीं तैयार करने का, जिस से सरकार की सोच और निर्णयों पर गलत असर पड़े। अभी समय है जनता को समझाने-बुझाने का, युद्ध का हौवा दिखा कर डराने का नहीं। अभी समय है देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रख कर आतंकियों की निंदा करने का। अगर लिबरल गैंग में हिम्मत है तो आतंकियों द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध की जड़ तक पहुँचें और जनता को बताएँ कि युद्ध में कौन है और कौन नहीं। अगर सरकार, सेना और देश पर भरोसा नहीं रख सकते हैं तो देश को अपना कहना छोड़ दीजिए।
और #SayNoToWar वाले गीत उन आतंकियों को सुनाए जाने चाहिए जिन्होंने भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ रखा है। ये रोना उनके सामने रोना चाहिए जिन्होंने बिना युद्ध के ही हमारे 5000 से भी अधिक जवानों की जान ले ली। ये सीख उन्हें सिखाई जानी चाहिए जिन्होंने हमारे सैन्य ठिकानों पर हमले किए। भारत सरकार ने आतंकियों पर कार्रवाई की, यह शांति की दिशा में किया गया प्रयास है- युद्ध नहीं है। गलत समय पर गलत ट्रेंड चला कर जनता को बरगलाने के प्रयासों का पर्दाफाश किया जाना चाहिए।
भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद बालाकोट के नाम से हर व्यक्ति परिचित हो गया है। इस घटना से पहले शायद ही किसी आम व्यक्ति ने बालाकोट के बारे में जानने में दिलचस्पी जताई होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब बालाकोट पर आतंकियो को मारने के लिए इस प्रकार का हमला किया गया। लगभग 188 साल पहले भी महाराजा रणजीत सिंह की सेना ने बालाकोट की जमीन से 300 मुजाहिदीनों का सफाया किया था।
बालाकोट आज से नहीं बल्कि क़रीब 200 सालों से आतंकवाद का केंद्र रहा है। यहीं से जिहादियों की शुरूआत हुई थी जिसकी नींव सैयद अहमद शाह बरेलवी द्वारा रखी गई थी। स्वयं को इमाम घोषित कर बरेलवी ने जिहादियों की ऐसी फौज़ तैयार की थी, जो भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी हुकूमत कायम करना चाहते थे।
पाकिस्तानी लेखिका आयशा जलाल ने सैयद का जिक्र अपनी किताब पार्टिशंस ऑफ अल्लाह में भी किया है। सैयद बरेलवी का लक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी हुकूमत को स्थापित करना था। इसलिए उसने महाराजा रणजीत सिंह की सेना के ख़िलाफ़ जिहादियों को बड़ी तादाद में एकत्रित किया। बरेलवी ने अपनी जिहादी नीतियों से महाराजा को तंग कर रखा था जिसके कारण ही महाराजा रणजीत सिंह ने अपने पुत्र के नेतृत्व में पेशावर पर कब्जा करके उसे अपने राज्य से जोड़ा था।
Pakistani historian Ayesha Jalal says Balakot has became a great site of veneration not only for jihadis but also for Pak nationalists.
Barelvi went all the way from Raebareli (in UP,India) to Balakot through Balochistan and Afghanistan.He urged Pashtuns to fight Sikh Kafir rule pic.twitter.com/xFns48vZAj
पाकिस्तानी लेखक अजीज अहमद के अनुसार वर्तमान रायबरेली (यूपी) के रहने वाले सैयद अहमद शाह (1786-1831) ने ही बालाकोट को जिहाद का जन्मस्थली बनाया। जिहाद की शुरूआत के लिए बालाकोट का चुनाव बरेलवी द्वारा इसलिए भी किया गया था क्योंकि उसका मानना था कि यह जगह पहाड़ों से घिरी हुई है और दूसरा इसके एक ओर नदी है जिसके कारण किसी को भी यहाँ पर पहुँचना बेहद मुश्किल होगा।
सैयद बरेलवी जानता था कि देश में अग्रेज़ों की हुकूमत से लड़ पाना उसके लिए तत्कालीन परिस्थितियों में मुश्किल था, इसलिए उसने उनके ख़िलाफ़ किसी प्रकार के जिहाद की घोषणा नहीं की। साथ ही अंग्रेज भी सैयद की इन खतरनाक गतिविधियों को जानने के बाद चुप थे क्योंकि उनका मानना था कि सैयद और उसके द्वारा तैयार किए जा रहे जिहादी लड़ाके सिख राज्य को कमजोर कर देंगे, जिससे की अंग्रेज़ों को ही फायदा पहुँचेगा। नतीजतन 1824 से 1831 तक जिहादी बालाकोट में सक्रिय रहे।
दरअसल, सैयद अहमद शाह ने राजा रणजीत सिंह द्वारा अज़ान और गौतस्करी पर प्रतिबंध लगाने की बात सुनकर जिहाद की घोषणा कर दी थी। जिस समय पर बरेलवी बालाकोट पहुँचा उस समय उसके साथ 600 जिहादी थे और पेशावर के हज़ारों पठानों द्वारा भी उसे समर्थन दिया जा रहा था।
Barelvi and his armed followers did not declare a Jihad against British.
1)British had not directly interfered in Muslim affairs 2) They were too powerful
He heard reports of Ranjit Singh banning Azan and cow slaughter and declared a Jihad. Curiously, he was hosted by Scindias pic.twitter.com/0UZyhr5D8p
स्वभाव से कट्टर विचारधारा वाले सैयद के बारे में एलेक्सेंडर गार्डनर ने बताया था कि उसने मात्र 30-40 रुपए के लिए अपने साथी को मौत के घाट उतार दिया था ।
Alexander Gardner, who was then in Balakot reveals that Barelvi killed his comrade for 30 rupees. He then declared Jihad against all unbelievers. pic.twitter.com/llGf9JFNw0
सैयद से तंग आकर महाराजा रणजीत सिंह की सेना ने बालाकोट की एक पहाड़ी के पास डेरा डाल लिया। जिसके बाद सैयद ने वहाँ धान के खेतों में पानी अधिक मात्रा में डलवा दिया ताकि जब वह हमला करने आएँ तो उनकी गति धीमी पड़ जाए।
दोनों पक्ष एक दूसरे पर हमला करने के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करते रहे और एक दिन एक अज़ीबो गरीब घटना हुई जिसने सिख सेना को मुजाहिदीनों को मार गिराने का मौक़ा दे दिया। दरअसल, 6 मई 1831 के दिन एक जिहादी अपना दिमागी संतुलन खो बैठा और उसे अपने सामने हूरें दिखाई देने लगीं। वो एकदम से चिल्लाते हुए भागा कि उसे हूर बुला रही है और जाकर उन्हीं धान के खेतों में फँस गया जिसे सिख सेना के लिए जाल की तरह बिछाया गया था। मौक़े को परखते हुए सिखों की सेना ने उसे अपनी बंदूक का निशाना बनाकर मार गिराया। उन मुजाहिदीनों में हूरों के पास पहुँचने वाला चिराग अली पहला नाम था।
इसके बाद सिख सेना ने सभी मुजाहिदीनों कोढेर करना शुरू कर दिया। उस दौरान भी इस युद्ध में क़रीब 300 से ज्यादा जिहादियों को सिखों की सेना ने हूरों के क़रीब पहुँचाया था जिनकी कब्रें आज भी वहां पर मौजूद हैं। आज 188 साल बाद उसी जगह भारतीय वायुसेना ने वही घटना दोहराई है। बस सैयद के जिहादियों की जगह पर जैश ए मुहम्मद के 300 आतंकियों का एक साथ सफाया हुआ है और सिख सेना की जगह IAF ने विजय की पताका हवा में फहराई है।
Barelvi died without achieving his objective, but his “martyrdom” inspired thousands of Jihadi songs urging momins to engage in Jihad. Anything short of Jihad was considered “kufr”
He also inspired the 1897 Jihad in Peshwar against British (of which Saragarhi was an episode) pic.twitter.com/J76LcYsgyX
जरा सोचिए! जिहाद की शुरूआत करने वाले सैयद को भले ही महाराजा रणजीत सिंह की सेना ने मार गिराया हो। लेकिन आज के समय में आतंकवाद का लगातार बढ़ना कहीं न कहीं उसके द्वारा तैयार किए जिहादियों के प्रचार-प्रसार का ही नतीजा है। आए दिन न जाने कितने आतंकियों को मार गिराए जाने की खबरें हमें पढ़ने-सुनने को मिलती हैं लेकिन बावजूद इसके आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
बालाकोट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ही शायद आतंकी संगठन जैश ने अपने आतंकियों के लिए यहाँ पर प्रशिक्षण केंद्र खोला था। ये केंद्र आम जनता की पहुंच से दूर पहाड़ों पर था। जिसे 26 फरवरी को वायु सेना के जवानों द्वारा तहस-नहस किया गया।
रेडियो पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए राहुल गाँधी का सहारा लिया है। रेडियो पाकिस्तान ने एक ट्वीट कर भारतीय विपक्षी पार्टियों द्वारा जारी किए गए जॉइंट मेमोरेंडम का जिक्र करते हुए कहा कि 21 विपक्षी पार्टियों ने पीएम मोदी पर ताज़ा सुरक्षा हालात के राजनीतिकरण का आरोप मढ़ा।
#India: 21 Opposition parties express deep anguish over #Modi‘s blatant politicization of prevailing security situation https://t.co/zZTimuRovj
रेडियो पाकिस्तान ने राहुल गाँधी, ममता बनर्जी, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार इत्यादि सहित अन्य विपक्षी नेताओं के फोटो का प्रयोग कर एक आर्टिकल प्रकाशित किया, जिसमे ये बातें कही गई हैं। रेडियो पाकिस्तान ने कहा:
