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कश्मीर के पुलवामा में पलटी गैर-स्थानीयों से भरी बस, 4 बिहारी मजदूरों की मौत, 28 घायल: पुलिस ने जाँच शुरू की

जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार (18 मार्च 2023) की सुबह हुई एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य 28 लोग घायल हो गए। इस बस में बाहरी राज्यों के मजूदर सवार थे।

हादसे में मारे गए पीड़ितों की पहचान नसरुद्दीन अंसारी, राज करण दास, सलीम अली और कैसर आलम के रूप में हुई है। ये लोग बिहार के रहने वाले थे। वहीं, सभी घायल यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

यह दुर्घटना सुबह करीब 7:30 बजे हुई। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि तेज रफ्तार से जा रही यह बस एक डिवाइडर से टकरा गई और अपना नियंत्रण खो बैठी। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के बारसू इलाके में नेशनल हाईवे-44 पर झेलम ब्रिज के पास राज्य सड़क परिवहन निगम की यह बस पलट गई।

हादसे में कुल 28 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। इनमें से 23 का अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ की हालत बेहद गंभीर है। वहीं, पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है।

मृतकों की पहचान नसरुद्दीन अंसारी पुत्र इस्लाम अंसारी खैरावा टोला पकड़ी पश्चिमी चंपारण और राज करण दास पुत्र शिवू सिंघारी गोबिंदपुर किशनगंज, सलीम अली पुत्र मोहम्मद अलाउद्दीन निवासी कटिहार और कैशर आलम पुत्र शेओ मजाकुरुल निवासी कटिहार के रूप में हुई है।

यूट्यूबर मनीष कश्यप ने थाने में सरेंडर किया, घर की कुर्की जब्ती करने पहुँची थी बिहार पुलिस: ‘तमिलनाडु केस’ में कार्रवाई

तमिलनाडु से लौटे बिहार के मजदूरों की पिटाई पर ‘गलत व भ्रामक रिपोर्टिंग’ करने के आरोप में एफआईआर होने के बाद यूट्यूबर मनीष कश्यप ने थाने में सरेंडर कर दिया है। इस बात की जानकारी बिहार पुलिस ने ट्वीट करके दी है।

बिहार पुलिस ने अपने ट्वीट में लिखा, “तमिलनाडु में कामकाजी बिहार के निवासियों के लिए असत्य, भ्रामक एवं उन्माद फ़ैलाने वाले वीडियो को प्रसारित करने एवं आर्थिक अपराध थाना कांड सं0 3/23 तथा 4/23 के अभियुक्त मनीष कश्यप ने बिहार पुलिस एवं EOU के दबिश के कारण बेतिया के जगदीशपुर थाने में आत्मसमर्पण किया।”

बेगूसराय के पत्रकार घनश्याम देव ने मनीष कश्यप की तस्वीरें साझा की हैं। इसमें वो चंपारण के बेतिया थाने के बाहर खड़े दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि आज सुबह बिहार पुलिस ने उनके यहाँ कुर्की जब्ती के लिए गई थी। उसके बाद ही मनीष कश्यप ने सरेंडर किया।

जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह पुलिस प्रशासन की टीमें मझौलिया थाना स्थित महना डुमरी गाँव में घर की कुर्की जब्ती करने गई थी। इसी कार्रवाई का मालूम होने पर बेतिया के जगदीशपुर थाने में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।

बता दें कि इससे पहले एक बार मनीष कश्यप की गिरफ्तारी की फर्जी जानकारी ट्विटर पर वायरल हुई थी। उस समय कश्यप के हाथ में हथकड़ी लगाकर फोटो जाली हैंडल से साझा की गई थी। हालाँकि इस दफा बिहार पुलिस ने खुद मनीष के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है।

उल्लेखनीय है कि बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया में भ्रामक फोटो, वीडियो शेयर करने के आरोप में यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इन चार में मनीष के साथ अमन कुमार, राकेश तिवारी तथा युवराज सिंह का नाम शामिल था।

राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट ने जारी किया वारंट, अमेरिका खुश हुआ: रूस बोला- जब ICC से जुड़े नहीं, तो ये आदेश बकवास

रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) को युद्ध अपराधी घोषित किया है। इसके साथ ही पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ICC के इस निर्णय का समर्थन किया है, जबकि रूस ने इसे बकवास बताया है।

