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कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की 25 घटना: इस्लामी आतंकियों की बर्बरता, वे क्रूर किस्से जो हर हिंदू को पढ़नी चाहिए

हर कश्मीरी पंडित परिवार पर हुए अत्याचारों पर अगर फिल्म बनाने चलें तो 7 लाख फिल्म बन जाएँगी… 7 लाख। हर घर की 1-1 कहानी है। ये कहानियाँ सुनाते-सुनाते उम्र निकल गई हमारी पर हमारी आवाज किसी ने नहीं सुनी।

पिछले दिनों द कश्मीर फाइल्स के रिलीज होने के बाद एक कश्मीरी पंडित महिला ने आजतक के कार्यक्रम में फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री के सामने सिसकते-सिसकते अपनी ये बात कही थी। इस महिला की तरह लाखों कश्मीरी पंडितों ने भी फिल्म को देख अपने दुख मीडिया, सोशल मीडिया में साझा किए थे जिनके बाद ऐसी तमाम कहानियों का अंबार लग गया जो 32 साल से मौन थीं। इनमें कुछ के बारे में आपने पहले सुना होगा और कुछ पर से कश्मीरी पंडितों ने हाल में चुप्पी तोड़ी है। किसी ने बताया है कि कैसे उनके पिता के 15 टुकड़े करके झेलम नदी में फेंक दिया गया तो किसी ने बताया है कि कैसे उनके पिता को कंटीली तार से बाँधकर लटका दिया गया। कुछ महिलाएँ भी सामने आई हैं जिन्होंने पंडित महिलाओं के साथ हुई अश्लीलता पर खुलकर बताया है। आइए उन नई-पुरानी मिलाकर कुल 25 घटनाओं के बारे में एक बार फिर जाएँ

आज हम आपको उन्हीं में नृशंस कहानियों में 25 घटनाएँ संक्षेप में बताने जा रहे हैं जहाँ 75 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गवाई। ये कट्टरपंथी घटनाएँ 32 साल पहले घाटी में घटना शुरू हुईं थीं और 700 से ज्यादा पंडित अब तक शिकार हो चुके हैं।

पहली कहानी टीका लाल टपलू की है। टीका लाल टपलू घाटी में कश्मीरी पंडितों के सबसे चहेते नेता थे। आतंकियों ने उन्हें उस समय मौत के घाट उतारा था जब वह एक बच्ची को चुप कराने घर से निकले। 14 सितंबर 1989 को टीका लाल टपलू को आतंकियों ने घर के बाहर गोलियों से भूना था। इस हमले में उनका परिवार बच गया था क्योंकि घटना से 1 हफ्ता पहले दिल्ली आ गया था।

दूसरी कहानी नीलकंठ गंजू की है। 4 नवंबर 1989 को जस्टिस नीलकंठ गंजू को दिनदहाड़े हाईकोर्ट के सामने मारा गया था। उनका गुनाह इतना था कि उन्होंने आतंकी मकबूल भट्ट को एक हत्या के बदले सजा ए मौत दी थी। इसी का बदला लेने के लिए जस्टिस नीलकंठ को मौत के घाट उतारा गया।

गिरिजा टिकू वो अगला नाम हैं जिन्हें आतंकियों ने अपना निशाना बनाया था। वह एक स्कूल में नौकरी करती थीं और डर से जम्मू रहती थीं। एक दिन उन्हें पता चला कि स्थिति सामान्य हो गई है तो वह वापस अपनी सैलरी लेने बांदीपोरा गईं। लेकिन आतंकियों ने वहाँ उन्हें पकड़ा। उनका रेप किया और फिर उन्हें जिंदा ही उनके शरीर को आरी से दो हिस्सों में चीर दिया।

22 मार्च 1990 को अनंतनाग जिले के दुकानदार पी एन कौल के साथ ऐसी ही बर्बरता को अंजाम दिया गया। बताया जाता है कि पीएन कौल की चमड़ी जीवित अवस्था में शरीर से उतार दी गई थी और उन्हें मरने को छोड़ दिया गया था। तीन दिन जाकर उनकी लाश मिली थी।

7 मई 1990 को प्रोफेसर एल गंजू को पत्नी समेत आतंकियों ने मौत के घाट उतारा। मगर उससे पहले उनकी पत्नी से सामूहिक बलात्कार भी किया। 

बीके गंजू जो कि एक टेलीकॉम इंजीनियर थे और आतंकियों से बचने के लिए चावल के डिब्बे में घुसे थे। आतंकियों ने उन्हें पूरे घर में ढूँढा लेकिन वो कहीं नहीं मिले। बाद में जब आतंकी जाने लगे तभी बीच में कुछ पड़ोसियों ने चावल के डिब्बे की ओर इशारा कर दिया और आतंकियों ने उसी डिब्बे में उन्हें गोलियों से भून डाला। बाद में उनके खून से सना चावल उनकी पत्नी को खिलाया गया जिसका दृश्य कश्मीर फाइल्स में दिखाया गया है।

अगली कहानी कृष्ण राजदान की है। कृष्ण को 12 फरवरी 1990 को बस में जाते हुए गोली मारी गई थी। इसके बाद उनका शरीर बस से निकाल कर बाहर किया गया था और लोगों से कहा गया था कि उन्हें लातों से मारें। पूरे शरीर को घसीट कर दिखाया गया था कि वे हिंदुओं का क्या हाल करने वाले हैं। 

24 फरवरी को अशोक कुमार के घुटनों में गोली मारी गई। फिर उनके बाल उखाड़े गए, उन पर थूका गया और फिर पेशाब किया गया। 

नवीन सप्रू को भी घाटी में इसी तरह मारा गया और उनके तो मुख्य अंग में गोली मारकर उनके शरीर को जलाया गया था।

