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‘हम अल्लाह के रास्ते पर चलते हैं, तुम्हारी हुकूमत से नहीं डरेंगे’: ओवैसी ने मुस्लिमों को भड़काया – मैदान मत छोड़ो

एआईएमआईएम (AIMIM) के चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियों में भाषण देते हुए उनकी आँखों से आँसू आ गए। वायरल वीडियो को एआईएमआईएम (AIMIM) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया है। करीब 1 घंटा 40 मिनट के इस वीडियो में असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिमों को मैदान नहीं छोड़ने की सलाह देते हुए नजर आ रहे हैं।

उन्होंने 38 सेकंड के दौरान रोते हुए कहा, “हम तुम्हारे जुल्म से नहीं डरेंगे, तुम्हारी ताकत से नहीं डरेंगे, सब्र से मुकाबला करेंगे, मैदान नहीं छोड़ेंगे।” इस दौरान वीडियो में ‘इंशाअल्लाह’ और ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारे भी लगाए गए।

उन्होंने वीडियो में आगे कहा, “खरगोन में मुसलमानों के घर तोड़ दिए, जहाँगीरपुरी में उनके साथ हिंसा हुई। मैं कह रहा हूँ कि हिम्मत मत खोना। मुझे मौत से डर नहीं है। हम तुम्हारी हुकूमत से डरने वाले नहीं है।” ओवैसी ने आरोप लगाया कि देश में एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उनकी नजरों में कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं, जहाँ पर सीधे तौर पर एक धर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई।

उन्होंने यह भी कहा, “हम अल्लाह के रास्ते पर चलने वाले हैं, हिम्मत रखने वाले हैं। मुस्लिम समाज के पास सिर्फ ईमान वाली दौलत है, ऐसे में अल्लाह ही उनके लिए रास्ते खोलेगा। किसी को भी मायूस होने की जररूत नहीं है, उतार चढ़ाव आएँगे, लेकिन हर चुनौती का डटकर सामना किया जाएगा।”

बता दें कि इससे पहले भी कई मौकों पर ओवैसी ऐसे भाषण दे चुके हैं, जिसमें उनका एक समुदाय के प्रति खास झुकाव देखने को मिला है। रामनवमी पर हुईं हिंसा को लेकर भी उन्होंने सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर यह मुद्दा उठाया था कि उनकी नजरों में केवल एक विशेष समुदाय के खिलाफ ही पुलिस का एक्शन हो रहा है और बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे बीजेपी की बाँटने वाली रणनीति बताया था।

‘भूल भूलैया 2’ में ब्राह्मणों के लिए ‘ह₹!मी’ शब्द का इस्तेमाल, गाने में राम-कृष्ण का अपमान: अब भी नहीं सुधर रहा बॉलीवुड

अक्टूबर 2007 में एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था ‘भूल भूलैया’ और जिसमें अक्षय कुमार के अलावा विद्या बालन, परेश रावल व राजपाल यादव जैसी फ़िल्मी हस्तियाँ मुख्य भूमिकाओं में थीं। ये फिल्म अप्रैल 2005 में आई रजनीकांत की तमिल ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘चंद्रमुखी’ की रीमेक थी। ‘चंद्रमुखी’ खुद मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की दिसंबर 1993 में आई फिल्म ‘Manichitrathazhu’ की रीमेक थी, जिसमें सुरेश गोपी भी मुख्य भूमिका में थे।

अब 20 मई, 2022 को कार्तिक आर्यन एवं कायरा आडवाणी अभिनीत ‘भूल भूलैया 2’ रिलीज हो रही है, जिसमें सपोर्टिंग किरदारों में तब्बू, राजपाल यादव, संजय मिश्रा और राजेश शर्मा भी हैं। फिल्म में इसके प्रीक्वल के गाने ‘हरे राम, हरे कृष्णा’ का भी नया वर्जन पेश किया गया है। हॉरर में रोमांस और कॉमेडी का तड़का लगा कर भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के नामों को एक फ़िल्मी गाने में इस्तेमाल किया गया है, वो भी डिस्को के रूप में।

बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती है, बल्कि ब्राह्मणों का भी इस फिल्म में अपमान किया गया है। संजय मिश्रा को एक पंडित की भूमिका में दिखाया गया है और राजपाल यादव को उनके सहायक के। हमेशा की तरह राजपाल यादव की वेशभूषा ऐसी ही है, ताकि शिखा का मजाक बनाया जा सके। भले ही वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तौर पर शिखा या चोटी रखने के कई फायदे साबित हुए हों, लेकिन बॉलीवुड के लिए ये मजाक से बढ़ कर और कुछ नहीं।

फिल्म में एक डायलॉग है राजपाल यादव का, “ये तो म्हारे से भी ज्यादा ह$#मी है।” इस पर संजय मिश्रा कॉमेडी करते हुए जवाब देते हैं, “का अंतर्यामी है? ये हमसे भी बड़ा ह$#मी है।” भूषण कुमार की ‘T-Series’ के यूट्यूब पेज पर आए इसके ट्रेलर को खबर लिखे जाने तक 4.62 करोड़ लोग देख चुके हैं। 3 मिनट 12 सेकेंड के इस वीडियो में आप 50 सेकेंड के बाद इस हिस्से को देख सकते हैं। रामनामी कपड़े पहन कर कार्तिक आर्यन को कॉमेडी करते हुए भी देखा जा सकता है।