दरअसल, रूस ने पिछले साल यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और पश्चिमी देश रूस पर यूक्रेन में नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाते रहे हैं। इन्होंने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए हैं। इसके बावजूद यूक्रेन के सरेंडर करने तक रूस हमले से पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं, यूक्रेन भी अंतिम साँस तक मुकाबला करने की बात कही है।

इस बीच मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाया गया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों से रूसी संघ में लोगों, खासकर बच्चों के अवैध ट्रांसफर के युद्ध अपराध के लिए जिम्मेदार हैं। ICC ने इस संबंध में राष्ट्रपति पुतिन और रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय में बच्चों के अधिकारों की आयुक्त मारिया अलेक्सेयेवना लवोवा-बेलोवा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

कोर्ट ने कहा कि 24 फरवरी 2022 को रूस के आक्रमण के बाद से ही यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में अपराध किए गए। इस बात पर विश्वास करने के लिए उचित आधार है कि इसमें पुतिन सीधे तौर पर जुड़े रहे। इसलिए इन कृत्यों को करने की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी पुतिन की है। वहीं, रूस ने कहा कि इस आदेश का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि रूस ICC का हिस्सा नहीं है।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से जब पूछा गया कि क्या रूसी राष्ट्रपति ने युद्ध अपराध किया है तो उन्होंने कहा, “हाँ व्लादिमीर पुतिन ने वॉर क्राइम किया है।” वहीं, अमेरिका का भी कहना है कि उसने एक स्वतंत्र जाँच में पाया है कि रूस ने युद्ध अपराध किए हैं। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि रूस युद्ध अपराध और अत्याचार कर रहा है और हम स्पष्ट हैं कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

बता दें कि अमेरिका और पश्चिमी देश यूक्रेन का पक्ष लेते रहे हैं। वे यूक्रेन को हर तरह की मदद भी उपलब्ध करा रहे हैं। इधर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आग्रह के बावजूद दोनों देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और पिछले एक साल से दोनों देशों के बीच हिंसा जारी है।

 

उधर चल रही थी उमेश पाल पर गोलियाँ, इधर शूटर की GF वीडियो बना रही थी: पुलिस ने हिरासत में लिया, गुड्डू मुस्लिम से भी कनेक्शन

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड में UP पुलिस ने एक महिला को हिरासत में लिया है। महिला अतीक अहमद के शूटर गुलाम की प्रेमिका बताई जा रही है। आरोप है कि हत्या के बाद भी महिला गुलाम और गुड्डू मुस्लिम के सम्पर्क में बनी थी। शूटआउट के दौरान यह संदिग्ध महिला वीडियो भी बनाती दिखी। वहीं स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने नैनी जेल में छापा मारा है जहाँ अतीक का बेटा अली बंद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिरासत में ली गई महिला काफी लम्बे समय से गुलाम मोहम्मद के सम्पर्क में थी। उसका शूटर गुलाम के घर आना-जाना भी लगा रहता था। जब अतीक अहमद के शूटर उमेश पाल और उनके गनर पर गोलियाँ बरसा रहे थे तब वह महिला बीच सड़क पर खड़ी हो कर वीडियो बना रही थी। CCTV फुटेज में भी वह महिला दिखाई दी है। गुलाम मोहम्मद की CDR लोकेशन से महिला का नंबर STF को मिला। उसे प्रयागराज के नैनी इलाके से हिरासत में लिया गया है।

हिरासत में ली गई उस महिला से पुलिस की पूछताछ चल रही है। अभी तक उसकी पहचान सार्वजानिक नहीं की गई है। बताया यह भी जा रहा है कि फरारी के दौरान भी गुड्डू मुस्लिम ने उससे बात की थी। शूटरों से अंतिम बार उसकी बात 16 मार्च को हुई है। स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने नैनी जेल में भी छापा मारा है। यहाँ अतीक का बेटा अली बंद है। बुधवार (15 मार्च 2023 ) को इस जेल में एक संदिग्ध को घी के डिब्बे में जेल में मोबाइल पहुँचाते पकड़ा गया है। पुलिस को शक है कि वह मोबाइल अतीक के बेटे अली तक भेजा जा रहा था।

एक अन्य दावे के मुताबिक पुलिस को अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता के फोन की लोकेशन मिली है। यह लोकेशन शाइस्ता से जुड़े 3 संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद मिली है। हिरासत में लिए गए तीनों संदिग्धों से शाइस्ता और अन्य शूटरों के बारे में पूछताछ चल रही है।

एक अन्य मामले में शुक्रवार (17 मार्च 2023) को सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद की गुजरात से उत्तर प्रदेश न भेजे जाने की याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते के लिए टाल दी है। अपनी याचिका में अतीक ने सुरक्षा का हवाला दिया था। वहीं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एक अदालत ने अतीक के भाई अशरफ उर्फ़ खालिद अजीम की जेल से पूछताछ के लिए न निकाले जाने की याचिका पर सुनवाई 20 मार्च तक के लिए टाल दी है।

शरीयत कानून के खिलाफ बुशरा अली ने उठाई SC में आवाज, संपत्ति में माँगा अधिकार: याचिका में कहा- मुस्लिम पर्सनल लॉ भेदभाव करता है, संविधान नहीं

एक मुस्लिम महिला ने शरीयत कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। महिला ने अपनी याचिका में कहा है कि संपत्ति बँटवारे में उसे पुरुष सदस्यों की तुलना में आधा हिस्सा मिला, जो उसके साथ भेदभाव है। महिला ने तर्क दिया कि भारतीय संविधान बराबरी का हक देता है, जबकि शरीयत कानून भेदभावपूर्ण है। ऐसे में उसने न्याय की गुहार लगाई।

बुशरा अली नाम की महिला ने सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी याचिका में कहा कि उसके परिवार में जब संपत्ति का बँटवारा हुआ तो उसे 7/152 का हिस्सा दिया गया। महिला ने दावा किया कि वहीं पुरुषों को 14/152 का हिस्सा दिया गया, जो उसकी हिस्सेदारी से दोगुना है।

बुशरा अली ने कहा कि भारत का संविधान बराबरी का हक देता है। इसलिए वह संपत्ति का बँटवारा बराबरी के आधार पर चाहती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के बाद प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। बता दें कि मुस्लिमों में सिविल मामलों का निबटारा शरीयत कानून पर आधारित मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होता है। इसमें महिलाओं को कई अधिकारों से महरूम रखा गया है।

बुशरा अली ने शरीयत कानून की धारा-2 को चुनौती देते हुए कहा कि संविधान की धारा-15 का उल्लंघन बताया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कृष्ण मुरारी और संजय करोल ने प्रतिवादी इरफान मोहम्मद और संबंधित को नोटिस जारी किया।

मुस्लिमों के सिविल मामलों को शरीयत कानून के तहत देखा जाता है। इसमें महिलाओं के हक से संबंधित कई तरह की खामियाँ हैं। इनमें पुरुषों को चार शादियाँ, तलाक, तलाक के बाद गुजारा भत्ता, संपत्ति में बराबरी का हक, बच्चे को गोद लेने का मामला, बच्चों की कस्टडी, महिलाओं को वसीयत, दान आदि प्रमुख हैं।

ST लड़की से जंगल में किया था गैंगरेप… मोहसिन, रियाज और शहबाज को उम्रकैद: कोर्ट ने 1 साल में सुनाया फैसला, जुर्माना भी ठोंका

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में एक जनजातीय नाबालिग बच्ची से गैंगररेप के 3 आरोपितों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह सजा 1 साल के अंदर पूरे हुए ट्रायल के बाद सुनाई गई है। सजा पाए दोषियों के नाम रियाज़, शाहबाज़ और मोहसिन हैं। अदालत ने इन सभी पर 10-10 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है। जिला अदालत द्वारा इस सजा का ऐलान शुक्रवार (17 मार्च 2023) को किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला ठीक 1 साल पहले पिछले 17 मार्च 2022 का था। तब श्योपुर के देहात थानाक्षेत्र में गाँव काली तलाई की रहने वाली 15 वर्षीया नाबालिग लड़की जंगल में लकड़ी बीनने गई थी। उसी जंगल में मोहसिन, शाहबाज़ और रियाज़ भी पहुँच गए। ये सभी 2 बाइकों से आए थे। तीनों ने लड़की को अकेला पा कर बारी-बारी से गैंगरेप किया। सभी आरोपित पड़ोसी गाँव बालापुर के रहने वाले थे। गैंगरेप के बाद इन सभी ने लड़की को मुँह बंद रखने की भी धमकी दी थी। हालाँकि उधर से गुजर रहे लड़की के भाई ने रियाज़, मोहसिन और शाहबाज़ की जंगल से निकल कर भागते हुए फोटो खींच ली थी।

दुष्कर्म के बाद लड़की जंगल से भागती हुई अपने घर जा रही थी तो कुछ ग्रामीणों ने रोक कर उस से परेशानी की वजह पूछी। लड़की ने अपनी आपबीती गाँव वालों को बता दी थी। घटना की जानकारी पीड़िता के परिजनों को भी हुई तो सब मिल कर थाने पहुँचे। पुलिस ने दबिश दे कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। जिस बाइक से तीनों गए थे उसे भी जब्त कर लिया गया। लड़की ने रेपिस्ट रियाज़, मोहसिन और शाहबाज़ की पुलिस के आगे पहचान की। इन सभी आरोपितों पर पुलिस ने तब IPC की धारा 376 D, 506 के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया था। तब इस घटना के विरोध में साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया था। प्रशासन ने मार्च 2022 ने शाहबाज़, मोहसिन और रियाज़ के घर पर बुलडोजर चलाया था। इसी के साथ आरोपितों की फसल को भी नष्ट कर दिया गया था।

पुलिस ने मात्र 8 दिनों के अंदर ही अदालत को चालान भी पेश कर दिया था। इसके बाद फ़ौरन ही केस का ट्रायल शुरू हो गया। कोर्ट में भी पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान को दोहराया। इस दौरान ग्वालियर हाईकोर्ट के वकील बी के शर्मा ने पीड़ित परिवार का केस फ्री में लड़ने का ऐलान किया और पूरे केस को लड़ा भी। पुलिस ने भी कोर्ट में जरूरी सबूत जमा किया। आखिरकार तमाम सबूतों और गवाहों को सजा योग्य मानते हुए कोर्ट ने शाहबाज़, मोहसिन और रियाज़ को 17 मार्च 2023 को अंतिम साँस तक जेल में रहने की सजा के साथ 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। तीनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को मिलेगी 1 घंटा पहले छुट्टी: बिहार सरकार ने मानी माँग, BJP नेता बोले- नवरात्रि-रामनवमी के लिए भी सर्कुलर जारी करो

चुनाव भी पास है और रमजान भी। ऐसे में तुष्टिकरण की राजनीति ना हो, ऐसा हो नहीं सकता। लोकसभा चुनावों को देखते हुए बिहार की नीतीश कुमार की सरकार ने रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों और अधिकारियों को एक घंटे पहले दफ्तर आकर तय समय से एक घंटे पहले घर जाने की छूट दी है। यह छूट हर साल जारी रहेगी।

राज्य सरकार द्वारा शुक्रवार (17 मार्च 2023) को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सरकार का यह आदेश हर साल रमजान के महीने में स्थायी तौर पर लागू रहेगा। इस आदेश को बिहार सरकार के प्रधान सचिव की ओर से सभी विभागों, उनके अध्यक्षों, डीजीपी, जिले के अधिकारियों और अन्य अहम अधिकारियों को भेजा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि जहाँ बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम है, वहाँ भी इस आदेश के हिसाब से हाजिरी लगेगी।

सरकार के इस निर्णय को सत्ताधारी पार्टी JDU और RJD ने धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने वाला बताया। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने तंज कसा है। सरकार के इस फैसले पर भाजपा ने कहा कि नीतीश कुमार ने नवरात्रि के दौरान हिंदुओं के लिए ऐसा कोई सुविधा नहीं दी गई। भाजपा नेता अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि बिहार सरकार को चैत्र नवरात्रि और रामनवमी के त्योहार पर हिंदू कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह का सर्कुलर जारी करना चाहिए।

उधर, नीतीश सरकार के फैसले का RJD ने स्वागत किया है। राजद नेता एजाज अहमद ने कहा कि यह देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को मजबूत करने में मददगार साबित होगा। इस कदम से देश की गंगा-जमुनी तहजीब और मजबूत होगी। वहीं, जदयू ने कहा कि सरकार के इस फैसले से काम भी प्रभावित नहीं होगा।

‘मैं बंदर हूँ, गधा हूँ…इस्तीफा ले लो’ : कोर्ट में पेशी के बाद पुलिस पर भड़के SP विधायक इरफान, बीवी अदालत के बाहर फूट-फूट कर रोई

समाजवादी पार्टी विधायक इरफान सोलंकी को पेशी के लिए महाराज गंज जेल से कानपुर लाया गया था। जहाँ वह पुलिसकर्मियों पर भड़क गए। उन्होंने कहा है कि वह जानवर, गधा या बंदर नहीं हैं जो उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है। वहीं, इरफान की पत्नी नसीम कोर्ट के बाहर रोती हुई नजर आई। नसीम का कहना था कि योगी सरकार उस पर दया नहीं दिखा रही।

दरअसल, पुलिस इरफान सोलंकी को लेकर जा रही थी। इस दौरान पुलिस कर्मियों के साथ धक्का मुक्की हो गई। इससे वह भड़क गए। उन्होंने कहा, “पुलिस वाले धक्का मारते रहते हैं। हम विधायक हैं या अपराधी या आतंकवादी। तुम लोग (मीडिया) इन लोगों के खिलाफ कुछ नहीं चलाते। पुलिस वाले बदतमीजी करते हैं ये क्यों नहीं दिखाते तुम लोग। विधायक हैं हम की क्या हैं? धक्का मारते हैं। हम आदमी हैं कि जानवर हैं। बंदर हो गए हैं हम, गधे हो गए हैं। इनको इस्तीफा लेना है तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूँ। ये मुझे परेशान क्यों कर रहे हैं?”

वहीं, इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी कोर्ट के बाहर रोती हुई नजर आई। नसीम का कहना था कि सरकार ने उन्हें परेशान कर रखा है। महाराजगंज जेल में ठीक से मुलाकात नहीं हो रही, छोटी सी जाली से मुलाकात करवाते हैं। कानपुर कोर्ट में 5 मिनट की भी मुलाकात नहीं हो पाती। क्या वह इरफान सोलंकी को त्याग दें, या फिर मरा हुआ समझ लें? रमजान आ रहे हैं, उनकी परेशानी योगी को नहीं दिखती क्या?

नसीम ने आगे कहा है कि एक महिला ने झूठा आरोप लगाया, उसकी सुनवाई हो रही है। वह रो रहीं हैं लेकिन सरकार उनकी नहीं सुन रही। सरकार और पुलिस दोनों उनके पीछे पड़ी हुई है। नसीम ने यह भी कहा है, “हमें और इरफान को माफ कर दिया जाए। बच्चों के 10वीं और 12वीं के एग्जाम हैं। हम बच्चों के एग्जाम दिलवाएँ या कोर्ट में आएँ।”

बता दें कि जाजमऊ आगजनी मामले में आरोप तय होने के बाद इरफान की पहली बार कोर्ट में पेशी हुई। इरफान के अलावा रिजवान, मोहम्मद, शरीफ शौकत अली और इसराइल आटे वाला भी इस मामले में आरोपित हैं। सभी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। वहीं, इरफान सोलंकी और उसके भाई रिजवान सोलंकी की रंगदारी मामले में भी जिला जज की कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है।

शौच के लिए निकली 9 साल की लड़की, लहुलूहान घर पहुँची: रेप के आरोप में शाहिद उस्मानी गिरफ्तार, पुलिस के सामने जुर्म कबूला

उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस ने 9 साल की लड़की के साथ बलात्कार करने और उसे जान से मारने की कोशिश करने वाले आरोपित को गिरफ्तार किया। आरोपित की पहचान शाहिद उस्मानी के रूप में हुई । पीड़िता शौच के लिए घर से बाहर गई थी जब आरोपित ने उसे पकड़कर उसके साथ बलात्कार किया और फिर सिर में पत्थर मारकर जान से मारने की कोशिश की। पीड़िता को लहूलुहान हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला आगरा जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र का है। जहाँ सोमवार (13 मार्च 2023) की सुबह पीड़िता घर से दूर रेलवे लाइन के पास शौच के लिए गई थी। इसी दौरान आरोपित शाहिद उस्मानी उसे जबरन उठाकर ले गया। जहाँ उसने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसने पीड़िता को जान से मारने की कोशिश के चलते उसके सिर पर पत्थर से हमला किया और मौके से फरार हो गया।

घटना के बाद पीड़िता लहूलुहान और निवस्त्र हालत में घर पहुँची। लड़की की हालत देखकर घरवालों और स्थानीय लोगों के होश उड़ गए। घरवालों के पूछने पर लड़की ने अपने साथ हुई पूरी घटना बताई। इसके बाद घरवाले उसे लेकर घटना स्थल पर गए। जहाँ उन्होंने देखा कि चारों ओर खून ही खून फैला हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। इसके बाद पीड़िता को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। फिलहाल पीड़िता की हालत सामान्य बताई जा रही है।

नाबालिग लड़की के साथ हुई दिल दहला देने वाली इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में जमकर गुस्सा था। लोग ने आरोपित की गिरफ्तारी की माँग करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए आरोपित की गिरफ्तारी के लिए 6 टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने लगातार छापेमारी करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर आगरा सिटी एसपी विकास कुमार ने कहा है पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शाहिद उस्मानी पुत्र जहीर उस्मानी निवासी शिवनगर, गाटरवाली गली थाना शाहगंज को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपित को लेकर मौके पर गई थी। जहाँ आरोपित ने बताया है कि उसने किस तरह से पूरी घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इसका वीडियो भी बनाया है। घटना के दौरान आरोपित ने जो कपड़े पहने थे वह भी पुलिस ने बरामद किए हैं। कपड़े और पीड़िता के सैंपल फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए हैं।

पहले सरकारी डॉक्टर, अब टीचर का बेटा… क्या बिहार में फिर शुरू हो गया जंगलराज वाला ‘अपहरण उद्योग’: लालू यादव के भतीजे पर भी रंगदारी माँगने का आरोप

बिहार के पहले न्यूरो सर्जन दिवंगत डॉक्टर रमेश चंद्रा तब बिहार की राजधानी में रहकर प्रैक्टिस किया करते थे। एक दिन उनका अपहरण हो गया। इसके बाद बिहार भर के डॉक्टरों ने रमेश चंद्रा के समर्थन में हड़ताल कर दिया। हड़ताल को वापस लेने के लिए बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पति और पर्दे के पीछे के कार्यवाहक लालू प्रसाद यादव ने डॉक्टरों को धमकाना शुरू कर दिया था।

लालू यादव अपहृत डॉक्टर रमेश चंद्रा के मित्र और प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय कुमार को फोन पर धमका रहे थे। लालू कह रहे थे, “ऐ डॉक्टर… ई हड़ताल-उड़ताल बिहान बंद करावsss। हमार आदमी सब तहरा लोग के अस्पताल में कल आग लगा दी। तब हमरा के दोष मत दीहsss।” यह घटना है मई 2003 की। तब अजय कुमार ने कहा था, मैं सीएम कार्यालय आ रहा हूँ, आग लगाकर मुझे ही लहका (जला) दीजिए।”

जिसने लालू के उस दौर को देखा होगा, उसे अब भी बीते हुए बहुत ज्यादा दिन लग रहा होगा। लगभग एक दशक तक बिहार के आम लोगों से लेकर डॉक्टर-इंजीनियर और अधिकारियों तक में खौफ सवार था। हर तरफ बदहवासी और बेसहरापन था। जो भी था वो या तो भगवान भरोसे था या फिर अपराधियों के भरोसे या भी लालू यादव के राजद गैंग के भरोसे।

ये वो दौर था जब बिहार में हर अपराध संस्थागत रूप ले चुका था और उसके तार घुम-फिरकर तब की सत्ताधारी पार्टी राजद (RJD) के नेताओं से होते हुए यादव परिवार तक पहुँचता था। इस दौरान अपहरण उद्योग सबसे अधिक फला-फूला। जो पैसे वाले थे, उन्होंने करोड़ों की फिरौती देकर जान बचाई और जिनके पास पैसे नहीं थे, वे जान देकर बिहारी होने की कीमत चुकाई थी।

यह बिहार का अंधकार युग था। एक ऐसा अंधकार युग, जिसमें लालटेन की टीमटिमाती रौशनी के सहयोग से निशाचर शिकार करते थे। जंगलराज का खौफ और सन्नाटा हर तरफ दिखता था। शाम होते ही लोगों के चेहरे पर दहशत दिखने लगता था। जो लो सूरज के ढलने से पहले अपने घरों तक नहीं पहुँच पाते थे, वे रेलवे स्टेशनों, बसों या अपने जानने वालों के यहाँ रात बिताने की गुहार लगाते थे। ऐसा था 90 के दशक के बिहार का ‘जंगलराज’।

अब आप सोच रहे होंगे कि 25-30 साल पुरानी कहानी अब मैं क्यों सुना रहा हूँ, तो जानिए कि बिहार पर फिर सी उसी ताकत की काली साया मंडरा रही है, लेकिन थोड़ा रूप बदलकर। बिहार में जब से राजद के साथ नीतीश कुमार ने गठबंधन करके शासन शुरू किया है, तब से बिहार में वही ‘अपहरण उद्योग’ फिर से फलता-फूलता दिख रहा है। अपराधी हत्या जैसे वारदात को लगातार अंजाम दे रहे हैं।

राजधानी पटना से सटे बिहटा के कन्होली गाँव में एक शिक्षक के एकलौते बेटे को गुरुवार (16 मार्च 2023) को अपहरण कर लिया गया। अपहरणकर्ताओं ने शिक्षक से उसके बेटे के बदले 40 लाख रुपए की फिरौती माँगी है। अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी है कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो शिक्षक के बेटे की हत्या कर दी जाएगी।

शिक्षक का नाम राजकिशोर पंडित है। उनका एक ही बेटा है, जिसका नाम तुषार पंडित है। वह अपने घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। इसके बाद ह्वाट्सएप के जरिए परिजनों से 40 लाख रुपए की माँग की गई। हालाँकि, परिजनों ने इसकी शिकायत थाने में की है।

ठीक दो दिन पहले छपरा में एक स्थानीय नेता और प्रॉपर्टी डीलर सुनील राय नकाबपोश अपराधियों ने हथियार के बल पर अपहरण कर लिया था। इस घटना में 5 संदिग्धों के शामिल होने की बात कही जा रही है। वहीं, पुलिस ने इस मामले में SIT का गठन किया है।

इतना ही नहीं, 13 मार्च 2023 को लालू यादव के भतीजे नागेंद्र राय ने पटना के बिल्डर नितिन कुमार से 2 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी। इसके बाद बिल्डर ने एफआईआर दर्ज कराई। बिल्डर दानापुर-खगौल रोड स्थित जमीन पर एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बना रहा था। लालू यादव के भतीजे पर पहले से कई आपराधिक मामले लंबित हैं। वह अभी जमानत पर बाहर चल रहा है।

इसी तरह 4 मार्च 2023 को पटना में एक मोबाइल कंपनी के बड़े अधिकारी सुमन सौरभ को अपराधियों ने अपहरण कर लिया। इसके अगले दिन अपराधियों ने सुमन की माँ के पास ह्वाट्सएप मैसेज भेजकर 25 लाख रुपए की माँग की। उन्होंने धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो सुमन सौरभ की हत्या कर दी जाएगी।

हाल में आया सबसे सनसनीखेज मामला एक डॉक्टर के अपहरण का है। 3 मार्च 203 को पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में फार्मोकोलोजी विभाग के हेड डॉक्टर संजय कुमार का अपहरण कर लिया गया। संजय कुमार के साढ़ू UP में ADG लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार हैं। वहीं, उनकी साली डिंपल वर्मा IAS हैं।

अगर बिहार में ऐसे लोग सुरक्षित नहीं हैं तो एक आम आदमी की क्या बिसात है। बिहार के चंपा विस्वास कांड को लोग शायद ही भूले होंगे। बिहार में तैनात IAS अधिकारी बीबी विश्वास ने जब लालू यादव के करीबी राजद विधायक हेमलता यादव के बेटे मृत्युंजय यादव और उसके दोस्तों पर 2 साल में न सिर्फ उनकी पत्नी चंपा का, बल्कि उनके कई सम्बन्धियों का भी रेप करने का आरोप लगाया था। उसके बाद बिहार की राजनीति में कोहराम मच गया था।

सन 1983 के बॉबी हत्याकांड के बाद यह बिहार का सबसे बड़ा कांड था, जिसे छिपाने में पूरा प्रशासन लग गया था। चंपा विस्वास हर जगह अपनी फरियाद ले जाती रही, लेकिन तब केंद्रम में भी लालू यादव के प्रभावशाली होने के कारण उनकी कहीं नहीं सुनी गई थी। आईएएस होकर इतनी जलालत शायद ही किसी को झेलनी पड़ी होगी। ऐसा था बिहार का जंगलराज।

अक्सर ये सवाल पूछा जाता है कि जंगलराज एक शगूफा है, जिसे भाजपा एवं अन्य विपक्षी दलों ने गढ़ा है। हालाँकि, जो उस दौर को जीए हैं, वो भी इसे शब्दों में नहीं बयां कर सकते थे। शायद मुगल काल ऐसा ही रहा होगा, जहाँ लोगों को हर पल डर के साए में जीना पड़ता होगा।