30 अप्रैल को कश्मीरी कवि सर्वानंद कौल को उनके बेटे वीरेंद्र कौल के साथ भी निर्ममता की हर हद पार कर दी गई। पहले विश्वास दिलाकर कट्टरपंथी उन्हें और उनके बेटे को अपने साथ ले गए। फिर दो दिन बाद जाकर उनकी लाश मिली। माथे पर की चमड़ी उधेड़ दी जा चुकी थी। सिगरेट से शरीर जला दिया गया था। हड्डियाँ टूटी हुई थी। आँखें निकाल ली गई थीं। इसके बाद उन्हें मारने के लिए गोली भी दागी गई थी।

उन्हीं की तरह अशोक सूरी के भाई को भी पहले आतंकियों ने सिगरेट जलाकर खूब टॉर्चर किया था और बाद में कहा कि वो तो अशोक सूरी को मारना चाहते हैं जब भाई ने अधमरी अवस्था में अपने भाई को कश्मीर छोड़ने को कहा तो उन्होंने बात नहीं मानी। नतीजन आधीर रात आतंकी घर आए और धारधार हथियार से उनकी गर्दन काटकर चले गए।

26 जून 1990 को बीएल राना उस समय मौत के घाट उतारे गए जब वो अपने परिवार को लेने जा रहे थे। उनसे पहले 3 जून को आतंकियों ने उनके पिता दामोदर को मार डाला था।

मुजू और दो अन्य कश्मीरी पंडितों के साथ तो ऐसी निर्ममता हुई कि उन्हें पहले खून देने के बहाने उठाया गया और फिर उनके शरीर का सारा खून निकालकर उन्हें तड़प कर मरने को छोड़ दिया गया।

सोपोर के चुन्नी लाल शल्ला का भी खून बहाकर उन्हें मारा गया था। आतंकी पहले उनकी दाढ़ी देख उन्हें पहचान न सके। लेकिन तभी इंस्पेक्टर शल्ला के एक साथी सिपाही ने ही आतंकियों को बुलाया और उनके गाल की चमड़ी उतरवा उतरवा कर उन्हें तड़प कर मरने को छोड़ दिया।

28 अप्रैल 1990 को भूषण लाल रैना मारे गए। भूषण लाल अपनी माँ के साथ घाटी छोड़ने वाले थे। देर रात दोनों सामान बांध रहे थे कि तभी आतंकी आए और उनके सिर में नुकीली चीज घुसाकर उन्हें घर से बाहर खींच लिया। बाद में उन्हें नंगा करके शरीर में कील ठोंकी और जब तक दम नहीं थोड़ा तब तक तड़पाते रहे।

इसके बाद 1998 को 23 कश्मीरी हिंदू मारे गए। वो उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो घाटी में हिंदुओं की वापसी की संभावना देखने वहाँ गए थे। इन सबकों एक आदेश पर रायफलों से मौत के घाट उतारा गया फिर इनके मंदिर तोड़े गए, घर में आग लगा दी गई।

कश्मीरी पंडितों को मारने के क्रम में एक अमित नाम का नौजवान भी मारा गया था। उन्हें मारने का आतंकियों का प्लॉन नहीं था। उन्हें तो एक ऐसे शख्स को मारना था जो आतंकी बिट्टा कराटे को बचपन में पढ़ाई के पैसे देता। उन्हीं के धोखे में 26 साल का नौजवान बीच सड़क पर मार डाला गया था।

इसी प्रकार कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्म की एक कहानी कश्मीरी महिला ने हाल में ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’  में शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उनके घर के सामने भैरव मंदिर ध्वस्त कर दिया गया था और एक युवा बैंक कर्मचारी को सैंकड़ों लोगों के सामने मार दिया गया था। भीड़ ने अंतिम सांस लेने तक उस शरीर को मारा था और उस पर पेशाब भी किया था।

इसी प्रकार पीड़िता मंजू को जहाँ कट्टरपंथियों ने दीवार से सटाकर पूरे शरीर पर हाथ फेरा था। वहीं मधुसूदन कौल थीं जिनकी एक हाथ की उंगली ही आतंकियों  की गोली से चली गई थी।

एक पीड़ित ने बताया था कि कैसे उनके पिता को मारकर उनके शरीर को ईंट के साथ बाँधकर नदी में फेंक दिया गया था।

अनुराधा नाम की महिला ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा था कि कभी किसी ने अपने पिता को नंगा नहीं देखा होगा लेकिन उन्होंने देखा था। उनके पिता के शरीर में इतनी गोलियाँ दागीं गई थीं कि शरीर ढंग से पोस्टमार्टम के बाद सिला भी नहीं गया।

इसी तरह रवींद्र पंडित ने हाल में बताया कि कैसे उनके पिता सरकारी नौकरी के कारण कश्मीर रहते थे और आतंकियों ने उन्हें उनके ही बाग में लेजाकर मारा था। पाकिस्तान जिंदाबाद न कहने पर उनके शरीर में कील ठोंकी गई थीं उन्हें कंटीली तार से फंदा बनाकर लटकाया था।

द कश्मीर फाइल्स फिल्म बनने के क्रम में जो रिसर्च हुई उस बीच एक महिला ने पल्लवी जोशी बताया था कि कैसे उनके पिता को मार कर 15 टुकड़ों में काटा गया और फिर झेलम नदी में बहा दिया गया।

अगली कहानी सतीश कुमार टिकू की है। टिकू को भी कश्मीरी पंडित होने के कारण मारा गया था। बिट्टा कराटे ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो सतीश पंडित था और आरएसएस से जुड़ा था इसलिए उसे मारा था। कराटे वही आतंकी है जिसने 20 कश्मीरी हिंदुओं को मौत के घाट उतारा था।

