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‘पुलिस में कोई सीधे मुँह बात नहीं कर रहा’: जिस हिन्दू महिला के पति, देवर और तीन बच्चों को ले गई पुलिस, वो बोली – हमारी रोजी-रोटी पर आफत

हमने इससे पहले बताया था कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हुए दंगों में एक ही हिन्दू परिवार के पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसमें एक नाबालिग भी शामिल है। हिन्दू महिला दुर्गा सरकार ने बताया था कि उनके पति, देवर और तीन बेटों को दिल्ली पुलिस उठा कर ले गई हैं। हनुमान जयंती के दिन शोभा यात्रा के आयोजन में इस परिवार की मुख्य भूमिका थी। अब परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है। घर में रोजी-रोटी की कमी हो गई है।

दुर्गा सरकार ने बताया कि इतनी भागदौड़ करने के बाद भी उनके परिवार के उन पाँच सदस्यों के बारे में कुछ अता-पता नहीं चला है। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया है। घर के सारे पुरुषों के थाने में होने के कारण स्थिति बदतर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस में कोई सीधे मुँह उनसे बात तक नहीं कर रहा है, ऊपर से उन्हें लगातार इधर-उधर दौड़ाया भी जा रहा है।

उनका सवाल है कि वो एक अकेली महिला भला कहाँ-कहाँ दौड़े-भागे? थाने से लौट कर थकी-हारीं दुर्गा सरकार ने बताया कि वहाँ कोई किसी से बात करने को भी तैयार नहीं है। दो थानों में भागदौड़ करने के बावजूद उन्हें अपने परिवार के बारे में कुछ भी पता नहीं चल सका है। किससे क्या कहना है, उन्हें ये तक नहीं पता। उन्हें ये भी नहीं बताया गया कि किस कारण से उनके परिवार वालों को ले जाया गया है। उन्हें इस बात का तनाव है कि घर कैसे चलेगा।

महिला का कहना है कि पुलिस-प्रशासन उन्हें भी लेकर जाए। परिवार मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से ताल्लुक रखती हैं। उनके देवर का सिर फोड़ दिया गया, जबकि पति के पाँव में जख्म हुआ है। दंगे में इन दोनों पर थी ईंट-पत्थर चले हैं। उन्होंने कहा कि अब जैसा माहौल बन रहा है, पुलिस-प्रशासन के रहने तक डर की बात नहीं है। लेकिन, उनके जाने के बाद वो डर की बात बताते हैं। अब तक प्रशासन से या कहीं से उन्हें कोई मदद नहीं मिला है।

फ़िलहाल घर में वो महिला अकेली बची हैं। उनके घर में खाना तक नहीं बन रहा है। पुलिस में किसी से उनकी बात नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से माँग करते हुए कहा, “हमारे लोग बेमतलब के फँस गए हैं। वो तो बस हिन्दू त्योहार मना रहे थे। पुलिस ये कह कर ले गई कि पूछताछ के लिए आए हैं, कार्रवाई कर के छोड़ देंगे। वो 10-12 की संख्या में थे।” उन्होंने गुहार लगाई कि उनके परिवार वालों तक उन्हें कम से कम खाना तो भेजने दिया जाए।

उनके दो बेटे पढ़ाई के साथ-साथ घर का काम भी करते हैं। वो रेहड़ी लगा कर बेचने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे हराम का नहीं खाते, मेहनत करते हैं। बस रोजी-रोटी चलने लायक आय ही इस परिवार की है। उन्होंने बताया कि हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा में जो रुपए खर्च हुए थे, वो गरीबों ने खुद से इकट्ठा किया था। दुर्गा सरकार की बहन उनकी मदद के लिए आई हैं। उनके माँ-बाप नहीं हैं। बाक़ी कोई उनका साथ नहीं दे रहा।

पीड़ित महिला का नाम दुर्गा सरकार है, वहीं उन्होंने अपने पति का नाम सुकेन सरकार बताया। पहला बेटा सूरज जहाँ 20 वर्ष का है, वहीं दूसरा बेटा 17-18 साल का है। महिला का तीसरा बेटा नाबालिग है, लेकिन फिर भी पुलिस उसे ले गई है। महिला ने अपने देवर का नाम सुकेश सरकार बताया है। एक और बात ध्यान देने लायक है कि इस कार्रवाई के कुछ ही देर पहले जमीयत-ए-उलेमा के प्रतिनिधिगण भी घटनास्थल पर पहुँचे थे।

‘हनुमान जी की पूजा में कौन-कौन थे’ – दिल्ली पुलिस ने पूछा, सुजीत ने निडर होकर बताया – ‘मैं था’, पुलिसवालों ने घेर कर पकड़ लिया

जहाँगीरपुरी हिंसा में दिल्ली पुलिस ने हनुमान पूजा में शामिल होने वाले हिंदुओ को भी गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाम सुजीत हलदर का भी है। हाल में ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे जब घटनास्थल पर गए, तो उन्होंने सुजीत की पत्नी मीनू से बात की और जानना चाहा कि आखिर किस जुर्म में उनके पति को पुलिस वाले अपने साथ ले गए।

