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भूषण कुमार रेप केस: अदालत ने खारिज की मुंबई पुलिस की फाइनल रिपोर्ट, कहा – आरोपित को गिरफ्तार करने की कोशिश तक नहीं की

बलात्कार (Rape) के मामले का सामना कर रहे म्यूजिक कंपनी टी सीरीज (T-Series) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) भूषण कुमार (Bhushan Kumar) की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। मामले की जाँच कर रही मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने मेट्रोपोलिटन कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट फाइल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि इस केस की जाँच के दौरान कई मामलों की अनदेखी की गई है।

अदालत में भूषण कुमार के मामले की सुनवाई मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आरआर खान ने की। पुलिस की दलीलों को सुनने के बाद उन्होंने कहा कि इस केस में उल्लेख करने वाली बात यह है कि रेप का केस दर्ज कराए जाने के बाद न तो पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करने की कोशिश की और न ही आरोपित ने एक भी बार भी अग्रिम जमानत के लिए कोई याचिका दायर की।

कोर्ट ने कहा कि केस रिपोर्ट को देखने से ऐसा लगता है कि इस केस की जाँच कर रहे अधिकारियों ने ‘बी समरी’ रिपोर्ट के जरिए मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि दुर्भाग्य से देश में बलात्कार के जघन्य अपराध बार-बार हो रहे हैं। ऐसे अपराधों से कई बार पूरा देश हिल गया, लेकिन इस मामले में जाँच अधिकारियों और पीड़िता ने पूरी तरह से अलग व्यवहार किया है।

खुद शिकायतकर्ता ने आरोपों को किया खारिज

भूषण कुमार पर रेप का आरोप लगाने वाली शिकायतकर्ता ने इस महीने की शुरुआत में कोर्ट में एक शपथपत्र दायर कर कहा था कि वो एक अभिनेत्री है। परिस्थितियों और गलतफहमी के कारण उसने ये आरोप लगाए थे, लेकिन अब वो अपने आरोपों को वापस ले रही है। उसने ये भी कहा था कि उसे पुलिस की ‘बी समरी’ पर कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, अब कोर्ट ने पुलिस को लताड़ लगाते हुए कहा है कि रेप क्रिमिनल लॉ लोगों की मदद के लिए होते हैं, लेकिन पीड़िता ने इसका दुरुपयोग किया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस ने होटल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और दूसरे वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी की है। बहरहाल कोर्ट ने जोन के डीसीपी की निगरानी में इस मामले की दोबारा जाँच करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला

पिछले साल जुलाई में भूषण कुमार पर 30 वर्षीय एक महिला ने रेप का आरोप लगाया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि काम देने के नाम पर भूषण कुमार ने 2017 से अगस्त 2020 तक करीब तीन साल तक उसका फायदा उठाया। महिला ने शिकायत में ये भी कहा था कि भूषण कुमार ने उसे धमकी दी थी कि यदि वह उनके ख‍िलाफ जाती है तो उसके वीडियो और फोटो लीक कर दिए जाएँगे।

कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, वृंदा करात… इनकी वजह से साफ नहीं हुआ जहाँगीरपुरी: बुलडोजर पर पल-पल कैसे बदले हालात, सब कुछ एक साथ

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव के दिन शोभा यात्रा निकाल रहे हिन्दुओं पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी और गोलीबारी की, जिसमें श्रद्धालुओं के साथ-साथ कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 मुस्लिम दंगाइयों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार हुए लोगों की कुल संख्या दो दर्जन के करीब है। दंगाइयों पर बुलडोजर भी चला। यहाँ हम आपको सिलसिलेवार ढंग से पूरे घटनाक्रम के बारे में बताएँगे।

सबसे पहले बुधवार (19 अप्रैल, 2022) की रात NDMC (उत्तरी दिल्ली नगरपालिका परिषद) का वो आदेश आया, जिसमें जहाँगीरपुरी के अवैध अतिक्रमणकारियों के अतिक्रमण को ध्वस्त करने की बात थी। इसे एक विशेष कार्यक्रम बताते हुए अतिक्रमण हटाने की बात कही गई। PWD, स्थानीय निकाय और दिल्ली पुलिस की मदद से NDMC ने अतिक्रमण हटाने का ऐलान किया। इसके लिए महिला पुलिसकर्मियों सहित कुल 400 जवानों को लगाने की बात भी कही गई।

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में ध्वस्त किया गया अवैध अतिक्रमण