साल 2003 में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र के नदीमार्ग गाँव में 24 कश्मीरी पंडितों को  लाइन से मौत के घाट उतारा गया था। ये वो लोग थे जिन्होंने 90 के दशक में अपना घर छोड़ने से मना कर दिया था। मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला और 2 साल का मासूम बच्चा भी था।

कश्मीर में अब नहीं खत्म है पूरी तरह कट्टरपंथ

गौरतलब है कि 90 के दशक से कश्मीरी पंडितों पर शुरू हुआ अत्याचार आज तक थमा नहीं है। कुछ समय पहले कश्मीर के एक स्कून में चुन चुनकर गैर मुस्लिम शिक्षक मौत के घाट उतारे गए थे। वहीं माखनलाल बिंदरू की भी गोली मार कर पिछले साल हत्या की गई थी। उससे पहले अनंतनाग में जिले के सरपंच अजय पंडिता को मौत के घाट उतारा गया था। कश्मीरी पंडित महिला ने रोते हुए सच ही कहा था कि अगर फिल्म बनाने लगे तो 7 लाख से ज्यादा फिल्म बन जाएँगी। कश्मीर में रहने वाले हर हिंदू के अपने अपने संघर्ष है। उन्होंने कितनी निर्ममता से अपनों को खोया उसकी कहानी है और कैसे घर, काम, जमीन, जायदाद छोड़ना पड़ा उसका दर्द है।

आज भले ही घाटी से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया है लेकिन सच ये है कि अभी भी कट्टरपंथियों ने कश्मीर का दर नहीं छोड़ा है। हाल में राजौरी के मौलवी ने एक मौलवी ने खुदा कसम खाकर हिंदुओं को मिटाने की बात कही थी और बाद में जब वीडियो वायरल हुई तो बयान जारी कर दिया कि कश्मीरी पंडित भाई है उनके।

‘Hero’ ने की ₹1000 करोड़ की गड़बड़ी, चेयरमैन ने कालाधन से खरीदा ₹100 Cr का फार्महाउस: 40 ठिकानों पर IT रेड से खुलासा

दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में बड़ी कंपनी ‘हीरो मोटोकॉर्प’ ने 1000 करोड़ रुपए के फर्जी खर्च (Bogus Expenses) पकड़े गए हैं। आयकर विभाग की छापेमारी (IT Raid) के बाद ये खुलासा हुआ है। इसके अलावा IT विभाग ने 100 करोड़ रुपए की अतिरिक्त गड़बड़ियाँ भी पकड़ी हैं। इनमें दिल्ली स्थित एक फार्महाउस के लिए किए गए ट्रांजैक्शन भी शामिल हैं। बुधवार (23 मार्च, 2022) को आईटी विभाग ने इस सम्बन्ध में कई ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया था।

दिल्ली-NCR में ‘हीरो मोटोकॉर्प’ और इसके मैनेजिंग डायरेक्टर पवन मुंजाल सहित कई अन्य बड़े अधिकारियों के ठिकानों पर इस बाबत रेड पड़ी थी। आईटी विभाग को इस दौरान हार्ड कॉपी और डिजिटल डेटा के रूप में कई दस्तावेजी सबूत भी मिले हैं, जो बताते हैं कि कंपनी ने न सिर्फ जाली खरीददारियाँ दिखाई, बल्कि बड़ी मात्रा में जाली कैश खर्च भी किए। कुल मिला कर उसने 1000 करोड़ रुपए का ‘अकोमोडेशन एंट्री’ बना लिया। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में भी 7% की गिरावट देखी गई।

साथ ही दिल्ली के आउटस्कर्ट्स में 100 करोड़ रुपए की लागत से एक फार्महाउस खरीदने का मामला भी सामने आया है। पवन मुंजाल ने छतरपुर में इस फार्महाउस को मार्किट भाव को तोड़-मरोड़ कर खरीदा, ताकि टैक्स बचाए जा सकें। साथ ही आईटी एक्ट की धारा-269 SS का उल्लंघन करते हुए 100 करोड़ रुपए कैश में दिए गए। इसमें कालाधन का उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है। 40 ठिकानों पर छापेमारी के बाद कंपनी ने इस मामले में बयान भी जारी किया है।

‘हीरो मोटोकॉर्प’ ने कहा, “आयकर विभाग के अधिकारियों ने दिल्ली और गुरुग्राम में स्थित हमारे दो दफ्तरों का दौरा किया। साथ ही वो हमारे चेयरमैन डॉक्टर पवन मुंजाल के आवास पर भी गए थे। हमें बताया गया है कि ये एक रूटीन जाँच है, जो वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए असामान्य नहीं है। हम अपने सभी हितधारकों को कहना चाहते हैं कि सभी चीजें पहले की तरह चलती रहेंगी। हम एक नैतिक और कानून का पालन करने वाले कॉर्पोरेट हैं। हम जाँच एजेंसी का पूर्ण सहयोग कर रहे हैं।”

65 साल का गुरुद्वारे का ग्रंथी, 3 महीने से 15 साल की बच्ची का कर रहा था रेप: पंजाब की घटना, गर्भवती न हो इसलिए पीड़िता को खिलाता था दवा

