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विवेक बिंद्रा ने SC-ST विरोधी बातें नहीं की, दोहराया ‘राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा’ वाला ही सिद्धांत: जन्म आधारित जाति नहीं, गुण-कर्म आधारित ‘क्लास’ की कर रहे थे बात

मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिंद्रा विवादों में हैं। विवेक बिंद्रा मार्केटिंग और बिजनेस सिखाने का काम करते हैं, अपन वीडियो के जरिए लोगों को मोटीवेट करते हैं और अक्सर विवादों में भी रहते हैं। इसी तरह उनका एक नया मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी के साथ भी विवाद चल रहा है। उन पर अपनी पत्नी को पीटने का भी मामला दर्ज है। ऊपर से आरक्षण को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद उनके खिलाफ खूब हो-हंगामा मचाया जा रहा है। मीम-भीम वाले कह रहे हैं कि उन्होंने दलितों के खिलाफ बयान दिया है।

आइए, पहले जानते हैं कि विवेक बिंद्रा ने कहा क्या था। लगभग 1 वर्ष पहले उन्होंने ‘द लल्लनटॉप’ को एक इंटरव्यू दिया था और उस वीडियो में उन्होंने आरक्षण व जाति व्यवस्था पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक लोगों ने दलित-महादलित का विभाजन कर दिया है और वो कहते हैं कि इसका वोट बैंक हमारा है, उसका वोट बैंक हमारा है। उन्होंने कहा था कि नेता महादलित की एक अलग कैटेगरी बना देते हैं, फिर कहते हैं कि वो ही महादलितों के नायक है, वही उनका उद्धार करेंगे।

गुण एवं कर्म के आधार पर समाज का विभाजन: विवेक बिंद्रा

विवेक बिंद्रा का कहना था कि आप महादलितों के अधिकार के लिए लड़िए, लेकिन उन्हें सक्षम बनाने पर काम कीजिए। उन्होंने जो सक्षम बनता जा रहा है उसे आगे बढ़ाने की बात करते हुए इसे मेरिट करार दिया था। उन्होंने कहा था कि सब कुछ फ्री में देकर किसी को बदहाल नहीं बनाना है, बल्कि उसे खुशहाल करना है। बकौल विवेक बिंद्रा, सभी को हिस्सेदारी नहीं मिले बल्कि उसे मिले जो सक्षम है भले ही वो किसी भी जाति, धर्म, तबके या वित्तीय समूह से आता हो।

विवेक बिंद्रा ने ये भी कहा था कि कई बार लोग भगवद्गीता में हिंदूवाद या जातिवाद सिखाया गया है, लोग अज्ञानतावश ऐसी बातें करते हैं। उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने चतुर्वर्ण को स्वयं से उत्पन्न हुई व्यवस्था बताते हुए कहा था कि गुण-धर्म के हिसाब से इसका विभाजन होता है। उन्होंने समझाया था कि जन्म के हिसाब से विभाजन श्रीकृष्ण ने नहीं दिया, आज के नेताओं ने जन्म के आधार पर विभाजन किया – तुम ब्राह्मण के बेटे हो तो ब्राह्मण, तुम शूद्र के बेटे हो तो शूद्र।

विवेक बिंद्रा ने कहा था, “गुण का मतलब हुआ साइकोलॉजी और कर्म मतलब फिजियोलॉजी। साइको-फिजिकल नेचर के हिसाब से डिसाइड किया जाएगा कि कौन क्या करेगा। क्या जज का बेटा बिना पढ़ाई किए जज बन जाता है? वकील का बेटा वकील बन जाता है? उसे जज का गुण-कर्म चाहिए, उसे वकील का गुण-कर्म चाहिए। क्षमता और रुचि के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए, इसे ही मेरिटोक्रेसी कहते हैं। समाज तभी सही बनेगा जब आप काबिल को आगे बढ़ाओगे, सबको नहीं।”

उन्होंने आगे समझाया था कि जो काबिल बन जाएगा वो खुद सबको आगे बढ़ाएगा। मोटिवेशनल स्पीकर ने कहा था कि हर एक को ब्राह्मण नहीं बनाना है। इसके बाद उन्होंने ब्राह्मण का अर्थ ‘इंटेलेक्चुअल क्लास ऑफ सोसाइटी’, क्षत्रिय मतलब ‘एडमिनिस्ट्रेटिव क्लास’, वैश्य मतलब ‘मर्चेंट क्लास’ और शूद्र मतलब ‘असिस्टिंग क्लास’ बताया था। उन्होंने कहा था कि ये लोग माइंस वन हैं, जो कभी नंबर वन नहीं हो सकते, उन्हें लीडर मत बनाइए। उन्होंने कहा था कि ‘शूद्र’ निर्णय नहीं ले सकते, लेकिन निर्णय को लागू बहुत अच्छे से करवा सकते हैं।

विवेक बिंद्रा ने SC-ST समाज के खिलाफ कुछ नहीं कहा

विवेक बिंद्रा के बारे में लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है, उनकी बातें लोगों को बेवकूफाना लग सकती हैं। लेकिन, यहाँ उन्होंने जो बातें की हैं उसमें उन्होंने किसी जाति विशेष को निशाना नहीं बनाया है। उन्होंने अनुसूचित जाति या जनजाति के संबंध में कोई बुरी बात नहीं कही है। उन्होंने यहाँ जाति नहीं बल्कि क्लास की बात की है। क्लास, अर्थात गुण-कर्म के हिसाब से विभाजित किए गए वर्ग जिनके बारे में उन्होंने समझाया भी कि जज का बेटा बिना पढ़ाई किए जज नहीं बन सकता।

उनके उदाहरण को और समझने की कोशिश करते हैं। उनका मतलब था कि जो लोग अपने विचारों एवं बुद्धिमत्ता से समाज को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं वही ब्राह्मण हैं। पूर्व में वेद लिखने वाले ब्राह्मण थे, अब अख़बारों में संपादकीय लिखने वाले ब्राह्मण हो सकते हैं। जो विद्वान हैं और बुद्धिजीवी हैं, वो ब्राह्मण हैं। ये जाति नहीं, वर्ग है, क्लास है। जो लोग किताबें लिख रहे हैं और किताबों को पढ़ कर लोग प्रभावित हो रहे हैं, तो वो लेखक भी ब्राह्मण हो गए।

इसी तरह, सत्ताधीशों को उन्होंने ‘क्षत्रिय’ कहा। उनका अर्थ था कि जैसे पहले राजा ‘क्षत्रिय’ कहलाता था, अब मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ‘क्षत्रिय’ हो गए। जिनका शासन चल रहा है, वो क्षत्रिय। इसी तरह उन्होंने व्यापारियों को ‘वैश्य’ कहा। जो कारोबार करते हैं, वो वैश्य। इसका तात्पर्य भी जाति नहीं बल्कि उस समूह से है। ‘शूद्र’ वर्ग में उन्होंने उन्हें रखा जो काम में मदद करते हैं। किसान को खेती में मदद करने वाला ‘शूद्र’ हुआ। उनका मतलब ऐसे वर्ग से था जो पढ़ा-लिखा नहीं है।

ध्यान दीजिए, विवेक बिंद्रा ने ऐसा बिलकुल नहीं कहा कि शूद्र का बेटा शूद्र ही होगा। जबकि जाति व्यवस्था में तो ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण और निषाद का बेटा निषाद होता है। जाति प्रमाण-पत्र भी इसी हिसाब से बनते हैं। सरकार भी इसी हिसाब से सुविधाएँ देती हैं। जबकि विवेक बिंद्रा ने विभिन्न वर्गों की बात की है। उन्होंने ये नहीं कहा कि अनुसूचित जातियों या जनजातियों के लोगों को आगे मत बढ़ाओ, उनका मतलब था कि जो पढ़ा-लिखा नहीं है और जिसे समझ नहीं है वो सत्ता नहीं चला सकता, उसका बेटा पढ़-लिख लेगा तो वो फिर सत्ता चला सकता है।

विवेक बिंद्रा बेवकूफ हो सकते हैं लेकिन दलित विरोधी नहीं। क्योंकि, एक तरह से वो खुद एक कारोबारी हैं और उन्हें एक बड़े दर्शक वर्ग का समर्थन चाहिए होता है यूट्यूब पर। वो कभी नहीं चाहेंगे कि SC-ST समाज को वो भला-बुरा कहें, जिससे दर्शकों का एक बड़ा वर्ग उनसे दूर हो जाए। उलटा उन्होंने ‘राजा का बेटा राजा’ वाले सिद्धांत के खिलाफ बात की है। यही तो पटना के ‘सुपर 30’ कोचिंग संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार की बायोपिक में हृतिक रोशन का डायलॉग है।

इस पर तो खूब तालियाँ बजी थीं। वामपंथी विचारक भी अक्सर खुद को दलितों का ठेकेदार बनाने के लिए ‘राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा’ वाले भाषण देते हैं। विवेक बिंद्रा ने भी तो यही कहा – बिना पढ़े जज का बेटा जज नहीं बनेगा। ‘क्लास’ के वर्गीकरण की मानें तो जज के कोर्ट का गार्ड ‘शूद्र’ है, स्पष्ट है उसे जज की कुर्सी पर नहीं बिठाया जा सकता। हाँ, उसका बेटा ज़रूर पढ़-लिख कर जज बन सकता है। यही तो विवेक बिंद्रा की थ्योरी थी।

पत्नी को पीटने और संदीप माहेश्वरी से विवाद को लेकर चर्चा में

हमने विवेक बिंद्रा के उस बयान का अर्थ समझाने की कोशिश की है तो इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि वो जो भी करें उनका किसी को समर्थन करना चाहिए। वो कई कारणों से आजकल विवादों में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी को कमरे में बंद कर के इतना पीटा कि उसके कान के पर्दे फट गए। सह ही गाली-गलौज किया, मोबाइल फोन छीन लिया। पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। नोएडा सेक्टर-16 थाने में इस मामले में FIR दर्ज हुई है।