अगले दिन सुबह के 9:30 बजे से पुलिसकर्मियों की तैनाती का आदेश दिया गया, 3 दिनों के लिए। हालाँकि, अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर रोक लगाए जाने के बाद संशय पैदा हो गया है कि अतिक्रमण हटाने का अभियान आगे चलेगा या नहीं। NDMC के इस आदेश पर AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने विरोध करते हुए आरोप लगा दिया कि एक खास समुदाय को प्रताड़ित करने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ये सब कर रहे हैं।

जैसे ही अतिक्रमण हटाने वाला आदेश जारी हुआ, सुबह-सुबह सारे अतिक्रमणकारियों ने सामान समेटना शुरू कर दिया। कुशल सिनेमा के पास चौराहे पर और सीडी पार्क झुग्गी पर भी अवैध कब्जे हैं। MCD इन सभी को हटाने की तैयारी में थी। सुबह इसका पता चलते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वो सामान हटाने लगे। उनका कहना था कि वो मजबूरी में ऐसा कर रहे, उनकी रोजी-रोटी इसी से चलती है। अब ये प्रक्रिया बीच में फँस गई है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही NDMC के मेयर राजा इकबाल ने कहा कि आदेश की कॉपी भले ही उनके पास भले ही नहीं आई हो, लेकिन वो इसका सम्मान करते हुए पालन करेंगे। अधिकतर सामान तो सुबह सीडी पार्क जेजे क्लस्टर एरिया के रहने वाले लोगों ने पहले ही सीमेंट के बोरों में पैक कर लिया था। उन्होंने स्थानीय गोदामों में अपने सामान छिपा दिए। इनमें से अधिकतर कबाड़ की चीजें थीं। सुप्रीम कोर्ट में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने इस चीज के खिलाफ याचिका दायर की। माकपा नेता वृंदा करात खुद आदेश की कॉपी लेकर जहाँगीरपुरी पहुँचीं।

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में बुलडोजर चलने के बाद का दृश्य

इसमें उनके एक वकील थे पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल, तो दूसरे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे। दुष्यंत दवे वही हैं, जिन्होंने किसान प्रदर्शनकारियों का केस भी लड़ा था। जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी ऐसे अभियानों के खिलाफ याचिकाएँ दायर कर रखी हैं। अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने से पहले प्रक्रिया का पालन न किए जाने का आरोप लगाया गया। पूर्व AAP नेता प्रशांत भूषण और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े भी दंगाइयों की तरफ से खासे सक्रिय रहे।

इस दौरान AAP के नेता भी बयानबाजी में व्यस्त रहे और भड़काऊ बातें की। हाल ही में राज्यसभा सांसद बनाए गए राघव चड्ढा ने कह दिया कि भाजपा मुख्यालय पर बुलडोजर चलने से देश भर के दंगे-फसाद ख़त्म हो जाएँगे। यही नहीं, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर बुलडोजर चलाने की बात करते हुए देश भर में रोहिंग्या-बांग्लादेशियों को बसाने का आरोप भी भाजपा पर ही मढ़ दिया। विपक्षी नेताओं में से कोई हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हुए इस्लामी भीड़ के हमले की बात नहीं कर रहा।

5 साल पहले हुआ था निकाह, दहेज के लिए मारते-पीटते बाल मुड़वाकर गाँव में घुमाया: शौहर अलीमुद्दीन गिरफ्तार, अलीगढ़ का मामला

अलीगढ़ में एक मुस्लिम विवाहिता के साथ मारपीट और उसके बाल मुड़वाने का मामला सामने आया है। मामले में अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला को बुरी तरह पीटने के बाद आरोपितों ने विवाहिता का सिर मुड़वा दिया और उसे जानवरों की तरह मारते-पीटते हुए पूरे गाँव में घुमाया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मामले के बारे में पुलिस को जानकारी तब हुई जब पड़ोसियों ने बाल मुड़ाकर घुमाते हुए पीड़ित महिला के हाथरस निवासी मायके वालों को दी। कहा जा रहा है परिवार के लोग पहले विवाहिता को अपने साथ हाथरस ले गए। और बाद में उन्होंने एसपी से न्याय की गुहार लगाई और महिला थाने में FIR दर्ज कराया।

वहीं रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित मुस्लिम महिला के परिवार ने बताया, “गुलब्शाह का निकाह 5 साल पहले अलीगढ़ के थाना अकराबाद के अलीमुद्दीन से हुआ था। जिसके बाद उनका एक बेटा भी हुआ, जिसकी उम्र 4 साल है। निकाह के समय उन्होंने दहेज भी दिया था। इसके बाद भी अलीमुद्दीन के परिवार वाले उनकी बेटी से दहेज की माँग करते रहते थे और लगातार मारपीट कर रहे थे। जब महिला ने उनकी नहीं सुनी, तो उन्होंने 18 अप्रैल, 2022 की रात को महिला को जमकर मरते-पीटते हुए, उसके बाल मुड़वाकर गाँव में घुमाया।”