सन 2019 में अमेरिका में स्वर्ग सिधारे रमेश चंद्रा के मित्र डॉक्टर अजय कुमार का कहना है कि उस समय अधिकारी के बजाय राजद का यादव गैंग काम करता था। यही लोग राज चलाते थे और लालू उनके संपर्क में रहते थे। उस समय राबड़ी मुख्यमंत्री भले थीं, लेकिन लालू यादव के इशारे के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता था। कहा जाता था कि हर अपहरण की वसूली के पैसे में सीएम हाउस तक हिस्सा जाता था।

लालू यादव उस दौरान अपने कैडरों वाले इलाकों में होने वाली रैलियों में अक्सर कहा करते थे, “मैं इसलिए तुम्हारे यहाँ रोड नहीं बनवा रहा हूँ कि पुलिस ना घुस पाए।” जाहिर है कि लालू यादव इशारों-इशारों और मजाक-मजाक में ही वो हकीकत कह दिया करते थे, जो उनके सियासत का आधार था। राजद के शासन में बिहार में हर तरफ अपराधियों को संरक्षण दिया, तो कई नेताओं को किनारे भी लगाया गया।

लालू के कार्यकाल में विधायक अजीत सरकार, विधायक देवेंद्र दुबे, बीपीपा उम्मीदवार छोटन शुक्ला और मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की खुलेआम हत्या कर दी गई। यही नहीं, राज्य में जाति हिंसा को खूब बढ़ावा दिया गया। कहा जाता है कि CPI-ML पर कार्रवाई के बाद उसे नीचे करके MCC को उभारा गया और राजद सरकार ने MCC के हर लेवल पर अपने लोगों को बैठवाया। आज भी बिहार में यादव गैंग के आतंक के आगे लोग इसलिए हथियार डाल दे रहे हैं, क्योंकि घुम-फिरकर उनके माओवादी नक्सली MCC से जुड़ाव सामने आ जाता है।

राजद के जंगलराज में जातीय हिंसा अपने चरम पर थी। लालू यादव ने खुलेआम भूरा बाल (भूमिहार, राजपूत, बाभन, लाला) को साफ करने का ऐलान किया था। वो खुद को शोषितों का मसीहा साबित करने के लिए कथित उच्च जातियों पर खूब जुल्म किए। ईचरी, सेनारी, लक्ष्मणपुर बाथे जैसे नरसंहार को अंजाम दिया जाता था। लोगों की जमीनों पर जबरन झंडा गाड़कर कब्जा करने की कोशिश की जाती थी और विरोध करने वालों को गोली मार दी जाती थी।

लालू और राबड़ी यादव के शासन में तो लालू के सालों- साधु यादव और सुभाष यादव के आंतक से पूरा बिहार परेशान था। कहा जाता है कि लालू यादव की एक बेटी की शादी के दौरान साधु यादव से एक कार शोरूम से जबरन कई कार उठवा लिए थे। इसी तरह साल 2001 में लालू के साले साधु और उनके आदमियों ने IAS अधिकारी एनके सिन्हा पर बंदूक भिड़ा दी और जबरन एक ऑर्डर पास करवा लिया था।

लालू के सबसे मजबूत साथियों में से एक कुख्यात शहाबुद्दीन को कौन भूल सकता है। शहाबुद्दीन खुलेआम हत्याएँ और रंगदारी वसूल करता था और उसे रोकने वाला कोई नहीं था। बिहार में हुई हत्याओं का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2000 से 2005 के बीच, सिर्फ पांच साल में ही 18,189 हत्याएँ हुईं। इस हिसाब से 15 सालों में 50,000 से अधिक हत्याएँ हुईं। वहीं, 1992 से 2004 तक बिहार में अपहरण के 32,085 मामले सामने आए।

एक बार फिर बिहार में सत्ता राजद के पास जाते ही यही खूनी खेल शुरू हो गया है। अपहरण की कई कहानियाँ तो हमने ऊपर बता ही दिया। छपरा के मुबारकपुर में एक राजद नेता के संरक्षण में रहने वाला विजय यादव नाम का एक मुखिया के पति ने अपने ही गाँव के तीन लोगों को पकड़ कर इतना मारा कि तीनों की बाद में मौत हो गई। तीनों लड़के सवर्ण जाति से थे। इस तरह की छिटपुट घटनाएँ बिहार में हर तरफ हैं, लेकिन 90 के दशक को देखने वाले लोग ही इसे समझ पा रहे हैं। लालू-राबड़ी भले चेहरा नहीं है, लेकिन तेजस्वी और उनका कैडर अब भी वही है।