ये भी ध्यान देने लायक है कि इस फिल्म के निर्देशक अनीस बज्मी हैं और लेखक फरहाद सामजी हैं। दोनों ही मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। फिल्म में तबस्सुम फातिमा हाशमी, यानी तब्बू भी हैं। ऐसे में हिन्दू देवी-देवताओं और ब्राह्मणों के अलावा सनातन रीति-रिवाजों का मजाक बनाए जाने की आशंका खुद बलवती हो जाती है। वैसे भी ब्राह्मणों के प्रति बॉलीवुड की नफरत पुरानी है। अब तो OTT पर आने वाले वेब सीरीज में भी इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

शायद यही कारण है कि देश की ग्रामीण और सनातन संस्कृति में रचे-बसे और इससे जुड़े परिदृश्य दिखाने वाले दक्षिण भारतीय फ़िल्में पूरे भारत में ब्लॉकबस्टर का दर्जा प्राप्त कर रही है। 1100 करोड़ रुपए कमाने वाली ‘RRR’ में भगवान श्रीराम से प्रेरित किरदार डाला गया था। 960 करोड़ रुपए कमा चुकी ‘KGF 2’ के अभिनेता यश परिवार के साथ पत्तल पर भोजन खाते दिखते हैं। हाल ही में हिंदी भाषा को लेकर अजय देवगन और किच्चा सुदीप में विवाद भी हो गया।

पटियाला काली मंदिर में हिंसा के बाद कर्फ्यू, राघव चड्ढा ने राजनीतिक दलों पर मढ़ा दोष: हिन्दू संगठनों ने बुलाया बंद

पंजाब के पटियाला (Patiala, Punjab) में ‘खालिस्तान मुर्दाबाद’ मार्च निकालने के बाद हुए बवाल के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह कर्फ्यू शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) की शाम सात से शनिवार को सुबह 6 बजे तक के लिए लगाई गई है। तनाव को देखते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इस हिंसा को लेकर राज्यसभा के सांसद राघव चड्ढा ने कहा, “इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब सरकार और पुलिस इस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। इन राजनीतिक दलों के मास्टरमाइंड को नहीं बख्शा जाएगा।”

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने इस मामले में ऐक्शन लेने की बात कही है। मान ने ट्वीट किया, “पटियाला में हुई घटना पर DGP और सभी बड़े अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। मामले की तुरंत जाँच के निर्देश दिए हैं और अधिकारियों को सख़्त हिदायत दी है कि एक भी दोषी को बख्शा न जाए। पंजाब विरोधी ताकतों को किसी भी कीमत पर पंजाब की शांति भंग नहीं करने दी जाएगी।”

नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर कहा, “पंजाबी हमारे गुरु के सार्वभौमिक भाईचारे और एकता की शिक्षाओं से बंधे हैं। हमारे समाज में किसी भी असामाजिक तत्व को फूट डालने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पटियाला की घटना पंजाब सरकार की भीड़ का अनुमान लगाने और उसे नियंत्रित करने में घोर नाकामयाबी के कारण हुई। जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

इस मामले को लेकर पंजाब के हिंदू समाज ने शनिवार (30 अप्रैल 2022) को बंद का आह्वान किया है।

बता दें कि शुक्रवार को शिवसेना (ठाकरे) द्वारा खालिस्तान विरोधी मार्च निकालने के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई। दोनों तरफ से पत्थर चलने लगे। इस दौरान खालिस्तान समर्थकों के हाथों में तलवारें दिखाई देने लगीं। खालिस्तान समर्थकों की भारी भीड़ ने काली माता मंदिर को घेर लिया। उन्हें काबू करने के लिए पुलिस को 15 राउंड गोलियाँ चलानी पड़ी। उपद्रवियों के काली माता मंदिर में भी घुसने की फुटेज सामने आए हैं। हिंसा को काबू करने के प्रयास में SHO त्रिपड़ी करमवीर सिंह तलवार के हमले में घायल हो गए।

फिर टली राणा दंपति की जमानत पर सुनवाई, महाराष्ट्र सरकार ने हनुमान चालीसा पाठ को बताया साजिश: कहा – ‘राष्ट्रपति शासन लगवाना चाहते थे’

महाराष्ट्र (Maharashtra) में हनुमान चालीसा विवाद (Hanuman Chalisa Controversy) को लेकर जेल में बंद सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) और उनके पति रवि राणा (Ravi Rana) को शुक्रवार (29 अप्रैल, 2022) को भी कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी जमानत याचिका पर शुक्रवार को होने वाली सुनवाई को टाल दिया गया है। आज सिर्फ मुंबई पुलिस ने इस मामले में अपना जवाब दाखिल किया है। पुलिस ने कोर्ट में जमानत याचिका पर विरोध जताया है और इसे ‘राष्ट्रपति शासन’ लगाने की साजिश बताया है।

रवि और नवनीत राणा द्वारा डाले गए जमानत आवेदनों के जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने उनकी जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इससे मामले में रुकावट आएगी क्योंकि अगर जमानत दी जाती है, तो आरोपित जाँच के दौरान दिए गए समय पर उपस्थित नहीं होंगे। पुलिस ने आगे कहा, “यह कानून और व्यवस्था की स्थिति को चुनौती देने की एक बड़ी साजिश है… इस हद तक कि कानून और व्यवस्था नाम की कोई चीज न होने की दलील देकर महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा वर्तमान सरकार को भंग करने की सिफारिश की जा सकती है।” बता दें कि राज्यपाल द्वारा सरकार भंग करने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाता है।

क्या होता है राष्ट्रपति शासन

बता दें कि राष्ट्रपति शासन को लागू करने के लिए सबसे पहले राष्ट्रपति को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि किसी विशेष राज्य का कार्यशक्ति फेल हो गया है और तब वहाँ पर राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता है। इसके बाद जब राष्ट्रपति सुनिश्चित हो जाए तो उस घोषणा को संसद के दोनों ही सदन (राज्य सभा और लोक सभा) में दो महीने के अंतर्गत ही सामान्य बहुमत से स्वीकृत करना होगा।