गौरतलब है कि इस मामले में एसपी की हिदायत के बाद हाथरस के महिला थाने में आरोपित शौहर और उसके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज किया गया था। वहीं मुकदमे के बाद यह खबर भी सामने आई है कि अकराबाद पुलिस के सहयोग से आरोपित शौहर अलीमुद्दीन को गिरफ्तार कर हाथरस पुलिस को सौंप दिया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई हाथरस पुलिस कर रही है।

दिल्ली आकर केजरीवाल विरोधियों का ‘हिसाब’ कर रही पंजाब पुलिस, कुमार विश्वास और अलका लांबा को SIT के सामने हाजिरी लगाने को कहा

पंजाब (Punjab) में आम आदमी पार्टी (Aam Adami Party) की सरकार बनने के बाद पंजाब पुलिस आजकल दिल्ली (Delhi) में ज्यादा दिखने लगी है। बुधवार (20 अप्रैल 2022) की सुबह कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) के घर पर दस्तक देेने के बाद पंजाब पुलिस कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा (Alka Lamba) के घर भी पहुँची।

कुमार ने भी इसकी जानकारी ट्वीट करके दी थी। वहीं, अलका लांबा ने भी इसकी जानकारी ट्वीट कर दी। अपने ट्वीट में अलका ने लिखा, “पंजाब पुलिस मेरे घर भी पहुँच चुकी है।”

पंजाब पुलिस ने अलका लांबा के घर की दिवार पर नोटिस चिपकाकर गई है। उस नोटिस की फोटो को शेयर करते हुए अलका लांबा ने ट्वीट किया, “पंजाब पुलिस घर की दीवार पर नोटिस चिपका कर गई है और जाते-जाते #AAP की @BhagwantMann सरकार की ओर से धमकी भी देकर गई है कि अगर 26 अप्रैल को थाने में पेश नहीं हुई तो अंजाम बुरा होगा। कॉन्ग्रेस की यह गाँधीवादी सिपाही बड़े संघियों से नहीं डरी, छोटे संघी की तो बात ही छोड़ दो।”

दरअसल, पंजाब पुलिस की विशेष जाँच टीम, रूपनगर (SIT, Rup Nagar) ने अलका लांबा को 26 अप्रैल को सुबह 10 बजे या उससे पहले रूपनगर सदर थाने में जाँच के लिए एसआईटी के सामने पेश होने का नोटिस भेजा है। अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने अलग-अलग चैनलों में इंटरव्यू देकर केजरीवाल के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और आम आदमी पार्टी एवं केजरीवाल पर अलगाववादी तत्वों के साथ संबंध के आरोप लगाए। जिससे पंजाब का माहौल खराब होने की आशंका है। इसी एफआईआर में कुमार विश्वास का भी नाम है।

कुमार विश्वास ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अलगाववादी खालिस्तान के साथ संबंध होने के आरोप लगाए थे। इसको लेकर उनके खिलाफ रोपड़ के सदर थाना में मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ IPC की धारा 153, 153A, 505, 505(2), 116 r/w, 143, 147, 323, 341, 506 और 120बी और 125 रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। रोपड़ सदर थाने के इंस्पेक्टर सुमित मोर की अगुआई में पंजाब पुलिस ने कुमार विश्वास के मैनेजर को नोटिस दी है और 26 अप्रैल को रोपड़ थाने में पेश होने को कहा है। हालाँकि, इस FIR में शिकायतकर्ता कौन है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

पंजाब पुलिस के SP हरबीर सिंह अटवाल ने बताया कि थाना रोपड़ सदर में FIR नंबर 25 दर्ज की गई है, जिसमें आम आदमी पार्टी के नेता ने शिकायत दी कि वह अपने समर्थकों के साथ लोगों की शिकायत के निपटारे के लिए घूम रहा था। इसी दौरान कुछ नकाबपोश व्यक्तियों ने उसे रोककर खालिस्तानी कहा। यह सब कुमार विश्वास और अलका लांबा द्वारा इस तरह के आरोप लगाकर वीडियो वायरल करने के बाद हुआ। इसके अलावा टीवी इंटरव्यू में आम आदमी पार्टी के नेताओं को खालिस्तान के साथ लिंक किया गया था।

अरविंद केजरीवाल को लेकर पंजाब पुलिस की इस कार्रवाई का भाजपा, कॉन्ग्रेस और अकाली दल ने तीखा विरोध किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि आम आदमी पार्टी अपने फायदे के लिए पंजाब पुलिस का गलत इस्तेमाल कर रही है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि पंजाब सरकार अरविंद केजरीवाल की कठपुतली की तरह काम कर रही है। अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए यह किया जा रहा है।

बीजेपी को वोट दिया तो मुस्लिम युवक को काफिर बताकर मस्जिद से भगाया, घर पर लाठी-डंडों से हमला: यूपी पुलिस ने जलीसे और मुनव्वर को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बीजेपी का सपोर्ट करने पर एक मुस्लिम युवक को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोक दिया। वहीं जब युवक ने इसका विरोध किया तो उसे मस्जिद के बाहर भगा दिया गया और फिर लाठी-डंडों उसके घर पर भी हमला किया गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के बनकटवा गाँव का है। मोहम्मद लुकमान बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व महामंत्री बताए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार भी उन्होंने यूपी चुनाव में बीजेपी को सपोर्ट किया था। इससे उनके अपने समुदाय के ही कुछ लोग नाराज हैं। मंगलवार (19 अप्रैल, 2022) को जब लुकमान मस्जिद में नमाज पढ़ने गए तो उन्हें नमाज पढ़ने से रोक दिया गया और मस्जिद में नहीं घुसने दिया गया। लुकमान ने जब इसका विरोध किया तो उन्हें काफिर कहकर मस्जिद से भगा दिया।

वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (20 अप्रैल, 2022) को सुबह लुकमान का छोटा भाई सरफराज नमाज पढ़ने मस्जिद में गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब वह वापस लौटने लगा तो जलीसे के बेटे मुनव्वर ने सरफराज को रोक लिया। कहा कि जिस भाजपा में हो वह लोग पूरे देश में लाउडस्पीकर उतरवा रही है। तुम नमाज पढ़ने क्यों जाते हो। तुम्हारा कोई ईमान नहीं है। तुम लोग काफिर हो। इस पर दोनों में हाथापाई होने की बात सामने आई है।

मामले में यह भी कहा जा रहा है कि इसी बीच मुनव्वर ने अपने पिता जलीसे, शमसुददुहा सहित अन्य को बुला लिया। यह लोग मिलकर लुकमान के भाई सरफराज की पिटाई करने लगे। भाई को बचाने जब लुकमान पहुँचे तो उन लोगों ने उनकी भी पिटाई कर दी। वहीं पीड़ित लुकमान की शिकायत पर 4 लोगों के खिलाफ यूपी पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में जलीसे और मुनव्वर नामक 2 लोगों की गिरफ़्तारी की बात भी सामने आई है।

गौरतलब है कि सूचना मिलने पर एसपी संतोष मिश्रा भी मौके पर पहुँचे और उन्होंने पीड़ित लुकमान के परिवार से घटना की जानकारी लेकर गाँव में शांति स्थापित करने की कोशिश की। एसपी ने गाँव के लोगों के साथ बैठक कर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। वहीं एसपी ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की घटना दोबारा होती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

13 साल की बच्ची, 8 महीने में 80 ने किया रेप: कोरोना से माँ की मौत के बाद जिसने लिया गोद उसने ही बेचा, आंध्र प्रदेश का मामला

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना प्रकाश में आई है। यहाँ एक नाबालिग (13) से 8 महीने में 80 दरिंदों ने रेप किया। खिलौने से खेलने की उम्र में उसे जिस्मफरोशी की दलदल में धकेल दिया गया। लेकिन जैसे ही इसकी भनक पुलिस को लगी तो उसने मंगलवार (19 अप्रैल 2022) को पीड़िता को बचा लिया। इस मामले में 10 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपितों में एक बीटेक का छात्र भी शामिल है। बाकी आरोपितों की तलाश की जा रही है। इस मामले में पीड़िता के पिता ने ही पुलिस में शिकायत की थी, जिसके बाद ये एक्शन लिया गया। मामले में मुख्य आरोपित स्वर्णा कुमारी है।

कैसे फँसी नाबालिग

मामला पिछले साल जून 2021 का है। नाबालिग पीड़िता की माँ कोरोना संक्रमित हो गई। एक अस्पताल में ट्रीटमेंट की दौरान पीड़िता की माँ की भेंट स्वर्णा कुमारी नाम की महिला से हुई। बातचीत के बाद धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती हो गई। इस बीच कोरोना के कारण पीड़िता की माँ की मौत हो गई। नाबालिग की माँ की मौत के बाद स्वर्णा कुमारी ने उसे गोद ले लिया और उसके पिता को इसकी जानकारी दिए बिना ही उसे लेकर चली गई।

इस बीच अगस्त 2021 में पीड़िता के पिता ने पुलिस का रुख किया और बेटी के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद हरकत में आई पुलिस ने पीड़िता की तलाश शुरू की और स्वर्णा कुमारी तक पहुँची। उससे पूछताछ करते ही जिस्मफरोशी के रैकेट का खुलासा हुआ। उसे कई बार अलग-अलग जगहों पर बेचा गया। अब तक 80 लोगों की पहचान की गई है। 10 को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकियों की तलाश की जा रही है।

एडिशनल एसपी के सुपराजा के मुताबिक, बीते 8 महीने में नाबालिग को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभिन्न वेश्यालयों में वेश्यावृति के लिए भेजा गया था। पुलिस ने आरोपितों के पास से एक कार, 53 मोबाइल, तीन ऑटो और बाइक बरामद की है। आरोपितों को विजयवाड़ा, हैदराबाद, काकीनाडा और नेल्लोर से गिरफ्तार किया गया है।

‘बाला साहेब ठाकरे का कहा आज किसी काम का नहीं’: संजय राउत ने ‘मस्जिद की लाउडस्पीकर’ पर शिवसेना संस्थापक को भी ठुकराया

शिवसेना नेता संजय राउत (Shivsena leader Sanjay Raut) ने हाल ही में कहा था कि बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) की 90 के दशक की राय आज किसी काम की नहीं है। उन्होंने 18 अप्रैल 2022 को TV9 मराठी के साथ एक साक्षात्कार में बोलते हुए ये टिप्पणी की। उन्होंने यह बयान तब दिया, जब राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) द्वारा शिवसेना के हिंदुत्व (Hindutva) मुद्दे को हाईजैक किए जाने के बारे में सवाल पूछा गया।

मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों के खिलाफ राज ठाकरे के हालिया रुख के बारे में एक सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि बाला साहेब ठाकरे ने पहले इस मुद्दे को उठाया था। अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को शिवसेना और महा विकास अघाड़ी सरकार (MVA Government) को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं है। जब उन्होंने ऐसा दावा किया तो टीवी9 मराठी के एंकर ने उन्हें बाला साहेब ठाकरे के 1994 में दिए भाषण की क्लिप दिखाई।

इस भाषण में बाला साहेब ठाकरे ने कहा था, ‘मैं सरपोतदार से कहूँगा कि आपका एक मामला अभी कोर्ट में लंबित है। यही हाल मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाने का है। ये लाउडस्पीकर कब बंद होंगे? कोलकाता हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पहले इन लाउडस्पीकरों को नीचे उतारो। एक और खतरनाक खबर तब आई जब इन लाउडस्पीकरों को हटाया जा रहा था। मैं उस खबर को पत्रकारों के लिए जरूर बताऊँगा। हमारे महाराष्ट्र राज्य में यह सरकार… इसने अपना खतना करा लिया और फतवा जारी किया है। इस सरकार के फतवे में पूछा गया है कि अगर सरकार मस्जिदों में सभी इमामों को पेंशन देने का फैसला करती है तो संभावित संख्या क्या हो सकती है। और ध्यान से सुनो, मस्जिदों के इमाम, मंदिरों के पुजारी नहीं। इसलिए उन्होंने फतवा के जरिए चैरिटी कमिश्नर से यह सवाल पूछा है। इस सरकार ने चैरिटी कमिश्नर से मस्जिदों में इमामों की कुल संख्या बताने और उन्हें पेंशन देने के लिए कितने बजट की जरूरत होगी, इसके बारे में पूछा है। क्या शरद पवार के पास ज़रा भी शर्म नहीं बची है? तो आप किसके इंतज़ार में हैं। इस बार कॉन्ग्रेस पार्टी को महाराष्ट्र के राजनीतिक स्पेक्ट्रम से खत्म कर दो।”

इसका जवाब देते हुए संजय राउत ने कहा, “मुझे यह वीडियो मत दिखाओ। मैंने उनके साथ लंबे समय तक काम किया है। साल 1994 या 1990 के बाला साहेब ठाकरे की एक बाइट दिखाना आज बेमानी और बेकार है।” जब एंकर ने उन्हें रोका तो राउत ने आगे कहा, “मुझे उनकी कोई बाइट मत दिखाओ। मैंने उनके साथ 35 साल तक काम किया है।”

बता दें कि राज ठाकरे ने अजान विवाद को उठाया है और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए राज्य सरकार को 3 मई 2022 का अल्टीमेटम दिया है, इसलिए शिवसेना से उसके रुख को लेकर सवाल किया जा रहा है। शिवसेना वर्तमान में शरद पवार की राकांपा (NCP) और कॉन्ग्रेस (Congress) के साथ गठबंधन में सरकार चला रही है और बाला साहेब ठाकरे द्वारा स्थापित राजनीतिक आदर्शों से बहुत दूर चली गई है।

जहाँगीरपुरी की जामा मस्जिद का अवैध गेट भी ध्वस्त, सरकारी जमीनों को बना रखा है कबाड़खाना: पार्क भी अवैध कब्जे से नहीं बचे

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में जिस तरह से हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी और गोलीबारी हुई, फिर उसके बाद भड़की हिंसा ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। दंगाई इस्लामी भीड़ ने जिस तरह से कहर बरपाया, उसके बाद दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारियाँ शुरू की। फिर ‘नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC)’ ने जहाँगीरपुरी के अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की। हालाँकि, शुरू होने के कुछ ही देर बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे रोक दिया।

जमीनी स्थिति को समझने के लिए ऑपइंडिया की टीम भी घटनास्थल पर पहुँची। जहाँगीरपुरी में स्थित जामा मस्जिद का एक दरवाजा भी अतिक्रमण की जद में था, जिसे NDMC के बुलडोजर ने ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही आसपास की कई दुकानों को भी ध्वस्त किया गया है। घरों के उन्हीं हिस्सों पर कार्रवाई की गई है, जो सरकारी जमीन के अतिक्रमण की जद में थे। बाकी के हिस्सों को छोड़ दिया गया है। बुलडोजर अब भी वहाँ लगे हुए हैं, लेकिन फ़िलहाल उनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।

हाँ, हमें जहाँगीरपुरी के स्थानीय मुस्लिम ज़रूर आक्रोशित दिखे। एक मुस्लिम व्यक्ति ने दिखाया कि उसकी दुकान के ऊपर बनी छत, जिसे गर्मी से बचने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था, उसे भी ध्वस्त कर दिया गया है। ‘आप इसे बनवाएँगे कब’ – इसका जवाब वो देते हैं कि उन्हें अब कुछ नहीं पता। वहीं एक मुस्लिम बुजुर्ग चिल्लाते हुए वहाँ से निकले, “कमजोरों से क्यों लड़ रहे हो, ताकतवर से लड़ कर दिखाओ।” उन्होंने वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों से ये बात कही।

जहाँगीरपुरी के सी ब्लॉक में तमाम बड़े अधिकारी मौजूद हैं। छोटे-छोटे अस्थायी टेंट बनाए गए हैं, जहाँ से अधिकारी घटनास्थल पर नजर रख रहे हैं। बैरिकेडिंग भी लगाई गई है। दिल्ली पुलिस के अलावा ‘रैपिड एक्शन फोर्स (RAF)’ और ‘केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल (CRPF)’ के कई जवान तैनात हैं। अधिकारियों ने कहा कि बुलडोजर वाली कार्रवाई NDMC ने की है, दिल्ली पुलिस शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात है।

वहाँ मौजूद हिन्दुओं से भी हमने बात की। एक युवक ने कहा कि जिस भी व्यक्ति ने पहला पत्थर फेंका, वो सबसे नीच किस्म का आदमी है। वहीं कुछ लोग भाईचारा की बात करते भी दिखे। सबसे बड़ी बात ये है कि जहाँगीरपुरी में अतिक्रमण अभी ख़त्म नहीं हुआ है। एक बड़ा सा सरकारी पार्क कबाड़ से भर दिया गया है। वहाँ से बदबू आती है और अंदर पाँव रखने तक की जगह नहीं है। इससे पूरे इलाके में गंदगी फैलती रहती है।

जहाँगीरपुरी में अतिक्रमण किए गए ध्वस्त

सड़क के किनारे जहाँ एक तरफ हमें अतिक्रमण में ध्वस्त किए गए घरों-दुकानों के अवैध हिस्से दिखे, वहीं सड़क के दूसरी तरफ हमें फुटपाथ पर बड़ी मात्रा में कबाड़ रखा हुआ मिला। दंगे के प्रमुख आरोपितों में से एक अंसार का भी कबाड़ का ही व्यापार है। वो BMW, सोने और शराब का शौक़ीन है, जिस पर पहले भी महिला का शील भंग करने से लेकर पुलिस पर हमला, जुए के रैकेट चलाने और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं। जहाँगीरपुरी के सी ब्लॉक में अधिकतर अतिक्रमण कबाड़ से ही है।

‘इलियास कम्युनिकेशन’ नाम की एक दुकान के ऊपर से कुछ हिस्से भी ध्वस्त किए हुए दिखे। मस्जिद के सामने ही एक शराब की दुकान भी है, जो फ़िलहाल बंद है। याद दिला दें कि दंगे के दौरान पत्थरों के साथ-साथ बोतलों का इस्तेमाल भी किया गया था। इलाके में कुछेक दुकानें खुली हुई हैं, जिनकी भीड़भाड़ के कारण अच्छी कमाई हो रही है। मीडिया और पुलिस के जमावड़े के कारण भीषण गर्मी में उनके पेय पदार्थ बड़ी मात्र में बिक रहे हैं। अब सभी कि नजरें सुप्रीम कोर्ट कि अगली सुनवाई पर है।

राम के अस्तित्व को कॉन्ग्रेस की महिला MP ने नकारा, पूछा- कौन हैं, तमिलनाडु में उनका मंदिर भी नहीं देखा

तमिलनाडु से कॉन्ग्रेस की महिला सांसद ज्योतिमणि का भगवान श्रीराम पर दिया गया विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्हें टाइम्स नाऊ से बातचीत में कहते सुना जा सकता है कि राज्य में कोई भी भगवान राम को नहीं जानता। उनके तो राज्य में मंदिर भी नहीं है।

वह कहती हैं, “मैं तमिलनाडु से हूँ। मैं नहीं जानती कि राम कौन हैं। हम स्थानीय हैं और हम अपने पूर्वजों का अनुसरण करते हैं। आप किसी से भी तमिलनाडु में पूछेंगी- हमने कभी कोई राम मंदिर तमिलनाडु में नहीं देखा। हर हफ्ते मैं अपने मंदिर जाती हूँ…मेरे पूर्वज करते थे। हम लोग चाहे- दलित हों, ओबीसी हों, आदिवासी हों, हम लोग मूल निवासी हैं और हम अपने पूर्वजों को पूजते हैं।”

वह कहती हैं, “राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले मैं ये नहीं जानती थी। मैं रामायण पढ़ती हूँ, महाभारत पढ़ती हूँ… लेकिन जब पूजा पाठ की बात आती है हम अपने पूर्वजों की पूजा करते हैं।”

तमिलनाडु में श्रीराम को समर्पित मंदिर

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस सांसद की यह वीडियो टिंकी वेंकटेश ने अपने ट्विटर पर शेयर की है। वीडियो के बैकग्राउंड में टाइम्स नाऊ समिट का बैनर लगा है। इस वीडियो को देखने के बाद कॉन्ग्रेस महिला नेता पर हिंदू भावनाएँ आहत करने का इल्जाम लग रहा है। लोग याद दिला रहे हैं कि उन्होंने जो कहा वो अगर सच है, कि तमिलनाडु में भगवान राम का मंदिर नहीं है, तो त्रिचि के पास श्री रंगम में श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर, तिरुवन्नामलाई के पास आदि श्री रंगम मंदिर, पल्लीकोंडा में श्री रंगनाथर मंदिर, मदुरंतगाम में एरी कथा रामर मंदिर, रामेश्वरम में रामनाथ स्वामी मंदिर…आदि किसके हैं।

श्रीराम पर सवाल उठा कॉन्ग्रेस हिंदू भावना से करती रही है खिलवाड़

बता दें कि ज्योतिम पहली कॉन्ग्रेस नेता नहीं है जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर विवादित बयान दिया हो। इसे पहले साल 2020 में कॉन्ग्रेस नेता कुमार केतकर ने श्रीराम पर सवाल खड़े किए थे और उन्हें केवल साहित्य की रचना बताया था।

इसके अलावा साल 2007 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने एक हलफनामा दायर किया था, जिसमें कहा गया था, “वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस प्राचीन भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसमें दर्शाए गए पात्रों और घटनाओं के अस्तित्व को साबित करने के लिए इसे ऐतिहासिक सबूत नहीं माना जा सकता है।”

दिल्ली हाई कोर्ट में वक्फ एक्ट को चुनौती, अदालत ने केंद्र से 4 हफ्ते में माँगा जवाब: अश्विनी उपाध्याय ने बताया गैर मुस्लिमों से होता है भेदभाव

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वक्फ अधिनियम (एक्ट) 1995 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर 20 अप्रैल 2022 को एक नोटिस जारी किया है। मामले में याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा कि वक्फ अधिनियम भारत में धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने इस मामले में गृह मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारत के विधि आयोग को नोटिस जारी कर उन्हें 4 सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा।

कोर्ट ने सेंट्रल वक्फ बोर्ड को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने वक्फ अधिनियम को चुनौती देने के बावजूद वक्फ बोर्ड की पैरवी नहीं की है। पीठ ने केंद्रीय वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और उपाध्याय को मामले में उन्हें एक पक्ष बनाने के लिए कहा।

बता दें कि मामले में अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने वक्फ अधिनियम 1995 को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। जनहित याचिका में कहा गया है कि अधिनियम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन की आड़ में बनाया गया है, लेकिन अन्य धर्मों के अनुयायियों के लिए समान कानून नहीं हैं। जनहित याचिका में इस अधिनियम के तहत विभिन्न प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी गई है। उपाध्याय ने दलील दी कि यह अधिनियम धर्मनिरपेक्षता, एकता और राष्ट्र की अखंडता के खिलाफ है। उन्होंने याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया है कि संविधान में कहीं भी वक्फ का उल्लेख नहीं है।

वहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अदालत से कहा कि यह याचिका काफी महत्वपूर्ण सवाल उठाती है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला ने याचिका और भारत सरकार द्वारा उसी पर प्रतिक्रिया सुनी। याचिकाकर्ता ने वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 4, 5, 6, 7, 8, 9, 14 की वैधता को चुनौती दी है और केंद्र सरकार या भारत के विधि आयोग को ट्रस्ट-ट्रस्टियों और चैरिटी के लिए एक समान कोड का मसौदा तैयार करने के निर्देश देने की अपील की है।

अपनी याचिका में, अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा था, “यदि अनुच्छेद 29-30 के तहत गारंटीकृत अधिकारों की रक्षा के लिए अधिनियम बनाया गया है, तो इसमें सभी अल्पसंख्यकों यानी जैन धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म, यहूदी धर्म, बहाईवाद के अनुयायियों, पारसी धर्म, ईसाई धर्म भी को शामिल करना होगा न कि केवल इस्लाम।” याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वक्फ बोर्डों द्वारा जारी वक्फ की सूची में शामिल होने से उनकी संपत्तियों को बचाने के लिए हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों, सिखों और अन्य समुदायों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है। इसलिए, हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, बहाई, ईसाई और पारसी के साथ भेदभाव किया जाता है।

अश्विनी कुमार उपाध्याय ने बताया कि कैसे सरकार वक्फ बोर्ड पर सरकारी धन खर्च करती है लेकिन कोई राजस्व एकत्र नहीं करती है, और हिंदू मंदिरों से धन एकत्र करती है लेकिन उन पर कुछ भी खर्च नहीं करती है। याचिका में कहा गया है कि वक्फ बोर्ड में मुस्लिम विधायक, सांसद, आईएएस अधिकारी, नगर योजनाकार, अधिवक्ता और विद्वान इसके सदस्य हैं, जिन्हें सरकारी खजाने से भुगतान किया जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि केंद्र मस्जिदों या दरगाहों से कोई पैसा नहीं लेता है।

उपाध्याय ने अपनी याचिका में यह भी तर्क दिया, “दूसरी ओर, राज्य चार लाख मंदिरों से लगभग एक लाख करोड़ रुपए इकठ्ठा करती है, लेकिन हिंदुओं के लिए समान प्रावधान नहीं हैं। इस प्रकार, अधिनियम अनुच्छेद 27 का उल्लंघन करता है।”

याचिका में केंद्र सरकार या भारत के विधि आयोग को अनुच्छेद 14 और 15 की भावना में ‘ट्रस्ट-ट्रस्टी और चैरिटी-चैरिटेबल संस्थानों के लिए एक समान कोड’ का मसौदा तैयार करने और इसे सार्वजनिक बहस और प्रतिक्रिया के लिए प्रकाशित करने का निर्देश देने की भी माँग की गई है।

गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों का फैसला वक्फ अधिनियम के अनुसार वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा किया जाता है। वहीं जनहित याचिका इस प्रावधान को भी चुनौती देती है और यह निर्देश देने की माँग करती है कि धार्मिक संपत्तियों से संबंधित विवाद का निर्णय सिविल कोर्ट द्वारा केवल सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 9 के तहत किया जाए।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 की भावना में ‘ट्रस्ट-ट्रस्टी और चैरिटी-चैरिटेबल संस्थानों के लिए समान कोड’ का मसौदा तैयार करने के लिए केंद्र सरकार या भारत के विधि आयोग को निर्देश देने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि वह संसद को ऐसा कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती।