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‘जो मर गए हैं उनकी भी हाजिरी लगाओ, अरब से मुस्लिमों को बुलाओ’: कॉन्ग्रेस नेता उस्मान हिरोली ने कहा – मोदी से जंग जीतने का यही तरीका

महाराष्ट्र में 2 विधानसभा सीटों पुणे के कसबा और पिंपरी चिंचवड़ के चिंचवड़ सीट के लिए उपचुनाव होने हैं, जिसे लेकर चुनाव प्रचार थम चुका है। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कॉन्ग्रेस नेता उस्मान हिरोली ने सभा को संबोधित करते हुए विवादास्पद बयान दे दिया। उस्मान ने कहा कि जो लोग मर गए हैं उनसे भी वोटिंग करवाओ, तभी मोदी और आरएसएस को हरा पाएँगे। उपचुनाव को उन्होंने जंग करार देते हुए बड़ी संख्या में मुस्लिमों को वोट देने की अपील की।

उस्मान हिरोली ने एनसीपी की चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुस्लिम चाहे जहाँ कहीं भी हैं – सउदी हों, दुबई हों या कुवैत में हों, उन्हें बुलाकर वोटिंग करवाओ। जो लोग फौत (मृत्यु) हो गए हैं उनको भी 26 फरवरी को हाजिर कीजिए और वोट डलवाइए। कॉन्ग्रेस नेता ने उपचुनाव को जंग करार देते हुए कहा कि हमलोग यह जंग तभी जीत सकते हैं और आरएसएस-मोदी को हरा सकते हैं जब हम एक होकर वोट करेंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 99 फीसद भी नहीं बल्कि 100 फीसद वोटिंग करवानी है।

महाराष्ट्र बीजेपी की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता के इस बयान को ध्रुवीकरण की कोशिश और पीएम मोदी का अपमान बताया है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे सांप्रदायिक बयान करार देते हुए कहा कि इससे ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिलता है। महाराष्ट्र भाजपा के उपाध्यक्ष माधव भंडारी ने कसबा विधानसभा क्षेत्र में हिंदू मतदाताओं को एक होने की बात कही है। उन्होंने हिरोली का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि कसबा के हिंदू मतदाता एक होकर अपनी ताकत दिखाएँ।

भंडारी ने आगे लिखा कि पीएम मोदी को हराने के लिए दुबई और सऊदी से वोटरों को लाओ। इतना ही नहीं जो वोटर जिंदा नहीं है उन्हें भी वोट डालने के लिए लाओ। चुनाव आयोग और प्रशासन को इन बयानों पर कार्रवाई करनी चाहिए। बता दें कि पुणे के कसबा पेठ और पिंपरी-चिंचवाड़ विधानसभा के लिए रविवार (26 फरवरी, 2023) को वोटिंग कराई जाएगी।

‘आत्महत्या करने वाले अधिकतर छात्र दलित और आदिवासी, भेदभाव है कारण’: CJI चंद्रचूड़ ने कहा- जज समाज की सच्चाई से दूर नहीं भाग सकते

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ((CJI DY Chandrachud) ने शनिवार (25 फरवरी 2023) को कहा कि हाशिए पर रहने वाले वर्गों के छात्रों के बीच आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि शोध से पता चला है कि आत्महत्या करने वाले ऐसे ज्यादातर छात्र दलित और आदिवासी समुदायों के हैं। यह मामला संवेदनाओं की कमी से जुड़ा है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आत्महत्या की ऐसी घटनाएँ भेदभाव के कारण हो रही है। उन्होंने कहा, “प्रोफेसर सुखदेव थोराट ने नोट किया है कि आत्महत्या करने वाले अधिकांश छात्र दलित और अदिवासी हैं। जब इसमें एक पैटर्न दिखे तो हमें सवाल उठाना चाहिए। 75 वर्षों में हमने प्रतिष्ठित संस्थान बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन इससे अधिक हमें संवेदना विकसित करने वाले संस्थान बनाने हैं। मैं इस पर इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि भेदभाव का मुद्दा सीधे तौर पर सहानुभूति की कमी से जुड़ा है।”