मीनू ने राहुल पांडे से बात करते हुए बताया कि वह लोग जी ब्लॉक धोबी घाट पर रहते हैं। उनके पति को कल 4:30 बजे सिविल ड्रेस में आई पुलिस अपने साथ ले गई। उन लोगों ने पहले प्यार से पूछा कि हनुमान जी की पूजा में कौन-कौन शामिल था। शुरू में लोग डरने लगे कि क्या बोलें। मगर फिर सुजीत ने बिना डरे कह दिया, “हाँ जी सर, हमने पूजा की थी। हम पूजा में भी शामिल थे।” उन्होंने पूछा, “तुम कहाँ पर थे।” उन्होंने कहा कि मैं पालकी खींच रहा था। इसके बाद उनका गिरेबान पकड़कर उन्हें साइड में कर दिया गया। दो लोग उनके आस पास खड़े हो गए।

मीनू कहती है, “मेरे पति ने पूछा कि मैंने तो ऐसा कुछ किया नहीं है। आप मुझे क्यों पकड़ रहे हो। मगर उन्हें कहा गया कि वो वहाँ थे तो उन्हें चलना पड़ेगा। इतने पर मेरे पति ने एक बार फिर पूछा कि क्या उन्हें लेकर जाया जा रहा है। अगर ऐसा है तो वो अपने परिवार को बता दें। मगर उनसे कहा गया कि उन्हें गवाह के तौर पर ले जा रहे हैं। इसके बाद उन्हें लेकर गए। शाम को जाकर हमें पता चला कि चार्जशीट में उनके नाम भी है जिन्हें यहाँ से ले गए। अखबार वाले जब हमसे बयान लेने आए तब हमें ये सारी चीजें पता चलीं।”

मीनू ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि वह लोग जैसे माहौल में है। वहाँ बच्चों को पढ़ाने का भी फायदा नहीं है। अगर कोई उन पर अटैक करेगा तो साफ है कि उसके बदले वो अपना बचाव तो करेगा ही। ये पूरी जो हिंसा हुई है इसी आधार पर तो हुई है। हिंदुओं को एक रास्ते से रथ यात्रा निकालने से रोका गया, उन्होंने पूछा क्यों नहीं जाएँगे बस उसके बाद ही ये सब हुआ।

बता दें कि जहाँगीरपुरी हिंसा में अब तक 23 लोग पकड़े जा चुके हैं। इनमें 2 नाबालिग हैं और कुछ हिंदू भी हैं। आज इसी इलाके से दोबारा पथराव की खबर सामने आई है।

बंगाल से आकर दिल्ली में बसा मोहम्मद अंसार, कबाड़ बेच 12 साल में ठोक लिया 5 मंजिला मकान: जहाँगीरपुरी हिंसा का है मुख्य आरोपित

मोहम्मद अंसार को सोमवार (18 अप्रैल 2022) को दिल्ली पुलिस ने फिर से कोर्ट में पेश किया। अदालत ने उसे दो दिन के पुलिस रिमांड में भेज दिया है। हनुमान जयंती के अवसर पर शनिवार (16 अप्रैल 2022) को निकाली गई शोभा यात्रा में बवाल खड़ा कर दिल्ली के जहाँगीरपुरी को सुलगाने का काम मोहम्मद अंसार ने ही किया था। अंसार ही वो शख्स है, जिसने शोभा यात्रा में शामिल लोगों के साथ झगड़़ा शुरू किया था। इसके बाद पथराव और फायरिंग की घटनाएँ हुई थीं।

गिरफ्तारी के बाद अंसार को रविवार को अदालत ने एक दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंपा था। कोर्ट में पेशी के दौरान उसके चेहरे पर कोई मलाल नहीं झलक रहा था। एक वीडियो में वह फिल्म पुष्पा के स्टाइल में अपने गले पर हाथ फेरता नजर आया था। अंसार का आपराधिक इतिहास भी रहा है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मोहम्मद अंसार पहले दो मामलों में शामिल पाया गया और उसे कई बार गिरफ्तार किया गया था।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद अंसार की पत्नी का नाम सकीना है। उसकी तीन बेटियाँ और दो बेटे हैं। सकीना ने अपने शौहर को बेगुनाह बताते हुए कहा है कि वह किसी हिंसा में शामिल नहीं था। उसने दावा किया कि वह केवल बीच-बचाव करने मौके पर गया था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सकीना ने बताया कि उसका परिवार B ब्लॉक में पिछले 12 साल से रह रहा है।

मीडिया से बात करते हुए सकीना ने बताया कि अंसार मूल रूप से बंगाल का रहने वाला। कई साल पहले दिल्ली आकर जहाँगीरपुरी में बस गया। रिपोर्ट को मुताबिक अंसार पेशे से कबाड़ी है, लेकिन उसका 5 मंजिला मंजिला मकान है। भास्कर के रिपोर्टर ने जब इस बारे में अंसार की सास अकलीमा से पूछा तो उसके पास कोई जवाब नहीं था। वह झेंप गई। अकलीमा ने बताया कि अंसार को जो भी काम मिलता है वह कर लेता है। वहीं कोर्ट में पेशी के दौरान अंसार के ‘पुष्पा स्टाइल’ पर सवाल पूछे जाने पर उसकी बेटी मोइना ने कहा परिवार का हौसला बनाए रखने के लिए ऐसा किया।

अंसार पर आरोप है कि जब शोभा यात्रा सी ब्लॉक की जामा मस्जिद के पास पहुँची तो वह अपने 4-5 साथियों के साथ आया और शोभा यात्रा में शामिल लोगों से बहस करने लगा। बहस ज्यादा बढ़ने के कारण दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। इसके चलते शोभायात्रा में भगदड़ मच गई। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता (Adesh Gupta) ने आरोप लगाया है कि शोभा यात्रा में दंगा करने वाला अंसार आम आदमी पार्टी का पदाधिकारी है।

