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वाशिंगटन में खालिस्तानी करने वाले थे भारतीय दूतावास पर हमला, पुलिस ने बीच में रोका: बौखलाकर पत्रकार को निशाना बनाया, गालियाँ भी बकी

सैन फ्रांसिस्को में हुए खालिस्तानी हमले की घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा अमेरिकी राजदूत को भेजे गए समन का असर वाशिंगटन में देखने को मिला। खबर है कि 25 मार्च को खालिस्तानी वाशिंगटन में स्थित भारतयीय दूतावास पर हमला करने वाले थे। हालाँकि वहाँ सिक्योरिटी में तैनात पुलिसकर्मियों ने इस हमले को विफल कर दिया।

भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू का नाम लेकर हुई नारेबाजी के बाद से यूएस की खुफिया सर्विस और लोकल पुलिस समेत कई सुरक्षाकर्मी वाशिंगटन में भारतीय एंबेसी के सामने तैनात हैं। सिक्योरिटी के लिए तीन अतिरिक्त वैन दूतावास के पास खड़ी हैं।

बताया जा रहा है कि सैन फ्रांसिस्को में इंडियन एबेंसी के आगे उपद्रव मचाने की घटना के बाद वाशिंगटन में भी खालिस्तानी भारतीय दूतावास पर पहुँचे थे। हालाँकि अमेरिका द्वारा तैनात किए गए सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें एबेंसी तक पहुँचने ही नहीं दिया और जैसे ही वो लोग आगे आते दिखे फौरन उन्हें निर्धारित प्रदर्शनस्थल पर वापस भेजा गया।

इस दौरान बौखलाए उपद्रवियों ने पीटीआई पत्रकार ललित कुमार झा को अपना निशाना बनाया। उन्हें वीडियो बनाता देख उनसे सवाल-जवाब हुए और कुछ देर बाद एक खालिस्तान समर्थक ने तो कैमरे पर पत्रकार को, पीएम मोदी को और फिर हर भारतीय को गाली देनी शुरू कर दी। ये पूरी घटना अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

कहा जा रहा है कि दूतावास पर आकर उपद्रव मचाने के इरादों में विफल होने के कारण खालिस्तानी बौखला रखे थे। इसलिए उन्होंने ललित को निशाना बनाया। पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी की वीडियो वायरल होने के बाद वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावासा ने इसकी निंदा की है। उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत के फौरन बाद पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा में आ गए थे।

सलमान खान और सिद्धू मूसेवाला के पिता को धमकी देने वाला राजस्थान से धराया, लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर भेजे थे ईमेल

मुंबई पुलिस ने सलमान खान को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। सलमान खान को यह धमकी ई-मेल के जरिए दी गई थी। धमकी में सलमान को सिद्धू मूसेवाला की तरह हाल करने की बात कही गई थी। गिरफ्तार आरोपित ने ही सिद्धू मूसेवाला के पिता को भी धमकी दी थी। गिरफ्तारी रविवार (26 मार्च 2023) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान खान को धमकी भरा ई-मेल मिलने के बाद मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया था। इसके बाद मुंबई पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए जाँच शुरू की। जाँच में सामने आया कि आरोपित राजस्थान का है। मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन चलाते हुए जोधपुर जिले के लूणी गाँव से आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान धाकड़ राम विश्नोई (21 वर्ष) के रूप में हुई।

सलमान खान को भेजे थे 3 ई-मेल

‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि धाकड़राम ने गुरुवार (23 मार्च, 2023) की रात सलमान खान की ऑफिशियल ई-मेल आईडी पर लगातार 3 मेल भेजे थे। तीनों ही मेल पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। पहले ई-मेल में लिखा था, सलमान खान अगला नंबर 13 ऐसी धूम मचा ले की तरह हाल करेंगे तेरा। इस मेल में कई अशुद्धियाँ थीं। ऐसे में उसने दूसरा मेल भेजा।

दूसरे मेल में लिखा था, सलमान खान अगला नंबर तेरा-सिद्धू मूसेवाला की तरह हाल करेंगे तेरा। सोच ले विश्नोई जोधपुर से, अगला नंबर तेरा है। वहीं तीसरे मेल में लिखा था सलमान खान अगला नंबर तेरा है। सिद्धू मूसेवाला की तरह मारा जाएगा तू। जोधपुर आते ही, विश्नोई बोल रहा है यह गैंगस्टर जोधपुर से। अगला नंबर तेरा है। आजा जोधपुर।