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, “हाल ही में मैंने आईआईटी बॉम्बे में एक दलित छात्र की आत्महत्या के बारे में पढ़ा। इस घटना ने मुझे पिछले साल के ओडिशा में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एक आदिवासी छात्र की आत्महत्या के बारे में याद दिला दिया।” बता दें कि दर्शन सोलंकी नाम के एक स्टूडेंट ने 12 फरवरी को आईआईटी बॉम्बे में आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने कहा कि वह वकीलों और स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीश सामाजिक वास्तविकताओं से दूर नहीं भाग सकते हैं। CJI ने इसके लिए अमेरिका का भी उदाहरण दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के नौ न्यायाधीशों ने ब्लैक लाइव्स आंदोलन के दौरान एक बयान जारी किया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “दुनिया भर में न्यायिक संवाद के उदाहरण आम हैं। जब जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन उभरा तो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सभी 9 न्यायाधीशों ने ब्लैक लाइव्स के पतन को लेकर संयुक्त बयान जारी किया। हार्वर्ड लॉ स्कूल के प्रोफेसर का कहना है कि लोग भूल जाते हैं कि नागरिक अधिकारों के वकीलों ने काले समुदाय को शिक्षित करने का क्या काम किया था।”

CJI चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि वह अपने न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के अलावा समाज के विभिन्न संरचनात्मक मुद्दों पर भी प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के छात्रों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को रोकने की दिशा में पहला कदम प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रावास के कमरे के आवंटन को रोकना होगा। इससे जाति आधारित अलगाव होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक श्रेणियों के साथ छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों की सूची डालना, दलित और आदिवासी छात्रों को अपमानित करने के लिए सार्वजनिक रूप से अंक माँगना, उनकी अंग्रेजी दक्षता का मजाक बनाना और उन्हें अक्षम के रूप में लेबल करने जैसी प्रथाएँ समाप्त होनी चाहिए।

CJI ने कहा, “दुर्व्यवहार और डराने-धमकाने की घटनाओं पर कार्रवाई नहीं करना, समर्थन नहीं करना, फेलोशिप समाप्त करना, चुटकुलों के माध्यम से रूढ़िवादिता को सामान्य करना ऐसी कुछ बुनियादी चीजें हैं जिन्हें हर शैक्षणिक संस्थान को बंद करना चाहिए।”

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ नेशनल को एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद (NALSAR) के 19वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य वक्ता पर आमंत्रित किया गया था। यहीं पर उन्होंने अपने विचार रखे।

दिल्ली दंगों में कट्टर मुस्लिम भीड़ ने जिन विनोद कुमार को मार डाला, उन्हें कोर्ट की सुनवाई भी नसीब नहीं: आर्थिक तंगी में 2 छोटे बच्चे

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को आप भूले नहीं होंगे, जब हिन्दुओं को चुन-चुन कर मारा गया था। कट्टर मुस्लिमों की भीड़ हथियारों के साथ सड़क पर थी। तब AAP का पार्षद रहा ताहिर हुसैन दंगाइयों का नेतृत्व कर रहा था। उसने अपने घर को दंगाइयों के लिए लॉन्चिंग पैड बना दिया था। JNU वाले उमर खालिद जैसों ने CAA-NRC के नाम पर हिन्दू घृणा फैलाई। इन दंगों में मरने वालों में एक विनोद कुमार भी थे।

विनोद कुमार की जब हत्या की गई, उस समय उनके बेटे नितिन उर्फ़ मोनू भी उनके साथ थे। पिता की बेरहमी से हुई हत्या के बाद परिवार चलाने की पूरी जिम्मेदारी अब नितिन के कंधों पर आ टिकी है। 3 साल बीतने के बावजूद ये घाव अब तक भरा नहीं है। परिवार को खासा दुःख होता है, जब उन्हें पता चलता है कि फलाँ आरोपित जमानत पर छूट गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। उनका एक बेटा 7 साल का है, तो दूसरा 2 साल का।

ऑपइंडिया ने परिवार की स्थिति को समझने के लिए दिवंगत विनोद कुमार के बेटे मोनू से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनका डीजे वाला काम पहले जैसा ही चल रहा है, सब कुछ लगभग सामान्य ही है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि महीने में इस काम से 5-7 हजार रुपए से ज़्यादा नहीं निकल पाते हैं। नितिन के घर में आय का कोई और स्रोत नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके पिता जब ज़िंदा थे तो इनकम को लेकर उतनी दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब सारी जिम्मेदारियाँ उन पर आन पड़ी हैं।

नितिन का बड़ा बेटा पहली कक्षा में पढ़ता है। छोटे बेटे की पढ़ाई-लिखाई अभी घर पर ही चल रही है। घर में 4 लोग हैं, जो नितिन पर निर्भर हैं। नितिन ने ये भी बताया कि अदालत में उनके पिता के हत्याकांड से संबंधित सुनवाइयों में भी उन्हें नहीं बुलाया जाता है। उन्हें कहा जाता है कि हम कॉल करेंगे और आप उस दिन कोर्ट आना, लेकिन फिर किसी का फोन कॉल उन्हें आता ही नहीं। पिछले 3 वर्षों में वो एक भी सुनवाई में अदालत नहीं गए हैं।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में थाने में उन्हें बुलाया गया था और कुछ पुलिस वाले घर पर भी आए थे, लेकिन पिछले 1 साल से कोई नहीं आया। उन्हें ये तक नहीं पता है कि उनके पिता के हत्यारों में से कितने लोग जमानत पर बाहर हैं और कितने लोग जेल में। कोरोना के दौरान पुलिस ने उन्हें आरोपितों की गिरफ़्तारी की बात बताई थी। नितिन को एक आरोपित की जमानत की सूचना है। नितिन के परिवार को उस कांड के बाद से धमकी वगैरह तो नहीं मिली, लेकिन वो कहते हैं कि अभी भी डर बना हुआ है।

दिवंगत विनोद कुमार के बेटे ने कहा कि उनका डीजे का कारोबार होने के कारण स्थानीय स्तर कई लोग उन्हें जानते हैं और मुस्लिमों की जनसंख्या वहाँ ज्यादा है। कई मुस्लिम भी उनके पास डीजे के लिए आते हैं। हालाँकि, नितिन मुस्लिमों को डीजे नहीं देते, न ही उनके इलाकों में डीजे लगाते हैं। उन्होंने कहा कि कमाने वाले वो घर में अकेले ही हैं और उन्हें अपनी जान का डर रहता है, ऐसे में मुस्लिमों को डीजे देना उनके लिए खतरे से खाली नहीं है।

दिल्ली के ब्रह्मपुरी में विनोद कुमार की मुस्लिम भीड़ ने पीट-पीट कर की थी हत्या

जब उनके पिता की हत्या हुई थी, तब नितिन को भी 5 दिन अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती रहना पड़ा था। चूँकि उनके सिर में जख्म आए थे, इसीलिए कई टाँके लगे थे। नितिन इस चीज के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं कि घर में किसी की तबीयत ख़राब नहीं हुई और अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। पिछले 1 साल से कोई नेता-अधिकारी उन्हें पूछने तक नहीं आया। मृत्यु के बाद जो मुआवजा मिला, उसके बाद से रक रुपया भी नहीं मिला।

नितिन ने सरकार से माँग की है कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए, बल्कि अपने लिए नौकरी चाहिए और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था की जाए। उन्होंने बताया कि एक फॉर्म उनसे भरवाया गया था, लेकिन उसके बाद कोई पैसे नहीं मिले। MCD चुनाव के दौरान भी किसी भी पार्टी का नेता उन्हें पूछने तक नहीं आया। नितिन को अपने बच्चों के अच्छे स्कूल में एडमिशन की चिंता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता की हत्या करने वालों में अधिकतर ऐसे मुस्लिम थे जो बाहर से आए थे।

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‘अपने बाप का सम्मान नहीं कर पाए’: सदन में CM योगी ने अखिलेश यादव की ले ली क्लास, कहा – माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे

शनिवार (25 फरवरी, 2023) को उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच नोकझोंक हो गई। विधानसभा में उमेश पाल मर्डर मामले पर बहस के दौरान यह नोकझोंक हुई। सीएम योगी ने कहा कि सपा सरकार द्वारा माफियाओं को संरक्षण दिया गया उन्हें विधायक और एमपी बनाया गया। बहस के दौरान सीएम योगी ने कहा कि माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे।

विधानसभा की कार्रवाई शुरू होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रख रहे थे। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज में हुए उमेश पाल और उनके गनर के मर्डर मामले की चर्चा छेड़ते हुए यूपी में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया। इसपर सीएम योगी ने सदन को दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ सीएम योगी ने बिना नाम लिए सपा पर निशाना साधा।

सीएम योगी ने पूछा कि अपराधी और माफिया किसके पाले हुए हैं? इसके बाद सदन में हंगामा हो गया। सीएम योगी ने कहना जारी रखा, “प्रयागराज की घटना में जिस माफिया का नाम आ रहा है क्या यह सच नहीं कि समाजवादी पार्टी ने उसे सांसद बनाया था। एक तरफ आप अपराधियों को संरक्षण देंगे उनको माल्यार्पण करेंगे दूसरी तरफ दोषारोपण भी करेंगे। ” सीएम योगी ने आगे कहा कि वह समाजवादी पार्टी द्वारा पोषित माफिया है। हमारी सरकार ने उसकी कमर तोड़ दी है। इन माफियाओं को हम मिट्टी में मिला देंगे।

भाषण के बीच में अखिलेश की टोका-टाकी से नाराज सीएम योगी ने सपा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये लोग पेशेवर अपराधियों के सरपरस्त हैं। इनके रग-रग में अपराध भरा हुआ है। अपराध के अलावा इन्होंने कुछ सीखा ही नहीं है। सीएम योगी ने मुलायम सिंह के “लड़कों से गलती हो जाती हैं” वाले बयान का जिक्र किया। इस पर अखिलेश ने कहा कि यह भी बताएँ चिन्मयानंद किसका गुरु है, शर्म आनी चाहिए। जिसपर योगी आदित्यनाथ ने पलटवार करते हुए कहा कि शर्म तो तुम्हें करनी चाहिए जो अपने बाप का सम्मान नहीं कर पाए।

इसके बाद सदन में हंगामा होने लगा। भाजपा और सपा के नेता आमने सामने आ गए। स्पीकर ने दोनों पक्षों को शान्त कराया। इसके पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के भाषण के दौरान सपा नेताओं द्वारा हंगामा करने को लेकर उन्हें घेरा। सीएम ने कहा जो लोग अभिभाषण पढ़ रहीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का सदन में सम्मान नहीं करते वे महिलाओं का सम्मान कैसे करेंगे।

प्रयागराज हत्याकांड जिसे लेकर विधानसभा में हंगामा हुआ

बता दें कि शुक्रवार 24 फरवरी को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड के प्रमुख गवाह उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप मिश्रा की भी मौत हो गई जबकि दूसरे गनर राघवेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। राजू पाल की हत्या का आरोप गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई पर है। जिस समय हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय उमेश पाल कोर्ट से गवाही देकर घर लौटे थे।

‘हमने बहुत कमाया…अब अपनों को देने का समय’: अनुपम खेर ने कश्मीरी पंडितों को दिए ₹5 लाख, बोले- आर्टिकल 370 हटने से हुआ सुधार

बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार अनुपम खेर ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ के रिलीज होने के एक साल के बीच ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अपनी ओर से कश्मीरों को 5 लाख रुपए की सहायता देने का ऐलान किया। उन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद कहा कि घाटी में काफी सुधार हुआ है।

ग्लोबल कश्मीरी पंडित कॉन्क्लेव में अनुपम खेर ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर बात करते हुए कहा, “द कश्मीर फाइल्स में कश्मीरी पंडितों की समस्याओं को दिखाया गया है। हमने बहुत कुछ कमाया है। हम उन विदेशी संगठनों को दान देते हैं जो पहले से ही समृद्ध हैं। अब अपनों को दान देना जरूरी है। मैं 5 लाख रुपए देने का वादा करता हूँ।”

उल्लेखनीय है कि साल 2022 में रिलीज हुई द कश्मीर फाइल्स ने पूरे भारत से लेकर विदेशों तक में काफी सुर्खियाँ बटोरीं थी। इस दौरान अनुपम खेर भी फिल्म का प्रमोशन करने में और कश्मीरी पंडितों से मिलकर उनका दुख बाँटने में कहीं पीछे नहीं थे। फिल्म रिलीज के दौरान उन्हें कश्मीरी पंडितों से मिलते, उन्हें सहारा देते, उनकी बातें सुनते कई बार देखा गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी कई तरह से कश्मीरी पंडितों की पीड़ा बताने और समझाने के प्रयास किए थे।

इसके अलावा जब नादव लैपिड जैसे लोग कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को मजाक बनाते दिखाई दिए थे तब भी अनुपम खेर ने उन्हें लताड़ लगाई थी। उन्होंने कहा था, “लोगों को सच जैसा है उसे वैसा देखने और दिखाने की आदत नहीं होती। वो उस पर अपनी मनपसंद खुशबू, अपना मनपसंद जायका, अपने मनपसंद रंग लेप कर, सजा कर देखने के आदी होते हैं। उन्हें कश्मीर का सच पच नहीं रहा है। वे चाहते हैं कि उसे किसी रंगीन और खुशनुमा चश्मे से देखा और दिखाया जाए। पिछले 25-30 साल से वे यही करते आए हैं। आज जब ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने सच को जैसा है वैसा दिखाकर पेश किया, तो उन्हें तकलीफ हो रही है।

अब REET-मेंस का पेपर हुआ लीक, 10 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में: कॉन्स्टेबल भर्ती से लेकर मेडिकल तक, पेपर लीक का हब बना राजस्थान

राजस्थान में पेपरलीक आम घटना सी हो गई है। अब REET-मेंस (शिक्षक भर्ती परीक्षा) का पेपर लीक हो गया है। राजस्थान में शनिवार (25 फरवरी 2023) से शुरू हुई 48,000 पदों के लिए REET-मेंस परीक्षा का पेपर सॉल्व करते हुए जोधपुर में एक गिरोह को दबोचा गया है। इससे पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग का पेपर लीक हुआ था।

जोधपुर में पकड़ा गया गिरोह बनाड़ क्षेत्र के एक मैरिज गार्डन में पेपर सॉल्व कर रहे था। इसके लिए तीन कमरे बुक किए गए थे। पकड़े गए सभी लोग इस भर्ती परीक्षा के कैंडिडेटस हैं। इनमें 19 लड़के और 10 लड़कियाँ हैं। पुलिस ने लगभग तीन दर्जन अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसके बाद उन सभी को परीक्षा केंद्र ले जाया गया। 

इन अभ्यर्थियों को बालसमंद स्कूल के परीक्षा केंद्र पर कुछ अभ्यर्थियों को पुलिस सुरक्षा में परीक्षा केंद्र पर लाए जाने के दौरान हंगामा हो या। परीक्षा केंद्र के उम्मीदवारों का कहना है कि केंद्र पर प्रवेश के लिए 1 घंटे पहले तक एंट्री निर्धारित की गई थी, लेकिन निर्धारित समय के बाद अभ्यर्थियों को ले जाया गया। इसके कई वीडियो भी सामने आए हैं।

इस परीक्षा में लगभग 10 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए हैं। परीक्षार्थियों के लिए ड्रेेसकोड भी निर्धारित की गई है। जोधपुर के घटनाक्रम पर कर्मचारी चयन बोर्ड के चेयरमैन हरिप्रसाद शर्मा ने कहा है कि अभी पेपर लीक जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है, अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

बता दें कि इससे 6 दिन पहले हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की परीक्षा लीक हो गई थी। इसके बाद इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। इसकी जाँच एसओजी को दी गई है। यह परीक्षा राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से 19 फरवरी को तीन शहरों में आयोजित की गई थी। परीक्षा का नाम था सीएचओ था और इसमें करीब 85 हजार अभ्यर्थी बैठे थे।

इससे भी पहले शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे। इस परीक्षा के लिए 24 दिसंबर 2022 को सुबह 9 बजे से 11 बजे तक परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा शुरू होने के पहले ही सामान्य ज्ञान का पेपर आउट हो गया। उदयपुर में पुलिस ने एक निजी बस में सवार पेपर सॉल्व करते हुए लोगों को देखा। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने बरामद पेपर का मिलान किया तो यह असली पेपर का नकल था। इसके बाद मामले की जानकारी राजस्थान लोक सेवा आयोग को दी गई और आयोग ने परीक्षा को निरस्त कर दिया। इसके बाद पुलिस पेपर लीक माफियाओं को पकड़ने में लग गई।

पेपर लीक के कई माफिया बताए गए। इनके स्थानीय नेताओं से भी संपर्क की बात कही गई। इन्हीं माफियाओं में से एक सुरेश ढाका को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यह कई नेताओं का नजदीकी बताया है। जयपुर में गुर्जर की थड़ी पर कोचिंग चलाने वाला ढाका दो बार पहले भी जेल जा चुका है। इसमें से एक मामला मनी लॉन्ड्रिंग का है।

इस मामले के सरगना भूपेन्द्र सारण को पुलिस ने शुक्रवार (24 फरवीर 2023) को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया है। इस पर एक लाख रुपए का ईनाम था। इसके कोचिंग इंस्टीट्यूट को भी गिरा दिया गया था। सारण ने बताया कि सरकारी स्कूल में शिक्षक शेरसिंह मीणा ने उससे 40 लाख रुपए में पेपर खरीदा था। इसके बाद वह 5-5 लाख रुपए लेकर परीक्षार्थियों को बेचा था।

कॉन्ग्रेस शासन में कब-कब पेपर हुए लीक

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्य में कॉन्ग्रेस (Congress) की सरकार है। इस सरकार में शायद ही ऐसा कोई एक्जाम बचा हो, जिसका पेपर लीक ना हुआ हो। राजस्थान में बड़े-बड़े माफिया गिरोह हैं, इन परीक्षाओं के पेपर लीक करने में संलिप्त हैं। नीचे दिए गए कुछ प्रमुख परीक्षाएँ हैं, जिसका पेपर अशोक गहलोत के शासन काल में लीक हुईं।

11 मार्च 2018 को कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था इस परीक्षा को 17 मार्च को परीक्षा रद्द कर दिया गया था।

लाइब्रेरियन भर्ती परीक्षा 2018 का आयोजन 29 दिसंबर 2019 को हुआ था। इसका पेपर लीक भी लीक हो गया था और बाद में परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।

JEN सिविल डिग्रीधारी भर्ती परीक्षा 2018 का आयोजन 6 दिसंबर 2020 को हुआ था। इस परीक्षा के पेपर को लेकर एसओजी ने रिपोर्ट दी थी। इसके बाद बोर्ड ने इसे रद्द कर दिया था।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने रीट लेवल 2 परीक्षा 2021 की परीक्षा 26 सितंबर को आयोजित की थी। इसका पेपर लीक हुआ और करीब 4 महीने बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया।

बिजली विभाग टेक्निकल हेल्पर भर्ती परीक्षा 2022 को ऑनलाइन आयोजित किया गया था। परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद 6 केंद्रों की परीक्षा रद्द कर दी गई थी।

राजस्थान पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2022 का आयोजन 14 मई 2022 को किया गया था। दूसरी पाली का पेपर लीक हो गय था।

राजस्थान वनरक्षक भर्ती परीक्षा 2020 का आयोजन राजस्थान चयन बोर्ड ने 12 नवंबर 2022 को किया था। इसका पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

राजस्थान हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा 2022 का पेपर भी लीक हो गया था। बाद में इसे भी रद्द कर दिया गया था।

सेकंड ग्रेड 2022 का पेपर लीक होने की वजह से रद्द कर दिया गया था।

मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की गई थी। इसका पेपर भी लीक हो गया था।

दिसंबर 2022 में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तहत ली जाने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ। इसे भी रद्द करना पड़ा।

सीएचओ की परीक्षा का आयोजन 19 फरवरी 2023 को किया गया। इसका भी पेपर लीक हुआ।

दिल्ली के ITO में मंदिर और मस्जिद किए जाने के दौरान प्रदर्शन: PWD ने की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला

दिल्ली में आईटीओ (ITO) के पास केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (PWD) की तरफ से अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही कार्रवाई के दौरान एक मस्जिद और एक मंदिर को भी गिरा दिया गया। पीडब्ल्यूडी की इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया लेकिन पीडब्ल्यूडी का एंटी एनक्रोचमेंट ड्राइव जारी रहा।

दिल्ली के आईटीओ इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू करने से पहले PWD की तरफ से अतिक्रमणकारियों को नोटिस दी गई थी। विभाग की तरफ से अतिक्रमण स्थल पर सूचना पट्ट (होर्डिंग) भी लगाई गई थी। होर्डिंग में लिखा था कि यह भूमि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की है। इस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण दण्डनीय अपराध है। यह होर्डिंग कार्यपालक अभियंता के आदेश पर लगवाई गई थी।

रास्ते पर से अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट की तरफ से आदेश दिए गए थे। इसके बाद यह कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान रास्ते पर स्थित मंदिर और मस्जिद को भी गिरा दिया गया। अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान मलबों को भी फौरी तौर पर हटा लिया गया। बता दें कि दिल्ली में दिल्ली विकास प्रधाकिरण (Delhi Development Authority) की तरफ से भी अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

डीडीए की तरफ से महरौली इलाके में पाँच दिनों तक एंटी एनक्रोचमेंट ड्राइव चलाया गया था। इस दौरान सैकड़ों घरों को गिरा दिया गया था। मुहिम का स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था। लोगों के विरोध को देखते हुए दिल्ली के एलजी विनय सक्सेना ने डीडीए को महरौली और लाडो सराय गाँव में जारी अतिक्रमण विरोधी अभियान रोकने के आदेश दिए। हाईकोर्ट ने हेरिटेज और स्मारकों के आस पास किसी तरह की अवैध अतिक्रमण या अनाधिकृत कब्जे को हटाने के आदेश दिए हुए हैं।

पैने चाकुओं से किया वार, शीशे हुए चकनाचूर: हैदराबाद यूनिवर्सिटी में भिड़े SFI और ABVP के छात्र, 8 घायल

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में यूनियन इलेक्शन खत्म होने के बाद वहाँ एसएफआई और एबीवीपी के छात्रों के बीच झगड़ा हो गया। घटना लड़कों के होस्टल में देर रात घटी। हाथापाई में 8 छात्र घायल हुए हैं। इसके अलावा होस्टल के शीशे के दरवाजे और कई छात्रों की साइकिल भी टूटी मिली।

एबीवीपी का आरोप है कि SFI के छात्रों ने ABVP के आदिवासी छात्रों के खिलाफ पहले हिंसा की और उन पर हमला करने के लिए धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल किया। वहीं एसएफआई का कहना है कि पूरी लड़ाई एबीवीपी छात्रों ने शुरू की थी।

एसएफआई छात्रों का दावा है कि, एबीवीपी वाले काफी समय से SFI-AISA-DSU के इलेक्शन पोस्ट फाड़ रहे थे, जिसका उन्हें पता था लेकिन कल उन्होंने ऐसा करते समय एक एबीवीपी के छात्र को पकड़ लिया। आरोप है कि वो छात्र नशे की हालत में था जिसने पहले खुद को शीशे से मारा और फिर चोट लगने पर हंगामा करके अन्य एबीवीपी के छात्रों को इकट्ठा कर हंगामा किया।

सामने आई तस्वीरों में शीशे के टूटे गेट और चोटिल छात्र साफ देखे जा सकते हैं। एबीवीपी के नेशनल सेक्रेट्री हरिकृष्णा नगौथू ने कहा है कि छात्रों पर पैने चाकुओं से हमला हुआ। उन्हें चाहिए कि सिर्फ गुंडों को सजा दी जाए ताकि न्याय हो सके।

इसी तरह एसएफआई के तेलंगाना यूनिट ने कहा है एबीवीपी वालों को गुंडा कहा है। उनका कहना है कि केवल सवाल पूछे जाने पर मारपीट शुरू हुई और फिर कमरे में घुस-घुस कर कॉमरेडों को मारा गया। उनके अनुसार आकाश नाम का एक साथ गंभीर रूप से घायल है जिसका आईसीयू में इलाज चल रहा है।

घात लगाए नक्सलियों ने कर दिया हमला, छत्तीसगढ़ में 3 जवान बलिदान: गोलीबारी के साथ-साथ बम धमाके भी, सुकमा में गश्ती के लिए निकली थी टीम

छत्तीसगढ़ के सुकमा में शनिवार (25 फरवरी, 2023) को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप ) के 3 जवान बलिदान हो गए हैं। इसके बाद राज्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। इस हमले में दो जवान घायल भी हुए हैं। सुबह के समय ये मुठभेड़ जगरगुंडा के आश्रमपारा इलाके में हुई है। दोनों तरफ से इस दौरान ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। साथ ही बम धमाकों की आवाज़ भी सुनी गई।

ये घटना तब हुई, जब सुरक्षा बलों के जवान तलाशी के लिए गश्ती अभियान पर निकले थे। इसी दौरान घात लगाए नक्सलियों ने उन्हें देख कर फायरिंग शुरू कर दी। मृतकों में ASI रामूराम नाग, सहायक कॉन्स्टेबल कुंजम जोगा और सैनिक वंजम भीमा हैं। इलाके के कुंदेड़ इलाके में नया कैम्प स्थापित किया गया है, जहाँ से ‘एरिया डोमिनेशन’ अभियान के लिए जवानों की टीम निकली हुई थी। सुबह के लगभग 9:30 बजे ये मुठभेड़ थमा।

घटना की सूचना मिलते ही बैकअप पार्टी को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया। क्षेत्र में और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। घायलों के इलाक़ सुकमा के सदर अस्पताल में चल रहा है। नक्सलियों की गोलीबारी के जवानों ने त्वरित रूप से जवाबी फायरिंग कर तगड़ा जवाब दिया था। इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने की भी संभावना है, लेकिन अभी तक उनकी डेड बॉडी रिकवर नहीं हुई है। घायलों को बेहतर इलाज के लिए हैलीकॉप्टर से जगदलपुर या रायपुर भेजा जा सकता है।

आसपास के इलाकों में गश्ती भी बढ़ा दी गई है। एसपी सुनील कुमार ने 8-10 नक्सलियों के मारे जाने की बात बताई है। हालाँकि, उन्होंने जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की बात नकार दी है। सुबह के लगभग 9 बजे शुरू हुई ये मुठभेड़ आधे घंटे तक चली और रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही। सीएम भूपेश बघेल ने घटना पर बयान जारी कर कहा, “बस्तर के सुकमा जिले के जगरगुंडा में नक्सली मुठभेड़ के दौरान हमारे 3 वीर जवानों की शहादत का समाचार दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवारजनों को हिम्मत दे। इस दुख में हम सब साथ हैं। उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।”

औरंगाबाद बना छत्रपति संभाजीनगर, उस्मानाबाद कहलाएगा धाराशिव: नाम बदलने के लिए केंद्र ने दी मंजूरी, बाला साहेब ने सबसे पहले उठाई थी माँग

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सरकार (Maharashtra CM Eknath Shinde) ने शुक्रवार (24 फरवरी 2023) को कहा कि अब औरंगाबाद को छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद को धाराशिव कहा जाएगा। महाराष्ट्र सरकार के नाम बदलने के प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे राज्य सरकार की एक उपलब्धि कहा। वहीं, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। ट्विटर पर सीएम शिंदे ने कहा, “औरंगाबाद का नाम ‘छत्रपति संभाजीनगर’, उस्मानाबाद का नाम ‘धाराशिव’! केंद्र सरकार राज्य सरकार के फैसले को मंजूरी दे दी है! माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी और केंद्रीय गृहमंत्री माननीय अमितभाई शाह को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन दोनों शहरों के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कहा कि इससे उसे कोई आपत्ति नहीं है। बता दें कि औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव को महाराष्ट्र सरकार ने लगभग एक साल पहले केंद्र सरकार को भेजा था।

औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने की माँग सबसे पहले दिवंगत शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने की थी। उसके बाद यह शिवसेना इसको लेकर वर्षों से माँग उठाती रही। महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने पद से इस्तीफा देने से पहले जून 2022 में महाविकास अघाड़ी सरकार में इन शहरों का नाम बदलने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव पास रखा था।

उद्धव सरकार के इस प्रस्ताव को अवैध बताते हुए 16 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दो सदस्यीय कैबिनेट ने नामों को बदलने का सरकारी प्रस्ताव पारित किया था। उसके बाद इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा था। शिवसेना और भाजपा की गठबंधन वाली सरकार ने कहा था कि उद्धव ठाकरे की सरकार अल्पमत में थी, इसलिए उनका यह फैसला अवैध था।

पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा था कि क्या उसने दोनों शहरों के नाम बदलने का फैसला करने से पहले आपत्तियाँ और सुझाव माँगे थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को यह दिखाने का भी निर्देश दिया कि नामों में बदलाव को लेकर राज्य सरकार ने प्रस्ताव पेश किया है या नहीं।

इन दोनों शहरों के इस्लामी नाम को बदलने के फैसले का ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने विरोध किया है। औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) से AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “औरंगाबाद हमारा शहर है, आपका नहीं मिस्टर सीएम।”

धमकी वाले अंदाज में जलील ने आगे कहा, “औरंगाबाद हमारा शहर है, था और हमेशा रहेगा। अब औरंगाबाद के लिए हमारे शक्ति प्रदर्शन का इंतजार कीजिए। हमारे प्यारे शहर के लिए एक विशाल मोर्चा बनेगा! हमारे शहर के नाम पर राजनीति करने वाली इन ताकतों (भाजपा) को हराने के लिए औरंगाबादियों तैयार हो जाओ। हम इसकी निंदा करते हैं और हम लड़ेंगे।”

बता दें कि छत्रपति संभाजी महाराष्ट्र के शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े पुत्र थे। मुगल आक्रांता औरंगजेब ने 17वीं शताब्दी में औरंगाबाद शहर पर कब्जा कर लिया था और उसका नाम बदलने का आदेश दिया था। इसके बाद औरंगजेब की मौत के बाद उसका नाम औरंगाबाद कर दिया गया था।

वहीं, उस्मानाबाद का नाम हैदराबाद के अंतिम निजाम मीर उस्मान अली खान के नाम पर रखा गया था। यह शहर भी कभी निजाम के कब्जे में था। अब इस शहर को नया नाम धाराशिव दिया गया है। यह नाम शहर के पास स्थित छठी शताब्दी की गुफाओं से लिया गया है।