वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद ढाँचा (Gyanvapi Controversial Structure, Varanasi) मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (20 मई 2022) को निचली अदालत को ट्रांसफर करते हुए 8 सप्ताह में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामला की सुनवाई पहले इसे वाराणसी जिला कोर्ट में होगी। तब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 मई की सुनवाई में दिए गए निर्देश जारी रहेंगे।
17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि शिवलिंग वाले स्थान को सुरक्षित रखा जाए, मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से रोक ना रोका जाए और सिर्फ 20 लोगों के नमाज पढ़ने वाला ऑर्डर लागू नहीं रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इस मामले को अनुभवी और परिपक्व जज द्वारा सुना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम ट्रायल जज पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन अधिक अनुभवी द्वारा यह मामला देखा जाना चाहिए, तभी दोनों पक्षों को लाभ होगा।” जिला जज मस्जिद के भीतर पूजा करने के मामले को देखेंगे।
बेंच ने कहा कि जिला जज को 25 साल का लंबा अनुभव है। इस मामले में सभी पक्षों के हित को सुनिश्चित किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह न समझा जाए कि मामले को निरस्त किया जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रास्ते आगे भी खुले रहेंगे।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने वीडियोग्राफी सर्वे की रिपोर्ट लीक होने पर चिंता जाहिर की। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है कि इसको लेकर देश में एकता बनी रहनी चाहिए।
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह विवाद के मामले में पूजा स्थल अधिनियम 1991 (Places of Worship Act 1991) रुकावट नहीं होगी। यह अधिनियम इस केस में लागू नहीं होगा। यह बात जिला जज राजीव भारती ने अपने निर्णय में कहा है। इसकी जानकारी वादी के अधिवक्ता गोपाल खंडेलवाल ने दी।
इसके साथ ही कोर्ट ने श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और अन्य निजी पक्षों की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका को अनुमति दी और सितंबर 2020 में उनके मुकदमें को खारिज करने के एक सिविल कोर्ट के आदेश को पलट दिया।
बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण विराजमान को वादी बनाकर 13.37 एकड़ जमीन पर दावा पेश करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के केस को जिला जज राजीव भारती की अदालत ने गुरुवार (19 मई 2022) को सुनवाई योग्य मानते हुए दर्ज कर लिया। करीब दो वर्ष के लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद उनकी याचिका को अदालत ने दर्ज करने संबंधी निर्णय दिया। अगली सुनवाई 26 मई को होगी। अदालत के निर्णय पर अधिवक्ता रंजना ने कहा कि यह भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की जीत है।
समझौते को बताया गलत, रद्द करने की माँग
रंजना अग्निहोत्री ने 25 सितंबर 2020 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन पर दावा पेश किया था, जिसमें उन्होंने वर्ष 1973 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट और शाही ईदगाह के बीच हुए समझौते को गलत बताकर इसे रद्द करने की माँग की है। उनकी याचिका में बताया गया है कि 20 जुलाई 1973 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी के मध्य बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत परिसर की जमीन को ईदगाह इंतजामिया कमेटी को दे दिया गया। बाद में समझौते की डिक्री (न्यायिक निर्णय) 7 नवंबर 1974 को हुई।
जिला जज ने अपने निर्णय में यह कहा
