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UP में योगी इफेक्ट, रमजान से पहले 54000 लाउडस्पीकर उतरे-60000 की वॉल्यूम कम: महाराष्ट्र में 3 मई की डेडलाइन पर राज ठाकरे अड़े

महाराष्ट्र में जहाँ मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटवाने को लेकर एक बार फिर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा प्रदेश सरकार को चेतावनी दी गई है। तो, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की कार्रवाई लाउडस्पीकर्स पर लगातार जारी है। यूपी भर में अब तक 54 हजार लाउडस्पीकरों को धार्मिक जगहों से हटवाया जा चुका है और 60 हजार की वॉल्यूम धीमी की गई है।

रविवार को औरंगाबाद के सांस्कृतिक मंडल मंच में रैली को संबोधित करते हुए मनसे प्रमुख ने साफ किया है कि ईद के बाद अगर उनकी माँग पर कार्रवाई नहीं हुई तो वो लाउडस्पीकर पर दुगनी वॉल्यूम के साथ हनुमान चालीसा बजाएँगे। राज ठाकरे ने कहा,

“ईद 3 मई की है। मैं किसी का त्योहार नहीं खराब करना चाहता है। लेकिन अब ये सब बातें 4 मई के बाद नहीं सुनेंगे। अगर हमारी माँग नहीं पूरी होती तो हम हनुमान चालीसा बजाएँगे वो भी दुगनी क्षमता के साथ । अगर आपको हमारे अनुरोध करने का ढंग नहीं पसंद आ रहा है तो हम आपसे अपने ढंग से निपटेंगे। मैं 4 मई के बाद चुप नहीं बैठूँगा। अगर लाउडस्पीकर नहीं हटा न, तब मैं तुमको महाराष्ट्र की ताकत दिखाऊँगा।”

उन्होंने चेतावनी दी, “अगर तुम माँग को नहीं सुनते तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे उन चीजों के लिए जो महाराष्ट्र में होंगी। मैं दोहराता हूँ ये मजहबी नहीं सामाजिक मुद्दा है। लेकिन तुम इसे मजहबी बना रहे हो। हम इसी भाषा में जवाब देंगे।” मनसे प्रमुख ने आगे कहा, “हमारा मकसद दंगे भड़काना नहीं है। लेकिन ये लाउडस्पीकर सामान्य जन को परेशान करते हैं। मुस्लिम पत्रकार ने ही मुझे बताया था कि उसका बेटा मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर के कारण तंग है। अगर उत्तर प्रदेश सरकार लाउडस्पीकर हटा सकती है तो फिर  महाराष्ट्र क्यों नहीं? सब अवैध है।”

अपनी माँग के साथ राज ठाकरे ने यह भी जोड़ा कि वह हर धार्मिक जगहों से लाउडस्पीकर हटाने के पक्ष में हैं, लेकिन ऐसा तभी चाहते हैं जब पहले मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटे। अपनी रैली में उन्होंने शरण पवार पर भी निशाना साधा और कहा कि एनसीपी प्रमुख देश को बाँटने वाले कई भाषण दे चुके हैं।

यूपी में मजहबी स्थलों से हट रहे लाउडस्पीकर

उल्लेखनीय है कि एक ओर राज ठाकरे लाउडस्पीकर्स हटवाने के लिए लंबे समय से महाराष्ट्र सरकार से कह रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। पर दूसरी ओर उत्तर प्रदेश है जहाँ योगी सरकार ने 53 हजार से ज्यादा लाउडस्पीकर बंद करवा दिए और 60 हजार से ज्यादा की आवाज धीमी करवा दी। आधिकारिक बयान के अनुसार, मस्जिदों, मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों से 53,942 लाउडस्पीकरों को हटा दिया गया है, जबकि 60,200 अन्य लाउडस्पीकर्स की वॉल्यूम निर्धारित की गई है। जानकारी के मुताबिक, बरेली क्षेत्र से लगभग 16,682 लाउडस्पीकरों को हटा दिया गया है, जबकि 17,204 लाउडस्पीकरों की मात्रा कम कर दी गई है। ऐसे ही वाराणसी क्षेत्र में, 230 लाउडस्पीकरों को हटा दिया गया और 313 की आवाज को नियंत्रित किया गया है।

अर्जुन, श्रीकृष्ण, शिशुपाल वध… जयशंकर ने बताया ‘महाभारत’ को समझे बिना भारत को नहीं जान सकते: जानिए, एक महाकाव्य कैसे है विदेश नीति की धुरी

एस जयशंकर ( S Jaishankar) ने जब से केंद्र सरकार की मोदी सरकार में विदेश मंत्री की जिम्मेदारी संभाली है, वे अक्सर चर्चा में रहते हैं। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बाद उन्होंने इस मंत्रालय में काम करते हुए भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अपनी किताब ‘द इंडिया वे (The India Way)’ में भी उन्होंने उसी विचार पर बात की है, जिसके अनुरूप वह विश्व में भारत का योगदान चाहते हैं और चाहते हैं कि दुनिया भी भारत को उसी तरह देखे। अपनी पुस्तक में भारत पर बात करते हुए उन्होंने महाभारत का और श्रीकृष्ण की नीतियों का उल्लेख किया है।

इस किताब में एक अध्याय है-  ‘कृष्ण की इच्छा- एक उभरती हुई शक्ति की सामरिक संस्कृति।’ इस अध्याय में जयशंकर समझाते हैं कि क्यों भारत को अपनी रणनीतियों और लक्ष्य को समझने के लिए तथा विश्व को भारत को जानने के लिए महाभारत का अध्य्यन करना जरूरी है। अध्याय की शुरुआत जर्मन साहित्यकार गोथे के कथन होती है जिन्होंने कहा था- एक राष्ट्र जो अपने अतीत का सम्मान नहीं करता उसका कोई भविष्य नहीं हो सकता।

