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तलवार लेकर खचाक से काटी थी युवक की 5 अंगुलियाँ…: पंजाब से खौफनाक Video वायरल होने पर 2 गिरफ्तार, पुलिस ने गाड़ी से खींचकर निकाला

पंजाब के मोहाली से अंगुलियाँ काटने की वायरल हुई एक खौफनाक वीडियो ने पिछले दिनों सबके होश उड़ा दिए थे। वीडियो में दिख रहा था कि कैसे युवक का हाथ पकड़कर बेरहमी से उसके हाथ से अंगुलियाँ काटी गईं। अब इसी मामले में खबर है कि पुलिस ने शनिवार (25 फरवरी) को कार्रवाई करते हुए 2 युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी राजपुरा के शंभू टोल प्लाजा के पास हुई।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आरोपितों के नाम गौरव शर्मा और तरुण हैं। पुलिस ने जब इन्हें पकड़ा तब ये गाड़ी में जा रहे थे। पुलिस ने पहले इनकी कार के टायरों पर गोली चलाई, फिर दोनों को गाड़ी से निकालकर गिरफ्तार किया।

मोहाली के वरिष्ठ एसपी संदीप गर्ग ने जानकारी दी कि ये दोनों भूपी राणा गैंग के सदस्य हैं। इन्होंने अंबाला से राजपुरा जाते हुए पुलिस से भागने की बहुत कोशिश की, पर बीच में सीआईए टीम पर गोली चलाने लगे, जिसके बाद टीम ने भी गाड़ी के टायरों पर गोली मारकर इन्हें रोका।

पुलिस के मुताबिक, दोनों तरफ से हुई फायरिंग के बीच गौरव ने गलती से खुद ही को गोली मार ली, जिसमें वह घायल हुआ। पुलिस ने इन्हें पकड़ने के बाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया है। छानबीन में इनके पास से एक मारूती स्विफ्ट के अलावा एक .9mm की पिस्तौल, तीन बुलेट और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ है।

बता दें कि दोनों बदमाशों को पकड़ने की घटना सीसीटीवी पर कैद हुई। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे पुलिस ने आरोपितों का पीछा किया और फिल्मी अंदाज में एक शीशा तोड़कर आरोपित को बाहर निकला। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वो जल्द ही अन्य लोगों को भी गिरफ्तार करेंगे।

तलवार से अंगुली काटने का वीडियो वायरल

उल्लेखनीय है कि मोहाली से हरदीप नाम के शख्स की अंगुलियाँ काटने का वीडियो बीते दिनों मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने सोशल मीडिया पर साझा किया था। इस भयानक वीडियो में दिख रहा था कि कैसे पहले युवक की हथेली अंगुलियाँ खोलकर जमीन पर रखी गईं और उसके बाद उसे धारदार हथियार से एक बार में काट दिया गया। इसके बाद जो अंगुलियाँ शरीर से लगी रहीं, उन्हें भी खींचकर उखाड़ दिया गया।

अपराध को देने के पीछे मुख्य मकसद था कि आरोपित गौरव अपने भाई के हत्यारों का नाम जान पाए। मगर जब इसमें वो असफल रहा तो उसने हरदीप की अंगुलियाँ काट डालीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना से कुछ दिन पहले ही गौरव जेल से रिहा हुआ था। उस पर बालोंगी थाने में हत्या के प्रयास समेत तीन मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस का कहना है कि गौरव अपने भाई बंटी शर्मा की हत्या का बदला लेना चाहता था। 8 फरवरी को ये लोग ड्राइवर का काम करने वाले हरदीप के घर गए और खुद को पुलिस बताकर उसे कार में बैठाया। इसके बाद बरमाजरा के जंगलों में ले जाकर हरदीप को पीटा भी क्योंकि इन्हें गौरी के भाई के हत्यारे का नाम जानना था। जब हरदीप ने कुछ बताने से मना किया तो उन्होंने इस खौफनाक कृत्य को अंजाम दिया। साथ ही वीडियो भी रिकॉर्ड की।

CBI की पूछताछ से पहले AAP को सताया मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का डर: घर के बाहर सुरक्षा टाइट, CM केजरीवाल ने लिखा- जल्द जेल से लौटें

शराब घोटाले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने पूछताछ के लिए बुलाया है। मनीष सिसोदिया अपनी माँ का आशीर्वाद लेकर CBI कार्यालय के लिए निकले। इसके साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी की भी आशंका जाहिर की है। वहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी गिरफ्तारी की आशंका जाहिर करते हुए कहा कि समाज के लिए जेल जाना दूषण नहीं, भूषण होता है।

पूछताछ से पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आवास के बाहर चार-परत के बैरिकेड्स और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएफए) की तैनाती कर सुरक्षा को कड़ी कर दी गई है। वहीं, सीबीआई मुख्यालय के आसपास भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। माना जा रहा है कि मनीष सिसोदिया सुबह 10:30 बजे के करीब दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुँचेंगे।

सीबीआई के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ के लिए प्रश्नों की एक पूरी लिस्ट तैयार कर ली है। दरअसल, मनीष सिसोदिया को पिछले रविवार (19 फरवरी 2023) को ही बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने मौजूदा बजट सत्र का हवाला दिया था। इसके बाद सीबीआई ने उन्हें 26 फरवरी 2023 को पेश होने के लिए कहा था।

मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी ने उनकी गिरफ्तारी का डर जाहिर किया है। मनीष सिसोदिया सीबीआई कार्यालय के लिए निकल चुके हैं। सीबीआई कार्यालय पहुँचने से पहले वे राजघाट जाएँगे और महात्मा गाँधी की समाधि को नमन करेंगे।

मनीष सिसोदिया ने ट्वीट किया, “आज फिर CBI जा रहा हूँ, सारी जाँच में पूरा सहयोग करूँगा। लाखों बच्चो का प्यार व करोड़ों देशवासियो का आशीर्वाद साथ है। कुछ महीने जेल में भी रहना पड़े तो परवाह नहीं। भगत सिंह के अनुयायी हैं। देश के लिए भगत सिंह फाँसी पर चढ़ गए थे। ऐसे झूठे आरोपों की वजह से जेल जाना तो छोटी सी चीज़ है।”

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ट्वीट का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “भगवान आपके साथ है मनीष। लाखों बच्चों और उनके पेरेंट्स की दुआयें आपके साथ हैं। जब आप देश और समाज के लिए जेल जाते हैं तो जेल जाना दूषण नहीं, भूषण होता है। प्रभू से कामना करता हूँ कि आप जल्द जेल से लौटें। दिल्ली के बच्चे, पैरेंट्स और हम सब आपका इंतज़ार करेंगे।”

वहीं, दुर्गेश पाठक और राघव चड्ढा सहित कई नेताओं ने आम आदमी पार्टी के कई नेताओं को हाउस अरेस्ट करने का आरोप लगाया है।

‘असली हिंसा तो अभी बाकी है’: अमृतपाल ने फिर दी धमकी, बोला- सिकंदर-मुगल-अंग्रेज हमें नहीं कुचल सके, खालिस्तान राज का सपना पूरा होगा

थाने पर कब्जा कर पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार को पीछे हटने के लिए मजबूर करने वाले खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह ने हिंसा की खुली धमकी दी है। उसने कहा कि अजनाला थाने पर कब्जा हिंसा नहीं थी। असली हिंसा तो अभी बाकी है।

अमृतपाल ने अजनाला में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “आप नारेबाजी और (खालिस्तानी) झंडे फहराने को हिंसा के रूप में गिन रहे हैं.. आपने अब तक असली हिंसा नहीं देखी है। असली हिंसा अभी देखना बाकी है।” हिंसा को पवित्र बताते हुए उसने कहा, “खालिस्तान की विचारधारा और खालिस्तानी राज का सपना कभी नहीं मिटेगा।”

अमृतपाल ने कहा, “दबे-कुचले लोग हिंसा का रास्ता चुनते हैं। लोग कहते हैं कि हिंसा बहुत बुरी है, लेकिन हिंसा बहुत पवित्र है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा- जब आपके पास कोई विकल्प नहीं है तो तलवार उठाना सही है।” उसने कहा कि पंजाब की संस्कृति के दमन और संसाधनों के दोहन का अंतिम परिणाम हिंसा होगा।

भारतीयता पर सवाल उठाते हुए अमृतपाल ने कहा, “भारतीय संस्कृति क्या है? भारतीय पहनावा क्या है और भारतीय भोजन क्या है? कुछ नहीं है। यह कहना कि हम सब भारतीय हैं, झूठ है। हम क्यों कहें कि हम भारतीय हैं? राष्ट्रवाद की डोरी बहुत पतली होती है, यह कभी भी टूट सकती है।”

पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए खालिस्तानी अमृतपाल ने बलूचिस्तान का भी जिक्र किया। और कहा कि भारत ने जो बलूचिस्तान में किया है, पाकिस्तान वही कश्मीर में करेगा। उसने कहा कि खालिस्तान आंदोलन को विफल करने के किसी भी कदम का कोई परिणाम नहीं निकलेगा।

अमृतपाल ने धमकी देेते हुए कहा, “हमें ना ही पंजाब सरकार और ना ही केंद्र सरकार रोक सकती है। हम राजनीतिक खेल नहीं खेलना चाहते। इसे कोई नहीं रोक सकता है। न तो सिकन्दर रोक सका, न मुगल, न अंग्रेज कुचल सके, हिन्दुस्तान भी दबा नहीं सका। पंजाब एक दिन आजाद होगा।”

अजनाला थाने पर कब्जा करने वाले उसके समर्थकों पर कार्रवाई करने के पंजाब DGP गौरव यादव के बयान पर अमृतपाल भड़क गया है। उसने अजनाला थाने पर कब्जा करने वाले अपने समर्थकों पर किसी भी कार्रवाई पर चेतावनी दी है। अमृतपाल ने कहा, “प्रशासन को कोई भी कार्रवाई करने से पहले अजनाला थाने पहुँचने वाले लोगों की संख्या का ध्यान रखना चाहिए।”

केंद्र सरकार ने अमृतपाल के इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया है। रिपोर्टों की मानें तो अमृतपाल के नाम से इंस्टाग्राम पर तकरीबन 35 अकाउंट हैं। सरकार ने इनमें से ब्लू टिक (वेरिफाइड) वाले अकाउंट को बंद किया है। अमृतपाल के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है।

बता दें कि पंजाब में हथियारों से लैश खालिस्तान समर्थकों ने गुरुवार (23 फरवरी, 2023) को अमृतसर स्थित अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। हजारों की संख्या में जुटे निहंग सिख तलवार और बंदूक आदि हथियारों के साथ थाने की तरफ बढ़े।

इस दौरान उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और थाने में दाखिल हो गए। खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह के खिलाफ FIR और उसके करीबी लवप्रीत तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। बाद में उसके दबाव में लवप्रीत तूफान को छोड़ दिया गया।

23 फरवरी को खालिस्तान समर्थक भीड़ के उपद्रव के बावजूद पंजाब पुलिस ने कोई ऐक्शन नहीं लिया। इस पर पंजाब पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था।

गौरव यादव ने बताया कि गुरु ग्रंथ साहिब की आड़ लेकर पुलिसकर्मियों पर हमला भी किया गया इस हमले में छह लोग घायल हो गए थे। डीजीपी के अनुसार, यदि पुलिस ने गोलीबारी की होती तो हालात खराब हो सकते थे। हमने संयम के साथ काम लिया।

फटे किनारे, मैला कपड़ा: अंबाला के सरकारी दफ्तर में हुआ तिरंगे का अपमान, FIR दर्ज

पंजाब में एक ओर जहाँ आए दिन खालिस्तानी कानून व्यवस्था को चुनौती देने पर तुले हैं वहीं इस बीच खबर है कि अंबाला शहर के नगर निगम कार्यालय में तिरंगे का अपमान किया गया।

बताया जा रहा है कि अंबाला नगर निगम के ऑफिस पर फटा तिरंगा लगा मिला, जिसके बाद एएसआई सतीश कुमार ने इस संबंध में शिकायत दी और 25 फरवरी 2023 को आपराधिक मामला दर्ज हुआ।

शिकायत में उन्होंने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर दिखा था कि नगर निगम के कार्यालय पर एक तिरंगा लगा है जो मैला भी है और फटा हुआ भी। उन्हें ये तिरंगे का अपमान लगा इसलिए उन्होंने इस पर कार्रवाई की माँग की।

एएसआई सतीश की शिकायत पर राष्ट्रीय तिरंगे के अपमान की धारा 2 के तहत अंबाला शहर थाने में केस को दायर किया गया है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि नगर निगम कार्यालय पर पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर नगर निगम के अधिकारियों द्वारा झंडा फहराया गया था और तब से उन्होंने इसको बदला ही नहीं। झंडे का कपड़ा पुराना हो चुका था और किनारों से फट भी गया था। अब मामले की जाँच चल रही है। रिकॉर्ड माँगा गया है। पता लगाया जा रहा है कि तिरंगे की देख-रेख का जिम्मा किसका होता है। आरोपित का पता लगने पर उसके ऊपर कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय ध्वय को लगाने के लिए बहुत नियम होते हैं। उसे कचरे में या अन्य जगहों पर फेंकना बिलकुल निषेध है। अगर कोई फिर भी ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसको सख्त सजा मिल सकती है। पिछले साल ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत जगह-जगह तिरंगे लगाए गए थे। सरकारी कार्यालयों से लेकर घर और निजी दफ्तरों में भी झंडे फहरते दिखे थे। इस अभियान से पहले केंद्र सरकार ने फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 में संशोधन किया था जिसमें अनुमति दी गई थी कि राष्ट्रीय धव्ज को रात में भी खुले में फहराया जा सकता है। उससे पहले तिरंगे को केवल सूर्योदय और सूर्याअस्त के बीच ही फहराने की अनुमति थी।

‘हर 3 साल में नीतीश कुमार को आता है PM बनने का सपना’: बिहार CM पर भड़के अमित शाह, कहा- कभी नहीं देंगे BJP में एंट्री

बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार (25 फरवरी 2023) को बिहार के लौरिया में आयोजित एक रैली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा है। अमित शाह ने कहा कि नीतीश को हर तीन साल पर प्रधानमंत्री बनने का सपना आता है। इसके लिए वे कभी जंगलराज के प्रणेता लालू यादव की गोद में बैठ गए और सोनिया गाँधी की चरणों में लेेट गए।

अमित शाह ने कहा, “नीतीश ने जिस जंगलराज के खिलाफ लड़कर बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई, उन्हीं लालू यादव की गोद में जाकर बैठ गए। नीतीश बाबू बहुत आया राम-गया राम कर लिए हैं। अब बीजेपी के दरवाजे उनके लिए बंद हो गए हैं।” उन्होंने कहा कि बिहार में जंगलराज है और इसकी मुक्ति का एक ही मार्ग है भाजपा की सरकार।

उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन वादे के अनुसार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) का गठबंधन पानी और तेल जैसा है। दोनों कभी नहीं मिलते हैं। आरजेडी तेल और जेडीयू पानी है।

गृहमंत्री ने कहा कि पीएम बनने के लिए नीतीश कुमार कॉन्ग्रेस और आरजेडी की शरण में गए और बिहार का बंटाधार कर दिया। उन्होंने कहा कि आज बिहार की कानून व्यवस्था ध्वस्त है।हत्या, डकैती, अपहरण आम है। बोलने वाले पत्रकारों की हत्या हो रही है। उन्होंने कहा कि आज लालटेन की लौ से पूरा बिहार धधक रहा है। जंगलराज चल रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नीतीश ने लालू के बेटे को सीएम बनाने का वादा किया है, लेकिन तारीख नहीं बता रहे हैं। लोकतंत्र में पारदर्शिता होनी चाहिए। अगर वादा किया है तो तारीख बताएँ कि वो तेजस्वी को कब मुख्यमंत्री बनाएँगे। उन्होंने कहा कि अभी तो आधा जंगलराज आया है। तेजस्वी के आने से बिहार में पूरा जंगलराज आ जाएगा।

नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कुछ लोगों ने नीतीश को पीएम पद का झुनझुना पकड़ा दिया है। इसके चक्कर में वे विकासवादी से अवसरवादी बन गए। वे करोड़ों रुपए का विमान भी खरीद रहे हैं, मगर केंद्र में जगह खाली नहीं है। साल 2024 में प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ही आने वाले हैं।

शाह ने कहा कि 15,000 करोड़ रुपए के तीन हाइवे प्रोजेक्ट पीएम मोदी ने दिए। पहला बेतिया-पटना-तमकुही तक। दूसरा गोरखपुर से सिलीगुड़ी और तीसरा बेतिया-पटना। लेकिन, नीतीश कुमार ने जमीन ही नहीं दी, क्योंकि लालू यादव का दबाव ह। उन्होंने कहा कि शराबबंदी में नक़ली शराब बेची जा रही है।

10 दिनों के भीतर पुलवामा को दोहराने की थी साजिश, लेकिन भारतीय सेना ने हमलवारों को कर दिया था ढेर: KJS ढिल्लों की किताब में खुलासा, देश ने खोए थे 2 बहादुर जवान

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले (14 फरवरी, 2019) के 10 दिनों के भीतर एक और पुलवामा जैसा हमला करने की साजिश थी। इस हमले को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया था। चिनार कॉर्प्स के पूर्व कमांडर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने अपनी किताब में इस बात का खुलासा किया है। केजेएस ढिल्लों ने अपनी किताब ‘कितने गाजी आए, कितने गाजी गए’ में विस्तार से बताया है कि पुलवामा हमले के बाद किस तरह दूसरे आत्मघाती हमले को टाल दिया गया था।

किताब में लिखा गया है कि 14 फरवरी, 2019 को हुए पुलवामा हमले के 10 दिनों के भीतर ही जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी एक और हमले की साजिश रच रहे थे। जैसे ही खुफिया एजेंसियों को इस साजिश की भनक लगी उस आतंकी मॉड्यूल को खत्म करने के लिए सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान निकल पड़े। आतंकी दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के तुरीगाम इलाके में छिपे थे और यहीं से हमले की योजना बना रहे थे।

केजेएस ढिल्लों अपनी किताब में लिखते हैं कि इस मॉड्यूल को खत्म करने में कुलगाम के डीएसपी अमन कुमार ठाकुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने स्थानीय राष्ट्रीय राइफल्स से जानकारियाँ साझा कर ऑपरेशन को लीड भी किया था। ढिल्लों ने लिखा कि सिक्योरिटी फोर्सेस ने 24 फरवरी, 2019 की रात ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में डीएसपी ठाकुर और नायब सूबेदार सोमबीर ने एक-एक पाकिस्तानी आतंकी को मार गिराया। टीम ने तीन दहशतगर्दों को पकड़ने में सफलता पाई। ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से डीएसपी ठाकुर और सोमबीर दोनों वीरगति को प्राप्त हुए।

केजेएस ढिल्लों के मुताबिक यह ऑपरेशन कामयाब तो रहा लेकिन देश ने 2 बहादुर जवानों को खो दिया। दोनों बलिदानियों को मरणोपरांत अपनी वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। ढिल्लों लिखते हैं कि यदि यह ऑपरेशन असफल होता तो देश को और भी बड़ा नुकसान हो सकता था। बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

लाल किले के पास से दबोचे गए आतंकी खालिद और अब्दुल्ला, ट्रेनिंग के लिए कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान में घुसने की थी तैयारी: हथियार भी बरामद

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लाल किले के पास से 2 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान खालिद मुबारक खान (22) और अब्दुल्ला (32) के तौर पर हुई है। दोनों के पास से हथियार भी बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों कट्टरपंथी पाकिस्तान जाने की फिराक में थे। इससे पहले कि दोनों आतंकी दिल्ली से निकल पाते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों से पूछताछ की जा रही है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार कट्टरपंथी खालिद महाराष्ट्र के थाने का रहने वाला है, वहीं अब्दुल्ला तमिलनाडु के कलियाकुल्ला का रहने वाला है। दोनों पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका के संपर्क में थे और उसके बताए रास्ते पर चल रहे थे। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि दोनों कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान जाने की तैयारी में थे। पाकिस्तान में उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जानी थी। इसके पहले की दोनों दिल्ली से कश्मीर के लिए निकल पाते, उन्हें स्पेशल सेल के ऑफिसर्स ने गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए कट्टरपंथियों के पास से दो पिस्टल, 10 कारतूस, एक चाकू, एक वायर कटर बरामद हुए हैं। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने गिरफ्तार इस्लामिक कट्टरपंथियों की तस्वीरें भी जारी की हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों के साथ जम्मू-कश्मीर के कुछ कट्टरपंथी नौजवान भी आतंकी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान जाने वाले थे।

स्पेशल सेल को पहले ही मिले थे इनपुट

दिल्ली स्पेशल सेल को पहले ही दोनों के दिल्ली के रास्ते कश्मीर होते हुए पाकिस्तान जाने की जानकारी मिली थी। पता चला था कि कुछ नौजवानों को ऑनलाइन साइट्स की मदद से कट्टरपंथी शिक्षा दी जा रही है। 14 फरवरी को ही खबर मिली थी कि कुछ कट्टरपंथी नौजवान मुंबई के रास्ते दिल्ली आएँगे और आतंकवादी ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान जाएँगे। दिल्ली में वे लाल किले के पास ठहरेंगे उनके पास अवैध हथियार भी हैं।

इनपुट के बिना पर पुलिस लाल किले के आस पास नजर रखी हुई थी। इनपुट्स सही पाए गए और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब इनके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

अधकटा शव, नग्न लड़कियाँ और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे के बीच हुई हत्याएँ: दिल्ली दंगों के 3 साल, फिर पढ़ें ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट्स

दिल्ली के इतिहास में साल 2020 की 24-25 फरवरी वह तारीखें है जिसे राजधानी का बच्चा-बूढ़ा शायद ही कोई भूल पाए। सीएए के विरोध में महीनों से चलता प्रदर्शन उस दिन उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे का रूप ले चुका था। कहीं खुलेआम पत्थरबाजी की खबर आ रही थी तो कहीं सड़कों पर पुलिस को गोली मारी जा रही थी। हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए बड़ी-बड़ी इमारतों पर गुलेल लटकाए गए थे और न जाने कितने घरों के भीतर गोला बारूद व पेट्रोल बम छिपाए गए थे। 

इन साजिशों का ही नतीजा था कि दंगों की आग जब हल्की हुई तो मरने वालों का आँकड़ा 53 पहुँच गया था और घायलों की संख्या 200 पार कर गई थी। आज भी उस समय को याद किया जाए तो रूह कांप जाती है…उत्तराखंड के उस दिलबर नेगी का चेहरा याद आने लगता है जिनके अंग काटकर आग में झोंके जा चुके थे। वहीं आईबी के अंकित शर्मा के साथ हुई बर्बरता भी कोई नहीं भूल पाता जिनके शरीर को 400 से ज्यादा बार चाकू से गोदा गया था और शव नाले से बरामद हुआ था।

आज उसी हिंदू विरोधी दंगे के पूरे 3 साल बीत गए हैं… जनजीवन फिर सामान्य हो गया है लेकिन ये कहना बिलकुल गलत है कि हिंदू उन लोगों की भयानक चीखों को भूल गए हैं जिन्हें अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच तड़पा तड़पाकर मारा गया और वामपंथी मीडिया इसे सिर्फ एक प्रदर्शन का हिंसक रूप कहकर खबरों में दिखाती रही…। 

ऑपइंडिया इसी प्रपंच की पोल खोलने और पीड़ितों की आपबीती आप तक पहुँचाने उस दौरान ग्राउंड पर उतरा। ऑपइंडिया के अनुपम कुमार सिंह, संस्थान से जुड़े पूर्व पत्रकार रवि अग्रहरी और केशव मालान पीड़ितों के घरों पर गए, उनसे कॉल पर संपर्क किया, उनके परिजनों का हाल जाना और अंत में आपके सामने उन दो दिनों की सच्चाई रखी जिसे मीडिया बताने से भी गुरेज कर रहा था।

ग्राउंड पर पहुँचे ऑपइंडिया पत्रकार और रोते-बिलखते लोग

दिल्ली दंगों में सबसे ज्यादा शिकार हुआ इलाका करावल नगर और शिव विहार भी था। मीडिया की तस्वीरें देखने के बाद जब अनुपम कुमार सिंह खुद ग्राउंड पर उतरे तो पाठकों के लिए ऐसी हकीकत लेकर आए जिसे देख-सुन सच्चाई से अंजान लोगों के कान खड़े हो गए। 

इस इलाके में हमें एक हिंदू का स्कूल मिला, जिसे जलाया जा चुका था, दुकानें मिलीं जो खाक हो चुकी थीं। लोग रोते-बिलखते लोग दिखे जो उनसे बात करते हुए अपना कसूर पूछ रहे थे कि आखिर उनके साथ ये सब क्यों हुआ। लोगों ने उन्हें बताया कैसे उन दो दिनों तक वह अपनी बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए सड़कों पर रहे और इस्लामी भीड़ की गोली-पत्थर खाते रहे।

हिंदुओं के घरों को जलाया, पुलिस पर एसिड फेंका

अनुपम को स्थानीयों ने बताया कि कैसे उस दिन राजधानी स्कूल पर 300 दंगाई जमा कर हिंदुओं को निशाना रहे थे जबकि मुस्लिम महिलाएँ अपनी छतों पर  खड़े होकर पुलिस बलों पर एसिड डाल रही थीं। वहां उन्हें ये भी पता चला कि राजधानी स्कूल (जो किसी मुस्लिम शख्स का था) पर चढ़कर दंगाइयों ने दिनेश मुंशी के सिर में गोली मारी। वहीं अन्य हिंदुओं पर गुलेल लगाकर पत्थर और बम फेंकती रही।

कंटेनरों में लाए छतों पर पत्थर

ग्राउंड पर पड़ताल के दौरान हमने जब राजधानी स्कूल के बारे में जाना तो पता चला कि स्कूल को अटैक बेस की तरह प्रयोग किया गया। हम उस स्कूल की छत पर पहुँचे और पाया कि वहाँ बड़े-बड़े कंटेनर थे। नजारा देख साफ पता चल रहा था कि हमले की तैयारी लंबे समय से थी बस 24-25 फरवरी 2020 को मौका देख उसे अंजाम दिया गया। इन्हीं बड़े और भारी कंटेनरों में भरकर पत्थर छत पर लाए गए थे जिनका प्रयोग दंगाई लगातार करते थे। इसी स्कूल के बगल में एक मैरिज हॉल भी था। हॉल में कई गाड़ियाँ खड़ी थीं, लेकिन दंगाइयों ने वहाँ भी आग लगाकर सब कुछ फूँक डाला था।

जब चश्मदीद ने कहा- नाम मत लेना वो मार डालेंगे

ऑपइंडिया के पूर्व पत्रकार केशव मालान दंगों के बाद कई दिन तक प्रभावित इलाकों में घूम-घूम कर सच्चाई जुटाने का प्रयास कर रहे थे। तभी रास्ते में ही ऑटो में उनकी मुलाकात एक महिला से हुई। इस महिला ने केशव के बिना पूछे ही उन्हें जमीनी हालात बताने शुरू कर दिए और ये भी बताया कि कैसे ये उनकी आँखों देखी बात है कि इस्लामी भीड़ लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया-रॉड लेकर मेन रोड पर निकली हुई थी और हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए अपने बच्चों और महिलाओं को बाहर निकाल रही थे।

महिला को जाते-जाते जब केशव के पत्रकार होने का पता चला तो उसने अनुरोध किया कि किसी कीमत पर उसका नाम खबर में न दिया जाए वरना वो भीड़ उसे भी मार देगी।

घर से टहलने निकले आलोक वापस नहीं लौटे

केशव, कई दिन चांद बाग, करावल नगर, शिव विहार समेत उत्तर पूर्वी दिल्ली के इलाकों में घूमे। इस दौरान उन्हें हर जगह पुलिस फोर्स मिली। प्रभावित क्षेत्रों में जाने के बाद उनकी मुलाकात पहले उस आलोक तिवारी की बदहवास पत्नी से हुई उस दिन भी अपने पति का इंतजार कर रहीं थी।

केशव के अनुरोध पर आलोक की पत्नी कविता ने उनसे बात की और बताया कि कैसे उनके पति तो 10 बजे खाना खाकर बाहर घूमने गए थे मगर आधे घंटे बाद एक फोन आया जिससे उन्हें पता चला कि उनके पति को मारा गया है। आलोक का अंतिम संस्कार चंदा इकट्ठा करके करवाया गया था।

जो लड़की करती थी दुआ सलाम उसकी शादी में आग लगाई

आलोक के घर के बाद केशव को चांद बाग के एक ऐसे घर के बारे में पता चला जहाँ कुछ दिन पहले लड़की की शादी की तैयारी चल रही थी लेकिन दंगों के बाद वहाँ मातम था। हैरानी इस बात की थी कि इस्लामी भीड़ ने उस बच्ची की शादी की तैयारियों में आग लगाई थी जो आते-जाते उन्हें दुआ सलाम करती थी।

दुकान तोड़कर लूटा सबकुछ

हिंसा के लगातार कई दिनों तक ग्राउंड पर जाते-जाते केशव ताहिर हुसैन के घर के नजदीक पहुँचे जो उस दौरान दंगाइयों का अड्डा बना हुआ था और जहाँ अंकित शर्मा को निर्ममता से मौत के घाट उतारा गया था। गलियों में जाते जाते उन्हें श्याम चाय वाला मिला। श्याम बेबस होकर जमीन पर बैठे थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि कैसे उस दिन इस्लामी भीड़ आई और उनकी दुकान तोड़कर, वहाँ लूटपाट करके चली गई।

लड़कियों के कपड़े उतरवाकर नंगे भेजा घर

एक महिला मिली जिसने पहचान न बताए जाने की शर्त पर बताया कि दंगों के दो दिन कैसे लड़कियों के लिए भारी थे। महिला के मुताबिक, भीड़ ने ट्यूशन से लौटती लड़कियों से उनके कपड़े उतरवा लिए थे और उन्हें नग्न कर घरों में भेजा था।

घर से निकले राहुल को मारी गोली

बृजपुरी में राहुल ठाकुर की हत्या को लेकर चश्मदीदों ने बताया कि कैसे उस दिन राहुल सिर्फ बाहर हुए हल्ले के बाद माहौल देखने निकला था कि इतने में सामने से हथियारबंद भीड़ ने उसको गोली मारी और वह वहीं पेट पकड़े जमीन पर गिर गया। घरवाले उसे अस्पताल ले गए लेकिन बचा कोई नहीं पाया। राहुल के घर पहुँचने पर हमारे पत्रकार को राहुल की माँ की दहाड़ सुनने को मिली और ये भी पता चला कि उनके पिचा आरपीएफ में तैनात थे जो बार-बार सोच रहे थे कि उनके बेटे को उस दिन घर से निकलने की क्या जरूरत थी।

घूमने निकला धर्मेंद्र घर नहीं लौटा

प्रभावित इलाकों में जाने के वक्त एक हिंदू परिवार ऐसा भी था जिनका बेटा धर्मेंद्र दंगों के वक्त गायब हो गया था और वो लोग बस उसके इंतजार में थे। परिवार का कहना था कि धर्मेंद्र बाहर घूमने की बात कहकर निकला था लेकिन शाम को पता चला कि वहाँ दंगे शुरू हो गए और सात दिन बाद भी धर्मेंद्र उन्हें वापस नहीं मिला।

दिलबर नेगी: जिनके इस्लामी भीड़ ने काट दिए हाथ-पाँव, शव आग में झोंका

पीड़ितों तक पहुँचने के क्रम में ऑपइंडिया ने मृतक दिलबर नेगी के साथ हुई बर्बरता के बारे में भी आपको बताया। दिलबर नेगी पौड़ी जिले के थलीसैण ब्लॉक के निवासी थे जो दिल्ली में काम करने आए थे लेकिन 23 फरवरी को इस्लामी भीड़ ने उन्हें दुकान में पकड़कर उनके हाथ पाँव काटे और फिर उनके अधकटे शव को दुकान के साथ आग में झोंक दिया। जब ऑपइंडिया के पूर्व पत्रकार आशीष नौटियाल को इस हत्या की सूचना मिली तो उन्होंने उस श्याम को खोजा, जो किसी तरह उस दिन उस भीड़ से अपनी जान बचाकर भागा था। वहीं उनके परिवार से बात भी की जिसके बाद पता चला कि कैसे वो लोग ये नहीं मान पा रहे हैं कि उनका बेटा अब वापस नहीं लौटेगा।

बता दें कि इन दंगों के 7 माह बाद दिल्ली पुलिस ने 2700 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें उमर खालिद जैसे कई लोगों के नाम लिए गए थे। हालाँकि उनके कृत्यों पर क्या सुनवाई हुई ये अब भी बहस की बात है। स्थानीय हिंदू आज भी इलाकों में डर में रहते हैं। जबकि ताहिर हुसैन की वो बिल्डिंग जहाँ से हिंदू निशाना बनाए गए वहाँ से धंधा होने की बात पिछली बार सामने आ चुकी थी।

तीन साल बाद पीड़ितों के हाल

ऑपइंडिया हर साल आपको प्रभावित इलाकों के हालातों से अवगत कराता रहा है। हर बार कभी पता चला कि किसी को न्याय नहीं मिला है तो कोई मुआवजे के इंतजार में है, किसी ने सीएम को पत्र लिखा है तो कोई घर चलाने के लिए नौकरी माँग रहा है…।

इस साल भी हमने कुछ पीडितों के परिजनों से बात की और पता चला कि कैसे अदालत से आए दिन आरोपित रिहा हो रहे और पीड़ित घरवालों को न्याय फिर नहीं मिल पाता। दिल्ली दंगों में पहली सजा जिसे दी गई वो दिनेश यादव हैं। उनके गम में माता-पिता दोनों संसार छोड़ गए हैं। लेकिन दिनेश को इतनी भी रियायत नहीं मिली कि वो मुखाग्नि दे पाते।

इसी तरह हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की पत्नी जिन्हें शुरुआत में हर किसी ने वायदे किए वो भी अब दिल्ली छोड़ चुकी है। उनका कहना है कि वो नौकरी की गुहार सीएम केजरीवाल से लगाती रहीं लेकिन उन्हें कहीं कोई मदद नहीं मिली। अब जो पैसे मिले हैं वो दिल्ली के खर्चों खत्म न हो जाएँ इसलिए वो अपने मायके चली गई हैं।

इसी प्रकार एक कहानी विनोद की भी है। कट्टर भीड़ ने विनोद को हथियारों से सड़क पर मारा था। 3 साल पूरे होने पर जब ऑपइंडिया ने उनके परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने बस यही कहा कि उन्हें बहुत दुख होता है जब पता चला है कि मुख्य आरोपित धीरे-धीरे रिहा हो रहे हैं जबकि उनकी सुनवाई तक नहीं हो रही।

छत्तीसगढ़ में सरेबाजार सेना के जवान के सिर में उतार दी 2 गोलियाँ, कॉन्ग्रेस सरकार में बेखौफ हैं नक्सली: 1 दिन में दूसरी ऐसी घटना, सप्ताह में 7 जवानों की हत्या

छत्तीसगढ़ के सुकमा में तीन जवानों की मौत के बाद अब कांकेर में नक्सलियों ने सेना के एक जवान की हत्या कर दी है।ये घटना शनिवार (25 फरवरी, 2023) को हुई। नक्सलियों ने भारतीय सेना के जवान की तब हत्या की, जब वो उसेली स्थित एक चिकन मार्किट में गए हुए थे। सेना का उक्त जवान छत्तीसगढ़ का ही रहने वाला था और कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर आया था। मृतक की पहचान मोतीराम आंचला के रूप में की गई है।

वो बड़े तेवड़ा का रहने वाला है। इस संबंध में आमाबेड़ा पुलिस थाने में एक केस दर्ज किया गया है। इस सप्ताह अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 6 जवानों की हत्या की जा चुकी है। सिर्फ शनिवार के दिन ही 4 जवानों की हत्या हुई। इसी दिन सुबह नक्सली एनकाउंटर में DRG के 3 जवानों को घात लगाए नक्सलियों ने मार डाला था। कांकेर के अंतागढ़ में ही ताजा घटना सरेबाजार हुई है। उक्त जवान की पदस्थापना असम में हुई थी।

नक्सलियों ने सेना के जवान के सिर में दो गोलियाँ उतार दी। नक्सलियों की ‘स्मॉल एक्शन टीम’ ने इस घटना को अंजाम दिया है। आनन-फानन में लोग उसे लेकर अस्पताल भागे, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस तरह की घटना से स्थानीय लोगों में भय व्याप्त है। मोतीलाल आंचला गाँव में एक मेले में शामिल होने आए थे। मृतक जवान भारतीय सेना में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात था। छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार विपक्ष के निशाने पर है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के सुकमा में शनिवार (25 फरवरी, 2023) को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप ) के 3 जवान बलिदान हो गए हैं। इसके बाद राज्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। इस हमले में दो जवान घायल भी हुए हैं। सुबह के समय ये मुठभेड़ जगरगुंडा के आश्रमपारा इलाके में हुई है। दोनों तरफ से इस दौरान ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। साथ ही बम धमाकों की आवाज़ भी सुनी गई।

खालिस्तानी अमृतपाल का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में बैन, हथियार से लैस भीड़ ने थाने पर किया था हमला: पंजाब पुलिस बोली – कार्रवाई करते तो खराब हो सकते थे हालात

खालिस्तान समर्थक और वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह के इंस्टाग्राम अकाउंट को बैन कर दिया गया है। 23 फरवरी, 2023 को अजनाला में अमृतपाल के समर्थकों ने थाने पर हमला कर दिया था। हथियारों से लैश उपद्रवियों ने जमकर बवाल काटा था। पंजाब पुलिस की तरफ से उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए सफाई भी दी गई है।

खुलेआम खालिस्तान की बात करने वाले अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सबसे पहले अमृतपाल के इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया है। रिपोर्टों की मानें तो अमृतपाल के नाम से इंस्टाग्राम पर तकरीबन 35 अकाउंट हैं। सरकार ने इनमें से ब्लू टिक (वेरिफाइड) वाले अकाउंट को बंद किया है। अमृतपाल के खिलाफ यह पहली कार्रवाई है।

23 फरवरी को क्या हुआ?

पंजाब में हथियारों से लैश खालिस्तान समर्थकों ने गुरुवार (23 फरवरी, 2023) को अमृतसर स्थित अजनाला थाने पर हमला कर दिया। हजारों की संख्या में जुटे निहंग सिख तलवार और बंदूक आदि हथियारों के साथ थाने की तरफ बढ़े। इस दौरान उन्होंने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और थाने में दाखिल हो गए। खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह के खिलाफ FIR और उसके करीबी लवप्रीत तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे।

कार्रवाई न करने पर पुलिस की सफाई

23 फरवरी को खालिस्तान समर्थक भीड़ के उपद्रव के बावजूद पंजाब पुलिस ने कोई ऐक्शन नहीं लिया। इस पर पंजाब पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया था। गौरव यादव ने बताया कि गुरु ग्रंथ साहिब की आड़ लेकर पुलिसकर्मियों पर हमला भी किया गया इस हमले में छह लोग घायल हो गए थे। डीजीपी के अनुसार, यदि पुलिस ने गोलीबारी की होती तो हालात खराब हो सकते थे। हमने संयम के साथ काम लिया।

आपको बता दें कि अमृतपाल ने पंजाब पुलिस को दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए एक घंटे और साथी लवप्रीत को छोड़ने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी थी। पंजाब पुलिस ने 1 घंटे के भीतर लवप्रीत के रिहाई की घोषणा कर दी थी। पंजाब पुलिस की तरफ से कहा गया कि लवप्रीत के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं। शुक्रवार (24 फरवरी, 2023) को लवप्रीत अमृतसर सेंट्रल जेल से बाहर आ गया। लवप्रीत के बाहर आने के बाद डीजीपी की सफाई आई।

डीजीपी गौरव यादव ने जानकारी दी कि घटना में देश के पूर्व हॉकी खिलाड़ी जुगराज सिंह सहित छह पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। सभी का इलाज कराया जा रहा है। जुगराज सिंह पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। उन्हें 11 टाँके आए हैं।

अमृतपाल, लवप्रीत समेत 30 लोगों पर क्यों दर्ज हुई थी एफआईआर?

पिछले दिनों अमृतपाल सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया पर वरिंदर सिंह नाम के एक नौजवान ने सिखों को भटकाने का आरोप लगाया था। इस बात से नाराज अमृतपाल सिंह और उसके साथियों ने वरिंदर को अगवा कर उसके साथ मारपीट की थी। वरिंदर की शिकायत पर पुलिस ने अमृतपाल और लवप्रीत समेत 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। इसी केस में पुलिस ने तूफान सिंह (लवप्रीत) को गिरफ्तार किया था।

गृहमंत्री को दी थी जान से मारने की धमकी

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह ने कुछ दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह का हश्र पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जैसा करने की धमकी दी थी। अमृतपाल 19 फरवरी 2023 को मोगा जिले के बुधसिंह वाला गाँव में पहुँचा हुआ था। पंजाबी सिंगर दीप सिद्धू की बरसी के मौके पर उसने कहा था कि इंदिरा ने भी सिखों को दबाने की कोशिश की थी, क्या हश्र हुआ? अब अमित शाह अपनी इच्छा पूरी करके देख लें।