‘केजरीवाल आतंकियों का स्लीपर सेल’: VHP ने जहाँगीरपुरी में ​हिंदुओं पर हमले को बताया आतंकी घटना, NIA जाँच की माँग

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने जहाँगीरपुरी दंगों की जाँच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) से कराने की माँग की है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकियों का स्लीपर सेल और जहाँगीरपुरी हिंसा को एक आतंकी घटना बताया है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, “दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) आज आतंकवादियों के स्लीपर सेल बन गए हैं। मेरी केंद्र सरकार से माँग है कि वह जहाँगीरपुरी हिंसा की जाँच एनआईए (NIA Probe) से करवाए, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा शामिल है।”

हिंसा के पीछे बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हुए सुरेंद्र जैन (Surendra Jain) ने कहा कि यह एक पूर्व नियोजित आतंकवादी हमला है। दिल्ली में जिहादी आतंकवाद का बम टिक-टिक कर रहा है, जो कभी भी फट सकता है। उन्होंने कहा कि यह सामान्य हमला नहीं है। इस हमले को लेकर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मालूम हो कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में सोमवार (18 अप्रैल, 2022) को पुलिस की टीम पर एक बार फिर पथराव किया गया। पुलिस हिंसा में शामिल कुछ लोगों से पूछताछ करने के लिए गई थी। इसी बीच जब वह एक महिला से पूछताछ कर रही थी, तभी कुछ लोगों ने अपने घरों से पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पथराव के बावजूद पुलिस की टीम महिला को अपने साथ ले गई। यह महिला उस मोहम्मद सोनू की बीवी है जो 16 अप्रैल की हिंसा के दौरान पत्थरबाजों के बीच से गोली चलाता वीडियो में दिखा था।

गौरतलब है कि जहाँगीरपुरी हिंसा के 100 से ज्यादा वीडियो व सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। इन्हीं में से एक वीडियो में मोहम्मद सोनू गोली चलाते हुए दिख था। वह हिस्ट्रीशीटर सलीम चिकना का भाई है। बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले में अब तक 23 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कई हिंदू भी हैं। इसके अलावा आरोपितों में 2 नाबालिग भी हैं। जहाँगीरपुरी हिंसा के बाद फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुँचकर सबूत जुटा रही है।

महाराष्ट्र: अचलपुर में धार्मिक झंडा हटाने को लेकर हिंसक झड़प, ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखकर लौट रहे लोगों से भी यहीं हुई थी मारपीट

रामनवमी और हनुमान जयंती के दौरान हिंदुओं के साथ हिंसा की खबरें देश के कई हिस्सों से सामने आई हैं। अब महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अचलपुर शहर में दोनों समुदायों के बीच टकराव हुआ है। हिंसक झड़प की वजह धार्मिक झंडे हटाने को लेकर हुआ विवाद बताई जा रही है। हिंसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है। 22 लोगों को अब तक हिरासत में लिए जाने की सूचना है।

मिली जानकारी के अनुसार धार्मिक झंडे को हटाने को लेकर दो गुट में विवाद शुरू हुआ। उसके बाद दोनों गुटों के लोगों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शशिकांत सातव ने बताया कि रविवार (17 अप्रैल 2022) आधी रात को हुई इस घटना के बाद दोनों समूहों के 22 लोगों को हिरासत में लिया गया है और अब स्थिति नियंत्रण में है। हालाँकि इस झड़प में कितने लोग घायल हुए हैं, उसकी कोई सटीक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

क्या है परंपरा

पुलिस के मुताबिक, स्थानीय निवासी हर साल त्योहारों के दौरान अमरावती जिला मुख्यालय से 48 किलोमीटर दूर अचलपुर के मुख्य द्वार पर खिड़की गेट और दूल्हा गेट के ऊपर विभिन्न धर्मों के झंडे लगाते हैं। एक पुलिस निरीक्षक ने कहा, ”रविवार आधी रात को कुछ असामाजिक तत्वों ने धार्मिक झंडे हटा दिए, जिसके बाद कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते पथराव में बदल गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे।” एसआरपीएफ (राज्य रिजर्व पुलिस बल) और स्थानीय पुलिस ने जल्द ही स्थिति पर पा लिया।

कई राज्यों में हिंसा की घटनाएँ

इस महीने नववर्ष और रामनवमी के मौके पर देश के कई राज्यों में जुलूस निकालने के दौरान हिंसक झड़पें हुई हैं। इसके तहत गुजरात, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान में साम्प्रदायिक हिंसा हुई। उसके बाद दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के मौके पर जुलूस यात्रा के दौरान हिंसा हुई और अब महाराष्ट्र में ऐसे मामले सामने आए हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले अमरावती में बॉलीवुड फिल्म द कश्मीर फाइल्स को लेकर विवाद हो गया था। अचलपुर में फिल्म देखने के बाद थिएटर से निकले कुछ लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाए तो वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने इस पर नाराजगी जताई। इसके बाद नौबत मारपीट तक आ पहुँची। बाद में पुलिस ने 15 युवकों को गिरफ्तार गिरफ्तार किया था।

हिंदू नववर्ष, रामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव: मस्जिद, मुस्लिम, पत्थर… करौली से जहाँगीरपुरी तक हिंदुओं पर हमले का एक ही पैटर्न

अप्रैल के शुरुआती दिनों से ही मीडिया में हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। सबसे पहले हिंदू नव वर्ष के मौके पर राजस्थान में हिंदुओं को निशाना बनाने का काम हुआ, फिर राम नवमी के मौके पर खरगोन जैसी हिंसा ने हिंदुओं को दहला दिया। हालात सुधारने का प्रयास प्रशासन कर ही रहा था कि हनुमान जन्मोत्सव आ गया। किसने सोचा था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फिर वो दृश्य नजर आएँगे जो 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में दिखे थे, लेकिन जहाँगीरपुरी के कट्टरपंथियों के चलते ये भी देखने को मिल गया। वैसी ही पत्थरबाजी, वही खून से लथपथ पुलिस, हाथ में हथियार, मुँह पर मजहबी नारे… आदि-आदि।

इन हमलों की खबर सुनते-सुनते अब धीरे-धीरे 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं। कभी कहीं- तो कभी कहीं से हिंदुओं के जुलूस को निशाना बनाए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं। हैरानी की बात ये है कि हर जगह एक ही तरह का पैटर्न इस्तेमाल हो रहा है। एक ही समुदाय द्वारा इसे अंजाम दिया जा रहा है। आइए एक बार सिलसिलेवार ढंग से याद कर लें कि अचानक अप्रैल माह में ये सब कहाँ-कहाँ और कैसे हुआ।

तारीख: 2 अप्रैल 2022। जगह: करौली, राजस्थान।

हिंदू नववर्ष के मौके पर हिंदू संगठनों ने शोभा यात्रा का आयोजन किया था। ये यात्रा फूटा कोट इलाके से होकर निकल रही थी। हालाँकि जैसे ही ये शोभा यात्रा मस्जिद के पास वाले इलाके में पहुँची, हिंदुओं पर अचानक पत्थर बरसने लगे। इसके बाद इलाके में खूब बवाल हुआ। आधा दर्जन दुकानों से लेकर वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। बाद में पीडित हिंदुओं ने बताया कि हमले को अंजाम दिए जाने से पहले बाजार में  मुस्लिम पहले ही दुकानें बंद करके चले गए थे और शोभा यात्रा के वक्त पड़ोसी मुस्लिमों ही हमलावर बन गए थे।

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: खरगोन, मध्य प्रदेश।

रामनवमी के मौके पर रविवार के दिन 10 अप्रैल को हिंदुओं द्वारा खरगोन में जुलूस निकाला जा रहा था। इसी बीच मस्जिद से अचानक कुछ नमाजी से निकले और पत्थरबाजी शुरू हो गई। बाद में इलाके में जमकर आगजनी और हिंसा हुई। घटना के दौरान गोली लगने से घायल होने वाले एसपी सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि हिंसक भीड़ में से एक व्यक्ति तलवार लेकर हिंदुओं को मारने जा रहा था। जब उन्होंने उसे पकड़ना चाहा तो किसी ने उन्हें भी गोली मार दी ।

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: बंगाल का हावड़ा का फाजिर बाजार ।

बंगाल के हावड़ा के फाजिर बाजार में रामनवमी के मौके पर जुलूस निकाला जा रहा था कि तभी समुदाय विशेष ने हमला करना शुरू कर दिया। इसके बाद तमाम दुकानों और गाड़ियों में आग लगाने की खबरें आईं। पुलिस पर भी खूब पत्थरबाजी हुई।

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: बंगाल का बाँकुड़ा।

राम नवमी के मौके पर बंगाल के बांकुड़ा में मस्जिद के पास से हिंदुओं का जुलूस निकला और देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। पुलिस से जब इस बाबत शिकायतें हुई तो सफाई में जवाब आया कि उन्होंने तो पहले ही जुलूस के लिए दूसरा रास्ता दिया था। मगर हिंदू जानबूझकर वहाँ से गुजरे।

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: हिम्मतनगर, गुजरात।

रामनवमी के मौके पर गुजरात के हिम्मतनगर में जब कट्टरपंथियों ने शोभा यात्रा को निशाना बनाया तो तमाम पुलिकर्मियों को भी टारगेट करने से पीछे नहीं रहे। हर तरफ से पथराव किया गया। शोर-शराबे के बीच कई वाहन क्षतिग्रस्त किए गए। दुकानों में आग लगाई गई। स्थानीयों ने बताया कि उनके ऊपर पूरी प्लॉनिंग से पत्थरबाजी हुई। डंडों का इस्तेमाल किया गया। लोग घर से पत्थरबाजी कर रहे थे। गाड़ियों को जलाया जा रहा था। 

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: खंबात, गुजरात।

रामनवमी पर खंभात शहर के शंकरापुरा क्षेत्र में 10 अप्रैल को रामजी मंदिर के पास से जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस में 3 हजार से ज्यादा श्रद्धालु थे। इन लोगों को चितरी बाजार, पीठ बाजार, मंडई चौकी क्षेत्र से होकर गुजरना था। हालाँकि जैसे ही जुलूस शंकरापुर से बाहर निकला वैसे ही दंगाई आगे आ गए और जुलूस पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना की जाँच में ये सामने आया था कि कैसे तीन मौलवियों और दो अन्य लोगों ने इसकी साजिश रची थी। पत्थरबाजी के लिए बाहरी लोगों को बुलाया गया था और खेत में जमा करके उनसे ये काम कराया गया था। 