इसी ने दी थी सिद्धू मूसेवाला के पिता को धमकी

सलमान खान को धमकी देने के आरोपित धाकड़ राम विश्नोई ने ही सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को धमकी दी थी। डीसीपी वेस्ट गौरव यादव ने भी इसकी पुष्टि की है। धमकी मिलने के बाद सिद्धू मूसेवाला के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मानसा पुलिस भी आरोपित को गिरफ्तार करने जोधपुर के लूणी गाँव पहुँची थी। लेकिन इससे पहले ही मुंबई पुलिस ने विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया था।

धमकी देने के मामले में गिरफ्तार हुए धाकड़राम विश्नोई के खिलाफ पहले ही जोधपुर के सरदारपुरा थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। उसके पास से 12 सितंबर 2022 को हथियार मिले थे। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। फिलहाल मुंबई पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है। इस पूछताछ में लॉरेंस विश्नोई गैंग से संबंधों को लेकर सवाल किए जाएँगे।

‘सत्ता में आते ही मुस्लिमों का आरक्षण करेंगे बहाल’: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पार्टी का वादा, भाजपा ने असंवैधानिक बता कर दिया है रद्द

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक आरक्षण का मुद्दा गरमाता जा रहा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिमों को मिलने वाला अल्पसंख्यक आरक्षण रद्द कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि धर्म के आधार पर आरक्षण देने का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। वहीं, कॉन्ग्रेस सत्ता में वापसी होने पर इस आरक्षण को बहाल करने की बात कर रही है।

दरअसल, कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने अल्पसंख्यक आरक्षण रद्द करने को लेकर भाजपा द्वारा किए गए फैसले को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा है, “भाजपा सरकार सोचती है कि आरक्षण को संपत्ति की तरह बाँटा जा सकता है। लेकिन आरक्षण संपत्ति नहीं बल्कि अधिकार है। हम नहीं चाहते कि अल्पसंख्यक वर्ग का 4% आरक्षण खत्म हो और किसी बड़े समुदाय को दिया जाए। अल्पसंख्यक हमारे भाई हैं और हमारे परिवार के सदस्य हैं।”

डीके शिवकुमार ने दावा करते हुए कहा है कि भाजपा लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय को जो आरक्षण दे रही है, उसे इस समुदाय के लोगों ने ठुकरा दिया है। शिवकुमार ने एक और दावा करते हुए कहा कि अगले 45 दिनों में कॉन्ग्रेस कर्नाटक की सत्ता में होगी। इसके बाद कैबिनेट की पहली बैठक में ही अल्पसंख्यकों का आरक्षण बहाल कर दिया जाएगा।

कर्नाटक सरकार के फैसले का अमित शाह ने किया समर्थन

कर्नाटक में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भाजपा कभी भी तुष्टिकरण में विश्वास नहीं करती। इसलिए उसने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करने फैसला किया। बीजेपी ने अल्पसंख्यकों को दिया गया 4% आरक्षण समाप्त कर 2 प्रतिशत आरक्षण वोक्कालिगा और 2 प्रतिशत आरक्षण लिंगयत को दिया है। अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण संवैधानिक रूप से वैध नहीं है। संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। कॉन्ग्रेस सरकार तुष्टिकरण की राजनीति के तहत अल्पसंख्यकों को आरक्षण दिया था।

क्या है मामला…

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को दो बड़े फैसले लिए। पहले फैसले के तहत सरकार ने अल्पसंख्यक कोटे के तहत मुस्लिमों को मिलने वाला 4% आरक्षण रदद् कर दिया। वहीं, दूसरा बड़ा फैसला यह है कि इसी 4% आरक्षण को सरकार ने वोक्कालिगा और लिंयागत समुदाय में बाँट दिया। इस तरह से अब शिक्षा और नौकरी में वोक्कालिगा और लिंगानुपात समुदाय को राज्य में 2-2% आरक्षण मिलेगा। वहीं, धार्मिक अल्पसंख्यकों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की श्रेणी में रखा जाएगा।

बर्थडे पार्टी में गईं, रील में खुश तो लाइव में फूट-फूट कर रोईं, सुबह आत्महत्या की खबर… पवन सिंह के साथ आकांक्षा दुबे का आखिरी गाना रिलीज, बॉयफ्रेंड का पोस्ट

भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध मौत के पीछे का राज़ गहराता जा रहा है। 26 साल की आकांक्षा दुबे का अब एक नया वीडियो सामने आया है, जिसे उनकी मौत से पहले का बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि रात के समय वो इंस्टाग्राम पर लाइव आकर कुछ कहना चाहती थीं, लेकिन नहीं कह पाईं। इस वीडियो में उनकी आँखों में आँसू दिख रहे हैं। फिर वो फूट-फूट कर रोने लगती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने लाइव के समय ये वीडियो रिकॉर्ड किया था।

इसके बाद लोग कयास लगा रहे हैं कि वो किसी परेशानी से जूझ रही थीं। अभी तक उनकी आत्महत्या की वजह सामने नहीं आई है। आत्महत्या की पिछली रात को वो एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने गई थीं। फिर देर रात वो होटल लौट आई थीं। सारनाथ थाना क्षेत्र के होटल सुमेंद्र रेजिडेंसी के कमरा नम्बर 105 में वो ठहरी हुई थीं। वो एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के सिलसिले में वाराणसी आई हुई थीं। कमरे को मास्टर चाबी से खोले जाने के बाद उनका शव पंखे से लटका मिला था।

हालाँकि, दिवंगत भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे के मेकअप आर्टिस्ट राहुल और हेयर आर्टिस्ट रेखा मौर्या का कहना है कि उन्हें किसी चीज का तनाव नहीं था और वो न ही परेशान थीं। उनका कहना है कि वो अपने सहकर्मियों का ख्याल रखती थीं और स्टाफ को परिवार की तरह मानती थीं। इंस्टाग्राम पर एक दिन पहले उन्होंने जो रील डाला था, उसमें वो खासी खुश नजर आ रही हैं। उनकी मौत के बाद ‘लायक हूँ मैं नालायक नहीं’ फिल्म की शूटिंग भी रुक गई है।

सारनाथ पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला बताते हुए कहा कि वो 22 मार्च की रात से ही यहाँ ठहरी हुई थीं। कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। आकांक्षा दुबे के बॉयफ्रेंड समर सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए गमगीन पोस्ट किया है। रविवार की सुबह ही पवन सिंह के साथ उनका आखिरी भोजपुरी गाना भी रिलीज हुआ। भदोही की रहने वाली आकांक्षा दुबे का ये गाना ‘आरा कभी हारा नहीं’ खासा वायरल हो रहा है।

मुझे मारना चाहते हैं… अतीक अहमद को लेकर साबरमती जेल से निकली यूपी पुलिस, काफिले के पीछे आने से मीडिया को रोका गया: 1300 Km का है रास्ता

उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य आरोपित अतीक अहमद (Atique Ahmed) को अहमदाबाद के साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है। यूपी एटीएस उसे लेकर साबरमती जेल से निकल चुकी है। जेल से बाहर आने के बाद अतीक ने मीडिया के सामने अपनी हत्या की आशंका जताई है। वहीं, पुलिस ने अतीक अहमद को लेकर निकले काफिले को मीडिया पीछा करते हुए कवर करना चाहती थी। लेकिन, इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

उत्तर प्रदेश एटीएस और यूपी पुलिस की एक टीम अतीक अहमद को प्रयागराज शिफ्ट करने के लिए रविवार (26 मार्च, 2023) की सुबह अहमदाबाद के साबरमती जेल पहुँची थी। प्रयागराज शिफ्ट करने से पहले उसका मेडिकल चेकअप कराया गया। इसके बाद जरूरी कार्रवाई के बाद अब ट्रांसफर वॉरंट पर उसे प्रयागराज ले जाया जा रहा है।

यूपी एटीएस रविवार (26 मार्च, 2023) की शाम 5 बजकर 44 मिनट पर अतीक अहमद को लेकर जेल से बाहर आई थी। इसके बाद उसे वैन में बैठाकर प्रयागराज के लिए रवाना हो गई। इससे पहले उसने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि ये लोग कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर उसे मारना चाहते हैं। प्रयागराज लाने के यूपी पुलिस को करीब 1300 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ेगा। इसमें 30-35 घण्टे का समय लग सकता है। चूँकि, अतीक को सड़क मार्ग से लाया जा रहा है। ऐसे में, प्रदेश की सीमा तक गुजरात पुलिस भी इस काफिले के साथ रहेगी।

