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भारत में विदेशी वस्तुओं का दहन करने वाले पहले नेता थे वीर सावरकर, तब गाँधी ने भी किया था विरोध: छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने साथियों संग ली थी शपथ

साल 1904 का था, जब सावरकर साहब अलग-अलग केंद्रों पर स्थापित की गई गुप्त सभाओं से संपर्क करते हैं। उनको दिख जाता है कि सुदृढ़ नेतृत्व के बिना गुप्त सभाओं के सभी सदस्य शिथिल हो चुके हैं। आगे आने वाले समय के लिए वो स्वयं इन सभी को संगठित करने का बीड़ा उठा लेते हैं। इस दृष्टिकोण को सामने रखते हुए सावरकर स्वयं एक गुप्त सभा का आयोजन करते हैं। सभी केन्द्रों से कहा जाता है कि वो अपने-अपने प्रतिनिधियों को भविष्य की रणनीतियों और उनके संविधान पर चर्चा हेतु भेजें।

सावरकर की एक पुकार पर दो सौ लोगों का समूह इकठ्ठा हो जाता है। नि:स्वार्थ सेवा सभी को दिख जाती है। हमारी आँखें हमारे हृदय का दर्पण होती हैं। लोगों को सावरकर की आँखों में देश के लिए जूनून दिखता था। उनकी बातों में देश के लिए मर-मिटना सुनाई देता था। सावरकर उस रोज़, नासिक में वी. एम. भट्ट के भागवत बाड़ा वाले घर में हुई सभा में एक अविस्मरणीय भाषण देते हैं। सावरकर अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के गौरवशाली कारण के लिए शिवाजी, बाज़ीराव, माज़िनी और कोसुथ जैसे महान व्यक्तित्वों के दिखाए रास्ते पर चलने की साहसी घोषणा कर डालते हैं।

इसी सभा में सावरकर और साथियों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध हेतु संगठन की भविष्य की नीति तैयार की जाती है। वे सभी साथियों को इस बात के लिए तैयार करते हैं कि अब इस आंदोलन को महाराष्ट्र से बाहर ले जाने का समय आ गया है। अलग-अलग प्रान्तों में फैले स्कूल-कॉलेजों के नवयुवकों तक विद्रोह के स्वर पहुँचाने की रणनीति तैयार करने के लिए संगठन की नींव रख दी जाती है। इस संगठन को नाम दिया जाता है-अभिनव भारत।

उसी रात सावरकर और सभी साथी शिवाजी के चित्र के सामने खड़े होकर कसम खाते हैं। एक ऐसी कसम, जिसके लिए हज़ारों लोगों ने अपनी और अपने परिवार की बलि चढ़ा दी। एक ऐसी कसम जिसने सावरकर को हमेशा के लिए अमर कर डाला। सभी साथी छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र के सामने खड़े होते हैं और एक स्वर में कहते हैं- “वन्दे मातरम्!!” आगे सावरकर और उनके साथी एक स्वर में प्रण लेते हैं:

“आज मैं ईश्वर के नाम पर, भारत माता के नाम पर और उन सभी बलिदानियों के नाम पर जिन्होंने भारत माता के लिए अपना खून बहाया है शपथ लेता हूँ। मैं शपथ लेता हूँ उस धरती के नाम पर, जिसमें मैंने जन्म लिया और जिसमें मेरे महान पूर्वजों की पवित्र राख मिली है। वह पवित्र धरती जो हमारे नन्हे बच्चों का झूला है। मैं उन अद्भुत माताओं के नाम पर शपथ लेता हूँ जिनके मासूम बच्चों को अत्याचारी अंग्रेज़ों ने ग़ुलाम बना कर प्रताड़ित किया है और मार दिया है।”

वो आगे कहते हैं, “मैं इस बात से अब पूरी तरह से सहमत हूँ कि पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता या स्वराज्य के बिना मेरा देश कभी भी विश्व में उस विराट रूप को प्राप्त नहीं कर सकता जिस महानता का वो हक़दार है। मुझे यह भी पूर्णरूप से विश्वास है कि विदेशी शासन से मुक्ति और स्वराज्य हेतु रक्तरंजित और और अथक युद्ध के अलावा कोई उपाय नहीं बचा है। मैं पूरी ईमानदारी से शपथ लेता हूँ कि मैं इस क्षण से अपना पूर्ण जीवन और शक्ति भारत माता की स्वतंत्रता के लिए लड़ने और स्वराज के कमल मुकुट को अपनी भारत माता के सिर पर सजाने में लगा दूँगा।”

उन्होंने कहा, “इस पावन और एकमात्र उद्देश्य के लिए आज मैं अभिनव भारत, हिंदुस्तान के क्रांतिकारी संगठन में शामिल होता हूँ। मैं शपथ लेता हूँ कि मैं इस पवित्र उद्देश्य के प्रति हमेशा सच्चा और वफ़ादार रहूँगा और मैं इस संगठन के आदेशों का सदैव पालन करूँगा।” अगर मैं इस संपूर्ण शपथ या इसमें कही गई किसी भी बात के विरुद्ध जाता हूँ, तो मेरा सर्वनाश हो!! ‘अभिनव भारत’ इटली के क्रांतिकरी माज़िनी के यंग इटली’ और रूस के क्रांतिकारी संगठनों का मिलाजुला रूप था।