पीड़िता ने अपने हाथ-पाँव में पड़े नीला निशान को दिखाते हुए बताया है कि उसकी कितनी बेरहमी से पिटाई की गई है। बाएँ हाथ में कट का निशान है। सिर के पिछले हिस्से में 30-40 चाँटे मारे जाने की बात उन्होंने बताई है। यानिका से विवेक बिंद्रा की शादी 6 दिसंबर, 2023 को ही हुई थी। इसके 2 दिन बाद ही ये सब हो गया। ‘बड़ा बिजनेस’ के CEO विवेक बिंद्रा के यूट्यूब चैनल पर 2 करोड़ से भी अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।

पहली पत्नी गीतिका सबरवाल के साथ भी विवेक बिंद्रा का अदालत में विवाद चल रहा है। फरवरी 2023 में मोरबी के टाइल्स को घटिया बताने को लेकर कंपनी ने उनकी आलोचना की थी, जिसके बाद उन्हें वीडियो हटाना पड़ा था। संदीप माहेश्वरी के साथ भी उनका वीडियो के जरिए आरोप-प्रत्यारोप चला था। एक वीडियो में सिखों के 10वें गुरु गोविन्द सिंह का कार्टून दिखाने के मामले में भी विवाद हुआ था। सिखों के विरोध के बाद उन्हें वो वीडियो हटाना पड़ा था।

संविधान का मूल आधार है गीता, हिंदू के कारण देश सेकुलर: कुरुक्षेत्र में बोले असम CM, श्रीकृष्ण को बताया ‘दामाद’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गीता जयंती पर भगवान कृष्ण और असम के बीच संबंध पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- “हम भगवान कृष्ण को हमारे दामाद मानते हैं, ये लंबा संबंध रहा है क्योंकि भगवान ने असम की बेटी रुक्मिणी से शादी की थी, इसलिए कृष्ण के साथ हमारा जो संबंध है वो दामाद का है।”

शनिवार (23 दिसंबर,2023) को वो हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पुरुषोत्तमपुरा बाग, ब्रह्म सरोवर के अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2023 में शिरकत करने पहुँचे थे। आज यहाँ असम की सांस्कृतिक प्रस्तुति का दिन है।

उन्होंने आगे कहा कि गुजरात के माधेपुर में भी जब कृष्ण रुक्मिणी की शादी को हर साल मनाया जाता है तो वह असम से वहाँ जाते हैं। उन्होंने कहा जहाँ भी भगवान कृष्ण की चर्चा होती है वहाँ हमारी उपस्थिति एक प्रकार से अनिवार्य हो जाती है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में अधर्म पर धर्म का शासन हो

सीएम हिमंता सरमा ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अधर्म पर धर्म का शासन बने। ये हालात देश में बन रहे हैं। मेरा मानना है कि गीता महोत्सव में जो वाणी हर साल निकलती है उससे हमारी भारत की सभ्यता की बुनियाद और मजबूत होगी और हम इसे और आगे लेकर जाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी ने अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस शुरू किया। इस तरह हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर जी ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव शुरू किया। योग और गीता एक ही है। जब कोई इन दोनों को साथ करता है तो संपूर्ण मानव बनता है।

भारत के संविधान गीता से प्रेरित देश सेक्युलर है

सीएम हिमंत सरमा ने कहा कि कभी-कभी ब्रिटिश लोग सोचते हैं कि वो भारत को बना कर गए हैं। हमारे भी कई लोगों के मन में कॉन्सेप्ट है कि 1947 में भारत का जन्म हुआ था, लेकिन हम सबको मालूम है कि जो 1947 वाली बात है ये एक राजनीतिक एकता की बात थी।

उन्होंने आगे कहा, “राजनीतिक भारत के पहले सांस्कृतिक भारत पाँच हजार साल पहले से है, इसलिए हम ये मानकर चलते हैं कि भारत महज एक देश नहीं है। भारत एक सभ्यता का देश है। उन्होंने कहा, “मैं संविधान को मानता हूँ क्योंकि भारत के संविधान का मूलाधार भगवत् गीता और वेद से प्रेरित है।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत का संविधान सभा में हिंदू लोग नहीं होते तो संविधान का स्वरूप जो आज है वो वैसा नहीं होता। हिंदू मानते हैं वसुधैव कुटुम्बकम, हिंदू मानते हैं सर्व धर्म समभाव इसलिए आज भारत का संविधान सेक्युलर है धर्मनिरपेक्ष है।

देश की संस्कृति कृष्ण की संस्कृति है

उन्होंने आगे कहा, “हमारी जो भारत की संस्कृति है वो एक तरह से कृष्ण की संस्कृति है। जैसे कृष्ण ने गीता का वाणी दिया। देश को संदेश दिया, मानव जाति को संदेश दिया। ये संदेश आज भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज भी हमारे लिए मूलभूत है।”

सीएम सरमा बोले भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कर्मयोग के बारे में बताया, ज्ञान के और भक्ति मार्ग के बारे में बताया। इस आधुनिक युग में जहाँ हम पहुँचे इस युग में भी अगर हमें शांति चाहिए और हमें सच में अपना विकास चाहिए तो हमें निष्काम कर्म के बारे में सीखना और जानना चाहिए।

देश सेवा केवल तनख्वाह के लिए हो तो…

उन्होंने आगे कहा, भगवान कृष्ण ने गीता में ये भी उपदेश दिया है कि जिस काम में भक्ति नहीं है वो काम कभी भी सतकाम नहीं हो सकता है। अगर हम शिक्षा लेते हैं और उसमें भक्ति नहीं होती है, अगर हम देश की सेवा करते और वो बगैर भक्ति के केवल तनख्वाह के लिए करते हैं तो वो सेवा कभी सफल नहीं होती है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश को समाप्त करने से पहले अर्जुन का बताया था कि आपको मैं जो काम करने के लिए उत्साहित कर रहा हूँ मैं सब पहले ही कर चुका हूँ आप खाली एक निमित्त है। हम यहाँ मौजूद है इसमें भी परमात्मा की इच्छा है। हर काम उसकी इच्छा से होता है हम केवल उसके प्रतिनिधि हैं।

18 हजार बच्चों ने गीता पाठ किया

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में 18 हजार बच्चों ने गीता पाठ किया। बच्चों ने एक साथ अष्टादश श्लोक गीता का भी पाठ किया। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि बच्चों में संस्कार तभी आएँगे, जब बच्चे गीता के हर श्लोक अपने भीतर आत्मसात कर लेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों के गीता के संस्कार दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “श्रीमद्भगवत गीता’ की छोटी प्रति हम अपनी जेब में रख लें तो इसका भी हमारे जीवन में बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मैं भी अपनी जेब में ‘गीता’ की प्रति साथ रखता हूँ।”

संसद से क्यों निलंबित किए जाते हैं सांसद? उनके पास आगे कौन से संवैधानिक विकल्प

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में कई संसद सदस्यों (सांसदों) को संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सदन से निलंबित कर दिया गया। यह निलंबन हाल के सत्रों के दौरान उनके कथित कदाचार और संसदीय मानदंडों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप हुआ है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 105, संसद के प्रत्येक सदन को अपने सदस्यों को अवमानना ​​और अन्य कदाचार के लिए दंडित करने का अधिकार देता है।

सांसदों को निलंबित करने का निर्णय अक्सर संबंधित सदन के अध्यक्ष या पीठासीन अधिकारी द्वारा उचित प्रक्रिया और साक्ष्यों पर विचार के बाद लिया जाता है। निलंबित सांसदों पर कार्यवाही में बाधा डालने, अनियंत्रित व्यवहार करने और सदन की मर्यादा का उल्लंघन करने का आरोप है। निलंबन का उद्देश्य संसदीय कार्यवाही की पवित्रता और संस्था की गरिमा को बनाए रखना है।

संवैधानिक उपाय सांसदों को अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को चुनौती देने, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है। संसदीय गतिविधियों से बहिष्कार और विशेषाधिकारों के नुकसान का सामना कर रहे निलंबित सांसद कानूनी चैनलों से निवारण की माँग कर सकते हैं। प्राथमिक संवैधानिक उपाय में अदालत में निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका दायर करना शामिल है।

कानूनी सहारा निलंबित सांसदों को निर्णय का विरोध करने की अनुमति देता है, यह दावा करते हुए कि उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया या सजा कथित कदाचार के अनुपात से बाहर है। अदालतें मामले की समीक्षा कर सकती हैं, प्रस्तुत साक्ष्यों की जाँच कर सकती हैं और यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि निलंबन संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।

संवैधानिक उपाय का उद्देश्य न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों को बनाए रखना है। यह सुनिश्चित करना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को उन आरोपों के खिलाफ खुद का बचाव करने का अवसर मिले, जिनके कारण उनका निलंबन हुआ। यह कानूनी रास्ता संसद के भीतर अनुशासन बनाए रखने और सांसदों के व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के बीच एक महत्वपूर्ण संतुलन प्रदान करता है।

हालाँकि, विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया भिन्न हो सकती है। इसमें सामान्य ढाँचे में निलंबन के आदेश को चुनौती देते हुए संबंधित अदालत के समक्ष रिट याचिका दायर करना शामिल है। इसके बदले में अदालत मामले की खूबियों का मूल्यांकन करेगी और तय करेगी कि निलंबन उचित था या नहीं। संवैधानिक उपाय भारतीय संविधान में अंतर्निहित लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर प्रकाश डालता है।

इतना ही नहीं, संवैधानिक उपाय भारत के संसदीय प्रणाली के भीतर नियंत्रण और संतुलन के महत्व पर भी जोर देता है। जैसे-जैसे कानूनी कार्यवाही सामने आएगी, परिणाम संसद के भीतर व्यवस्था बनाए रखने और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के बीच नाजुक संतुलन पर प्रकाश डालेंगे।

अरब सागर में शिप पर हमला, धू-धू कर उठी आग की लपटें: ‘विक्रम’ के साथ रवाना हुई भारतीय नौसेना, इजरायल से कनेक्शन

अरब सागर में एक मर्चेंट शिप पर ड्रोन हमला हुआ है। इस ड्रोन हमले से जहाज पर आग लग गई है। ये जहाज इजरायल से जुड़ा बताया जा रहा है, जो सऊदी अरब से भारत के मेंगलोर के लिए रवाना हुआ था। भारत के समुद्र तट से 217 समुद्री मील दूर हुए इस हमले के तुरंत बाद भारतीय नौसेना अलर्ट पर आ गई और घटनास्थल की तरफ अपना लड़ाकू नौसैनिक जहाज भेज दिया है।

बताया जा रहा है कि इस मर्चेंट शिप पर क्रूड ऑयल लदा हुआ है और इसके चालक दल में 20 भारतीय भी शामिल हैं। एएफपी ने समुद्री एजेंसियों के हवाले से बताया कि शनिवार (23 दिसंबर 2023) को एक ड्रोन हमले में भारत के तट पर एक मर्चेट शिप क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इस शिप का इजरायल से भी कनेक्शन बताया जा रहा है। भारत के पश्चिमी तट के पास अरब सागर में मानवरहित ड्रोन के बाद शिप में आग लग गई।

भारतीय रक्षा अधिकारियों ने कहा कि भारतीय कोस्टगार्ड का लड़ाकू जहाज आईसीजीएस विक्रम पोरबंदर तट से 217 समुद्री मील दूर अरब सागर में मर्चेंट एमवी केम प्लूटो की ओर बढ़ रहा है, जिसमें ड्रोन हमले के कारण आग लग गई। रक्षा अधिकारियों ने यह भी कहा कि शिप में कच्चा तेल है और यह सऊदी अरब के एक बंदरगाह से मैंगलोर की ओर जा रहा था।

भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि अरब सागर में एमवी केम प्लूटो के आसपास भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी बाहरी भारतीय ईईजेड में व्यापारी जहाज की ओर बढ़ रहे हैं। नौसेना ने बताया कि आईसीजीएस विक्रम को भारत के स्पेशल इकोनॉमिक जोन की गश्ती के लिए तैनात किया गया था, जिसे घटनास्थल की तरफ रवाना कर दिया गया है। प्रभावित मर्चेंट शिप केएम प्लूटो की आग बुझा ली गई है, लेकिन उसमें कुछ दिक्कतें आ गई है। फिलहाल इस मर्चेंट शिप पर सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।

इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है। माना जा रहा है कि ये हमला यमन के हूती आतंकियों ने किया है। उन्होंने इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज को निशाना बनाने की घोषणा की थी। वो कई जहाजों पर पहले भी हमला कर चुके हैं।

कई बैंक खाते, साइन के लिए अलग-अलग लोग… ED ने PFI के 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया: अरब मुल्कों से मँगाई जाती थी फंडिंग, विदेश में रखे थे हजारों सक्रिय सदस्य

ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी को संगठन में अलग-अलग पदों पर रखा गया था। इन्हें विदेश से हवाला के जरिए आई करोड़ों रुपयों की फंडिंग को देशविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दिसंबर 2020 में PFI के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मिले डिटेल्स के आधार पर उनसे पूछताछ चल रही थी। ये सभी आरोपित PFI के बैंक खातों पर हस्ताक्षर करते थे।

जिन्हें गिरफ्तार किया है उसमें संगठन के संस्थापकों में से एक AS इस्माइल, PFI की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिफ, 2020 तक राष्ट्रीय सचिव रहे अनीस अहमद, प्रतिबंध के समय संगठन के राष्ट्रीय सचिव रहे अफसर पाशा और संगठन के मौजूदा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष EM अब्दुल रहमान शामिल हैं। अब्दुल रहमान 70-80 के दशक में SIMI से भी जुड़ा हुआ था। वो PFI की ‘नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल’ का उपाध्यक्ष था। उसने कई बार तुर्की और अफ्रीकन देशों का दौरा किया।

अनीस अहमद को संगठन के लिए फंड इकट्ठा करने की जिम्मेदारी मिली थी। उसे नेशनल सेक्रेटरी और प्रवक्ता बनाया गया था। वहीं अफसर पाशा तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में संगठन का जोनल प्रेजिडेंट था। वो कर्नाटक यूनिट का सेक्रेटरी भी रहा। 2009 में मैसूर दंगों की साजिश रचने वालों में भी ये शामिल था और उसके बाद ‘जेल भरो अभियान’ में जेल भी गया था। वहीं इस्माइल नॉर्थ जॉन में संगठन का प्रेजिडेंट रहा है। कर्नाटक में सक्रिय रहा शाफिक भी नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल का मेंबर था।

ये सभी अलग-अलग बैंकों में PFI की साइनिंग अथॉरिटी थे। जैसे, शाफिक बेंगलुरु के फ्रेजर टाउन स्थित कॉर्पोरेशन बैंक में, इस्माइल चेन्नई के मयलपोरे RH रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक में, पाशा बेंगलुरु स्थित फ्रेजर टाउन में कॉर्पोरेशन बैंक में और रहमान PFI के दिल्ली के कालका जी और कोझिकोड मे स्थित सिंडिकेट बैंक में संगठन का साइनिंग अथॉरिटी था। पता चला है कि अरब देशों में PFI के हजारों सक्रिय सदस्य थे, जिनके माध्यम से धन जुटाया जा रहा था।

दिल्ली का राशिद अपराध करने पहुँचा उत्तर प्रदेश, यूपी पुलिस के एनकाउंटर में हो गया लंगड़ा: बदमाश पर ईनाम भी था घोषित

उत्तर प्रदेश में अपराधियों की धर-पकड़ के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। कई बदमाश ढेर हुए हैं तो कई एनकाउंटर में घायल हुए हैं और बाद उन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया है। इस बीच, बुलंदशहर पुलिस ने दिल्ली के रहने वाले वांछित अपराधी का एनकाउंटर कर दिया। घायलावस्था में राशिद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बुलंदशहर पुलिस की गिरफ्त में आए दिल्ली के बदमाश का नाम राशिद बताया जा रहा है। उस पर 10,000 रुपए का ईनाम भी है। वरिष्ठ पत्रकार अनुराग चड्ढा ने दावा किया है कि अपराधी राशिद बुलंदशहर में कई वारदातों को अंजाम दे चुका है और उसके ऊपर दर्जनों मामले दर्ज हैं।

बुलंदशहर पुलिस ने बताया है कि खानपुर थाना पुलिस और स्वाट देहात टीम 22-23 दिसंबर 2023 की रात को सौझना झाया गेट पर संदिग्ध वाहनों की तलाशी कर रही थी। ये तलाशी अभियान मुखबिर की सूचना पर चलाया जा रहा था। इस बीच मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति को रूकने का इशारा किया गया तो उसने अपनी बाइक वापस मोड़ ली और भागने की कोशिश की।

इस दौरान पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश तो वह बाइक समेत फिसलकर गिर गया। खुद को पुलिस से घिरता देख उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और इस कार्रवाई में उसके पैरों में गोली लग गई। घायलावस्था में पुलिस ने उसे पकड़ लिया और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है।

बुलंदशहर पुलिस ने बताया है कि गिरफ्तार किए गए बदमाश की पहचान दिल्ली के राशिद उर्फ राशिद बनिया के रूप में की गई है। वह दिल्ली के सीलमपुर का रहने वाला है। इस पर कई मामले दर्ज हैं और 10 हजार का ईनाम भी उस पर घोषित किया गया था। राशिद नाम के इस अपराधी के खिलाफ अकेले बुलंदशहर में ही 10 मामले दर्ज हैं।

राशिद पर दर्ज ये मामले खुर्जा से लेकर खानपुर और सिंकदराबाद, छतारी तक दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके पास से चोरी की एक बाइक, 315 बोर का एक तमंचा और दो कारतूस (एक खाली) बरामद किया है। राशिद ने यह बाइक अलीगढ़ के सासनीगेट थाना क्षेत्र से चुराया था।

तेरी वफा से मुझे ऐतबार है… कुमार सानू का गाना सुन फूट-फूटकर रोया ‘आशिक’, Video देख लोग बोले- दिल टूटता है तो ऐसा ही होता है

दुनिया भर में मशहूर बिहार के सोनपुर मेले में एक ‘आशिक’ का दर्द आँखों से ऐसा छलका कि मेले की तरह वो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस मेले के थियेटर की देश में ही नहीं विदेशों में भी चर्चा होती है। लेकिन इस बार चर्चा है इस शख्स की जिसकी वीडियो तेजी से वायरल है।

थिएटर में जैसे ही कुमार सानू के गाने बजने पर डांसर्स ने नाचना शुरू किया। उसी दौरान काली जैकेट पहना एक शख्स वहाँ लगी लोहे की ग्रिल पर लटककर सिसक-सिसक कर रोने लगा। डांसर्स भी इसे देख हैरान रह गईं और आसपास के लोग भी।

कुमार शानू का जो गाना सुन ये शख्स रोया उसके बोल थे- ‘तेरी वफा से मुझे ऐतबार है, आ माँग भर दूँ तेरी बहार से’। व्यक्ति की इस हरकत को देख एक डांसर उससे पूछती भी हैं कि आखिर उसे क्या हो गया।

लेकिन, वो लगातार आँखे पोछते हुए मंच के पास लगे लोहे के ग्रिल पर झूलते हुए रोता रहता है। जब आसपास के लोगों को यह सब देख अजीब लगता है तब एक लाल जैकेट पहने दाढ़ी वाला शख्स वहाँ आता है और इस शख्स को वहाँ से हटाते हुए ले जाता है, लेकिन वो और फूट-फूट कर रोने लगता है।

दोनों हथेलियों से अपनी आँखों को पोछते हुए वो सिर हिलाने लगता है। इस दौरान वो दिल पर हाथ रखता है और फिर जोर-जोर से फूट-फूट कर रोने लगता है। आसपास खड़े लोगों ने इस पूरे वाकये की 1 मिनट 5 सेकेंड की वीडियो बनाई जो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

वीडियो को लेकर कहा जा रहा है कि ये दो दिन पुराना है। ये वीडियो सोनपुर मेले में न्यू इंडिया के नाम के थिएटर का बताया जा रहा है। डांस देखने के दौरान वो वहाँ बजने वाले संगीत में ऐसा खोया कि उसके एहसास उस पर हावी हो गए। हालाँकि ये पता नहीं चल पाया है कि वीडियो में रोने वाला ये शख्स कौन है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक ये आदमी सोनपुर के ही नजदीक का रहने वाला है। शख्स भले ही कोई हो लेकिन इस आशिक के दर्द ने उसे सोशल मीडिया का हीरो बना दिया है। उसके फूट-फूटकर रोने का ये वीडियो को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है। लोग कह रहे हैं दिल टूटता है तो ऐसा ही दर्द होता है।

‘अपनी सेहत का ध्यान रखो…’: इतना कहा और मंच पर ही गिर कर हो गई IIT कानपुर के सीनियर प्रोफेसर की मौत

सेहत के बारे में अपने छात्रों को बताने के दौरान ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT, Kanpur) के सीनियर प्रोफेसर समीर खांडेकर की हार्ट से मौत हो गई। जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय वे पूर्व छात्रों से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उनके आखिरी शब्द थे, “अपनी सेहत का ध्यान रखें…।” संबोधन के दौरान ही स्टेज पर गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ पता चला कि उनकी मौत हो चुकी थी। समीर खांडेकर वरिष्ठ वैज्ञानिक थे और उनके नाम पर 8 पेटेंट भी दर्ज हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोफेसर समीर खांडेकर आईआईटी कानपुर में सीनियर प्रोफेसर के साथ-साथ स्टूडेंट वेलफेयर के डीन भी थे। आईआईटी कानपुर में एलुमनाई मीट का कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र आए हुए थे। उसी कार्यक्रम को संबोधित करते समय वो अच्छी सेहत को लेकर अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने जैसे ही कहा कि ‘अपनी सेहत का ध्यान रखें…’, उसके बाद वे वहीं बैठ गए।

अचानक तेज दर्द उन्हें दर्द उठा तो लोग कुछ समझ नहीं पाए। सभी को लगा कि वो भावुक हो गए हैं, लेकिन इसके बाद वो गिर पड़े और कुछ ही पलों में उनकी मौत हो गई। 55 वर्षीय प्रोफेसर की मौत के बाद उनके शव को आईआईटी हेल्थ सेंटर में ही रखा गया है। उनका बेटा कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करता है। उसकी वापसी की राह देखी जा रही है।

समीर खांडेकर का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और एक बेटा है। रिपोर्ट्स के मताबिक, उन्होंने अपनी शिक्षा आईआईटी कानपुर से ही प्राप्त की थी। इसके बाद वो विदेश चले गए। जर्मनी के विश्वविद्यालय में उन्होंने पीएचडी पूरी की और साल 2004 से ही आईआईटी कानपुर में पढ़ाने लगे। उन्होंने आईआईटी कानपुर में कई अहम जिम्मेदारियों को सँभाला था।

चर्च में बेहोश कर के महिलाओं का बलात्कार, खुद को बताता है जीसस क्राइस्ट का अवतार: दक्षिण कोरिया में ईसाई कल्ट लीडर को 23 साल की जेल

दक्षिण कोरिया में ईसाई कल्ट लीडर जंग मायुंग सेओक को यौन शोषण के मामलों में जेल की सज़ा मिली है। वो JMS (जीसस मॉर्निंग स्टार्ट) नामक संस्था का संस्थापक है, जिसे ‘प्रोविडेंस चर्च’ के रूप में भी जाना जाता है। 2018 में उसे 10 वर्षों की सज़ा काटने के बाद रिहा किया गया था। उस पर अपने 4 महिला समर्थकों के यौन प्रताड़ना के आरोप लगे थे। 2001-06 के बीच उसने कई बार उनका यौन शोषण किया था। रिहाई के बाद वो फिर से चर्च में यौन अपराधों को अंजाम देने लगा था।

उसने मेपल यीप नामक एक महिला को शिकार बनाया। उन्होंने ‘The Name Of God: A Holy Betrayal‘ नामक नेटफ्लीज़ डॉक्यूमेंट्री में इस संबंध में खुलासे किए हैं। इस खुलासे के बाद फिर से जाँच शुरू हुई। डेजोन के डिस्ट्रिक्ट प्रासीक्यूटर ऑफिस ने जंग मायुंग सेओक के खिलाफ 2 विदेशी अनुयायियों के यौन शोषण का मामला चलाया। फरवरी 2018 से सितंबर 2021 के बीच उक्त ईसाई लीडर ने 3 महिलाओं को 23 बार यौन प्रताड़ना एवं शोषण का शिकार बनाया।

उसे 30 साल की सज़ा सुनाने की माँग की गई और तर्क दिया गया कि पिछली बार सज़ा भुगतने के बावजूद उसमें कोई सुधार नहीं आया है। साथ ही JMS चर्च पर महिलाओं का शोषण कर के उन्हें अवसाद में पहुँचाने का आरोप भी लगा है। शुक्रवार (22 दिसंबर, 2023) को उसे 23 वर्ष की सज़ा सुनाई गई। उसके चर्च में हुई नियुक्तियों और वहाँ रह रहीं महिलाओं एवं बच्चियों के अलावा युवाओं के बारे में भी पता लगाया जाएगा। रिहाई के बाद उसे 15 वर्षों तक अपने घुटने में एक ट्रैकर पहनना होगा।

अब तक कुल 18 महिलाओं ने उसके खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज कराया है, जिसमें से कई मामलों की जाँच अभी जारी है। वो बेहोश कर के महिलाओं का बलात्कार करता था। 1980 में उसने इस मूवमेंट की शुरुआत की थी। उसे उसके अनुयायी मसीहा कहने लगे और वो खुद को येशु मसीह का अवतार बताता है। 90 के दशक में भी वो हेल्थ चेकअप के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण करता रहा है। उसके खिलाफ इंटरपोल ने भी नोटिस जारी किया था।

‘मैं कॉन्ग्रेस की विचारधारा के ज़्यादा करीब’: ‘जन सुराज’ वाले प्रशांत किशोर ने माँगा पार्टी का साथ, बिहार में तैयार हो रहा ‘BJP बनाम ऑल’ का समीकरण?

प्रशांत किशोर बिहार में सियासी जमीन तलाश रहे हैं। वो बिहार में पिछले कई महीनों से ‘जन सुराज यात्रा’ कर रहे हैं। वो गाँवों में घूम रहे हैं और आम लोगों से मिल भी रहे हैं। वो राजनीतिक बयानबाजी भी करते दिखते हैं और बीच-बीच में टीवी चैनलों पर आकर राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात भी रखते हैं। इसी क्रम में उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए अपनी राजनीतिक विचारधारा भी बता दी है। उन्होंने कहा है कि वो राजनीतिक रूप से कॉन्ग्रेस के विचार के करीब हैं।

बिहार में राजनीतिक जन जागरण कर रहे प्रशांत किशोर ने अपना चुनावी भविष्य साफतौर पर साफ कर दिया है। उन्होंने राहुल कंवल के साथ बातचीत में कहा कि बिहार की राजनीति पर चर्चा की, साथ ही अगले लोकसभा चुनाव को लेकर भी अपनी राय रखी।

प्रशांत किशोर ने कहा, “कॉन्ग्रेस इस बार मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गाँधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने जा रही है, उन लोगों ने अपने रास्ते चुन लिए हैं। लोकसभा चुनाव के बाद क्या होगा, ये हमें नहीं पता। लेकिन मैं वैचारिक रूप से किसी अन्य पार्टी की तुलना में कॉन्ग्रेस की विचारधारा के करीब हूँ। मैं बस इतना ही कह सकता हूँ।”

प्रशांत किशोर से जब ये पूछा गया कि क्या उन्होंने कॉन्ग्रेस में जाने को लेकर अपने पत्ते खोलकर रखे हुए हैं? इस सवाल पर प्रशांत किशोर ने गेंद कॉन्ग्रेस के ही पाले में डाल दी। प्रशांत किशोर ने कहा- “इस मामले में फैसला कॉन्ग्रेस पार्टी को लेना है, मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता।”

इस इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी और बताया कि छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस पार्टी मजबूत दिख रही थी, लेकिन राहुल गाँधी द्वारा जातीय जनगणना का मुद्दा शायद पार्टी पर भारी पड़ गया। उन्होंने ये भी कहा कि वो बिहार के लिए काम कर रहे हैं, किसी पार्टी के लिए नहीं। वैसे, प्रशांत किशोर अभी अपनी जन सुराज यात्रा में लगातार आरजेडी, जेडीयू के खिलाफ आक्रामक रहते हैं। वो खुलकर तेजस्वी यादव, लालू यादव और नीतीश कुमार के खिलाफ बोलते हैं, पर बीजेपी और कॉन्ग्रेस के खिलाफ अपेक्षाकृत शांत रहते हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि उन्होंने काफी सोच समझकर ही ये राजनीतिक बयान दिया है।

अपने अतीत से अलग सोचने लगे हैं प्रशांत किशोर?

वैसे, प्रशांत किशोर का ये बयान उनकी पिछली जिंदगी से मेल नहीं खाता। अभी तक उन्होंने राजनीतिक रूप से जिन पार्टियों के लिए काम किया है, बेशक उनमें कॉन्ग्रेस पार्टी भी शामिल है, लेकिन कॉन्ग्रेस को वो कोई सफलता नहीं दिला पाए। वहीं, कॉन्ग्रेस के विरोध में खड़ी राजनीतिक पार्टियों को उन्हें जोड़ने का फायदा जरूर हुआ। उन्होंने बीजेपी के लिए काम किया, उन्होंने टीआरएस (अब बीआरएस) के लिए काम किया, उन्होंने जेडीयू के लिए काम किया, उन्होंने टीएमसी के लिए काम किया। हर बार सफलता मिली, लेकिन कॉन्ग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश में साल 2017 की चुनावी बिसात बिछाते समय वो बुरी तरह से चूक गए थे और कॉन्ग्रेस पार्टी को भारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। लेकिन अब उनका ये कहना कि वो विचारधारा के मामले में कॉन्ग्रेस के बेहद करीब हैं, ये लोगों को हैरान कर रहा है।

क्या बिहार में होगा बीजेपी वर्सेज आल?

प्रशांत किशोर की इस बयानबाजी के बाद कयास लग रहे हैं कि राज्य में सारी पार्टियाँ एक होकर बीजेपी और उनके छोटे दलों के साथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। बीजेपी वर्सेज आल जैसा माहौल बन सकता है। एक तरफ भाजपा और उसके कुछ छोटे सहयोगी दल होंगे, तो दूसरी तरफ आरजेडी, जेडीयू, कॉन्ग्रेस, जन सुराज व अन्य सहयोगी होंगे। हालाँकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बिहार में क्या होगा। 2024 के लोकसभा चुनावों में ही पता चलेगा कि किशोर की पार्टी बिहार में किस तरह से अपना प्रदर्शन करती है।