फिर जब संसद के दोनों सदन से उस घोषणा को स्वीकृति प्रदान हो जाती है, तो उस राज्य में अगले छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है। राष्ट्रपति शासन को अधिक से अधिक तीन वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है, परन्तु इसके लिए यह आवश्यक है, कि प्रत्येक 6 माह में संसद के दोनों सदन उसे सामान्य बहुमत से स्वीकृत करें। राष्ट्रपति शासन का मतलब है किसी राज्य का नियंत्रण भारत के राष्ट्रपति के पास चले जाना। लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से केंद्र सरकार इसके लिए राज्य के राज्यपाल को कार्यकारी अधिकार प्रदान करती है।

बता दें कि मरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा मुंबई की भायखला महिला जेल में बंद हैं जबकि उनके पति तलोजा जेल में हैं। अब उनकी सुनवाई शनिवार (30 अप्रैल) को होगी। कल इस मामले में दोनों पक्ष बहस करेंगे। इससे पहले मुंबई पुलिस की माँग और कोर्ट में ज्यादा केस पेंडिंग होने के चलते दोनों की सुनवाई शुक्रवार यानी 29 अप्रैल तक टाल दी गई थी। शुक्रवार को उन्हें उम्मीद थी कि जमानत मिल जाएगी लेकिन एक बार फिर उनके हाथ निराशा ही लगी। हनुमान चालीसा के विवाद के चलते राणा दंपति 14 दिन की न्यायिक हिरासत यानी 6 मई तक कस्टडी में हैं।

क्यों जेल में हैं राणा दंपति

गौरतलब है कि राणा दंपति ने सीएम उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के घर ‘मातोश्री’ के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया था। उन्होंने जिस दिन ऐसा करने का ऐलान किया था, उसी दिन सुबह उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में शिवसैनिक पहुँच गए और दिनभर हंगामा किया। उनका आरोप था कि इस दंपति ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। जिसके बाद पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया।

हिन्दू युवती से बलात्कार करने वाला मौलवी ओसामा खान गिरफ्तार, शौहर और दो देवरों ने भी किया था रेप: ‘लव जिहाद’ का मामला

कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक हिंदू युवती को जबरन मुस्लिम बनाने का मामला सामने आया था। इस मामले में धर्म छिपा कर हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने वाले आरोपित युवक इमरान, उसके भाइयों और मौलवी ने युवती के साथ दुष्कर्म किया था। इस मामले में आरोपित मौलवी ओसामा खान को भी पुलिस ने दबोच लिया है। डबरा पुलिस ने आरोपित को सिमरिया गाँव से पकड़ा है। पुलिस ने आरोपित को अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। धर्मांतरण के मुख्य आरोपित इमरान, उसकी अम्मी सुग्गा बेगम और उसके भाइयों को पुलिस पहले ही पकड़ चुकी है।

आरोपित मौलाना ओसामा की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस पर हिंदू संगठन दबाव बना रहे थे। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस उसकी कुंडली निकाल रही थी। लगातार दबिश दे रही थी। पुलिस इस बात का पता लगा रही थी कि मौलाना ने इस तरीके से अन्य युवतियों को तो अपना शिकार तो नहीं बनाया है। जानकारी के मुताबिक, मौलाना का तीन मंजिला मकान मदरसा के पास बना हुआ है। वहाँ उसका परिवार रहता है।

बुधवार (27 अप्रैल, 2022) को पुलिस ने मौलाना को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। मौलाना ने ‘पाक साफ करने’ के नाम पर ‘लव जिहाद’ पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया था। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मौलवी ओसामा खान ने पीड़िता का धर्म परिवर्तन करवाया और फिर निकाह करवाया था। इतना ही नहीं, इसके बाद मौलवी ने यह कहते हुए पीड़िता के साथ रेप किया था- “तुझे पाक-साफ करना पड़ेगा।” जब मौलवी उसके साथ रेप कर रहा था तो उसका शौहर कमरे के बाहर ही खड़ा था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश के डबरा में लव जिहाद और मौलाना द्वारा पड़िता का​​​​​​​ शोषण करने का मामला सामने आया था। लव जिहाद के आरोपित इमरान ने पहले पहचान छुपाकर युवती से विवाह किया। इसके बाद युवती पर दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन कराया। उससे देह व्यापार करने के लिए मजबूर किया। युवती के दूसरे समुदाय की होने पर मौलाना ने उसे ‘साफ कर’ने की बात कहकर एक रात उसके साथ हलाला का हवाला देकर शारीरिक शोषण किया था। पीड़िता को बंधक बनाकर शौहर, दो देवर, मौलाना और दो अन्य लोगों द्वारा सात माह तक रेप किया गया था।

पीड़िता ने आपबीती में बताया था कि उसकी सास सुग्गा बेगम ने उसे वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया था। उसे एक कमरे में बंद करके रखा गया था, सिर्फ बाथरूम जाने के लिए निकलने दिया जाता था। सास हर दूसरे दिन अनजान लोगों को लेकर कमरे में आती थी। उनसे पैसे लेती और पीड़िता का रेप कराती थी। इस दौरान वह दो बार गर्भवती हुई। एक बार सास ने गर्भपात की गोली खिला दी और दूसरी बार सीढी से धक्का दे दिया था। आरोपितों से भयभीत पीड़िता ने पुलिस से सुरक्षा की भी माँग थी। पीड़िता को डर है कि आरोपित उसके साथ कुछ भी कर सकते हैं।

यूपी ATS ने देवबंद से बांग्लादेशी छात्र को दबोचा, फर्जी दस्तावेजों से 7 साल से भारतीय बन रह रहा था: दारुल उलूम में भारत विरोधी गतिविधि

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में यूपी ATS टीम ने देवबंद दारुल उलूम के एक छात्र को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किया गया छात्र बांग्लादेशी है। वो 2015 से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय बनकर रह रहा था और देवबंद में पढ़ाई कर रहा था। देर रात यूपी ATS टीम ने देवबंद दारुल उलूम जाकर वहाँ के रूम नम्बर 61 से गिरफ्तारी की।

गिरफ्तार बांग्लादेशी का नाम तलहा तालुकदार बिन फारुख बताया जा रहा है। वह बांग्लादेश में कुम्मिला जिले के दाउद कंदी पुलिस थाना क्षेत्र स्थित बरगुआली के रहने वाला है। तलहा के कब्जे से एटीएस ने आधार कार्ड, पैन कार्ड, दारुल उलूम देवबंद का पहचान पत्र, लाइफ टाइम मेंबरशिप कार्ड, बांग्लादेशी मुद्रा, बांग्लादेशी पासपोर्ट की फोटो कॉपी और 150 रुपए भारतीय करेंसी बरामद की है। बताया जा रहा है कि आरोपित पाकिस्तान में ट्रेनिंग कर चुका है।

देवबंद में रहकर अरबी आलिम की पढ़ाई कर रहा था

यूपी एटीएस से इस संबंध में प्रेस नोट भी जारी किया है। इसके मुताबिक एटीएस को सूचना मिली थी कि तलहा नाम का एक व्यक्ति दारुल उलूम देवबंद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रह रहा है और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है। बयान में कहा गया कि एटीएस की टीम ने इस सूचना के आधार पर छानबीन की तो पता चला कि तलहा नाम का एक व्यक्ति दारुल उलूम देवबंद के कमरा नंबर 61 में रहकर अरबी आलिम की पढ़ाई कर रहा है। एटीएस ने बताया कि इसके बाद तलहा को पूछताछ के लिए बुलाया गया तो उसने खुद को भारतीय नागरिक बताया और अपनी बात की पुष्टि के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और दारुल उलूम की आजीवन सदस्यता कार्ड प्रस्तुत किया। हालाँकि वह अधिकारियों के प्रश्नों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

यूपी पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट (फोटो साभार: UP Police)

धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी समेत कई धाराओं में केस

रिलीज के मुताबिक मुताबिक, अधिकारियों ने जब उसकी तलाशी ली तो उसके पर्स से बांग्लादेशी पासपोर्ट की फोटोकॉपी मिली जिसके बारे में वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका और उसने खुद को बांग्लादेशी नागरिक होना स्वीकार कर लिया। बयान में कहा गया कि एटीएस ने थाना देवबंद में तलहा तालुकदार के खिलाफ धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी, विदेशी अधिनियम समेत अन्य सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। एटीएस के आधिकारिक बयान के अनुसार यह जाँच की जा रही है कि तलहा तालुकदार ने भारतीय दस्तावेज कैसे बनवाए और उसके भारतीय संबंधों का भी पता लगाया जा रहा है।

‘शायद ब्रा भी नहीं रहेगी’: पूनम पांडे ने फैंस से किया कैमरे के सामने टॉपलेस होने का वादा, शर्त- LockUpp के लिए देना होगा वोट

पूनम पांडे बोल्ड फोटो, वीडियो और बयानों के लिए ही जानी जाती हैं। ओटीटी पर चल रहे एकता कपूर के रियलिटी शो लॉकअप (LockUpp) में भी वे इसी फॉर्मूले पर चल रही हैं। अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) इस शो की होस्ट हैं और अब यह अपने अंतिम चरण में है। ऐसे में पूनम पांडे (Poonam Pandey) ने वोट करने पर फैंस से कैमरे के सामने टॉपलेस होने का वादा किया है। पूनम पांडे ने कुछ इसी तरह का वादा 2015 में भारत के क्रिकेट विश्‍व कप जीतने पर भी किया था। इस बोल्‍ड ऐलान से वे लाइमलाइट में तो आ गई थीं, लेकिन शिवसेना की धमकी के बाद अंडरग्राउंड भी हो गईं थी।

अब एक बार फिर वह अपने वादे को लेकर सुर्खियाँ बटोर रही हैं। उन्होंने फैंस से वादा किया है कि इस बार अगर वो उनकी बात मान लेते हैं, तो वे कैमरे के सामने टॉपलेस हो जाएँगी। उन्होंने कहा, “अगर आप मुझे भर-भर के वोट देते हैं, तो इस बार टी-शर्ट उतारूँगी, शायद ब्रा भी नहीं रहेगी।”

बता दें कि लॉकअप के एक एपिसोड की शुरुआत में पूनम ने खुले यार्ड एरिया में बिकनी में नहाते हुए दर्शकों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। जब पूनम नहा रही थी तो पायल रोहतगी को छोड़कर बाकी सभी लोग लॉक अप एरिया के अंदर बैठे थे। हालाँकि शो के निर्माताओं ने लॉकअप के अंदर पूनम के नहाते हुए फुटेज को प्रसारित नहीं किया। लेकिन इसकी चर्चा खूब हुई। लॉकअप के ही एक अन्य प्रतिभागी हिंदूफोबिक कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने मजाक उड़ाते हुए कहा था, “अगर वो प्रॉमिस करे कि ऑडियंस उसे वोट देगी और बचाएगी तो वो हर गुरुवार और शुक्रवार के एपिसोड में अपनी टी-शर्ट उतारेगी।” इस शो में पूनम पांडे एक बार कैमरे के सामने टॉप भी उतार चुकी हैं।

न्यूयॉर्क में ‘स्वास्तिक’ अब यहूदी विरोधी या नाजी विचारधारा का प्रतीक नहीं: स्टेट एसेंबली और सीनेट के बिल में बदली गई भाषा

जर्मनी के नाजियों के नाम पर बदनाम कर दिए गए भारतीय परंपरा और समृद्धि के प्रतीक ‘स्वास्तिक’ (Swastik) को लेकर अमेरिका (America) में हिंदू समाज को एक अभूतपूर्व सफलता मिली है। न्यूयॉर्क (New York) सीनेट ने स्वास्तिक को ‘यहूदी विरोधी’ और ‘फासीवादी प्रतीक’ के रूप में हटा दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका में रहने वाले हिंदू समुदाय के संगठन ने शुक्रवार (29 अप्रैल 2022) को दी।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने ट्वीट कर बताया, “सहयोगी दलों के साथ काम कर रहे हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (@hinduamerican) के 4 महीने के अथक प्रयासों के बाद न्यूयॉर्क सीनेट और न्यूयॉर्क विधानसभा में बिल NY A.9155 और NY S.7680 के जरिए ‘स्वास्तिक’ शब्द को हटा दिया गया है। दोनों बिलों को मूल रूप से स्वास्तिक को ‘सेमेटिक विरोधी और फासीवादी प्रतीकों’ के रूप में संदर्भित किया गया था।”

यहूदी समाज को धन्यवाद देते हुए फाउंडेशन ने कहा, “नाजी जर्मनी के भयानक इतिहास के बावजूद हम अपने यहूदी सहयोगियों को उनकी उदारता के लिए धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हकेनक्रेज़ (नाजियों द्वारा इस्तेमाल प्रतीक) की स्वास्तिक के साथ जुड़ी झूठी पहचान को समाप्त करने में हमारी मदद की।”

फाउंडेशन ने कहा कि इस तरह की प्रत्येक जीत सदियों से विभिन्न धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग रहा स्वास्तिक के पवित्र, शुभ एवं समृद्धि के सूचक अर्थ के बारे में लोगों को शिक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।

बता दें कि 7 जनवरी 2021 के कैपिटल सीज का संदर्भ दिया गया है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थकों ने चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाकर कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया था। उस दौरान उनके हाथों में ट्रंप के समर्थकों के हाथों में बैनर और झंडे थे। 7 जनवरी 2022 के दिनांक वाले इस बिल में कहा गया है (इस लिंक पर बिल को पढ़ें) कि ट्रंप के समर्थकों के हाथों में यहूदी विरोधी, फासीवादी और नव-नाजीवादी विचारधारा के प्रतीक वाले झंडे थे। इसे संघीय युद्ध वाले झंडे के रूप में जाना जाता है।

अमेरिका में स्वास्तिक नाम से है गाँव

बता दें कि जिस अमेरिका में स्वास्तिक को नाजीवाद के प्रतीक के रूप में चिन्हित किया गया था, उसी अमेरिका में स्वास्तिक नाम का एक सदियों पुराना गाँव है। यह गाँव भी न्यूयॉर्क राज्य में ही है। बाद में उसे नाजीवाद का प्रतीक बताते हुए सितंबर 2020 में इसके नाम को बदलने की वोटिंग हुई, लेकिन नाम बदलने के पक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा।

नाम नहीं बदलने के इच्छुक लोगों को लेकर शहर के ब्लैक ब्रुक टाउन बोर्ड के सुपरवाइजर जॉन डगलस ने बताया था कि इस शहर का नाम स्वास्तिक, शहर के मूल निवासियों द्वारा 1800 के दशक में रखा गया था। यह संस्कृत के शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘कल्याण’ होता है। यह गाँव आज भी इसी नाम से जाना जाता है।

कनाडा ने स्वास्तिक पर बैन लगाने की कोशिश की थी

फरवरी 2022 में कनाडा में प्रदर्शन के बाद वहाँ की सरकार ने खालिस्तान समर्थक स्थानीय नेता जगमीत सिंह के दबाव में ट्रुडो सरकार ने स्वास्तिक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए संसद में एक विधेयक भी लाया गया था। उसके बाद भारत और भारतीयों के विरोध के बाद मार्च 2022 में वहाँ की सरकार ने बिल की भाषा में बदलाव करते हुए स्वास्तिक की जगह ‘हुक्ड क्रॉस’ कर दिया था।

स्वीडन को ‘मजहब का सम्मान’ सिखा रहा चीन, खुद उइगर मुस्लिमों को पानी के लिए तरसाता है, सूअर का माँस खाने को करता है मजबूर…

यूरोप के उत्तर में बसा स्वीडन दुनिया के सबसे शांतिप्रिय देशों में से एक है। लेकिन बीते कुछ दिनों से हिंसक घटनाओं और सांप्रदायिक दंगों के कारण इस देश में अशांति फैली हुई है। स्वीडन में 14 अप्रैल को लिंकोपिन शहर में अप्रवासी और इस्लाम विरोधी पार्टी ‘स्ट्राम कुर्स (Stram Kurs)’ द्वारा कुरान की प्रतियाँ जलाने के ऐलान के बाद कट्टरपंथी इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ ने जमकर दंगा और हिंसा की। नकाबपोश उन्मादी भीड़ ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए पुलिस की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और पत्थरबाजी भी की। इसके बाद से स्वीडन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा में हैं।

अब चीन ने स्वीडन में हुई हिंसक घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जी हाँ, वही चीन जो दुनिया भर में मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के लिए जाना जाता है। उइगर मुस्लिमों (Uighur Muslims in China) पर क्रूर अत्याचार करने वाली चीन की कम्युनिस्ट सरकार (Chinese Communist Government) ने कहा है, “स्वीडन को अपने देश में रह रहे मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की ‘धार्मिक आस्था’ का सम्मान करना चाहिए। उनकी हितों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।”

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने 20 अप्रैल को स्वीडन में कुरान की प्रतियाँ जलाने की आलोचना करते हुए इस घटना को शर्मनाक बताया था। चीनी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, “उन्होंने यूरोपीय देश से मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की धार्मिक मान्यताओं का ईमानदारी से सम्मान करने, उनके अधिकारों की रक्षा करने को कहा था।”

खैर, स्वीडन को मुस्लिमों के हितों की रक्षा और उनके मजहब का सम्मान करने का ज्ञान देने के ठीक पाँच दिन बाद ही चीन का विदेश मंत्रालय काफी घबराया हुआ नजर आया, क्योंकि उसे खबर मिली कि मई में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की आयुक्त मिशेल बाचेलेट चीन की यात्रा पर आने वाली हैं। दरअसल, चीन के शिनजियांग प्रांत का दौरा करने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र की एक टीम चीन पहुँच गई है। ये टीम यहाँ संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार आयुक्त के चीन दौरे के लिए जरूरी तैयारियाँ कर रही है। मानवाधिकार आयुक्त मिशेल बैशलेट अगले महीने शिनजियांग का दौरा करेंगी। संयुक्त राष्ट्र के किसी मानवाधिकार आयुक्त ने 2005 के बाद से शिनजियांग की यात्रा नहीं की है। इस बात को लेकर चीन बेहद डरा हुआ है।

ह्यूमन राइट्स वॉच द्वारा चीन को दुनिया में मानवाधिकारों का हनन करने वालों में सूचीबद्ध किया गया है। मानवाधिकार समूहों और कुछ पश्चिमी सरकारों का आरोप है कि चीनी सरकार शिनजियांग में उइगर मुस्लिम का नरसंहार और उन पर अत्याचार कर रही है। चीन शिनजियांग में न केवल उइगर, बल्कि तुर्की मुस्लिमों की सांस्कृतिक पहचान को भी मिटा रहा है। सऊदी अरब, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे कई मुस्लिमों देशों समेत पूरी दुनिया यह बात जानती है कि चीन जो स्वीडन को ‘धार्मिक मान्यताओं के सम्मान’ का पाठ पढ़ रहा है, वह खुद उइगर मुस्लिमों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार करता है।

मजहब छोड़ने के लिए प्रताड़ित किया जाता है

एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 मिलियन से 2 मिलियन यानी 10 से 20 लाख उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय को शिनजियांग के विभिन्न शिविरों में रखा गया है। यहाँ उन्हें अपना मजहब छोड़ने, मार्क्सवाद का अध्ययन करने और कारखानों में काम करने के लिए प्रताड़ित किया जाता है। जबकि मध्य एशिया और अफ्रीका के अशांत क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मुस्लिम आकर स्वीडन समेत अन्य यूरोपीय देशों में बसे हैं। यहाँ की सरकारों ने इन पर रहम दिखाते हुए, उन्हें सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई हैं, जिससे कभी शरणार्थी रहे ये मुस्लिम धीरे-धीरे स्वीडन के नागरिक बन गए। करीब एक करोड़ की जनसंख्या वाले शांतिप्रिय लोकतंत्र स्वीडन को ऐसे शरणार्थियों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता है। इसके बावजूद चीन उस पर ऊँगली उठा रहा है, जबकि आए दिन उइगर मुस्लिमों पर चीन के अत्याचारों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाई रहती हैं।

द हॉन्ग कॉन्ग पोस्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की 2020 (Australian Strategic Policy Institute’s 2020) की रिपोर्ट के अनुसार, उइगर चीनी सरकार की नीति के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और ऑटोमोटिव सहित स्पलाई चेन की एक रेंज में काम करते हैं, जिसे ‘शिनजियांग एड’ (Xinjiang Aid) के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उइगर सिर्फ शिनजियांग में ही काम नहीं कर रहे हैं। वे नौ चीनी प्रांतों में फैले 27 कारखानों में भी काम करते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में उइगर मुस्लिमों को अक्सर उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

यह भी बताया जाता है कि चीनी डिटेंशन सेंटर में उइगर मुस्लिमों के मुँह में पाइप डालकर हाथ-पैर बाँध दिए जाते हैं। इतना ही नहीं पानी माँगने पर चीनी सैनिक उइगर मुस्लिमों के मुँह में पानी के बोतल का ढक्कन तक कस देते हैं। एक चीनी पुलिस अधिकारी के शब्दों में, “उइगरों को चीन के सैनिक मालगाड़ी में भरकर डिटेंसन सेंटर्स लाते हैं। इन्हें कई दिनों तक भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। ज्यादा विरोध करने पर चीनी सैनिक एक ही हथकड़ी में दो-दो लोगों को बाँध देते हैं। कभी-कभी तो इन अल्पसंख्यक समुदाय को पीट-पीटकर मार भी दिया जाता है। भागने के डर से उइगरों को शौचालय तक नहीं जाने दिया जाता है।”

‘देह-व्यापार का शिकार, खिलाता है सूअर का मांस’

अक्टूबर 2021 में खुलासा हुआ था कि चीन उइगर मुस्लिमों के अंगों को बेच रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित अख़बार ‘द हेराल्ड सन’ ने चीन के ऑर्गन ट्रैफिकिंग का खुलासा किया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि उइगर मुस्लिम के स्वस्थ लिवर को चीन 1,60,000 डॉलर्स (1.20 करोड़ रुपए) में बेच रहा है। अख़बार के मुताबिक, इन धंधों से चीन को 1 बिलियन डॉलर (7492 करोड़ रुपयों) की कमाई हो रही है। 2017-19 के बीच 80,000 उइगर मुस्लिमों को देह-व्यापार का शिकार बनाया गया था। खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) को भी चीन के इस गोरखधंधे की जानकारी है। उसी साल चीन के शिनजियांग क्षेत्र में आधी रात को गिरफ्तार हुई उइगर महिला हसिएत अहमत (57) को उसके पड़ोस के युवाओं को इस्लामिक शिक्षा देने और कुरान की प्रतियाँ छिपाने के लिए 14 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। ये भी खबर आई थी कि शिनजियांग में मुस्लिम महिलाओं की जबरन नसबंदी कराई जाती है, उन्हें सूअर का मांस खाने और शराब पीने के लिए भी मजबूर किया जाता है।

3 साल में 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त

चीन में उइगर मुस्लिमों का होता दमन कई वर्षों से चर्चा में बना हुआ है। उनकी संस्कृति, सभ्यता, मजहबी रिवाज, तौर-तरीके, घर की बनावट, साज-सजावट का तरीका सब बदला जा रहा है। इसके अलावा डिटेंशन कैंप में रख कर महिलाओं के साथ रेप, अबॉर्शन समेत तमाम अमानवीयता की जा रही है। इमाम और मौलवियों को भी कैद में रखा जा रहा है। यही नहीं उइगरों की मस्जिद को गिरा कर होटल बनाने की तैयारी में रहने वाला चीन 3 साल में 16000 मजहबी स्थल ध्वस्त कर चुका है।

दूसरी ओर चीन इन सभी दावों को खारिज करता रहता है। उसका कहना है कि उन्होंने कोई मजहबी स्थल जबरन गिराया ही नहीं, जबकि मीडिया खबरें बताती हैं कि 2017 से 2020 के बीच में शिनजियांग के 900 क्षेत्रों में करीब 16000 मस्जिदें या तो आधी या फिर पूरी ध्वस्त हुई हैं। मीनारों को मस्जिद से हटा दिया गया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी की मानें तो हाल ऐसा है कि जब उनका पत्रकार रमजान के माह में उइगर गया तो उसने भी मस्जिदों को या तो पूरा गिरा हुआ या फिर आधा ध्वस्त पाया।

‘हिजाब पहनी लड़कियों को जेल’

फरवरी 2021 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उइगर मुस्लिमों के साथ होते अत्याचार की खबरों के बीच ये खबर आई थी कि चीन की नजर अब सान्या क्षेत्र के उत्सुल मुस्लिमों पर भी है। इस क्षेत्र में 10 हजार से भी कम संख्या में ये समुदाय रहता है। मगर, वहाँ ‘चीनी सपने’ को साकार करने की आड़ में इस समुदाय पर अप्रत्यक्ष रूप से हमले होने शुरू हो गए थे। जानकारी के अनुसार, सान्या में अब मुस्लिम घरों व दुकानों के बाहर लिखे मजहबी नारों जैसे अल्लाह-हू-अकबर को स्टिकर्स की मदद से ढका गया था। हलाल खाने के बोर्ड को भी रेस्त्रां आदि से हटाया गया था। इस्लामी स्कूलों को बंद कर दिया गया और हिजाब पहनने वाली लड़कियों को जेल भेजने की कोशिश की गई थी।

महाराष्ट्र के इंस्पेक्टर ने कीर्तन के बीच नारद मुनि के आसन को किया अपवित्र, बाद में इकलौते बेटे की शपथ खा माँगी माफी

महाराष्ट्र (Maharashtra) में एक पुलिस अधिकारी ने हिंदू देवता (Hindu God) का अपमान करने के बाद अपने इकलौते बेटे की शपथ खाकर माफी माँगी है। महाराष्ट्र के चालीसगाँव सिटी थाने के पुलिस इंस्पेक्टर केके पाटिल ने 27 अप्रैल 2022 की रात सप्तश्रृंगी देवी मंदिर के पास आयोजित एक वारकरी संप्रदाय के कीर्तन में नारद मुनि के पवित्र स्थान का अनादर किया था। इंस्पेक्टर वहाँ रात के 10 बजने के कारण आयोजकों से लाउडस्पीकर बंद करने के लिए कहने गए थे।

पुलिस इंस्पेक्टर केके पाटिल (फोटो साभार: ट्विटर)

अगले दिन इस घटना की जानकारी जैसे ही लोगों को लगी, हिंदुओं और विशेषकर वारकरी संप्रदाय के अनुयायियों में पुलिस निरीक्षक के खिलाफ रोष फैल गया। चालीसगाँव में अपने कार्यकाल के दौरान केके पाटिल की उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए भाजपा के स्थानीय MLC मंगेश चव्हाण ने हस्तक्षेप किया और पाटिल ने अपनी गलती के लिए माफी माँगी। इस दौरान पाटिल ने कहा कि उनसे अनजाने में भूल हो गई है।

महाराष्ट्र का वारकरी संप्रदाय और इसकी कीर्तन परंपरा 13वीं शताब्दी की है। 7वीं सदी से चली आ रही इस परंपरा को श्रद्धालु आज भी निभाते हैं। ऐसा ही एक कीर्तन महाराष्ट्र के चालीसगाँव शहर के हनुमानसिंह राजपूत नगर क्षेत्र में सप्तश्रृंगी देवी मंदिर के समक्ष 27 अप्रैल 2022 की शाम को आयोजित किया गया था। रात करीब 10:15 बजे जब चालीसगाँव शहर के पुलिस निरीक्षक केके पाटिल नगत रोड इलाके में गश्त कर रहे थे तो उन्होंने कीर्तन स्थल पर लगे लाउडस्पीकर से आवाजें सुनीं। चूँकि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकरों का उपयोग प्रतिबंधित है, इसलिए वह आयोजकों से लाउडस्पीकर बंद करने को कहने के लिए कीर्तन स्थल पर गए।

वारकरी संप्रदाय के स्थानीय वयोवृद्ध सदस्यों ने पुलिस निरीक्षक केके पाटिल को माफ कर दिया और एक अधिकारी के रूप में उनके अच्छे कार्यों की सराहना की। (फोटो साभार: ट्विटर)

केके पाटिल आयोजकों को निर्देश देने के लिए जैसे ही मंच पर गए, वहाँ रखे नारद मुनि के पवित्र आसन पर बिना जूते उतारे चले गए। पाटिल के अनुसार, वह इस तथ्य से अनजान थे कि वारकरी कीर्तन कार्यक्रम के मंच पर नारद मुनि का आसन होता है। माना जाता है कि हिंदू देवताओं और भगवान विष्णु कीर्तन करने वाले वे पहले व्यक्ति हैं।

इस घटना की खबर फैलते ही स्थानीय हिंदुओं में आक्रोश फैल गया। राज्य के विभिन्न हिस्सों से वारकरी संप्रदाय के लोग चालीसगाँव में संपर्क करने लगे। कई हिंदू संगठनों ने भी स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के MLC मंगेश चव्हाण से संपर्क किया और उन्हें घटना की जानकारी दी। इसके बाद चव्हाण ने हालात को देखते हुए इसे संभालने की पहल शुरू कर दी।

मंगेश चव्हाण ने अंत्योदय जनसेवा कार्यालय में वारकरी संप्रदाय के महत्वपूर्ण सदस्यों और पुलिस निरीक्षक की बैठक बुलाई। वहाँ भगवान पांडुरंग और महाराज शिवाजी की मूर्तियों के सामने पुलिस निरीक्षक केके पाटिल ने ‘अनजाने में हुई गलती’ के लिए माफी माँगी। पाटिल ने कहा, “मैं भी एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखता हूँ, जो वारकरी परंपरा को मानता है लेकिन दुर्भाग्य से मैं वारकरी कीर्तन में नारद मुनि के आसन से अनजान था। जब मैं उस इलाके में गश्त कर रहा था तो रात के 10:15 बज चुके थे। इसलिए जब लाउडस्पीकर की आवाज सुनी तो मैं कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए वहाँ गया। मैं अपनी पुलिस वर्दी में था। मैं उसी के साथ मंच पर गया और इसलिए मेरे द्वारा अनजाने में यह कृत्य हुआ है। इसके लिए मैं माफी माँगता हूँ।”

एमएलसी मंगेश चव्हाण ने कहा, “हालांकि इंस्पेक्टर केके पाटिल के इस कृत्य से हिंदुओं और विशेषकर वारकरियों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, लेकिन यह घटना सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उन्हें नारद मुनि की पवित्र आसन का महत्व नहीं पता था। वारकरी संप्रदाय एक भक्ति परंपरा है, जो सभी को क्षमा करने के लिए जानी जाती है। अनजाने में हुए अपमान और समाज में आक्रोश के कारण केके पाटिल साहब ने खुद माफी माँगने की परिपक्वता दिखाई।”

मंगेश चव्हाण ने आगे कहा, “जब से केके पाटिल चालीसगाँव थाने में आए हैं, तब से इलाके में अवैध गतिविधियाँ कम हो गई हैं। उन्होंने यहाँ क्राइम रेट पर नजर रखी। सड़कों पर घूम रहे आवारा और स्थानीय लड़कियों को छेड़ने वाले अब पुलिस और उनके अनुशासन से डरे हुए हैं। यह सब इसलिए हो सका, क्योंकि केके पाटिल बहुत ही तत्परता से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। यह सब सिर्फ एक स्थानीय एमएलसी के रूप में मैं उनकी प्रशंसा करने के लिए नहीं कह रहा हूँ, वास्तव में हम सभी ने इस परिवर्तन को देखा है। वारकरी संप्रदाय के सदस्यों ने भी इस बात पर ध्यान दिया है। जब आप अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे होते हैं, तो अनजाने में ऐसा कुछ हो जाता है। मैं सभी वारकरियों से अपील करता हूँ कि इस अच्छे अधिकारी को माफ कर दें, जो वास्तव में समाज के लिए अच्छा कर रहा है। मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि इस घटना को किसी भी अवांछित रंग में न रंगें और सद्भाव बनाए रखें।”

स्थानीय वारकरी संप्रदाय के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, “वारकरियों के आक्रोश को देखते हुए इंस्पेक्टर केके पाटिल ने एमएलसी मंगेश चव्हाण और वारकरी संप्रदाय सहित अन्य वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति में अपनी गलती के लिए माफी माँगी। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र की शपथ ली और कहा कि वह वास्तव में नहीं जानते थे कि यह नारद मुनि का पवित्र आसन है। उन्होंने क्षमा करने के लिए कहा। इस शहर के लिए अब तक किए गए उनके अच्छे कार्यों की हम सराहना करते हैं। यह केके पाटिल साहब ही हैं, जिन्होंने सुनिश्चित किया है कि हमारी लड़कियाँ सुरक्षित रहें।”

अन्य सभी वारकरी और कीर्तन में शामिल लोग भी इस बात से सहमत थे कि केके पाटिल ने ही साप्ताहिक कीर्तन और सप्ताह भर चलने वाले कीर्तन दोनों का फिर से आयोजन करने के लिए प्रेरित किया था, क्योंकि ये पारंपरिक कार्यक्रम COVID-19 महामारी के दौरान बंद कर दिए गए थे। एमएलसी मंगेश चव्हाण ने अपने ट्विटर हैंडल से पूरी घटना को साझा किया है।