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लड्डू गोपाल को लेकर अदालत पहुँचा हिन्दू पक्ष, ईदगाह मस्जिद में पहले सर्वे वाली माँग खारिज: कमिश्नर की नियुक्ति से भी कोर्ट का इनकार

श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह मस्जिद मामले में उत्तर प्रदेश की मथुरा कोर्ट ने मस्जिद सर्वे की अर्जी पर पहले फैसला करने की याचिका खारिज कर दी है। वहीं, हिंदू महासभा लड्डू गोपाल जी (भगवान श्रीकृष्ण) को लेकर अदालत पहुँच गई। उधर, अदालत में सुन्नी वक्फ बोर्ड के हाजिर न होने पर उसे आखिरी मौका दिया गया है।

महासभा के कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने अदालत से कहा है कि औरंगज़ेब ने मंदिर को तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद बनाई थी। इसलिए यह मस्जिद श्रीकृष्ण जन्मस्थान की भूमि पर अतिक्रमण है। महासभा ने 13.37 एकड़ पर मौजूद शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की है। सोमवार (27 मार्च 2023) को हुई सुनवाई में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख दी।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस में शाही ईदगाह मस्जिद में अमीन सर्वे के लिए प्रार्थना पत्र पहले ही दिया जा चुका है। उधर, बार-बार सूचना देने के बावजूद यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर अदालत में हाजिर नहीं हो रहा है। अदालत ने वक्फ बोर्ड को हाजिर होने के लिए ये आखिरी मौका दिया है।

उधर अदालत ने हिंदू याचिकाकर्ताओं के उस रिवीजन एप्लिकेशन को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पहले शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण करने के लिए अपनी याचिका के सुनवाई पूरा करने की माँग की थी। दरअसल, हिंदू याचिकाकर्ताओं ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ रिवीजन एप्लीकेशन दायर किया था।

निचली अदालत ने 21 जुलाई 2022 को यह फैसला दिया था। निचली अदालत ने हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर मुकदमे की अनुरक्षणीयता (Maintainability) को चुनौती देते हुए शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति के वकील द्वारा दायर आवेदन पर रोजाना सुनवाई का आदेश दिया था।

अदालत ने शनिवार (25 मार्च 2023) को रिवीजन एप्लिकेशन पर सुनवाई करते हुए कहा कि निचली अदालत का आदेश सबूतों के आधार पर पारित किया गया था। इसलिए इसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद आवेदन को खारिज कर दिया गया।

उधर, एडीजे 6th की कोर्ट में इस मामले में कोर्ट कमिश्नर को नियुक्त करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, शाही ईदगाह परिसर के सर्वे मामले की सुनवाई लोअर कोर्ट में चलती रहेगी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की माँग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि विरोधी पक्ष मंदिर के सबूत नष्ट कर रहा है।

महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही ईदगाह का सर्वे कराए जाने को लेकर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की कोर्ट में वाद दाखिल किया था। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने जिला जज की कोर्ट में रिवीजन एप्लिकेशन दाखिल किया। जिला जज ने इस केस को एडीजे 6th की कोर्ट में भेज दिया था। अब एडीजे 6th ने इसे खारिज कर दिया।

‘हिंदी थोपने’ का लगाते रहे हैं आरोप, अब पत्नी-बच्चों सहित मुंबई शिफ्ट हुए सूर्या: ₹70 करोड़ में खरीदा घर, लोगों ने पूछा – अब बच्चों को कैसे पढ़ाएँगे तमिल?

तमिलनाडु में ‘सिंघम (2010)’ और ‘जय भीम (2021)’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता सूर्या अपनी पत्नी अभिनेत्री ज्योतिका और बच्चों सहित मुंबई में सेटल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि दंपति ने महाराष्ट्र की राजधानी में 70 करोड़ रुपए का घर भी खरीदा है। 47 वर्षीय सूर्या और 44 वर्षीय ज्योतिका ने अपने बच्चों का दाखिला भी मुंबई के एक बड़े स्कूल में कराया है। ज्योतिका एक हिंदी वेब सीरीज में भी काम कर रही हैं।

अब तक सूर्या अपने पिता शिवकुमार और माँ लक्ष्मी के साथ चेन्नई में रहते आ रहे थे। शिवकुमार तमिल फिल्म इंडस्ट्री के पुराने अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने 70, 80 और 90 के दशक में काफी फिल्मों में काम किया है। उन्होंने 1965 में फिल्मों में डेब्यू किया था। फिल्मों के बाद उन्होंने टीवी जगत में भी काफी काम किया है। सूर्या के भाई कार्ति भी लोकप्रिय अभिनेता हैं, जिन्हें ‘कैथी (2019)’ और ‘PS 1 (2022)’ जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया है।