श्रीकृष्ण विराजमान और उनकी भक्त रंजना अग्निहोत्री ने इसी डिक्री को रद्द करने की माँग की है। जिला जज ने रिवीजन स्वीकार करने के निर्णय में कहा है कि चूँकि याचिकाकर्ता द्वारा समझौता और डिक्री को चैलेंज किया गया है, इसीलिए उपासना स्थल अधिनियम इस केस में लागू नहीं होगा। वादी के अधिवक्ता गोपाल खंडेलवाल ने बताया कि केस में समझौता और डिक्री को आधार बनाया गया है, इसलिए अदालत ने इस मामले में उपासना स्थल अधिनियम 1991 का लागू होना नहीं माना है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार (20 मई 2022) को पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने शिक्षा मंत्री परेश अधिकारी की बेटी अंकिता अधिकारी को अगले आदेश तक स्कूल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंत्री की बेटी को अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त किए गए वेतन को लौटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह वेतन दो किश्तों में लौटानी होगी।
SSC scam | Calcutta HC orders West Bengal minister Paresh Adhikari’s daughter Ankita Adhikari not to be allowed to enter the school premises where she worked as a teacher till further orders. Court says she has to refund her salary for the tenure she has already served
यह फैसला सीबीआई के मंत्री अधिकारी और उनकी बेटी के खिलाफ FIR दर्ज करने के एक दिन बाद आया है। दरअसल, पिछले दिनों कलकत्ता हाई कोर्ट ने दोनों के खिलाफ सीबीआई समन का डेडलाइन सेट किया था। उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में अवैध रूप से शिक्षकों की भर्ती करने और मेरिट सूची से अनुपस्थिति के बावजूद अपनी बेटी को नौकरी आवंटित करने के लिए तलब किया गया था। इस डेडलाइन के खत्म होने के बाद सीबीआई ने FIR दर्ज की थी।
एजेंसी ने वरिष्ठ टीएमसी नेता और उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी से भी पूछताछ की थी क्योंकि कथित भर्ती घोटाला तब हुआ था जब वह शिक्षा मंत्री थे। शिक्षा राज्य मंत्री अधिकारी से 19 मई को पूछताछ की गई थी।
Kolkata | BJP workers protest against Mamata Banerjee government over the issue of the alleged SSC scam pic.twitter.com/fER4CVYXKn
इस बीच, भाजपा नेताओं ने SSC घोटाले के मुद्दे पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया और परेश अधिकारी एवं पार्थ चटर्जी दोनों के इस्तीफे की माँग की।
क्या है SSC घोटाला
पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला, जिसे आमतौर पर SSC घोटाले के रूप में जाना जाता है, 2014 से 2016 तक SSC द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (एसएलटी) के माध्यम से आयोजित भर्ती प्रक्रिया को देखता है। राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (SLST) के उम्मीदवार ने आरोप लगाया था कि कम अंक प्राप्त करने वाले कई उम्मीदवारों को मेरिट लिस्ट में उच्च रैंक दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि जो उम्मीदवार मेरिट लिस्ट में नहीं थे, उन्हें भी नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) भेजा गया था।
इसके अलावा, वर्ष 2016 में, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में ग्रुप C और ग्रुप D के कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में भ्रष्टाचार के कई आरोप सामने आए। यह मामला इस साल मार्च में तब सामने आया था जब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई गई थी।
इससे पहले एकल पीठ ने सीबीआई को एसएससी सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष एसपी सिन्हा और पैनल के अन्य पूर्व सदस्यों से पूछताछ करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई को पूर्व सदस्यों से पूछताछ के बाद रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। अप्रैल में, CBI ने पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा निदेशालय के पूर्व उप निदेशक आलोक कुमार सरकार और एसएससी के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी FIR दर्ज की थी।
FIR के अनुसार, आरोपित ने ग्रुप-डी स्टाफ पदों के लिए लगभग 500 अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्त करने में अनुचित लाभ उठाया था। कथित तौर पर, उन्होंने विभागीय नियमों की भी धज्जियाँ उड़ाईं और इसके लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। केंद्रीय एजेंसी के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 468 और 471 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
8 अप्रैल को सीबीआई ने आरोपितों से पूछताछ की और कोर्ट में विस्तृत रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सीबीआई के सामने पेश होने को कहा। सीबीआई ने मंत्री परेश अधिकारी और उनकी बेटी अंकिता अधिकारी पर धारा 120 बी, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 7 के तहत आरोपित बनाया है।
दुनिया के सबसे अमीर आदमी और स्पेसएक्स व टेस्ला के CEO एलन मस्क (Elon Musk) पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। यौन उत्पीड़न का यह मामला 2016 का है। इस मामले में एक फ्लाइट अटेंडेंट को चुप रहने के लिए 2018 में स्पेसएक्स ने 250000 डॉलर (करीब ₹1.94 करोड़) दिए थे। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट अटेंडेंट स्पेसएक्स की कॉरपोरेट जेट फ्लाइट के लिए कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम करती थी। उसने आरोप लगाया है कि मस्क ने बिना सहमति के उसके पैर पर हाथ फेरा और इरोटिक मसाज के बदले महँगे गिफ्ट का ऑफर दिया।
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट में फ्लाइट अटेंडेट की दोस्त के इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट्स के आधार पर कहा गया है कि मस्क ने उसे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया और उसे इरोटिक मसाज के बदले घोड़ा देने का ऑफर दिया, क्योंकि वह घुड़सवारी करती थी। रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि फ्लाइट अटेंडेंट को मसाज की ट्रेनिंग और इसका लाइसेंस लेने के लिए कहा गया था, ताकि वह मस्क की मसाज कर सके। बताया जा रहा है कि मस्क के गल्फस्ट्रीम G650ER के प्राइवेट केबिन में ये घटना हुई थी।
अटेंडेंट ने अपनी दोस्त को बताया था कि रॉकेट लॉन्च कंपनी स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने 2016 में फ्लाइट के दौरान अपने पूरे शरीर की मसाज करवाने के लिए उसे अपने केबिन में आने के लिए कहा था। जब वह उनके केबिन में पहुँची, तो वह बिना कपड़ों के बेड पर लेटे हुए थे। मस्क ने केवल शरीर के निचले आधे हिस्से को चादर से ढक रखा था। मालिश के दौरान मस्क ने उसे अपना प्राइवेट पार्ट भी दिखाया और फिर उसकी पैर को छुआ। महिला कर्मचारी ने अपनी दोस्त को यह भी बताया था कि प्राइवेट कैबिन में मसाज के दौरान मस्क ने उससे सेक्स के लिए भी पूछा था।
इसके बाद मस्क ने उसे सेक्सुअल एक्ट में इन्वॉल्व होने के लिए घोड़ा गिफ्ट करने का ऑफर दिया। अटेंडेंट ने मना कर दिया और बिना किसी सेक्सुअल एक्ट में इन्वॉल्व हुए मालिश करना जारी रखा। उसने कहा, “फ्लाइट अटेंडेंट इज नॉट फॉर सेल। वह पैसे और गिफ्ट के लिए सेक्सुअल फेवर नहीं करती।” यह घटना लंदन की फ्लाइट के दौरान हुई थी।
इनसाइडर ने जब इन आरोपों को लेकर मस्क से संपर्क किया तो, उन्होंने जवाब देने के लिए और समय माँगते हुए कहा कि इस कहानी में और भी कई पहलू हैं जो सामने नहीं आए हैं। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए लिखा, “अगर मैं यही सब कर रहा होता तो 30 साल के करियर में ये सारी बातें सामने आ चुकी होतीं।”
एलन मस्क ने इस मामले को लेकर शुक्रवार को एक ट्वीट भी किया है। इसे उन्होंने ‘एलनगेट’ नाम दिया है। दरअसल, मार्च 2021 में उन्होंने एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, “अगर मुझसे जुड़ा कभी कोई स्कैंडल सामने आता है, तो प्लीज इसे एलनगेट कहना।” अपने ट्वीट के साथ उन्होंने फनी इमोजी भी बनाया है। हालाँकि, अब यह ट्वीट उनके ट्विटर हैंडल से डिलीट कर दिया गया है।
वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure, Varanasi) की वीडियोग्राफिक सर्वे में सामने आए शिवलिंग में कभी हीरे जड़े हुए थे। जब मुस्लिम आक्रांताओं ने आदि विश्वेश्वर मंदिर पर हमला किया, तब उन्होंने उस रत्न को उखाड़ लिया और अपने साथ ले गए। शिवलिंग के ऊपर दिखने वाला चिह्न उसी हीरे के जड़ने का निशान है।
हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने बताया, “मेरी जानकारी के मुताबिक, जो मूल शिवलिंग है, वहाँ पर हीरे रखने की जगह बनी हुई थी। शिवलिंग के ऊपर जो स्थान बना है वह हीरे रखने की जगह है। शिवलिंग के ऊपर हीरे रखने की जगह है, जहाँ से हीरे गायब हैं और यह पूरा-पूरा शिवलिंग है।” उन्होंने कहा कि फव्वारे की बात लोगों को बेवकूफ बनाने की बात है।
हरिशंकर जैन का कहना है कि औरंगजेब आकर मंदिरों का विध्वंस किया था। हालाँकि, वह आदि विश्वेश्वर का पूरा मंदिर ध्वस्त नहीं कर पाया था। उन्होंने कहा कि वे 274 पेज का दस्तावेज कोर्ट में जमा करा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि इस डॉक्युमेंट में काशी क्या है, इसका महत्व क्या है आदि जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि काशी एक धार्मिक नगरी है, जिसे भगवान शिव ने बसाया था और इसका उल्लेख पुराणों और शास्त्रों में भी है।
जैन ने बताया कि पुराने मंदिर के ऊपर ही गुंबद बना दिया गया है। गुंबद के नीचे मंदिर की शिखा है। इसके बारे में भी रिपोर्ट दी गई है। उन्होंने बताया कि इसकी तस्वीर उनके पास है।
आजतक के अनुसार, रिपोर्ट के एक पेज में कहा गया है कि तहखाने की दीवार पर पान के पत्ते के आकार की फूल की 6 आकृतियाँ बनी हुई हैं। वहीं, तहखाने में 4 खंबे पुराने तरीके के हैं, जिनकी ऊँचाई 8 फीट है। खंभों के चारों ओर नीचे लेकर ऊपर तक घंटी, कलश और फूल की आकृतियाँ बनी हैं। एक खंभे पर पुरातन हिंदी भाषा में सात लाइनें खुदी हुई हैं।
गुजरात के वलसाड जिले में गुरुवार (19 मई 2022) को राष्ट्रीय ध्वज और हिंदू धर्म का अपमान करने का मामला सामने आया है। घटना वलसाड जिले के वापी कस्बे में मोरई फाटक के पास की है। यहाँ राजमार्ग पर कबाड़ी के गोदाम में भारतीय ध्वज, भगवान श्रीराम और हनुमानजी की तस्वीर वाले बैनर को स्क्रैप बैग के रूप में पाया गया। राष्ट्रीय ध्वज का इस तरह अपमान होता देख स्थानीय हिंदू देशभक्त काफी आक्रोशित हो गए।
दरअसल, वापी से सूरत जाने वाले हाईवे पर मोराई फाटक के पास लियाकत खान नाम के शख्स का खुला मलबा गोदाम है। दूर से संदिग्ध दिखाई देने पर स्थानीय लोगों ने देखा तो पाया कि यह कोई आम कपड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज है। इसके बाद लोगों ने तुरंत वापी विहिप अध्यक्ष और सामाजिक नेता नरेंद्र पायक को फोन किया और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वाली घटना की सूचना दी।
गोदाम प्रबंधक लियाकत खान (साभार: नरेंद्र पायक)
ऑपइंडिया के साथ बातचीत में नरेंद्र पायक ने कहा, “जब मुझे इस संबंध में फोन आया, तो मैं तुरंत मौके पर पहुँचा। मैंने भी वहाँ राष्ट्रीय ध्वज से बँधी ऐसी स्क्रैप टोकरियाँ देखीं। जब हमने और करीब जाकर देखा तो पाया कि वहाँ राष्ट्रीय ध्वज के अलावा, हिंदू धर्म में आस्था के प्रतीक भगवान राम और हनुमानजी के बैनर भी फेंके हुए थे। हमने तुरंत नजदीकी वापी टाउन पुलिस स्टेशन को सूचना दी। जिसके बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे।”
पायक ने ऑपइंडिया को बताया कि गोदाम का निरीक्षण करते समय उन्हें कुल 30 राष्ट्रीय ध्वज, श्री राम के चित्र वाले 12 बैनर और 4 झंडे हनुमान जी के चित्र वाले मिले। पुलिस ने इसे जब्त कर लिया है। बताया गया कि गोदाम में अन्य धर्मों के भी कुछ बैनर पाए गए थे।
मलबे में राष्ट्रीय ध्वज और हिंदू देवी-देवताओं के झंडे (साभार: नरेंद्र पायक)
पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और गोदाम के मैनेजर लियाकत खान को गिरफ्तार कर लिया और सभी राष्ट्रीय ध्वज और धार्मिक बैनर जब्त कर लिए। लियाकत खान से पूछताछ से पता चला कि उसने सूरत के एक मिल से स्क्रैप भरने के लिए यह कपड़ा खरीदा था। इसके बाद पुलिस ने सूरत मिल के मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया है।
शुरूआती जाँच से पता चला है कि सूरत में एक कपड़ा मिल में इस तरह के झंडे और धार्मिक बैनर बनाए जा रहे हैं। बहुत सारे राष्ट्रीय झंडों में टाइपोग्राफिकल त्रुटि के कारण स्क्रैप के रूप में बेचा गया था। यही वापी के गोदाम तक पहुँचा था। लेकिन भारतीय ध्वज संहिता, 2002 के अनुसार, यह एक आपराधिक कृत्य है।
भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान
भारतीय ध्वज संहिता, 2002 के अनुसार, खराब या फटे हुए राष्ट्रीय ध्वज को जलाने या दफनाने के तरीके हैं। किसी भी प्रक्रिया को चुनते समय सख्त नियमों का भी पालन किया जाना चाहिए। ये नियम इस प्रकार हैं।
“राष्ट्रीय ध्वज को दफनाने के लिए, सभी क्षतिग्रस्त झंडों को एक लकड़ी के बक्से में इकट्ठा करें, उन्हें ठीक से तह लगाकर रखें। इसके बाद बॉक्स को जमीन में गाड़ दें। झंडा गाड़े जाने के बाद एक मिनट का मौन धारण करें।” यहाँ यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि राष्ट्रीय ध्वज गर्व का प्रतीक है और इसका निस्तारण करते समय इसकी गरिमा को बनाए रखना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करना एक आपराधिक कृत्य है। राष्ट्रीय ध्वज और हिंदू देवताओं के अपमान की पुलिस जाँच कर रही है। सूरत मिल के मालिक से पूछताछ के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।
पहले भी वापी में हो चुकी है हिंदू विरोधी घटना
इससे पहले मार्च में वापी के चानोद स्थित सेंट मैरी स्कूल में हिंदू धर्म के अपमान की घटना सामने आई थी। गुजरात के एक क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में दो हिंदू छात्रों को ‘जय श्रीराम’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करने पर सजा दी गई। हालाँकि, हिंदूवादी संगठनों के प्रदर्शन के बाद स्कूल ने माफी माँग ली।
गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका देते हुए बीते दिनों पाटीदार नेता हार्दिक पटेल (Hardik Patel) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। ऐसा लगता है कि यह इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) को बेहद नागवार गुजरा है। कॉन्ग्रेस पर हार्दिक के हमलों और इस्तीफे वाली चिट्ठी में किए गए खुलासों से वे परेशान दिखे।
उनकी यह झुंझलाहट हार्दिक पटेल के साथ एक इंटरव्यू में स्पष्ट तौर पर दिखी। इस दौरान राजदीप लगातार हार्दिक के इस्तीफे की भाषा को लेकर सवाल उठाते रहे। उन्होंने पूछा कि कुछ दिन पहले तो सब ठीक था, अचानक से इन पाँच दिनों में क्या बदल गया?
राजदीप सरदेसाई ने कहा, “हार्दिक जी, हमने पिछले हफ्ते इसी प्रोग्राम में बात की थी। तब आपने कहा था कि कोई प्रॉब्लम नहीं है, सब इशू लोकल लेवल पर गुजरात में हैं। उस वक्त आपने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी पर पूरा भरोसा जताया था, लेकिन कुछ दिन बाद आप अपना इस्तीफा देते हुए चिट्ठी लिखते हैं और उसमें राहुल गाँधी व कॉन्ग्रेस पर हमला करते हैं। ऐसा क्या बदल गया इन पाँच दिनों में हार्दिक जी।”
इंटरव्यू के दौरान इंडिया टुडे के पत्रकार बार-बार हार्दिक पटेल की चिट्ठी पर आपत्ति जताते नजर आए। उन्होंने पाटीदार नेता पर भड़कते हुए कहा कि आप कहते हैं आपके मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, लेकिन आप एक लेटर लिखते हैं। वह लेटर मेरे पास है। इस्तीफे पर हस्ताक्षर आपके हैं, लेकिन शब्द किसी और के हैं। इसमें जो लिखा गया है वह डिक्टेशन है। कॉन्ग्रेस का दावा है कि आपसे किसी ने ऐसा लिखने के लिए कहा है।
पत्रकार ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “हार्दिक पटेल को कहा गया है कि आप राहुल गाँधी को टारगेट कीजिए। आप उस लेटर में कह दीजिए कि कॉन्ग्रेस के नेता चिकन सैंडविच के लिए कितने उतावले थे। वो हमेशा बाहर जाते हैं। ये भाषा जो किसी बीजेपी प्रवक्ता की टीवी स्टूडियो में होती है। वैसी ही भाषा का प्रयोग हार्दिक पटेल ने अपने लेटर में राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी को टारगेट करते हुए लिख दी है।”
इस पर हार्दिक ने कहा, “कॉन्ग्रेस गुजरात के नेता को इस बात का कैसे पता है। वे भाजपा के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए कड़ी मेहनत क्यों नहीं कर रहे हैं? क्यों वे अपने काम के प्रति ईमानदार नहीं हैं? जब भी राहुल गाँधी गुजरात में आते हैं, तो हम अपेक्षा करते हैं कि वह यहाँ के जमीनी मुद्दों पर बात करेंगे। लेकिन यहाँ पार्टी के नेता उनके आने पर उनकी खातिरदारी में जुट जाते हैं कि वो कब खाएँगे, क्या खाएँगे। नाश्ते में क्या लेंगे। उनके लिए कौन सा चिकन सैंडविच लाना है, कहाँ से लाना है। ये सब देखकर बहुत दुख होता है। ये लोग अपनी गलतियों को सुधारना ही नहीं चाहते हैं। इसलिए जो गलत होगा उस पर बोलूँगा।”
राजदीप ने पटेल से कहा कि कॉन्ग्रेस में शामिल होते ही पार्टी ने आपको उच्च पद दिया था। इसके जवाब में पाटीदार नेता कहते हैं कि मुझे कॉन्ग्रेस पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, अगर मुझे इससे जुड़ा काम ही नहीं दिया गया तो इस पद का क्या महत्व है?
उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद गुरुवार (19 मई 2022) को गुजरात के नेता हार्दिक पटेल (Hardik Patel) ने देश की सबसे पुरानी पार्टी पर जमकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था, “गुजरात में सिर्फ हार्दिक ही नहीं, बल्कि कई नेता कॉन्ग्रेस से नाराज हैं। कॉन्ग्रेस में सच बोलो तो बड़े नेता आपको बदनाम करते हैं। यही उनकी रणनीति है।” इसके साथ ही पटेल ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी जातिवादी पार्टी है।
गौरतलब है कि 18 मई को हार्दिक पटेल ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी की राज्य इकाई को बड़ा झटका दिया था। पटेल ने ट्विटर पर हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में पत्र साझा करते हुए लिखा था, “आज मैं हिम्मत करके कॉन्ग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूँ कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।”
अपने बयान में हार्दिक पटेल ने यह भी कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी देशहित व समाज हित के बिलकुल विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस में एक सक्षम और मजबूत नेतृत्व न होने को लेकर अपनी शिकायत की थी। साथ ही कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है जबकि देश के लोग विकल्प चाहते हैं जो उनके भविष्य के लिए सोचता हो। उन्होंने इस्तीफे में कहा था कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व गंभीर नहीं है। उनका ध्यान गुजरात की परेशानियों से ज्यादा मोबाइल व बाकी की चीजों पर है। पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता होती है कि पार्टी नेतृत्व ने चिकन सैंडविच खाया या नहीं।
वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure, Varanasi) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जस्टिस चंद्रचूड़ की अदालत ने कहा कि किसी स्थान के धार्मिक चरित्र के निर्धारण को पूजा स्थल अधिनियम, 1991 द्वारा प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने मामले को सुनवाई के लिए वाराणसी के निचली अदालत को स्थानांतरित कर दिया।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “इस मामले में बहुत जटिलता और संवेदनशीलता है, इसलिए इसे निचली अदालत द्वारा एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी द्वारा सुना जाना चाहिए।” जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यही कारण है कि ट्रायल कोर्ट को केस की सुनवाई जारी रखने देना चाहिए।
Supreme Court orders transfer of Gyanvapi mosque case to District Judge, Varanasi. Supreme Court orders that senior and experienced judicial officer of UP Judicial services will hear the case. pic.twitter.com/cE7KefXQYt
मुस्लिम पक्षकार को स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर वह रोक नहीं लगा सकता। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि निचली अदालत को निर्देश देने के बजाय संतुलन बनाने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान उदाहरण देते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “भारत में धार्मिक स्थलों का हाइब्रिड चरित्र बहुत आम है। मस्जिद और शिवलिंग को भूल जाइए, एक जगह पर क्रॉस का होना किसी जगह को ईसाई पूजा का स्थान नहीं बना देगा।”
BREAKING: Justice Chandrachud exemplifies — “Hybrid character of religious places very common in India. Forget mosque and Shivlinga, the existence of a Cross in a place will not make a place a christian place of worship…#Gyanvapi#GyanvapiEvidence
इस दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि जिस क्षेत्र में हिंदू पक्ष कह रहे हैं कि शिवलिंग मिला है, वहाँ एक तालाब है। अहमदी ने कहा, “हम कहते हैं कि यह एक फव्वारा है। उस क्षेत्र में नल हैं। उस क्षेत्र को वज़ू के लिए खोला जा सकता है।”
अहमदी की इस माँग पर सॉलिसिटर जनरल ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो जाएगी। अदालत की बेंच ने भी अहमदी की इस माँग को मानने से इनकार कर दिया।
Bench says it does not have a picture and Ahmedi’s prayer is difficult to be entertained. SG says that there is an inquiry report, while Ahmedi says he has an objection to the report itself. #Gyanvapi
मुस्लिम पक्षकारों के वकील हुजैफा अहमदी ने कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने अब तक जो किया है, उससे माहौल खराब हो सकता है। उन्होंने कोर्ट से यथास्थिति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि पिछले 500 सालों से उस स्थान को जैसे इस्तेमाल किया जा रहा था उसे बरकरार रखा जाए। हालाँकि, यह माँग स्वीकार नहीं हुई।
मध्य प्रदेश के भोपाल में एक अस्पताल संचालक पर धर्मान्तरण के दबाव और रेप का आरोप लगा है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस में की है। आरोपित का नाम निहाल खान है। शिकायत एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा दर्ज करवाई गई है। फ़िलहाल, आरोपित अस्पताल संचालक फरार है।
भोपाल में लव जिहाद का मामला आया सामने, धर्म छुपकर महिला डॉक्टर को शादी का झांसा देने वाले निहाल खान पर एफआईआर, अशोका गार्डन पुलिस ने दर्ज की एफआईआर। महिला पेशे से है फिजियोथेरेपिस्ट। आरोपी महिला पर धर्म परिवर्तन कर शादी करने का दबाव बना रहा था। @NavbharatTimes#NBTMPNews#Bhopalpic.twitter.com/tGH93mMQrV
पीड़िता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीड़िता ने कहा, “मैं भोपाल में 2 अस्पताल की मालकिन हूँ। मेरे पार्टनर निहाल खान हैं। उन्होंने मेरे साथ प्यार का नाटक किया। उन्होंने मुझे अपनी पत्नी बताया। मुझे लंबे समय तक साथ रखा। मेरे ऊपर 2 महीने से धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा। मुझ से कहा जा रहा है कि मैं मुसलमान नहीं बनी तो मुझे बीवी नहीं माना जाएगा। मैं किसी कोर्ट को नहीं मानता। किसी कोर्ट की शादी को भी मैं नहीं मानूँगा। जब मैंने धर्म परिवर्तन से मना किया तब वो शादी से मुकर गया।”
पीड़िता ने आगे बताया, “मुझ से निहाल ने कहा कि मैंने प्रॉपर्टी अपने नाम कर ली है। मेरा जो कर पाओ कर लो। अगर तुम अपनी प्रॉपर्टी वापस पाना चाहती हो तो तुम्हे मुसलमान बनना पड़ेगा। उन्होंने अस्पताल के कागजात बदलवा लिए हैं। उन्होंने सारे बैंक खातों में भी अपना अकेले का ही नाम डाल रखा है। ये अस्पताल के मुस्लिमों को साथ ले कर सारे काले कारनामे करते हैं।”
पीड़िता ने आगे बताया, “मेरे अस्पताल की एक दलित महिला कर्मचारी को अस्पताल के एक मुस्लिम स्टाफ ने गलत तरीके से छुआ था। बाद में उस मुस्लिम स्टाफ ने उसी महिला कर्मचारी को अपने साथ निकाह का ऑफर देते हुए कहा कि मैं 4-5 बीवियाँ रख सकता हूँ। उसे डॉक्टर बनाने का भी लालच दिया गया। जब मैंने उसे रोका तो मेरे साथ भी बदतमीजी की गई। मुझे बोला गया कि हम मुस्लिम हैं और तुम हिन्दू हो। जो कर पाओ कर लो।”
दैनिक भास्कर के मुताबिक पुलिस ने डॉक्टर निहाल खान पर रेप और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पीड़िता ने निहाल खान पर खुद से मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। पीड़िता भोपाल के लाला लाजपत राय कॉलोनी की रहने वाली बताई जा रही है। साल 2018 में पीड़िता ने दीपक सोनी नाम के एक युवक से शादी की थी। 1 महीने बाद ही दोनों अलग हो गए थे। बाद में वह डिपो चौराहे के जनरल अस्पताल में ऑन कॉल विजिट पर मरीजों को देखने जाने लगी। इसी विजिट के दौरान उसकी निहाल से जान-पहचान हो गई थी। उसने कभी अपना पूरा नाम नहीं बताया। शुरुआत में मैंने भी नहीं पूछा। निहाल ने पीड़िता से हमदर्दी दिखाई और शादी का वादा करके उस से शारीरिक संबंध बना लिए।
इस दौरान निहाल पीड़िता के परिवार से भी मेल-मिलाप बढ़ा लिया। इसी मेल-मिलाप का फायदा उठा कर निहाल खान ने पीड़िता की माँ के साथ मिल कर अशोका गार्डन में अस्पताल खोल लिया। इसमें पीड़िता की माँ ने भी पैसे लगाए। इसी के साथ पीड़िता ने 8 लाख रुपए में डिपो चौराहे का जनरल अस्पताल निहाल को पार्टनर बना कर खरीद लिया। पीड़िता के मुताबिक बाद में निहाल खान ने फर्जी पेपर बनवा कर अस्पताल के डॉक्युमेंट अपने नाम करवा लिए। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तब उसकी पिटाई की गई। उसे धमकी दी गई कि अगर पुलिस से शिकायत हुई तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में हुए कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) तंज कसा है। उन्होंने कहा कि इस चिंतन से कॉन्ग्रेस (Congress) को कोई फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि गुजरात (Gujarat) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में कॉन्ग्रेस की हार होने वाली है।
प्रशांत किशोर ने कॉन्ग्रेस के चिंतन शिविर पर शुक्रवार (20 मई 2022) को ट्वीट कर कहा, “मेरे विचार से यह (चिंतन शिविर) यथास्थिति को लम्बा खींचने और कम-से-कम गुजरात और हिमाचल में आगामी चुनावी हार तक #कॉन्ग्रेस नेतृत्व को और समय देने के अलावा कुछ भी सार्थक हासिल करने में विफल रहा!”
In my view, it failed to achieve anything meaningful other than prolonging the status-quo and giving some time to the #Congress leadership, at least till the impending electoral rout in Gujarat and HP!
बता दें कि उदयपुर चिंतन शिविर कॉन्ग्रेस नेताओं ने पार्टी में व्यापक बदलाव को लेकर सहमति दी है। इसमें राहुल गाँधी को एक बार फिर पार्टी का नेतृत्व सौंपने की माँग उठी। बताया जा रहा है कि जो नेता पहले उनके अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ थे, वे भी अब समर्थन राहुल गाँधी कर कर रहे हैं। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि दो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव राहुल गाँधी के नेतृत्व में ही कॉन्ग्रेस लड़ सकती है।
ऐसे में प्रशांत किशोर का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके पहले राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस पार्टी को कई चुनावों में हार का मुँह देखना पड़ा है। बता दें कि प्रशांत किशोर ने कुछ समय पहले पार्टी की कायाकल्प की योजना पेश की थी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उनकी को पूरी योजना को अमल में लाने से इनकार कर दिया था। कह भी कहा जाता है कि कॉन्ग्रेस ने उन्हें पार्टी से जुड़ने का आमंत्रण दिया था और पार्टी में बेहतर पद नहीं मिलने के कारण प्रशांत किशोर उसे ठुकरा दिया था।
प्रशांत किशोर ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था, “मैं कॉन्ग्रेस के नेताओं में एक समस्या देखता हूँ। वे मानते हैं कि हमने देश में लंबे समय तक शासन किया है और जब लोग नाराज होंगे तो अपने आप वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकेंगे और फिर हम सत्ता में वापस आ जाएँगे। वे कहते हैं कि आप क्या जानते हैं, हम सब कुछ जानते हैं और लंबे समय तक सरकार में रहे हैं।”
बता दें कि प्रशांत किशोर ने 2 मई अपने सुराज अभियान को लेकर ट्विटर पर लिखा था, “लोकतंत्र का एक सार्थक भागीदार बनने और जन-समर्थक नीतियों को आकार देने में मदद करने की मेरी खोज ने बीते 10 सालों में उतार-चढ़ाव देखे हैं। अब मैं नया पन्ना पलटने जा रहा हूँ। अब मुद्दों और जन सुराज के मार्ग को बेहतर ढंग से समझने के लिए ‘रियल मास्टर्स’ यानी जनता के पास जाने का समय आ गया है, शुरुआत बिहार से होगी।”
इसके साथ ही 5 मई को उन्होंने कहा था कि वह बिहार के लोगों के साथ पहले 3-4 महीने संवाद स्थापित करेंगे और फिर 2 अक्टूबर से पश्चिम चंपारण से पदयात्रा शुरू करेंगे। उन्होंने कहा था कि इस दौरान वे समाज के विभिन्न तबके के लोगों से मुलाकात स्थिति को समझने का प्रयास करेंगे। इसके बाद राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार किया जाएगा।