पंजाब में 65 साल के एक ग्रंथी को गिरफ्तार किया गया है। वह लुधियाना में मच्छीवाड़ा के नूरपुर गाँव के एक गुरुद्वारे में ग्रंथी है। उस पर 15 साल की एक मंदबुद्धि बच्ची से रेप का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपित तीन महीने से बच्ची का बलात्कार कर रहा था और वह गर्भवती न हो इसके लिए उसे गर्भनिरोधक गोली भी खिला रहा था। आरोपित का नाम सोहन सिंह उर्फ ​​सोहनी है। पीड़िता की बुआ ने उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद माछीवाड़ा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता की बुआ ने 26 मार्च को युवती को कुछ गोलियाँ लेते देखा। जब उसने पूछताछ की तो लड़की ने कहा कि स्थानीय गुरुद्वारे के ग्रंथी ने उसे यह कहकर गोलियाँ दी कि इससे उसके ‘स्वास्थ्य में सुधार’ होगा। बच्ची ने यह भी कहा कि उसने उसके लिए एक फोन भी खरीदा था। लड़की ने आगे यह भी बताया कि आरोपित उसके साथ बलात्कार करने से पहले दवा लेता था। शुरुआती जाँच में पाया गया कि आरोपित तीन महीने से पीड़िता के साथ बलात्कार करता रहा था और उसे गोली देकर आश्वस्त किया था कि अगर उसने इसे खा लिया तो वह ठीक हो जाएगी। पूछताछ में पता चला कि आरोपित ने गर्भवती न होने के लिए उसे गर्भनिरोधक गोली दी थी। मच्छीवाड़ा के एसएचओ इंस्पेक्टर प्रकाश मसीह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने फौरन FIR दर्ज कर आरोपित को हिरासत में ले लिया। उन्होंने यह भी कहा कि सोहन सिंह को जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के ग्रेटर सिडनी स्थित गुरुद्वारे के पूर्व ग्रंथी पर दो नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण का आरोप लगा था। 26 वर्षीय राजिंदर सिंह पर आरोप था कि उसने न सिर्फ 11 साल की लड़की को गलत तरीके से छुआ, बल्कि दो अन्य नाबालिग लड़कियों के सामने यौन हरकतें (सेक्स एक्ट) की। 

बताया गया कि राजिंदर सिंह ने अपने होठों की तरफ इशारा करते हुए ‘किस-किस’ कहा। उसने कई बार ऐसा किया। साथ ही वो पेट और जाँघों के बीच स्थित अपने प्राइवेट पार्ट्स को बार-बार रगड़ रहा था। जहाँ लड़कियाँ बैठी हुई थीं, वहाँ उसने अपने पाँव भी रख दिए थे। पुलिस थाने में पूछताछ के दौरान उसने ये जुर्म कबूल कर लिया था।

हाई कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में केरल की वामपंथी सरकार, भारत बंद में शामिल होने वाले कर्मचारियों को चेताया

केरल हाई कोर्ट की फटकार के बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली राज्य की वामपंथी सरकार ने दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी भारत बंद पर आदेश जारी किया है। सोमवार (28 मार्च 2022) को जारी आदेश में भारत बंद के तहत हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों को अनुशासनात्मक कार्यवाही की चेतावनी दी गई है। केरल सरकार ने आदेश में कहा है कि हड़ताल के बीच अगर कोई भी कर्मचारी बिना वैध कारण बताए अनुपस्थित पाया गया, तो उसे ‘डाई नॉन पीरियड’ (Dies Non Period) माना जाएगा।

ट्रेड संघों ने श्रम कानूनों में बदलाव और निजीकरण के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में 28 और 29 मार्च को भारत बंद का आह्वान कर रखा है। ट्रेड यूनियनों के हड़ताल का प्रभाव सबसे अधिक प्रभाव केरल, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में देखने को मिला। यहाँ प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। केरल हाई कोर्ट (Kerala HC) ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश जारी किया कि वे कर्मचारियों को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी भारत बंद में भाग लेने से मना करें। इसके साथ ही कोर्ट ने भारत बंद को अवैध करार दिया है।

क्या होता है डाई नॉन-पीरियड

डाई नॉन-पीरियड अर्थात् अकार्य दिवस। इसके तहत लम्बे समय तक बिना किसी वैध कारण के अनुपस्थित रहने वाले सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है। अकारण अनुपस्थित रहने वाले ऐसे सरकारी कर्मचारियों को पेंशन लाभ या वेतन वृद्धि के योग्य भी नहीं माना जाता है।

तिरुवनंतपुरम के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी चंद्र चूदान नायर द्वारा दायर जनहित याचिका पर सोमवार (28 मार्च) को कोर्ट सुनवाई कर रही थी। उस दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से दो दिवसीय हड़ताल को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया था। मुख्य सचिव वीपी जॉय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिस दिन हड़ताल हो रही है, उसके कर्मचारियों का वेतन अगले महीने (अप्रैल) के वेतन से काट लिया जाएगा। इसमें कहा गया है कि हड़ताल के दिनों में हिंसा में शामिल लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा।

चीफ जस्टिस एस. मणिकुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 के तहत ट्रेड यूनियन की गतिविधियों के द्वारा शासन को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह जन कल्याणकारी सरकार का फर्ज है कि वह न केवल नागरिकों की रक्षा करे, बल्कि सभी सरकारी कामकाज भी पहले की तरह जारी रहना सुनिश्चित करे। दूसरे शब्दों में सरकारी कामकाज किसी भी तरह से सुस्त या प्रभावित नहीं हो सकते हैं।” कोर्ट ने केआरसीटीसी के प्रबंध निदेशक और जिला कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया कि सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी पर जाने की अनुमति देने के लिए पर्याप्त वाहनों का इंतजाम किया जाए, ताकि सरकारी कर्मचारी Conduct Rules, 1960 के नियम 86 का उल्लंघन नहीं कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को वाहनों के संचालन के लिए उचित आदेश जारी करना चाहिए, ताकि सरकारी कर्मचारी ड्यूटी पर आ सकें।

बता दें कि अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कॉन्ग्रेस (AITUC) की अगुवाई में यह देशव्यापी हड़ताल (28-29 मार्च) की जा रही है। श्रमिक संगठन सोमवार को केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में सड़कों उतर आए। इस हड़ताल से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। राज्य में सड़क परिवहन (KSRTC) की बसें बिल्कुल बंद रहीं। वहीं सड़कों पर टैक्सी, ऑटो रिक्शा और निजी बसें भी नजर नहीं आईं और बैंक भी बंद रहे।

‘वोट डालने मत जाओ, तभी शांति से रह पाओगे’: TMC विधायक की उपचुनाव से पहले BJP समर्थकों को धमकी – यहाँ रहना है तो…

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता अब भी खुलेआम भाजपा समर्थकों को धमकी दे रहे हैं। आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के लिए राज्य में उपचुनाव होना है, जिसमें पार्टी ने ‘बिहारी बाबू’ नाम से मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। टीएमसी विधायक नरेन्द्रनाथ मिश्रा को भाजपा समर्थकों को धमकी देते हुए देखा गया। उन्होंने 2021 विधानसभा चुनाव में पश्चिम बर्धमान के पंडाबेश्वर से जीत दर्ज की थी।

भाजपा समर्थकों को धमकी देते हुए उनके भाषण का वीडियो भी वायरल हुआ है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर उनका ये बयान शेयर करते हुए निशाना साधा है। नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती इस वीडियो में कहते दिख रहे हैं, “कट्टर भाजपा समर्थक, जिन्हें प्रभावित नहीं किया जा सकता – उन्हें धमकाया जाना चाहिए। उन्हें बता दीजिए कि अगर उन्होंने अपना वोट डाला, तो हम यही समझेंगे कि उन्होंने भाजपा को ही वोट दिया है।”

उन्होंने आगे धमकाया, “जब चुनाव ख़त्म हो जाएगा, उसके बाद भाजपा समर्थक अपने रिस्क पर राज्य में रहेंगे। हाँ, अगर उन्होंने वोट ही नहीं डाला तो हम समझेंगे कि उन्होंने हमारा समर्थन किया है। तभी वो पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्वक रह पाएँगे। तब आप लोग अपने कारोबार और नौकरियाँ यहाँ रह के कर सकते हैं। स्पष्ट है?” शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि कैसे नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती का विधानसभा क्षेत्र आसनसोल लोकसभा में ही आता है, जहाँ दो हफ़्तों में चुनाव होने हैं।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती पहले पंडाबेश्वर के TMC ब्लॉक अध्यक्ष हुआ करते थे, ठीक वैसे ही जैसे बीरभूम हिंसा के आरोप में वहाँ के ब्लॉक अध्यक्ष अनुरूल हक़ को गिरफ्तार किया गया है। नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती बर्दवान जिला परिषद के सदस्य भी रहे हैं। 2016 में CISF ने उन्हें पिस्तौल रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कोलकाता के नेताजी सुभाष अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वो गिरफ्तार हुए थे। आर्म्स एक्ट में उन पर कार्रवाई हुई थी। भाजपा ने चुनाव आयोग से उनके भाषण को लेकर संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

हनुमान जी ‘दंगाई’, स्वस्तिक को झाड़ू, छठ-दीवाली पर लिबरल राग: केजरीवाल की हिंदूफोबिया पुरानी, कश्मीरी पंडित नए शिकार

जहाँ एक तरफ पूरे देश की जनता कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के सच्चे इतिहास पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को देख कर बर्बर इस्लामी इतिहास से परिचित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने इसे एक ‘झूठी पिक्चर’ बताते हुए दिल्ली में फिल्म को टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया ये दिल्ली के मुख्यमंत्री के हिन्दू विरोधी रवैया को दिखाता है। जिस तरह वो और उनकी पार्टी के नेता हिन्दुओं के नरसंहार पर ठहाके लगाते हुए देखे गए, वो उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।

अरविंद केजरीवाल ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर लगाव ठहाके

अरविंद केजरीवाल ने इस भाषण में कहा था, “निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इतना ही शौक है तो बोलो यूट्यूब पर डाल देगा, वहाँ सब कुछ फ्री है और सारे लोग देख लेंगे एक ही दिन के अंदर। टैक्स फ्री कराने की ज़रूरत ही क्या है?” AAP विधायकों ने अपनी पार्टी के सुप्रीमो के इस बयान का स्वागत करते हुए विधानसभा में मेज थपथपाए। केजरीवाल सहित AAP विधायक ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर ठहाके लगाते हुए देखे गए।

हालाँकि, उनका ये हिन्दू विरोधी या देश विरोधी रवैया नया नहीं है। अब तो उनके इस बयान के सामने आने के बाद कश्मीरी शरणार्थियों ने भी उनकी पोल खोल दी है। उन्होंने 233 कश्मीरी पंडितों को नौकरी देने का दावा किया था। लेकिन, ‘गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (माइग्रेंट)’ ने बताया है कि कैसे इन शिक्षकों के खिलाफ उन्होंने दिल्ली उच्च-न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। प्रवासी शिक्षक संघ ने उनके बयान को झूठा बताया। इससे साफ़ है कि वो इससे पहले भी कश्मीरी पंडितों के खिलाफ ही रहे हैं।

भारतीय सेना से माँग चुके हैं सबूत, देश के जवानों की करते रहे हैं बेइज्जती

अरविंद केजरीवाल के राष्ट्र विरोधी रवैये की भी बात कर लेते हैं अब जरा। क्या आपको ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ याद है? उस समय भारत की सेना ने ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK)’ में घुस कर आतंकियों के ठिकाने तबाह किए थे और कई दहशतगर्दों को मौत के घाट उतार दिया था। उरी हमले के बाद हुई इस कार्रवाई के बाद देश जहाँ अपने जवानों की पीठ थपथपा रहा था, अरविंद केजरीवाल भारतीय सेना से सबूत माँग रहे थे।

याद कीजिए कि अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से सितंबर 2016 में हुए सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो को जारी करने की माँग की थी और कहा था कि विदेशी मीडिया पाकिस्तान के दावे को सही ठहरा रही है। उन्होंने ये तक दावा कर दिया था कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जगह भारत ही अलग-थलग पड़ रहा है। अपने वीडियो संदेश में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था, “ऐसी खबरों को देखकर मेरा खून खौल रहा है।”

इतना ही नहीं, अरविंद केजरीवाल ने फरवरी 2016 में हुए बालाकोट एयर स्ट्राइक को लेकर भी राजनीति की थी। पुलवामा हमले के बाद हुई भारतीय वायुसेना की इस कार्रवाई को लेकर उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर झूठ बोलने का आरोप लगा दिया था। जब अमित शाह ने उस कार्रवाई में 250 आतंकियों के मारे जाने की बात कही, तब केजरीवाल ने उन पर झूठ बोलने का आरोप लगा दिया। उलटा उन्होंने भाजपा पर ही सेना को झूठा बोलने के आरोप लगा दिए थे।

उन्होंने मोदी सरकार पर पाकिस्तान समर्थित होने का आरोप लगा दिया था। ये भी याद कीजिए कि 2021 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में जब लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के जवानों के लिए, खिलाड़ियों के लिए, सुरक्षाकर्मियों के लिए ताली बजवा रहे थे, उस समय वहाँ बैठे सब लोग तालियाँ बजाकर सम्मान दे रहे थे, लेकिन केजरीवाल को हाथ बाँधे देखा गया था। ऐसी हरकतों पर भला लोग उन्हें क्यों न देश विरोधी कहें?

हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों का भी अपमान कर चुके हैं दिल्ली के CM

अब अरविंद केजरीवाल के हिन्दू विरोध का आलम देखिए कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हनुमान मंदिर में दर्शन करने और हनुमान चालीसा पढ़ने वाले अरविंद केजरीवाल कभी भगवान हनुमान का भी अपमान कर चुके हैं। उन्होंने साथ-साथ स्वस्तिक का भी अपमान किया था। उन्होंने एक ट्वीट किया था, जिसमें एक प्रतीकात्मक चित्र में झाड़ू लिया हुआ व्यक्ति ‘स्वस्तिक’ चिह्न को खदेड़ कर भगा रहा है। हिन्दू संस्कृति में मांगलिक कार्यों में प्रयोग होने वाले स्वस्तिक का इस तरह से अपमान कर के वो किस तरह की राजनीति करना चाहते थे?

इसी तरह उन्होंने हनुमान जी का अपमान करते हुए उन्हें ‘दंगाई’ के रूप में चित्रित किया था। उन्होंने रामायण में वर्णित लंका दहन की दर्ज पर एक कार्टून शेयर किया था, जिसमें पूँछ वाला एक व्यक्ति आग लगा कर आ रहा है और पीएम मोदी से कह रहा है कि काम हो गया, अब सबका ध्यान JNU पर ही हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने ‘Make In India’ का भी मजाक बनाया था, जिसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था।

इसी तरह राजनीति के लिए अयोध्या का दौरा करने वाले अरविंद केजरीवाल ने अपनी नानी की बात करते हुए कभी राम मंदिर का भी अपमान किया था। अरविंद केजरीवाल ने एक रैली में कहा था, “जब बाबरी मंदिर का ध्वंस हुआ तब मैंने अपनी नानी से पूछा कि नानी आप तो अब बहुत खुश होंगी? अब तो आपके भगवान राम का मंदिर बनेगा। नानी ने जवाब दिया – ना बेटा, मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़ कर ऐसे मंदिर में नहीं बस सकता।”

हिन्दू धर्म-ग्रंथों को लेकर झूठ, हिन्दू प्रव-त्योहारों से भी AAP को दिक्कत

अरविंद केजरीवाल सिर्फ हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों तक ही सीमित नहीं रहे, उन्होंने हमारे धर्म-ग्रंथों को लेकर भी झूठी बातें की हैं। उन्होंने कहा था, “गीता में लिखा है कि एक सच्चा हिन्दू बहादुर होता है वो कभी मैदान छोड़कर भागता नहीं। मैंने अमित शाह को खुली बहस की चुनौती दी लेकिन वो मैदान छोड़कर भाग गए।” जबकि भगवद्गीता में ऐसा कोई श्लोक है ही नहीं। वहीं उसी दौरान असम में पीएम मोदी ने गीता के सही श्लोक का जिक्र कर के लोगों को अपने धर्म-ग्रंथों की बातों से परिचित कराया था।

दीवाली में पटाखे को प्रतिबंधित करना हो या लोक आस्था के महापर्व छठ पर बैन लगाना हो, अरविंद केजरीवाल इन सब में आगे रह कर हिन्दुओं को अपमानित करते रहे हैं। यमुना नदी की सफाई के नाम पर 2000 करोड़ रुपए कहाँ गए, ये आज तक किसी को पता नहीं चला। नवंबर 2021 में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने श्रद्धालुओं को यमुना नदी के घाट पर छठ पूजा करने से मना कर दिया और घाट पर बैरिकेडिंग कर दी गई

भाजपा और उत्तर भारतीयों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने के बाद अंततः उन्होंने आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर के छठ मनाने की अनुमति दी। 2020 में भी उन्होंने दिल्ली में दीवाली पर पटाखों को प्रतिबंधित किया था। दीवाली 2021 में भी उन्होंने कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भी प्रदूषण की खतरनाक स्थिति देखते हुए प्रतिबंध लागू किया जा रहा है। कई छोटे पटाखा दुकानदारों को इसके नाम पर प्रताड़ित किया गया। दीवाली के दिन कई हिन्दू गिरफ्तार हुए। इस तरह केजरीवाल का हिन्दू विरोधी और देश विरोधी रवैया पुराना है।

इस्लाम कबूलने का दबाव, नवरात्र में मॉंस खाने को किया मजबूर: अब तीन तलाक दे हिंदू बीवी से हलाला कराने को कह रहा फारुख

मध्य प्रदेश में एक हिंदू महिला ने पति फारुख पर तीन तलाक देकर हलाला कराने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। महिला का यह भी कहना है कि शादी के बाद उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया गया। नवरात्र के दौरान माँस खाने को मजबूर किया गया। फारुख से महिला की शादी करीब 8 साल पहले हुई थी। मामला नरसिंहपुर जिले के करेली का है। मामला दर्ज कर पुलिस जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित महिला ने 2014 में फारुख से शादी की थी। यह लव मैरिज थी। महिला के अनुसार शादी से पहले फारुख ने कहा था कि वह उसे अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं करेगा। लेकिन शादी के तुरंत बाद पति और ससुराल वाले उस पर धर्मांतरण का दबाव डालने लगे।

पीड़िता का आरोप है कि दहेज को लेकर भी उसे प्रताड़ित किया जाता था। उसने अपनी बेटियों की खातिर यह सब सहन किया। 24 मार्च 2022 को फारुख ने तीन बार तलाक, तलाक, तलाक बोलकर उसे बेघर कर दिया। अब उस पर हलाला का दबाव बनाया जा रहा है। महिला के अनुसार उससे कहा गया कि अगर वह फिर से साथ रहना चाहती है तो उसे हलाला कराना होगा।

उल्लेखनीय है कि ‘निकाह हलाला’ एक ऐसी प्रथा जिसमें अगर मुस्लिम पति अपनी पत्नी को तलाक देता है तो उसे अपनी पत्नी से दोबारा शादी करने के लिए या अगर पत्नी अपने पति से  दोबारा शादी करना चाहती है तो औरत को ‘हलाला’ करना होगा। ‘हलाला’ के लिए पत्नी को पहले किसी दूसरे मर्द से शादी करनी होगी और उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाने होंगे। उसके बाद जब दूसरा व्यक्ति उस महिला को तलाक दे देगा तो वह अपने पहले पति से निकाह कर सकती है। ‘हलाला’ के बाद ही उसके पहले पति से उसका दोबारा निकाह मुकम्मल माना जाएगा। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लड़की को जबरदस्ती नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया गया। मना करने पर पति और ससुराल वालों ने मारपीट की। पीड़िता ने कहा, “उन्होंने मुझे जबरन माँस भी खिलाया। मेरा पति मुझे शराब के नशे में नियमित रूप से मारता-पीटता था। मेरे पति ने भी कहा कि दोनों बच्चे भी उसके नहीं हैं। मुझे कोई पूजा करने की अनुमति नहीं देते थे। जब मैंने नवरात्रि का व्रत रखने की कोशिश की, तो वे घर में माँस और शराब लाते थे। मुझे भी नवरात्रि में माँस खाने को कहा गया। वह मुझे हमेशा तीन तलाक देने की धमकी देता था। फारुख की माँ कहती थी कि हम उसकी शादी दस महिलाओं से करा देंगे।”

करेली थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने बताया कि 26 वर्षीय महिला की शिकायत के आधार पर धार्मिक स्वतंत्रता कानून, तीन तलाक कानून, दहेज प्रताड़ना और अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने फारुख समेत उसके परिवार वालों को आरोपित बनाया है। उन्होंने एक आरोपित को गिरफ्तार भी कर लिया है, जबकि बाकी फरार बताए जा रहे हैं।

असम में मुस्लिम अब अल्पसंख्यक नहीं, कई जिलों में हिंदू 5000 से भी कम: CM सरमा ने बताई जमीनी हकीकत, कहा- इन जिलों में माइनॉरिटी घोषित हो हिंदू

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के जवाब के बाद हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने से जुड़ी चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है। इसी कड़ी में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्य में अब मुस्लिम अल्पसंख्यक दर्जे के अधिकारी नहीं हैं। कई जिले ऐसे हैं जहाँ हिंदुओं की जनसंख्या बेहद कम है। उनका कहना है कि ऐसे जिलों में हिंदुओं को माइनॉरिटी घोषित किया जाना चाहिए।

सरमा ने सोमवार (28 मार्च 2022) को कहा, “जब हिंदू राज्य में बहुसंख्यक नहीं हैं, तो आप उन्हें अल्पसंख्यक घोषित कर सकते हैं। मैं अपील करना चाहूँगा कि जिस जिले में हिंदू समुदाय बहुसंख्यक नहीं हैं, कम से कम उन जिले में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित किया जाए। असम में कई ऐसे जिले हैं, जहाँ हिंदू अल्पसंख्यक हैं। उनमें से कुछ में 5,000 से भी कम हिंदू रहते हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक हैं। असम में यह सबसे बड़ा समुदाय है। यह मेरी व्यक्तिगत राय नहीं है। आँकड़े बताते हैं कि मुस्लिम असम में सबसे बड़ा समुदाय हैं।”

इससे पहले विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान असम के मुख्यमंत्री ने कहा था, “आज मुस्लिम समुदाय के लोग विपक्ष में नेता हैं, विधायक हैं और उनके पास समान अवसर और शक्ति है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि आदिवासी लोगों के अधिकारों की रक्षा की जाए और उनकी भूमि पर कब्जा नहीं किया जाए।”

असम के मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की समीक्षा करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है, “हमने पहले भी कहा था कि पुराने एनआरसी की समीक्षा की जानी चाहिए और नए सिरे से इसे किया जाना चाहिए। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के साथ हमारी चर्चा चल रही है। हम चाहते हैं कि राज्य में फिर से एनआरसी हो।”  मालूम हो कि NRC की अपडेटेड लिस्ट अगस्त 2019 में प्रकाशित हुई थी और 3.3 करोड़ आवेदकों में से 19.06 लाख से अधिक लोगों को इससे बाहर कर दिया गया था।

बता दें कि सोमवार को (28 मार्च 2022) केंद्र की मोदी सरकार ने भी कुछ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यकों का दर्जा देने की माँग करने वाली याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कोर्ट को बताया था कि राज्य अपने हिसाब से हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकते हैं। केंद्र ने यह भी कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर ईसाई, सिख, मुस्लिम, बौद्ध पारसी और जैन को माइनॉरिटी का तमगा मिला है, वैसे ही राज्य भाषायी या फिर संख्या के आधार पर हिंदुओं को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

20 साल की युवती से सेक्स करना चाहता था MBA का छात्र, नहीं मानी तो हस्तमैथुन करते खुद का Video भेजा: नोएडा पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने सोमवार (28 मार्च 2022) को 26 साल के एक MBA छात्र को गिरफ्तार किया। उस पर 20 साल की एक लड़की को अपने हस्तमैथुन (Masturbation) का वीडियो व्हाट्सएप पर भेजने का आरोप है। घटना 21 मार्च की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित और युवती करीब दो साल से एक दूसरे को जानते हैं। युवती ने हाल ही में आरोपित से बात करना बंद दिया था, क्योंकि उसे उसका व्यवहार पसंद नहीं था। इसके बाद 19 मार्च को आरोपित ने उसे कथित तौर जिम साथ चलने और एक मौका देने को कहा।

फेज-3 पुलिस स्टेशन के इंचार्ज विवेक त्रिवेदी के अनुसार उन्हें आरोपित युवक के खिलाफ रविवार (27 मार्च 2022) को शिकायत मिली थी। इसमें पीड़िता ने बताया था कि हाल ही में जब दोनों की बातचीत फिर से शुरू हुई तो युवक ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जताई। लेकिन युवती ने इनकार कर दिया। इसके बाद 21 मार्च को रात के करीब 2.40 बजे आरोपित ने व्हाट्सएप के गायब होने वाले मैसेज फीचर का इस्तेमाल करते हुए उसे अश्लील वीडियो भेजा। पीड़िता ने शिकायत में कहा, “जब मैंने मैसेज खोला, तो यह उसका हस्तमैथुन करते हुए एक वीडियो था।”

शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 और 509 के तहत FIR दर्ज की। SHO ने बताया, “आरोपित को पकड़ने के लिए एक टीम का गठन किया गया था। उसे सोमवार सुबह सेक्टर 61 में गढ़ी चौराहे से गिरफ्तार किया गया था। उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपित एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में MBA का छात्र है।”

इससे पहले कर्नाटक के बेंगलुरु से इसी तरह का मामला सामने आया था। महिला पत्रकार ने OLA कैब ड्राइवर पर अश्लील हरकत करने का आरोप लगाया था। महिला पत्रकार के मुताबिक कैब के ड्राइवर ने उनके आगे ही हस्तमैथुन करना शुरू कर दिया था।

‘बुमराह-वुमराह’ खुलासे के बाद पार्थिव पटेल को गाली दे रहे विराट कोहली के फैन्स

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली के साथ पूर्व क्रिकेटर पार्थिव पटेल की 8 साल पुरानी बातचीत के ऊपर कोहली के चाहने वालों ने पटेल पर निशाना साधा। इस बातचीत का खुलासा पटेल ने क्रिकबज के सामने किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे कोहली, जसप्रीत बुमराह को एक अच्छा गेंदबाज नहीं मानते थे।

पार्थिव ने बताया था उन्होंने 2014 में RCB की ओर से खेलते हुए कोहली को सलाह दी थी कि एक गेंदबाज है बुमराह… उसपर गौर किया जा सकता है। लेकिन कोहली ने कहा- “छोड़ न यार। ये बुमराह-वुमराह क्या करेंगे।” इस खुलासे को सुनने के बाद कोहली के फैन पार्थिव पटेल पर चढ़ गए और उनपर आरोप लगाया कि वो कोहली और बुमराह के बीच में झगड़ा लगाना चाहते हैं या शायद सिर्फ अटेंशन पाने के लिए वो ये सब कर रहे हैं।

एक यूजर ने उन्हें लिखा, “पार्थिव पटेल चू*&या है। मुझे नहीं मालूम ये कितना सच है कितना नहीं। लेकिन एक चीज जो आप लीक नहीं कर सकते वो ड्रेसिंग रूप के बीच बातचीत है। बुमराह उस समय इतने कामयाब नहीं थे। कोहली को मालूम था कि बुमराह कौन हैं क्योंकि उन्होंने कोहली की विकेट ली थी। इसलिए इस बयान का कोई मतलब नहीं! शर्म आनी चाहिए। अटेंशन के लिए कुछ भी।”

अन्य यूजर ने लिखा, “पार्थिव पटेल कितना घटिया आदमी है। अपने टीम सदस्य के साथ कभी हुई निजी बातचीत को साझा करना गलत है। भगवान ही जानता है कि ये सच बोल रहा है या नहीं। अगर हाँ! तो थोड़ा अटेंशन के लिए अपनी अस्मिता से खिलवाड़ ठीक नहीं हैं। क्या जलन है!”

कुछ कोहली फैन्स ने पटेल के कद का मजाक बनाया और उन्हें लिलिपुट कहा। साथ ही महेंद्र सिंह धोनी की सबसे बेहतरीन इनिंग को खराब करने का इल्जाम ठहराया।

आगे ट्विट्स में उन्हें यूजर्स ने उन्हें भ$% , गां%$ तक कहा। ऐसे में पार्थिव पटेल ने भी इन कमेंट्स पर रिप्लाई दिया और कहा- नीम पत्ता और सच दोनों कड़वा है।