सूर्या का चेन्नई से मुंबई शिफ्ट होना इसीलिए भी हैरान करने वाला है, क्योंकि वो अब तक हिंदी भाषा का विरोध करते आ रहे थे। वो ‘National Eligibility-cum-Entrance Test (NEET)’ की परीक्षा और मोदी सरकार द्वारा जारी नई शिक्षा नीति की भी जम कर आलोचना कर चुके हैं। अब जब वो भाजपा शासित महाराष्ट्र में शिफ्ट हुए हैं, लोग उनके दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। ‘रौकेट्री’ में सूर्या ने ‘जय हिन्द’ भी नहीं बोला था, जबकि हिंदी डब में उसी दृश्य में शाहरुख़ खान को ऐसा कहते सुना गया था।

सूर्या उस प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने वालों में रहे हैं, जिसके तहत कहा जाता है कि मोदी सरकार जानबूझ कर दक्षिण भारतीय राज्यों पर हिंदी थोप रही है। उनकी बेटी दीया और बेटे देव की शिक्षा-दीक्षा अब मुंबई में ही होगी। लोगों में ये जानने की भी उत्सुकता है कि सूर्या-ज्योतिका के बच्चे जिस स्कूल में पढ़ेंगे, वहाँ तमिल पढ़ाई जाती है क्या? सूर्या ने कहा था कि वो अपने बच्चों को भी किसी तीसरे भाषा की शिक्षा नहीं दे सकते। उन्होंने NEET को भी पक्षपाती बताया था।

अतीक को लेकर प्रयागराज पहुँची यूपी पुलिस, भाई अशरफ सहित कोर्ट में होगी पेशी: 17 साल पुराने मामले में सुनाया जाएगा फैसला

माफिया और गैंगस्टर अतीक अहमद को अहमदाबाद की साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया है। साथ ही अतीक के भाई अशरफ को भी बरेली से प्रयागराज लाया गया है। दोनों भाइयों को यहाँ नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया है। पुलिस अतीक और अशरफ को मंगलवार (28 मार्च, 2023) को कोर्ट में पेश करेगी।

क्यों लाया गया प्रयागराज

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को 17 साल पुराने एक मामले के चलते प्रयागराज लाया गया है। यह मामला पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल के अपहरण का है। दरअसल, 25 जनवरी, 2005 को राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में उमेश पाल मुख्य गवाह थे। अतीक और अशरफ को उमेश पाल की गवाही से सजा होने का डर था। इसलिए दोनों भाइयों ने 28 फरवरी, 2006 को उमेश पाल का अपहरण कर लिया।

अपहरण के बाद उमेश पाल को जान से मारपीट और जान से मारने की धमकी देने समेत कई तरीकों से जमकर डराया गया। इसके बाद उन्हें अतीक अहमद के पक्ष में गवाही देने के लिए कहा गया। अतीक और अशरफ चाहते थे कि उमेश पाल कोर्ट में यह कह दें कि हत्या के समय अतीक और अशरफ वहाँ मौजूद नहीं थे और वह किसी तरह की गवाही नहीं देना चाहते।

अपहरण के इस मामले में उमेश पाल अतीक अहमद और अशरफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज कराना चाहते थे। लेकिन, राज्य में समाजवादी पार्टी सत्ता में थी। अतीक अहमद इसी पार्टी से सांसद था। ऐसे में दबाव के चलते FIR दर्ज नहीं हुई। राज्य की सत्ता में बदलाव हुआ और इसी के साथ अतीक अहमद और उसके भाई समेत अन्य लोगों के खिलाफ उमेश पाल के अपहरण मामले में मुकदमा दर्ज हुआ।

उमेश पाल अपहरण मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश डॉ दिनेश चंद्र शुक्ल ने 17 मार्च, 2023 को फैसला सुरक्षित रख दिया था। इसके बाद अब मंगलवार (28 मार्च 2023) को कोर्ट में आरोपितों के खिलाफ फैसला सुनाया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार अतीक और अशरफ के खिलाफ जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उस हिसाब से इन्हें आजीवन कारावास या सजा-ए-मौत भी मिल सकती है।

उमेश पाल की हत्या

राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल 24 फरवरी 2023 को गवाही के बाद वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी। अब तक इस मामले में पुलिस कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। हालाँकि मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है। चूँकि अतीक और अशरफ उमेश पाल हत्याकांड में भी आरोपित हैं। ऐसे में पुलिस इस मामले में भी दोनों भाइयों से पूछताछ करेगी।