यूपी पुलिस मंगलवार (28 मार्च, 2023) को अतीक अहमद को प्रयागराज के एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश करेगी। अतीक के भाई अशरफ अहमद की भी कोर्ट में पेशी होनी है। वह फिलहाल बरेली जेल में बंद है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही उसे भी प्रयागराज जेल में लाया जा सकता है। अतीक अहमद के प्रयागराज जेल में हो रहे ट्रांसफर को लेकर गाड़ी पलटने की भी चर्चाएँ जोरों पर हैं।

क्यों लाया जा रहा है प्रयागराज

दरअसल, उमेश पाल बसपा विधायक रहे राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे। राजू पाल की हत्या के एक साल बाद 28 फरवरी, 2006 को अतीक अहमद ने उमेश पाल का अपहरण कर लिया था। आरोप है कि अतीक और उसके भाई अशरफ ने राजू पाल की हत्या मामले में उमेश पाल को धमकाया और इसके बाद डरा कर कोर्ट में उनकी गवाही दर्ज करा ली। यह सब जब हो रहा था तब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दवाब के चलते पुलिस ने उमेश पाल की शिकायत पर मुकदमा नहीं लिखा।

हालाँकि इसके बाद प्रदेश में सरकार बदलने पर मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में कोर्ट की सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब 28 मार्च 2023 को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। यही नहीं, उमेश पाल हत्याकांड में भी अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ आरोपित है। ऐसे में यूपी पुलिस दोनों से इस मामले में भी पूछताछ करेगी।

जिनसे भगत सिंह ने ली प्रेरणा, नेताजी बोस ने जिनकी सलाह पर किया अमल, जिनकी सुनवाई में पत्नी सहित पहुँचे आंबेडकर: राहुल गाँधी, आसमान पर मत थूकिए

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार वीर विनायक दामोदर सावरकर का अपमान करने में लगी हुई है। “मैं माफ़ी नहीं माँगूँगा, मैं सावरकर नहीं हूँ” – राहुल गाँधी बार-बार ये डायलॉग बोल रहे हैं और कॉन्ग्रेस पार्टी इसका वीडियो भी शेयर कर रही है। ये अलग बात है कि राफेल से लेकर ‘मोदी’ सरनेम वाले लोगों को गाली देने तक, राहुल गाँधी अदालतों में माफ़ी माँगते रहे हैं। इतने चुनाव हारने के बावजूद बार-बार एक महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान किया जा रहा है।

असल में राहुल गाँधी सावरकर बन भी नहीं सकते। जब राहुल गाँधी के दादी के पिता जवाहरलाल नेहरू नहीं बन पाए, तो राहुल गाँधी क्या बनेंगे। जवाहरलाल नेहरू जब नाभा जेल में थे, तब उनके पिता ने न जाने कहाँ-कहाँ पैरवी कर के उन्हें 12 दिनों में ही निकलवा लिया था। जबकि, वीर सावरकर ने 11 वर्षों तक जेल भी नहीं, बल्कि उससे भी खौफनाक कालापानी की सज़ा भुगती। उनके भाई गणेश भी उसी जेल में थे, लेकिन दोनों की मुलाकात तक नहीं होती थी।

सीधी बात है कि राहुल गाँधी, आप सावरकर बन भी नहीं सकते। भारत के सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने अपनी पुस्तक ‘Veer Savarkar: The man Who could have prevented partition’ में बताया है कि कैसे कई स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर से प्रेरित थे। उन्होंने लिखा है कि कैसे वामपंथी बार-बार इस तथ्य को नज़रअन्दाज़ करते हैं कि बलिदानी भगत सिंह वीर सावरकर की पुस्तक ‘1857 का स्वतंत्रता समर’ से प्रेरित थे।

वीर सावरकर ने सन् 1952 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ हुई अपनी एक 12 साल पुरानी मुलाकात का भी जिक्र किया था। नेताजी के बॉम्बे स्थित आवास पर हुई इस बैठक में सावरकर ने उन्हें एक महत्वपूर्ण सलाह दी थी। ये सलाह ये थी कि वैश्विक मंच पर दुश्मन के दुश्मन को दोस्त माना जाए और राष्ट्रमण्डली में कोई भी देश अस्थायी दुश्मन नहीं होता, बस राष्ट्रहित ही स्थायी है। इस मुलाकात के कुछ ही महीनों बाद नेताजी भारत छोड़ कर अंग्रेजों को चकमा देते हुए निकल गए।

सावरकर की सलाह का ही योगदान था कि सुभाष चंद्र बोस ने ‘आज़ाद हिंद फ़ौज (INA)’ का पुनर्गठन किया और उसमें जान फूँकी। भगत सिंह के चाचा अजित सिंह भी अंग्रेजों की सेना में विद्रोह कराने के लिए वीर सावरकर की मदद कर रहे थे। खुद भगत सिंह ने लिखा था कि वीर सावरकर विश्व-बंधुत्व में यकीन रखने वाले बहादुर हैं। उन्होंने अपनी डायरियों में 6 बार वीर सावरकर की पुस्तक ‘हिन्दूपदपादशाही’ से उद्धरण लिया है।

वो कॉन्ग्रेस की ताकतें ही थीं, जिसने वीर सावरकर को महात्मा गाँधी की हत्या में फँसाने की साजिश रची। जबकि वीर सावरकर का स्पष्ट मानना था कि अराजकतावादी गतिविधियों का सहारा लेना विदेशी शत्रु के खिलाफ तो ठीक है, लेकिन अपने ही देश के लोगों के खिलाफ ये रास्ता नहीं आजमाया जा सकता। जिस राष्ट्र के लिए उन्होंने जीवन खपा दिया, उसी देश में उन्हें जेल में ठूँस दिया गया। पहले अंग्रेजों से यातनाएँ मिलीं, फिर नेहरू सरकार में प्रताड़ना।

वीर सावरकर इन चीजों से काफी टूट गए थे। उदय माहुरकर ने एक बार बड़ी बात लिखी है कि बाबासाहब भीमराव आंबेडकर ने सावरकर के वकील और ‘हिन्दू महासभा’ के नेता भपोतकर से दिल्ली में गुप्त मुलाकात कर के कहा था कि उन्हें लगता है कि सावरकर के खिलाफ केस कमजोर है और वो बरी होंगे। उन्होंने मजबूती से मुकदमा लड़ने को प्रेरित किया। आंबेडकर 2 बार अदालत में भी सुनवाई के दौरान पहुँचे, एक बार अपनी पत्नी के साथ।

अब बताइए, क्या राहुल गाँधी कभी वीर सावरकर बन सकते हैं? ऐसा व्यक्ति, जिनसे सुभाष चंद्र बोस सलाह लें। ऐसा व्यक्ति, जिनसे भगत सिंह प्रेरणा लें। ऐसा व्यक्ति, जिनकी सुनवाई में आंबेडकर अपनी पत्नी के साथ पहुँचें। एक ऐसे व्यक्ति, जिनके साथ महात्मा गाँधी वैचारिक बहस करते हों। एक ऐसे व्यक्ति, जिनसे जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री रहते इतना डर लगता है कि उनकी पेंशन रोक देते हैं, उन्हें जेल में डाल दिया जाता है।

विक्रम सम्पत भी अपनी पुस्तक ‘Savarkar: A Contested Legacy, 1924-1966′ में बताते हैं कि कैसे वीर सावरकर की पुस्तक का चौथा संस्करण भगत सिंह ने भारत में गुप्त तरीके से प्रकाशित करवाया था, क्योंकि ये अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित था। लाहौर के द्वारकादास पुस्तकालय में वीर सावरकर के जीवन को लेकर एक पुस्तक थी, जिसे पढ़ कर भगत सिंह प्रेरित हुए थे – विक्रम सम्पत की मानें तो ऐसे भी प्रमाण मिलते हैं।

‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपल्बिकन (HRA)’ के क्रांतिकारियों को जब जब लाहौर प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था, तब लगभग सभी के पास से सावरकर की पुस्तक की प्रतियाँ मिली थीं। चित्रगुप्त ने ‘लाइफ ऑफ बैरिस्टर सावरकर’ नामक एक किताब लिखी थी, जिसे HRA के लोग पढ़ते थे। हमें ये भी विदित है कि किस तरह महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव को बचाने की चेहता नहीं की।

जब क्रूर अंग्रेजों ने इन तीनों वीरों को फाँसी पर लटका दिया, तब सावरकर के रत्नागिरी स्थित आवास पर युवा बलिदानियों की याद में काला झंडा लगाया गया था। इससे पहले एक भगवा झंडा उनके घर की पहचान हुआ करता था। वीर स्वरकार ने तीनों बलिदानियों के लिए एक कविता भी लिखी, जो महाराष्ट्र में काफी लोकप्रिय हुआ। 4 महीने बाद ‘श्रद्धानन्द’ पत्रिका में उन्होंने एक लेख के जरिए इन बलिदानियों को याद किया।

वीर सावरकर को अक्सर मुस्लिमों से घृणा करने वाला बताया जाता है और कॉन्ग्रेस पार्टी को लगता है कि उन्हें गाली देकर पार्टी को मुस्लिमों के वोट मिल जाएँगे। सबसे बड़ी बात तो ये कि महाराष्ट्र में पार्टी की यूनिट ये सब बर्दाश्त करती है, चाटुकारिता के कारण कोई नेता आवाज़ नहीं उठाता। काकोरी प्रकरण में बलिदान हुए अशफाकुल्लाह खान की याद में भी वीर सावरकर ने एक लेख लिखा था। ऐसे वीर सावरकर पर राहुल गाँधी कीचड़ उछालते हैं।

आसमान पर थूकने का परिणाम क्या होता है, ये राहुल गाँधी को मालूम होना चाहिए। राहुल गाँधी ये फिर कॉन्ग्रेस पार्टी के किसी नेता में इतनी हैसियत नहीं है कि वीर सावरकर की आलोचना कर सके। महात्मा गाँधी जैसी हस्ती के साथ उनका वाद-विवाद चलता था। अमर क्रांतिकारी उनसे प्रेरणा लेते थे। राहुल गाँधी वीर सावरकर की आलोचना कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मजाक बना रहे हैं। सरे बलिदानियों का अपमान कर रहे हैं।

भगोड़े अमृतपाल को पनाह देने वाली एक और महिला गिरफ्तार, पटियाला में 6 घंटों तक रखा अपने घर में: खुलासा – Pak से मँगाए गए थे हथियार, बातचीत के लिए कोडवर्ड्स

पंजाब पुलिस से लगातार भाग रहे खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के सहयोगियों पर लगातार कार्रवाई जारी है। पुलिस ने पटियाला से एक महिला को गिरफ्तार किया है जिस पर भगोड़े अमृतपाल को शरण देने का आरोप है। इसके अलावा पुलिस की जाँच में फरारी के दौरान अमृतपाल द्वारा प्रयोग किए जाने वाले कुछ कोडवर्ड का भी खुलासा किया गया है। अमृतपाल के पोस्टरों को नेपाल सीमा पर चस्पा कर दिया गया है और वहाँ पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वारिस दे पंजाब संगठन के मुखिया अमृतपाल को फरारी के दौरान पटियाला की एक अन्य महिला ने लगभग 6 घंटे तक शरण दी थी। तब अमृतपाल का साथ पप्पलप्रीत भी उसके साथ मौजूद था। जाँच के दौरान पुलिस को अमृतपाल के 3 अन्य CCTV फुटेज मिले हैं। इन वीडियो में से एक में अरोपिता को अमृतपाल के साथ देखा जा सकता है। बताया यह भी जा रहा है कि पटियाला से ही अमृतपाल सिंह अपना हुलिया बदल कर शाहाबाद की तरफ फरार हुआ था। वह पटियाला में 19 मार्च को रुका था। रविवार (26 मार्च, 2023) को पुलिस ने महिला की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

एक अन्य खुलासे के मुताबिक, फरारी के दौरान अमृतपाल अपने साथियों से कोडवर्ड में बात किया करता था। बताया जा रहा है कि कुरुक्षेत्र से गिरफ्तार एक अन्य महिला बलजीत कौर की स्कूटी लेने के लिए उन्हें पर्ची पर एक कोड और फोन नंबर लिख कर कर दिया गया था। इस कोड में ‘बुआ जी मैं रिनू बोल रहीं हूँ, स्कूटी की चाबी मैट के नीचे है’ फोन पर बोलना था। दुखहरन गुरूद्वारे पर स्कूटी ले कर पहुँची बलजीत ने ऐसा ही किया था। हालाँकि दूसरी तरफ से जो आवाज आई उसमें एक लड़की ने बलजीत से खुद से मिल कर जाने को कहा था जिसे बलजीत ने नहीं माना और बिना मिले ही लौट आई थी।

इस बीच अमृतपाल सिंह के विदेश भागने की आशंका के चलते पुलिस ने भारत-नेपाल सीमा पर उसके पोस्टर चस्पा करवा दिए हैं। पोस्टरों में अमृतपाल का एक रूप पगड़ी के साथ और दूसरा बिना पगड़ी के है। इस पोस्टर की हेडलाइन में वांटेड लिखा हुआ है। दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि अमृतपाल ने पाकिस्तान से 6 AK 47 और 2 AK 56 राइफल की खेप मँगवाई थी।

अमृतपाल के साथ फरार हुए पप्पलप्रीत सिंह का कनेक्शन जम्मू से निकला है। यहाँ की पुलिस ने एक पति-पत्नी को हिरासत में ले कर पंजाब पुलिस को सौंपा है। हिरासत में लिए गए दम्पति का नाम अमरीक सिंह और परमजीत कौर है। ये दोनों जम्मू के आर एस पुरा क्षेत्र में रहते हैं। पुलिस इस जोड़े से पूछताछ कर रही है।

इलाज के नाम पर झोलाछाप डॉक्टर करता था यौन शोषण, 80+ ‘अश्लील वीडियो’ वायरल: 400 महिलाओं ने पत्र लिख मदद की गुहार लगाई

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में एक झोलाछाप डॉक्टर की घिनौनी हरकत सामने आई है। उसने क्लीनिक में आने वाली कई महिलाओं का यौन शोषण कर उनका वीडियो बनाया है। डॉक्टर की इस हरकत के 80 से अधिक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद करीब 400 महिलाओं ने पत्र लिखकर झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला कोल्हापुर जिले के मुरगुड का है। वहाँ आरोपित झोलाछाप डॉक्टर अपने प्राइवेट क्लीनिक को चलाने के लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन देता था। इस विज्ञापन के कारण लोग उसे असली डॉक्टर समझकर इलाज कराने आते थे। इसका फायदा उठाकर उसने इलाज कराने आने वाली महिलाओं का यौन शोषण करना शुरू कर दिया।

कैसे खुला मामला

आरोपित झोलाछाप डॉक्टर महिलाओं का यौन शोषण कर अपने फोन में वीडियो बनाता था। इसके बाद इन वीडियो को लैपटॉप में स्टोर करता था। इसी बीच उसके लैपटॉप में कुछ गड़बड़ी आ गई। वह लैपटॉप रिपेयर कराने के लिए ले गया। इसके बाद ही अश्लील वीडियो वायरल हुए।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि लैपटॉप रिपेयर करने वाले ने ही वीडियो वायरल किए हैं। झोलाछाप डॉक्टर की इस हरकत का शिकार होने वाले लोगों में स्थानीय महिलाएँ भी शामिल हैं। वहीं, मुरगुड पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब तक कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।

400 महिलाओं ने लिखे पत्र

सोशल मीडिया पर एक के बाद करीब 80 वीडियो वायरल होने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। NBT के अनुसार, करीब 400 महिलाओं ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, नेताओं और पुलिस को पत्र लिखा है। पत्र के साथ ही अश्लील वीडियो वाला पेन ड्राइव भी भेजा गया है। कहा जा रहा है कि ये सभी पत्र डाक द्वारा भेजे गए हैं।

क्षेत्र की महिलाओं द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि फर्जी डॉक्टर की इस हरकत ने मुरगुड का नाम बदनाम हुआ है। एक मरीज के लिए डॉक्टर भगवान की तरह होता है, लेकिन झोलाछाप डॉक्टर ने घिनौनी हरकत से डॉक्टरों का नाम भी बदनाम किया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि देश में महिलाओं को सम्मान देकर महिला दिवस मनाया जाता है, लेकिन फर्जी डॉक्टर की इस हरकत ने यह साबित कर दिया है कि इस क्षेत्र में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। इस पत्र में आरोपित झोलाछाप डॉक्टर का समर्थन करने वालों पर भी कार्रवाई की माँग की गई है।

लॉ छात्र से सड़क पर बदसलूकी करने वाले AAP विधायक कोर्ट में दोषी करार, जल्द मिलेगी सजा: 2020 में चुनाव के वक्त हुई थी मारपीट

दिल्ली के मॉडल टाउन से आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को साल 2020 में एक लॉ छात्र को परेशान व बदसलूकी करने के मामले में दोषी करार दिया गया है। अखिलेश पर आरोप था कि उन्होंने छात्र पर जातिगत टिप्पणियाँ की थीं।

विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने कहा, “अभियोजन ने आईपीसी की धारा 323 के तहत त्रिपाठी के अपराध को साबित कर दिया है और उन्हें उसी के लिए दोषी ठहराया गया है, जबकि उन्हें धारा 341/506 (1) आईपीसी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम), 1989 की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत बरी किया गया है।”

बता दें कि इस मामले में अदालत ने इसी साल 16 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था और 10 दिना बाद यानी कि 26 मार्च को इस पर फैसला सुनाया गया। अब कोर्ट में आप नेता की सजा पर सुनवाई 13 अप्रैल 2023 को होगी। इस दौरान कोर्ट ने त्रिपाठी को 10 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति और आय का हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला साल 2020 में हुए दिल्ली चुनाव से एक दिन पहले का है। शिकायतकर्ता संजीव कुमार ने कहा था कि 7 फरवरी 2020 की रात करीब 11:30 बजे वह अपने दोस्त राज किशोर के साथ कूड़ा फेंककर अपने घर जा रहे थे तभी अखिलेश त्रिपाठी ने उन्हें अपने समर्थकों के साथ उन्हें झंडेवालान चौक पर रोका और उसके बाद उनकी स्कूटी की चाबी छीन, बुरी तरह पीटा। संजीव का कहना था कि इस दौरान उनपर जातिगत टिप्पणियाँ भी हुईं। हालाँकि कोर्ट ने अखिलेश को इस मामले में दोषी नहीं पाया और सिर्फ धारा 323 के तहत उन्हें दोषी पाया।

‘खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ हुई क्या कार्रवाई ?’: दूतावास पर हमले के बाद भारत ने किया कनाडा राजदूत से सवाल, वियना संधि की याद दिलाई

देश और विदेश में खालिस्तानियों के नापाक हरकतों को लेकर सरकार सख्त है। एक तरफ देश में अमृतपाल के खिलाफ के खिलाफ कार्रवाई तेज है तो दूसरी तरफ कनाडा में खालिस्तानियों के हमले को लेकर वहाँ के राजदूत को तलब किया गया है।

बता दें कि हाल के दिनों में कनाडा में भारतीय वाणिज्य दूतावासों को निशाना बनाया गया था। इसको लेकर भारत ने चिंता व्यक्त की थी। अब सरकार ने कनाडा के राजदूत को तलब कर पूछा है कि इन चरमपंथियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने शनिवार (25 मार्च 2023) को राजदूत से स्पष्टीकरण माँगा। उनसे पूछा गया कि खालिस्तानी तत्वों को पुलिस की मौजूदगी में भारतीय राजनयिक मिशन और वाणिज्य दूतावासों की सुरक्षा में सेंध लगाने की अनुमति कैसे दी गई।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा को विएना संधि के तहत अपने दायित्वों की याद दिलाई गई। उन्हें ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाने के लिए कहा गया, जिनकी पहचान पहले ही इस तरह के कृत्यों में शामिल होने के रूप में की जा चुकी है।

विदेश मंत्रालय ने आशा व्यक्त है कि कनाडा की सरकार अपने राजनयिकों और उनके परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगी। बता दें कि पिछले रविवार को खालिस्तान समर्थकों के हिंसक विरोध के बाद ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

इस कार्यक्रम में भारतीय राजदूत हिस्सा लेने वाले थे। इस दौरान विरोध प्रदर्शन को कवर कर रहे भारतीय मूल के पत्रकार समीर कौशल पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला किया कर दिया था।

भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा की पश्चिमी तट की पहली यात्रा पर उनका स्वागत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम ताज पार्क कन्वेंशन सेंटर, सरे में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम को आखिरकार सुरक्षा कारणों की वजह से रद्द कर दिया गया था।

दरअसल, पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ के का मुखिया और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई के कारण विदेशों में बैठे उसके समर्थक बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में वे भारतीय राजदूत और राजनयिक परिसरों को निशाना बना रहे हैं। ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई देशों में इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।