कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक प्रियांक खड़गे ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया पर वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) की एक रिपोर्ट को खूब शेयर किया। उन्होंने दावा किया कि 2025 में भारत में ज्यादातर तथाकथित हेट स्पीच की घटनाएँ भाजपा शासित राज्यों में हुईं और इनमें ज्यादातर निशाना अल्पसंख्यक समुदाय थे।
मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे ने सिर्फ रिपोर्ट शेयर नहीं की, बल्कि उसके नतीजों को पक्की सच्चाई की तरह पेश किया। रिपोर्ट के जरिए खड़गे ने भाजपा पर हमला बोला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लिया, कहा कि वे हेट स्पीच फैलाने वाले प्रमुख लोगों में से एक हैं।
खड़गे के अलावा द क्विंट, ऑल्ट न्यूज और द वायर जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा वाले मीडिया संस्थान भी इस रिपोर्ट का फायदा उठाने में लग गए। द क्विंट ने CSOH की रिपोर्ट के आधार पर खबर छापी, जिसमें मुख्य रूप से ईसाई और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित हेट स्पीच की बात की गई। लेकिन रिपोर्ट में सिर्फ संख्या बताई गई, कोई उदाहरण नहीं दिया गया कि भारत हेट लैब ने किस बात को हेट स्पीच माना।
द वायर ने CSOH की रिपोर्ट के आधार पर लिखा कि सभी हेट स्पीच में से 656 में ‘कॉन्सपिरेसी थ्योरी’ की बात थी, जैसे लव जिहाद, लैंड जिहाद वगैरह।
रिपोर्ट का नाम था ‘हेट स्पीच इवेंट्स इन इंडिया’। इसमें दावा किया गया कि 2025 में पूरे देश में 1,318 मौके पर हेट स्पीच हुई। पिछले साल के मुकाबले इसमें तेज बढ़ोतरी बताई गई। रिपोर्ट में कहा गया कि हिंदू संगठनों, धार्मिक आयोजनों, राजनीतिक अभियानों और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी बातें नफरत के एक संगठित सिस्टम का हिस्सा हैं।
CSOH की ये बड़ी-बड़ी बातें विपक्षी पार्टियों और एक्टिविस्टों ने खूब दोहराईं। लेकिन इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया कि ये घटनाएँ कैसे चुनी गईं, कैसे परिभाषित की गईं या कैसे समझी गईं।
रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ने पर इसकी विश्वसनीयता, मंशा और तरीके पर गंभीर सवाल उठते हैं। इसमें अच्छी तरह दर्ज अपराधों को ‘षड्यंत्र सिद्धांत’ कहा गया और धार्मिक आयोजन व ऐतिहासिक बातों को हेट स्पीच बता दिया गया। ये रिपोर्ट समाज की सच्चाई का निष्पक्ष अध्ययन कम और एक विचारधारा से प्रेरित अभ्यास ज्यादा लगती है, जिसका मकसद भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श के एक पक्ष को अपराधी बनाना है।
इस तथाकथित हेट स्पीच रिसर्च में एक्टिविज्म को बताया गया नफरत फैलाने का तरीका
CSOH रिपोर्ट का आधार एक ऐसा तरीका है जो हेट स्पीच का विश्लेषण कम करता है और पहले से ही पक्षपाती नजरिए से उसे परिभाषित कर देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हेट स्पीच की परिभाषा संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा से ली गई है। इसमें किसी समूह के लिए अपमानजनक या भेदभावपूर्ण बात को हेट स्पीच माना गया है।
इस लंबी-चौड़ी परिभाषा से अपराध भड़काने, राजनीतिक बात, धार्मिक अभिव्यक्ति, ऐतिहासिक दावे और सामाजिक गतिविधि के बीच का फर्क मिट जाता है। इससे रिपोर्ट में बहुत सारी कानूनी और संवैधानिक रूप से सुरक्षित बातें भी शामिल हो गईं।
रिपोर्ट में ‘खतरनाक भाषण’ नाम से एक उपश्रेणी भी जोड़ी गई है। ये डेंजरस स्पीच प्रोजेक्ट से ली गई है, जिसमें कहा गया है कि कुछ बातें लोगों को हिंसा के लिए उकसा सकती हैं। लेकिन रिपोर्ट में ये नहीं दिखाया गया कि किसी खास भाषण से वाकई हिंसा हुई या होने वाली थी। सिर्फ बात को ही मंशा का सबूत मान लिया गया।
इस तरह का तरीका कानूनी मानकों को छोड़कर अनुमान पर चलता है। इसमें माना जाता है कि अगर कोई बात विचारधारा से प्रेरित लगती है तो वो खतरनाक है, भले ही हिंसा का कोई सबूत न हो।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदू समुदाय का गुस्सा अपनी जगह से नहीं आता, बल्कि ‘नफरत बेचने वाले व्यापारियों’ की प्लानिंग से पैदा किया जाता है। इस तरह की बात से वैध शिकायतों, दर्ज अपराधों या जनसांख्यिकीय चिंताओं के लिए कोई जगह नहीं बचती। गुस्से को हमेशा बनावटी और पीड़ित होने की बात को हथियार बताया गया। और ये सिर्फ एक पक्ष के लिए किया गया।
पक्षपात और साफ दिखता है जब रिपोर्ट में हेट स्पीच के प्रकार गिनाए गए हैं- जैसे ‘जिहाद आधारित कॉन्सपिरेंसी थ्योरी’ फैलाना, आर्थिक-सामाजिक बहिष्कार की माँग, पूजा स्थलों से जुड़ी माँगें, बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठ की बातें।
रिपोर्ट में ये नहीं देखा गया कि ये दावे दर्ज मामलों, कोर्ट केस, पुलिस रिकॉर्ड या सरकारी आँकड़ों पर आधारित हैं या नहीं। बल्कि शुरू में ही इन्हें षड्यंत्र और नफरत वाला बता दिया गया।
ये पहले से फैसला करना सबसे साफ ‘जिहाद’ वाली बातों में दिखता है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, वोट जिहाद, पॉपुलेशन जिहाद, एजुकेशन जिहाद, इकोनॉमिक जिहाद, हलाल जिहाद जैसे शब्दों को पूरी तरह बेबुनियाद षड्यंत्र बताया गया। इसके लिए न तो पुलिस शिकायतें, FIR देखी गई और न ही पहले से चल रही जाँच या कोर्ट की टिप्पणियाँ देखी गईं।
रिपोर्ट में रबात प्लान ऑफ एक्शन का छह हिस्सों वाला टेस्ट इस्तेमाल करने का दावा है, जिसमें संदर्भ, वक्ता, मंशा, सामग्री, पहुँच और नुकसान की संभावना शामिल है। लेकिन ये पारदर्शी तरीके से लागू नहीं किया गया दिखता। मंशा कैसे तय की गई, हिंसा की संभावना कैसे जाँची गई, ये नहीं बताया गया। बल्कि मंशा और नुकसान वक्ता की पहचान और विषय से ही मान लिए गए।
आँकड़े जुटाने का तरीका भी एकदम सतही है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वो हिंदू दक्षिणपंथी समूहों और संबंधित राजनीतिक लोगों पर नजर रखते हैं। सोशल मीडिया स्क्रैपिंग, एक्टिविस्ट नेटवर्क और चुनी हुई मीडिया रिपोर्टों पर निर्भर हैं। इस्लामिस्ट समूहों, कट्टर मौलवियों या हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वाले संगठनों पर वैसी नजर नहीं रखी गई। इस असमानता से एक पक्ष हमेशा निगरानी में रहता है, दूसरा बाहर।
रिपोर्ट एक्टिविस्ट और पत्रकारों के नेटवर्क से घटनाएँ जुटाती है और इसे व्यापक और सत्यापित बताती है। लेकिन इन नेटवर्क में विचारधारा का प्रभाव, पक्षपात या चुनिंदा रिपोर्टिंग कैसे रोकी गई, ये नहीं बताया। ये भी माना गया है कि डेटा पूरा नहीं है और कई घटनाओं का सत्यापित सबूत नहीं है। इससे तरीके की सख्ती पर सवाल उठते हैं।
रिपोर्ट हिंदुओं के खिलाफ अपराधों की मात्रा और प्रकृति को पूरी तरह नजरअंदाज करती है। हिंदूफोबिया ट्रैकर के आँकड़ों में 4,619 हिंदू-विरोधी अपराध दर्ज हैं, जिनमें 261 मौतें शामिल हैं। सिर्फ 2025 में 2,486 मामले दर्ज हुए, जिसमें 300 से ज्यादा लव जिहाद, 600 से ज्यादा हिंदुओं के खिलाफ हेट स्पीच, 750 से ज्यादा शिकारी धर्मांतरण या जबरन धर्म बदलवाने के मामले शामिल हैं। ये आँकड़े दिखाते हैं कि CSOH कुछ अपराधों को षड्यंत्र बता रही है और उनके खिलाफ प्रतिक्रिया को हेट स्पीच बना रही है।
CSOH ने कुछ अपराधों को झूठा बता दिया और उनके खिलाफ प्रतिरोध को अपने आप नफरत वाला मान लिया। इसका नतीजा ये हुआ कि एक्टिविज्म को तरीका बना दिया गया और रिपोर्ट निष्पक्ष अध्ययन नहीं, बल्कि एक चुनी हुई कहानी बन गई।
‘लव जिहाद’ को साजिश बताया, जबकि हकीकत में कई मामले दर्ज हैं
CSOH रिपोर्ट की सबसे बड़ी कमी है लव जिहाद को पूरी तरह खारिज करना। इसे ‘बेबुनियाद षड्यंत्र सिद्धांत’ कहा गया। रिपोर्ट ने न सिर्फ शब्द पर सवाल उठाया, बल्कि पूरी घटना को झूठा बता दिया। इसके लिए पुलिस शिकायतें, FIR, कोर्ट केस या मीडिया में आए मामलों को नहीं देखा गया।
सच्चाई समझने के लिए हिंदूफोबिया ट्रैकर के आँकड़े देखें तो साल 2025 में ही 300 से ज्यादा ‘रिलेशनशिप और यौन अपराधों’ के मामले दर्ज हुए, जिनमें ज्यादातर लव जिहाद के हैं। कुल 900 से ज्यादा मामले हो चुके हैं। इनमें पीड़ितों की गवाही, पुलिस कार्रवाई और चल रही जाँचें हैं, जिनका CSOH रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं।
लव जिहाद से मतलब उन मामलों से है जहाँ मुस्लिम पुरुष हिंदू लड़कियों को झूठा नाम बताकर या अपनी असली पहचान छिपाकर रिलेशनशिप या शादी में फंसाते हैं। फिर इस्लाम कबूल करने का दबाव डालते हैं। इसके लिए वो भावनात्मक शोषण, धमकी, परिवार से अलग करना या शादी का लालच देते हैं। जब धोखा, जबरदस्ती या धर्म बदलवाने का सबूत मिलता है तो ये अपराध बन जाता है और हर मामले को अलग-अलग तथ्यों, पीड़ित की गवाही, पुलिस जाँच और कोर्ट से देखा जाता है।
सभी हिंदू-मुस्लिम रिलेशनशिप को लव जिहाद नहीं कहा जाता। सिर्फ तब कहा जाता है जब मुस्लिम पुरुष अपनी पहचान छिपाकर हिंदू बनकर लड़की को फँसाता है। ऐसे मामले कई राज्यों में बढ़े हैं, जिससे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
CSOH ने तरीके के स्तर पर ही लव जिहाद को षड्यंत्र बता दिया। इससे इन मामलों की जाँच ही नहीं हुई। नतीजा ये कि दर्ज अपराधों के खिलाफ प्रतिक्रिया को हेट स्पीच बना दिया गया और अपराध खुद गायब कर दिए गए।
ये चुनिंदा अंधापन दिखाता है कि रिपोर्ट ने जमीन की सच्चाई की जगह विचारधारा को रखा और जटिल अपराधों को बस नाम देकर खारिज कर दिया।
उदाहरण के लिए दिसंबर 2025 में ही हिंदूफोबिया ट्रैकर ने 14 ऐसे मामले दर्ज किए। हर मामले में पहचान छिपाना, यौन शोषण और धर्म बदलवाने का दबाव था। ये पुलिस शिकायतों और जाँच से दर्ज हैं। दिसंबर के 14 में से 10 मामलों का संक्षिप्त विवरण ये है।
- भोपाल, मध्य प्रदेश में एक हिंदू लड़की को जुहुर नाम के मुस्लिम व्यक्ति ने हिंदू बनकर धोखा दिया। 31 दिसंबर 2025 को न्यू ईयर मिलने के बहाने जंगल में ले जाकर बलात्कार किया। लड़की ने उसी रात पुलिस में शिकायत की, केस दर्ज हुआ और आरोपित गिरफ्तार हुआ।
- बिजनौर, उत्तर प्रदेश में एक नाबालिग हिंदू लड़की को समीर उर्फ वसीम ने फेक प्रोफाइल से अमन बनकर सोशल मीडिया पर फंसाया। प्राइवेट चैट और फोटो से ब्लैकमेल कर यौन संबंध बनाने का दबाव डाला। आरोपित पकड़ा गया और पुलिस को सौंपा गया।
- फतेहपुर, उत्तर प्रदेश में एक दलित हिंदू महिला का विशाल बनकर अदनान नाम के रेलवे कर्मचारी ने लंबे समय तक यौन शोषण और ब्लैकमेल किया। नशीला पदार्थ देकर बलात्कार किया, अश्लील वीडियो बनाए और धर्म बदलने व शादी का दबाव डाला। पुलिस ने FIR दर्ज की और आरोपित को गिरफ्तार किया।
- पटना, बिहार में मोहम्मद रुस्तम ने सोनू बनकर गलत नंबर से संपर्क कर हिंदू लड़की को धोखा दिया। शादी का झांसा देकर यौन शोषण किया और अश्लील वीडियो बनाया। असली पहचान पता चलने पर वीडियो ऑनलाइन डाल दिया। पुलिस ने शिकायत पर आरोपित को गिरफ्तार किया।
- उधम सिंह नगर, उत्तराखंड में दो मुस्लिम युवकों ने फेक पहचान से हिंदू लड़कियों को सोशल मीडिया पर फंसाया। सैलून चलाने वाले इन लोगों को 17 दिसंबर 2025 को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग सेना ने पकड़कर पुलिस को सौंपा। जाँच चल रही है।
- रतलाम, मध्य प्रदेश में कामरान खान ने कई फेक इंस्टाग्राम प्रोफाइल और कलावा पहनकर हिंदू बनकर कॉलेज की हिंदू लड़कियों को फंसाया। 15 दिसंबर 2025 को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद की शिकायत पर पुलिस ने फोन जब्त किया और आरोपित को जेल भेजा।
- खंडवा, मध्य प्रदेश में सलमान ने संजय बनकर दलित हिंदू महिला का बलात्कार किया, ब्लैकमेल किया और उसकी नाबालिग बेटी पर भी हमला किया। पुलिस ने बलात्कार, ब्लैकमेल, धर्मांतरण और SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपित को पकड़ा।
- मंडावर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश में फैजान मलिक ने सौरभ पाल बनकर हिंदू लड़की को फंसाया। असली पहचान पता चलने पर फोटो से ब्लैकमेल कर धर्म बदलने और शादी का दबाव डाला। पुलिस ने धोखाधड़ी, यौन शोषण और धमकी का केस दर्ज कर आरोपित को जेल भेजा।
- नोएडा, उत्तर प्रदेश में हारून खान ने हिंदू बनकर कई हिंदू महिलाओं को फंसाया, अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल किया और इस्लाम कबूल करने का दबाव डाला। पुलिस ने बिसरख थाने में केस दर्ज किया, आरोपित के खिलाफ पहले भी ऐसे मामले हैं।
- खंडवा जिला, मध्य प्रदेश में शादीशुदा मेहरबान मुनीर ने पहचान छिपाकर हिंदू महिला को फंसाया, आपत्तिजनक वीडियो बनाए, मारपीट की और पत्नी के साथ वीडियो फैलाए जब उसने धर्म बदलने से इनकार किया। पुलिस ने बलात्कार, मारपीट, ब्लैकमेल, धर्मांतरण और IT एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपित को हिरासत में लिया।
शौर्य दिवस, बाबरी विध्वंस की याद और ऐतिहासिक विवाद को तोड़-मरोड़ना
CSOH रिपोर्ट में बार-बार शौर्य दिवस यानी 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढाँचे के विध्वंस की याद को हेट स्पीच बताया गया। इस घटना पर गर्व या सार्वजनिक याद को हिंसा की माँग के साथ जोड़ दिया गया, जैसे ये संगठित नफरत हो।
इससे एक लंबे ऐतिहासिक और कानूनी विवाद को सिर्फ नैतिक आरोप बना दिया गया। रिपोर्ट में ये नजरअंदाज किया गया कि बाबरी ढाँचा दशकों से विवादित था और कोर्ट ने अंत में जगह हिंदुओं को दे दी। 500 साल की लड़ाई के बाद कानूनी तरीके से जगह वापस मिली और वहाँ भव्य राम मंदिर बना।
हिंदुओं के लिए शौर्य दिवस किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा का जश्न नहीं है। ये सांस्कृतिक आत्मसम्मान का प्रतीक है। विध्वंस पर गर्व उस घटना की उनकी समझ से आता है, न कि आलोचकों की व्याख्या से।
ऐतिहासिक प्रतीक अलग-अलग लोगों के लिए अलग मतलब रखते हैं। जैसे ताजमहल को कुछ लोग प्यार का प्रतीक मानते हैं भले उसका इतिहास विवादित हो, वैसे ही हिंदू बाबरी विध्वंस को ऐतिहासिक दासता के प्रतीक को हटाने के रूप में देखते हैं।
शौर्य दिवस की याद को हेट स्पीच बताकर रिपोर्ट ने ऐतिहासिक व्याख्या को अपराध बना दिया। हिंदुओं को वही जगह नहीं दी जो दूसरों को अपने इतिहास की समझ बताने के लिए मिलती है। इससे साफ हुआ कि रिपोर्ट कानूनी या विद्वता के मानक से नहीं, बल्कि हिंदू दावे से असहज विचारधारा से चल रही है।
ईसाई मिशनरी धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदुओं को निशाना बनाती है CSOH रिपोर्ट
CSOH रिपोर्ट में ईसाई मिशनरी गतिविधियों के विरोध को बार-बार हेट स्पीच बताया गया। इसमें कानूनी विरोध, दर्ज शिकायतों और अपराध भड़काने के बीच फर्क नहीं किया गया। जबरन या लालच से धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदू समूहों को ईसाई-विरोधी नफरत फैलाने वाला दिखाया गया।
कई मामलों में जागरूकता अभियान, शांतिपूर्ण विरोध और शिकारी धर्मांतरण के खिलाफ चेतावनी को हेट स्पीच कहा गया, जबकि इनकी वजह को नजरअंदाज किया गया। रिपोर्ट में ये नहीं देखा गया कि धर्मांतरण स्वैच्छिक थे या कानूनी जाँच के दायरे में। बस विरोध को ही ईसाइयों के खिलाफ दुश्मनी मान लिया गया।
तरीके में ‘धर्मांतरण माफिया’ जैसे शब्द या जनसांख्यिकीय हेरफेर की चिंता को षड्यंत्र बताया गया। इससे मिशनरियों को पीड़ित और हिंदू समुदाय को हमलावर दिखाया गया, भले तथ्य कुछ और कहते हों।
रिपोर्ट में मिशनरी गतिविधियों पर वैसी जाँच नहीं की गई, जैसे विदेशी फंडिंग, लालच या राज्य के धर्मांतरण-विरोधी कानूनों का पालन को लेकर होना चाहिए था। इससे जटिल स्थानीय विवादों को एकतरफा कहानी बना दिया गया, जिसमें धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिंदू हेट स्पीच के जरिए अपराधी बन गए और मूल शिकायतें गायब हो गईं।
दिसंबर में ही ऑपइंडिया ने कम से कम पाँच ऐसे मामले रिपोर्ट किए जहाँ जबरन या लालच से ईसाई धर्मांतरण के आरोप थे। इनमें पुलिस शिकायतें, स्थानीय विरोध और चल रही जांचें थीं। इससे साफ है कि मिशनरी गतिविधियों का विरोध हेट स्पीच नहीं कहा जा सकता बिना जमीनी तथ्यों को देखे।
फतेहपुर में पुलिस ने 28 दिसंबर को पास्टर डेविड ग्लैडविन और उसके बेटे को गिरफ्तार किया। आरोप था कि गरीब हिंदुओं को लालच और धमकी देकर धर्म बदलवाया। स्थानीय व्यक्ति की शिकायत पर उत्तर प्रदेश धर्मांतरण-विरोधी कानून और BNS के तहत FIR दर्ज हुई। शिकायत में हिंदू देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ, पैसे-नौकरी-शिक्षा का लालच और चुप रहने के लिए पैसे देने की बात थी।
नडियाद सेशन कोर्ट ने 20 दिसंबर को स्टीवन भानुभाई मेकवान और स्मितुल फिलिपभाई महिदा की जमानत खारिज की। गुजरात धर्म स्वतंत्रता कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत प्रथम दृष्टया केस बना। पुलिस ने आदिवासी और नाबालिगों को लालच देकर धर्म बदलवाने का आरोप लगाया। विदेशी फंडिंग, बार-बार कार्यक्रमों के डिजिटल सबूत और विदेशी संपर्क वाले भागे हुए आरोपित मिले।
श्री गंगानगर, राजस्थान में 18 दिसंबर को पुलिस ने छह लोगों को पकड़ा, जिनमें एक जर्मन जोड़ा था। किराए के मकान में अवैध चर्च चल रहा था, जहां पैसे, चमत्कारी इलाज का लालच और हिंदू देवताओं के खिलाफ गालियाँ देकर लोग जुटाए जा रहे थे। सीमा क्षेत्र में बिना अनुमति विदेशी मौजूद थे।
छत्तीसगढ़ के कोरबा में पास्टर बजरंग जायसवाल पर प्रार्थना सभा में धर्मांतरण का आरोप लगा। गरीब, बीमार लोगों को चमत्कार का लालच दिया गया। सरपंच ने शिकायत की, पुलिस ने केस दर्ज किया।
सोनभद्र, उत्तर प्रदेश में पास्टर रामू प्रजापति को पैसे देकर धर्म बदलवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। भाजपा युवा मोर्चा और बजरंग दल ने विरोध किया। पुलिस ने धार्मिक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए।
रिपोर्ट के पीछे रकीब हमीद नाइक और हिंदुत्व वॉच का नेटवर्क
CSOH की स्थापना और संचालन रकीब हमीद नाइक करते हैं, जो इसके कार्यकारी निदेशक हैं। वो हिंदुत्व वॉच के भी संस्थापक हैं, जो भारत में मानवाधिकार उल्लंघन ट्रैक करने का दावा करता है, और इंडिया हेट लैब के भी जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ ऑनलाइन-ऑफलाइन हेट स्पीच दर्ज करता है। CSOH की रिपोर्ट इंडिया हेट लैब के नतीजों पर आधारित है। जब विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स आई थी, तब नाइक ने विक्टिम कार्ड खेला और कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और पलायन को नकारा था।
नाइक बार्ड कॉलेज और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से जुड़े बताए जाते हैं। न्यू यॉर्क टाइम्स, अल जजीरा, CNN, BBC, वॉशिंगटन पोस्ट जैसे मीडिया में उद्धृत होते हैं। इससे उनके दावे और आँकड़े वैश्विक विमर्श में फैलते हैं, बिना गहराई से जाँच के।
अमेरिका से चलने वाली हिंदुत्व वॉच पर एकतरफा और चुनिंदा चित्रण के लिए लगातार आलोचना होती है। ये हिंदू नेताओं को निशाना बनाती है, क्लिप वीडियो, बिना संदर्भ के बयान और भारी शब्दों से। टी राजा सिंह, काजल हिंदुस्तानी जैसे लोगों को बार-बार टारगेट किया गया।
जनवरी 2024 में हिंदुत्व वॉच का X अकाउंट भारत में रोका गया। डिसइन्फो लैब की रिपोर्ट के बाद ये कार्रवाई हुई, जिसमें पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा नेटवर्क से लिंक मिले।
अकाउंट ‘अत्यधिक नफरत जैसे अस्पष्ट शब्द इस्तेमाल करता था और तथ्य, धार्मिक अभिव्यक्ति या राजनीतिक बात को भड़काऊ बता देता था। फिर भी इसे वामपंथी एक्टिविस्ट और फैक्ट चेकर खूब बढ़ावा देते थे, जो 2014 से मोदी सरकार के समय से भारत को नकारात्मक दिखाते आए हैं।
पूरी रिपोर्ट सिर्फ प्रोपेगेंडा
CSOH रिपोर्ट को प्रियांक खड़गे जैसे राजनीतिक लोग और द क्विंट, ऑल्ट न्यूज, द वायर जैसे मीडिया ने खूब उछाला। इसमें एक्टिविज्म को विश्लेषण और विचारधारा को सबूत बनाया गया। हेट स्पीच की चुनिंदा परिभाषा से दर्ज अपराध नजरअंदाज हुए और हिंदुओं की वैध प्रतिक्रिया को अपराध बता दिया गया। कानूनी बातें, ऐतिहासिक याद और जबरदस्ती के खिलाफ प्रतिरोध को नफरत बना दिया गया। असली पीड़ितों को गायब कर दिया गया। ये निष्पक्ष शोध नहीं, बल्कि पहले नतीजा तय करके आँकड़े जोड़ने वाली कहानी है।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। अंग्रेजी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)