राहुल गाँधी को अब सरकारी बँगला भी छोड़ना होगा: सांसदी खत्म होने के बाद लोकसभा की हाउसिंग कमिटी ने दिया नोटिस, 19 साल से था ठिकाना

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को हाल ही में लोकसभा ने सांसदी से अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद अब उन्हें नई दिल्ली में स्थित सरकारी बँगला भी खाली करने का नोटिस दिया है। तुगलक लेन स्थित इस बँगले में वो पिछले 12 वर्षों से रह रहे हैं। अब चूँकि वो सांसद नहीं रहे, इसीलिए उन्हें ये बँगला खाली करना पड़ेगा। राहुल गाँधी ने 2019 लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से जीत दर्ज की थी, लेकिन अब वो सांसद नहीं रहे।

‘मोदी’ सरनेम पर टिप्पणी किए जाने के बाद सूरत की अदालत ने उन्हें 2 वर्ष की सज़ा सुनाई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने स्वतः ही उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी। 2004 में राहुल गाँधी को 12, तुगलक लेन बँगला दिया गया था। उसी साल उन्होंने अमेठी से पहली बार लोकसभा चुनाव भी जीता था। ये नोटिस तब जारी हुआ है, जब कॉन्ग्रेस के सभी सांसद विरोध जताने के लिए काले कपड़ों में संसद भवन पहुँचे हैं।

लोकसभा की ‘हाउसिंग कमिटी’ ने राहुल गाँधी को सरकारी बँगला छोड़ने का नोटिस जारी किया है। सामान्यतः ऐसे मामलों में एक तय समयसीमा दी जाती है, राहुल गाँधी के मामले में उन्हें 30 दिनों (अदालत के फैसले से), अर्थात एक महीने का समय दिया गया है। हालाँकि, सूरत की अदालत ने भी उन्हें 30 दिनों की मोहलत दी थी। ऐसे में अब देखना है कि वो क्या फैसला लेते हैं। राहुल गाँधी को अदालत से राहत मिलती है या नहीं, इस पर भी सभी की नजरें हैं।

राहुल गाँधी को 22 अप्रैल, 2023 तक ये सरकारी बँगला खाली करना पड़ेगा। 23 मार्च को उन्हें कोर्ट ने सज़ा सुनाई थी। हालाँकि, अभी फ़िलहाल राहुल गाँधी की टीम का कहना है कि उन्हें नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। राहुल गाँधी लगातार गौतम अडानी पर हमला करने में व्यस्त हैं। साथ ही उन्होंने कई बार वीर सावरकर का भी अपमान किया। इस कारण उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना ने विपक्ष की बैठक का बहिष्कार किया है।

वाइब्रेटर कितनी बार और किस स्पीड से किया इस्तेमाल…सबका डेटा ‘सेक्स टॉयज’ बनाने वाली कंपनी के पास: पोल खुलने पर लगा ₹24 करोड़ का जुर्माना

सेक्स टॉयज बनाने वाली कंपनी पर 2.4 मिलियन पाउंड यानी करीब 24 करोड़ रुपए का भारी भरकम जुर्माना लगाया गया है। कंपनी पर ग्राहकों को जानकारी दिए बिना उनकी सेक्सुअल एक्टिविटी पर नजर रखने का आरोप लगाया गया है।

Lad Bible की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में एक मुकदमे के बाद कनाडाई ब्रांड वी-वाइब के निर्माता ने इसके इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए अपने ‘स्मार्ट वाइब्रेटर’ का उपयोग करने के बाद प्रति ग्राहक पर £6,120 (6 लाख से अधिक रुपए) तक खर्च करने पर हामी भरी थी। सेक्स टॉय वी-वाइब 4 की कीमत £90 (9 हजार रुपए से अधिक) है। इसे दुनिया में कहीं से भी ऐप के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। ऐप में इसके इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया है।

हालाँकि, लोगों को बाद में पता चला कि यह ऐप उनकी सेक्सुअल एक्टिविटी (Sexual Activity) पर नजर रख रहा था। उनका डेटा इकट्ठा कर रहा था और स्टैंडर्ड इनोवेशन को वापस भेज रहा था, जिसमें यह भी शामिल था कि यूजर्स ने कितनी बार इसका उपयोग किया और किस तीव्रता के साथ किया। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, लगभग 3,00,000 लोगों ने Bluetooth Enabled WeVibe प्रोडक्ट खरीदे। इनमें से लगभग एक-तिहाई लोगों ने इस ऐप का इस्तेमाल किया।

