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‘PFI को किया बैन… VHP और बजरंग दल को भी आतंकी संगठन घोषित करो’ : मौलाना तौकीर रजा के बिगड़े बोल, कहा- आने वाले दिन में बिगड़ जाएगा माहौल

हरियाणा के भिवानी में दो गोतस्करों का शव बरामद होने के बाद इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (Ittihad-e-Millat Council) चीफ मौलाना तौकीर रजा (Maulana Tauqeer Raza) खान ने हिंदूवादी समूहों को आतंकी समूह घोषित करने की माँग की है। तौकीर रजा ने कहा कि जैसे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया बैन हुआ, उसी तरह से बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद भी बैन हो जाना चाहिए।

आईएमसी प्रमुख व कई मौकों पर जहर उगल चुके तौकीर रजा ने कहा, “भिवानी में 16 फरवरी 2023 को घटना हुई थी, लेकिन हम लोग चुपचाप थे। हमारे बच्चों पर झूठा इल्जाम लगाया गया और उनका कत्ल किया गया। जब बैठकों और महापंचायत में ही आरोपितों का साथ दिया जाए, तो हमें लगता है कि ये हत्याएँ और मॉब लिंचिंग सामान्य हो गई हैं।”

तौकीर रजा ने कहा, “जिस तरह पीएफआई बैन किया है, वैसे ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और उन्हें आतंकी संगठन घोषित किया जाना चाहिए।”

वह कहते हैं, “जो कुछ भी भिवानी में हुआ उससे हिंदू समुदाय में गलत संदेश गया है। वो सोच सकते हैं कि अगर ऐसे कृत्यों में शामिल हुए तो उन्हें भी हीरो बता दिया जाएगा। प्रशासन को इस पर संज्ञान लेना चाहिए वरना आने वाले समय में स्थिति और खराब हो जाएगी।”

तौकीर रजा के बिगड़े बोल

उल्लेखनीय है कि भिवानी हत्याकांड के बाद हिंदू संगठनों को आतंकी बताने वाले तौकीर रजा पहले भी कई बार हिंदू विरोधी बयान के कारण चर्चा में आ रखे हैं। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कलमा पढ़ कर इस्लाम को समझने की सलाह दे डाली थी। साथ ही उन्हें मुस्लिम बन जाने को भी कहा था।

तौकीर रजा ने हिंदुओं पर अत्याचार करने वाले मुगल आक्रांता औरंगजेब का भी महिमामंडन किया था। रजा ने कहा था कि दुनिया में औरंगजेब से बेहतर कोई किरदार नहीं है। इसके अलावा बाटला हाउस मामले पर भी तौकीर ने कहा था,“अगर बाटला हाउस एनकाउंटर की जाँच करवा ली गई होती तो दुनिया को पता चल जाता जो मारे गए वो आतंकवादी नहीं थे। उनको शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। जो इंस्पेक्टर शर्मा मारे गए, उनका कत्ल हुआ। उनको उनकी पुलिस ने मारा था। जाँच नहीं करवाई गई।”

इसी तरह वो मौलाना तौकीर रजा ही थे जिन्होंने न्यूज 18 के एंकर अमन चोपड़ा को ऑन शो धमकी दी थी तौकीर रजा के पुराने बयानों पर जब चोपड़ा के शो में सवाल किया गया तो रजा ने गुस्सा दिखाते हुए एंकर को कहा था कि या तो वो उनसे तमीज में बात करें वरना उनका मुँह तोड़ दिया जाएगा।

विधायक हत्याकांड के गवाह को गोलियों से भून डाला था, अब अतीक अहमद और उसके भाई-बेटों पर दर्ज हुई FIR: बीवी को हिरासत में लेने की खबर

जेल में बंद यूपी के गैंगस्टर अतीक अहमद की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। बसपा विधायक राजू पाल की हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की शुक्रवार (24 फरवरी 2023) को दिन-दहाड़े हुई हत्या के मामले में अतीक अहमद, उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन, भाई अशराफ और दोनों बेटों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

मृतक उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने प्रयागराज के धूमनगंज थाने में यह नामजद मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने हत्या, हत्या का प्रयास और विस्फोटक अधिनियम के तहत यह मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस ने अतीक के दोनों बेटों सहित 14 लोगों को हिरासत में लिया है।

अतीक के दो बड़े बेटे उमर और अली पहले से लखनऊ तथा नैनी की जेल में बंद हैं। बता दें कि गैंगस्टर अतीक के पाँच बेटे हैं। सबसे छोटा बेटा अभी नाबालिग है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है पुलिस ने गैंगस्टर के दो बेटों के साथ उसकी पत्नी शाइस्ता को भी पकड़ लिया है। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

अब तक के जाँच में यह बात सामने आई है कि कोर्ट से हमलावर का पीछा कर रहे थे। उनका पीछा करने के लिए कार और बाइक का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही बैग में बम में रखा गया था। कचहरी में गवाही देने के बाद जैसे से उमेश अपने घर के पास पहुँचे, वैसे ही अपराधियों ने उन पर हमला कर दिया। इस दौरान उन पर उनके गनर पर बम भी फेेंके गए।

उमेश पाल ने हाल ही में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके पहले पर उन पर कई बार हमले के प्रयास किए गए थे। वे हर बार बचते आ रहे थे। राजू पाल की पत्नी के फुफेरे भाई उमेश पाल की हत्या की कई बार आशंका जाहिर की जा चुकी थी। उन्हें दो गनर दिए गए थे। दोनों गनर भी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इसके पहले मीडिया में खबर आई थी कि उमेश पाल के एक गनर की मौत हो गई है।

उमेश पाल की भतीजी ने बताया कि उसके चाचा को गोली मारी गई तो वे भागकर घर के अंदर की ओर आए। इसके बाद भी हमलावरों ने उनका पीछा करते हुए दौड़ाकर गोली मार दी। भतीजी का कहना है कि सब कुछ उसकी आँखों के सामने हुआ। अब उमेश के मुकदमे की पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील वैश्य को सुरक्षा मुहैया करा दी गई है। 

पुलिस ने इस घटना को लेकर इलाके का सीसीटीवी फुटेज खंगाला है। इसमें एक लोकल शूटर नजर आ रहा है। पुलिस उसकी तलाश तेज कर दी है। वहीं, घटना में पूर्वांचल के शूटर्स के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने हमलावरों को गिरफ्तार करने के लिए कई टीमों का गठन किया है।

बता दें कि जब बसपा विधायक राजू पाल की हत्या की गई थी, उस समय वह इलाहाबाद पश्चिम से विधायक थे। राजू पाल को 25 जनवरी 2005 को सलेमसराय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी पत्नी पूजा पाल कौशाम्बी की चायल सीट से समाजवादी पार्टी की विधायक हैं।

‘बिहार में पढ़ाई नहीं, राजनीति जरूरी’: नीतीश-तेजस्वी की रैली के लिए पूर्णिया यूनिवर्सिटी ने परीक्षा को रद्द किया, लोग बोले- शर्मनाक

पूरे देश क बिहार की शिक्षा की स्थिति के बारे में पता है। वहाँ कई विश्वविद्यालयों के सत्र तो दो वर्ष तक पीछे हैं। ऐसे में हैरान करने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की रैली के कारण एक विश्वविद्यालय ने ग्रेजुएशन की प्रस्तावित परीक्षा को रद्द कर दिया।

बिहार की महागठबंधन सरकार ने शनिवार (25 फरवरी 2023) को पूर्णिया में रैली का आयोजन किया है। रैली रंगभूमि मैदान में आयोजित होगी। इस बीच पूर्णिया विश्वविद्यालय ने रैली के कारण स्नातक द्वितीय खंड परीक्षा 2022 की 25 फरवरी को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी है।

पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की है। जारी अधिसूचना के अनुसार, अब यह परीक्षा 15 मार्च 2023 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा पहले से तय परीक्षा केंद्रों पर होगी।

रैली के कारण परीक्षा रद्द करने पर भाजपा ने बिहार की महागठबंधन सरकार पर हमला बोला है। भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार की महागठबंधन सरकार में परीक्षा की जगह राजनीतिक रैली को प्राथमिकता दी जा रही है।

बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, “महागठबंधन सरकार पूर्णिया में अपनी रैली को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एवं शिक्षण संस्थानों पर दबाव डालकर परीक्षा तक स्थगित करवा रही है। बिहार सरकार में शामिल गठबंधन दलों की रैली को सफल बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों तक को स्वागत में और भीड़ जुटाने में लगा दिया है।”

रैली के कारण परीक्षा रद्द करने को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। वहीं, इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बिहार की सरकार को घेर रहे हैं।

बता दें कि बिहार में 25 फरवरी को BJP और महागठबंधन की रैली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना और पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर में रैली को संबोधित करेंगे। वहीं, पूर्णिया में महागठबंधन की रैली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव संबोधित करेंगे। 

दिल्ली छोड़ जयपुर गया परिवार, पत्नी को अब भी नौकरी नहीं: हिन्दू विरोधी दंगों के 3 साल, जानें कैसा है बलिदानी रतन लाल के परिवार का हाल

24 फरवरी 2020 को दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान मुस्लिम भीड़ ने मौजपुर इलाके में तैनात पुलिस बल पर हमला किया था। दिल्ली पुलिस के 42 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल इस हमले में बलिदान हो गए थे। बलिदानी रतन लाल दिल्ली के बुराड़ी स्थित अमृत विहार में अपने परिवार के साथ रहते थे। फरवरी 2022 में ऑपइंडिया ने उनके घर जा कर परिवार के हालात और उनकी गैरमौजूदगी में उनकी पत्नी द्वारा किए जा रहे संघर्ष को बताया था। तब हमने यह भी बताया था कि कैसे सरकार द्वारा किए गए तमाम वादे अधूरे ही रह गए थे। एक साल बाद ऑपइंडिया ने एक बार फिर रतन लाल के परिवार से सम्पर्क किया और वर्तमान हालात को जाना।

दिल्ली छोड़ कर जयपुर बस गया परिवार

ऑपइंडिया ने बलिदानी रतन लाल की पत्नी पूनम से बात की। पूनम ने हमें बताया कि लगभग 1 साल पहले ही वो दिल्ली छोड़ चुकी हैं। अब वो राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपने बच्चों के साथ रह रहीं हैं। पूनम यहाँ अपने मायके में माता-पिता के साथ शिफ्ट हुईं हैं। उन्होंने हमें बताया कि तीनों बच्चे (2 बेटियाँ, 1 बेटा) अब जयपुर में ही रह कर पढ़ाई कर रहे है।

आर्थिक हालात बने दिल्ली छोड़ने की वजह

जब हमने रतन लाल की पत्नी पूनम से दिल्ली छोड़ने की वजह पूछी तो उन्होंने इसके पीछे अपने खराब आर्थिक हालात की बात कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा 2 हिस्सों में मिला 1 करोड़ रुपया धीरे-धीरे खर्च हो रहा था और दिल्ली पुलिस द्वारा दी गई सरकारी नौकरी अभी पढ़ाई कर रहे नाबालिग बेटे के नाम रिजर्व करवा रखी है। बलिदानी रतन लाल की थोड़ी-बहुत पेंशन भी आ रही है जो रोजमर्रा के कामों में खर्च हो जाती है। ऐसे में जमापूँजी खर्च होना पूनम को भविष्य के लिए संकट जैसा लग रहा था। आख़िरकार उन्होंने अपने 2 बच्चों के साथ दिल्ली छोड़ दिया और जयपुर अपने मायके में रहने लगीं।

बार-बार माँगी अपनी रोजी-रोटी पर किसी ने न सुनी

बलिदानी की पत्नी ने हमें बताया कि उन्होंने कई बार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को ई-मेल और पत्र लिख कर अपने लिए बुराड़ी क्षेत्र के किसी स्कूल में पढ़ाने की नौकरी माँगी पर उन पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पूनम ने हमें बताया कि अब वो दिल्ली के उपराज्यपाल को भी अपनी नौकरी के बावत पत्र प्रेषित करेंगी। हमें बताया गया कि अगर उन्हें दिल्ली में नौकरी मिल जाए तो वो एक बार फिर से अपने परिवार को ले कर लौट वापस आएँगी। पूनम के पास M A और B ED की डिग्री भी है।

CM अरविन्द केजरीवाल को भेजा गया पत्र

केजरीवाल और जे पी नड्डा और केजरीवाल दोनों के वादे अधूरे

बलिदानी रतन लाल की पत्नी ने हमें आगे बताया कि उनके पति के वीरगति पाने के बाद केजरीवाल ने उन्हें नौकरी देने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। इसी तरह पूनम के मुताबिक उन्हें जेपी नड्डा ने भी 1 करोड़ रुपए की मदद का आश्वासन दिया था, जो उन्हें अभी नहीं मिला। इसी के साथ उन्होंने कहा कि पिछले साल उन्होंने ऑपइंडिया को इंटरव्यू देते हुए जो भी कमियॉँ गिनाईं थी उसमें से एक पर भी अमल नहीं किया गया और वो सभी वादे और दावे ज्यों के त्यों अधूरे ही पड़े हैं।

आप विधायक की हरकत से घर का बड़ा नुकसान

पूनम ने हमें बताया कि बुराड़ी विधानसभा से आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा के दिए आदेश के चलते उनका दिल्ली स्थित घर मिट्टी में दब गया है। बकौल पूनम विधायक संजीव उस क्षेत्र में कोई काम करवा रहा था जिस से उनका दिल्ली स्थित घर इतना दब चुका है कि उसे फिर से ऊपर लाने के लिए उसमें ढेर सारा पैसा लगाना पड़ेगा। बलिदानी की पत्नी ने खुद के पास इतने पैसे न होने और दिल्ली के अपने घर को फ़िलहाल ताला लगा देने की ये एक बड़ी वजह बताई। उन्होंने कहा कि मिट्टी में दब जाने के चलते वो अपने दिल्ली वाले घर को किराए पर भी नहीं दे पा रहीं।

जयपुर के शहीद स्मारक पर अपने पति को किया याद

बलिदानी रतन लाल की पत्नी पूनम ने हमें बताया कि वो अपने पति के बलिदान दिवस पर जयपुर शहर में मौजूद एक शहीद स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगीं। उन्होंने बताया कि अब मीडिया से ले कर विभाग और नेताओं तक के फोन भी आने उन्हें बंद हो चुके हैं। अपना दर्द बयाँ करते हुए पूनम ने कहा कि कई लोगों को बलिदानी केवल 26 जनवरी और 15 अगस्त को ही याद आते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में अब भारतीय दूतावास पर हमला, फहराए गए खालिस्तानी झंडे: महाशिवरात्रि पर मिली थी धमकी, मंदिरों पर लिखे थे भारत विरोधी नारे

खालिस्तानी समर्थक समूहों द्वारा भारतीय प्रतिष्ठानों पर हमले जारी हैं। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के मंदिरों में तोड़फोड़ के बाद अब ब्रिस्बेन स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला किया गया और खालिस्तानी झंडे फहराए गए। क्वींसलैंड के ब्रिस्बेन में स्थित भारत की वाणिज्य दूत अर्चना सिंह ने 22 फरवरी 2023 को कार्यालय में खालिस्तान का झंडा लगा हुआ पाया था।

‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ पोर्टल के अनुसार, ब्रिस्बेन के टारिंगा उपनगर के स्वान रोड पर स्थित भारत के मानद वाणिज्य दूतावास को 21 फरवरी 2023 की रात खालिस्तान समर्थकों ने निशाना बनाया गया था। इस मामले में भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है।

सूचना मिलने के तुरंत बाद क्वींसलैंड पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर झंडे को जब्त कर लिया। इसके साथ ही इलाके में पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है। मानद कौंसुल अर्चना सिंह ने बताया, “पुलिस हमें सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्र की निगरानी कर रही है। हमें पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा है।”

यह घटना विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने के बाद हुई है। अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने वहाँ के भारतीय समुदाय को लक्षित करने वाली ‘कट्टरपंथी गतिविधियों’ के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिए जाने की बात कही थी।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया गया है, “बीजेपी और कॉन्ग्रेस शासन ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों का नरसंहार किया है। कॉन्ग्रेस ने नवंबर 1984 में सिखों का नरसंहार किया था। भाजपा के हाथ 1992 की बाबरी मस्जिद से लेकर 2002 के गुजरात दंगों तक में मुस्लिमों के खून से लथपथ हैं।”

बता दें कि पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया के हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद ब्रिस्बेन में स्थित एक हिंदू मंदिर को धमकी दी गई थी कि यदि वे महाशिवरात्रि मनाना चाहते हैं तो उन्हें खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करनी होगी।

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू लगातार खालिस्तानियों के निशाने पर रहा है। जनवरी 2023 में 20 दिनों के भीतर ही खालिस्तानियों ने 3 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करते हुए देश विरोधी और खलिस्तान के समर्थन में नारे लिख दिए थे।

खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर में पहला हमला 12 जनवरी को किया था। यह हमला मेलबर्न के BAPS स्वामीनारायण मंदिर में हुआ था। मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवार पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।

इसके बाद खालिस्तानियों ने 16 जनवरी 2023 को मेलबर्न के ही कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

वहीं, तीसरा हमला मेलबर्न के ही अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में 22 जनवरी 2023 को हमला हुआ। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद, मंदिर की दीवारों में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।

बाप से हर दिन सुनना पड़ता था र#$! गाली, 2 बार आत्महत्या की कोशिश: उर्फी जावेद ने बताया किन मुश्किलों में कटा बचपन

मॉडल उर्फी जावेद सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों और पोस्ट के लिए चर्चा में बनी रहती हैं। हाल ही में उन्होंने फैशन मैगजीन डर्टी के लिए फोटोशूट कराया। इस दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी बात की। उर्फी ने बताया कि अपने पिता के अत्याचारों के कारण उसने 2 बार खुदकुशी करने की सोची। उर्फी ने अपने पिता पर गालियाँ देने और पिटाई करने का इल्ज़ाम लगाया।

डर्टी मैगजीन के लिए फोटोशूट और इंटरव्यू के दौरान उर्फी जावेद ने निजी जिंदगी से जुड़े कई खुलासे किए। इस दौरान उर्फी ने कहा कि उनके पिता उनकी बहनों व उनकी माँ के साथ मारपीट किया करते थे। गाली-गलौज तो रोज की बात हो गई थी। उर्फी ने कहा कि हर दिन यदि आपको र*^#! जैसे शब्द सुनने पड़ें तो आप बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं। उर्फी ने कहा, “मैंने दो बार खुदकुशी की कोशिश की।”

उर्फी जावेद के मुताबिक उनकी परवरिश लखनऊ में हुई थी। उनके माता-पिता के पाँच बच्चों में उर्फी दूसरी संतान थीं। पिता सख्त थे और हर बात पर पाबंदियाँ लगाते थे। बकौल उर्फी बहुत कम घर से निकलना होता था लेकिन वो टीवी बहुत देखती थीं और फैशन में उनकी दिलचस्पी हमेशा से थी। उर्फी ने कहा, “मुझे फैशन की ज्यादा जानकारी तो नहीं थी लेकिन मुझे पता होता था कि क्या पहनना है। मैं दूसरों से अलग और सबसे अच्छी दिखना चाहती थी। जैसे जब मैं किसी पार्टी में जाती हूँ तो सब मेरी तरफ देखते हैं।

उर्फी ने इंटरव्यू में आगे यह भी बताया कि बड़े होने तक वो पैसों के लिए परेशान रहती थीं। उनके पास पैसे नहीं थे लेकिन एक अमीर लड़की बनने का ख्वाब पल रहा था। बता दें कि उर्फी जावेद ने डर्टी मैगजीन के लिए छह अलग-अलग डिजाइनरों जिसमें अनामिका खन्ना और राहुल मिश्रा जैसे लोग शामिल हैं, द्वारा डिजाइन किए गए लुक में फोटोशूट कराया। अपने अजीबोगरीब पहनावे के लिए सुर्खियों में रहने वाली उर्फी जावेद कई बार ट्रोल भी हो चुकी हैं।

अल्लाह और ओम पर मौलाना मदनी ने फैलाया प्रपंच, अल्ला का संस्कृत कनेक्शन बता शंकराचार्य ने दी धोबी पछाड़

दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन में मौलाना अरशद मदनी ने अल्लाह और ओम को एक बताकर जो विवाद कुछ दिन पहले खड़ा किया, वह अभी भी थमा नहीं है। बुधवार (22 फरवरी, 2023) को वाराणसी में अल्लाह और ओम को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि अल्ला (Alla) संस्कृत भाषा का शब्द है। उन्होंने संदर्भ सहित इसकी व्याख्या की। इस विवाद से पहले भी स्वामी निश्चलानंद सरस्वती इस बारे में विस्तार से समझा चुके हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने शंकराचार्य से मौलाना मदनी के दावों को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अल्ला शब्द संस्कृत का है। उनके अनुसार जो लोग संस्कृत व्याकरण के जानने वाले हैं, उन्हें यह ज्ञात होगा। उन्होंने लघुकौमुदी (लघुसिद्धान्तकौमुदी) नामक संस्कृत व्याकरण पुस्तक पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि अल्ला शब्द संस्कृत का है, शक्ति और मातृ शक्ति के लिए इसका प्रयोग होता रहा है।

नीचे जो वीडियो है, उसमें यह प्रश्न और उत्तर 3 मिनट 33 सेकेंड से सुना जा सकता है। इसमें आगे स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने जोर देते हुए कहा कि सभी के पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू ही थे। उन्होंने बृहदारण्यक उपनिषद् का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्यों की उत्पत्ति मनु-शतरूपा द्वारा हुई है।

अल्लाह (Allah) और अल्ला (Alla) शब्द का विवाद नया नहीं है। इस विवाद के पहले भी लोग शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से अल्ला शब्द और अल्लोपनिषद (अल्ला उपनिषद) को लेकर सवाल पूछ चुके हैं। उन्होंने तब भी उसका जवाब दिया था। नीचे के वीडियो में 40 वें सेकेंड से शंकराचार्य अमरकोष और लघुसिद्धान्तकौमुदी का जिक्र करते हुए कह रहे हैं कि व्याकरण के इन पुस्तकों में अल्ला शब्द शक्ति के पर्यायवाची के लिए उपयोग किया गया है।

वहीं 1 मिनट के आगे शंकराचार्य निश्चलानंद उपनिषदों पर बात करते हैं। यहाँ शंकराचार्य बताते हैं कि मुख्य उपनिषदों के अलावा चौखम्बा प्रकाशन ने उपनिषद संग्रह में अल्लोपनिषद नाम से एक उपनिषद का प्रकाशन किया है, जिसमें नमाज ज्यों का त्यों है। शंकराचार्य जब यह कह रहे होते हैं तो उनके मुख पर भाव परिवर्तित हो जाते हैं, चेहरे पर स्पष्ट तौर से हल्की मुस्कान देखी जा सकती है। अल्लोपनिषद और नमाज का जिक्र सुनते ही सभा में बैठी भीड़ की ओर से एक हल्की हँसी भी सुनी जा सकती है।

बता दें कि मान्यता प्राप्त 108 उपनिषदों और 13 प्रमुख उपनिषदों में अल्लोपनिषद शामिल नहीं है। स्पष्ट है कि शंकराचार्य ने अल्लोपनिषद और उसमें नमाज का जिक्र करते समय व्यंग्यात्मक भाव में जवाब दिए थे। वीडियो में आगे उन्होंने अल्ला (Alla) शब्द की वही व्याख्या की, जो व्याख्या उन्होंने दो दिन पहले 22 फरवरी 2023 को की। जाहिर है शंकराचार्य झूठ और प्रपंच का जवाब उसी शैली में दिए। मीडिया और सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे अल्लाह (Allah) से जोड़ कर देखा, भ्रमित होकर प्रतिक्रिया भी दी।

MLA राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह का मर्डर, एक गनर की भी मौत: हमलावरों ने गोली और बम बरसाए, गैंगस्टर अतीक अहमद पर आरोप

उत्तर प्रदेश के बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड के प्रमुख गवाह उमेश पाल की शुक्रवार (24 फरवरी 2023) को हत्या कर दी गई। इस हमले में उमेश पाल के गनर संदीप मिश्रा की भी मौत हो गई है, जबकि दूसरे गनर राघवेंद्र सिंहगंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। राजू पाल की हत्या का आरोप गैंगस्टर अतीक अहमद और उसके भाई पर है।

हमलावरों ने यूपी के प्रयागराज स्थित उमेश पाल के घर में घुसकर इस हत्या को अंजाम दिया है। अभी तक हत्यारों के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। जिस समय हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय उमेश पाल कोर्ट से गवाही देकर घर लौटे थे। जैसे ही वे अपनी कार से उतर कर घर के गेट तक पहुँचे, तभी 4-5 हमलावरों ने उन पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। जब वह घर के अंदर भागे तो उन पर बम से हमला कर दिया गया।

प्रयागराज के धूमनगंज स्थित जयंतीपुर में हुई हत्या में परिजनों ने अतीक अहमद और उसके गिरोह पर आरोप लगाया है। उमेश पाल के परिवार के मुताबिक, इस हत्याकांड में देशवासी और अतीक अहमद गिरोह शामिल है। वहीं, जिले के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचकर सीसीटीवी फुटेज की जाँच कर रहे हैं।

बता दें कि जब बसपा विधायक राजू पाल की हत्या की गई थी, उस समय वह इलाहाबाद पश्चिम से विधायक थे। राजू पाल को 25 जनवरी 2005 को सलेमसराय में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी पत्नी पूजा पाल कौशाम्बी की चायल सीट से समाजवादी पार्टी की विधायक हैं।

राजू पाल की हत्या में जेल में बंद पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके छोटे भाई पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ सहित कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल थे। वह राजू पाल की पत्नी पूजा पाल के फुफेरे भाई थे। उमेश अतीक अहमद और उसके गिरोह के खिलाफ अब तक पांच FIR करा चुके थे। 

राजू पाल की हत्या की जाँच CBI कर रही है। उमेश पाल को कई बार जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। पूजा पाल ने भी कई बार उमेश पाल की हत्या की आशंका जताई थी। गौरतलब है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में अतीक अहमद ने राजू पाल की साल 2004 में हत्या करवा दी थी।

दरअसल, यूपी में साल 2004 के लोकसभा में फूलपुर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर अतीक अहमद को सांसद चुना गया था। इसके बाद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर अतीक अहमद विधायक चुना गया था। खाली हुए इस सीट के लिए सपा ने सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया था।

वही, सपा के विरोध में बसपा ने राजू पाल को मैदान में उतारा था। इस उपचुनाव में राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ को हरा दिया था। उपचुनाव में जीत दर्ज कर राजू पाल पहली बार विधायक बने थे। विधायक बनने के कुछ महीने बाद राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें देवी पाल और संदीप यादव नामक शख्स की भी मौत हुई थी। वहीं, दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इस हत्याकांड में उमेश के गवाह बनते ही अतीक गिरोह ने उन पर कई बार हमले किए, लेकिन वे बच निकले थे। अतीक के गिरोह ने 28 फरवरी 2008 को उनका अपहरण कर लिया गया था। इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उन्हें धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने राजू पाल की हत्या के केस में गवाही दी तो उन्हें मार दिया जाएगा। बाद में उन्हें छोड़ा गया था।

इसके बाद उन्होंने अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद भी अतीक के गुंडे उनके पीछे पड़े रहे। 11 जुलाई 2016 को उमेश गवाही देने कचहरी गए थे। उन पर कचहरी परिसर में ही जानलेवा हमला किया गया। इस मामले में भी उन्होंने अतीक और अशरफ सहित कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

साल 2016 में धूमनगंज में जीतेंद्र पटेल नाम के शख्स की हत्या में अतीक के गिरोह ने उमेश को नामजद कराकर फँसाने की कोशिश की थी। हालाँकि, जाँच में वे बरी हो गए थे। इसके बाद साल 2022 में उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। इस मामले में भी उमेश ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। गुरुवार (23 फरवरी 2023) को को उमेश पाल ने अतीक अहमद और उसके गिरोह के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज कराई थी।

दीप सिद्धू से संबंध और आतंकी भिंडरावाले के गाँव की यात्रा: क्या है ‘वारिस पंजाब दे’ और कौन है उसका चीफ अमृतपाल, जानिए दुबई कनेक्शन

पंजाब में हथियारबंद समर्थकों के साथ अजनाला थाने को कब्जे में लेकर अपने साथी को छोड़ने के लिए पुलिस को विवश करने वाले अमृतपाल सिंह की आजकल चर्चा है। उसकी तुलना मारे गए खालिस्तानी आतंकी जनरैल सिंह भिंडरावाले से की जा रही है। अमृतपाल ‘वारिस पंजाब दे’ नाम के संगठन का प्रमुख है।

दरअसल, अमृतपाल के एक साथी लवप्रीत सिंह तूफान को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अमृतपाल ने थाने को ही घेर लिया। पुलिस के आश्वासन के बाद उसने थाने से घेरा हटाया। अमृतपाल के दबाव में पंजाब पुलिस के एक डीएसपी ने अदालत में आवेदन दिया और लवप्रीत तूफान को हिरासत से रिहा करने का निवेदन किया।

पुलिस ने कोर्ट में दलील दी कि लवप्रीत तूफान संबंधित मामले में शामिल नहीं था और अपराध के समय मौजूद नहीं था। पुलिस की दलील के बाद वहाँ की स्थानीय कोर्ट ने लवप्रीत को रिहा करने के आदेश दे दिया। इसके बाद लवप्रीत को छोड़ दिया गया।

पंजाब प्रशासन को घुटने पर ला देने वाले अमृतपाल और उसके संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ की चर्चा हो रही है। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह कौन सा संगठन है, जिसने एक राज्य के प्रशासन को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।

कौन है अमृतपाल सिंह

अमृतपाल सिंह को खालिस्तान समर्थक माना जाता है। वह कई बार खालिस्तान को लेकर अपनी स्पष्ट मंशा जाहिर कर चुका है। उसने यहाँ तक कह दिया है कि पंजाब का बच्चा-बच्चा खालिस्तान खालिस्तान चाहता है। उसने कहा था कि खालिस्तान की भावना को कोई दबा नहीं सकता। इतना ही नहीं, उसने यहाँ तक कह दिया कि उसे जरूरत पड़ने पर हिंसा करने से भी कोई परहेज नहीं है।

अमृतपाल सिंह दुबई में रहता था। वह 10 साल बाद कुछ ही समय पहले भारत आया है। भारत आने से पहले वह दुबई से जॉर्जिया भी गया था। किसान आंदोलन के दौरान लाल किले पर हुई हिंसा के मुख्य आरोपित दीप सिद्धू की रोड एक्सीडेंट में मौत के बाद अमृतपाल को ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया बनाया गया है। इस संस्था को दीप सिद्धू ने स्थापित किया था। अमृतपाल के दस्तारबंदी के दौरान ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे थे।

वह गाँव-गाँव घुमकर लोगों से मिल रहा है और लोगों से खालिस्तान को लेकर समर्थन जुटा रहा है। वह सिख के बारे में लोगों से बात कर रहा है और सरकार विरोधी मानसिकता का प्रसार कर रहा है। उसने सिख धर्म के प्रचार के लिए एक महीने लंबे ‘पंथिक वहिर’ का भी आयोजन किया है। उस पर खुफिया एजेंसियों की कड़ी निगाह है।

उसने ये भी कहा है कि शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सिखों के हित में काम नहीं कर रही है। उसने कहा है कि यदि हिंदू राष्ट्र की माँग से सरकार को दिक्कत नहीं है तो खालिस्तान की बात करने से भी सरकार को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

अमृतपाल पर अमृतसर के अजनाला में एक सिख युवक के अपहरण का केस दर्ज है। इसमें उसके साथी तूफ़ान सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद अमृतपाल ने पंजाब पुलिस को भी धमकी दी थी। इतना ही नहीं, उसने गृहमंत्री अमित शाह को भी धमकी दी थी।

अमृतपाल सिंह ने कुछ दिन पहले अमित शाह का हश्र पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जैसा करने की धमकी दी थी। अमृतपाल 19 फरवरी 2023 को मोगा जिले के बुधसिंह वाला गाँव में पहुँचा था। पंजाबी सिंगर दीप सिद्धू की बरसी के मौके पर उसने कहा था कि इंदिरा ने भी सिखों को दबाने की कोशिश की थी, क्या हश्र हुआ? अब अमित शाह अपनी इच्छा पूरी करके देख लें।हालाँकि, बाद में अमृतपाल अपनी बात से पलट गया था।

अमृतपाल खुद को खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले 2.0 के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। वह भिंडरावाले के गाँव रोड में अक्सर जाते रहता है। भिंडरावाले अलगाववादी खालिस्तान आंदोलन का प्रमुख चेहरा था। खालिस्तानी आतंकवादियों और भारतीय सेना के बीच 6 जून 1984 को हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में भिंडरावाले मारा गया था।

कहा जाता है कि अमृतपाल सिंह को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन मिला हुआ है। वह उसी के सहयोग से पंजाब में अराजकता फैलाने की फिर से कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही उसे अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा आदि देशों में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों का सहयोग मिल रहा है।

क्या है ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन

वारिस पंजाब दे की स्थापना पंजाबी अभिनेता और गायक से एक्टिविस्ट बने दीप सिद्धू ने की थी। दीप खालिस्तान समर्थक सिमरनजीत सिंह मान के समर्थक था। किसान आंदोलन के नाम पर 26 जनवरी 2021 को दिल्ली के लाल किले पर हिंसा से 8 महीने बाद सिद्धू ने चंडीगढ़ में इस संगठन की नींव रखी थी।

संगठन को लॉन्च करते समय दीप सिद्धू ने कहा था कि यह संगठन ‘पंजाब के अधिकारों के लिए केंद्र के खिलाफ लड़ेगा और कभी भी पंजाब की संस्कृति, भाषा, सामाजिक ताने-बाने और अधिकारों पर कोई हमला होने पर आवाज उठाएगा’।

अपने संगठन की स्थापना के तुरंत बाद दीप सिद्धू ने सिमरनजीत सिंह मान की चरमपंथी समर्थक खालिस्तान पार्टी SAD (अमृतसर) के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया और पंजाब चुनाव से पहले उनके लिए प्रचार किया। हालाँकि, पंजाब चुनाव से पाँच दिन पहले 15 फरवरी 2022 को एक सड़क दुर्घटना में सिद्धू की मौत हो गई।

कुछ समय पहले एक शूटर संदीप सिंह सनी को गिरफ्तार किया गया था। पंजाब के अमृतसर में सुल्तानविंद का करने वाला सनी वारिस पंजाब दे का सदस्य था। इसके अलावा, कई अन्य शूटर एवं अपराधियों का संबंध भी इस संगठन से पाया गया है।

अमृतपाल सिंह ने जब ‘वारिस पंजाब दे’ की कमान संभाली तो सिद्धू के परिवार ने उससे दूरी बना ली। सिद्धू परिवार ने दावा किया कि अमृतपाल को कभी भी उनके बेटे के संगठन के नेता के रूप में नामित नहीं किया गया था। घरवालों का कहना है कि दीप अलगाववादी नहीं था।

लुधियाना में वकालत करने वाले दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि वे लोग अमृतपाल से कभी नहीं मिले। उन्होंने यह भी दावा कि कि दीप भी अमृतपाल से नहीं मिला था। वह कुछ समय तक अमृतपाल फोन पर दीप से संपर्क में रहा था, लेकिन बाद में दीप ने उससे दूरी बना ली थी।

मनदीप का कहना है कि अमृतपाल असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दीप के संगठन का दुरुपयोग कर रहा है। वह दीप के सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी उपयोग कर रहा है और उस पर पोस्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल पंजाब में अशांति फैला रहा है।

खालिस्तान के लिए माहौल बनाने हेतु स्थापित इस संगठन का पद संभालते ही अमृतपाल सक्रिय हो गया। कहा जाता है कि अमृतपाल को ISI ने सिखों के धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में खाली वैक्युम को भरने के लिए चुना है और उसे बढ़ावा दे रही है।

चॉकलेट देने के बहाने बुलाया, कमरे में ले जाकर रेप किया: 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाला सिक्योरिटी गार्ड अजीमुद्दीन गिरफ्तार, पुलिस के सामने गुनाह कबूला

झारखंड के राँची के डोरंडा थाना में एक 6 साल की लड़की के रेप का मामला सामने आया है। आरोपित अपार्टमेंट में गार्ड का काम करने वाला मोहम्मद अजीमुद्दीन नाम का शख्स है। पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर लिया है। वो डोरंडा के पारसटोली का निवासी है।

बताया जा रहा है कि लड़की उसी अपार्टमेंट के कैंपस में खेलने आती थी जहाँ उसकी (आरोपित की) ड्यूटी थी। इसी बात का फायदा उठाते हुए अजीमुद्दीन ने उसे चॉकलेट का बहाना देकर फुसलाया और फिर कमरे में ले जाकर उसका रेप किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब आरोपित ने बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कीं, तभी बच्ची इतना डर गई कि वह किसी तरह उसके चंगुल से भागी और घर आकर परिजनों को सारी बातें बताईं।

घटना की जानकारी होते ही घरवाले आग बबूला हो गए। पहले उन्होंने जाकर उसे पीटा और उसके बाद पुलिस को सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची से बदसलूकी करने की बात को आरोपित पुलिस के सामने भी स्वीकार कर चुका है। कुछ रिपोर्ट्स में आरोपित का नाम सिराजुद्दीन भी बताया जा रहा है। उसके ऊपर पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

घटना के संबंध में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट किया है। उन्होंने इस घटना के पीछे हेमंत सोरेन सरकार की तुष्टिकरण को जिम्मेदार बताया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा,

“राँची शहर के डोरंडा में जिहादी ने फिर से एक मासूम बच्ची को अपना शिकार बनाया है। जानकारी के अनुसार मुहम्मद अजीमुद्दीन नामक एक सिक्योरिटी गार्ड ने महज़ छह साल की बच्ची का यौन शोषण किया। बच्ची को गोली मार कर नदी में फेंक देने की धमकी देकर कई बार वहशीपन का शिकार बनाया गया।”

उन्होंने लिखा, “हेमंत सोरेन की तुष्टिकरण के चलते ऐसे अपराधियों का मनोबल सातवें आसमान पर है। इनके मन में क़ानून प्रशासन का भय ख़त्म हो चुका है।”