“भारतीय विपक्षी पार्टियों ने इस बात पर खेद जताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से पहले सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई।“
भारत के विपक्षी दलों ने आसान किया पकिस्तान का काम
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बैठक में विपक्षी पार्टियों के नेता इस बात पर सहमत हुए कि नरेंद्र मोदी पर स्थिति को और गंभीर न करने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तानी मीडिया या सरकार ने अपने हितों के लिए ऐसा किया हो। कुलभूषण जाधव मामले में भी क्विंट, कारन थापर इत्यादि द्वारा प्रकाशित किए गए रिपोर्ट्स को पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपने पक्ष में पेश किया था।
कॉन्ग्रेस के लिए यह ख़बर अच्छी नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को ITO स्थित हेराल्ड हाउस खाली करने के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है। कॉन्ग्रेस के लिए राहत सिर्फ इतनी है कि कोर्ट ने इसके लिए अभी कोई तय समय सीमा नहीं जारी की है।
Delhi High Court upholds eviction of Associated Journals Limited from Herald House. pic.twitter.com/pSd2wAOY1w
18 फरवरी 2019 को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने केंद्र सरकार और AJL की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
लोकसभा चुनावों से ठीक पहले कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए यह बड़ा झटका है। बड़ा झटका इसलिए क्योंकि हेराल्ड हाउस मामले में प्रत्यक्ष रूप से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और उनकी माँ सोनिया गाँधी जुड़ी हुई हैं।
इस मामले पर हाई कोर्ट में बहस के दौरान केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिस तरह से शेयरों का हस्तांतरण हुआ, उससे हेराल्ड हाउस के स्वामित्व का मामला जुड़ा हुआ है और इसको देखा जाना चाहिए। गौर करने लायक बात यह है कि तुषार मेहता ने किसी का नाम अपनी दलील के दौरान नहीं लिया। लेकिन AJL की ओर से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी दलील देते हुए खुद ही फंस गए जब उन्होंने कहा था कि कंपनी के शेयर यंग इंडिया को हस्तांतरित (ज्यादातर शेयर) होने से राहुल गाँधी और उनकी माँ सोनिया गाँधी हेराल्ड हाउस के मालिक नहीं बन जाएँगे।
आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) द्वारा एक जज के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले AJL को हेराल्ड हाउस खाली करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि परिसर को खाली नहीं किया गया तो बेदखली की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड मसूद अज़हर को सुरक्षा परिषद द्वारा ब्लैक-लिस्ट कराने की भारत की कोशिशों को कूटनीतिक स्तर पर बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के संस्थापक मसूद को ब्लैक-लिस्ट करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 13 मार्च तक की समयसीमा तय की गई है। बुधवार (फरवरी 27, 2019) को पेश किए गए इस प्रस्ताव में अज़हर की अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाने और उसकी संपत्तियों को जब्त करने की माँग की गई है।
BREAKING : आतंकी मसूद पर बैन के लिए UN सुरक्षा परिषद में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने दिया प्रस्ताव… pic.twitter.com/B4EFvUtpcU
ज्ञात हो कि इससे पहले 2009 और 2016 में मसूद अज़हर पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जा चुका है। 2016 में पठानकोट हमले के बाद लाए गए इस प्रस्ताव पर फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने भारत का साथ दिया था। 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रेज़ोलुशन 1267 पारित किया था, जिसमें पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर पर प्रतिबंध की माँग की गई थी। आपको बता दें कि चीन हमेशा से इस प्रस्ताव के पास होने में अड़ंगा लगाता रहा है।
ताजा प्रस्ताव में ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने कहा:
“पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का मुखिया मसूद अजहर ने ही भारत के जम्मू-कश्मीर में 14 फरवरी को किए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।”
Inde – Lutte contre le terrorisme La France condamne avec la plus grande fermeté le terrible attentat perpétré le 14 février des…… France strongly condemns the terrible attack perpetrated on 14 February against Indian security forces in @IndAmbFrance@MEAIndia@PMOIndiapic.twitter.com/cBta1SF6JM
फ्रांस इस मोर्चे पर पूरी तरह भारत के साथ खड़ा नज़र आ रहा है। 1 मार्च से फ्रांस औपचारिक तौर पर सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेगा। बता दें कि 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर माह एक देश से दूसरे देश के पास चली जाती है। फ्रांस द्वारा इसकी अध्यक्षता ग्रहण करने के साथ ही मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ कुछ कड़े क़दम उठाए जाने की उम्मीद है। चीन द्वारा इस प्रस्ताव का फिर से विरोध किए जाने की संभावना है।
Reuters: US, UK & France have asked the 15-member United Nations Security Council sanctions committee to subject Maulana Masood Azhar, the head of Pakistan-based militant group Jaish-e-Mohammad, to an arms embargo, global travel ban and asset freeze. https://t.co/lvQYJMI1BW
पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद फ्रांस ने कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि वह जिम्मेदार आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने और उनके वित्तीय नेटवर्क पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लामबंद करने में पूरी तरह लगा हुआ है।
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अब तक ₹20,000 करोड़ की वस्तु एवं सेवा कर (GST) की चोरी पकड़ी है। सरकार ने जीएसटी में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए कड़े क़दम उठाने के संकेत दिए हैं। इसके अलावा कर व्यवस्था के नियमों का अधिक से अधिक पालन सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार उपाय करेगी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBITC) के सदस्य जॉन जोसफ ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा:
“रियल एस्टेट क्षेत्र में जीएसटी दरों में कटौती के बाद क्षेत्र के समक्ष पैदा हुई समस्याओं को समझने के लिए सेक्टर के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई जाएगी। अप्रैल से फरवरी के बीच 20,000 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई, जिसमें से ₹10,000 करोड़ की वसूली की जा चुकी है। टैक्स अधिकारियों ने करीब ₹1500 करोड़ के फर्जी इनवॉयस को भी पकड़ा है, जिसके जरिए ₹75 करोड़ का क्लेम किया जाना था।”
चालू वित्त वर्ष में अब तक 20,000 करोड़ रुपये मूल्य की जीएसटी चोरी पकड़ी जा चुकी है.https://t.co/SVooLBe8fN
जोसफ ने यह भी बताया कि फ़र्ज़ी इनवॉइस में से ₹25 करोड़ की वसूली की जा चुकी है। बाकी रक़म को भी वसूलने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार द्वारा इतनी बड़ी संख्या में जीएसटी की चोरी पकड़ना एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
जीएसटी काउंसिल ने इस महीने हुई बैठक में घर ख़रीदने वालों को राहत देते हुए निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की दर को 12% से घटा कर 5% कर दिया। महानगरों में ₹45 लाख तक के मूल्य और 60 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले घरों को किफ़ायती श्रेणी में रखा गया है। छोटे शहरों में 90 वर्गमीटर तक के क्षेत्रफल वाले घरों को इस श्रेणी में रखा गया है।
In its 33rd meeting the GST Council has accorded big relief to Real Estate Sector. GST rate on affordable housing has been reduced to 1% from 8% & for others from 12% to 5% for both without ITC.This will give boost to housing for all & fulfill aspirations of Neo/Middle classes.
जोसफ ने कहा कि जो अमीरों के लिए ठीक है, हो सकता है कि वही चीज ग़रीबों पर फिट नहीं बैठती हो। उन्होंने बताया कि पाँच टैक्स स्लैब को दो या तीन में मिला दिया जाएगा। इस बाबत जीएसटी काउंसिल निर्णय लेगी। बता दें कि अभी भारत में जीएसटी की चार दरे हैं- 5, 12, 18 और 28।
भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार चल रहे तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों सेनाध्यक्षों से मुलाक़ात की और स्थिति की जानकारी लेते हुए उन्हें अपने तरीके से इस पूरे प्रकरण का जवाब देने की पूरी स्वतंत्रता देने की बात की। मीटिंग क़रीब नब्बे मिनट चली और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने भी प्रधानमंत्री को पूरी स्थिति की जानकारी दी।
27 फ़रवरी की सुबह पाकिस्तान के विमानों ने भारतीय सीमा का उल्लंघन किया। जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायु सेना ने उनका F-16 लड़ाकू विमान मार गिराया। सीमा पर ऐसे हालात के बाद कश्मीर का पूरा एयर फील्ड सील कर दिया गया है।
जिसकी पुष्टि करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “पाकिस्तान का एक विमान इंडियन एयरफोर्स के द्वारा मार गिराया गया। इस ऑपरेशन में हमारा एक मिग क्षतिग्रस्त हो गया और विमान के पायलट मिसिंग हैं।” पाकिस्तान की वायु सेना ने भारतीय रक्षा ठिकानों को निशाना बनाते हुए आज सुबह हमला किया।
उसके बाद से लापता पायलट को वापस लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान ने यह दावा किया है कि मिसिंग पायलट उनके कब्जे में है। और अब नई सूचना यह है कि दिल्ली में पाकिस्तान के उप-उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को विदेश मंत्रालय ने तलब किया है।
अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि उप-उच्चायुक्त हैदर शाह को तलब करने की वजह क्या है? लेकिन कयास यह लगाया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय ने अपनी तरफ से मिसिंग पायलट की पुष्टि, उसकी सलामती और उसकी वापसी के कोशिशों के तहत तलब किया है।
आज दोपहर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मीडिया को ब्रीफ करते हुए कहा, “पाकिस्तान का एक विमान इंडियन एयरफोर्स के द्वारा मार गिराया गया। इस ऑपरेशन में हमारा एक मिग क्षतिग्रस्त हो गया और विमान के पायलट लापता हैं।”
पाकिस्तान ने यह दावा किया है कि लापता पायलट उनके कब्जे में हैं। पाकिस्तान ने कथित रूप से पायलट का विडिओ जारी किया। जेनेवा कन्वेंशन के अनुसार ऐसा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। जिसके बाद दिल्ली में पाकिस्तान के उप-उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था।
मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि भारत ने पाकिस्तान के उस दावे की पुष्टि के लिए बुलाया था। जिसमें वह अपने कब्जे में एक भारतीय पायलट होने की बात कर रहा था।
इससे पहले भारत में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की मंशा से भारत की सीमा में घुसे पाकिस्तानी जेट विमान को भारतीय वायुसेना द्वारा मार गिराया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (फ़रवरी 27, 2019) शाम विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि हमारा एक पायलट पाकिस्तान की कस्टडी में है और हम पाकिस्तान से माँग करते हैं कि वह भारतीय वायुसेना के उस पायलट को तुरंत सुरक्षित वापस भेजे। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान यह सुनिश्चित करे कि पायलट को कोई नुकसान नहीं पहुँचे।
MEA: It was made clear that Pakistan would be well advised to ensure that no harm comes to the Indian defence personnel in its custody. India also expects his immediate and safe return. https://t.co/4gg81vSldc
बता दें कि बालाकोट में आतंकवादी अड्डे को भारतीय वायुसेना द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव इस वक्त चरम पर है।
जेनेवा संधि के तहत प्रमुख प्रावधान
1- इस संधि के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है। 2 – संधि के तहत उन्हें खाना-पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाती है। 3- इस संधि के तहत किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता। 4 – सबसे ख़ास बात ये है कि किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि तुरंत लागू हो जाती है। यह नियम स्त्री या पुरुष दोनों युद्धबंदियों पर सामान रूप से लागू है। 5 -संधि के मुताबिक युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता और न ही दबाव डाल कर उससे कोई बयान दिलवाया जा सकता है। 6- युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता।
आज सुबह पाकिस्तान के F-16 ने भारतीय सीमा के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। उनकी तरफ से बम भी गिराए गए और जब वो वापस जा रहे थे तब भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने उनका पीछा करते हुए एक F-16 को मार गिराया। ख़बरों के अनुसार यह विमान भारतीय सीमा के भीतर राजौरी सेक्टर में गिरा है।
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इसी का दूसरा पहलू यह रहा कि भारतीय वायुसेना के पायलट अपने जहाज़ों के साथ जब पाकिस्तानी जेट का पीछा कर रहे थे तो उनके विमान को भी क्षति पहुँची और हमारे एक जेट को पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स ने गिरा दिया एवम् एक पायलट, भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, लापता बताए जा रहे हैं। कई ख़बरों से, और पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के स्टेटमेंट से पता चला है कि एक पायलट पाकिस्तान में हैं।
अगर पाकिस्तान से आने वाली जानकारी सही भी है, फिर भी जेनेवा कन्वेंशन के अनुसार वो पायलट सुरक्षित भारत वापस लाए जाएँगे। इसके अलावा जो भी ख़बर है, वो संदिग्ध है क्योंकि वो आधिकारिक नहीं हैं। इसको लिए आप अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल कीजिए, कि आपको किसका वर्जन सही लगता है। इसके लिए आप स्वतंत्र हैं।
ज़ाहिर सी बात है कि ऐसे मौक़ों पर, जितनी खबरें आ रही हैं, और पब्लिक तक पहुँच रही हैं, तो आम जनता सकते में है। वो इसलिए कि हमारी सेना का एक अफसर लापता है। ये अपने आप में भारत के लिए एक नकारात्मक ख़बर है, भले ही हम पाकिस्तान को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं।
एक तरफ़ ऐसे लोग हैं, और बहुत हैं जो इस स्थिति में एक बेहतर रुख़ लेकर, सकारात्मक रवैये के साथ यह कह रहे हैं कि हमें अपनी सेना के साथ, अपने देश के साथ खड़े रहने की ज़रूरत है। ये भले ही एक धक्का है, लेकिन इसे हार नहीं कहा जा सकता। और दूसरी तरफ एक गिरोह है, जिसके होने से हमें लगता है कि हमें पाकिस्तान के F-16 की ज़रूरत नहीं है, उससे ज़्यादा घाव तो यही लोग कर जाते हैं।
ये वही गिरोह है जिससे भारतीय मीडिया का समुदाय विशेष कहा जाता है। ये लम्पट और धूर्त पत्रकारों और छद्म-बुद्धिजीवियों का एक गिरोह है जो मौक़े तलाशता रहता है। चूँकि इनके पास शब्दों की कमी कभी होती नहीं, तो ये उस स्थिति में हमेशा रहते हैं जब बात घुमाकर देश की परिकल्पना और सरकारों के मजबूत क़दमों के खिलाफ लाया जा सके।
ये लोग सैनिकों के बलिदान से जाति निकाल लेते हैं, ये लोग सैनिकों के साथ खड़े होने वाले देशभक्त लोगों को हिन्दुओं के सवर्ण और मेट्रो शहरों के होने का दावा कर लेते हैं, ये लोग ऐसे धक्कों पर देश के साथ खड़े न होकर पाकिस्तान की मदद करते दिखते हैं जब वो पूछते हैं कि क्या सबूत है कि हमने 300 आतंकी मार गिराए। और पाकिस्तान इनकी मदद इन्टरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस तक लेता रहता है।
देशभक्त होना गाली नहीं है। जिंगोइस्ट होना भी बुरा नहीं है। अतिराष्ट्रवाद भी बुरा नहीं है क्योंकि इन सबका उद्देश्य राष्ट्र की बेहतरी और वैश्विक छवि को सुदृढ़ करने का होता है। राष्ट्रवाद ज़हर कैसे हो सकता है? जो लोग मोमबत्तियाँ लेकर सड़कों पर श्रद्धांजलि देते हैं, उनके लिए देश बहुत मायने रखता है भले ही उनके घरों के पास की नाली साफ न की गई हो।
ये इसलिए होता है क्योंकि हम चाहे जिस भी सरकार में, जिस भी स्थिति में हो, वो सिर्फ और सिर्फ देश के देश होने के कारण ही संभव है। इसलिए ऐसे मौक़ों पर कोई भीख माँगकर जीवन यापन करती बुजुर्ग महिला की पूरी पूँजी पुलवामा के बलिदानियों के परिवारों के नाम हो जाती हे। इसीलिए ऐसे मौक़ों पर लोग आगे बढ़कर हर संभव मदद करते दिखते हैं।
यहाँ लोग, सरकार ने क्या विकास किया, उनके जीवन में क्या बदलाव लाए, इससे ऊपर उठ जाते हैं क्योंकि देशभक्ति गरीब से गरीब स्थिति में, अपनी पहचान के लिए लड़ते देश के लोगों में भी होती है। उसके लिए अमेरिका जैसी चमचमाती इमारतों की ज़रूरत नहीं होती। देशभक्ति देश के लिए होती है, और इसमें ‘नागरिक’ और ‘देश’ दो शब्द भर काफी हैं, इसके बीच की सारी बातें गौण हो जाती हैं क्योंकि आपका अस्तित्व और आपके देश का अस्तित्व एक दूसरे पर आश्रित हैं।
इसलिए, ऐसी परिस्थितियों में हम एक हो जाते हैं। सारी पार्टियाँ एक हो जाती हैं। हम सड़कों पर एक साथ उतरते हैं, और एक साथ नारे लगाते हैं। हम किसी को नारे लगाता देखते हैं, तो उनके साथ हो जाते हैं, उस प्रदर्शन में शामिल हो जाते हैं। इसके लिए कुछ कहने की ज़रूरत नहीं होती। क्यों? क्योंकि देशप्रेम उसी तरह से विकसित होता है जैसे अपनी माँ से प्रेम करना। उसके लिए हम पूरे जीवन भर तैयार होते हैं, चाहे वो खेलों से हो, युद्धों की कहानियों से हो, हमारे इतिहास से हो, या इस बात से कि हम कहाँ थे, कैसे बर्बाद किए गए और आज कहाँ पहुँचे हैं।
ये एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है ऐसे समय पर। लेकिन कुछ लोगों के लिए ये एक सहज बात नहीं होती। उन्होंने बार-बार दिखाया है कि उनकी ज़मीन कहीं और है। उनके लिए सैनिकों पर पत्थर फेंकने वालों के लिए, जवानों के घेरकर मार देने वाले नक्सलियों के लिए, देश को तोड़ने वाली शक्तियों के लिए हमेशा मानवाधिकार जैसे शाब्दिक हथियार होते हैं। लेकिन जब सैनिक का बलिदान होता है तो तर्क घास चरने चला जाता है, और जब आता है तो कहा जाता है कि ये तो उनका काम है!
अब अगर आज ही की बात की जाए तो यही गिरोह सक्रिय हो चुका है और एक पायलट के लापता होने की ख़बर पर उसके परिवार की चिंता का फर्जी नाटक करते हुए कह रहा है कि उन्हें उस पायलट के परिवार की चिंता है, जो इंतजार में होंगे और प्रार्थना कर रहे हैं कि वो सुरक्षित लौट आएँ। इसमें उनकी चिंता पायलट की बिलकुल नहीं है, उनकी चिंता है कि कैसे देशभक्ति जैसे भाव को नीचा दिखाया जा सके, और सेना के समर्थन में खड़े लोगों को इसका दोषी बनाया जाए।
गिरोह के लोग यहीं नहीं रुके, उन्होंने लगातार लिखा कि वायु सेना द्वारा एयर स्ट्राइक की जड़ में भारतीय देशभक्तों का उन्माद है जिसके कारण सरकार ने ऐसी आज्ञा दी। साथ ही, उन्होंने पुलवामा हमलों के समय भी सरकार को घेरा था। इनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती, क्योंकि इन्हें न तो सेना से मतलब है, न सैनिक से, न देश से, न समाज से।
इन्हें मतलब सिर्फ और सिर्फ नैरेटिव से है जो कि किसी भी तरह से, कैसे भी उन लोगों के खिलाफ ज़हर पैदा कर सके जो सही मायनों में देश के साथ खड़े हैं। गिरोह का सदस्य इसे चुनावों से जोड़ता है, और इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाता है क्योंकि यही अजेंडा है।
ऐसे लोगों को पहचानिए, और इनके अजेंडाबाजी पर, फर्जी के आँसू पर, इनकी नग्नता और निम्न स्तर के ट्वीटों पर सवाल कीजिए कि इतना गिरने की क्या ज़रूरत है? इनसे पूछिए कि कहाँ से लाते हैं ऐसा ज़हर जो उसी देश के खिलाफ इस्तेमाल होता है जिन्होंने उन्हें इतना बोलने की आज़ादी दे दी है कि वो देश के अस्तित्व को ही मिटाने वालों के साथ खड़े हो जाते हैं।
लिबरलों का ये एक रोग है, ये मानसिक रूप से बीमार, घटिया लोग हैं। घटिया इसलिए क्योंकि ये चुप नहीं रह सकते। ये संवेदनशील नहीं हैं, ये देशविरोधी ताक़तों के एजेंट हैं जो क्षति होने पर सरकार को घेरते हैं, और बदला लेने पर सरकार को समीकरण से हटाकर सैनिकों की जय-जय बोलते हैं। फिर, जब इस प्रोसेस में क्षति होती है, तो दोबारा सरकार को, देशभक्त लोगों को कोसने लगते हैं।
बदलते समीकरण पर विचार नहीं बदलते। विचार बदलने का मतलब है कि आपके आशीर्वचनों में धूर्तता है। इसका मतलब है कि आपकी संवेदनशीलता की जड़ में संवेदनहीनता है जो शब्दों के खेल से बस छुप गई है। जिंगोइज्म कुछ नहीं होता, अतिराष्ट्रवाद कुछ नहीं होता। देश के साथ होने की, अपने सैनिकों को समर्थन देने की कोई सीमा नहीं होती।
चूँकि किसी ने ऐसे शब्द बना रखे हैं, तो उन्हें हर समय फेंक कर मारने और देशभक्त लोगों का मनोबल गिराने के लिए इस्तेमाल करना धूर्त लोगों की पहचान है। लेकिन, चिंता मत कीजिए, ऐसे लोग मोर बनने को चक्कर में खुद ही कपड़े उतार लेते हैं। और ये कपड़े इनकी कुत्सित सोच पर से भी उतर जाते हैं, जो कि हमारे और आपके लिए दिन के उजाले में साफ तरीके से दिखते हैं।
और हाँ, हमें सुनने और जानने वाले राष्ट्रवादियो! आप कुछ भी गलत नहीं कर रहे। युद्ध में जय बोलने वालों का भी महत्व होता है। जवानों को हमेशा यह लगना चाहिए कि अगर उनके हाथ में बंदूक है, और उनका जीवन हम जैसों के लिए समर्पित है, तो हम जैसे लोग इस बात को हमेशा ध्येय वाक्य बनाकर चलते हैं कि ‘When you go home, Tell them of us and say, For your tomorrow, We gave our today.’
हाँ, हमारे अंदर आपके लिए असीमित सम्मान है क्योंकि आप हैं तो देश है, हम हैं तो देश है, और आपके कारण ही ये लिबरलों का धूर्त गिरोह साँस लेता है, ट्वीट करता है, फर्जी नैरेटिव गढ़ता है। और ऐसे समय पर ये सम्मान अपने उच्चतम स्तर पर होता है। इसे जिंगोइज्म कहें, राष्ट्रवाद कहें, अतिराष्ट्रवाद कहें, देशभक्ति कहें, हमें सब स्वीकार है क्योंकि हमें स्वयं पर गर्व है, इस भारत भूमि पर गर्व है, और सबसे ऊपर हर भारतीय सैनिक पर गर्व है चाहे वो जिस भी रंग की वर्दी पहनता है।