स्टैंडर्ड इनोवेशन ने इस बात पर जोर दिया कि इस जानकारी का उपयोग केवल टेस्ट (Diagnostic Purposes) के लिए किया गया था। एक महिला जो वाइब्रेटर को अपने से दूर रह रहे प्रेमी के साथ उपयोग करने के लिए लाई थी, उसने 2017 में डेली मिरर को बताया कि उसके लिए यह बात काफी चौंकाने और डराने वाली थी।

उसने कहा, “मुझे लगा कि मैं अपने पार्टनर के साथ जो भी शेयर कर रही हूँ, वह हम दोनों के बीच पर्सनल है। लेकिन मैंने एक सेकंड के लिए यह बिल्कुल भी नहीं सोचा कि यह कंपनी को हमारी पर्सनल डिटेल दे रहा है। उन्होंने यह बहुत गलत किया। बिना हमें बताए उन्होंने हमारी सेक्सुअल एक्टिविटी पर नजर रखी। यह काफी भयावह है। हास्यास्पद है कि उन्होंने सोच भी कैसे लिया कि वे ऐसा कर सकते हैं।”

‘माधुरी दीक्षित कुष्ठ रोग से ग्रसित Pros****te हैं’: अभिनेत्री के फैन ने ‘बिग बैंग थ्योरी’ के एपिसोड को हटाने की माँग की, Netflix को नोटिस

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के शो ‘बिग बैंग थ्योरी’ पर मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के अपमान का आरोप लगाया गया है। इसे लेकर लेखक और राजनीतिक विश्लेषक मिथुन विजय कुमार ने नेटफ्लिक्स को नोटिस भी भेजा है। नोटिस में ‘बिग बैंग थ्योरी’ के एक एपिसोड को हटाने की माँग की गई है। आरोप है कि शो के दूसरे सीजन के पहले एपिसोड में एक किरदार ने माधुरी दीक्षित पर अपमानजनक टिप्पणी की है।

विजय कुमार की तरफ से नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी कर कहा गया है कि वेब सीरीज के एक दृश्य में बॉलीवुड अभिनेत्रियों पर टिप्पणी की गई है। इसमें राज कुथरापल्ली नामक किरदार ने माधुरी दीक्षित के संदर्भ में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। इस तरह की टिप्पणियों का समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह कंटेट भारतीय संस्कृति और महिलाओं के प्रति अपमानजनक है। मुंबई स्थित नेटफ्लिक्स ऑफिस में भेजे गए कानूनी नोटिस में उन्होंने शो के इस एपिसोड को हटाने की माँग की है। विजय कुमार ने ऐसा न करने पर ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाने की बात कही है।

विजय कुमार की तरफ से नोटिस की जानकारी देते हुए एक ट्वीट भी किया गया। ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि वे बचपन से ही माधुरी के फैन हैं और शो में बॉलीवुड अभिनेत्री के संदर्भ में जो कुछ भी कहा गया वो उन्हें पसंद नहीं आया।

वेब सीरीज में राज कुथरापल्ली का रोल एक्टर कुणाल नय्यर निभा रहे हैं। जिस एपिसोड को हटाए जाने की माँग हो रही है, उसके एक दृश्य में राज और शेल्डॉन नाम के किरदार राज के अपार्टमेंट में साथ बैठे हुए हैं। दोनों टीवी देख रहे हैं। शेल्डॉन पूछता है, “क्या स्क्रीन पर ऐश्वर्या राय थीं?” राज हाँ में जवाब देता है और कहता है कि वो एक अच्छी अभिनेत्री हैं, है न? इसके बाद शेल्डॉन कहता है कि ऐश्वर्या राय गरीबों की माधुरी दीक्षित हैं। इस पर भारतीय मूल के एस्ट्रोफिजिसिस्ट राज नाराज हो जाते हैं और कहते हैं कि ऐश्वर्या राय एक देवी हैं और माधुरी दीक्षित “कुष्ठ रोग ग्रसित प्रोस्ट***ट” हैं।

मिथुन विजय कुमार ने नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों को कंटेंट की गुणवत्ता का खास ख्याल रखने की नसीहत दी है। भेजे गए नोटिस में उन्होंने कहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म को किसी के प्रति अपमानजनक और भेद-भाव पूर्ण कंटेट नहीं दिखाया जाना चाहिए। खबर लिखे जाने तक नेटफ्लिक्स के तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

अतीक अहमद का ‘खात्मा’ चाहती हैं उमेश पाल की पत्नी और माँ, कहा- वह जिंदा रहा तो हम सबको खत्म कर देगा… वह डर से काँप-काँप कर मरे

