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पहले MV होंडियस पर ‘हंतावायरस’, अब कैरिबियन प्रिंसेस पर मिला ‘नोरोवायरस’: जानें- कैसे संक्रमण हब बन रहे लग्जरी क्रूज और क्यों Norovirus है सबसे बड़ा सिरदर्द

समंदर में तैरते लग्जरी क्रूज लंबे समय से लोगों के लिए शाही छुट्टियों का प्रतीक रहे हैं। आलीशान कमरे, फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएँ, दुनियाभर के व्यंजन, कसीनो, थिएटर और कई देशों की यात्रा का अनुभव इन्हें खास बनाता है। अब यही लग्जरी क्रूज जहाज एक नई चिंता की वजह बन रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई क्रूज जहाजों पर संक्रामक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं जिसके चलते इन्हें संक्रमण फैलने के बड़े केंद्रों के रूप में देखा जाने लगा है।

कोविड-19 महामारी के दौरान डायमंड प्रिंसेस की भयावह तस्वीरों ने दुनिया को पहली बार दिखाया था कि अगर किसी वायरस ने जहाज में एंट्री कर ली, तो हजारों लोगों के बीच उसे रोकना कितना मुश्किल हो जाता है। अब एक बार फिर दुनिया की नजरें क्रूज शिप पर फैले नोरोवायरस और हंतावायरस के मामलों पर टिक गई हैं। कुछ दिनों पहले ‘MV होंडियस‘ नाम के एक आलीशान जहाज पर हंतावायरस के मामले सामने आए थे।

अब कैरिबियन प्रिंसेस जहाज पर 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर नोरोवायरस से बीमार पड़ गए। उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द जैसी शिकायतों ने पूरे जहाज को प्रभावित कर दिया। इससे पहले भी कई क्रूज जहाजों पर इसी वायरस ने सैकड़ों लोगों को संक्रमित किया है।

सवाल यह है कि आखिर नोरोवायरस इतना खतरनाक क्यों माना जाता है? और क्यों दुनिया की सबसे महँगी और हाईटेक क्रूज इंडस्ट्री भी इसे पूरी तरह रोक नहीं पा रही?

क्या है नोरोवायरस और क्यों माना जाता है इतना खतरनाक?

नोरोवायरस एक बेहद संक्रामक वायरस है जो पेट और आंतों को संक्रमित करता है। इसे आम भाषा में ‘स्टमक फ्लू’ या ‘वॉमिटिंग वायरस’ भी कहा जाता है, हालाँकि यह फ्लू वायरस नहीं होता। यह वायरस इंसान के पाचन तंत्र पर हमला करता है और कुछ ही घंटों में व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार बना सकता है।

संक्रमित व्यक्ति को अचानक उल्टी, पानी जैसे दस्त, पेट में ऐंठन, मतली, बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसी समस्याएँ शुरू हो जाती हैं। कई मामलों में शरीर में पानी की भारी कमी यानी डिहाइड्रेशन भी हो जाता है, जो बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

नोरोवायरस की सबसे बड़ी खतरनाक बात इसकी संक्रमण फैलाने की क्षमता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक किसी व्यक्ति को बीमार करने के लिए वायरस के बहुत कम कण ही काफी होते हैं। यानी अगर किसी संक्रमित व्यक्ति ने किसी सतह को छू लिया और दूसरे व्यक्ति ने वही सतह छूकर खाना खा लिया तो संक्रमण फैल सकता है।

वायरस का केंद्र कैसे बन रहे क्रूज शिप?

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स क्रूज शिप को ‘सेमी-एनक्लोज्ड इकोसिस्टम’ कहते हैं। मतलब हजारों लोग लंबे समय तक एक सीमित जगह में एक साथ रहते हैं। आधुनिक मेगा क्रूज जहाजों पर 6 हजार से ज्यादा यात्री और करीब 2 हजार क्रू मेंबर मौजूद होते हैं। यह तैरते हुए छोटे शहर जैसा होता है लेकिन फर्क इतना है कि यहाँ सोशल डिस्टेंसिंग लगभग नामुमकिन होती है।

यात्री एक ही लिफ्ट, डाइनिंग हॉल, थिएटर, स्विमिंग पूल, कसीनो और रेलिंग का इस्तेमाल करते हैं। बार-बार छुई जाने वाली सतहें वायरस फैलाने का सबसे बड़ा जरिया बन जाती हैं। नोरोवायरस कई दिनों तक सतहों पर जिंदा रह सकता है। ऐसे में अगर एक भी संक्रमित व्यक्ति जहाज पर मौजूद हो, तो कुछ ही घंटों में वायरस सैकड़ों लोगों तक पहुँच सकता है।

क्रूज जहाजों का डाइनिंग सिस्टम भी संक्रमण फैलाने में बड़ी भूमिका निभाता है। बुफे सिस्टम में एक ही सर्विंग स्पून और ड्रिंक स्टेशन का इस्तेमाल सैकड़ों लोग करते हैं। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति खाने के आसपास पहुँच जाए, तो वायरस तेजी से फैल सकता है। यही वजह है कि क्रूज शिप पर फैलने वाले ज्यादातर संक्रमण खाने और साझा सतहों से जुड़े होते हैं।

नोरोवायरस कैसे फैलता है और इसे रोकना इतना मुश्किल क्यों?

नोरोवायरस मुख्य रूप से संक्रमित भोजन, पानी, सतहों और व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क के जरिए फैलता है। यह वायरस इतना जिद्दी होता है कि सामान्य सफाई से भी कई बार पूरी तरह खत्म नहीं होता। कई कीटाणुनाशक उत्पाद भी इस पर उतना असर नहीं दिखाते जितना दूसरे वायरस पर दिखता है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखने से पहले ही वायरस फैलाना शुरू कर देता है। यानी कोई यात्री खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करते हुए जहाज पर चढ़ सकता है और अगले 24 घंटे में सैकड़ों लोगों के संपर्क में आ सकता है। यही वजह है कि बोर्डिंग के समय की हेल्थ स्क्रीनिंग अक्सर बेअसर साबित होती है।

क्रू मेंबर्स का रोल भी बेहद अहम होता है। जहाज के कर्मचारी छोटे और भीड़भाड़ वाले कमरों में रहते हैं और दिनभर यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। कोई कर्मचारी बीमार होने के बावजूद काम करता रहे, तो वह सुपर-स्प्रेडर बन सकता है। कई बार नौकरी खोने या आइसोलेशन के डर से कर्मचारी तुरंत बीमारी रिपोर्ट नहीं करते, जिससे संक्रमण और तेजी से फैलता है।

क्रूज इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द क्यों बन चुका है नोरोवायरस?

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC के मुताबिक, हर साल हजारों लोग क्रूज जहाजों पर नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं। पिछले साल 18 अलग-अलग क्रूज आउटब्रेक में 2200 से ज्यादा लोग बीमार पड़े थे। इस साल भी कई बड़े जहाज इसकी चपेट में आ चुके हैं। हाल ही में कैरिबियन प्रिंसेस जहाज पर 102 यात्री और 13 क्रू मेंबर संक्रमित पाए गए।

इससे पहले स्टार प्रिंसेस जहाज पर भी करीब 200 लोग बीमार पड़े थे। हर बार कंपनियाँ जहाज को सैनिटाइज करने और सफाई बढ़ाने का दावा करती हैं, लेकिन इसके बावजूद वायरस लौट आता है। इसके पीछे एक बड़ा कारण ‘टर्नओवर टाइम’ है। एक क्रूज खत्म होने और दूसरे के शुरू होने के बीच सिर्फ कुछ घंटों का अंतर होता है।

इतने कम समय में हजारों यात्रियों को उतारना, पूरे जहाज की डीप क्लीनिंग करना मुश्किल है। कहीं थोड़ी भी लापरवाही रह जाए, तो वायरस अगले सफर में फिर सक्रिय हो सकता है।

कोविड-19 के बाद क्या बदला और फिर भी खतरा क्यों बना हुआ है?

कोविड महामारी ने क्रूज इंडस्ट्री को पूरी तरह हिला दिया था। डायमंड प्रिंसेस जहाज पर 700 से ज्यादा लोगों का संक्रमित होना दुनिया के लिए चेतावनी बन गया। इसके बाद एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम, मेडिकल प्रोटोकॉल और सैनिटाइजेशन प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए गए।

अब कई जहाजों में HEPA फिल्टर लगाए गए हैं, मेडिकल टीम को मजबूत किया गया है और सफाई के नियम सख्त किए गए हैं। CDC का वेसल सेनिटेशन प्रोग्राम (Vessel Sanitation Program) जहाजों का नियमित निरीक्षण भी करता है। लेकिन इसके बावजूद वायरस का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

एक कारण यह भी है कि जहाज की मूल बनावट को बदलना आसान नहीं है। हजारों लोगों के लिए बने बंद गलियारे, साझा वेंटिलेशन और कॉमन एरिया अब भी संक्रमण फैलाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करते हैं। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि क्रूज शिप पर संक्रमण का खतरा पूरी तरह खत्म करना लगभग असंभव है।

यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अब यात्रियों को सिर्फ क्रूज कंपनियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। खुद की सावधानी सबसे बड़ा बचाव है। सफर के दौरान बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना और बिना हाथ साफ किए खाना खाने से बचना बेहद जरूरी है। जहाज पर किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल टीम को जानकारी देनी चाहिए।

बुफे सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले साझा बर्तनों को छूने के बाद हाथ साफ करना भी जरूरी है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को क्रूज यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अंटार्कटिका जैसे दूरदराज इलाकों की यात्रा करने वालों के लिए खतरा और भी ज्यादा होता है, क्योंकि वहाँ आसपास बड़े अस्पताल मौजूद नहीं होते।

क्या भविष्य में और बढ़ेगा खतरा?

क्रूज टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है। खासकर अंटार्कटिका और दूरदराज के इलाकों की यात्राओं का ट्रेंड पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है। लाखों लोग हर साल इन जहाजों पर सफर कर रहे हैं। लेकिन जितनी तेजी से यह इंडस्ट्री बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में सिर्फ नोरोवायरस ही नहीं बल्कि खसरा, लीजियोनेयर्स रोग, ई कोलाई और दूसरे संक्रामक रोग भी क्रूज इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में कंपनियों को सिर्फ लग्जरी और मनोरंजन पर नहीं, बल्कि हेल्थ सिक्योरिटी और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी भारी निवेश करना होगा।

कभी पिता पर किया केस तो अब एक्ट्रेस के लिए तलाक: चाइल्ड एक्टर से सुपरस्टार और अब तमिलनाडु के CM बने जोसेफ विजय, जानें उनके बारे में सबकुछ

तमिलनाडु में फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार और अब नेता बने सी जोसेफ विजय ने रविवार (10 मई 2026) को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में हुए समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में नई ताकत के रूप में अपनी जगह बनाई है। हालाँकि विजय की यह राजनीतिक जीत जितनी बड़ी मानी जा रही है।

उतनी ही उनकी जिंदगी विवादों से भी घिरी रही है। फिल्मी करियर से लेकर परिवार, राजनीति और निजी जीवन तक, कई बार उनका नाम सुर्खियों और विवादों में रहा है।

फिल्मी दुनिया से राजनीति तक का सफर

विजय ने अपने करियर की शुरुआत तमिल सिनेमा से की थी और धीरे-धीरे वे एक बड़े सुपरस्टार बन गए। उनकी फिल्मों ने उन्हें भारी लोकप्रियता दी और उनके लाखों फैंस बन गए।

इसी फैन फॉलोइंग को उन्होंने बाद में सामाजिक संगठन और राजनीतिक आधार में बदल दिया। 2009 में उन्होंने अपने फैन क्लब को मक्कल इयक्कम नाम देकर सामाजिक कार्यों से जोड़ दिया। बाद में 2024 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) बनाई।

पार्टी ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की और 2026 के विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाने की स्थिति में पहुँच गई। विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़कर जीत हासिल की और राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

पिता के साथ विवाद और कानूनी लड़ाई

विजय की जिंदगी का सबसे चर्चित विवाद उनके पिता एस ए चंद्रशेखर के साथ रहा है, जो खुद एक फिल्म निर्देशक हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 के आसपास उनके पिता ने विजय की अनुमति के बिना उनके नाम से एक राजनीतिक पार्टी रजिस्टर कराने की कोशिश की थी।

इस कदम का विजय ने खुलकर विरोध किया और यहाँ तक कि अपने माता-पिता के खिलाफ अदालत में केस भी दर्ज कराया, ताकि उनके नाम और छवि का राजनीतिक इस्तेमाल रोका जा सके।

इस घटना के बाद परिवार में काफी तनाव आ गया था और लंबे समय तक दोनों के बीच दूरी बनी रही। हालाँकि बाद में कुछ अवसरों पर परिवार को साथ देखा गया, जिससे रिश्तों में हल्की नरमी की उम्मीद जताई गई।

इनकम टैक्स और फिल्मी करियर से जुड़े विवाद

विजय के फिल्मी करियर के दौरान भी कई विवाद सामने आए। खासकर 2015 से 2020 के बीच इनकम टैक्स विभाग ने उनके घर और दफ्तरों पर छापेमारी की थी। आरोप था कि उनकी फिल्मों पुली और बिगिल से जुड़ी कमाई में टैक्स अनियमितताएँ हुई हैं।

बाद में इस मामले में लगभग 15 करोड़ रुपए की आय छिपाने का मामला सामने आया और उन पर 1.5 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे कोर्ट ने सही ठहराया। हालाँकि विजय की टीम ने हमेशा यह दावा किया कि उन्होंने सभी टैक्स नियमों का पालन किया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मामला आगे बढ़ाया गया है।

चुनावी राजनीति और फिल्म विवाद

राजनीति में आने के बाद भी विजय के लिए रास्ता आसान नहीं रहा। उनकी फिल्म जन नायकन को लेकर भी कई विवाद सामने आए। फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने में देरी हुई और इसके कुछ हिस्से लीक होने की भी खबरें आईं। इससे फिल्म के निर्माताओं को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

इसके अलावा फिल्म से जुड़े कानूनी और वित्तीय विवादों ने भी चर्चा बटोरी, जिससे उनकी राजनीतिक छवि पर भी असर पड़ने की बात कही गई।

करूर भगदड़ और सुरक्षा सवाल

विजय की एक राजनीतिक रैली के दौरान करूर में हुए भगदड़ हादसे ने भी बड़ा विवाद खड़ा किया। इस घटना में कई लोगों की जान जाने की खबर सामने आई थी।

इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे। इस मामले में जाँच एजेंसियों ने भी पूछताछ की और राजनीतिक स्तर पर भी आलोचना हुई। विजय ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया और कहा कि यह एक साजिश के तहत फैलाया गया आरोप भी हो सकता है, हालाँकि जाँच जारी रही।

निजी जीवन और तलाक की खबरें

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री और अभिनेता विजय की पत्नी के संग विवाद भी सामने आया था। करीब 27 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते में आई दरार ने 27 फरवरी 2026 को विजय की पत्नी संगीता सोरनालिंगम ने चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की।

यह याचिका स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 की धारा 27(1)(a) और 27(1)(d) के तहत दाखिल की गई। कोर्ट ने विजय को 20 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का नोटिस जारी किया है।

विजय और संगीता की शादी 25 अगस्त 1999 को हिंदू और ईसाई दोनों रीति-रिवाजों से हुई थी। लंबे समय तक दोनों को तमिल फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित और मजबूत कपल्स में गिना जाता रहा, लेकिन अब रिश्तों में आई खटास खुलकर सामने आ चुकी है।

तलाक याचिका में संगीता ने आरोप लगाया है कि साल 2021 में उन्हें विजय के एक अभिनेत्री के साथ कथित एक्सट्रामैरिटल रिश्ते की जानकारी मिली थी। उनका दावा है कि उस समय रिश्ते को खत्म करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में भी यह संबंध जारी रहा। अर्जी में यह भी कहा गया है कि दोनों पिछले दो वर्षों से अलग रह रहे हैं, हालाँकि इसकी सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई थी।

इसी बीच विजय का नाम अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन के साथ भी जोड़ा जाता रहा है। दोनों ने कई सुपरहिट फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री हमेशा चर्चा में रही है।

विजय और त्रिशा को कई मौकों पर साथ देखे जाने के बाद अफवाहों ने और जोर पकड़ लिया। हालाँकि अब तक न तो विजय, न संगीता और न ही त्रिशा ने इन चर्चाओं पर कोई स्पष्ट बयान दिया है।

एक मिसाइल और दुश्मन के कई ठिकाने तबाह, भारत ने MIRV तकनीक वाली एडवांस ‘अग्नि’ का किया परीक्षण: जानें कैसे काम करता है यह अचूक ‘ब्रह्मास्त्र’

सोचिए, आसमान से एक बिजली कड़कती है और वह जमीन पर गिरने से पहले कई हिस्सों में बँटकर दुश्मन के अलग-अलग ठिकानों को एक साथ राख कर देती है। सुनने में यह किसी पौराणिक कथा के अस्त्र जैसा लगता है, लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने इसे हकीकत बना दिया है।

8 मई 2026 की शाम, जब ओडिशा के तट पर सूरज ढल रहा था, तभी डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एक ऐसी मिसाइल निकली जिसने न सिर्फ आसमान को जगमगा दिया, बल्कि भारत के दुश्मनों की नींद भी उड़ा दी। यह कोई साधारण मिसाइल नहीं थी, यह ‘अग्नि’ परिवार की वह एडवांस मिसाइल थी जो अब एक साथ कई शिकार करने में सक्षम है।

क्या है यह नई शक्ति और कैसे करती है काम?

साधारण मिसाइलें एक बार में एक ही लक्ष्य (Target) पर वार करती हैं। लेकिन इस नई एडवांस अग्नि मिसाइल की खासियत इसकी MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ‘बस’ की तरह है।

जैसे एक बस में कई यात्री बैठते हैं और बस अपनी यात्रा के दौरान अलग-अलग स्टॉप पर यात्रियों को उतारती जाती है, वैसे ही यह मिसाइल अपने साथ कई परमाणु हथियार (वॉरहेड्स) लेकर उड़ती है। अंतरिक्ष में पहुँचने के बाद यह मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में अपने इन हथियारों को छोड़ देती है। नतीजा यह होता है कि एक ही मिसाइल से दुश्मन के पाँच-छह अलग-अलग शहर या सैन्य ठिकाने एक साथ तबाह किए जा सकते हैं।

DRDO का ‘मेक इन इंडिया’ चमत्कार

इस महाशक्तिशाली मिसाइल को हमारे वैज्ञानिकों की संस्था DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने तैयार किया है। सबसे गर्व की बात यह है कि इसे बनाने में देश की प्राइवेट इंडस्ट्रीज ने भी पूरा सहयोग दिया है।

परीक्षण के दौरान मिसाइल ने बंगाल की खाड़ी से उड़ान भरी और हिंद महासागर में हजारों किलोमीटर दूर रखे गए अलग-अलग लक्ष्यों को बिल्कुल सटीक तरीके से भेदा। जमीन पर लगे रडार और समुद्र में तैनात युद्धपोतों ने इसकी हर हरकत पर नजर रखी और पाया कि मिसाइल ने हर कसौटी पर खुद को सौ फीसदी सही साबित किया है।

दुश्मन के लिए इसे रोकना क्यों है नामुमकिन?

आजकल दुनिया के कई देशों के पास ऐसी तकनीक है जो आने वाली मिसाइल को हवा में ही मार गिराती है। लेकिन भारत की इस MIRV तकनीक ने उस सुरक्षा घेरे को बेकार कर दिया है। जब एक मिसाइल से दस अलग-अलग हथियार अलग-अलग गति और दिशा में निकलेंगे, तो दुश्मन का डिफेंस सिस्टम भ्रमित (Confuse) हो जाएगा।

वह एक को रोकेगा तब तक बाकी नौ अपना काम कर चुके होंगे। यही कारण है कि इस परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में हलचल मच गई है, क्योंकि अब भारत की पहुँच और मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने थपथपाई वैज्ञानिकों की पीठ

इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खुद सोशल मीडिया और आधिकारिक बयान के जरिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों को एक अविश्वसनीय मजबूती देता है। बदलती सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते खतरों के बीच, हमारे वैज्ञानिकों, भारतीय सेना और इंडस्ट्री ने मिलकर देश का सिर फख्र से ऊँचा कर दिया है।”

ओडिशा से बांग्लादेश तक दिखा अद्भुत नजारा

जब यह मिसाइल शाम के वक्त छोड़ी गई, तो आसमान में एक नारंगी और सफेद रंग की लंबी पूंछ जैसा नजारा दिखा। यह इतना चमकदार था कि इसे सिर्फ ओडिशा में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश के कॉक्स बाजार तक देखा गया। लोगों को लगा कि कोई पुच्छल तारा या उड़नतश्तरी (UFO) जा रही है, लेकिन असल में वह भारत की सुरक्षा की नई गारंटी ‘अग्नि’ थी।

दुनिया के चुनिंदा देशों के क्लब में भारत

इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों (जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास एक मिसाइल से कई निशाने साधने की तकनीक है। यह मिसाइल शांति का प्रतीक है क्योंकि यह बताती है कि भारत की तरफ आँख उठाने वाले का अंजाम क्या होगा। यह वैज्ञानिकों की तपस्या और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की जीत है।

जिस कॉन्ग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी मंच पर दिखे विजय, आज उसी ‘हाथ’ के साथ सरकार बनाने की तैयारी: अन्ना आंदोलन के समय का वीडियो हो रहा वायरल

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय जोसेफ और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतने के बाद विजय राज्य की सत्ता के सबसे बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं। लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर विजय का एक पुराना वीडियो कई सवाल खड़े कर रहा है।

विजय का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह कॉन्ग्रेस के खिलाफ अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ रागिनी नायक ने विजय के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा कर कॉन्ग्रेस और विजय के रिश्तों को पुराना बताने की कोशिश की थी।

विजय का 15 साल पुराना वीडियो आया सामने

दरअसल विजय का लगभग 15 साल पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर अचानक वायरल हुआ। यह वीडियो साल 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान का बताया जा रहा है, जब देश में तत्कालीन UPA सरकार और कॉन्ग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर माहौल बना हुआ था। वीडियो में विजय दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना आंदोलन के मंच पर दिखाई देते हैं।

मंच पर कुमार विश्वास उन्हें अन्ना हजारे से मिलवाते हैं और बाद में विजय अपने संबोधन में अन्ना हजारे की तारीफ करते हुए कहते हैं, “बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के और केवल अपनी कोशिशों से उन्होंने (अन्ना हजारे ने) पूरे देश में समर्थन की लहर जगा दी है और शासन से भ्रष्टाचार को खत्म करने का बीड़ा उठाया है।”

यही वीडियो अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो विजय कभी कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे थे, आज वही कॉन्ग्रेस उनकी बैसाखी यानी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई है।

सत्ता की राजनीति में बदले समीकरण, कॉन्ग्रेस पर भी उठे सवाल

तमिलनाडु चुनाव परिणाम आने के बाद से कॉन्ग्रेस और TVK की नजदीकियाँ लगातार चर्चा में हैं। विजय की पार्टी 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसने कॉन्ग्रेस समेत 112 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। हालाँकि अब तक राज्यपाल की ओर से सरकार बनाने का न्योता नहीं मिलने पर TVK कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।

इसी बीच कॉन्ग्रेस के समर्थन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आलोचकों का कहना है कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता के समीकरण साधने के लिए अपने पुराने सहयोगी DMK को पीछे छोड़ दिया और अब विजय के सहारे सत्ता में हिस्सेदारी तलाश रही है।

वहीं दूसरी तरफ विजय को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि क्या उनकी राजनीति भी अब उसी पारंपरिक सत्ता व्यवस्था का हिस्सा बनती जा रही है, जिसके खिलाफ कभी उन्होंने सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया था।

वायरल वीडियो और तस्वीरों को जोड़कर कई यूजर्स यह तर्क दे रहे हैं कि विजय की राजनीति में अब वही दल और वही चेहरे शामिल हो रहे हैं, जिनके खिलाफ कभी अन्ना आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी माहौल बनाया गया था। ऐसे में विपक्षी खेमे और सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सत्ता तक पहुँचने की राजनीति ने विजय की पुरानी छवि और उनके सार्वजनिक स्टैंड को बदल दिया है।

फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में विजय का तेजी से बढ़ता प्रभाव और कॉन्ग्रेस के साथ उनकी नजदीकियाँ दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। वहीं वायरल वीडियो ने इस राजनीतिक बहस को और भी तेज कर दिया है।

खावड़ा से धोलेरा तक: रिन्यूएबल एनर्जी में अग्रणी गुजरात, कैसे तैयार कर रहा है भारत का ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर

भारत की अर्थव्यवस्था, उद्योग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पिछले एक दशक में जिन बदलावों की सबसे ज्यादा चर्चा हुई है, उनमें रिन्यूएबल एनर्जी अब एक केंद्रीय विषय बन चुकी है। दुनिया भर में तेल और गैस पर आधारित अर्थव्यवस्थाएँ अब धीरे-धीरे स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) की ओर बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आयात पर बढ़ती निर्भरता ने लगभग हर बड़े देश को इस बात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था आखिर किस ऊर्जा पर टिकेगी। भारत भी इसी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस राष्ट्रीय परिवर्तन के भीतर अगर किसी एक राज्य ने खुद को सबसे आक्रामक और सबसे रणनीतिक तरीके से स्थापित किया है, तो वह गुजरात है।

आज गुजरात देश में रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के मामले में पहले स्थान पर पहुँच चुका है। राज्य की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता करीब 47,178 मेगावाट तक पहुँच गई है। इसमें लगभग 29,303 मेगावाट सोलर एनर्जी, 15,642 मेगावाट विंड एनर्जी, 2103 मेगावाट हाइड्रो एनर्जी और 130 मेगावाट बायो एनर्जी शामिल है। इतना ही नहीं, रूफटॉप सोलर क्षमता में भी गुजरात देश में नंबर एक बन चुका है और राज्य में 6,881 मेगावाट से अधिक रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की जा चुकी है।

ये केवल आँकड़े नहीं हैं। इनके पीछे एक लंबी नीति, भूगोल, मजबूत औद्योगिक ढाँचा, बंदरगाहों का नेटवर्क, बड़े निवेश, आधुनिक ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर की गई व्यापक तैयारी छिपी हुई है।

गुजरात का यह मॉडल केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। राज्य वास्तव में एक ऐसे ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिसमें बिजली उत्पादन से लेकर उद्योग, निर्यात, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और भविष्य के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ हो। यही वजह है कि ‘खावड़ा से धोलेरा तक’ की लाइन अब सिर्फ एक भौगोलिक संदर्भ नहीं रह गई है बल्कि यह भारत के उभरते हुए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की वास्तविक तस्वीर बन चुकी है।

जब गुजरात ने ऊर्जा को भविष्य की अर्थव्यवस्था की तरह देखना शुरू किया

भारत में लंबे समय तक ऊर्जा नीति का मतलब मुख्य रूप से कोयला, थर्मल प्लांट और पारंपरिक बिजली उत्पादन ही रहा। रिन्यूएबल एनर्जी को कई वर्षों तक केवल एक पूरक स्रोत के रूप में देखा जाता था। लेकिन गुजरात उन शुरुआती राज्यों में शामिल रहा, जिसने सोलर और विंड एनर्जी को सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में देखना शुरू किया। यही सोच आगे चलकर राज्य को देश के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी हब में बदलने की वजह बनी।

गुजरात के पास कई ऐसे प्राकृतिक और औद्योगिक फायदे पहले से मौजूद थे जिन्हें बाद में ग्रीन एनर्जी मॉडल में बदला गया। राज्य के पास लंबी समुद्री तटरेखा है, कच्छ और सौराष्ट्र जैसे विशाल खुले क्षेत्र हैं, तेज हवाएँ हैं, उच्च सोलर रेडिएशन वाला भूभाग है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहाँ पहले से मजबूत औद्योगिक आधार मौजूद था। जहाँ देश के कई हिस्सों में रिन्यूएबल एनर्जी केवल बिजली उत्पादन तक सीमित रही तो वहीं गुजरात ने इसे उद्योगों, निर्यात और भविष्य की मैन्युफैक्चरिंग से जोड़कर देखना शुरू किया।

यही कारण है कि आज गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी सिर्फ खेतों के बीच लगे कुछ सोलर पैनलों तक सीमित नहीं है। यहाँ विशाल सोलर पार्क, विंड कॉरिडोर, हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन योजनाएँ, आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क और इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। यही व्यापक तस्वीर गुजरात को बाकी राज्यों से अलग पहचान देती है।

खावड़ा: जहाँ रेगिस्तान के बीच तैयार हो रहा है भारत का सबसे बड़ा ग्रीन पावर हब

अगर गुजरात के ग्रीन एनर्जी मॉडल का सबसे बड़ा प्रतीक खोजा जाए तो वह कच्छ का खावड़ा क्षेत्र है। पाकिस्तान सीमा के पास स्थित यह इलाका कभी मुख्य रूप से बंजर जमीन, रेगिस्तानी क्षेत्र और सीमावर्ती भूभाग के रूप में जाना जाता था। लेकिन आज यही क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में उभर रहा है।

खावड़ा में विकसित किया जा रहा हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क केवल एक सामान्य सोलर प्रोजेक्ट नहीं है। यह सोलर और विंड एनर्जी दोनों को जोड़कर तैयार किया जा रहा विशाल ऊर्जा केंद्र है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत इसका भूगोल है। यहाँ विशाल खाली जमीन उपलब्ध है, साल के अधिकांश समय तेज धूप रहती है और मजबूत हवा का प्रवाह भी मौजूद हैं।

यह परियोजना अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है लेकिन इसके बड़े हिस्से ऑपरेशनल हो चुके हैं और हजारों मेगावाट क्षमता पहले ही बिजली उत्पादन शुरू कर चुकी है। आने वाले वर्षों में इसकी क्षमता को और बढ़ाया जाना है। कई रिपोर्ट्स में इसे दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पार्क्स में शामिल बताया जा रहा है।

खावड़ा का महत्व केवल उसके आकार में नहीं है। इसका असली महत्व इस बात में है कि यह भारत की भविष्य की ऊर्जा रणनीति का परीक्षण क्षेत्र बनता जा रहा है। यहाँ सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं हो रहा बल्कि बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा रहा है ताकि यह ऊर्जा देश के दूसरे हिस्सों और औद्योगिक क्लस्टर्स तक पहुँच सके। यहीं से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की वास्तविक तस्वीर सामने आती है। क्योंकि गुजरात केवल उत्पादन नहीं कर रहा बल्कि उत्पादन से लेकर उपभोग तक की पूरी सीरीज तैयार कर रहा है।

खावड़ा से धोलेरा तक: बिजली उत्पादन से भविष्य की औद्योगिक व्यवस्था तक

गुजरात की रणनीति को समझने के लिए खावड़ा और धोलेरा को एक साथ देखना जरूरी है। अगर खावड़ा ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन रहा है, तो धोलेरा उस ऊर्जा पर आधारित भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का प्रतीक बनता दिखाई देता है। धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, जिसे भारत का सबसे महत्वाकांक्षी स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी प्रोजेक्ट माना जाता है, केवल रियल एस्टेट या शहरीकरण की परियोजना नहीं है। इसे भविष्य की औद्योगिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। यहाँ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

यहीं पर गुजरात का मॉडल सामान्य रिन्यूएबल एनर्जी मॉडल से अलग नजर आता है। राज्य केवल बिजली उत्पादन नहीं करना चाहता बल्कि वह बिजली के इर्द-गिर्द भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था भी खड़ी करना चाहता है। इसका मतलब यह है कि कच्छ के खावड़ा जैसे क्षेत्रों में पैदा होने वाली रिन्यूएबल एनर्जी आगे चलकर धोलेरा जैसे इंडस्ट्रियल हब्स को ऊर्जा उपलब्ध करा सकेगी। यानी एक तरफ विशाल सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स होंगे, तो दूसरी तरफ उन्हीं के आधार पर सेमीकंडक्टर यूनिट्स, ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट्स, बैटरी इकोसिस्टम और निर्यात-उन्मुख मैन्युफैक्चरिंग विकसित की जाएगी। यह केवल ऊर्जा परिवर्तन नहीं बल्कि एक बड़े औद्योगिक परिवर्तन की भी शुरुआत है।

सरकार की भूमिका

गुजरात का रिन्यूएबल एनर्जी मॉडल केवल प्राकृतिक संसाधनों की वजह से सफल नहीं हुआ है। इसके पीछे लंबे समय से चल रही नीतिगत तैयारी भी शामिल है। राज्य सरकार ने कई स्तरों पर काम किया, जिसने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया। सबसे पहले बड़े पैमाने पर जमीन उपलब्ध कराई गई। रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण की होती है लेकिन कच्छ जैसे क्षेत्रों में विशाल भूमि उपलब्ध होने के कारण बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स संभव हो सके। इसके साथ ही ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश किया गया ताकि उत्पादित बिजली को आसानी से ग्रिड से जोड़ा जा सके।

गुजरात ने हाइब्रिड रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स पर भी विशेष जोर दिया। इसका मतलब यह है कि सोलर और विंड दोनों को एक साथ विकसित किया जाए ताकि ऊर्जा उत्पादन अधिक स्थिर और प्रभावी बन सके। इसके साथ राज्य ने निजी निवेश को भी बड़े स्तर पर आकर्षित किया। यही वजह है कि अडानी ग्रुप, टाटा ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्री जैसी बड़ी कंपनियाँ गुजरात में ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भारी निवेश कर रही हैं।

रूफटॉप सोलर के मामले में भी गुजरात का मॉडल अलग दिखाई देता है। राज्य में रूफटॉप सोलर को बड़े पैमाने पर अपनाया गया है। इसकी एक बड़ी वजह नीति समर्थन और अपेक्षाकृत तेज अमल को भी माना जाता है। इसके अलावा गुजरात के बंदरगाहों और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स ने भी रिन्यूएबल एनर्जी मॉडल को मजबूती दी है। बंदरगाहों की उपलब्धता का अर्थ यह है कि भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया और अन्य ऊर्जा उत्पादों के निर्यात की संभावनाएँ भी लगातार बढ़ेंगी। यही कारण है कि गुजरात को केवल बिजली उत्पादन के केंद्र के रूप में नहीं बल्कि संभावित ग्रीन एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी देखा जा रहा है।

रिन्यूएबल एनर्जी के पीछे छुपा बड़ा भू-राजनीतिक और आर्थिक खेल

गुजरात का ग्रीन एनर्जी मॉडल केवल राज्य के विकास तक सीमित नहीं है। इसके पीछे भारत की बड़ी रणनीतिक जरूरतें भी जुड़ी हुई हैं। भारत आज भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल और गैस के जरिए पूरा करता है। मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने पर ऊर्जा की कीमतों में उछाल आता है जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में रिन्यूएबल एनर्जी अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा का भी बड़ा प्रश्न बन चुकी है।

इसी संदर्भ में गुजरात की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर बड़े पैमाने पर सोलर, विंड और ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित होता है तो भारत धीरे-धीरे आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इसके साथ ही दुनिया की बड़ी कंपनियाँ अब ऐसी सप्लाई चेन की तलाश में हैं जो ‘क्लीन एनर्जी’ पर आधारित हो। यही वजह है कि भविष्य की मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था में ग्रीन पावर एक बड़े प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के रूप में उभर रही है।

इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में केवल यह मायने नहीं रखेगा कि कौन सा राज्य ज्यादा उद्योग स्थापित कर रहा है बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वे उद्योग किस प्रकार की ऊर्जा पर चल रहे हैं। यही वह जगह है, जहाँ गुजरात खुद को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करता दिखाई दे रहा है।

केवल बिजली नहीं, रोजगार, उद्योग और निवेश का नया मॉडल

रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि यह केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है। लेकिन गुजरात का मॉडल दिखाता है कि इसे औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार से भी जोड़ा जा सकता है। जब किसी राज्य में बड़े पैमाने पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स आते हैं, तो उनके साथ ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस इकोसिस्टम और कुशल कर्मचारियों की जरूरत भी होती है। अगर उसी ऊर्जा के आधार पर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी उद्योग विकसित होते हैं तो उसका प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है।

धोलेरा जैसे क्षेत्रों को इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। अगर भविष्य में ग्रीन एनर्जी आधारित मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित होता है, तो गुजरात भारत के औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थिति में पहुँच सकता है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ अब कार्बन न्यूट्रल या लो-कार्बन सप्लाई चेन की ओर बढ़ रही हैं। ऐसी स्थिति में वही कंपनियाँ और देश ज्यादा आकर्षक माने जाएँगे, जो स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित उत्पादन करने में सक्षम होंगे। गुजरात खुद को इसी वैश्विक बदलाव के अनुरूप तैयार करता दिखाई दे रहा है।

भारत का पहला ग्रीन इंडस्ट्रियल स्टेट बन रहा गुजरात!

यह सवाल अब धीरे-धीरे स्वाभाविक होता जा रहा है। क्योंकि गुजरात में जो तस्वीर उभर रही है वह केवल रिन्यूएबल क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यहाँ बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, स्टोरेज, उद्योग, निर्यात और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।

खावड़ा में विशाल रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन, सौराष्ट्र और कच्छ में विंड कॉरिडोर्स, तेजी से बढ़ता रूफटॉप सोलर नेटवर्क, धोलेरा जैसे स्मार्ट इंडस्ट्रियल क्षेत्र, ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ और बंदरगाहों पर आधारित निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर आदि इन सभी को एक साथ देखें तो साफ हो जाता है कि गुजरात केवल बिजली उत्पादक राज्य बनना नहीं चाहता। राज्य खुद को भविष्य की ग्रीन अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

संभव है कि आने वाले वर्षों में भारत के दूसरे राज्य भी इसी दिशा में बड़े कदम उठाएँ। लेकिन फिलहाल गुजरात ने जिस आधार, गति और रणनीतिक दृष्टि के साथ रिन्यूएबल एनर्जी को औद्योगिक विकास से जोड़ने की कोशिश की है, उसने उसे एक अलग पहचान दी है।

गुजरात की बदलती भूमिका

अगर पिछले दो दशकों के गुजरात मॉडल को ध्यान से देखा जाए तो साफ दिखाई देता है कि राज्य ने हर दौर में खुद को भारत की अगली आर्थिक दिशा के साथ जोड़ने की कोशिश की है। एक समय गुजरात को मुख्य रूप से बंदरगाहों, पेट्रोकेमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता था। इसके बाद राज्य ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स और निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से चर्चा में आया। अब तस्वीर उससे कहीं आगे जाती दिखाई दे रही है। अब गुजरात खुद को भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

इस बदलाव को केवल सरकारी दावों या राजनीतिक भाषणों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके पीछे जो वास्तविक परिवर्तन हो रहा है, वह जमीन पर साफ दिखाई देता है। कच्छ के विशाल रेगिस्तानी इलाकों में फैले सोलर पैनल, समुद्री हवाओं के बीच लगाए गए विंड टर्बाइन्स, नए ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ और स्मार्ट इंडस्ट्रियल क्षेत्र ये सभी मिलकर एक नई औद्योगिक संरचना तैयार कर रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गुजरात रिन्यूएबल एनर्जी को केवल बिजली उत्पादन के रूप में नहीं देख रहा। राज्य इसे एक पूरे आर्थिक इकोसिस्टम में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि यहाँ केवल सोलर पार्क नहीं बनाए जा रहे बल्कि इन परियोजनाओं को बंदरगाहों, मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन्स, स्मार्ट सिटीज और निर्यात नेटवर्क्स से भी जोड़ा जा रहा है।

खावड़ा और धोलेरा का महत्व

कच्छ का इलाका लंबे समय तक मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्र, सूखा रेगिस्तानी भूभाग और कम आबादी वाले इलाके के रूप में देखा जाता था। लेकिन आज वही क्षेत्र भारत के सबसे बड़े ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक भी है। जहाँ कभी रेगिस्तान और बंजर जमीन दिखाई देती थी, वहाँ अब हजारों मेगावाट क्षमता वाले सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं। विशाल ट्रांसमिशन टावर और रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर इस बात का संकेत देते हैं कि भारत की भविष्य की ऊर्जा कहानी अब केवल महानगरों में नहीं बल्कि सीमावर्ती इलाकों में भी लिखी जा रही है।

खावड़ा परियोजना इसी परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण है। यह केवल एक बिजली परियोजना नहीं है। यह उस सोच का प्रतीक है, जिसमें भूगोल और प्राकृतिक चुनौतियों को आर्थिक अवसर में बदला गया है। कच्छ की कठोर जलवायु, तेज हवाएँ और विशाल खाली जमीन जिन्हें कभी विकास की बाधा माना जाता था, आज रिन्यूएबल एनर्जी की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं। यही वजह है कि खावड़ा का जिक्र अब केवल तकनीकी या औद्योगिक संदर्भ में नहीं होता बल्कि यह भारत की ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक बन चुका है।

अगर खावड़ा ऊर्जा उत्पादन का केंद्र है, तो धोलेरा उस ऊर्जा पर आधारित भविष्य की अर्थव्यवस्था का प्रतीक बनता दिखाई देता है। अक्सर स्मार्ट सिटी शब्द का इस्तेमाल केवल चौड़ी सड़कों, डिजिटल नेटवर्क या शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किया जाता है लेकिन धोलेरा का महत्व इससे कहीं अधिक व्यापक है। जिस तरह से धोलेरा को विकसित किया जा रहा है, उससे साफ दिखाई देता है कि यहाँ भविष्य के उन उद्योगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो आने वाले दशकों की वैश्विक अर्थव्यवस्था को तय कर सकते हैं। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा मॉडल रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। अगर भविष्य की फैक्ट्रियाँ साफ ऊर्जा पर चलेंगी, अगर निर्यात की और तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग को लो-कार्बन वाली ऊर्जा मिलेगी और अगर ग्रीन हाइड्रोजन आधारित औद्योगिक सिस्टम विकसित होंगे तो धोलेरा जैसे क्षेत्र भारत की औद्योगिक संरचना को पूरी तरह बदल सकते हैं। यानी गुजरात की मौजूदा रणनीति केवल ‘ज्यादा बिजली उत्पादन’ तक सीमित नहीं है बल्कि उस बिजली के इर्द-गिर्द भविष्य की अर्थव्यवस्था का ढाँचा तैयार करना भी उसका हिस्सा है।

भविष्य की अर्थव्यवस्था तैयार कर रहा है गुजरात

आज जब दुनिया ऊर्जा परिवर्तन के दौर से गुजर रही है तब गुजरात ने खुद को केवल एक औद्योगिक राज्य तक सीमित नहीं रखा है। राज्य जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, वह इस बात का संकेत देता है कि आने वाले समय में ऊर्जा, उद्योग और रणनीतिक आर्थिक शक्ति, तीनों एक-दूसरे से अलग नहीं रहेंगे।

खावड़ा में रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन, कच्छ और सौराष्ट्र में विंड कॉरिडोर्स, पूरे राज्य में तेजी से बढ़ता रूफटॉप सोलर नेटवर्क, धोलेरा में भविष्य की औद्योगिक संरचना, ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ, सेमीकंडक्टर और ईवी इकोसिस्टम की तैयारियाँ अगर इन सभी को एक साथ देखें तो एक व्यापक तस्वीर उभरकर सामने आती है। यह तस्वीर केवल ‘रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता’ की नहीं है बल्कि उस भविष्य की है जिसमें स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।

गुजरात का मौजूदा मॉडल यही दिखाता है कि अगर किसी राज्य के पास भूगोल, नीति, उद्योग, निवेश और दूरदृष्टि एक साथ मौजूद हों तो वह केवल बिजली उत्पादन में अग्रणी नहीं बनता बल्कि पूरे आर्थिक परिवर्तन का केंद्र भी बन सकता है। संभव है कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा राजनीति, औद्योगिक नीति और निर्यात संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिलें। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखें तो इतना स्पष्ट है कि गुजरात खुद को उस भविष्य के लिए पहले से तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

(यह खबर मूल रूप से गुजराती में लिखी गई है जिस इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

दिलीप घोष, निशीथ प्रमाणिक, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू… जानिए बंगाल के नए CM शुभेंदु अधिकारी के साथ मंत्री पद की शपथ लेने वाले है कौन

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शुभेंदु अधिकारी के साथ ही 5 कद्दावर नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर अपनी जिम्मेदारी संभाली है।

बीजेपी ने इस कैबिनेट के जरिए बंगाल के हर कोने- उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल और मतुआ समुदाय तक को साधने की कोशिश की है। आइए जानते हैं शुभेंदु अधिकारी के उन ‘5 सेनापतियों’ के बारे में, जिनके कंधों पर बंगाल को बदलने की जिम्मेदारी है।

दिलीप घोष: संगठन के माहिर खिलाड़ी और जमीनी नेता

दिलीप घोष को बंगाल में BJP की मजबूती का ‘असली आर्किटेक्ट’ माना जाता है। RSS के प्रचारक से लेकर प्रदेश अध्यक्ष और सांसद तक का उनका सफर बहुत प्रभावशाली रहा है। 1 अगस्त 1964 को जन्मे दिलीप घोष ने सालों तक अंडमान-निकोबार में संघ का काम संभाला। वे मेदिनीपुर से सांसद और खड़गपुर से विधायक रह चुके हैं।

दिलीप घोष ने BJP को कोलकाता के ड्राइंग रूम से निकालकर गाँव की झोपड़ियों तक पहुँचाया। उनकी बेबाक बयानबाजी और ‘चाय पे चर्चा’ बंगाल में बेहद मशहूर है। सरकार और संगठन के बीच तालमेल बिठाने में उनका अनुभव नई सरकार के लिए संजीवनी का काम करेगा।

निशीथ प्रमाणिक: उत्तर बंगाल का युवा और प्रखर चेहरा

कूचबिहार के रहने वाले निशीथ प्रमाणिक BJP के सबसे युवा और प्रभावशाली चेहरों में से एक हैं। वे उत्तर बंगाल में पार्टी की जीत के सबसे बड़े नायक माने जाते हैं। निशीथ दलित समाज की ‘राजबंशी’ जाति से आते हैं। वे मोदी सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में शामिल थे और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 2026 के चुनाव में उन्होंने माथाभांगा सीट से भारी मतों से जीत दर्ज की।

सीमा सुरक्षा और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर वे काफी मुखर रहे हैं। उन्हें मंत्री बनाकर बीजेपी ने उत्तर बंगाल के विकास और राजबंशी समुदाय को बड़ा सम्मान दिया है। युवाओं के बीच वे एक बड़े आइकन बन चुके हैं।

अग्निमित्रा पॉल: फैशन की दुनिया से राजनीति के अखाड़े तक

अग्निमित्रा पॉल बंगाल में ‘नारी शक्ति’ और आधुनिकता का चेहरा हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक मशहूर फैशन डिजाइनर थीं, लेकिन आज वे एक जुझारू नेत्री के रूप में पहचानी जाती हैं। आसनसोल दक्षिण से लगातार दूसरी बार विधायक बनीं अग्निमित्रा बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

अग्निमित्रा पॉल ने संदेशखाली जैसी घटनाओं में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरकर संघर्ष किया। वे शहरी मतदाताओं और महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। कैबिनेट में उनकी मौजूदगी यह साफ करती है कि नई सरकार में महिला सुरक्षा और औद्योगिक विकास प्राथमिकता पर रहेंगे।

अशोक कीर्तनिया: मतुआ समुदाय की बुलंद आवाज

बनगाँव उत्तर (SC) से विधायक अशोक कीर्तनिया को मंत्री बनाना एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। वे मतुआ महासंघ से गहराई से जुड़े हैं और दलित समाज के हितों की बात करते हैं। 52 वर्षीय अशोक कीर्तनिया ग्रेजुएट हैं और करीब 4 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं।

उन्होंने 2026 के चुनाव में 40 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने शरणार्थियों के अधिकारों और CAA (नागरिकता कानून) को लागू कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। उन्हें कैबिनेट में शामिल कर बीजेपी ने मतुआ और दलित वोट बैंक को पूरी तरह अपने पाले में मजबूत कर लिया है।

खुदीराम टुडू: जंगलमहल के जनजातियों का गौरव

बांकुरा की रानीबांध (ST) सीट से आने वाले खुदीराम टुडू इस कैबिनेट के सबसे चौंकाने वाले लेकिन महत्वपूर्ण नाम हैं। वे संथाल जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। पेशे से शिक्षक रहे खुदीराम टुडू एक सादगी पसंद नेता हैं।

खुदीराम टुडू ने इस चुनाव में TMC उम्मीदवार को 52 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। जंगलमहल क्षेत्र में TMC के किले को ढहाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है।

खुदीराम टुडू को मंत्री पद देकर BJP ने संदेश दिया है कि जनजातीय समाज अब केवल वोटर नहीं, बल्कि सरकार चलाने वाला हिस्सा है। वे जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य के सुधार का चेहरा बनेंगे।

लिंचिंग से लेकर देसी बम से हमलों तक, ममता की TMC के गुंडों ने खेला खूनी खेल: जाधव बोर से मधु मंडल-चंद्रनाथ राठ की हत्याएँ महज बानगी, जानें राजनीतिक हिंसा से कैसे फैलाई दहशत

तृणमूल कॉन्ग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी 2026 विधानसभा चुनाव हारने के बाद पूरी तरह बौखला गई हैं। चुनाव में हार के बाद अब पार्टी के गुंडों ने राज्य में हिंसा और अराजकता फैलानी शुरू कर दिया है।

एक तरफ ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ TMC समर्थकों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या, लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और आम नागरिकों को डराने-धमकाने के आरोप लग रहे हैं।

सोमवार (4 मई 2026) से अब तक TMC कार्यकर्ताओं द्वारा की गई ऐसी कई घटनाओं को ऑपइंडिया ने मिलाकर ये रिपोर्ट बनाई है।

जाधव बोर की हावड़ा में लिंचिंग

सोमवार (4 मई 2026) को हावड़ा के उदयनारायणपुर इलाके में 45 साल के बीजेपी कार्यकर्ता जाधव बोर की TMC समर्थित गुंडों द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। यह घटना बीजेपी की चुनावी जीत के बाद इलाके में चल रहे जश्न के बीच हुई।

परिवार के अनुसार, जाधव बोर अन्य बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ रंग खेलकर जीत का जश्न मना रहे थे। शाम को वह घर लौट आए थे, लेकिन कुछ देर बाद नहाने के लिए घर से थोड़ी दूरी पर स्थित एक जगह पर गए।

इसी दौरान कुछ लोग वहाँ पहुँचे और उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने लोहे की रॉड से उनके सिर पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

उनकी चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुँचे, लेकिन तब तक आरोपित वहाँ से फरार हो चुके थे। इसके बाद जाधव बोर को तुरंत उदयनारायणपुर स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

न्यू टाउन में मधु मंडल की पीट-पीटकर हत्या

मंगलवार (5 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन के बालीगुड़ी इलाके में विजय जुलूस के दौरान बीजेपी नेता मधु मंडल की TMC समर्थित गुंडों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।

बाद में उनका शव कीचड़ से भरी एक जगह पर पड़ा मिला। इस निर्मम हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस ने अब तक टीएमसी नेता कमल मंडल और उसके 4 सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

राजारहाट न्यू टाउन विधानसभा सीट से जीत हासिल करने वाले बीजेपी नेता पीयूष कनोडियाने मधु मंडल के हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया।

उन्होंने कहा, “मैंने अभी विधायक पद की जिम्मेदारी संभाली है और चार घंटे भी नहीं बीते हैं कि मुझे अपने भाई के शव पर माला चढ़ानी पड़ रही है। मैंने पुलिस से साफ कहा है कि इस घटना के जिम्मेदार लोगों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।”

शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट की हत्या, ड्राइवर की हालत गंभीर

बुधवार (6 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उनके घर के पास ही हुई। उस समय वह एक काले रंग की स्कॉर्पियो एसयूवी में यात्रा कर रहे थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दो बाइक सवार हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया। गोली लगने से चंद्रनाथ रथ के सिर, छाती और पेट में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस हमले में कार चालक बुद्धदेव बेहरा भी घायल हो गए, जिनकी हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।

रोहित रॉय को बारासात में गोली मारी गई

बुधवार (6 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के बसिरहाट में बीजेपी कार्यकर्ता रोहित रॉय को पेट में गोली मार दी गई। यह घटना उस समय हुई जब वह अपनी पार्टी की चुनावी जीत के जश्न में अपने इलाके में बीजेपी के झंडे लगा रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित का सामना 8 से 10 लोगों के एक समूह से हुआ, जिसके बाद उनमें से 3 से 5 लोगों ने उन पर गोली चला दी। हमले के बाद रोहित रॉय को तुरंत बसिरहाट स्टेट अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उनकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है।

उत्तर 24 परगना में भाजपा समर्थक के घर में तोड़फोड़

सोमवार (4 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के आमडंगा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी समर्थक मदन मोरोल के घर पर हमला और तोड़फोड़ की गई। आरोप है कि इस घटना को TMC समर्थित लोगों ने अंजाम दिया।

पीड़ित ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “हमने बीजेपी को वोट दिया था, इसलिए कल देर रात 40-50 तृणमूल के असामाजिक तत्व आए और हमारे घर में तोड़फोड़ की तथा हमें पीटा। पुलिस को सूचना मिलने के बाद पुलिस और केंद्रीय बल मौके पर पहुंचे। मैं बहुत डरा हुआ हूँ।”

बारानगर में भाजपा कार्यकर्ता पर चाकू से हमला

बुधवार (6 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बरानगर इलाके में बीजेपी नेता सोमनाथ धर पर बेरहमी से चाकू से हमला किया गया। वह बूथ अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे और इस हमले में वह तथा उनके परिवार के सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

रिपोर्ट के अनुसार, सोमनाथ धर अपने घर के बाहर खड़े थे तभी उन पर अचानक हमला किया गया। हमलावरों ने उन्हें जमीन पर गिराकर धारदार हथियारों से वार किया। जब उनके परिवार के सदस्य उन्हें बचाने पहुँचे, तो उन पर भी हमला किया गया। बाद में घायल अवस्था में उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिवार का आरोप है कि यह हमला TMC से जुड़े रंजीत धर और शुभंकर धर ने किया है। उनका कहना है कि दोनों लंबे समय से उनके पैतृक घर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे और संपत्ति नहीं छोड़ने पर नाराज होकर उन्होंने यह हमला किया।

अमित ठाकोर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

पानीहाटी में बम धमाके में 5 BJP कार्यकर्ता घायल

बुधवार 6 मई को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी इलाके में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर कच्चे बम फेंके जाने की घटना सामने आई। यह घटना पानीहाटी नगरपालिका के वार्ड नंबर 2 के दत्ता रोड स्थित सेंट जेवियर्स संस्थान के पास हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बीजेपी कार्यकर्ता स्थानीय लोगों से बातचीत कर रहे थे, तभी बाइक सवार कुछ लोग वहाँ पहुँचे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बाइक पर चार लोग सवार थे और उन्होंने एक के बाद एक तीन बम बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर फेंके और मौके से फरार हो गए।

इस हमले में करीब 5 बीजेपी कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि इसी क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार रतना देवनाथ ने चुनाव में जीत दर्ज की है, जो आरजी कर अस्पताल की रेप और हत्या पीड़िता की माँ हैं।

संदेशखली में 3 पुलिस अधिकारियों और 2 CRPF जवानों पर हमला

बुधवार (6 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के संदेशखाली के बामनघेरिया इलाके में गश्त पर निकली पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम पर अचानक हमला किया गया। अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग की, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

घायलों में नजत थाना प्रभारी भारत पुरकैत, राजबाड़ी आउटपोस्ट के अधिकारी भास्वत गोस्वामी और एक महिला पुलिस अधिकारी शामिल हैं। साथ ही इस गोलीबारी में दो सीआरपीएफ जवान भी घायल हुए।

सभी घायल सुरक्षाकर्मियों को तुरंत मिनाखा ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें कोलकाता के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया।

टीएमसी पार्षद के पति ने बीजेपी माइनॉरिटी विंग के नेता पर हमला किया

शुक्रवार (7 मई 2026) को पश्चिम बंगाल के हावड़ा के शिबपुर इलाके में TMC पार्षद के पति शमीम अहमद पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हिंसक हमले का आरोप लगा है।

बताया जा रहा है कि सामने आए वीडियो में अहमद एक भीड़ का नेतृत्व करते दिखे, जिसके दौरान 7-15 कच्चे बम फेंके गए और 7-8 राउंड गोलियाँ भी चलाई गईं। इस हमले का मुख्य निशाना बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष मनोज खान का घर बताया गया।

इस हमले में बीजेपी नेता मुन्‍ना खान और सिकंदर खान घायल हो गए, जबकि कई अन्य कार्यकर्ता भी जख्मी हुए। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि शमीम अहमद का नाम पहले भी रामनवमी जुलूस के दौरान हुई हिंसा के मामले में सामने आ चुका है और उन्हें NIA द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था।

टीएमसी के गुंडों ने टॉलीगंज में पेट्रोल पंप मालिक को धमकाया

सोमवार (4 मई 2026) को कोलकाता के टॉलीगंज इलाके में स्थित HPCL पेट्रोल पंप की मालिक शालिनी सेन ने आरोप लगाया कि उनके पेट्रोल पंप पर कुछ लोगों ने हंगामा किया।

शालिनी सेन के अनुसार, “कल शाम जब मैं घर पर थी, तभी लगभग 30-40 लोग नशे की हालत में पेट्रोल पंप पर पहुँचे। उन्होंने मैनेजर को एक बड़े फ्यूल टैंकर की पार्किंग को लेकर धमकाया और कहा कि उसे हटाने के लिए केवल 10 मिनट दिए जाएँगे, नहीं तो वे हंगामा करेंगे। इसके बाद मेरे मैनेजर ने मुझे फोन कर पूछा कि क्या करना है।”

शालिनी सेन ने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोगों को अब आखिरकार खुलकर सांस लेने, सुरक्षित तरीके से जीने और बिना डर के काम करने का अवसर मिल रहा है।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

योगी सरकार में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी से UP में क्राइम पर लगी लगाम, सपा शासन में हर दिन होते थे 19 दंगे-33 अपहरण: समझें कैसे आया ये बदलाव

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की तस्वीर पिछले नौ वर्षों में पूरी तरह बदल गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने राज्य को दंगा मुक्त बनाते हुए फिरौती के लिए अपहरण जैसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगा दी है। जिस प्रदेश को 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, वहाँ अब शांति और सुरक्षा की मिसाल कायम हो गई है।

सपा सरकार में हर दिन औसतन 19 दंगे-33 अपहरण

सपा सरकार के दौरान वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार उस समय औसतन हर दिन करीब 19 दंगे होते थे और अपहरण की 33 घटनाएँ दर्ज की जाती थीं। इस अवधि में कुल 25 हजार से अधिक दंगे हुए, जो प्रदेश की छवि को बुरी तरह प्रभावित करते थे। व्यापारी और आम नागरिक दोनों ही फिरौती के खतरे में रहते थे।

योगी सरकार ने अपनाई जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सक्रिय पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट का इस्तेमाल और माफिया की संपत्तियों की जब्ती जैसे कदम उठाए गए। परिणामस्वरूप पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक भी दंगा नहीं हुआ। कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिशें जरूर की गईं, लेकिन सरकार ने समय रहते सख्त कार्रवाई कर उन मंसूबों पर पानी फेर दिया।

मामूली हिंसक घटनाओं को उग्र रूप लेने से पहले ही दंगा विरोधी धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर अराजक तत्वों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक मंचों पर स्पष्ट कहा है, ‘नो कर्फ्यू-नो दंगा, यूपी में सब चंगा।’ उनकी इस नीति ने पूरे प्रदेश में शांति का माहौल स्थापित किया है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट करती है दावों की पुष्टि

एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट इस बदलाव की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर उत्तर प्रदेश में शून्य दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में भी यह दर शून्य ही रही। देश के अन्य राज्यों की तुलना में यूपी इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में है। नगालैंड में यह दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में शून्य रहा।

प्रदेश में दो वर्षों (2023-2024) में फिरौती के लिए अपहरण की एक भी घटना नहीं हुई। पहले जहां व्यापारियों को आए दिन अगवा कर फिरौती माँगी जाती थी, वहां अब ऐसी घटनाएँ पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। एनसीआरबी रिपोर्ट स्पष्ट बताती है कि सपा शासन में हर दिन 33 अपहरण दर्ज होते थे, लेकिन योगी सरकार में यह आँकड़ा शून्य पर पहुँच गया है।

बलवा यानी दंगे की अपराध दर पर भी योगी सरकार का रिकॉर्ड उल्लेखनीय है। 2024 में यूपी में यह दर 1.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 2.2 रही। रिपोर्ट में उल्लेख है कि यूपी में दर्ज 1.1 दर वाले मामले वे हैं जिनमें दंगा भड़काने की कोशिशों को तुरंत विफल कर दिया गया और अराजक तत्वों के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई की गई। मणिपुर में यह दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 रही।

योगी सरकार ने बदली यूपी की तस्वीर

यह सकारात्मक बदलाव योगी सरकार की अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग और संगठित अपराधों पर लगातार कार्रवाई का नतीजा है। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट लागू कर माफिया की आर्थिक कमर तोड़ी और उनकी संपत्तियां जब्त कीं। इन कदमों का असर धरातल पर साफ दिखाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश अब न केवल दंगा मुक्त है बल्कि अपराध की अन्य श्रेणियों में भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सपा सरकार के समय की तुलना में आज यूपी की छवि पूरी तरह बदल चुकी है। पहले जहाँ दंगे और अपहरण आम बात थे, वहां आज शांति और विकास की कहानी लिखी जा रही है।

सरकार का मानना है कि सख्त कानून व्यवस्था ही विकास का आधार है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उठाए गए इन कदमों ने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त किए हैं बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट इसी सच्चाई की गवाही देती है।

इस तरह योगी सरकार ने साबित कर दिया कि जीरो टॉलरेंस नीति के साथ सख्ती और संवेदनशीलता का सही संतुलन अपराध मुक्त समाज का रास्ता तैयार कर सकता है। उत्तर प्रदेश अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है।

रेप-ब्लैकमेल-फिरौती… बरेली जिम जिहादी अकरम-आलम ने डॉक्टर ही नहीं- पड़ोसन पर भी ढाया जुल्म, पहले से दर्ज हैं कई FIR: GYM में हिंदू युवती को धमकाने का भी केस, जानें इनकी करतूतें

उत्तर प्रदेश के बरेली में महिला डॉक्टर से रेप किए जाने और अश्लील Video बनाकर ब्लैकमेल किए जाने के मामले मे पुलिस ने दो जिहादी भाइयों अकरम बेग और आलम बेग को गिरफ्तार किया है। ये दोनों जिहादी ‘अल्टीमेट’ नाम से जिम चलाते थे और खुलासा हुआ है कि इसमें करीब 80 हिंदू महिलाएँ वर्कआउट के लिए आती थीं लेकिन वहाँ कोई महिला ट्रेनर तक नहीं थी।

ताजा मामला में आलम बेग ने महिला डॉक्टर को वजन घटाने का झाँसा देकर नशीला ‘प्री-वर्कआउट’ ड्रिंक पिला था और उसके बेहोश हो जाने पर दोनों उसे एक प्राइवेट कमरे में ले गए। वहाँ उसका रेप किया गया और वहीं लगे कैमरे और मोबाइल से डॉक्टर का अश्लील वीडियो भी शूट किया गया। इसके बाद जिहादियों ने अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर डॉक्टर को लूटना शुरू कर दिया।

करीब 2 साल तक महिला का उत्पीड़न होकर रहा और अंतत: वो हिम्मत जुटाकर पुलिस के पास पहुँची जिसके बाद दोनों जिहादी भाई गिरफ्तार कर लिए गए हैं। ये एक दो नहीं बल्कि 7 भाई है और इन पर पहले भी गुंडई और दबंगई के आरोप लगते रहे हैं। आरोपितों का परिवार उन्हें निर्दोष बताने की कोशिश में जुटा है लेकिन दोनों भाइयों को यह पाप कोई नया नहीं है। दोनों और अन्य भाइयों के कुकर्मों की एक लंबी फेहरिस्त है जिनमें से कुछ पर हम नजर डालेंगे।

अक्टूबर 2024: दोनों भाइयों ने हिंदू महिला के साथ की अभद्रता, पीछे भेजे लड़के

अक्टूबर 2024 में भी एक महिला ने दोनों जिहादी भाइयों के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज कराई थी। ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR कॉपी के मुताबिक, हिंदू पीड़िता ने आरोप लगाया था कि ‘अल्टीमेट जिम’ के संचालक अकरम और उसके भाई आलम ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया, गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी दी।

शिकायत में कहा गया था कि हिंदू पीड़िता जिम जाती थी, जहाँ उसके साथ पहले भी कई बार गलत हरकतें और गंदे कमेंट किए गए। युवती के मुताबिक, जब उसने जिम मालिक अकरम से इसकी शिकायत की तो उसका भाई आलम उससे बदतमीजी करने लगा। आरोप है कि आलम मारपीट के लिए आगे बढ़ा और जिम से बाहर तक उसका पीछा किया।

FIR में यह भी दावा किया गया कि दोनों भाई पहले भी उसके पीछे जिम के लड़कों को भेजते थे और लगातार परेशान करते थे। पीड़िता ने पुलिस से कहा था कि उसे दोनों भाइयों से खतरा है और वे उसे मारने की धमकी दे चुके हैं।

FIR की कॉपी की एक प्रति

मार्च 2024: आलम बेग ने महिला के घर में घुसकर की रेप की कोशिश

मई 2024 में भी आलम बेग समेत अन्य लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी। इसमें बरेली में एक महिला ने आलम पर घर में घुसकर रेप की कोशिश करने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया था।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR कॉपी के मुताबिक, महिला ने आरोप लगाया कि उसका पड़ोसी आलम बेग उर्फ छोटे मियाँ काफी समय से उस पर बुरी नजर रखता था। महिला का कहना है कि आलम बेग शराब पीने का आदी है और पहले भी कई बार उसके साथ अश्लील हरकतें कर चुका था। पीड़िता ने बताया कि उसने इस बारे में पहले ही अपने पति को जानकारी दी थी।

महिला के मुताबिक, 30 मार्च 2024 की रात करीब 11 बजे वह अपने कमरे में अकेली थी। इसी दौरान आलम बेग शराब के नशे में चाकू लेकर उसके कमरे में घुस आया। आरोप है कि वह महिला के बिस्तर पर लेट गया और उसके साथ जबरदस्ती अश्लील हरकतें करने लगा। शिकायत में कहा गया कि आरोपित ने महिला को निर्वस्त्र कर बलात्कार करने की कोशिश की।

FIR की कॉपी की एक प्रति

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने विरोध किया और शोर मचाया, तो आलम बेग ने चाकू दिखाकर उसे चुप रहने और जान से मारने की धमकी दी। इसी दौरान महिला के छोटे बच्चे रोने और चीखने लगे, जिसके बाद आरोपित मौके से भाग गया।

महिला ने बताया कि घटना के करीब आधे घंटे बाद जब उसके पति घर लौटे, तब उसने पूरी घटना उन्हें बताई। इसके बाद पति ने आरोपित के घर जाकर शिकायत की और पुलिस बुलाने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद आलम बेग के साथ उसका भाई मुकर्रम उर्फ मिक्की, भतीजा रजा खान और सोहेल अहमद भी वहाँ पहुँच गए।

शिकायत में कहा गया कि इन सभी लोगों ने उल्टा महिला और उसके पति के साथ मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने पूरे परिवार को जान से मारने और मोहल्ले से निकाल देने की धमकी भी दी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपित पक्ष इलाके में दबंग और प्रभावशाली माना जाता है जबकि वह और उसका पति अकेले रहते हैं।

अप्रैल 2025: आलम बेग और उसके भाइयों पर जुड्डा का अड्डा चलाने का केस

बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने आलम बेग और उसके भाइयों पर पर जुआ अड्डा चलाने, घर में घुसकर मारपीट करने और तमंचे के बल पर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला अप्रैल 2025 में दर्ज शिकायत से जुड़ा है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR कॉपी के मुताबिक, शिकायतकर्ता नसीम बेग ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि उसके पड़ोसी अकमल बेग उर्फ अऊआ, उसका भाई आलम बेग, मुकर्रम बेग उर्फ मिक्की और उनके परिवार के लोग में जुए का अड्डा चलाते हैं। शिकायत में कहा गया कि घेर जाफर खाँ, झंडे वाली गली, पुराना शहर इलाके में असामाजिक तत्वों और जुआरियों का लगातार जमावड़ा लगा रहता था।

FIR की कॉपी की एक प्रति

शिकायत के अनुसार, पहली शिकायत के बाद 15 अप्रैल 2025 की रात करीब 9 बजे फिर से इलाके में जुआरियों और असामाजिक तत्वों की भीड़ जमा होने लगी। इस पर नसीम बेग ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस बुला ली। पुलिस के पहुँचने के बाद जुआ और जमावड़ा बंद करा दिया गया लेकिन पुलिस के जाते ही मामला और भड़क गया।

आरोप है कि आलम बेग, मुकर्रम बेग उर्फ मिक्की और करीब 10-12 जुआरी नसीम बेग के घर पहुँच गए और गेट पर लात मारते हुए धमकाने लगे। शिकायत में कहा गया कि आरोपितों ने कहा ‘आज तो तूने पुलिस बुलाकर काम बंद करा दिया, अब यह काम रोज होगा। अगर दोबारा रुकावट डाली तो पूरे परिवार को जान से मरवा देंगे’।

FIR में आगे कहा गया है कि 23 अप्रैल 2025 की रात करीब 10:50 बजे आलम बेग शराब के नशे में अपने भाई मुकर्रम बेग उर्फ मिक्की और दो अन्य बदमाश साथियों के साथ नसीम बेग के घर में घुस आया। उस समय नसीम बेग और उसकी पत्नी घर पर मौजूद थे।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपितों ने घर में घुसते ही गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आलम बेग के हाथ में तमंचा था, जिसे उसने नसीम बेग की कनपटी पर लगा दिया।

शिकायत में कहा गया कि आलम बेग ने धमकी देते हुए कहा कि वह उसके भाई अकमल बेग उर्फ अऊआ का ‘कैरम’ यानी जुआ का काम बंद कराने के लिए लगातार पुलिस में शिकायत करता है। अगर दोबारा कोई शिकायत की गई तो उसे और उसकी पत्नी को जान से मार दिया जाएगा। नसीम बेग ने यह भी आरोप लगाया कि मुकर्रम बेग ने उसका गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की।

अगस्त 2025: केस दर्ज होन के बाद आलम ने पड़ोसी से की मारपीट

आलम और अन्य लोगों के खिलाफ 8 सितंबर 2025 को भी एक FIR दर्ज की गई थी। यह केस अप्रैल 2025 में दर्ज जुआ और धमकी वाले मुकदमे से ही जुड़ा हुआ था।

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR कॉपी के मुताबिक, शिकायतकर्ता नसीम बेग ने बताया कि 14 अगस्त 2025 को मुकदमे (अप्रैल 2025 का जुए से जुड़ा) की विवेचना के लिए पुलिस अधिकारी उनके मोहल्ले में पहुँचे थे। इसी बात से नाराज होकर अगले ही दिन यानी 15 अगस्त 2025 को दोपहर करीब 12 बजे आलम बेग, उवैस और इस्माइल उनके घर में घुस आए।

FIR की कॉपी की एक प्रति

FIR में कहा गया है कि आरोपितों ने घर में घुसते ही नसीम बेग और उनकी पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि उवैस ने धारदार हथियार से नसीम बेग के सिर पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर से खून बहने लगा।

FIR के मुताबिक, इसके बाद आरोपित नसीम बेग को घसीटते हुए घर के बाहर तक ले आए। शिकायतकर्ता ने कहा कि पूरी घटना मोहल्ले के लोगों ने भी देखी। जब नसीम बेग ने मारपीट का वीडियो बनाने की कोशिश की, तब आलम बेग ने उनका मोबाइल फोन छीन लिया। FIR में कहा गया कि मोबाइल में दो सिम भी थीं, जो आरोपित के पास ही हैं।

नसीम बेग ने आरोप लगाया कि जाते-जाते आरोपितों ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने पहले दर्ज कराया गया मुकदमा वापस नहीं लिया तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।

इन FIRs को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए तो यह केवल एक रेप और ब्लैकमेल का मामला नहीं है, बल्कि महिलाओं को निशाना बनाने, दबंगई, धमकी, मारपीट और इलाके में भय का माहौल बनाने के लगातार सामने आती एक लंबी श्रृंखला है। अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों में बार-बार वहीं नाम सामने आना बताता है कि इन जिहादियों ने लंबे वक्त से किस तरह दबंगई की है।

अब महिला डॉक्टर के साथ रेप, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल और उगाही का आरोप है, तो दूसरी तरफ महिलाओं से अभद्रता, घर में घुसकर रेप की कोशिश, जुआ अड्डा चलाने, तमंचे के बल पर धमकाने और मुकदमा वापस लेने के लिए मारपीट जैसे आरोप भी FIR में दर्ज हैं। ‘अल्टीमेट जिम’ में करीब 80 हिंदू महिलाओं के आने की बात सामने आना और वहाँ किसी महिला ट्रेनर का न होना भी कई सवाल पैदा करता है।

अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ एक केस की जाँच भर नहीं है बल्कि यह पता लगाने की भी है कि क्या यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से महिलाओं को निशाना बना रहा था। फिलहाल पुलिस ने अकरम बेग और आलम बेग को गिरफ्तार कर लिया है। उम्मीद है कि पुलिस इसे कोई इकलौता केस मानकर नहीं छोड़ देगी बल्कि इसकी तह तक जाएगी और इस सुनियोजित नेटवर्क का पर्दाफाश कर इसमें शामिल लोगों को जेल तक पहुँचाएगी।

पश्चिम बंगाल के नए CM शुभेंदु अधिकारी, छात्र राजनीति से शुरू कर सफर पहुँचे सत्ता के शीर्ष पर: 2 बार ममता को दी चुनावी शिकस्त, जानें उनके बारे में सब कुछ

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुन लिया है।

इसके साथ ही अब उनका पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। बीजेपी ने इस चुनाव में राज्य में बड़ी जीत हासिल की है और लंबे समय से बंगाल में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा रहे शुभेंदु अधिकारी को इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।

बीजेपी की जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर बंगाल की कमान किसके हाथ में जाएगी। कई नाम चर्चा में थे, लेकिन अंत में पार्टी नेतृत्व ने शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विधायक दल की बैठक में उनके नाम का ऐलान किया।

कौन हैं शुभेंदु अधिकारी?

शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी इलाके में हुआ था। वे एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं और कई बार सांसद भी चुने जा चुके हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कांथी हाई स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने प्रभात कुमार कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। बाद में उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की।

राजनीति में आने से पहले ही उनके परिवार का बंगाल की राजनीति में बड़ा प्रभाव था। खासकर पूर्वी मेदिनीपुर इलाके में अधिकारी परिवार का दबदबा लंबे समय से माना जाता रहा है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में कॉन्ग्रेस की छात्र राजनीति से की थी। उस समय बंगाल में वामपंथी दलों का दबदबा था और विपक्षी छात्र नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था।

1995 में वे कांथी नगर पालिका में पार्षद चुने गए और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत हुई। बाद में वे अपने पिता के साथ TMC में शामिल हो गए।

ममता बनर्जी के करीबी से सबसे बड़े विरोधी तक

एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता था। उन्होंने TMC को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2006-07 में सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन के दौरान शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे रहे।

इन्हीं आंदोलनों ने बंगाल में 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया। इसके बाद 2011 में TMC सत्ता में आई और ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनीं।

लेकिन समय के साथ शुभेंदु और TMC नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने लगी। आखिरकार 2020 में उन्होंने TMC छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। उनके बीजेपी में आने को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा माना गया।

लगातार दो बार ममता बनर्जी को हराया

शुभेंदु अधिकारी का नाम पूरे देश में तब चर्चा में आया जब उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराया। यह मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल था।

इसके बाद 2026 के चुनाव में उन्होंने फिर ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस बार भवानीपुर सीट पर भी उन्होंने ममता बनर्जी को शिकस्त दी। यही वजह रही कि बीजेपी की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा था।

कितनी है शुभेंदु अधिकारी की संपत्ति?

चुनावी हलफनामे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी करोड़पति नेताओं में शामिल नहीं हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 85.87 लाख रुपए बताई गई है। खास बात यह है कि उनके ऊपर किसी तरह का कोई कर्ज नहीं है।

उनके पास करीब 12 हजार रुपए नकद हैं। वहीं PNB, SBI और IDIB बैंक समेत कई खातों में लगभग 7 लाख रुपए जमा हैं। इसके अलावा उन्होंने पोस्टल सेविंग, किसान विकास पत्र और NSC में भी निवेश किया हुआ है। उनके पास शेयर और बॉन्ड्स में भी थोड़ा निवेश है।

आमतौर पर बड़े नेताओं के पास लग्जरी गाड़ियाँ और भारी संपत्ति होती है, लेकिन शुभेंदु अधिकारी का हलफनामा इससे अलग तस्वीर दिखाता है। उनके नाम पर कोई कार या बाइक नहीं है। यहाँ तक कि उनके पास सोना-चाँदी के गहने भी नहीं बताए गए हैं।

हालाँकि उनके पास कृषि भूमि और कुछ प्लॉट जरूर हैं। इसके अलावा उनके नाम पर तीन घर और फ्लैट दर्ज हैं, जिनकी कीमत करीब 24 लाख रुपए बताई गई थी।

शुभेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भी बीजेपी में सक्रिय हैं। वहीं उनके दूसरे भाई दिव्येंदु अधिकारी पहले TMC सांसद रह चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी ने अब तक शादी नहीं की है।

बीजेपी ने क्यों जताया भरोसा?

बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि बंगाल में पार्टी को मजबूत करने में शुभेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी भूमिका रही है। वे राज्य की जमीनी राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विधायक दल की बैठक में कहा कि सभी विधायकों ने एकमत से शुभेंदु अधिकारी के नाम का समर्थन किया। किसी दूसरे नाम का प्रस्ताव तक नहीं आया। यही वजह रही कि उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया।

अब शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में बीजेपी सरकार को मजबूत तरीके से चलाने और राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखने की होगी। बंगाल की राजनीति में उनकी एंट्री छात्र नेता के तौर पर हुई थी, लेकिन आज वे राज्य के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जा रहे हैं।