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: आणंद, गुजरात।

10 अप्रैल को आणंद जिले में हिंसक झड़प की घटना घटी जहाँ छपरिया के हनुमान मंदिर के पास निकल रही शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी हुई और बाद में वाहनों में तोड़फोड़ की खबर आई।

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: मानखुर्द, मुंबई।

मानखुर्द में रामनवमी के दौरान हमला हुआ जहाँ खाना खाते लोगों का खाना गिरा दिया गया। बाद में 20 वाहनों में यहाँ भी तोड़ फोड़ हुई।

तारीख: 10 अप्रैल 2022। जगह: लोहरदगा, झारखंड।

झारखंड के लोहरदगा के हिरही भोक्ता बगीचे में रामनवमी की शोभायात्रा पर धारधार हथियार लेकर हिंदुओं पर हमला किया। कथिततौर पर यहाँ कब्रिस्तान के पास धार्मिक नारे लगाने से पहले हिंदुओं को रोका गया और जब तक वह कुछ समझते तब तक पथराव होने लगा। उपद्रवियों ने घरों, ठेलों, दुकानों, पिकअप वाहन और 10 बाइकों में आग लगाई।

तारीख:10 अप्रैल 2022। जगह: बोकारो, झारखंड।

झारखंड के बोकारो में दो दर्जन बाइक सवारों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वो रामनवमी के जुलूस का हिस्सा बनने जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, ये बाइक सवार जिस गली से जा रहे थे वहीं से बड़ी संख्या में दूसरे समुदाय वाले नमाज अता करके लौट रहे थे। इसी बीच बहस शुरू हुई और बाइक सवार लोगों पर पथराव की घटना को अंजाम दिया गया।

तारीख:10 अप्रैल 2022। जगह: जेएनयू, दिल्ली।

दिल्ली के जेएनयू में भी रामनवमी की पूजा करने वाले छात्रों को निशाना बनाने का काम वामपंथियों द्वारा किया गया था। पूजा में शामिल लोगों ने बताया था कि कैसे पूजा के विरोध में उनके ऊपर हमला हुआ और झड़प में महिलाओं से लेकर दिव्यांग छात्र को पीटा गया।

तारीख: 16 अप्रैल 2022। जगह: जहाँगीरपुरी, दिल्ली।

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर निकल रही शोभा यात्रा में हिंदुओं पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। पुलिस ने बताया कि कैसे घरों से निकल कर महिलाएँ गाली-गलौच कर रही थीं और फिर देखते ही देखते हिंसा भड़क गई। भारी-भारी पत्थर छतों से फेंके जाने लगे। अल्लाहु अकबर, नारा-ए-तकबीर के नारों के साथ भीड़ सड़कों पर आ गई और शोभा यात्रा में शामिल लोगों की ओर दौड़ पड़ी। इस घटना में भी कई पुलिसकर्मी घायल हुए। 

तारीख: 17 अप्रैल 2022। जगह: हुबली, कर्नाटक।

हिजाब विवाद के बाद हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर एक बार फिर कट्टरपंथियों का राज्य में असली चेहरा देखने को मिला जब एक व्हाट्सएप स्टेट लगाने के बहाने कट्टरपंथियों की भीड़ वहाँ जमा हो गई। पुलिस पर इस दौरान पथराव हुआ। वाहनों में तोड़फोड़ की गई।

तारीख: 16 अप्रैल। जगह: कोलार, कर्नाटक।

कर्नाटक के कोलार में मुलबगल इलाके में रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान पत्थरबाजी हुई थी। इसके बाद वहाँ भी हिंदू त्योहार पर तमावपूर्ण माहौल बना दिया गया।

तारीख: 16 अप्रैल 2022। जगह: कुरनूल, आँध्रप्रदेश।

आँध्र प्रदेश के कुरनूल में हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा पर मुस्लिमों द्वारा अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए 10 मिनट पत्थरबाजी की गई। इसके बाद दूसरे पक्ष ने भी जवाब में पत्थर फेंके। कथिततौर पर कुरनूल जिले के होलागुंडा के ईरला कट्टा में हनुमान जयंती के अवसर पर समारोह का आयोजन किया था। समारोह के दौरान जब शोभायात्रा आगे बढ़ने लगी तो पुलिस ने रास्ते में पड़ने वाली मस्जिद को देखकर डीजे पर चलने वाले संकीर्तन को जबरन बंद करा दिया।

तारीख: 16 अप्रैल 2022 । जगह: रुड़की, उत्तराखंड।

उत्तराखंड के रुड़की स्थित भगवानपुर थाना क्षेत्र के डाडा पट्टी में भी हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर शोभा यात्रा करने वालों को निशाना बनाया गया। यहाँ पर मुस्लिम मोहल्ले के छतों से पत्थरबाजी की गई और उनमें संपत्तियों को जलाने के लिए तोड़फोड़ हुई।

एक पैटर्न में अलग-अलग हिंदुओं पर हमला

यहाँ स्पष्ट हो कि अप्रैल महीने में घटी ये सारी घटनाएँ केवल चंद हैं। अगर इससे पहले होली और उससे पहले सरस्वती पूजा जैसे हिंदू त्योहार देखे जाएँ तो ये 16 घटनाएँ बढ़कर और हो जाएँगी। हो सकता है एक समय आए कि इनकी गिनती सैंकड़ों में हो। मगर, इन सभी घटनाओं में आप देखेंगे कि केवल स्थान को छोड़कर इनमें हर चीज समान है। जैसे हर जगह हिंदुओं के त्योहार पर हिंदुओं को निशाना बनाया जाना, पहले से पत्थर इकट्ठा करके शोभा यात्रा में शामिल हिंदुओं पर पत्थरबाजी करना, संपत्तियों को नुकसान पहुँचाना, हाथ में धारधार हथियार होना, मुँह पर मजहबी नारे होना आदि।

आज तर्क दिए जा रहे हैं कि हिंदू अपनी शोभा यात्रा लेकर मुस्लिम इलाकों में गए इसलिए हिंसा भड़की। मगर यही तर्क देने वाले उस वीडियो को भूल रहे हैं जिसमें मंदिर के सामने इस्लामी नारे लगाते हुए भीड़ जा रही है और मंदिर में बैठे लोग कुछ नहीं बोल रहे। लेकिन आप ऊपर की हर घटना देखिए। वहाँ मुस्लिम इलाका, मस्जिद या घर से पथराव सब जानकारी है। क्या कहीं किसी मजहबी स्थान पर पत्थर इकट्ठा होना सामान्य बात है। सैंकड़ों लोगों की भीड़ में हथियार निकलकर आना बिलकुल किसी संदेह को पैदा नहीं करता है?

एक पैटर्न पर सालों से हिंसा को अंजाम दिया जाता रहा है। साल 2020 में दिल्ली दंगे भी यूँ ही शुरू हुए थे और फिर खरगोन से पहले मलवाड़-निमाड़ जैसे इलाके भी इसी पैटर्न के चलते दंगों का शिकार हुए ।थे आज जरूरत है कि इस पूरे पैटर्न की जाँच हो और कट्टरपंथी मानसिकता पर सवाल उठाए जाएँ। एक ओर जहाँ उत्तर प्रदेश में शोभा यात्राओं में फूल बरस रहे हैं वहीं अन्य जगह पर श्रद्धालुओं की आस्था पर आघात क्यों हो रहा है, ये एक बड़ा सवाल है? क्या ये सब इसलिए तो नहीं कि यूपी में बीजेपी की जीत से बिदके कट्टरपंथी अपनी मनमानी बाहरी राज्यों में चलाने के लिए ऐसे उपद्रव को अंजाम दे रहे हों।

‘भोली-भाली जनता की मेहनत की कमाई खो रही’: ED ने Amway की ₹757 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने Amway की 757.77 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थाई तौर पर कुर्क कर लिया है। Amway पर मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी की आड़ में पिरामिड फ्रॉड (लोगों की जॉइनिंग के जरिए धोखा) करने का आरोप है।

सोमवार (18 अप्रैल 2022) को केंद्रीय एजेंसी ने Amway पर की गई कार्रवाई को लेकर जारी बयान में कहा कि कुर्क की गई संपत्तियों में तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में Amway की जमीनें, कारखाने, उसके प्लांट, मशीनरी, गाड़ियाँ, उसके बैंक अकाउंट और फिस्क डिपॉजिट को अटैच कर लिया गया है।

Amway के 36 अलग-अलग बैंक अकाउंट्स से 411.83 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियाँ औऱ 345.94 करोड़ रुपए के बैंक बैलेंस को अस्थाई तौर पर कुर्क किया गया है। जाँच एजेंसी के मुताबिक एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही थी तो उसे इस घपले का पता चला था। ईडी का कहना है कि जाँच में ये पाया गया है कि कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाले अधिकांश उत्पादों की कीमतें खुले बाजार में उपलब्ध प्रतिष्ठित निर्माताओं के वैकल्पिक लोकप्रिय उत्पादों की तुलना में बहुत अधिक हैं।

27 हजार करोड़ से अधिक की कमाई की

इस बात का खुलासा हुआ है कि Amway कंपनी ने भारत में 2002-03 से 2021-22 तक अपने बिजनेस के जरिए 27,562 करोड़ रुपए की भारी भरकम कमाई की। अपनी इसी कमाई में से उसने भारत और अमेरिका में 2002-03 से 2020-21 वित्त वर्ष के दौरान अपने डिस्ट्रीब्यूटर्स और मेंबर्स को 7588 करोड़ रुपए का कमीशन दिया था।

जाँच एजेंसी ने कहा, “असली तथ्य को जाने बिना ही भोली-भाली जनता कंपनी से जुड़कर इसकी अधिक कीमतों वाले प्रोडक्ट को खरीदने के लिए प्रेरित होती है। इससे उसकी मेहनत की कमाई खो जा रही है। इससे जुड़ने वाले नए मेंबर कंपनी के प्रोडक्ट को उपयोग करने के लिए खरीदने की बजाए इसका मेंबर बनकर अमीर बनने के लिए अपलाइन मेंबर्स द्वारा ऐसा करवाया जाता है। जबकि, सच्चाई ये है कि अपलाइन मेंबर्स को मिलने वाला कमीशन इसके प्रोडक्ट की बढ़ी कीमतों के लिए जिम्मेदार है।”

कंपनी केवल इस बात पर जोर देती है कि कैसे इसके मेंबर बनकर दूसरे मेंबर बनाए जाते हैं। जबकि प्रॉडक्ट पर किसी भी तरह का ध्यान नहीं है। इसी मल्टी लेवल मार्केटिंग पिरामिड फ्रॉड में प्रोडक्ट का इस्तेमाल केवल इसे छिपाने के लिए किया जाता है।

वर्ष 1996-97 में Amway ने भारत में 21.39 करोड़ रुपए के शेयर कैपिटल लेकर आई थी, लेकिन वित्त वर्ष 2020-21 तक कंपनी ने अपने निवेशकों और मूल संस्थाओं को लाभांश, रॉयल्टी और अन्य भुगतान के नाम पर 2,859.10 करोड़ रुपये की भारी राशि बाहर भेजा है।

बहन से छेड़छाड़ करते थे नदीम और फरमान, नाबालिग भाई ने किया विरोध तो सिर धड़ से अलग किया: बेल्ट से पीटा, फिर तड़पाया

उत्तर प्रदेश के मेरठ से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यह घटना जानीखुर्द थानक्षेत्र के कस्बा सिवाल खास की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहन के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर नदीम और फरमान उर्फ फैजल ने 14 वर्षीय छोटे भाई को मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि उन दरिंदों ने पहले मासूम को बेल्ट से पीटा, फिर एक ने उसके हाथ पकड़े और दूसरे ने गर्दन काटकर उसे तड़पा-तड़पाकर मार डाला।

इसके बाद उन्होंने बच्चे के कटे हुए सिर और शरीर को कुछ मील की दूरी पर फेंक दिया। पुलिस ने 24 घंटे के अंदर रविवार (17 अप्रैल 2022) को नदीम और फरमान को गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक, अनस पुत्र अनीश का सिर कटा शव शनिवार (16 अप्रैल 2022) को सिवाल खानपुर मार्ग स्थित एक खेत में मिला था। पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर रविवार को अनस का सिर भी घटनास्थल के पास स्थित एक खेत से बरामद कर लिया। जानी थाना प्रभारी संजय वर्मा ने बताया, “अनस की बड़ी बहन के साथ कई दिनों से उसी के कस्बे सिवाल खास में रहने वाले दो युवक छेड़छाड़ कर रहे थे। अनस ने कई बार उनका विरोध किया था।”

एक हफ्ते पहले दोनों युवकों ने घर के बाहर खड़ी बहन के साथ छेड़छाड की, जिसका अनस ने विरोध किया। इसको लेकर दोनों युवकों ने तमंचा दिखाकर अनस को जान से मारने की धमकी दी थी। तीन दिन पहले छेड़छाड़ से परेशान होकर अनीस ने अपनी बेटी को उसकी माँ के घर मुरादनगर भेज दिया था।

इसके अगले दिन दोनों युवक अनीस के घर पहुँचे। युवती के वहाँ न मिलने पर घर में मिले अनस के बड़े भाई कैफ से उसकी बहन के बारे में पूछा। न बताने पर आरोपितों ने कैफ के साथ मारपीट की। जब इससे भी आरोपितों का मन नहीं भरा तो उन्होंने शुक्रवार की रात जब अनस डेयरी से दूध लेने के लिए जा रहा था। उसे जबरदस्ती सिवाल खानपुर मार्ग स्थित राशिद के खेत में ले गए। वहाँ दोनों आरोपितों ने पहले उसे बेल्ट से पीटा, फिर उससे उसकी बहन का फोन नंबर माँगा। नंबर न देने पर एक ने उसके हाथ पीछे से पकड़े और दूसरे ने धारदार चाकू से उसकी गर्दन काटकर सिर को पास ही स्थित इरफान के खेत में फेंक दिया।

मस्जिद से ऐलान और मार दिए गए BSF के 16 जवान: बाँस में लटकाकर शव ले जाते बांग्लादेशियों की वह तस्वीर जिसे आज भी नहीं भूला है भारत

16 दिसंबर 1971, वह तारीख है जिस दिन पाकिस्तानी फौज ने भारत के सामने सरेंडर किया था। 13 दिन तक चला युद्ध समाप्त हुआ था और बांग्लादेश का जन्म हुआ था। बांग्लादेश से भारत की सीमा 4000 किमी से ज्यादा की लगती है। इस सीमा से होने वाले घुसपैठ और तस्करी किस तरह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, इससे हम सब परिचित हैं। लेकिन इस सीमा पर 2001 में एक ऐसा हिंसक झड़प हुआ था, जिसमें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के 16 जवानों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जवानों के क्षत-विक्षत शव, बांग्लादेशियों के कंधों पर बाँस से लटके मृत जवानों के शव की तस्वीरें जब सामने आई थी तो पूरी दुनिया हैरान रह गई थी।

भारत-बांग्लादेश की सीमा पर अब तक की यह सबसे हिंसक झड़प 18 अप्रैल 2001 को हुई थी। इसमें बांग्लादेश राइफल्स (BDR) जो अब बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के नाम से जानी जाती है की सीधी संलिप्तता थी। कई जानकारों ने इसके पीछे पाकिस्तान की कुख्यात एजेंसी आईएसआई की साजिश होने का भी संदेह जताया था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जवानों पर हमले से पहले मस्जिद से ऐलान किया गया था। यह आवाज बीएसएफ की 118वीं बटालियन के डिप्टी कमांडर रहे बीआर मंडल और उनके साथियों ने भी सुनी थी।

इस संघर्ष का केंद्र बोराईबारी था जो भारत-बांग्लादेश की सीमा पर मेघालय में है। हिंसक झड़प से दो दिन पहले बोरईबारी से करीब 200 किलोमीटर दूर पिरडीवाह गाँव (इसे पडुवा के नाम से भी जानते हैं) पर 16 अप्रैल 2001 को बांग्लादेशी जवानों ने अचानक हमला कर दिया। वहाँ रह रहे लोगों को भागने को मजबूर किया। उस गाँव में स्थित बीएसएफ की चौकी में मौजूद 31 जवानों को चारों तरफ से घेर लिया गया था। फायरिंग के बाद दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर आते हैं।

BDR का दावा था कि बांग्लादेश की सरकार ने उसे पिरडीवाह गाँव को मुक्त कराने का आदेश दिया है, क्योंकि भारत ने इस पर 1971 से कब्जा कर रखा है। इसके अगले दिन बांग्लादेश राइफल्स के डायरेक्टर जनरल फजलुर रहमान का एक भड़काऊ बयान आता है। उसके बाद 18 अप्रैल को बोराईबारी में बांग्लादेशी फौजियों ने सैकड़ों गाँव वालों के साथ मिलकर बीएसएफ के 16 जवानों की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोप लगाया गया कि बीएसएफ के जवान बांग्लादेश की सीमा में घुसकर वो बीडीआर की चौकी पर कब्जा करना चाहते थे। बीएसएफ के जवानों को तड़पाने के बाद उन्हें प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई। बाद में छत विछत शवों को भारत को वापस कर दिया गया।

इसके बाद भारत की सख्ती के सामने बांग्लादेश को घुटने टेकने पड़े थे और पिरडीवाह को भारत को वापस कर दिया गया था।

‘गुस्से में चला दी गोली, सिर्फ डराना चाहता था’: बोलीं सोनू चिकना और सलीम चिकना की अम्मी – ‘मेरा बेटा 5 वक्त का नमाजी’

दंगा आरोपित सोनू चिकना और सलीम चिकना की अम्मी ने कबूल किया है कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में हिंसा के दौरान उनके बेटे ने गोलियाँ चलाई थीं। ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट में, फायरिंग के आरोपित सलीम चिकना की अम्मी ने कहा कि उनके बेटे को बेवजह गिरफ्तार किया गया है। उसने तो हिंसा के दौरान सिर्फ ‘अपने समुदाय का समर्थन’ करने के लिए बंदूकें उठाई थी।

आरोपित की अम्मी ने कहा, “उसे बिना किसी कारण के गिरफ्तार किया गया है। हर कोई आपको बता देगा कि उसे बिना किसी गलती के गिरफ्तार किया गया।” रिपोर्टर ने फिर उन्हें आरोपित की तस्वीर दिखाते हुए उनसे पूछा कि क्या वह उसे पहचान सकती है। उन्होंने कबूल किया कि वह उनका बेटा सोनू था।

यह पूछे जाने पर कि उनका परिवार कहाँ से आकर दिल्ली में रह रहा है, तो उन्होंने कहा कि वह लोग पश्चिम बंगाल से आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनके परिवार को नहीं बता रही है कि उनके बेटे को क्यों गिरफ्तार किया गया है।

इसके बाद रिपोर्टर ने सवाल किया कि उनका बेटा दंगाइयों के बीच क्या कर रहा है। तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा, “मेरे बेटे की चिकन की दुकान है। वह रोजा खोलने ही वाले थे कि हिंदू-मुस्लिमों के बीच तनाव पैदा हो गया और वे बाहर चले गए। उसके पास बंदूक नहीं है। गुस्से में आकर उसने किसी से बंदूक छीन ली और गोली चला दी। कोई घायल नहीं हुआ। वे हमें धमकी दे रहे थे। मेरा बेटा बस उन्हें डराना चाहता था। किसी ने व्यक्तिगत रंजिश की वजह से वीडियो शूट कर लिया और इसे वायरल कर दिया।”

सोनू के भाई सलीम को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उसकी अम्मी ने आगे दावा किया कि उसका बेटा दंगों में शामिल नहीं था। उसने अपने समुदाय का समर्थन करने के लिए बंदूक उठाई। सोनू की अम्मी से एबीपी न्यूज ने भी संपर्क किया था। एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “वह हिंसा के बाद वापस घर आया। वह डर गया और भाग गया। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। वह पाँच बार की नमाजी हैं। वह कभी किसी से नहीं लड़ता।” बता दें कि सोमवार को सोनू चिकना की बीबी से पूछताछ करने गई पुलिस पर भी लोगों ने पथराव किया। इसके बावजूद पुलिस उसे अपने साथ ले गई।

सामने आया सोनू चिकना की फायरिंग का वीडियो

गौरतलब है कि 17 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें सोनू को दिल्ली को जहाँगीरपुरी दंगों के दौरान गोलियाँ चलाते हुए देखा जा सकता है। इसके अलावा वीडियो में छोटे बच्चों सहित कई अन्य लोगों को पथराव करते देखा जा सकता है। बता दें कि शनिवार (16 अप्रैल 2022) जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर हमला किया गया। यह हमला उस वक्त किया गया, जब जुलूस क्षेत्र में एक मस्जिद के पास से गुजरा। इस घटना में दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर मेधा लाल मीणा को भी गोली लगी थी।