गैंगस्टर अतीक अहमद को पेशी के लिए साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया है। फिलहाल उसे नैनी जेल में रखा गया है। इस बीच मृतक उमेश पाल की पत्नी ने कहा है कि जब तक अतीक जिंदा रहेगा, तब तक कोई न कोई उमेश मरता रहेगा। इसलिए उसके जीने का हक छीन लेना चाहिए। वहीं, उमेश पाल की माँ ने कहा है कि अतीक अहमद के मरने के बाद ही उन्हें तसल्ली मिलेगी। बता दें कि पिछले महीने अतीक के शूटरों ने उमेश पाल की हत्या कर दी थी।

अतीक अहमद को प्रयागराज लाए जाने को लेकर उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी निवेदन करती हूँ कि मेरे पति की हत्या करवाने में जिन लोगों का हाथ रहा है उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उसका जीने का हक पूरी तरह से छीन लिया जाए। अतीक अहमद जब तक जिंदा रहेगा, तब तक कुछ न कुछ होता रहेगा। इसी तरह कोई न कोई उमेश पाल खत्म होता रहेगा। इसलिए उसका खात्मा जरूरी है।”

साबरमती जेल से बाहर आने के बाद अतीक अहमद ने अपनी हत्या की आशंका जताई है। इसको लेकर जया पाल ने कहा कि जब अतीक किसी को मारने में पीछे नहीं रहा तो उसे मरवाने में क्या दिक्कत है। उन्होंने आगे कहा, “उसने हमारा सुहाग उजाड़ा है। उसने हमारा परिवार उजाड़ दिया है। अतीक अहमद ने जो किया है, उसका कौन जिम्मेदार है? इन सबका वो खुद जिम्मेदार है। मैंने और मेरे पति ने उसका क्या बिगाड़ा था? अब उसको डर लग रहा है तो मेरी बद्दुआ है कि वह काँप-काँप कर मरे। पूरे परिवार का सर्वनाश हो जाए। गाड़ी पलटे या न पलटे बस भगवान करे कि वो खत्म हो जाए।”

अतीक अहमद को होने वाली सजा को लेकर उन्होंने आगे कहा, “मैं चाहती हूँ कि उस आदमी को सजा-ए मौत मिले। मैं नहीं चाहती कि वो जिंदा रहे। जिंदा रहेगा तो वह हम सबको खत्म कर देगा। ये पता है मुझे। मैं जज, शासन-प्रशासन सबसे यही गुहार करूँगी कि उसे छोड़ा न जाए। यदि वह जेल में भी रहेगा तो वह कुछ भी करवा सकता है।”

वहीं, उमेश पाल की माँ शांति देवी ने कहा, “अदालत को जो भी फैसला होगा हमें मंजूर है। अतीक अहमद जेल से बैठकर ही सारा कार्यक्रम करता आ रहा है। बाहर रहता है तो भी करता है और जेल में रहता है तो भी करता है। अगर इसकी मौत हो जाएगी, तब मुझे तसल्ली मिलेगी। जैसे मेरे बेटे की हत्या की थी, वैसे ही इसका भी होना चाहिए”

अतीक अहमद को प्रयागराज ट्रांसफर करने की खबर सामने आने के बाद से उसके एनकाउंटर की चर्चा जोरों पर थी। हालाँकि, वह सुरक्षित प्रयागराज के नैनी जेल पहुँच गया है। उसे जेल में हाई-सिक्योरिटी बैरक में अकेला रखा गया। उसके सेल में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। इसके साथ ही जेल कर्मचारियों को उनके रिकॉर्ड के आधार पर चुनकर तैनात किया गया। इन कर्मियों के पास बॉडी वियर कैमरे हैं।

एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों पर यूपी के डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यूपी पुलिस की गाड़ियाँ नहीं पलटतीं, बल्कि अपराधी पलटता है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस के ऊपर कोई गोली चलाएगा तो पुलिस इसका जवाब गोली से ही देती है। यही ट्रेनिंग है।

अतीक अहमद के गुर्गों ने की थी उमेश पाल की हत्या

बहुजन समाज पार्टी के विधायक रहे राजू पाल हत्याकांड में उमेश पाल प्रमुख गवाह थे। 24 फरवरी 2023 को गवाही के बाद वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी।

अब तक इस मामले में पुलिस कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। हालाँकि, मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है।

बिहार पुलिस की जमीन से लेकर सदन तक धुलाई: कहीं शराब तो कहीं बालू माफिया के लोगों ने पीटा, FIR में मनमानी पर विधायकों ने घेरा

एक तरफ बिहार पुलिस माफियाओं से पिट रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के विधायक भी उस पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं।रविवार (26 मार्च 2023 ) को 2 अलग-अलग स्थानों पर पुलिस की टीम पर हमले की घटना सामने आई है। पहली घटना भोजपुर जिले की है, जहाँ देर शाम शराब माफियाओं के खिलाफ छापेमारी करने पहुँची पुलिस को निशाना बनाया गया। दूसरी घटना गया जिले के बेलागंज की है। यहाँ फल्गु नदी से अवैध रूप से बालू निकालने वालों ने पुलिस के साथ हाथापाई की और जब्त जेसीबी मशीन छुड़ा ले गए। वहीं सोमवार को विधानसभा में सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने पुलिस की मनमानी पर सवाल उठाए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भोजपुर जिले के मुफस्सिल थाना इलाके के अरगसंडा-लाल बाजार के बिंद टोली में अवैध शराब की बिक्री हो रही थी। इसकी जानकारी पाकर पुलिस टीम छापेमारी करने पहुँची। पुलिस ने शराब का धंधा करने वाले 4 लोगों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद 50-60 लोगों ने पुलिस की टीम पर हमला बोल दिया। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक छापेमारी के बाद ही भीड़ जमा होने लगी थी। लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से पुलिस की टीम पर हमला किया गया।

हमले में एएसआई अनिल कुमार सिंह समेत 6 पुलिसकर्मियों के जख्मी होने की खबर है। पुलिस की गाड़ी को क्षति पहुँचाई गई। साथ ही हमलावर भीड़ गिरफ्तार शराब माफियाओं को भी छुड़ा ले गई। जानकारी के मुताबिक पुलिस पर हमला करने वालों में महिलाएँ भी शामिल थीं।

वहीं दूसरा मामला गया के बेलागंज थाना इलाके के दलेलचक गाँव के पास का है। पुलिस को फल्गु नदी से अवैध बालू खनन की जानकारी प्राप्त हुई। इसके बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। बालू खनन में इस्तेमाल किए जा रहे जेसीबी को कब्जे में ले लिया गया। इस दौरान मौके पर रेत माफिया के लोग जमा हो गए। पुलिसकर्मियों को घेरकर वे हाथापाई करने लगे और जेसीबी मशीन छुड़ा ले गए।

मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस ऑफिसर के हाथ में जबरन रुपया थमाते हुए वीडिया बनाया। रेत माफिया दिखाना चाहते थे कि पुलिस उनसे रिश्वत लेने पहुँची है। पुलिस की टीम पर हुए हमले की जानकारी मिलने के बाद डीएसपी के नेतृत्व में अतिरिक्त बलों की टीम मौके पर पहुँची। बताया जा रहा है कि मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

इस बीच बिहार विधानसभा में राजद, वाम दल और काॅन्ग्रेस के विधायकों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कहा कि थाने में एफआईआर दर्ज करने को लेकर पुलिस मनमानी करती है। राजद विधायक ऋषि कुमार और भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिना पैरवी पुलिस केस नहीं दर्ज करती है। वामपंथी विधायक अजय कुमार ने कहा कि पुलिस शिकायत लेकर थाने पहुँचे लोगों के साथ सही व्यवहार नहीं करती है। काॅन्ग्रेस विधायक विजय शंकर दुबे ने कहा कि बिना किसी कारण के लोगों को थाने में पकड़कर रखा जाता है। उनके साथ साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

राजस्थान में अस्पताल छोड़ सड़क पर डाॅक्टर, महिला चिकित्सक ने गोलगप्पे का लगाया ठेलाः ‘राइट टू हेल्थ’ बिल वापस लेने की माँग

राजस्थान में डॉक्टरों की भीड़ सड़क पर है। वह सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध अशोक गहलोत सरकार द्वारा पास किए गए ‘राइट टू हेल्थ’ (Right to Health) बिल को लेकर हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस बिल से जनता को स्वास्थ्य सेवाएँ हासिल करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि सरकार वाहवाही लूटने के लिए जबरदस्ती अपनी योजनाएँ हॉस्पिटल पर थोप रही है।

दरअसल, राजस्थान सरकार ने सितंबर 2022 में यह बिल विधानसभा में पेश किया था। इसके बाद इस बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। विधानसभा में भी भाजपा ने हंगामा किया था। विवाद बढ़ता देख अशोक गहलोत सरकार ने इस बिल को सलेक्शन कमेटी के पास भेजा था। इसके बाद अब चालू बजट सत्र में इस बिल को एक बार फिर पेश किया गया। हालाँकि तमाम विरोध और हंगामें के बीच मंगलवार (21 मार्च 2023) को यह बिल विधानसभा में पारित हो गया।

इस बिल के पेश होने के पहले से ही डॉक्टर्स विरोध कर रहे थे और अब बिल पास होने के बाद डॉक्टर्स एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं। शुरुआत में इस बिल का विरोध निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर ही कर रहे थे। लेकिन बाद में सरकारी डॉक्टर भी विरोध कर रहे हैं। यही नहीं, डॉक्टर्स अपने घरों पर भी मरीजों को परामर्श नहीं दे रहे हैं। एक महिला चिकित्सक अनिता चौधरी ने तो गोलगप्पे का ठेला लगाकर ये विरोध शुरू किया है। उनका कहना है कि गाड़ी चलाने के लिए उन्हें कुछ तो करना पड़ेगा।

राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में सोमवार (27 मार्च 2023) को सैकड़ों डॉक्टरों ने राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस विरोध को मुंबई से लेकर दिल्ली और भोपाल तक में समर्थन मिल रहा है।

डॉक्टरों ने जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के बाहर से पैदल मार्च निकाला है। वहीं, बिल के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी देशव्यापी बंद का ऐलान किया था। इस बंद के कारण मेडिकल सर्विस काफी हद तक ठप पड़ गई। बंद का सबसे बड़ा असर राजधानी जयपुर में ही देखने को मिला। जहाँ डॉक्टर्स की हड़ताल के चलते मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान सरकार के इस विवादित बिल को लेकर जारी विरोध को शुरू हुए एक हफ्ते से अधिक का समय हो चुका है। इसके बाद भी सरकार और डॉक्टरों के बीच बात नहीं बन पाई है।

बिल वापस हो, सीएम गहलोत से ही करेंगे बात…

इस बिल का विरोध कर रहे डॉक्टर और सरकार के बीच रविवार (26 मार्च 2023) को बातचीत हुई। बातचीत करने के लिए सरकार की ओर से मुख्य सचिव उषा शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, प्रमुख सचिव टी रविकांत और जयपुर कलेक्टर मौजूद थे। लेकिन डॉक्टर्स ने दो टूक कह दिया कि वह बिल वापसी से कम कुछ और नहीं चाहते। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि वह मुख्यमंत्री के अलावा किसी और से बात नहीं करना चाहते, क्योंकि बिल वापसी का अधिकार उन्हीं के पास है।

29 मार्च को और खराब हो सकते हैं हालात…

सरकारी हॉस्पिटल के मेडिकल ऑफिसरों का संगठन अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ भी इस बिल का विरोध कर रहा है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष अजय चौधरी ने कहा है कि आगामी 29 मार्च को सभी डॉक्टर सामूहिक अवकाश में रहेंगे। यदि 29 मार्च को सभी डॉक्टर्स अवकाश में चले गए तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी और मरीजों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा।

क्या है राइट टू हेल्थ बिल?

राइट टू हेल्थ बिल या स्वास्थ्य का अधिकार विधेयक 2022 के अंतर्गत किसी भी स्थिति में कोई भी अस्पताल मरीज के इलाज के लिए मना नहीं कर सकता। इमरजेंसी की स्थिति में यदि इलाज का खर्च मरीज नहीं दे पा रहा है तो ऐसी स्थिति में उसके इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज किसी भी हॉस्पिटल में भर्ती हो सकता है। इस स्थिति में उसके इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।

इसके अलावा यदि किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को कोई हॉस्पिटल पहुँचाता है तो ऐसे व्यक्ति को 5000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। राइट टू हेल्थ का उल्लंघन करने या इलाज से मना करने वाले हॉस्पिटल पर 10 से 20 हजार तक का जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार उल्लंघन पर यह जुर्माना 10 हजार होगा। इसके बाद 20 हजार तक का जुर्माना देना होगा।

क्यों हो रहा है विरोध…

इस बिल के विरोध की सबसे बड़ी वजह ‘इमरजेंसी‘ शब्द को बताया जा रहा है। दरअसल, बिल में इमरजेंसी के समय हॉस्पिटल को मुफ्त इलाज करने के लिए कहा गया है। ऐसे में प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि बिल में इमरजेंसी को सही तरीके से नहीं बताया गया है। यदि सभी मरीज अपनी बीमारी को इमरजेंसी बताएँगे तो हॉस्पिटल को मुफ्त में इलाज करना पड़ेगा। ऐसे में हॉस्पिटल अपना खर्च कैसे चलाएगा?

इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि यदि किसी दाँत के डॉक्टर के पास कोई गंभीर बीमारी वाला मरीज पहुँच गया तो वह उसका इलाज कैसे करेगा। इसी तरह महिलाओं की डिलीवरी वाले हॉस्पिटल में यदि सर्पदंश का मरीज आ गया तो उसका इलाज कैसे होगा। यही नहीं, डॉक्टर्स का कहना है कि यदि मरीज इमरजेंसी हालत में हॉस्पिटल आया और उसकी मौत हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

बिल में यह भी कहा गया है कि यदि कोई मरीज बेहद गंभीर हालत में है और उसे किसी अन्य हॉस्पिटल में रेफर करना है तो इसके लिए एंबुलेंस की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इसको लेकर डॉक्टरों का कहना है कि एंबुलेंस देने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन इसका खर्च कौन वहन करेगा? मरीज या सरकार कोई भी दे। इस बारे में बिल में स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा गया।

राइट टू हेल्थ बिल के तहत प्राइवेट हॉस्पिटल को सरकारी योजनाओं के अनुसार सभी बीमारियों का इलाज फ्री में करना होगा। ऐसे में इन डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार अपनी वाहवाही लूटने के लिए सरकारी योजनाओं को निजी अस्पतालों पर थोप रही है। सरकार को यदि अपनी योजना चलानी है तो सरकारी अस्पतालों में चलाए, प्राइवेट अस्पतालों को बिना वजह परेशान किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में इलाज के लिए जो राशि निर्धारित की गई है वह लागत मूल्य की अपेक्षा कम है। ऐसे में हॉस्पिटल अपना खर्च कैसे निकालेंगे?

राहुल गाँधी पर काॅन्ग्रेस से भागने लगे सहयोगी: उद्धव गुट ने ‘मैं गाँधी, सावरकर नहीं’ बयान पर चेताया, विपक्ष की बैठक से भी किया किनारा

सांसदी रद्द होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी ने कहा था कि वे माफी नहीं माँग सकते हैं, क्योंकि उनका नाम गाँधी है सावरकर नहीं। अब उनके बयान को लेकर राजनीति तेज हो गई है। सावरकर को लेकर उद्धव ठाकरे के गुट ने राहुल गाँधी को चेतावनी दी है और कहा है कि उनका अपमान वह बर्दाश्त नहीं कर सकती।

उधर, राहुल गाँधी के बयान को लेकर महाराष्ट्र के भाजपा सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। सांसदों ने सावरकर के अपमान पर संसद में छत्रपति शिवाजी जी महाराज की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

उद्धव ठाकरे ने रविवार (26 मार्च 2023) को एक रैली को संबोधित करते हुए उनकी पार्टी का भले ही कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है, लेकिन सावरकर के खिलाफ किसी भी गलत बयानबाजी को वह बर्दाश्त नहीं करेगी। ठाकरे ने इस स्वतंत्रता सेनानी का अपमान उसे बर्दाश्त नहीं है।

उद्धव ठाकरे की चेतावनी के बाद उद्धव गुट ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आज सोमवार (27 मार्च 2023) को होने वाली बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ठाकरे के सहयोगी संजय राउत ने कहा, “उद्धव ठाकरे गुट ने आज मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित होने वाली बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है, क्योंकि राहुल गाँधी ने कहा था कि मैं सावरकर नहीं हूँ, मैं गाँधी हूँ।”

संजय राउत ने कहा, “राहुल गाँधी का बयान गलत है। वह गाँधी हैं, लेकिन सावरकर का नाम घसीटने की जरूरत नहीं है। सावरकर हमारी प्रेरणा हैं। हमारी लड़ाई के पीछे छत्रपति शिवाजी महाराज और वीर सावरकर हैं।” उन्होंने कहा कि अगर वे राहुल गाँधी से मिलते हैं तो इसको लेकर वे जरूर सवाल करेंगे।

दरअसल, राुहल गाँधी के ‘सारे चोर मोदी हैं’ बयान के बाद सूरत कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई है। इस सजा के आधार पर लोकसभा ने उनकी लोकसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के खिलाफ कॉन्ग्रेस 27 मार्च को देश भर में प्रदर्शन कर रही है। विपक्षी दलों के सांसद सदन में काले कपड़े पहनकर गए। वहीं, युवा कॉन्ग्रेस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।

इस घटना को लेकर और आगे की रणनीति बनाने के लिए राज्यसभा में प्रतिपक्ष नेता और कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 27 मार्च की रात दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में लिए समान विचारधारा वाले सभी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है। अब, कॉन्ग्रेस की सहयोगी उद्धव गुट ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया।