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‘ये मुस्लिम इलाका है, घर बेच कर चली जाओ या इस्लाम क़बूलो’: हिन्दू महिला ने लगाई न्याय की गुहार, वीडियो में पत्थर-डंडे लिए गाली देती दिखीं मुस्लिम महिलाएँ

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक हिन्दू महिला ने अपने ऊपर धर्मांतरण के दबाव का आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपने परिवार को मुस्लिम आबादी से घिरा बताया है। आरोप है कि कुछ मुस्लिमों ने महिला पर धर्म बदलने और घर बेच कर जाने का दबाव बनाया है। पीड़िता के मुताबिक, आरोपितों द्वारा उनकी और उसके परिवार की अक्सर पिटाई की जाती है। पुलिस ने इस घटना में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

इस मामले की शिकायत कॉपी के मुताबिक, घटना रेहरा बाजार थानाक्षेत्र के गाँव जाफराबाद की है। यहाँ दीपा निषाद अपने परिवार के साथ रहती है। दीपा का कहना है कि उनके घर के तीन तरफ मुस्लिम आबादी है। आरोप है कि इसी गाँव की मोहर्रमा, शहज़ादी, साहिबा नाम की महिलाएँ अपने घर के इरफ़ान, सोनू और अफरीद के साथ दीपा की कई बार पिटाई कर चुकी हैं।

शिकायत में अमीरजादे और इरफ़ान नाम के व्यक्तियों पर आरोप है कि वह अपने गाँव को मुस्लिम बहुल इलाका बता कर पीड़िता को घर बेच कर कहीं चले जाने या धर्म बदल कर मुस्लिम बन जाने की धमकी देता है। इन दोनों में कोई विकल्प न चुनने पर पीड़िता को परिवार सहित कत्ल करने की धमकी भी दी जाती है। दीपा के मुताबिक जब उन्होंने आरोपितों की शिकायत रेहरा थाने में की, तब उसके भाई का ही पुलिस ने शांतिभंग की धारा 151 IPC में चालान कर दिया। इस दौरान आरोपितों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई

शिकायत में दीपा ने आगे बताया कि जब उन्होंने घर बेच कर भागने और इस्लाम कबूलने से मना कर दिया तब आरोपितों द्वारा उनके परिवार की बेरहमी से पिटाई की गई। 17 दिसम्बर 2022 की घटना का जिक्र करते हुए दीपा ने बताया कि उस दिन आरोपितों ने उसे और उसकी बहन को बेरहमी से मारा-पीटा। इस दौरान दीपा के साथ छेड़छाड़ करते हुए अमीरजादे ने अपना मोबाइल नंबर देते हुए खुद से जबरन बात करने का दबाव बनाया। यह शिकायत 20 दिसंबर, 2022 को दी गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में अपने साथ हुई प्रताड़ना का वीडियो होने का भी दावा किया है। इस घटना के वायरल वीडियो में कुछ महिलाओं को गाँव में विवाद करते देखा जा सकता है। वीडियो में महिलाओं के हाथों में पत्थर और डंडे देखे जा सकते हैं और वो किसी को गालियाँ दे रही हैं। बलरामपुर पुलिस का इस मामले में कहना है कि केस में FIR दर्ज कर के जाँच करवाई जा रही है।

102 बेटे-बेटियाँ और 568 पोते-पोतियों के बाद युगांडा के मूसा ने लिया थमने का फैसला: 12 बीवियों को दी गर्भ-निरोधक के इस्तेमाल की हिदायत

12 बीवियों, 102 बेटे-बेटियों और 568 पोते-पोतियों वाले युगाँडा के किसान मूसा हसाहया ने अब अपने परिवार को और बड़ा नहीं करने का फैसला किया है। मूसा ने अपनी बीवियों को गर्भनिरोध‍क दवाएँ इस्तेमाल करने की हिदायत दी है। मूसा पेशे से किसान हैं और इतने बड़े परिवार के लिए रोजमर्रा का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। बढ़ते परिवार के साथ उनकी आमदनी लगातार कम हो रही है।

युगांडा के जिस लुसाका शहर में मूसा रहते हैं, वहाँ कई विवाह करने की इजाजत है। मूसा एक के बाद एक विवाह करते गए। अब उनकी 12 बीवियाँ हैं। परिवार बढ़ता गया साथ ही बढ़ते गए परिवार के खर्च। द सन की रिपोर्ट के अनुसार 67 वर्षीय मूसा ने अपनी पत्नियों से गर्भनिरोधक दवाओं का इस्‍तेमाल करने के लिए कहा है। मूसा के लिए परिवार के हर सदस्य के लिए पेट भर खाने का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो रहा है। मूसा की खराब आर्थिक हालत को देखकर उसकी 2 बीवियाँ उसे छोड़कर जा चुकी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब उनसे कई विवाह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक मर्द कैसे एक ही बीवी से संतुष्ट रह सकता है? मूसा ने कहा कि उसकी सभी बीवियाँ एक ही घर में रहती हैं, ताकि वह उन पर नजर रख सके और उसकी पत्नियाँ दूसरे मर्दों के साथ संबंध नहीं बना सके। जूलैका मूसा की सबसे छोटी पत्‍नी है। जूलैका ने 11 बच्‍चों को जन्म दिया है और अब वह गर्भवती नहीं होना चाहती। इसलिए जूलैका ने गर्भनिरोधक गोली का इस्‍तेमाल करना शुरू कर दिया है।

मूसा की सबसे बड़ी संतान (बेटा) अपनी सबसे छोटी माँ से 21 साल बड़ा है। मूसा के सबसे छोटे बेटे की उम्र 6 साल है। परिवार के खराब आर्थिक हालत की एक वजह यह भी है कि अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से मूसा पहले की तरह मेहनत नहीं कर पाते। खराब आर्थिक स्थिति के कारण मूसा अब 700 से ज्यादा सदस्यों वाले इस परिवार को और नहीं बढ़ाना चाहते।

मोर्चरी में गई थीं रिया चक्रवर्ती, ऑटोप्सी में सुशांत की मौत समय का जिक्र नहीं… विवादों में रहा है कूपर हॉस्पिटल: जिस कर्मचारी ने किया ‘हत्या’ वाला खुलासा, उसे सुरक्षा देने की माँग

सुशांत सिंह राजपूत की हत्या को लेकर कूपर हॉस्पिटल की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। अस्पताल के कर्मचारी रूप कुमार शाह ने दावा किया है कि सुशांत के पोस्टमार्टम के समय वह वहाँ मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सुशांत की बॉडी पर चोट के निशान थे, जिन्हें देखने से उसे लग रहा था कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की बल्कि उनकी हत्या हुई है। रूप कुमार के इस बयान के बाद सुशांत की बहन ने उनकी सुरक्षा की माँग की है।

सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने ट्विटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए कहा है, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि रूप कुमार शाह को सुरक्षा उपलब्ध हो। सीबीआई सुशांत के केस को समय सीमा में सुलझाए।”

दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही कूपर हॉस्पिटल की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। कूपर हॉस्पिटल पर पहला सवाल तब खड़ा हुआ था जब सुशांत की गर्लफ्रैंड रिया चक्रवर्ती हॉस्पिटल के मोर्चरी में गई थी। कहा गया था कि रिया हॉस्पिटल में करीब 45 मिनट रहीं। वहीं, उन्होंने मोर्चरी में भी करीब 7 मिनट का समय बिताया था। नियम के अनुसार, मोर्चरी में केवल मृतक के परिवार वाले ही जा सकते हैं। ऐसे में, सवाल उठा था कि हॉस्पिटल ने उन्हें मोर्चरी में कैसे जाने दिया।

इसे लेकर महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी कूपर हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया था। मानवाधिकार आयोग का सवाल था कि आखिर किस नियम के तहत रिया को मोर्चरी में जाने की अनुमति दी गई। बता दें, सुशांत की मौत को लेकर रिया चक्रवर्ती ही मुख्य आरोपित हैं। उन पर सुशांत की हत्या से लेकर ड्रग्स तक देने के आरोप लगाए गए हैं।

इसके बाद जब, सुशांत की ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम) रिपोर्ट सामने आई तब एक बार फिर कूपर हॉस्पिटल की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इस सवाल का कारण यह था कि ऑटोप्सी रिपोर्ट में सुशांत की मौत के समय का जिक्र नहीं था। रिपोर्ट में मौत के समय का जिक्र नहीं होने से फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी हैरान रह गए थे।

यही नहीं, कई चश्मदीद यह दावा कर चुके हैं कि सुशांत के शरीर में चोट के निशान थे। वहीं, 7 पन्नों की ऑटोप्सी रिपोर्ट में कहा गया था कि सुशांत के शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं थे। गौरतलब है कि कूपर हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने अगस्त 2020 में भी दावा किया था कि सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उनकी हत्या हुई है। इस कर्मचारी के बारे में बताया गया था कि वह ही सुशांत के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हॉस्पिटल और फिर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट लेकर गया था

कर्मचारी ने दावा किया कि उसे इतना मालूम है कि ये मर्डर था। उसने सुशांत के गले पर कई निशान होने की बात भी कही थी। कर्मचारी ने कहा था कि सुशांत के गले पर एक सूई का निशान जैसा कुछ था। उसने कहा कि गले पर सेलो टेप जैसा कुछ चिपकाया हुआ था और साथ ही कम से कम 15-20 निशान थे।

कूपर हॉस्पिटल के उक्त कर्मचारी यह भी दावा किया कि उसने हॉस्पिटल के बड़े-बड़े डॉक्टरों को चर्चा करते हुए सुना था कि ये आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। कर्मचारी ने दावा किया कि हमलोग बॉडी को देख कर ही अधिकतर चीजें जान लेते हैं। उसके दावे के अनुसार शव के तलवों में भी सूई चुभोए जाने के निशान थे।

2 बच्चों का अब्बा मोहम्मद इजहार बन गया राकेश, बंगाल से हिंदू लड़की को लाकर बनाया बंधक: निकाह और धर्मांतरण का बना रहा था दबाव

बिहार के समस्तीपुर जिले से लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। आरोपित मोहम्मद इजहार है। उस पर राकेश नाम से सोशल मीडिया हैंडल बनाकर हिन्दू महिला को झाँसा देने का आरोप है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की पीड़िता के मुताबिक इजहार बंधक बनाकर उस पर निकाह और धर्मांतरण का दबाव बना रहा था। विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने सोमवार (26 दिसंबर 2022) को पीड़िता को दलसिंह सराय रेलवे स्टेशन पर आरोपित के चंगुल से मुक्त करवाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोलकता के टिटारगढ़ परगना की रहने वाली पीड़िता से समस्तीपुर के ताजपुर में रहने वाले मोहम्मद इजहार ने सोशल मीडिया से परिचय बढ़ाया। आरोप है कि इज़हार ने फेसबुक पर राकेश नाम से प्रोफ़ाइल बना रखी थी। कुछ दिनों के ही अंदर दोनों करीब आ गए। मई 2022 में राकेश बना इज़हार लड़की से मिलने कोलकाता पहुँच गया। यहाँ दोनों की पहली बार मुलाकात हुई। कुछ समय बाद दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।

मई 2022 में मोहम्मद इजहार हिंदू लड़की को कोलकाता से लेकर समस्तीपुर चला आया। पीड़िता के मुताबिक ताजपुर आकर उसे राकेश के मुस्लिम होने की जानकारी हुई। उसे यह भी पता चला कि इजहार पहले से शादीशुदा और 2 बच्चों का अब्बा है। शिकायत में बताया गया है कि पीड़िता ने घर लौटने की जिद की तो इजहार ने मारपीट की। उसका फोन तोड़ डाला। इस बीच इजहार पीड़िता पर इस्लाम कबूल कर खुद से निकाह करने का दबाव बनाता रहा। आरोप है कि मोहम्मद इजहार पीड़िता का नाम सूफ़िया खातून रखना चाह रहा था।

बताया जा रहा है कि लगभग 10 दिन पहले पीड़िता ने ने किसी तरह से मोहम्मद इजहार का फोन हासिल किया और अपनी माँ को प्रताड़ना के बारे में जानकारी दी। इस जानकारी के बाद लड़की की माँ ने कोलकाता के नाथे थाने में अपनी बेटी के समस्तीपुर के ताजपुर में बंधक होने की जानकारी देते हुए FIR दर्ज करवाई। कोलकाता पुलिस की सूचना पर बिहार की ताजपुर पुलिस ने महिला को बरामद कर थाने में रख लिया।

बरामदगी की जानकारी मिलने पर पीड़िता की माँ समस्तीपुर पहुँच गईं। यहाँ उनकी बेटी उन्हें सौंप दिया गया। बताया जा रहा है कि पीड़िता अपनी माँ के साथ कोलकाता लौट रही रही थी कि मोहम्मद इजहार के गुर्गों ने उन्हें फिर से दलसिंह सराय स्टेशन पर घेर लिया। तभी मामले की जानकारी विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं को हुई। वो फ़ौरन स्टेशन पहुँचे। VHP कार्यकर्ताओं ने माँ और बेटी को इजहार के गुर्गों के चंगुल से मुक्त करवाया।

विहिप पदाधिकारियों के मुताबिक तमाम प्रतड़ना के बाद भी लड़की ने हिन्दू धर्म नहीं छोड़ा इसलिए उसे सम्मानित कर कोलकाता सुरक्षित भेजा जाएगा। इधर पीड़िता ने ताजपुर थाने में आरोपित मोहम्मद इजहार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में इजहार के घर वालों को भी नामजद किया गया है। थाना प्रभारी के मुताबिक केस दर्ज कर जाँच की जा रही है।

तेलंगाना का ईसाई दंपती, बिहार के एक गाँव में करवा रहे थे प्रार्थना: ग्रामीणों ने बनाया बंधक, पासवान टोले में लालच दे धर्मांतरण का आरोप

बिहार के समस्तीपुर जिले के एक गाँव में सोमवार (26 दिसंबर 2022) को ग्रामीणों ने तेलंगाना के एक दंपती को बंधक बना लिया। ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने इन पर लालच देकर लोगों को धर्मांतरित करने की कोशिश का आरोप लगाया है। हालाँकि इस संबंध में पुलिस से किसी तरह की शिकायत किए जाने की सूचना नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना वैनी ओपी की चकले वैनी पंचायत के वार्ड-11 स्थित पासवान टोले की है। यहाँ की एक स्थानीय महिला पर आरोप है कि उसने तेलंगाना के एक दंपती को बुलवाकर प्रार्थना सभा आयोजित करवाई। इसकी जानकारी जैसे ही हिंदू संगठनों को हुई वे बस्ती में पहुँच गए। कार्यक्रम का विरोध किया। कुछ समय बाद स्थानीय ग्रामीण भी विरोध में जुट गए। करीब 10 लोगों को ग्रामीणों ने घेर लिया।

जिस दंपती को बंधक बनाया गया था उन्होंने अपनी पहचान तेलंगाना के जागा लक्ष्मण राव और ललिता के तौर पर बताई। मुख्य आरोपित आंध्र प्रदेश का 55 वर्षीय एसुबा बताया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक घर के अंदर चल रही प्रार्थना सभा में पानवा देवी, जयनारायण आदि भी मौजूद थे। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक कोट-पैंट पहने व्यक्ति को कुछ लोगों ने घेर रखा है।

मिली जानकारी के मुताबिक हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने भीड़ से कुल 10 लोगों को बाहर निकाला। इनमें 3 महिलाएँ, 2 पुरुष और अन्य बच्चे थे। तेलंगाना के दंपती ने बताया कि वे क्रिसमस पर समस्तीपुर चर्च में प्रार्थना के लिए आए थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने उनसे अपने गाँव में आने का अनुरोध किया था। इनलोगों के पास से ईसाइयत से जुड़ा पर्चा और किताब भी बरामद होने की बात की जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस को अभी तक मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है।

74 दिन रहे देश के चीफ जस्टिस, घर पर रखे 40 अर्दली-कर्मचारी: रिपोर्ट में बताया रिटायरमेंट के 45 दिन बाद भी CJI रहे यूयू ललित के पास 28 स्टाफ

न्यायपालिका में सुधार को लेकर लंबे समय से बात हो रही है। हाल ही में कॉलेजियम सिस्टम (Collegium System) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तल्खी भी देखने को मिली थी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी अगस्त 2022 में एक कार्यक्रम के दौरान कॉलेजियम की नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जान-पहचान वालों की ही कॉलेजियम नियुक्ति करता है। अच्छे जज पीछे रह जाते हैं। अब एक रिपोर्ट सामने आई है जिससे पता चला है कि मुख्य न्यायाधीश रहते हुए जस्टिस यूयू ललित ने 40 से अधिक अर्दली और स्टाफ अपने आवास पर रखे थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि जस्टिस उदय उमेश ललित (यूयू ललित) जब देश के मुख्य न्यायाधीश थे तो उनके आवास पर 40 से अधिक चपरासी और सहायक कर्मचारी तैनात थे। रिटायरमेंट के करीब डेढ़ महीने बाद भी उनके पास करीब 28 सहायक कर्मचारी बने हुए हैं। संवैधानिक पद पर रहे किसी व्यक्ति द्वारा अपने आवास पर तैनात कर्मचारियों के आँकड़े को देखे तो यह एक रिकॉर्ड की तरह है।

जस्टिस यूयू ललित देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। उनका कार्यकाल केवल 74 दिन का था। उन्होंने 27 अगस्त 2022 को यह जिम्मेदारी ग्रहण की थी। 8 नवंबर 2022 को रिटायर हो गए थे। इस दौरान उनके आधिकारिक आवास 19, अकबर रोड पर 40 से अधिक सहायक कर्मचारी तैनात थे। यदि उनका कार्यकाल लंबा होता तो संभव है कि यह संख्या कहीं अधिक होती। रिटायरमेंट के करीब डेढ़ महीने हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस ललित के अकबर रोड के आवास में बने हुए हैं। अभी भी 28 अर्दली और सहायक कर्मचारी तैनात हैं। ये वे कर्मचारी हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने साफ-सफाई व अन्य कामों के लिए नियुक्त किया था।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि जस्टिस ललित से पहले के CJI के कार्यकाल में अमूमन उनके आधिकारिक आवास पर 12-15 सहायक कर्मचारी ही होते थे। रिटायरमेंट के बाद वे 2-3 कर्मचारी अपने साथ रखते थे। यूयू ललित को ये सभी कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि वह दिल्ली में रहें या फिर अपने गृह राज्य जाएँ, इन कर्मचारियों को अपने साथ रख सकते हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने वाले सहायक कर्मचारियों की संख्या को छोड़ दिया जाए तो किसी भी अन्य संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति के घर पर इतनी बड़ी संख्या में अर्दली और सहायक कर्मचारी की तैनाती शायद ही मिले।

हिंदू की जमीन पर मस्जिद, रेलवे स्टेशन पर मजार… कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हटाने दिया: अलीगढ़ में ₹10 लाख देकर कर लिया समझौता

उत्तर प्रदेश में कब्जा कर बनाई गई मस्जिद और मजार को कोर्ट के आदेश के बाद हटाने पहुँचे प्रशासनिक दस्ते को विरोध झेलना पड़ा। अलीगढ़ में सपा के पूर्व विधायक हाजी जमीर उल्लाह के नेतृत्व में मस्जिद हटाने का विरोध हुआ। बाद में 10 लाख रुपए देकर इनलोगों ने उससे समझौता कर लिया जिसकी जमीन पर मस्जिद बनी हुई है। इसी तरह बरेली रेलवे स्टेशन से मजार हटाने का विरोध कॉन्ग्रेस नेता डॉ. मेंहदी हसन के नेतृत्व में हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अलीगढ़ के रोरवर थाना क्षेत्र के शाहपुर क़ुतुब की मस्जिद एक ऐसी जमीन पर बनी है, जिस पर दो लोग दावा कर रहे थे। इनमें से एक हिंदू है और दूसरा मुस्लिम। दोनों ही एक ही व्यक्ति से यह जमीन खरीदने का दावा कर रहे थे। कुछ समय बाद मुस्लिम पक्ष ने इस जमीन पर मस्जिद और मदरसा बनवा डाला। लेकिन अदालत ने फैसला हिंदू पक्ष के हक में सुनाया। इसके बाद हिंदू पक्ष को जमीन पर कब्जा दिलानें के लिए सोमवार (26 दिसंबर 2022) को SDM फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे।

कोर्ट के आदेश पर हो रही प्रशासन की कार्रवाई का स्थानीय मुस्लिमों ने विरोध शुरू कर दिया। हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक हाजी जमीर उल्लाह भी मौके पर पहुँचे। हिंदू पक्ष के व्यक्ति को 10 लाख रुपए देकर समझौता कर लिया गया। इसके बाद प्रशासन को को कार्रवाई रोकनी पड़ी। एसडीएम के मुताबिक मामला आपसी बातचीत से सुलझा लिया गया है। वहीं जमीन दोनों पक्षों को बेचने के आरोप में एक की गिरफ्तारी हुई है।

रेलवे स्टेशन पर बनी मज़ार हटाने का विरोध

बरेली के इज्जतनगर में मौजूद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एक मजार बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे न्यायालय के आदेश पर रेलवे विभाग ने अतिक्रमण बताते हुए हटाने का नोटिस जारी किया है। नोटिस में अतिक्रमण को खुद हटाने के लिए 28 दिसंबर 2022 की समय सीमा दी गई है। इस नोटिस का मुस्लिम नेताओं ने विरोध करते हुए रेलवे विभाग को ‘मजार तोड़ने पर ठीक नहीं होगा’ का जवाब दिया है। इस विरोध की अगुवाई कॉन्ग्रेस नेता डॉ मेंहदी हसन कर रहे हैं। उन्होंने इस मजार को 500 साल पुराना बताया है।

कॉन्ग्रेस नेता मेंहदी हसन के मुताबिक मजार स्टेशन से पहले बनी है और उससे ट्रेनों के परिचालन में कोई दिक्क्त नहीं होती। उन्होंने मजार हटाने के काम को नापाक साजिश करार दिया और बरेली का माहौल बिगड़ने की भी चेतावनी दी। हसन ने सरकार पर भी दरगाहों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। मजार हटाने के विरोध में सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम इज्जत नगर रेलवे स्टेशन पर जमा भी हो गए थे।

सलमान खुर्शीद ने भगवान राम से कर डाली राहुल गाँधी की तुलना, कहा – सुपर ह्यूमन हैं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, इतनी ठण्ड में पहन रहे टीशर्ट

कॉन्ग्रेस नेताओं का हिंदू और हिंदुत्व का अपमान करने का पुराना इतिहास रहा है। अब, कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने राहुल गाँधी की तुलना भगवान श्रीराम से की है। वहीं, उन्होंने कॉन्ग्रेसियों को भरत बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (26 दिसंबर, 2022) को सलमान खुर्शीद उत्तर प्रदेश के अमरोहा में राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा है कि भगवान राम की खड़ाऊँ बहुत दूर तक जाती हैं। कभी-कभी खड़ाऊँ लेकर भी चलना पड़ता है। हमेशा भगवान राम हर जगह नहीं पहुँच पाते। उनके भाई भरत जी उनकी खड़ाऊँ लेकर चलते हैं। खड़ाऊँ लेकर हम उत्तर प्रदेश में पहुँच गए हैं। अब रामजी भी पहुँचेगें। यह हमारा विश्वास है।

खुर्शीद यहीं रुके। उन्होंने राहुल गाँधी को सुपरह्यूमन तक बता डाला। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी सुपरह्यूमन हैं। हम ठंड में ठिठुर रहे हैं और जैकेट पहन रहे हैं। वहीं, राहुल गाँधी टी-शर्ट में बाहर जा रहे हैं। वह एक योगी की तरह हैं जो अपनी ‘तपस्या’ ध्यान से कर रहे हैं।”

बात दें कि इससे पहले, इसी साल अक्टूबर में राजस्थान सरकार में मंत्री परसादी लाल मीणा ने राहुल गाँधी को भगवान राम से बड़ा बता दिया था। मीणा ने कहा था कि राहुल गाँधी 3500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं और वह भगवान राम से अधिक पैदल चल रहे हैं। त्रेता युग में वनवास के समय भगवान राम ने भी इतनी लंबी यात्रा नहीं की थी।

मीणा ने आगे कहा था कि भगवान राम अयोध्या से श्रीलंका तक पैदल गए थे और उससे भी ज्यादा राहुल गाँधी की यह ऐतिहासिक पदयात्रा जो कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में जैसा माहौल है, सांप्रदायिकता का वातावरण बन गया है, उसमें राहुल गाँधी देश जोड़ने का काम करने वाले हैं। साथ ही, बयान दिया कि इतनी लंबी पदयात्रा न कभी निकली और न आगे कोई निकाल पाएगा।

अरब सागर में पाकिस्तानी नौका से ₹300 करोड़ के ड्रग्स बरामद, भारी मात्रा में हथियार भी मिले: 10 जिहादियों की गिरफ़्तारी से नाकाम हुआ Pak का मंसूबा

इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) ने गुजरात ATS के साथ मिलकर अरब सागर में बड़ी कामयाबी हासिल की है। यहाँ गुजरात के ओखा क्षेत्र में पाकिस्तानियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया गया है। ICG ने बताया कि एटीएस गुजरात ने खुफिया जानकारी दी थी। इसी आधार पर ICG ने भारतीय क्षेत्र में पाकिस्तान के 10 चालक दल के सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनके पास से हथियार, गोला-बारूद और 40 किलो नशीला पदार्थ बरामद किया गया है। नशीले पदार्थ की कीमत 300 करोड़ रुपए है।

ICG ने बताया कि विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर 25/26 दिसंबर 2022 की रात के दौरान ऑपरेशन चलाया गया था। ICG ने अपने जहाज ICGS अरिंजय को पाकिस्तान से लगे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) के पास तैनात किया था।

ICG की टीम ने एक पाकिस्तानी मछली पकड़ने वाली नाव ‘अल सोहेली’ को रोका और 300 करोड़ रुपए के 40 किलोग्राम नशीला पदार्थ बरामद किया। इसके साथ ही हथियार के साथ गोला-बारूद भी बरामद किया गया। ICG की चालक दल के साथ नाव को पकड़ लिया गया है और आगे की जाँच के लिए ओखा लाया गया है। आर्रोपितों के पास से 6 पिस्तौल और 120 राउंड मिले हैं।

वहीं इंडियन कोस्ट गार्ड ने भी ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

उल्लेखनीय है दो महीने पहले इसी तरह के एक ऑपरेशन में, भारतीय तटरक्षक और गुजरात आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने एक पाकिस्तानी नाव, ‘अल साकार’ को जब्त किया था। इस दौरान 50 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 350 करोड़ रुपए आँकी गई थी। इसके साथ ही पाकिस्तानी चालक दल के छह सदस्यों को पकड़ा गया था। वहीं सितंबर 2022 में, एक पाकिस्तानी नाव को 40 किलोग्राम ड्रग्स के साथ भारतीय जल क्षेत्र में जब्त किया गया था। ड्रग्स की कीमत 200 करोड़ रुपये थी।

वडोदरा की यूनिवर्सिटी में 3 दिन में 2 बार पढ़ी गई नमाज: वीडियो सामने आने के बाद रामधुन, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने पढ़ी हनुमान चालीसा

गुजरात के वडोदरा में स्थित एमएस यूनिवर्सिटी में बीते 3 दिनों में 2 बार नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। शिक्षण संस्थान में नमाज पढ़े जाने के विरोध में ‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ ने विरोध करते हुए रामधुन और हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं, यूनिवर्सिटी ने छात्रों की काउंसलिंग करने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी में परीक्षा चल रही है। इस दौरान, शनिवार (24 दिसंबर, 2022) को हुई परीक्षा से पहले कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में नमाज पढ़ी थी। इसके बाद, सोमवार (26 दिसंबर, 2022) को एक बार फिर परीक्षा से पहले कुछ छात्रों ने नमाज पढ़ी।

बता दें कि रविवार (25 दिसंबर, 2022) को अवकाश होने के कारण विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी नहीं जा सके थे। लेकिन, अब एक बार फिर घटना सामने आने के बाद, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी पहुँच गए। जहाँ, उन्होंने यूनिवर्सिटी परिसर में हंगामा करते हुए नमाज पढ़ने का विरोध किया। साथ ही, रामधुन गाते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया है। यही नहीं, VHP कार्यकर्ताओं ने उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दी है।

छात्रों की होगी काउंसिलिंग

यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़े जाने को लेकर शुरू हुए विवाद को लेकर एमएस यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता लकुलिश त्रिवेदी का कहना है कि कॉमर्स डिपार्टमेंट में बीकॉम के मिड सेमेस्टर की परीक्षाएँ चल रही हैं। यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों की काउंसलिंग कराई जाएगी। साथ ही, उन्हें शैक्षणिक संस्थान को धार्मिक अखाड़ा न बनाने के लिए कहा जाएगा।

इस पूरे मामले में, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि शिक्षा का क्षेत्र बहुत ही पवित्र क्षेत्र है। इसलिए यहाँ विवाद वाली बातों व कामों से बचना चाहिए। बता दें कि एमएस यूनिवर्सिटी को A++ रेटिंग मिली हुई है। इससे पहले, यूनिवर्सिटी में अश्लील पेंटिंग, शराबियों की पार्टी, गाँजा, चरस, महिला प्रोफेसरों की अश्लील तस्वीरों के सामने के कारण विवाद हुआ था। अब नमाज को लेकर नया विवाद शुरू हुआ है।