अपनी किताब के जरिए जयशंकर ने ये बात स्पष्ट की है कि यहाँ पहले ही एक बहुध्रुवीय दुनिया है। यह कुछ ऐसा है जिसे पश्चिमी शक्तियाँ स्वीकार करने से हिचकिचाती हैं, कम से कम उनके बयानों और उम्मीदों से ऐसा नहीं लगता। जयशंकर के अनुसार भारतीय विचार प्रक्रिया, विकल्प और कशमकश इस बहुध्रुवीय दुनिया में नजर आते हैं। इसके अलावा कई आधुनिक संदर्भ हैं, जिनका वर्णन उनके अनुसार महाकाव्य में है।

अपनी किताब में उन्होंने बताया कि जिस तरह होमर के इलियड या मैकियावेली के द प्रिंस को नकार कर पश्चिमी रणनीतिक परंपरा पर टिप्पणी करना असंभव है, या उनके समकक्ष तीन राज्यों की अवहेलना करते हुए चीन को समझने की कोशिश करना मुमकिन नहीं है। ऐसे ही कोई भी महाभारत का अध्ययन किए बिना भारत को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया के सामने वर्तमान में जो कई चुनौतियाँ हैं उनका जिक्र महाकाव्य में किया जा चुका है।

अर्जुन के चरित्र से समझें आज का परिदृश्य

इस किताब में अर्जुन की उस दुविधा का भी उल्लेख है, जो उन्हें युद्ध के मैदान में अपनों पर आक्रमण करने को लेकर हुई। एस जयशंकर ने अपनी किताब में समझाया है कि कैसे एक योद्धा के तौर पर अर्जुन का व्यवहार अंतरराष्ट्रीय संबंधों व बड़े-बड़े फैसले लेने के दौरान अधिकारियों में दिखता है। कई बार ऐसी स्थिति आती है जहाँ निर्णायक कार्रवाई करनी होती है, लेकिन नहीं की जाती। इसका कारण क्षमता में कमी नहीं होता, बल्कि अर्जुन की तरह परिणामों से भय होता है। वह समझाते हैं कि कैसे नरम राज्य कभी भी जरूरी फैसले नहीं ले पाता।

एस जयशंकर आतंकवाद से लड़ने में भारत की जो भूमिका रही है, उसे भी वह अर्जुन की स्थिति से जोड़ते हैं और कहते हैं कि आतंक के प्रति भारत का रवैया बदला है। अभी तक हम जोखिम लेने से डरते थे, लेकिन अर्जुन की तरह हमें एक योद्धा के तौर पर उभरना होगा जो जोखिम लेने के लिए और परिणामों का सामना करने के लिए तैयार हो चुका। अपनी किताब में वह जिम्मेदारी प्रदर्शित करने की आवश्यता और शक्ति के प्रयोग पर भी प्रकाश डालते हैं। वह समझाते हैं कि कैसे शक्ति के बढ़ने पर इस पर बहस होना और इसका विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।

पड़ोसी देशों की हरकत पर भारत का रवैया और श्रीकृष्ण के हाथों हुआ शिशुपाल वध

‘द इंडिया वे’ में एस जयशंकर ने पड़ोसी शक्तियों से कैसे निपटा जाए इस पर समझाते हुए शिशुपाल वध का उदाहरण दिया। बताया कि कैसे श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध करने से पहले उसके पापों का घड़ा भरने दिया। उन्होंने अर्जुन के उदाहरण से ये भी समझाया कि कैसे सही रणनीति युद्ध के लिए जरूरी होती है। जैसे महाभारत में नारायणी सेना को न चुनकर अर्जुन ने श्रीकृष्ण का साथ माँगा और विजय हासिल की। वैसे ही सही निर्णय किसी भी युद्ध का परिणाम बदल सकती है।

विदेश मंत्री अपनी किताब में समझाते हैं कि आज के समय में जब तकनीक, ताकत, बड़े-बड़े उपकरणों, रोबोट अपनी पैठ बना चुके हैं उस समय अपनी क्षमताओं की सही पहचान करना, पूरा खेल बदल सकता है। यानी हाथ में यदि पत्ते आ भी जाएँ तो भी उनके साथ कैसे खेला जाएगा यही नया विश्व बनाने का मूलमंत्र है। दुर्योधन हारा क्योंकि उसे श्रीकृष्ण की शक्ति का एहसास नहीं था। उसे लगा कि नारायणी सेना ही उसे जिताने में मदद करेगी।

किताब में एस जयशंकर कई मौकों का जिक्र करते हैं जब युद्ध के नियमों का उल्लंघन हुआ। फिर वो चाहे दुर्योधन को मारने की युक्ति हो या भीष्म पितामह को मारने की युक्ति या फिर कर्ण की मृत्यु। उन्होंने समझाना चाहा कि नियमों का सम्मान हर जगह होता है। मगर सामने वाला यदि लगातार शक्तियों का गलत इस्तेमाल करे तो खेल में थोड़ा बदलाव करना हमेशा जस्टिफाई किया जा सकता है। उन्होंने इस किताब में बताया है कि सत्ता परिवर्तन हमेशा से अभ्यास का हिस्सा रहा है। श्रीकृष्ण ने जरासंध (98 राजकुमारों को कैदी बनाने वाला राजा) को जब रास्ते से हटाया तब इसका मकसद था एक चुनौती को दूर करना नहीं, बल्कि युधिष्ठिर के राजा बनने के रास्ते में आने वाले काँटे को हटाना भी था।

जयशंकर बताते हैं कि राष्ट्रीय शक्ति को मजबूत करने की जो लोग वकालत करते हैं, वे सही हैं, लेकिन दूसरों के प्रभाव और शक्ति के दोहन करने के कौशल को भी नहीं नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उन्होंने कौरव और पांडवों को उदाहरण देकर समझाया कि भले ही पांडव आजीवन कौरवों की तुलना में पीड़ित रहे। मगर उनके पास अपनी वीरता और महानता से कहानी को गढ़ने और उसे नियंत्रित करने की वो क्षमता थी जिसने उन्हें कौरवों से ऊपर रखा।

जयशंकर महाभारत को लेकर बताते हैं कि इसमें लिखी गई बातें इस संबंध है कि कैसे सत्ता में सामंजस्य बिठाया जाए। आज के समय में ऐसे सामंजस्य खत्म हो रहे हैं। आगे बढ़ते हुए हमें अपनी क्षमता, अपना आत्मविश्वास बढाना होगा। ये समझते हुए कि राष्ट्र हिंत की एक कीमत होगी नेतृत्व को कठिन फैसलने लेने होंगे। अपनी किताब में एस जयशंकर ने कहा कि श्रीकृष्ण की तरह हर खेल में जीत के लिए लोगों को रणनीति को मद्देनजर रखते हुए समाधानों को खोजते हुए लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना होगा।

भारत को देना होगा अपनी क्षमताओं पर ध्यान

बता दें कि इससे पहले दिल्ली में रायसीना डायलॉग में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश की 25 सालों की विदेश नीति की रूपरेखा पेश की थी। उन्होंने कहा था कि देश अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखे और दुनिया क्या है, यह जानने की बजाए, हम क्या हैं, यह देखें और हर क्षेत्र में मौजूद अवसरों का लाभ उठाएँ। उन्होंने कहा था कि एक वक्त था, जब विश्व के इस हिस्से में हम एकमात्र लोकतंत्र थे। हमें हमारी क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए और आगामी वर्षों में दुनिया के माहौल को देखकर हर क्षेत्र में लाभ उठाना चाहिए।

हिंदी में जयन्ती मिश्रा द्वारा अनुवादित यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में संघमित्रा ने काफी विस्तार से लिखी है। इसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

गोधरा के बाद बाल ठाकरे ने बताई थी मोदी की कीमत: खुद CM ठाकरे ने स्वीकारा, बोले- मेरे उनसे अब भी संबंध हैं लेकिन…

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार (1 मई 2022) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बाला साहेब ठाकरे से जुड़ा एक किस्सा बताया। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा गोधरा दंगों के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने मुंबई में आकर गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को लेकर सवाल किए थे और उस समय बाला साहेब ने लाल कृष्ण आडवाणी को नरेंद्र मोदी की कीमत बताई थी।

सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा, “गोधरा दंगों के बाद ‘मोदी हटाओ’ अभियान चला था। आडवाणी एक रैली के लिए मुंबई आए थे। उस समय उन्होंने बालासाहेब से पूछा कि आपको क्या लगता है कि मोदी को हटाना चाहिए। इसे सुन बालासाहेब ने कहा था ‘उसे मत छूना। मोदी गया तो गुजरात गया’।” सीएम ठाकरे ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरे संबंध अभी भी पीएम मोदी से है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि गठबंधन होगा।”

मनसे पर सीएम ठाकरे ने साधा निशाना

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में इस समय लाउडस्पीकर विवाद के कारण शिवसेना चारों ओर से घिरी हुई है। ऐसे में उन्होंने पीएम मोदी से जुड़ा किस्सा उसी दौरान साझा किया जब वो इस लाउडस्पीकर वाले मुद्दे पर जवाब दे रहे थे। राज ठाकरे द्वारा लाउडस्पीकर को लेकर जो अभियान चलाया जा रहा है उसे लेकर सीएम ठाकरे ने कहा,

“कुछ लोग हैं जो झंडे बदलते रहते हैं। पहले वे गैर-मराठी लोगों पर हमला करने की कोशिश करते थे। अब वे गैर-हिंदुओं पर हमला कर रहे हैं। मार्केटिंग का जमाना है। ये भी नहीं चला तो कुछ और। सुप्रीम कोर्ट ने लाउडस्पीकर पर आदेश दिया है। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने किसी एक धर्म के बारे में कहा है। दिशानिर्देश सभी धर्मों के लिए हैं।”

केंद्रीय एजेंसियों पर CM ठाकरे ने निकाला गुस्सा

इस बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाई पर एक बार फिर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों को जैसे बंगाल जाने से डर लगता है वैसे ही दूसरे राज्यों में भी ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने एक बार फिर आरोप लगाया कि सीबीआई और ईडी सरकार की ओर से राजनीतिक बदला ले रहे हैं। केंद्र सरकार को राजनीतिक लाभ के लिए इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। पीएम पूरे देश के लिए हैं।

बता दें कि उद्धव ठाकरे ने उस समय केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर एक बार फिर सवाल किए जब एक माह पहले महाराष्ट्र सीएम के साले श्रीधर पाटनकर की करोड़ों की संपत्ति को मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कार्रवाई में जब्त किया गया था। इस दौरान ईडी ने ठाणे के नीलांबरी परियोजना में बने 11 आवासीय फ्लैट्स को सीज किया था, जिसकी कीमत करीब 6.45 करोड़ रुपए बताई गई थी।

PM मोदी ने कनाडा में किया सरदार पटेल की प्रतिमा का वर्चुअल उद्घाटन, बोले- भारतीय दुनिया में कहीं भी रहे, भारतीयता नहीं भूलता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (1 मई 2022) को कनाडा में सरदार पटेल की प्रतिमा का वर्चुअल अनावरण किया। कनाडा के मरखम में स्थित सनातन मंदिर सांस्कृतिक केंद्र (SMCC) में लगी प्रतिमा का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने कहा, “कनाडा में भारतीय संस्कृति और मूल्यों को जीवंत रखने में ओन्टारियो स्थित सनातन मंदिर कल्चरल सेंटर की भूमिका से हम सब परिचित हैं। आप अपने इन प्रयासों में कितना सफल हुए हैं, आपने किस तरह अपनी एक सकारात्मक छाप छोड़ी है, अपनी कनाडा यात्राओं में मैंने अनुभव किया है।”

‘भारतीय कहीं भी रहे भारतीयता नहीं भूलता’

पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “एक भारतीय दुनिया में कहीं भी रहे, कितनी ही पीढ़ियों तक रहे, उसकी भारतीयता, उसकी भारत के प्रति निष्ठा लेश मात्र भी कम नहीं होती। वो भारतीय जिस देश में रहता है पूरी लगन और ईमानदारी से उस देश की भी सेवा करता है। जो लोकतांत्रिक मूल्य, जो कर्तव्यों का एहसास उसके पुरखे भारत से ले गए होते हैं, वो उसके दिल के कोने में हमेशा जीवंत रहते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत एक राष्ट्र होने के साथ ही एक विचार भी है, एक संस्कार भी है।”

‘भारत वसुधैव कुटुंबकम की बात करता है’

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करता है। भारत दूसरे के नुकसान की कीमत पर अपने उत्थान के सपने नहीं देखता। भारत अपने साथ सम्पूर्ण मानवता के, पूरी दुनिया के कल्याण की कामना करता है। आज जब हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को आगे बढ़ाते हैं, तो विश्व के लिए प्रगति की नई संभावनाएँ खोलने की बात करते हैं। आज जब हम योग के प्रसार के लिए प्रयास करते हैं, तो विश्व के हर व्यक्ति के लिए ‘सर्वे संतु निराम’ की कामना करते हैं।”

शिवसेना पर फूटा पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस का गुस्सा, बोले- लाउडस्पीकर हटाने से डरते हैं और कहते हैं बाबरी मस्जिद गिराई!

महाराष्ट्र के 62वें स्थापना दिवस के मौके पर 1 मई को विधानसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Maharashtra LoP & former CM Devendra Fadnavis) ने मुंबई के सोमैया मैदान में एक ‘बूस्टर डोज’ रैली को संबोधित किया। देवेंद्र फडणवीस ने ‘बूस्टर डोज’ रैली की शुरुआत सियापति रामचंद्र की, पवनसुत हनुमान की जय के नारे के साथ की। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने महाराष्ट्र दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा, “जिस छत्रपति ने हमें अस्मिता दी, जिस छत्रपति ने हमें जीने का अधिकार दिया उन छत्रपति को साक्षी मानकर मैं दुनिया भर के मराठियों को आज के दिन की शुभकामनाएँ देता हूँ।”

इस दौरान बीजेपी नेता ने सीएम उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए, “मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने से डरने वाले लोग कह रहे हैं कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराया था। देवेंद्र फडणवीस बाबरी मस्जिद विध्वंस का हिस्सा थे। उस वक्त शिवसेना का कोई भी नेता नहीं था। मैं इसे मस्जिद नहीं मानता, यह सिर्फ एक ढाँचा था।”

बीजेपी नेता ने कहा, “सरकार (शिवसेना) किसके लिए काम कर रही है, यह बड़ा सवाल है। उनके दो मंत्री जेल में हैं और वे सरकार के फैसलों पर बेशर्मी से एक मंत्री की तस्वीर छापते हैं जो जेल में है। पहले वर्क फ्रॉम होम, अब वर्क फ्रॉम जेल।”

फडणवीस आगे कहते हैं, “कुछ लोगों को लगता है कि वही महाराष्ट्र हैं, उनका सम्मान या अपमान मतलब महाराष्ट्र का सम्मान और अपमान, लेकिन ये उनकी गलतफहमी है। इन लोगों को यह याद दिलाने का समय गया है। आप महाराष्ट्र नहीं हो, आप मराठी नहीं हो और आज यह कहने की नौबत आ गई है की आप हिंदू भी नहीं हो, लेकिन मैं ऐसा नहीं कहूँगा। जब आप भ्रष्टाचार करते हैं और आपके साथी जेल में जाते हैं तो दुनिया भर में महाराष्ट्र का नाम खराब होता है।”

मी​डिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में उद्धव ठाकरे ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे से सवाल किया था कि जब बाबरी मस्जिद को गिराया जा रहा था, तब वह कहाँ थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि राज की पार्टी और भाजपा बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय छिप गई थी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे और उनकी पूर्व सहयोगी भाजपा पर एक साथ हमला करते हुए कहा था कि ये सब बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान छिप गए थे। ठाकरे ने भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने राम मंदिर बनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “आप किस तरह के हिंदुत्ववादी हैं? जो बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान छिप गए थे। अदालत ने राम मंदिर बनाने का फैसला किया।”

बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल पर यूपी पुलिस ने कसा शिकंजा, खनन माफिया की ₹21 करोड़ की संपत्ति जब्त

बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला की बेनामी संपत्तियों को यूपी पुलिस ने जब्त कर ली है। पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल ने अपने नौकर नसीम के नाम 50 बेनामी संपत्तियाँ करवा रखी थीं, जिनकी कीमत करीब 21 करोड़ रुपए हैं। सहारनपुर पुलिस ने ये कार्रवाई 14(1) गैंगस्टर एक्ट के तहत की है। वहीं, जिले के एसएसपी आकाश तोमर ने कहा है कि माफिया के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। यही नहीं, पुलिस की कार्रवाई की जद में इकबाल की ग्लोकल यूनिवर्सिटी भी आ सकती है।

एसएसपी के मुताबिक, पुलिस ने बेहट क्षेत्र में हाजी इकबाल की इन बेनामी संपत्तियों को चिन्हित कर लिया था, जिनमें 600 बीघा जमीन भी शामिल है। यही नहीं, खनन माफिया हाजी इकबाल ने अपने करीबी नौकर नसीम पुत्र अब्दुल गफ्फार उर्फ गफूर निवासी मिर्जापुर को अपनी करोड़ों की बेनामी संपत्ति का मालिक बना रखा है। वह तीन शुगर मिलों का मालिक है। हाजी इकबाल ने नसीम को लखीमपुर खीरी, गोरखपुर और सीतापुर की चीनी मिलों का डायरेक्टर बनाया है। बता दें कि नसीम को गिरफ्तार कर पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।

बता दें कि बीते करीब दो साल से हाजी इकबाल और उनके सहयोगियों की अवैध रूप से कमाई गई अकूत संपत्तियों को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाजी इकबाल को सहारनपुर का खनन माफिया भी बताया जाता है और उसकी करोड़ों रुपए की संपत्ति पर पुलिस के साथ ही अन्य जाँच एजेंसियों की भी नजर है।

गौरतलब है कि हाजी इकबाल ने तमाम मुखौटा कंपनियाँ बनाकर उत्तर प्रदेश की बंद पड़ी चीनी मिलें खरीदी थीं। ईडी अब तक हाजी इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर चुकी है। हाजी इकबाल के कई करीबियों और सहयोगियों को पुलिस और अन्य जाँच एजेंसियाँ पहले ही गिरफ्तार कर चुकी हैं।

बँटवारे की राजनीति पर फिर उतरे केजरीवाल: गुजरातियों को मराठियों के विरुद्ध भड़काया, बोले- चुनाव को क्रांति में बदलो

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) रविवार (1 मई 2022) को गुजरात में ‘आप’ के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक बार फिर बाँटने की राजनीति करते हुए नजर आए। केजरीवाल ने भाजपा पर मराठी व्यक्ति को गुजरात का प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर सवाल उठाया।

उल्लेखनीय है कि 1 मई को गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों का स्थापना दिवस मनाया जाता है। भारत की आजादी के समय यह दोनों राज्‍य बॉम्‍बे प्रदेश का हिस्‍सा थे। महाराष्‍ट्र और गुजरात का अलग अस्तित्‍व नहीं था। उस वक्‍त बॉम्‍बे प्रदेश में मराठी और गुजराती भाषा बोलने वाले लोगों की तादाद सबसे ज्‍यादा थी। अंग्रेजों के जाने के बाद इन राज्यों और प्रांतों को भारत के संघ में पुनर्गठित करने का काम राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के माध्यम से शुरू हुआ। अधिनियम ने क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषाओं के आधार पर राज्यों को पुनर्गठन करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन बाद में इसी भाषा के आधार पर अलग राज्‍य बनाने की माँग उठने लगी। गुजराती अपना अलग राज्‍य चाहते थे, वहीं मराठी भी अलग राज्‍य की माँग करने लगे थे। 1 मई 1960 को बॉम्बे को बाँटकर भाषा के आधार पर दो राज्य महाराष्ट्र और गुजरात बना दिए गए। इसलिए अरविंद केजरीवाल ने राज्य में अपने विभाजनकारी एजेंडे के लिए आज ही का दिन चुना।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “मैं एक बात से लंबे समय से आहत हूँ। गुजरात में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष कौन है? सीआर पाटिल। वह कहाँ का रहने वाला है? वह महाराष्ट्र से है। तो क्या बीजेपी को 6.5 करोड़ गुजरातियों में से एक भी अध्यक्ष नहीं मिला? ये महाराष्ट्र के आदमी से गुजरात चलाएँगे? गुजरात के लोग इतनी बड़ी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

अरविंद केजरीवाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह कहकर अपने विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाया, “किसी भी पार्टी ने इससे बड़ी बेइज्जती नहीं की है। क्या ये लोग महाराष्ट्र से गुजरात पर राज करेंगे? क्या ये लोग महाराष्ट्र के एक शख्स के जरिए गुजरात चलाएँगे? गुजरात की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। आगामी चुनाव को क्रांति में बदलें। इस बार चुनाव नहीं होंगे। बल्कि एक नए गुजरात की नींव रखी जाएगी।”

इस बारे में अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा, “महाराष्ट्र के सीआर पाटिल गुजरात भाजपा अध्यक्ष हैं। क्या भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए एक भी गुजराती नहीं मिला? लोग कहते हैं, ये केवल अध्यक्ष नहीं, गुजरात की सरकार यही चलाते हैं। असली CM यही हैं। ये तो गुजरात के लोगों का घोर अपमान है। भाजपा वालों, गुजरात को गुजराती अध्यक्ष दो।”

संयोग से अरविंद केजरीवाल हरियाणा के रहने वाले हैं और वर्तमान में दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। उनके मंत्रिमंडल में कई मंत्री मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। जब केजरीवाल गुजरात में महाराष्ट्र के लोगों के खिलाफ गुजरातियों को भड़काने की कोशिश कर रहे थे, उसी वक्त हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया चीफ हरप्रीत सिंह बेदी के पुराने ट्वीट्स, जिसमें उन्होंने खालिस्तान समर्थकों का समर्थन किया था, वह वायरल हो रहे थे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी विवाद भी हुआ था, जिसके बाद बेदी ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया था।

हिमाचल प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने हरप्रीत सिंह बेदी के एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए ‘आप’ पर आरोप लगाया है कि ‘आप’ नेता ने सिखों के लिए एक अलग राष्ट्र खालिस्तान की माँग की। बग्गा ने कहा कि केजरीवाल खालिस्तान समर्थकों के प्रति नरम हैं। यह स्पष्ट है कि केजरीवाल का खालिस्तान समर्थकों के लिए सॉफ्ट कॉर्नर है, उन्होंने पिछले पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान उग्रवादी के आवास पर एक रात बिताई थी। केजरीवाल या पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पटियाला हिंसा में शामिल खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा है कि सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने अपनी विभाजनकारी और अलगाववादी सोच को उजागर किया है। पंजाब विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी पंजाब में खालिस्तान की माँग करने वालों का समर्थन करती हुई नजर आई थी। उन पर खालिस्तानी लोगों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया था, जिसका खुलासा खुद पार्टी के पूर्व नेताओं जैसे डॉ. कुमार विश्वास ने भी किया था। इससे पहले, ‘आप’ सुप्रीमो से ‘टुकड़े टुकड़े गैंग’ के सदस्यों कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य का कथित समर्थन करने को लेकर पूछताछ की गई थी, जब उन्हें फरवरी 2016 में जेएनयू परिसर में देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 17 फरवरी को प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन SFJ (सिख फॉर जस्टिस) के नाम से सोशल मीडिया पर एक लेटर वायरल हुआ था। इसमें उस वक्त आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब में मुख्यमंत्री चेहरे भगवंत मान को समर्थन देने की बात कही गई थी। गुरपतवंत सिंह पन्नू के नाम से पंजाबी में जारी इस पत्र में लिखा था, “हम सिख फॉर जस्टिस के सभी सदस्य पंजाब विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान को अपने समर्थन की घोषणा करते हैं। यह चुनाव बेहद अहम हैं। अगर आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में बनती है तो हमें हमारे खालिस्तान के लक्ष्य को पाने में आसानी होगी। हमने 2017 के चुनावों में भी आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था। सिर्फ आम आदमी पार्टी है जो हमारे टारगेट को पूरा करवा सकती है। उन्हें वोट दे कर हमें मजबूत करें।”

AAP के सोशल मीडिया प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह बेदी का ‘खालिस्तानी कनेक्शन’, समर्थन में किए गए ट्वीट वायरल: पोल खुलने पर किया अकाउंट डिलीट

आम आदमी पार्टी के हिमाचल प्रदेश के सोशल मीडिया प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह बेदी के भारत में उनके खालिस्तान समर्थक रुख को लेकर किए गए पुराने ट्वीट रविवार (1 मई, 2022) को ट्विटर पर वायरल हो गए। मंडी, हिमाचल प्रदेश के आप सदस्य ने अलग खालसा राज्य की डिमांड के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए ट्वीट से पैदा हुए विवाद के कारण अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया।

रविवार को, @BefittingFacts सहित कई ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने हरप्रीत सिंह बेदी की ट्विटर अकाउंट की ओर इशारा किया, जिसमें 2012 के बाद से उनके हैंडल से खालिस्तान समर्थक कई ट्वीट शामिल थे। नेटिज़ेंस ने बेदी की ओर इशारा किया कि बेदी ने सोशल मीडिया कन्वर्सेशन में भी खालिस्तान को अपने ‘संवैधानिक अधिकार’ के रूप में कई बार माँग चुका है। ऑपइंडिया ने भी जब बेदी के ट्वीटर अकाउंट की और स्कैनिंग की जिसमें खालिस्तान के लिए उनका खुला समर्थन सामने आया। यह ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी पर हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने के लिए खालिस्तानी समर्थन लेने का आरोप लगाया जा रहा है।

चूँकि, AAP के सोशल मीडिया संयोजक हरप्रीत सिंह बेदी का ट्विटर हैंडल @iHarpreetSBedi अब मौजूद नहीं है, इसलिए यहाँ सोशल मीडिया पर उनके खालिस्तान समर्थक अभियानों के कुछ प्रमाण हैं, जो भारतीय राज्य के खिलाफ अलगाववादी भावनाओं से भरा हुआ है। 2012 में, बेदी ने ट्वीट कर एक जत्थेदार भाई बलवंत सिंह राजोआना के संदर्भ में पूछा, “अमृतसर और खालिस्तान को स्वतंत्र घोषित किया जाना चाहिए और स्वतंत्रता के लिए लड़ना जारी रखना चाहिए। खालसा पंथ के एक सच्चे संत-सिपाही की यही ताकत है। खड़े हो जाओ और खालिस्तान की स्थापना की प्रतिज्ञा करो!”

उसी वर्ष, बेदी को आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर और पीछे अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के साथ अवधारणात्मक ‘खालिस्तानी डॉलर’ की एक तस्वीर भी साझा करते हुए देखा गया था।

इसके अलावा, बेदी को खालिस्तान को गैर-देशद्रोही के रूप में माँग करने के लिए अलगाववादी नारे देने को सही ठहराते हुए भी देखा गया था। उसने एक ट्वीट में लिखा है, “अगर खालिस्तान की माँग को देशद्रोह कहना है तो संविधान के मुताबिक हिंदुस्तान भी वही है।” एक अन्य ट्विटर यूजर के साथ बातचीत में, उसने संविधान सभा के ड्राफ्ट्समैन को ‘AAP के नेता’ के रूप में संदर्भित किया। मई 2020 के अंत तक, बेदी को खालिस्तान के लिए अपनी माँग को दोहराते हुए देखा जा सकता है, जिससे पता चलता है कि वह अब तक 10 से अधिक वर्षों से जो माँग कर रहे थे, उसके लिए खड़े थे।

बेदी को 1984 में सिखों के नरसंहार और अलग खालसा राज्य की माँग के आधार पर इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में ऑपरेशन ब्लू-स्टार पर राज्य के कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ बहस करते देखा जा सकता है। उसे पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाते हुए देखा गया था कि उन्होंने पहले खालिस्तान के लिए कागजात पर हस्ताक्षर किए थे। इस पर बेदी को कॉन्ग्रेस नेताओं और राज्य के पार्टी के हैंडल को ट्रोल करते हुए देखा गया।

जून 2020 के एक ट्वीट में बेदी को इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी पर कसाई (सिख) का आरोप लगाते हुए देखा गया था। उन्होंने खालिस्तान के लिए एक आंदोलन का समर्थन करने और उसके बाद पार्टी को निर्देशित अपने ट्वीट में सिखों की हत्या करने में कॉन्ग्रेस नेताओं के कथित पाखंड की ओर इशारा किया था।

बेदी को अमृतसर में दरबार साहिब पर हमले में गाँधी परिवार की भूमिका का हवाला देकर खालिस्तान आंदोलन को सही ठहराते हुए भी देखा गया था।

2019 में, बेदी को दिल्ली के भाजपा नेता कपिल मिश्रा से यह पूछते हुए देखा गया था, “चूँकि राम और गाय के नाम पर मुस्लिमों और दलितों को कथित रूप से मारा जा रहा है, इसलिए जब संविधान ऐसा करने का अधिकार देता है तो खालिस्तान जिंदाबाद क्यों नहीं कहा जा सकता है?”

तब भी हरप्रीत सिंह बेदी के ट्विटर पर खालिस्तानी सहानुभूतिपूर्ण पोस्ट की वजह से विवाद में फँसने के बाद, उसने अपने अकाउंट को निष्क्रिय करने में देर नहीं की। फिलहाल उनका ट्विटर हैंडल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है।

आम आदमी पार्टी से हरप्रीत सिंह बेदी का जुड़ाव

हरप्रीत सिंह बेदी ने अपने ट्विटर हैंडल के बायो में खुद को सोशल मीडिया आप हिमाचल प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बताया। उसके बायो के अनुसार, वह आप की युवा शाखा छात्र युवा संघर्ष समिति के लिए पंजाब का पूर्व प्रतिनिधि था। जब ट्विटर पर लोगों ने उसके विवादित ट्वीट्स वायरल करने शुरू किए, तो उसने अपने अकाउंट को पूरी तरह से डिलीट करने से पहले अपना बायो डिलीट करके AAP से संबंधित अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की।

आप के साथ उसके जुड़ाव की जानकारी को फेसबुक पर क्रॉस-सत्यापित किया गया था, जब उसी व्यक्ति को जून 2021 में आप हिमाचल प्रदेश में अपनी भूमिका के बारे में एक अपडेट पोस्ट करते हुए देखा गया था। बेदी को लाल चंद कटारुचक के साथ पोज देते हुए भी देखा गया था, जो वर्तमान में खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य करते हैं। पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार में उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं।

खालिस्तान के लिए हरप्रीत सिंह बेदी के निरंतर खुलेआम समर्थन का पर्दाफाश होने के बाद, पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान खालिस्तानियों के समर्थन से AAP के चुनाव जीतने के आरोपों को फिर से हवा मिल गई है। पंजाब के पटियाला में पवित्र माँ काली मंदिर के बाहर शुक्रवार को खालिस्तान समर्थकों और एक हिंदू संगठन के सदस्यों के बीच झड़प की बात सामने आई है। फरवरी में, AAP के पूर्व सदस्य कुमार विश्वास ने खालिस्तानी अलगाववादियों को समर्थन देने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पर्दाफाश किया था।

सिखों का अपमान करने वाली 3 किताबें पंजाब बोर्ड ने की बैन: जिसने भी दी थी अनुमति, उस पर होगी कड़ी कार्रवाई

पंजाब में स्कूल शिक्षा बोर्ड ने सिखों का गलत इतिहास बताने के आरोप 3 किताबों को बैन कर दिया है। इन किताबों पर प्रतिबंध एक जाँच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद लगाया गया है। इस मामले में शिकायतकर्ता एक किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा थे। इस बात की जानकारी रविवार (1 मई 2022) को दी गई है।

जिन पुस्तकों पर बैन लगाया गया है उनमें पहला नाम ‘मॉडर्न ABC ऑफ़ हिस्ट्री ऑफ़ पंजाब’ है जिसे मंजीत सिंह सोढ़ी ने लिखा है। दूसरी और तीसरी किताब का नाम ‘हिस्ट्री ऑफ़ पंजाब’ है। इन्हें क्रमशः महिंदरपाल कौर और एम एस मान ने लिखी हैं। ये तीनों किताबें क्लास 12 की पढ़ाई में प्रयोग होती थीं। इन तीनों पुस्तकों का प्रकाशन जालंधर के एक प्रकाशक द्वारा किया जाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ता बलदेव सिंह सिरसा के मुताबिक इन किताबों के कुछ अंश सिखों के सच्चे इतिहास से मेल नहीं खाते। आरोप लगाया गया है कि इन पुस्तकों में न सिर्फ स्वाधीनता संग्राम में सिखों के बारे में गलत जानकारी दी गई है बल्कि गुरबाणी में भी शब्दों की गलतियाँ हुई हैं। तीनों पुस्तकों पर लगे प्रतिबंध की पुष्टि PSEB के चेयरमैन जोगराज सिंह ने की है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जाँच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन किताबों को बिक्री के साथ स्कूलों में पढ़ाने से भी रोक दिया गया है।

जोगराज सिंह के मुताबिक, “इतनी गलतियों के बाद इस इन किताबों को बोर्ड द्वारा पढ़ाने की अनुमति कैसे मिली थी। हम इसकी गहराई से जाँच करवाएँगे। इसमें जो भी अधिकारी या कोई अन्य दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इन तीनों किताबों के साथ एक ए सी अरोड़ा द्वारा लिखी एक अन्य किताब भी उन्हीं शब्दों के साथ लिखी गई है जिसे बिना बोर्ड के एप्रूवल के बेचा जा रहा था। इस मामले में जाँच करवाई जा रही है। हमें कार्रवाई के लिए अंतिम निष्कर्ष की प्रतीक्षा है।”

पुस्तक को बोर्ड द्वारा पढ़ाने प्रतिबंध के आदेशों की जानकारी SCERT (स्टेट कौंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एन्ड ट्रेनिंग) के साथ सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्हें इस आदेश पर तत्काल अमल करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि ये तीनों किताबें स्कूलों में दशकों से पढ़ाई जा रही थीं। जब आम आदमी पार्टी विपक्ष में थी तब उसने इन किताबों को बैन करने का मुद्दा उठाया था। इन किताबों पर बैन करने की माँग के साथ एक जुलूस भी निकाला गया था जिसमें पंजाब विधानसभा के वर्तमान में स्पीकर कुलतार सिंह भी शामिल हुए थे।

देश में पहली बार MBBS छात्रों ने ली ‘महर्षि चरक शपथ’ : बौखलाई TN सरकार ने मदुरै कॉलेज के डीन को हटाया, विदेशी ओथ के लिए जारी होगा सर्कुलर

तमिलनाडु के राजकीय मदुरै मेडिकल कॉलेज (Madurai Medical College) के एमबीबीएस (MBBS) प्रथम वर्ष के छात्रों ने शनिवार (30 अप्रैल 2022) को दीक्षा सत्रारंभ समारोह यानी इंडक्शन ओरिएंटेशन सेरेमनी (Induction Ceremony) के दौरान हिप्पोक्रेटिक शपथ की जगह ‘महर्षि चरक शपथ‘ ली। ऐसा देश में पहली बार हुआ है, जब मेडिकल छात्रों ने हिप्पोक्रेटिक की बजाय महर्षि चरक शपथ ली हो। इस बदलाव को लेकर तमिलनाडु की एम के स्टालिन सरकार ने अप्रत्यक्ष तौर पर नाराजगी जाहिर की है। बताया जा रहा है कि जब छात्र दीक्षा सत्रारंभ समारोह में ‘महर्षि चरक शपथ’ ले रहे थे, उस वक्त तमिलनाडु के वित्त मंत्री पीटीआर पलानीवेल थियागा राजन और राजस्व मंत्री पी मूर्ति भी मौजूद थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘महर्षि चरक शपथ’ दिलाने के मामले में राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कॉलेज के डीन डॉ ए रथिनवेल (Dr A Rathinavel) को उनके पद से हटा दिया है। तमिलनाडु सरकार ने डीन का ट्रांसफर करते हुए उन्हें वेटिंग लिस्ट में डाल दिया है। एक प्रेस नोट में तमिलनाडु सरकार ने कहा, “सभी मेडिकल कॉलेज लंबे समय से मेडिकल छात्रों को हिप्पोक्रेटिक ओथ दिला रहे हैं। ऐसे में हिप्पोक्रेटिक ओथ के स्थान पर महर्षि चरक शपथ कराना निंदनीय है। कॉलेज के डीन को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें वेटिंग लिस्ट में डाल दिया है।”

तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यम ने चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. नारायण बाबू को नियमों का उल्लंघन करने के मामले में जाँच करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार ने कहा कि वह सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रमुख को एक सर्कुलर के माध्यम से छात्रों को हमेशा हिप्पोक्रेटिक ओथ दिलाने के लिए कहेंगी।

मालूम हो कि हाल ही में चिकित्सा शिक्षा नियामक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने एमबीबीएस के नए पाठ्यक्रमों में और देश में इसकी पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए ‘हिप्पोक्रेटिक ओथ’ की जगह ‘महर्षि चरक शपथ’ दिलाने की सिफारिश की गई थी। नए दिशा निर्देशों के अनुसार, “किसी अभ्यर्थी के चिकित्सा शिक्षा में दाखिला लेने पर संशोधित ‘महर्षि चरक शपथ’ दिलाए जाने की सिफारिश की जाती है।” बीते दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने भी संसद में कहा था कि ‘महर्षि चरक शपथ’ वैकल्पिक होगी और मेडिकल के छात्र इस शपथ को लेने के लिए बाध्य नहीं होंगे।

हिप्पोक्रेटिक ओथ और महर्षि चरक शपथ में अंतर

अभी के समय में जो शपथ की पद्धति है वो हिप्पोक्रेटिक यानि कि ग्रीक दार्शनिक और चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स के नाम पर ली जाती है। उन्हें फादर ऑफ मेडिसिन भी कहा जाता है। इस शपथ को व्हाइट कोट सेरेमनी के दौरान लिया जाता है। सालों से दुनिया भर के डॉक्टर यही शपथ लेते रहे हैं। अब जिस शपथ की सिफारिश की गई है, वो महर्षि चरक के नाम पर है। महर्षि चरक भारतीय थे और आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। उन्होंने ही यह शपथ लिखी थी, जो आयुर्वेद का संस्कृत पाठ है। दोनों शपथ का मतलब लगभग एक जैसा ही है, लेकिन भाषा और उसके रचियता अलग-अलग हैं।