थॉमस फ्रॉस्ट की चर्चित किताब ‘सीक्रेट सोसाइटी ऑफ यूरोपियन रिवोल्यूशन’ और रूस के क्रांतिकारी आंदोलन ने अभिनव भारत के सदस्यों पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी थी। इन्हीं दिनों भारत में खबर आती है कि लंदन के निवासी पंडित श्यामजी कृष्ण वर्मा यूरोप में अध्ययन करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की पेशकश कर रहे हैं। काफ़ी सोच-विचार के बाद सावरकर इस छात्रवृत्ति के बारे में आवेदन कर देते हैं।

असल में उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। तिलक साहब और शिवरामपंत परांजपे की सिफ़ारिशों के साथ जब सावरकर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करते हैं तो पंडित श्यामजी ने उन्हें छात्रवृत्ति देने पर सहमति व्यक्त कर देते हैं। 1905 में ब्रिटिश शासन अपनी पहली बड़ी चाल चल देता है। बंगाल का विभाजन कर दिया जाता है और मुस्लिम पूर्वी क्षेत्रों को हिंदू पश्चिमी क्षेत्रों से अलग कर दिया जाता है। 19 जुलाई, 1905 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन की विभाजन की घोषणा के बाद 16 अक्टूबर, 1905 को इसे लागू कर दिया जाता है।

यह वह समय था जब सावरकर की पूना की राजनीतिक और सामाजिक सभाओं में एक महत्वपूर्ण छवि बन चुकी थी। सावरकर और उनका समूह विभाजन की योजना का कड़ा विरोध करते हैं तो वहीं तिलक बंगाल के विभाजन को अखिल भारतीय मुद्दा बना डालते हैं। सावरकर स्वदेशी आंदोलन के समर्थक तो पहले ही से थे, लेकिन अब आगे बढ़ते हुए सावरकर विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प ले डालते हैं। 1 अक्टूबर, 1905 को एक बैठक में छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए सावरकर पूर्णरूप से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की घोषणा कर देते हैं।

सावरकर बड़े ही जोशीले अंदाज़ में छात्रों को उनके पहने हुए विदेशी कपड़ों को उतार फेंकने का आवाहन करते हैं। साथ ही वो छात्रों को इन विदेशी कपड़ों और वस्तुओं के साथ इन वस्तुओं  के प्रति उनके प्रेम और लालसा को भी जला डालने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। सावरकर इतने पर ही नहीं रुकते है, वो सभी छात्रों को स्वदेशी प्रतिज्ञा लेने की भी आज्ञा देते हैं। एन. सी. केलकर इस सभा के अध्यक्ष और एस. एम. परांजपे सावरकर के इस विचार का समर्थन करते हैं।

लेकिन, बैठक समाप्त होने के बाद केलकर कुछ और सुझाव देते हैं। केलकर कहते हैं कि कपड़े जलाने के बजाय, एकत्र किए गये कपड़ों को गरीबों में वितरित किया जाना चाहिए। उनका मानना था कि कपड़ों को जलाना अनावश्यक है और इसमें हम सभी का आर्थिक नुकसान है।

सावरकर अपनी असहमति जताते हैं और कहते हैं, “केलकर साहब, आप शायद समझ नहीं रहे हैं। आज हम विदेशी वस्तु या कपड़ा जलाने की बात नहीं कर रहे हैं। हम इन विदेशी वस्तुओं  के प्रति जो मोह है, लगाव है, उसको जलाने की बात कर रहे हैं। विदेशियों और विदेशी वस्तुओं के प्रति जो सभी का लगाव है, वह हमारे राष्ट्र के साथ विश्वासघात है। हम आज उसी लगाव को, विश्वासघात को जलाने की बात कर रहे हैं।” केलकर शांत हो जाते हैं।

यह विचार अपने आप में ही इतना चरमपंथी और उत्तेजक था कि गरम दल के सर्वेसर्वा लोकमान्य तिलक भी इस आंदोलन की व्यावहारिकता के रूप पर सवाल उठा देते हैं। ज़िद्दी सावरकर इसे अपने लिए एक चुनौती मान लेते हैं और पूना के नागरिकों में आवश्यक उत्साह पैदा करने के लिए कुछ बैठकों की योजना तैयार करते हैं। आख़िरकार  तिलक साहब भी सावरकर की बात मान जाते हैं लेकिन उनकी एक शर्त थी। तिलक साहब कहते हैं कि कपड़ों और सामान का एक बड़ा सा ढेर लग जाना चाहिए।

ऐसा न हो कि हम इस मामले को इतना तूल दे रहे हैं लेकिन जब विदेशी वस्तुओं को जलाने की बात आये तो सामान ही इकट्ठा न हो। सावरकर चुनौती स्वीकार कर लेते हैं। पूरे शहर में वो अपने भाषणों से जोश और जूनून भर देते हैं। 7 अक्टूबर, 1905 को विदेशी कपड़े और अन्य बहिष्कृत की गई वस्तुओं का एक विशाल ढेर गाड़ियों पर लगाया जाता है। एक जुलूस के रूप में सावरकर की अगुवाई में यह हुजूम बाज़ार की ओर निकल पड़ता है और लकड़ी के पुल के सामने स्थित मैदान पर जाकर ठहर जाता है।

उस रोज़ सावरकर द्वारा भारत के इस पहले विदेशी वस्त्र और वस्तुओं के होली दहन ने देश को चौंका दिया था। देश के राजनीतिक संसार में एक हलचल मचा दी थी। इस अनहोनी घटना ने भारतीय प्रेस में भी विवाद खड़ा कर दिया था। जब इस आग की लपटें दूर बंगाल तक पहुँची और वहाँ की पत्रिकाओं ने भी इस मामले को तूल देना शुरू किया, तब जाकर कॉलेज प्रशासन की नींद टूटी। फर्ग्यूसन कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाध्यापक आर. पी. परांजपे ने सावरकर पर दस रुपए का जुर्माना लगा कर उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया।

लेकिन, दीवाने सावरकर के लिए यह इनाम से बढ़कर कुछ नहीं था। उनकी छाती पर अब विद्रोह के दो तमगे टंगे हुए थे। वह भारत में विदेशी वस्तुओं का दहन करने वाले पहले भारतीय नेता और राजनीतिक कारणों से सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान से विस्थापित हुए पहले भारतीय छात्र बन चुके थे।”

यहाँ एक घटना का ज़िक्र करना उचित रहेगा। इस दौरान दक्षिण अफ्रीका में बैठे गाँधी जी ने भी विदेशी वस्तुओं के दहन की आलोचना कर डाली थी। जबकि सत्रह नवंबर, 1921 को गाँधी जी ने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ के नेता के रूप में बॉम्बे में विदेशी कपड़ों की स्वयं होली जलाई थी। गाँधी जी की यह राय अपने भविष्य के गुरु गोखले से अलग नहीं थी। गोखले 1905 में बनारस कॉन्ग्रेस में अपने अध्यक्षीय भाषण में कह ही चुके थे:

“हमें यह याद रखना चाहिए कि ‘बायकाट’ शब्द कहाँ से आया है। इस शब्द के मूल उद्भव में कुछ असामाजिक और अवांछनीय घटनाएँ सम्मिलित हैं। इस कारण यह शब्द ‘बायकाट’ सर्वप्रथम सामने वाले को चोट पहुँचाने की इच्छा व्यक्त करता है। किन्तु सरकार यह जान ले कि इंग्लैंड के प्रति हमारी ऐसी किसी भी इच्छा का होने का प्रश्न ही नहीं उठता है।”

(भारत के स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसे ही कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएँ आप क्रांतिदूत शृंखला में पढ़ सकते हैं जो डॉ. मनीष श्रीवास्तव द्वारा गई हैं।)

‘मोदी तेरी जुबान खींच लूँगा, इंशाअल्लाह साँसें रोक दूँगा’: कंगाल पाकिस्तान के आतंकी हाफिज सईद का वीडियो, ‘दरिया में खून बहाने’ की धमकी

पाकिस्तान के सरगना हाफिज सईद ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गीदड़-भभकी दी है। उसका एक वीडियो सामने आया है, जिसके बारे में ये नहीं पता चल रहा है कि ये कब का है। लेकिन, इसमें वो भड़काऊ बातें करता हुए दिख रहा है। हाफिज सईद ने इस वीडियो में पीएम मोदी को धमकी देता हुआ दिख रहा है कि अगर पाकिस्तान का पानी रोका गया, तो वो उनकी साँसें रोक देगा। हाफिज सईद 26/11 मुंबई हमले का साजिशकर्ता है।

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैइय्याबा का मुख्य सरगना है। हाफिज सईद ने कहा कि तुम ढाका (बांग्लादेश की राजधानी) की यूनिवर्सिटी में खड़े होकर कह रहे हो कि तुमने पाकिस्तान को तोड़ा है और एक नया मुल्क बनाया है। हाफिज सईद ने पीएम मोदी को धमकाते हुए कहा कि हम चुप नहीं रहेंगे और तुम्हारी जुबान खींच कर ही रहेंगे। फ़िलहाल ये पुष्ट नहीं हुआ है कि ये वीडियो पाकिस्तान में कहाँ का है, लेकिन इससे इतना ज़रूर साफ़ होता है कि आतंकी वहाँ बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।

हाफिज सईद ने इस वीडियो में किया कि पीएम मोदी ने ढाका यूनिवर्सिटी में बकवास किया। उसने दावा किया कि इस्लामाबाद पर दबाव बनाया जाता है कि हाफिज सईद क्यों बोल रहा है, लेकिन वो बोलता रहेगा। उसने दावा किया कि पानी रोक कर पाकिस्तान को तबाह करने के मंसूबे हैं। उसने कहा कि अगर तू चाहेगा कि तू चुप रहे, तो ऐसा नहीं हो सकता। उसने ‘दरियाओं में खून बहाने’ की भी धमकी दे डाली। हाफिज सईद के इस वीडियो पर लोग उसे खरी-खोटी सुना रहे हैं और पाकिस्तान को आईना दिखा रहे हैं।

बता दें कि पाकिस्तान कंगाली की स्थिति में पहुँच गया है, ऊपर से तालिबान ने एक के बाद एक हमले कर के उसकी नाक में दम कर रखा है। खाने वाली वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और नौकरियाँ जा रही हैं। पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। टैक्स का बोझ भी बढ़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने कम सैलरी में काम करने की शर्त रख कर अपनी नौकरी बचाई। महँगाई 35% से भी अधिक जा सकती है।

‘एक दिन सारे बदबूदार सिखों को मुस्लिम बनाएँगे, तैयार है प्लान’: पाकिस्तान के मौलाना ने गुरु नानक को भी कहे अपशब्द, वीडियो वायरल

भारत मे एक तरफ खालिस्तान की माँग को लेकर अमृतपाल सिंह जैसे लोग उत्पात मचा रहे हैं तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के मौलानाओं द्वारा सिखों को लेकर कई तरह के आपत्तिजनक बयान सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान के एक सूफी संत मौलाना डॉक्‍टर मोहम्‍मद सुलेमान का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह गुरुनानक देव के बारे में कई आपत्तिजनक बातें कह रहा है। वह उन्हें धर्मांतरित करने की बात कह रहा है।

