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पैर फिसलने के बाद 2 बच्चों के साथ नीचे गिरी महिला, ऊपर से गुजर गई ट्रेन: वीडियो में देखिए कैसे तीनों बच गए ज़िंदा

बिहार के बाढ़ रेलवे स्टेशन पर एक महिला और उसके दो बच्चों की जान एक ट्रेन हादसे में जाते-जाते बची। महिला ट्रेन के नीचे आ गई और पूरी ट्रेन उसके ऊपर से गुजर गई लेकिन वह जीवित बच गई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

जानकारी के अनुसार, बिहार की राजधानी पटना के एक स्टेशन ‘बाढ़’ पर एक महिला अपने पति और दो बच्चों के साथ पहुँची। महिला को अपने परिवार सहित बाढ़ से दिल्ली की यात्रा करनी थी। इसके लिए महिला के पति ने भागलपुर से दिल्ली के आनंद विहार तक जाने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस में शयनयान कोच में आरक्षण करवाया था।

महिला को अपने पति के साथ यह ट्रेन बाढ़ के प्लेटफॉर्म संख्या तीन से पकड़नी थी। हालाँकि, ट्रेन के आने के समय प्लेटफॉर्म पर अधिक भीड़ हो गई। इस कारण से ट्रेन में अधिक संख्या में चढ़ने वालों की भीड़ बढ़ गई।

जब महिला ने अपने दो बच्चों समेत ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की तो उसका पैर फिसल गया और वह प्लेटफॉर्म और पटरी के बीच के खाली जगह में गिर गई। उसके साथ उसके दोनों बच्चे भी नीचे पटरी पर गिर गए। हालाँकि, महिला का पति ट्रेन में सामान लेकर चढ़ चुका था।

महिला के गिरने के फ़ौरन बाद ही विक्रमशिला एक्सप्रेस धीमे धीमे बढ़ने लगी। इसको देखकर लोग हल्ला मचाने लगे। महिला का पति भी अपनी पत्नी को नीचे गिरा देखकर ट्रेन से बाहर कूद आया। हालाँकि, महिला ने ट्रेन के गुजरने के दौरान खुद को सुरक्षित कर लिया और उसके नीचे बच्चों के साथ चुपचाप पड़ी रही।

इसी तरह देखते देखते पूरी ट्रेन महिला के ऊपर से निकल गई लेकिन उसके चुपचाप पड़े रहने के कारण उसे कोई चोट नहीं आई। ट्रेन के निकल जाने के बाद महिला और उसके बच्चों को उठाकर रेलवे पुलिस ने अस्पताल पहुँचाया जहाँ उसका भर्ती करवाया गया।

अस्पताल सील, 9 मंजिला टावर पर कार्रवाई की तैयारी: मुख़्तार अंसारी के करीबी सिराज अहमद पर योगी सरकार का एक्शन, गिरोह के 282 लोग जद में

जेल में बंद उत्तर प्रदेश का कुख्यात गैंगस्टर अतीक अहमद पर योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्रवाई जारी है। उसकी बेनामी संपत्तियों को खंगालने में प्रशासन जुटा हुआ है। लखनऊ में मुख्तार के करीबी सिराज अहमद नाम के एक बिल्डर पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा बड़ी कार्रवाई की गई है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मुख्तार के करीबी बिल्डर सिराज अहमद के एफआई हॉस्पिटल को सील कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल से सटे सिराज अहमद के एफआई टावर पर भी जल्द कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। नौ मंजिल वाले इस टावर पर अवैध रूप से बने दो फ्लोर को गिराया जाएगा।

एफआई टावर में दो फ्लोर- 7वाँ और 8वाँ, पर बने 24 फ्लैट और 9वें फ्लोर पर बने तीन पेंट हाउस को अवैध घोषित कर एलडीए नोटिस दे चुका है। इसके बेसमेंट में पार्किंग के लिए जगह बनाई गई थी, लेकिन उसमें दुकान और दफ्तर आदि बना दिए गए थे। LDA ने पार्किंग स्पेस में बने इन निर्माणों को ध्वस्त कर दिया है।

दरअसल, मुख्तार के करीबी बिल्डर शोएब इकबाल, मोनिस इकबाल, सिराज अहमद और माइकल के खिलाफ कैसरबाग में मामला दर्ज किया जा चुका है। मोनिस को पुलिस गिरफ्तार कर जेल पहले ही भेज चुकी है, जबकि सिराज और माइकल की तलाश की जा रही है।

बता दें कि इससे पहले 17 दिसंबर 2022 को हाजीपुर और हजरतगंज पुलिस की मौजूदगी में लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली अंतर्गत दो प्लॉटों को कुर्क किया गया था। ये प्लॉट मुख्तार अंसारी की माँ राबिया खातून उर्फ राबिया बेगम और बहन फहमीदा अंसारी के नाम पर दर्ज थे। इन दोनों प्लॉटों की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई गई थी।

मुख्तार अंसारी पिछले कुछ समय से यूपी के बांदा जेल में बंद है। उस पर हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, धमकी देने सहित गैंगस्टर ऐक्ट एवं अन्य ऐक्ट में 59 मामले दर्ज हैं। इनमें से 20 मामले अदालतों में अभी लंबित हैं। मुख्तार अंसारी के अलावा, उसके गिरोह के 282 लोगों पर पुलिस कार्रवाई चल रही है। इनमें से 126 पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि 66 पर गुंडा एक्ट में कार्रवाई हुई है। मुख्तार अंसारी के 5 साथियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।

विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्तार अंसारी की 300 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है। वहीं, प्रशासन ने लगभग 283 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति को नष्ट किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपने पहले कार्यकाल में माफियाराज को खत्म करने का संकल्प लेते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की बात कही थी। इसके बाद से प्रदेश में पुलिस-प्रशासन ने गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। इनमें से एक मुख्तार अंसारी भी है।

‘₹1 करोड़ का करो इंतजाम, वरना गोगामेड़ी जैसा होगा हाल’: राजस्थान में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से ज्वैलर को धमकी

राजस्थान में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर आतंक फैलाने का काम लगातार चल रहा है। हाल ही में, जयपुर के एक ज्वैलर को फोन पर एक करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी गई। धमकी देने वाले ने कहा कि अगर ज्वैलर ने पैसे नहीं दिए तो उसे सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की तरह मार दिया जाएगा।

घटना के अनुसार, जयपुर के सदर बाजार में स्थित एक ज्वैलर को शनिवार (23 दिसंबर 2023) को एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताया और एक करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी। उसने कहा कि अगर ज्वैलर ने पैसे नहीं दिए तो उसे सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की तरह मार दिया जाएगा।

डर के मारे ज्वैलर ने पुलिस को सूचना दी। पीड़ित ज्वैलर ने जयपुर के विद्याधर नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है, इसकी जाँच विद्याधर नगर थाने के एसएसओ को ही सौंपी गई है।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि पीड़ित ज्वैलर जयपुर-सीकर रोड पर रहता है। वो जवाहरात का काम करता है। उसके ज्वैलरी शोरूम के व्यापार के लिए उसका एक ऑफिशियल नंबर भी है। वह मोबाइल नंबर शोरूम पर ही रहता है। 19 दिसंबर की दोपहर करीब 11:30 बजे शोरूम के ऑफिशियल मोबाइल नंबर पर आए अनजान नंबर से कॉल आया, जिसे शोरूम पर काम करने वाले कर्मचारी ने उठाया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का आदमी अरविंद बताया और कहा कि वो भरतपुर जेल से बोल रहा है। शाम तक एक करोड़ रुपए का इंतजाम न हुआ, तो सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जैसा हाल हो जाएगा। धमकी देने वाले ने ये भी कहा कि वो सिर्फ जगह बताए, उसका आदमी पैसे लेने उसके पास आ रहा है।

बढ़ता ही जा रहा बिश्नोई गैंग का खौफ

लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक संगठित अपराध गिरोह है जो भारत के पंजाब, राजस्थान और हरियाणा राज्यों में सक्रिय है। गैंग का नेतृत्व लॉरेंस बिश्नोई करता है, जो एक कुख्यात गैंगस्टर है। ये गैंग हत्या, अपहरण, रंगदारी और अन्य संगठित अपराधों में शामिल है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग का आतंक राजस्थान में लगातार बढ़ रहा है। गैंग ने कई लोगों को धमकी दी है और रंगदारी माँगी है। गैंग के आतंक से लोगों में दहशत फैली हुई है। बताया जा रहा है कि गैंग के सदस्यों के पास आधुनिक हथियार और तकनीक है। हालाँकि पुलिस ने दावा किया है कि वो इस गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

5 दिसंबर हुई थी गोगामेड़ी की हत्या

बता दें 5 दिसंबर 2023 को पौने 2 बजे सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की उनके जयपुर स्थित आवास पर गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अब तक रोहित गोदारा का नाम प्रमुखता से आ रहा है, जिसका सुखदेव सिंह से जमीनी विवाद चल रहा था। रोहित को लॉरेंस विश्नोई गैंग का मेंबर माना जाता है। इस हत्याकांड से जुड़े कई शूटर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालाँकि नए नए नामों से धमकी आना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती है।

16 बीघा जमीन बेची, रिश्तेदारों से उधार लिया, राम मंदिर को दान किया ₹1 करोड़: अब रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साक्षी बनेंगे सियाराम गुप्ता, ‘प्रथम दानदाता’ को मिला न्योता

अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर के लिए पहले दानदाता को प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले सियाराम ने श्रीराम मंदिर के लिए अदालत से निर्णय आने से पहले ही 1 करोड़ रुपए का दान दे दिया था। उन्हें अब मंदिर निर्माण के लिए पहले दानदाता के रूप में जाना गया है।

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित कार्यकर्ता सियाराम गुप्ता ने अक्टूबर 2018 में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ₹1 करोड़ दिए थे। उन्होंने यह धनराशि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रांत को दी थी। उनके रिकॉर्ड के अनुसार वह पहले दानदाता निकले हैं।

उन्होंने संकल्प लिया था कि वह श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ₹1 करोड़ का दान देंगे। इसके लिए धन जुटाने को उन्होंने अपनी 16 बीघे जमीन बेच दी थी। हालाँकि, इससे भी पैसे पूरे नहीं हुए तो उन्होंने अपने रिश्तेदारों से ₹15 लाख उधार लिए। इस तरह से उन्होंने ₹1 करोड़ पूरे करके 20 नवम्बर, 2018 को दान किए थे।

हालाँकि, श्रीराम मंदिर के लिए देश के सुप्रीम कोर्ट से निर्णय एक वर्ष 9 नवम्बर 2019 को आया था। सियाराम गुप्ता इसके बाद इस दान को देकर भूल गए और इसका प्रचार-प्रसार भी नहीं किया। उनका कहना है कि उन्हें इसका प्रचार करने की कोई मंशा नहीं थी।

अब जब 22 जनवरी, 2023 को श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होनी है तो उससे पहले सियाराम गुप्ता को भी आमंत्रण भेजा गया है। उन्हें मंदिर का पहला दानदाता, रिकॉर्ड के अनुसार बताया गया है। सियाराम गुप्ता श्रीराम के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने प्रतापगढ़ में प्रयागराज रोड पर एक मंदिर का निर्माण करवाया है और यहीं रह कर पूजा अर्चना करते हैं।

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होना है जिसमें 6000 से अधिक लोगों को बुलाया गया है। आमंत्रित लोगों में पुराने कारसेवक, कारोबारी, पत्रकार, नेता और विशिष्टगण शामिल हैं। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे।

‘मुनव्वर फारूकी के साथ मेरे शारीरिक संबंध’: ‘बिग बॉस’ में 21 साल की आयशा खान का खुलासा, कहा – लड़कियों को धोखा देना उसकी फितरत

बिग बॉस 17 में आयशा खान के आने के बाद मुनव्वर फारूकी को लेकर नए-नए राज खुल रहे हैं। पिछली कुछ एपिसोड्स में पता चला था कि कैसे मुनव्वर के एक दो नहीं, बल्कि कई अफेयर रहे हैं और अब आयशा ने कहा है कि बिगबॉस में मुनव्वर ने अपने बेटे को लेकर भी झूठ बोला। इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि लड़कियों को चीट करना मुनव्वर का पैटर्न रहा है।

शो में आयशा खान ने कहा, “जब मैं इससे संबंधित कुछ भी देखती थी, तो मुझे लगता था कि टिक मार्क ये भी झूठ, वो भी झूठ, वो भी झूठ। मैंने उसे बोलते हुए सुना कि वो छह महीने से अपने बेटे के साथ है, जबकि दो महीने तक तो मैं आपके साथ थी…आपका बेटा आपके साथ नहीं रहता था। आखिरी के एक हफ्ते आपने उसे बुला लिया, मुझे पता तो चले क्या ये सब गेम के लिए कर रहे हो या नहीं।”

आयशा ने बताया कि मुनव्वर को लड़कियों को चीट करने की आदत है। उन्होंने कहा, “ये इनका पैटर्न रहा है, चीट करना पैटर्न रहा है प्रूफ है मेरे पास। शुरुआत से ये इसका पैटर्न रहा है और इस बात को वो जानता है। लेकिन इसे कभी बदला नहीं। मैं मुनव्वर जैसे लोगों को बदलते देखना चाहती हूँ।”

बिग बॉस में मुनव्वर पर बात करते हुए आयशा ने कहा कि वो मेंटली बहुत कुछ बर्दाश्त कर रही हैं। अगर उन्होंने अपना मुँह खोला, तो मुनव्वर का गेम बिगड़ जाएगा। आयशा ने शो में ईशा को यह भी बताया है कि उनके और मुनव्वर के बीच फिजिकल रिलेशनशिप रह चुकी हैं। जिसे सुन अभिषेक काफी दंग हुए। उन्होंने कहा कि आयशा सिर्फ 21 की हैं और नेशनल टीवी पर इतनी पर्सनल बातें शेयर करना उनके लिए ठीक नहीं है। इसके बाद अभिषेक ने ये सारी बातें मुनव्वर को बताई, जिसे सुन मुनव्वर थोड़े अंजान बने लेकिन फिर अभिषेक ने खुलकर बता दिया कि ये बातें खुद आयशा सबको बताती घूम रही है।

बता दें कि इससे पहले आयशा खान की एंट्री के बाद मुनव्वर की दूसरी एक्स गर्लफ्रेंड नाजिला ने बताया था कि मुनव्वर का सिर्फ आयशा के साथ ही नहीं बल्कि और लड़कियों के साथ भी चक्कर रहा है। उन्होंने कहा था कि उनका अब फारूकी से कोई रिश्ता नहीं है। माफी गलती की होती है गुनाहों की नहीं।

‘संजय सिंह मेरे रिश्तेदार नहीं, हम दोनों की जाति भी अलग’: WFI के कामकाज पर रोक के बाद भाजपा अध्यक्ष JP नड्डा से मिले सांसद बृजभूषण सिंह, बजरंग पूनिया बोले – वापस लूँगा पद्मश्री

केंद्र सरकार ने ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ द्वारा जूनियर लेवल नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप आयोजित करने के फैसले को रद्द कर दिया है। बृजभूषण शरण सिंह के लिए ये एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिनके करीबी संजय सिंह बबलू को इसका नया अध्यक्ष चुना गया था। यौन शोषण के आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था और अदालत की निगरानी में चुनाव हुए थे। संजय सिंह के चुनाव जीतने के बाद जहाँ बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री सम्मान वापस कर दिया था, वहीं साक्षी मलिक ने रेसलिंग से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

कुश्ती संघ के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद पहलवान साक्षी मलिक के परिजन खुश हैं। साक्षी मलिक ने चुनाव नतीजों का विरोध करते हुए कुश्ती से संन्यास की घोषणा कर दी थी। अब उनके पिता सुखबीर मलिक ने कहा है कि केंद्रीय खेल मंत्रालय ने अच्छा संदेश दिया है। माँ ने कहा कि आगे की तस्वीर साफ़ होगी तब वो अपनी बेटी को मनाएँगी। बता दें कि जूनियर लेवल चैंपियनशिप गोंडा में होना था। साक्षी मलिक ने इसे बृजभूषण शरण सिंह का इलाका बताते हुए कहा था कि जूनियर महिला पहलवान परेशान हैं कि उन्हें किस माहौल में वहाँ खेलने जाना होगा।

अब केंद्र सरकार ने अगले आदेश तक WFI की सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी है। साक्षी मलिक की माँ ने ये भी कहा है कि उनकी बेटी कुश्ती से संन्यास के फैसले पर दोबारा विचार करेगी। वहीं संगठन के नए अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा है कि वो खेल मंत्रालय के निर्णय का स्वागत करते हैं, लेकिन आश्चर्यचकित हैं और इस बारे में मंत्रालय से पूछेंगे। उन्होंने ये भी कहा कि जूनियर पहलवानों का करियर बर्बाद न हो, इसीलिए गोंडा में चैंपियनशिप की घोषणा की गई थी।

वहीं अब बजरंग पूनिया ने भी कहा है कि उन्होंने जो पद्मश्री सम्मान लौटाया था उसे अब वापस लेंगे। गूंगा पहलवान ने भी पद्मश्री पुरस्कार लौटाने की बात कही थी। वहीं संजय सिंह से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उनकी कानूनी टीम इस फैसले को लेकर काम पर लग गई है। इस फैसले का मुकाबला किया जाएगा। उधर बृजभूषण शरण सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा से मुलाकात की है। WFI को बर्खास्त नहीं किया गया है, सिर्फ उसकी गतिविधियों पर रोक लगाई गई है और एडहॉक कमिटी ही आगे के फैसले लेगी।

कैसरगंज के सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव संपन्न हुआ और नए अध्यक्ष संजय सिंह उनके रिश्तेदार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वो क्षत्रिय समाज से आते हैं, जबकि संजय सिंह भूमिहार बिरादरी से हैं। उन्होंने कहा कि संघ ने आनन-फानन में जूनियर चैंपियनशिप का निर्णय सभी फेडरेशनों के साथ मिल कर लिया, ताकि उन खिलाड़ियों का 1 साल बर्बाद न हो। नंदिनी नगर में कार्यक्रम रखे जाने के पीछे उन्होंने कारण गिनाया कि बाकी सभी फेडरेशन ने इतने कम समय में तैयारी को लेकर हाथ खड़े कर दिए थे।

‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में नहीं जाऊँगा’: न्योता मिलने के बाद CPM नेता सीताराम येचुरी का ऐलान, इस्लामी तुष्टिकरण में लिप्त लेफ्ट का राम मंदिर से किनारा

भारत में कई वामपंथी पार्टियाँ हैं, उन्हीं में से एक पार्टी CPM के नेता सीताराम येचुरी को भी अन्य बड़े नेताओं की तरह अयोध्या के विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। सीताराम येचुरी के साथ सीपीआई के नेता डी राजा को भी ये बुलावा भेजा गया था। लेकिन इंडी गठबंधन से जुड़ी मजबूरी कहें या अपने वोट बैंक को बचाने की मजबूरी, दोनों ही नेताओं के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में 22 जनवरी 2023 को पहुँचने की उम्मीद कम है। सीताराम येचुरी ने तो कह दिया है कि वो इस कार्यक्रम में नहीं पहुँच पाएँगे।

सीताराम येचुरी भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता है। सीपीएम भारत की सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी भी है। वामपंथ के मूल में भारतीय सामाजिक व्यवस्था को कोसना रहा है। कभी तीन दशकों से भी ज्यादा समय तक पश्चिम बंगाल में सत्ता में रही सीपीएम अब उसी कॉन्ग्रेस की पिछलग्गू बन चुकी है, जो इंडी गठबंधन की अगुवाई कर रही है। यही नहीं, सीपीएम को सत्ता से हटाने वाली टीएमसी भी उस इंडी गठबंधन का हिस्सा है। बहरहाल, राष्ट्रीय पहचान के प्रतीक राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में न जाना, वामपंथियों की नीति जैसा ही है। सीताराम येचुरी के दफ्तर की तरफ से साफ कह दिया गया है कि वो रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं जाएँगे। डी राजा का भी कमोबेश ऐसा ही हाल है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र की तरफ से आमंत्रण पत्र गणमान्य व्यक्तियों को भेजे जा रहे हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे, कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सोनिया गाँधी, लोकसभा में कॉन्ग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी जैसे महत्वपूर्ण विपक्षी नेताओं को भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता दिया गया है।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और एडडी देवेगौड़ा को भी आमंत्रित किया गया है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को भी इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। सूत्रों की मानें तो आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और बीएसपी की मुखिया मायावती को भी आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम में राम मंदिर आदोलन के लिए पूरा जीवन खपा देने वाले लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वयोवृद्ध नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।

16 जनवरी से शुरू होगी पूजा अर्चना

रामलला को मंदिर में विराजमान करने के लिए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का पूजन 16 जनवरी से शुरू हो जाएगा। इसमें काशी के गणेश्वर शास्त्री द्रविड़, लक्ष्मीकांत दीक्षित (कर्मकांड) पूजा संपन्न कराएँगे। प्राण-प्रतिष्ठा पूजन के बाद 48 दिन की मंडल पूजा होगी। इसे अभिषेक समारोह को विश्वप्रसन्न तीर्थ अपने नेतृत्व में पूरी करवाएँगे। सभी संप्रदायों से लगभग 4000 संत इस समारोह की शोभा बढ़ाएँगे। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला प्राण-प्रतिष्ठा करने अयोध्या आएँगे। रामलला की जब प्राण-प्रतिष्ठा होगी देश के सभी बड़े मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाएगी।

अयोध्या में बदलाव की बयार

भक्तों के लिए तीर्थक्षेत्रपुरम : रामलला के भक्तों के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई है। इसके लिए खासतौर से टिन का नया नगर तीर्थक्षेत्रपुरम (बाग बिजैसी) बसाया गया है। इसमें पानी के लिए छह नलकूप, खाने के लिए छह रसोई घर तो है हीं। इसके साथ ही सेहत संबंधी सुविधाओं के लिए 10 बिस्तरों वाला एक अस्पताल बनाया गया है। देशभर के लगभग 150 डॉक्टर इसमें बारी-बारी से अपनी सेवाएँ देंगे। इसके साथ ही नगर के कोने -कोने में लंगर, भोजनालय, भण्डारा, अन्नक्षेत्र चलाए जाएँगे, ताकि राम की नगरी आने वाले श्रद्धालुओं को खाने-पीने की परेशानी न हो। उन्हें लगे राम राज्य में होने का वास्तविक आभास हो सकें।

सोलर सिटी बन रही है अयोध्या: अयोध्या में नए बने 150 से अधिक भवनों को सोलर प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है। इसके तहत अयोध्या में सोलर पावर प्लांट का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस पॉवर प्लांट से शुरुआत में 10 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जो धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा। ये पॉवर प्लांट रामलला के मंदिर को कार्बन मुक्त करने में सक्षम होगा।

बन कर तैयार है एयरपोर्ट : अयोध्या एयरपोर्ट पूरी तरह से बनकर तैयार है। ट्रायल हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने वाले हैं। यही नहीं, अयोध्या एयरपोर्ट को DGCA से हर तरह के प्रमाण पत्र भी मिल चुके हैं। वहीं, अयोध्या से एयर इंडिया और इंडिगो तैसी कंपनियाँ सीधी फ्लाइट का ऐलान कर चुकी हैं।

‘तमिलनाडु में शौचालय साफ़ करते हैं हिंदी बोलने वाले’: उत्तर भारतीयों को लेकर DMK सांसद दयानिधि मारन का बयान हो रहा वायरल, जानिए क्या है मामला

DMK के सांसद दयानिधि मारन का हिंदी बोलने को लेकर एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दयानिधि मारन हिंदीभाषियों के विरुद्ध जहर उगल रहे हैं। वीडियो में मारन कहते हैं कि बिहार और उत्तर प्रदेश के हिंदी बोलने वाले तमिलनाडु में शौचालय साफ़ करते हैं।

दयानिधि मारन का यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है और कई समाचार पोर्टल इस पर खबर बना चुके हैं। इस बयान को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह हाल ही में दिया गया है और इसकी एक लगभग 25 सेकंड लम्बी क्लिप भी वायरल हो रही है। इसे हाल ही हिंदी और उत्तरी राज्यों के विरोध में दिए गए बयानों से जोड़ कर और उनके बाद आया बताया जा रहा है।

इस वीडियो में दयानिधि मारन कहते हैं, “जो भी लोग उत्तर प्रदेश या बिहार में हिंदी सीखते हैं वह तमिलनाडु में आकर शौचालय साफ़ करने, रोड साफ़ करने या फिर कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में मज़दूरी करने का काम करते हैं।” इस क्लिप के ऊपर काफी विवाद हो रहा है।

इस वायरल क्लिप में YOYO टीवी नाम के एक चैनल का लोगो भी लगा हुआ है। इसके आधार पर सर्च करने पर यूट्यूब पर यह पूरा बयान मिलता है जिसमें यह वायरल क्लिप वाला हिस्सा भी शामिल है। वायरल क्लिप में दयानाधि मारन के कपड़े, उनके पीछे लगी फोटो और 96 लिखा दिखता है जो कि इस वीडियो में वैसा ही है। दयानिधि की वायरल क्लिप इस बयान का हिस्सा है।

दयानाधि मारन का यह बयान 9 जून 2019 का है। यह बयान उन्होंने DMK के नेता के करूणानिधि के 96वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम दिया था। करूणानिधि का जन्मदिन 3 जून को होता है। इसी सम्बन्ध में यह कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। मारन का यह पूरा बयान ही हिंदी थोपे जाने को लेकर केन्द्रित था।

हालाँकि कई समाचार पोर्टल इसे नया बयान बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह बयान हाल ही में दिया गया है। इस बयान को हाल ही में DMK के सांसद सेंथिलकुमार के ‘गोमूत्र राज्यों’ और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयानिधि के बयान के बाद आया हुआ कहा जा रहा है।

दयानिधि मारन को लेकर चलाई गईं खबरें
दयानिधि मारन को लेकर चलाई गईं खबरें
दयानिधि मारन को लेकर चलाई गईं खबरें
दयानिधि मारन को लेकर चलाई गईं खबरें

हालाँकि यह सत्य नहीं है। यह बयान चार वर्ष पुराना है और इसकी सोशल मीडिया पर क्लिप अब वायरल हुई है। ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में सामने आया है कि यह सत्य है दयानिधि मारन ने उत्तर प्रदेश और बिहार के हिंदीभाषियों अपमान करते हुए बयान दिया था। लेकिन यह बयान अभी का नहीं बल्कि 4 वर्ष पुराना है और वर्तमान में सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण इसे नया बताया जा रहा है। इस दौरान तमिलनाडु में हिंदी को लेकर अन्य भी विवाद हुए थे।

जिसके इशारों पर हुआ नरसंहार, उस मोहम्मद दायफ़ के घर को इजरायल ने उड़ाया: वहीं छिपाता था हथियार और गोला-बारूद, सुरंग भी मिली

इजरायली सुरक्षाबलों ने 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड मोहम्मद दायफ के गाजा के दक्षिणी हिस्से में स्थित घर को तबाह कर दिया है। उसके घर से उसका पहचान पत्र बरामद हुआ है। इसके साथ ही उसके घर में एक सुरंग और हथियार एवं गोला-बारूद छिपाने की जगह मिली है। दायफ को बेहद खूँखार एवं शातिर माना जाता है। वह अब तक 7 हमलों में बचा रह गया।

दायफ इस्लामी आतंकी संगठन हमास की अल कस्साम ब्रिगेड का सरगना है। यह आतंकी संगठन हमास का सबसे खतरनाक ब्रिगेड है। इसी ब्रिगेड ने इस हमले की योजना बनाई थी। इजरायल पर अचानक हुए इस हमले में 1200 से अधिक लोग मारे गए थे। इसके साथ ही महिलाओं-बच्चों सहित 200 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया। इस दौरान महिलाओं से हैवानियत की गई थी।

इजरायल पर किए गए आतंकी हमले को मोहम्मद दायफ ने बदला बताया था। उसने कहा था कि गाजा को 16 साल तक दुनिया से काटने, वेस्ट बैंक में इजरायली पुलिस के घुसने और अल अक्सा में हुई हिंसा का बदला है। हालाँकि, अब इजरायली सेना चुन-चुनकर आतंकियों का सफाया कर रही है। इनमें मोहम्मद दायफ भी शामिल है। हालाँकि, इस कार्रवाई में उसकी मौत नहीं हुई है।

मोहम्मद दायफ के घर पर शुक्रवार (22 दिसम्बर 2023) को इजरायली सेना पहुँची थी, जिसे यहाँ उसका फिलिस्तीनी पहचान पत्र मिला है। इस पहचान पत्र में उसके अलावा उसके बच्चों की जानकारी भी दर्ज है। दायफ के घर में एक सुरंग का भी पता चला है। दायफ के घर छापा मारने वाले इजरायली सुरक्षाबलों के जवानों ने इजरायली झंडे के साथ फोटो खिंचवाया और फिर घर को बम से उड़ा दिया गया।

जिस समय इजरायली सैनिकों ने उसके घर पर रेड डाली थी, उस समय दायफ इस घर में मौजूद नहीं था। उसके विषय में काफी कम जानकारी ही बाहर आती है। इजरायली सुरक्षाबलों ने 7 अक्टूबर के आतंकी हममले के कुछ दिनों बाद मोहम्मद दायफ के घर पर बम बरसाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि हमले में दायफ के पिता समेत उसके परिजन की मौत हो गई थी।

कौन है मोहम्मद दायफ उर्फ मोहम्मद मसरी?

मोहम्मद दायफ उर्फ मोहम्मद मसरी का जन्म वर्ष 1965 में गाजा के खान यूनिस इलाके में हुआ था। खान यूनिस वही इलाका है, जहाँ इस समय इजरायल आतंकी ठिकानों पर बम बरसा रहा है। मसरी 25 साल की उम्र में ही हमास से जुड़ गया था। उससे पहले वह मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा हुआ था।

मसरी एक स्नातक है जो कॉलेज के समय से ही फिलीस्तीनी लड़ाई में जुड़ गया था। उसको वर्ष 1989 में इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार भी किया था, लेकिन 16 महीने के बाद उसे छोड़ दिया गया। मोहम्मद दायफ को कस्साम ब्रिगेड से हमास का ‘इंजीनियर’ कहे जाने वाला याहया अयाश ने जोड़ा था। अयाश बम बनाने में एक्सपर्ट था। दायफ उसका शागिर्द था।

साल 1996 तक उसने अयाश के इशारों पर काम करते हुए इजरायल में कई घटनाओं को अंजाम दिया। वर्ष 1996 में इजरायल के सुरक्षाबलों ने अयाश को मार गिराया था। इसके बाद बदला लेने के मोहम्मद दायफ ने इजरायल में कई आत्मघाती हमले करवाए, जिनमें एक सप्ताह के भीतर करीब 50 लोगों की मौत हुई।

दायफ बम बनाने, आत्मघाती हमलावरों को तैयार करने और सुरंग बनाकर हमले करने का विशेषज्ञ माना जाता है। कहा जाता है कि वह अपने आसपास बहुत सीमित लोगों को रखता है और हमेशा सामान्य नागरिक की तरह रहता है। वर्ष 2002 में उसे अल कस्साम दस्ते का सरगना बनाया गया था। वर्ष 2014 में उसने इजरायल पर बड़े हमले की धमकी दी थी।

कई बार आया इजरायल के टारगेट पर, लेकिन हर बार बच निकला

रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सुरक्षाबलों और वहाँ की खुफिया एजेंसी मोसाद के टारगेट पर मोहम्मद दायफ कम-से-कम सात बार आ चुका है, लेकिन हर बार वह जिंदा बचने में सफल रहा। साल 2002 में उसकी कार को इजरायल ने मिसाइल से टारगेट किया था। इसमें उसके दो साथियों की मौत हो गई थी, पर वह बच निकला था।

वर्ष 2004 में भी इजरायल ने मोहम्मद दायफ को निशाना बनाकर एक हवाई हमला किया। हालाँकि, इस हमले में भी वह बच गया। इस हवाई हमले में उसका खासमखास मोहम्मद अदनान-अल-गौल मारा गया। अदनान-अल-गौस को हमास का रॉकेट एक्सपर्ट कहा जाता था।

इसी तरह साल 2006 में एक खुफिया जानकारी के आधार पर इजरायल ने गाजा पट्टी के एक घर पर हवाई हमला किया था। इस हमले में उसकी रीढ़ में चोट आई थी। इजरायली सुरक्षाबलों को पता चला था कि दायफ अपने कुछ आतंकी साथियों के साथ इमारत में बैठक कर रहा है। इसके बाद यह हमला किया गया था।

साल 2014 में दायफ के घर पर एक बार और हमला हुआ। इस हमले में मसरी का एक पैर और एक हाथ उड़ गया। उसने एक आँख भी गँवा दी। कहा जाता है कि इसके बाद से वह व्हिलचेयर पर चलता है।हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि दायफ अभी भी जीवित है और उससे अच्छी अवस्था में है, जैसा इजरायल ने सोचा था।

खेल मंत्रालय ने ‘जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप’ आयोजित करने का WFI का फैसला रद्द किया, कहा – नियमों का उल्लंघन कर के जारी किया शेड्यूल

देश के युवा और खेल मामलों के मंत्रालय ने रविवार (24 दिसंबर 2023) को नवनिर्वाचित भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के उस फैसले को रोक दिया, जिसमें अंडर-21 और अंडर-15 जूनियर लेवल रेसलिंग चैंपियनशिप आयोजित करने का ऐलान किया गया था। हाल ही में कुश्ती महासंघ के चुनाव संपन्न हुए थे और इसमें संजय सिंह राय अध्यक्ष चुने गए थे। इन चुनावों में जीते अध्यक्ष और सदस्यों जूनियर चैंपियनशिप आयोजित करने का फैसला निष्प्रभावी हो जाएगा।

खेल मंत्रालय ने इस निर्णय की घोषणा एक प्रेस रिलीज के माध्यम से की है। खेल मंत्रालय ने कहा है कि नवनिर्वाचित कुश्ती महासंघ ने पहले से निर्धारित नियम कानूनों का पालन नहीं किया है। मंत्रालय ने कहा है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष द्वारा कुश्ती के जूनियर खिलाड़ियों की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का ऐलान नियमों को ध्यान में रखते हुए नहीं किया गया।

दरअसल, नए अध्यक्ष संजय सिंह ने ऐलान किया था कि इस वर्ष के अंत से पहले कुश्ती के जूनियर खिलाड़ियों की राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। मंत्रालय का कहना है कि ऐसी प्रतियोगिताओं के लिए कम से कम 15 दिन पहले जानकारी देनी होती है और यह निर्णय कार्यकारी समिति की बैठक के बाद लिए जाते हैं।

कुश्ती के जूनियर वर्ग में यह प्रतियोगिता अंडर-15 और अंडर-20 वर्ग में होनी थी। इनका आयोजन उत्तर प्रदेश के गोंडा में नंदिनी नगर में किया जाना था। इन आयोजनों को 31 दिसम्बर से पहले चालू करवाने के पीछे नए अध्यक्ष संजय सिंह का तर्क था कि ऐसा ना किए जाने से पहलवानों का एक वर्ष खराब हो जाएगा, क्योंकि पिछले 11 महीनों से चुनाव नहीं हुए हैं।

खेल मंत्रालय ने यह भी कहा है कि कुश्ती संघ के नए पदाधिकारी, पुराने पदाधिकारियों के नियन्त्रण में दिख रहे थे और इन पदाधिकारियों पर यौन शोषण जैसे आरोप लगे थे। इनकी वर्तमान में कोर्ट में सुनवाई हो रही है। अब नए निर्णय तक महासंघ का कामकाज प्रभावित रहेगा।

बता दें कि एक दिन पहले ही संजय सिंह ने कहा था कि वह कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी हैं तो यह अपराध नहीं है। संजय सिंह को 21 दिसम्बर को सम्पन्न हुए चुनावों में अध्यक्ष चुना गया था। उन्हें कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का उम्मीदवार बताया गया था। संजय सिंह ने अनीता श्योराण को हराया था, जो कि हरियाणा से आती हैं।

संजय सिंह के चुनाव जीतने के बाद साक्षी मालिक ने कुश्ती छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके साथ ही बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री लौटाने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने अपना पद्मश्री सम्मान प्रधानमंत्री के आवास के सामने फुटपाथ पर रख दिया था। इसके बाद ये खिलाड़ी कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी, भूपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा से मुलाकात की थी।

सूत्रों के मुताबिक, संजय सिंह के पक्ष ने अब इस आदेश को कानूनी रूप चुनौती देने का निर्णय लिया है। सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे ने कहा, “हम इस मामले को कानूनी तौर पर उठाने के लिए तैयार हो रहे हैं। हम निलंबन के फैसले का मुकाबला करेंगे, हमारी कानूनी टीम इस पर काम कर रही है।”