डॉक्टर सुलेमान सिखों को गंदा और बदबूदार बता रहा है। उसका कहना है कि एक दिन सभी सिखों को इस्‍लाम कबूल करवाकर ही वह दम लेगा। इससे पहले भी एक मौलवी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह गुरुनानक देव पर कई तरह की विवादित टिप्‍पणियाँ कर रहा है।

वीडियो में सुलेमान कहता है, “मुझे सिखों के काफी फोन आते हैं। अब जो है सो है, लेकिन मैं बहुत हैरान हूँ। हमारे पैगंबर ने तो हमसे बगल के बाल भी साफ करने को कहा है। मैं लाहौर में पढ़ता था, इसलिए मैंने इन्‍हें देखा है। अल्‍लाह मुझे माफ करे, ये सिख इतने गंदे हैं। इनके दाढ़ी होती है। हम इन सिखों को एक दिन मुसलमान बनाएँगे।”

नवभरात टाइम्स के अनुसार, सुलेमान आगे कह रहा है, “हमारे पास पूरा एक प्‍लान है और अभी इसे आगे न लेकर जाएँ।” सुलेमान यहीं नहीं रुकता है।। उसने यहाँ तक कह दिया कि सिखों के जो गुरु थे, पता नहीं वो क्‍या थे। सुलेमान कहना है कि पैगंबर उनसे अधिक महान थे। सुलेमान कहता है कि सिख अपने गुरु के पीछे भाग रहे हैं और फिर भी गंदे-गंदे काम करते हैं।

सुलेमान से पहले पाकिस्‍तान के एक मौलवी की क्लिप शेयर किया गया था। इस क्लिप में मौलवी ने सिखों के गुरु, गुरुनानक के बारे में कई बातें कही थीं। मौलवी का कहना था कि गुरुनानक ने कलमा नहीं पढ़ा था और इस्‍लाम कबूल नहीं किया था। इसलिए वह अच्‍छे इंसान नहीं हो सकते थे। उनका कहना था कि भले ही गुरुनानक, बाबा फरीद को पसंद करते थे मगर ऐसा करने से तो वह मुसलमान नहीं हो जाते। सच्‍चा मुसलमान वही है जो कलमा पढ़े।

मुझे मेरे पति से मिलवाओ, वरना जान से दूँगी… अतीक अहमद के गुंडों ने यूपी पुलिस के संदीप निषाद को भी मार डाला: गरीब है परिवार, ‘दलित संगठनों’ ने साधी चुप्पी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे ने गुंडों के साथ मिल कर विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल को गोलियों से भून डाला। उनके अलावा एक और व्यक्ति की हत्या की गई। वो थे उमेश पाल के गनर संदीप निषाद, जो यूपी पुलिस में कार्यरत थे। 26 वर्षीय संदीप निषाद आजमगढ़ के अहिरौला थाना क्षेत्र के बिसईपुर गाँव में रहने वाले थे। तीन भाइयों में वो दूसरे नंबर पर थे। उनकी एक बहन भी है।

संदीप अपने बड़े भाई प्रदीप निषाद को अपने साथ प्रयागराज में ही रखते थे, जो वहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहे हैं। वहीं छोटा भाई दीपचंद्र घर पर माँ-पिता के साथ रहते हैं। गाँव में जब पोस्टमॉर्टम के बाद संदीप की डेड बॉडी पहुँची तो भारी भीड़ जुट गई। मुआवजे के साथ-साथ घर तक सड़क बनवाने और एक सरकारी नौकरी देने की माँग हो रही है। अंतिम संस्कार में पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे।

संदीप निषाद का बचपन काफी गरीबी में बीता था। पिता संतराम एक साधारण किसान हैं। घर पर ठीक से छप्पर तक नहीं है। 2018 में संदीप निषाद का यूपी पुलिस में चयन हुआ था। वहीं 2021 में उनकी शादी कराई गई थी। एक बेहद गरीब परिवार जिसकी आर्थिक स्थिति अब ठीक हो रही थी, फिर से पुरानी से भी बदतर स्थिति में चला गया है। जिले के दुर्वासा धाम पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। शवयात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

संदीप की पत्नी रीमा और माँ का रो-रो कर बुरा हाल है। संदीप के बड़े भाई प्रदीप सरकारी अध्यापक बनना चाहते हैं। संदीप अपनी पत्नी रीमा को भी किराए वाले घर में साथ ही रखते थे। रीमा रोते हुए बार-बार यही कह रही थीं कि उन्हें उनके पति से मिलवाया जाए, वरना वो भी अन्न-जल त्याग कर जान दे देगी। संदीप निषाद का शव पुलिस लाइन भी लाया गया था, जहाँ उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। पुलिस के वाहन में ही पार्थिव शरीर को आजमगढ़ ले जाया गया। दलितों के हितों की बात करने का दावा करने वाले संगठनों ने संदीप निषाद पर चुप्पी साध रखी है।

उमेश पाल की हत्या में शामिल अपराधियों में चार की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हो गई है। इनमें से एक गैंगस्टर अतीक अहमद का बेटा असद भी है। इसके अलावा, अतीक का करीबी बमबाज गुड्‌डू मुस्लिम, अरमान और मोहम्मद गुलाम की भी पहचान हुई है। ये चारों प्रयागराज के रहने वाले हैं। हमले में कुल 7 लोग शामिल थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम बोर्डिंग छात्रावास में छापा मारकर अतीक अहमद के करीबी शूटर मोहम्मद गुलाम के 3 गुर्गों को हिरासत में लिया है।

52 साल से हमारे पास घर नहीं… राहुल गाँधी की बात पर सोनिया ने फेरे रखा मुँह: PM आवास से बड़ा है 10 जनपथ, रेंट मात्र ₹4610

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रहे कॉन्ग्रेस के 85वें अधिवेशन के आखिरी दिन राहुल गाँधी ने अपना भाषण दिया। इस भाषण में उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा का तो जिक्र किया ही लेकिन साथ में वह 1977 के एक अनुभव के बारे में भी बोलते दिखे। उन्होंने बताया कि 52 साल हो गए हैं उनके पास अपना घर नहीं है। अब उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। वहीं वीडियो में देख सकते हैं कि राहुल के बोलते वक्त सामने बैठी सोनिया गाँधी भी इधर-उधर देख रही हैं।

समाचार एजेंसी द्वारा शेयर की गई वीडियो में राहुल गाँधी कहते हैं, “मैं छोटा था, 1977 की बात है। चुनाव आया, मुझे उसके बारे में कुछ नहीं मालूम था। घर में अजीब सा माहौल था। मैंने माँ से पूछा मम्मी क्या हुआ। माँ ने कहा हम घर छोड़ रहे हैं। तब तक मैं सोचता था कि वो घर हमारा था। मैंने माँ से पूछा हम घर क्यों छोड़ रहे हैं। पहली बार माँ ने मुझे बताया कि ये हमारा घर नहीं है। ये सरकार का घर है। अब हमें यहाँ से जाना है। मैंने पूछा कहाँ जाना है तो कहती हैं कि नहीं मालूम कहाँ जाना है। मैं हैरान था। मैंने सोचा था कि वो हमारा घर था। 52 साल हो गए मेरे पास घर नहीं है। आज तक नहीं है।”

राहुल के इस बयान के बाद जहाँ कुछ लोग उनसे सवाल कर रहे हैं तो कुछ लोग उनका मजाक भी उड़ा रहे हैं। सवाल उनसे हो रहा है कि अगर घर नहीं है तो अब तक कहाँ रह रहे हैं और मजाक ये कहकर उड़ाया जा रहा है कि राहुल को पीएम आवाज योजना के तहत एक मकान अपने ले लिए लेना चाहिए। कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि अगर उनके पास 52 साल से अपना घर नहीं है तो फिर इटली में क्या है।

बता दें कि राहुल गाँधी के इस बयान का मजाक इसलिए भी उड़ रहा है क्योंकि सोनिया गाँधी को सरकार से मिला हुआ 10 जनपथ बंगला पिछले साल ही चर्चा में आया था। खबरें आई थीं कि सोनिया का 10 जनपथ बंगला केवल देश के अन्य नेताओं के बंगलों के मुकाबले सबसे बड़ा नहीं है बल्कि ये पीएम निवास से भी बड़ा है। सेंट्रल पब्लिक डिपार्टमेंट के मुताबिक पीएम निवास का एरिया 14,101 वर्ग मीटर है जबकि सोनिया गाँधी को मिला बंगला 15,181 वर्ग मीटर में फैला है जिसकी कीमत केवल सोनिया गाँधी के लिए 4, 610 रुपए प्रतिमाह है जबकि मार्केट वैल्यू के हिसाब से इसका किराया 20 लाख तक हो सकता है।

टैक्स UPA काल का, दोष मोदी सरकार को: फिर झूठ फैलाते हुए पकड़े गए TMC सांसद, 12 साल पुरानी चिट्ठी शेयर कर के अब आंदोलन की धमकी

तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने शनिवार (25 फरवरी, 2023) को नारायण हृदयालय के डॉ. देवी शेट्टी का एक लेटर शेयर किया। इस लेटर में देवी शेट्टी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सर्विस टैक्स को ‘दुःखद टैक्स’ कहा था। इस लेटर को शेयर करते हुए जवाहर सरकार ने पोस्ट में लिखा था, “डॉ. देवी शेट्टी से पूरी तरह सहमत हूँ। स्वास्थ्य सेवाओं पर मोदी-निर्मला का सर्विस टैक्स मध्यम वर्ग और गरीबों को तबाह कर देगा। इस टैक्स को वापस ले लो।”

समाचार पत्रों में विज्ञापन के तौर पर प्रकाशित हुए पत्र में डॉ. देवी शेट्टी ने बजट में स्वास्थ्य सेवाओं पर 5 प्रतिशत के प्रस्तावित सर्विस टैक्स का विरोध किया है। इस टैक्स को ‘दुखद टैक्स’ बताते हुए 12 मार्च को सुबह 11 बजे प्रत्येक राज्य के राज्यपाल आवास पर टैक्स वापस लेने की याचिका के साथ लोगों को इकट्ठा होने के लिए कहा था।

इस पोस्ट में जवाहर सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा। लेकिन डॉ. शेट्टी के लेटर को शेयर करने से पहले उन्होंने इसकी सच्चाई जानने की कोशिश नहीं की। ऑपइंडिया ने जब उनके द्वारा शेयर की गई फोटो की जाँच की तो हमें मार्च 2011 तक की कई रिपोर्टें मिलीं जिनमें यह तस्वीर थी। इसमें से एक रिपोर्ट में कहा गया था कि प्राइवेट हॉस्पिटलों द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर टैक्स की आलोचना करते हुए डॉ. शेट्टी ने एक लेटर जारी किया था।

यही नहीं, इसकी जाँच करते हुए ऑपइंडिया ने पाया कि साल 2011 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 25 से अधिक बेड और एयर कंडीशन जैसी सुविधाओं वाले हॉस्पिटल पर 5 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव के तुरंत बाद, स्वास्थ्य सेवाओं (हॉस्पिटल इत्यादि) से जुड़े लोगों ने इसकी व्यापक रूप से आलोचना की थी। 2011 की रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. शेट्टी ने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की और उनसे प्रस्तावित टैक्स वापस लेने का आग्रह किया था।

देश भर में इस टैक्स की आलोचना होने के बाद यूपीए सरकार को झुकना पड़ा और उन्हें प्रस्तावित टैक्स वापस लेना पड़ा था। इसके बाद एक बयान में डॉ. शेट्टी ने कहा था, “मुझे खुशी है कि वित्त मंत्री ने सर्विस टैक्स को वापस लेने का फैसला किया है। मैं दो हफ्ते पहले वित्त मंत्री से मिला था और उस समय उनका विचार था कि यह टैक्स आम आदमी को नुकसान पहुँचाएगा। इसलिए वह इस टैक्स को लेकर कुछ करना चाहते हैं।”

उल्लेखनीय है कि बाद में सर्विस टैक्स को जीएसटी में ही शामिल कर लिया गया। यानी अब किसी भी चीज पर अलग से सर्विस टैक्स नहीं लगता है।

इस पूरे मामले को सीधे शब्दों में कहें तो साल 2011 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सर्विस टैक्स लगाने का प्रस्ताव दिया था। हालाँकि, देश भर में हुई आलोचना बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया था। तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता जवाहर सरकार ने जो पोस्ट शेयर किया है, वह डॉ. शेट्टी द्वारा साल 2011 में लिखे एक एक लेटर की कटिंग है। इस तरह से जवाहर सरकार ने अपने पोस्ट के माध्यम से मोदी सरकार को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश की।

पहले भी झूठ फैलाते रहे हैं जवाहर सरकार

यह पहली बार नहीं है जब जवाहर सरकार ने फर्जी खबरें शेयर की हैं। सितंबर 2022 में, पीएम मोदी की दो तस्वीरें वायरल हुईं। इन तस्वीरों को लेकर दावा किया जा रहा था कि पीएम मोदी लेंस कवर के साथ फोटो खींच लर रहे थे। वहीं, एक अन्य फोटो में प्रधानमंत्री मोदी लेंस फिल्टर के साथ फोटो खींचते हुए दिखाई दे रहे थे। हालाँकि, लोगों ने लेंस फिल्टर को लेंस कवर बताते हुए ट्वीट किए थे। वहीं, कुछ लोगों ने तो लेंस फिल्टर के आगे लेंस कवर को सेट करते हुए फेक फोटो शेयर की थी।

इन सबमें दिलस्चप बात यह रही कि फोटो एडिट करने वाले व्यक्ति को इस बात का होश नहीं था कि कैनन का लेंस कैप निकॉन लेंस में फिट नहीं होगा। वापस मुद्दे पर लौटें तो, जवाहर सरकार ने भी ऐसी ही एक फोटो शेयर की थी। हालाँकि बाद में जब नेटिजेन्स ने उनके इस दावे की पोल खोली तो उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था।

जवाहर सरकार ने जून 2021 में पीएम मोदी की एक और एडिटेड फोटो शेयर की थी। इस फोटो में उन्होंने लिखा था ”काश साथी सांसदों और अन्य राजनीतिक लोगों को भी प्रधानमंत्री से इस तरह का शिष्टाचार और मिलनसारिता मिले। एक परिपक्व लोकतंत्र में, हम दो-तरफा संबंध, एहसान और लेनदेन को समझेगें। किसी दिन, इतिहास हमें बताएगा।” इस तस्वीर में पीएम मोदी को रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी को विनम्रता से नमस्कार करते हुए दिखाया गया है। हालाँकि यह तस्वीर फर्जी और फोटोशॉप्ड थी।

यही नहीं, जवाहर सरकार ने दिसंबर 2021 में भी एक फर्जी वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में कहा गया था कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के दौरान पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विरोध वाले नारों के साथ स्वागत किया गया था। हालाँकि इसके बाद नेटिजन्स ने ओरिजनल वीडियो दिखाते हुए उन्हें आइना दिखाया था। ओरिजनल वीडियो में लोग प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ के समर्थन में नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे थे।

दिसंबर 2021 में जवाहर सरकार ने एक बार फिर पीएम मोदी द्वारा उपयोग की जाने वाली मर्सिडीज-मेबैक 650 की कीमत को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने यह दावा करने की कोशिश की थी कि अत्याधुनिक कार का इस्तेमाल राज्य के मुखिया की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नहीं बल्कि पीएम मोदी के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए किया जाता है। हालाँकि सच्चाई यह है कि यह कार भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए है न कि उस व्यक्ति के लिए जो इस पद पर काबिज होता है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पद से हट जाएँगे, तब यह कार अगले प्रधानमंत्री के काफिले में शामिल होगी। यानी, यह पीएम मोदी को विरासत के तौर पर मिलने वाली नहीं है।

7 गोलियाँ, 6 निकल गईं आर-पार… उमेश पाल के हत्यारों में शामिल था अतीक अहमद का बेटा, मुस्लिम छात्रावास में छिपे शूटरों को पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Aditynath) ने विधानसभा में कहा था कि वे राज्य के माफियाओं को मिट्टी में मिलाकर दम लेंगे। प्रयागराज में बसपा के विधायक राजू पाल की हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या के मामले में इसका असर दिखने लगा है। इस हमले में शामिल अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने 10 टीमों का गठन किया है।

ये टीमें हमलावरों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। उमेश पाल की हत्या में शामिल अपराधियों में चार की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हो गई है। इनमें से एक गैंगस्टर अतीक अहमद का बेटा असद भी है। इसके अलावा, अतीक का करीबी बमबाज गुड्‌डू मुस्लिम, अरमान और मोहम्मद गुलाम की भी पहचान हुई है। ये चारों प्रयागराज के रहने वाले हैं। हमले में कुल 7 लोग शामिल

ADG लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार और एडीजी STF अमृत अभिजात ने प्रयागराज में डेरा डाले हुए हैं और घटना की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बाकी अपराधियों की पहचान की जा रही है। देर रात STF और SOG टीम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुस्लिम बोर्डिंग छात्रावास में छापा मारकर अतीक अहमद के करीबी शूटर मोहम्मद गुलाम के 3 गुर्गों को हिरासत में लिया है। तीनों हमले के बाद मुस्लिम बोर्डिंग छात्रावास में छिपे थे।

STF के ADG अमृत अभिजात के नेतृत्व में रात भर छापेमारी जारी रही। अब तक अतीक के बेटों समेत 20 से ज्यादा संदिग्धों को पुलिस ने पूछताछ के लिए उठाया है। अतीक का बेटा असद अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। वही, इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

अपराधियों ने उमेश पाल पर कई राउंड फायरिंग पर 2 बम फेंके थे। शनिवार (25 फरवरी 2023) को हुए पोस्टमॉर्टम में पता चला कि उमेश को कुल 7 गोलियाँ लगी थीं। ये गोलियाँ काफी नजदीक से फायर की गई थीं। इसके कारण 6 गोलियाँ उनके शरीर को बेधते हुए पार हो गईं, जबकि एक गोली शरीर में ही फंसी रह गई। डॉक्टरों ने उसके शरीर पर कुल 13 चोट के निशान बताए हैं।

ये सभी गोलियाँ ऑटोमेटेड पिस्टल से मारी गई हैं। वहीं, अतीक अहमद के चकिया स्थित घर के पास खाली प्लॉट में एक काले रंग की क्रेटा कार मिली है। इस कार का नंबर बदला हुआ था। पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर उसके इंजन नंबर और चेचिस नंबर के आधार पर कार मालिक का पता लगाने में जुटी हुई है। कहा जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम में अतीक अहमद से पूछताछ की जाएगी।

बता दें कि राजू पाल की पत्नी जया पाल की शिकायत पर धूमनगंज थाने में अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन, उसके दो बेटों, उसके साथी गुड्डू मुस्लिम और गुलाम एवं 9 अन्य साथियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 506, 120-बी, 34, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम,1908 की धारा 3 और आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 1932 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

घाटी में बहा एक और कश्मीरी पंडित का खून, बालाकोट एयर स्ट्राइक की बरसी के दिन संजय शर्मा को मार डाला: सिक्योरिटी गार्ड का करते थे काम

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में संजय शर्मा नामक एक कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी गई। वो बतौर सिक्योरिटी गार्ड कार्यरत थे। उनकी उम्र 40 साल थी। केंद्र शासित प्रदेश में अभी भी हिन्दुओं की टारगेट किलिंग जारी है। संजय शर्मा पर आतंकियों ने तब गोलियाँ बरसाई, जब वो स्थानीय बाजार में जा रहा थे। स्थानीय लोग उन्हें नजदीकी अस्पताल में लेकर गए, जहाँ घाव के कारण उनकी मौत हो गई। गाँव में वो सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे।

उन्हें इस नौकरी के लिए हथियार भी मिला हुआ था। कश्मीर पुलिस ने बताया है कि उस इलाके को घेर कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। संजय शर्मा एक प्राइवेट बैंक में बतौर सिक्योरिटी गार्ड कार्यरत थे। ये घटना रविवार (26 फरवरी, 2023) को सुबह के करीब 10 बजे हुई। उन पर गोलियाँ चलाने वाले आतंकियों की संख्या 2 बताई जा रही है। जम्मू कश्मीर पिछले साल भी कई हिन्दुओं को निशाना बनाया गया था और टारगेट किलिंग हुई थी।

संजय शर्मा पुलवामा के अचन इलाके के रहने वाले थे। पिछले 4 महीनों में किसी कश्मीरी पंडित पर ये पहला हमला है। इससे पहले अक्टूबर में ऐसी घटना हुई थी। पिछले दो दिनों में ये दूसरी ऐसी घटना है। एक दिन पहले ही आतंकियों ने अनंतनाग में आसिफ अली गनइ नामक एक व्यक्ति को गोली मार कर घायल कर दिया था। आसिफ के अब्बा हेड कॉन्स्टेबल हुआ करते थे, जिन्हें पिछले साल आतंकियों ने मार डाला था। पिछले साल कई हिन्दू प्रवासी कश्मीर में निशाना बने थे।

याद हो कि वो 26 फरवरी, 2019 का ही दिन था, जब भारत ने पुलवामा हमले के बदले के रूप में बालाकोट में एयर स्ट्राइक किया था। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ताज़ा घटना की निंदा करते हुए कहा है, “दक्षिण कश्मीर में संजय पंडित की हत्या से मैं दुःखी हूँ। मैं इसकी निंदा करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ।” बता दें कि जम्मू कश्मीर के यही नेता आतंकियों की हिमायत भी करते रहे हैं।

पाकिस्तान की पहली ट्रांसजेंडर न्यूज एंकर पर हमला, अज्ञात बंदूकधारियों ने चलाई गोली: जान बाल-बाल बची

पाकिस्तान की पहली ट्रांसजेंडर टीवी एंकर मारविया मलिक पर जानलेवा हमला हुआ। अज्ञात बंदूकधारियों ने उनके ऊपर उनके घर के बाहर गोली चलाई। घटना के वक्त बाल-बाल बचीं।

मारविया मलिक ने पुलिस को बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय की आवाज उठाने के कारण उन्हें काफी समय से धमकी भरी कॉलें आ रही थीं और उन्हें मालूम है कि इसी वजह से उनपर हमला किया गया।

जानकारी के अनुसार, मारविया मलिक लाहौर को पहले ही अपनी सुरक्षा के चलते छोड़ चुकी थीं, लेकिन उन्हें सर्जरी के लिए यहाँ वापस आना पड़ा उसी दौरान उन पर ये अटैक हुआ। उन्होंने बताया भी कि हमले के वक्त अस्पताल से घर आ रही थीं कि तभी उनपर बंदूकधारियों ने हमला किया।

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में मलिक पाकिस्तान की पहली ट्रांसजेंडर न्यूज एंकर बनी थीं। वह पाकिस्तान के कोहिनूर न्यूज से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने कई जगह बताया भी था कि उनके लिए ये सफर आसान नहीं रहा। एंकर बनने से पहले वो एक ट्रांसजेंडर मॉडल थीं वो भी पाकिस्तान फैशन डिजाइन द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रमुख फैशन शो की।

उन्होंने बताया था कि उन्हें भी अन्य ट्रांस लोगों की तरह परिवार से कोई समर्थन नहीं मिला। उन्होंने खुद से छोटी छोटी नौकरी करके पढ़ाई पूरी की। वो हमेशा एक न्यूज एंकर ही बनना चाहती थीं और जब उनको ये मौका मिला तो ऐसा लगा कि सपना सच हो गया। वो उम्मीद करती हैं कि उनकी पहल से ट्रांसजेंडर्स के जीवन में बदलाव आएगा। उनका कहना है कि मौका मिले तो उनके समुदाय के लोग भी बहुत कुछ कर सकते हैं। लेकिन उनकी पहचान के कारण उन्हें नौकरियाँ नहीं मिलतीं।

गला रेतकर काटा प्राइवेट पार्ट, शरीर से दिल भी निकाला: GF को मैसेज भेजने पर 12वीं के छात्र ने की दोस्त की हत्या, तस्वीरें व्हॉट्सएप पर भेजीं

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक दोस्त ने अपने दोस्त की गला काटकर हत्या कर दी, क्योंकि वह उसकी गर्लफ्रेंड को मैसेज करता था। जिस लड़की के लिए यह हत्या हुई, वह पहले मृतक के साथ रिलेशनशिप में थी। आरोपित ने दोस्त का सिर्फ कलम ही नहीं किया, बल्कि उसका प्राइवेट पार्ट और अंगुलियाँ भी काट लीं।

इसके बाद आरोपित को जब लगा कि वह बच नहीं पाएगा को 10 दिन बाद उसने थाने में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामला दर्ज कर विस्तृत जाँच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर स्थानीय सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस के अनुसार, मृतक नवीन और आरोपित हरिहर कृष्णा दिलसुखनगर के एक कॉलेज में साथ पढ़ते थे। जिस लड़की के लिए हत्या हुई, वह भी इसी कॉलेज में पढ़ती थी। नवीन लड़की के साथ रिलेशनशिप में था। लगभग एक साथ बाद लड़की ने नवीन के साथ रिश्ता तोड़ दिया।

इसके बाद लड़की नवीन के दोस्त हरिहर कृष्णा के संपर्क में आ गई। इसके बाद दोनों रिलेशनशिप में आ गए। हालाँकि, लड़की नवीन के भी संपर्क में थी। पुलिस का कहना है कि आरोपित हरिहर कृष्णा को यह पसंद नहीं था कि मृतक नवीन लड़की को मैसेज भेजे। उसे डर था कि लड़की उसे छोड़कर फिर से नवीन के पास चली जाएगी।

इसके कारण हरिहर कृष्णा परेशान रहने लगा और अपने दोस्त नवीन को रास्ते से हटाने की योजना बनाने लगा। पुलिस ने कहा कि हरिहर कृष्णा पिछले तीन महीनों से नवीन की हत्या की योजना बना रहा था। इसके लिए उसने एक पार्टी का आयोजन किया।

कृष्णा 17 फरवरी 2023 को हैदराबाद के बाहरी इलाके अब्दुल्लापुर में पार्टी करने के बहाने नवीन से मिला। दोनों नशे की हालत में पहुँच गए तो लड़की को लेकर लड़ाई हो गई। गुस्से में उसने नवीन की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने शव को एक खुले मैदान में फेंक दिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपिरत हरिहर कृष्णा ने फिर नवीन के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। उसका प्राइवेट पार्ट और दिल बाहर निकाल लिया। उसने पीड़ित की अंगुलियाँ भी काट दीं। ये सब करने के बाद उसने इसकी तस्वीरें लड़की को व्हाट्सएप पर भेज दीं। पुलिस ने कहा कि लड़की को लगा कि कृष्णा उसके साथ मजाक कर रहा है।

उधर, नवीन के दोस्त उसे लगातार कॉल कर रहे थे और मिलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन नवीन से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा था। इसके बाद दोस्तों ने कृष्णा को कॉल कर नवीन के बारे में पूछा। कृष्णा ने कहा कि उसे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उसके बाद मृतक के परिवार ने पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करावाई।

पुलिस ने आगे बताया कि 12वीं के छात्र 22 वर्षीय कृष्णा को जब लगा कि वह कानून से बच नहीं पाएगा और पुलिस उसे कभी भी गिरफ्तार कर सकती है तो उसने शुक्रवार (24 फरवरी 2023) को थाने में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया।