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EVM पर बवाल में 300 पर FIR, वाराणसी में सपा कार्यकर्ताओं ने गाड़ी रोक किया था हंगामा: बोले मुख्य चुनाव आयुक्त- छेड़छाड़ का सवाल ही नहीं

वाराणसी में मतगणना की प्रैक्टिस के लिए भेजी जा रही EVM की गाड़ी रोक कर हंगामा करने वाले समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई शुरू हो गई है। इस मामले में अब तक कुल 300 आरोपितों पर केस दर्ज किया गया है। इन सभी पर पथराव और तोड़फोड़ का आरोप है। पथराव की चपेट में ADG वाराणसी की कार भी आ गई थी। घटना मंगलवार (8 मार्च 2022) की है।

लालपुर-पांडेयपुर पुलिस ने हत्या के प्रयास, लूट, बलवा, सरकारी काम में बाधा समेत 16 संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपितों की पहचान के लिए वीडियो और फोटो की जाँच की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हंगामा वाराणसी से पहाड़िया मंडी की राह में तब किया गया था, जब 2 वाहन EVM लेकर ट्रेनिंग के लिए निकले थे। उस गाड़ी को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया था और EVM बदले जाने का आरोप लगा कर हंगामा करने लगे थे। अखिलेश यादव और ओमप्रकाश राजभर ने भी इस मामले में ट्वीट किया था।

वाराणसी के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने बताया था कि ये EVM मतगणना के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग के लिए ले जाया जा रहा था। इस संबंध में चुनाव आयोग को भी रिपोर्ट भेजी गई थी।

चुनाव आयोग ने EVM के साथ छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र ने कहा है, “EVM से छेड़छाड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता। यह 2004 से अब तक लगातार प्रयोग में आ रही है। इसे सभी पार्टियों के प्रत्याशियों के आगे ही सील किया जाता है।”

फ़िलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने वाराणसी के ADM को सस्पेंड कर दिया है।

5 राज्य, 690 सीट: चल रही है वोटों की गिनती, यूपी-मणिपुर में BJP तो पंजाब में AAP आगे, उत्तराखंड और गोवा में काँटे की टक्कर

5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ जाएँगे। वोटों की गिनती शुरू हो गई है। ये राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा हैं। चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हुए हैं। शुरुआती रूझानों में उत्तर प्रदेश में भाजपा आगे चल रही है। इसी तरह पंजाब में आम आदमी पार्टी आगे दिख रही। मणिपुर में शुरुआती रूझान एकतरफा मुकाबला दिखा रहे और बीजेपी काफी आगे चल रही है। उत्तराखंड और गोवा में तगड़ी टक्कर दिख रही। रूझानों में कभी कॉन्ग्रेस तो कभी बीजेपी आगे दिख रही।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60 और गोवा में 40 सीटें हैं। इन चुनावों में कई बड़े प्रत्याशियों की किस्मत दाँव पर लगी है। अधिकतर एक्जिट पोल के मुताबिक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा की सरकार बन सकती है। वहीं पंजाब में आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है।

उत्तर प्रदेश लोगों के बीच सबसे अधिक चर्चा में है। यहाँ वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दोनों ने अपनी सरकार बनाने का दावा किया है। उत्तराखंड में भी मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में वर्तमान में भाजपा की सरकार है जिसे हरीश रावत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस पार्टी ने चुनौती दी है। पंजाब में वर्तमान समय में कॉन्ग्रेस की सरकार है जिसको आप पार्टी से कड़ा मुकाबला मिल रहा है। मणिपुर में मुख्यमंत्री एन बीरेन के नेतृत्व में भाजपा एक बार फिर से सरकार बनाने के प्रयास में है। वहीं गोवा में भी भाजपा को एक बार फिर से अपनी सरकार बनने का भरोसा है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। बहुमत का आँकड़ा 202 है। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थी। उसे 39.67% मत मिले थे। कॉन्ग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को 21.82% वोट के साथ 47 तो कॉन्ग्रेस को 6.25% वोटों के साथ 7 सीटें मिली थी। 22.23% वोट हासिल करने के बावजूद बसपा 19 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य के खाते में 5 सीटें गई थी। उससे पहले 2012 में सपा और 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था।

‘Vision IAS’ के ठिकानों पर आईटी रेड, टैक्स चोरी का है मामला: परोस चुका है लादेन और शेख अब्दुल्ला की तारीफ़, बुर्का का समर्थन भी

आयकर विभाग ने बुधवार (9 मार्च, 2022) को सिविल सर्विसेज कोचिंग संस्थान ‘Vision IAS’ के दिल्ली स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। टैक्स चोरी के आरोपों में ये रेड डाली गई है। राष्ट्रीय राजधानी के पूसा रोड में स्थित ‘Vision IAS’ के दफ्तर में IT विभाग ने छापेमारी की। इस रेड में कोचिंग संस्थान के अन्य ठिकानों को भी जद में लिया गया। कोचिंग संस्थान ने अभी तक इस आईटी रेड को लेकर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।

IT विभाग की सर्च टीमों ने ‘Vision IAS’ के वित्तीय दस्तावेजों को खँगाला। साथ ही उसके अकाउंट्स को भी देखा गया। इसके कई अन्य शहरों में भी सेंटर्स हैं, ऐसे में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ दस्तावेजों को जब्त भी किया गया है। पिछले कुछ दिनों से हिन्दू विरोधी गतिविधियों के लिए ये कोचिंग संस्थान लगातार चर्चा में है। UPSC की परीक्षा की तैयारी के नाम पर छात्रों के दिमाग में हिन्दू विरोधी ज़हर भरे जाने के कई वीडियोज सामने आए हैं।

Vision IAS से जुड़े फैकल्टी सदस्यों की विवादित वीडियोज सामने आने के बाद एक और चर्चित टीचर की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इनका नाम अवध प्रताप ओझा है, जो महाराष्ट्र के IQRA IAS इंस्टिट्यूट में पढ़ाते हैं। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया, “ओसामा बिन लादेन। उसको पता था मुझे किससे लड़ना है। मार दिया ट्विन टावर पर। पूरी दुनिया जानने लगी उसका नाम। उसने USA के घर में घुसकर उसको तमांचा मारा। ये उपलब्धि है। उसने एक बार ही हमला किया। इसे कहते हैं सपना। इससे मतलब नहीं है कि अमेरिकी सेना उसे उठाया उसे मारा।”

बता दें कि इससे पहले सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग सेंटर Vision IAS की तथाकथित वामपंथी टीचर स्मृति शाह के कुछ वीडियो सामने आए थे जहाँ किसी में वह शेख अब्दुल्ला को सबसे ज़्यादा लिबरल और सोशलिस्ट बताते नहीं थक रहीं थीं। वहीं किसी में कश्मीरी पंडितों के पलायन और उन पर शोषण को भी जायज ठहरा रही थीं। एक वीडियो में तो वह खुलकर हिजाब और बुर्का के समर्थन में ज्ञान देते हुए इसे सोशल प्राइड बता डाला।

इस वीडियो में वह भगवा शाल या जय श्री राम कहने वालों को ही परोक्ष रूप से घेरतीं नजर आई थीं। उनकी तरह कई अन्य टीचरों की भी इस्लाम का महिमामंडन करते वीडियो वायरल हुई थी। एक वीडियो में वो कहती दिखी थीं, “इस्लाम था बहुत लिबरल। वह समानता के बारे में बात करता था। कोई जाति व्यवस्था भी नहीं थी। अगर इस्लाम पढ़ा होगा तो एक चेरामन जुमा मस्जिद है जिसका मिनिएचर आपके पीएम ने सऊदी किंग को दिया।” 

3000+ कर्मचारियों को हटाने की तैयारी: पिछली बार 3 मिनट की जूम कॉल में ही बेटर डॉट कॉम के CEO विशाल गर्ग ने कर दी थी 900 की छुट्टी

3 मिनट के जूम कॉल में 900 कर्मचारियों को निकालकर चर्चा में आए बेटर डॉट कॉम के सीईओ विशाल गर्ग ने इस बार कंपनी के 3 हजार कर्मचारियों को निकालने की तैयारी कर ली है। वर्कर्स को इसका पता कंपनी के पेरोल ऐप से चला है। यह छँटनी आज बुधवार (9 मार्च, 2022) को ही कंपनी द्वारा की जानी थी। हालाँकि, अभी तक यह कन्फर्म नहीं हुआ है कि कितने कर्मचारी निकाले जा रहे हैं और उन्हें अब तक निकाल दिया गया है या नहीं।

वहीं कई रिपोर्टों के अनुसार, कहा जा रहा है कि बेटर डॉट कॉम (Better.com) ने कथित तौर पर 8 मार्च को ही कर्मचारियों को निकालने की योजना बनाई थी लेकिन गलती से सेवरेन्स पे पर क्लिक होने की वजह से जब मीडिया में शुरुआती तारीख की खबर लीक हुई तो इसे बढ़ाकर को 9 मार्च, 2022 कर दिया था।

कंपनी में अमेरिका और भारत में कंपनी के 8,000 कर्मचारी हैं। इनमें से 3,000 कर्मचारियों को जॉब छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। कंपनी के CFO केविन रयान ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा था कि उन्हें, “ब्याज दर बढ़ने के माहौल और मार्केट में आई अस्थिरता को ठीक करना है।”

उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, इसका मतलब है कि हमें अपने संचालन को और अधिक सुव्यवस्थित करने तथा अमेरिका और भारत, दोनों स्थानों पर अपने कर्मचारियों की संख्या को पर्याप्त रूप से कम करने के लिए कठिन कदम उठाना होगा।” कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, पहले बताया गया कि आँकड़ा लगभग 4,000 था, लेकिन अब यह ‘केवल 3,000 से अधिक’ है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सेवरेंस पैकेज कथित तौर पर 60 से 80 दिनों का वेतन है। न्यूयॉर्क स्थित डिजिटल मॉर्गेज ऋणदाता ने अपने 9 प्रतिशत कर्मचारियों (900 लोगों को) तीन महीने पहले कंपनी के सीईओ विशाल गर्ग ने दिसंबर 2021 में एक जूम कॉल के दौरान निकाल दिया था, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था।

गौरतलब है कि Better.com का गठन 2016 में किया गया था और इसका हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क में है। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो लोगों को मॉर्टगेज लोन और इंश्योरेंस प्रोडक्ट उपलब्ध कराती है। Better.com में जापान के सॉफ्ट बैंक का निवेश है। वहीं इसका वैल्यूएशन 7 अरब डॉलर आँका गया है।

संजय लीला भंसाली ने आलिया भट्ट की तुलना नरगिस और मीना कुमारी से की, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ को बताया ‘मदर इंडिया’ की लीग में

आलिया भट्ट की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने भारत में 100 करोड़ रुपए की नेट कमाई का आँकड़ा पार कर लिया है। हालाँकि, फिल्म के 175 करोड़ रुपए के बजट से ये काफी कम है। शुक्रवार (11 मार्च, 2022) को प्रभास और पूजा हेगड़े की ‘राधे श्याम’ रिलीज हो रही है, ऐसे में संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म की कमाई पर ब्रेक लग सकता है। साथ ही कश्मीर में नब्बे के दशक में हिन्दुओं के नरसंहार पर बनी विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ भी इसी दिन आ रही है।

वहीं दुनिया भर में फिल्म की ग्रॉस कमाई 141 करोड़ रुपए के पार पहुँच गई है। एक महिला प्रधान फिल्म के लिए ये बड़ा आँकड़ा है। अब संजय लीला भंसाली ने आलिया भट्ट की तुलना सीमा बिस्वास, नरगिस और मीना कुमारी जैसी अभिनेत्रियों के साथ की है। ‘Pen Movies’ के एक वीडियो में आलिया भट्ट ने इस फिल्म को लेकर संजय लीला भंसाली का इंटरव्यू लिया है। उन्होंने दावा किया कि अगले 50-100 वर्षों तक इस फिल्म को लग उत्सव की तरह मनाएँगे।

उन्होंने ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में आलिया भट्ट के प्रदर्शन की तुलना ‘मदर इंडिया (1957)’ में नरगिस, ‘साहिब बीवी और गुलाम (1962)’ में मीना कुमारी और ‘बैंडिट क्वीन (1994)’ में सीमा बिस्वास के प्रदर्शन से की। उन्होंने कहा कि आलिया की परफॉर्मेंस इसी लीग में चौथी फिल्म है। उन्होंने दावा किया कि बर्लिन में लोगों ने फिल्म देख कर जब सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और 5 मिनट तक ताली बजाते रहे, तब उन्होंने चैन की साँस ली।

इसी फिल्म के साथ ‘थाला’ अजीत कुमार की तमिल फिल्म ‘वलिमै’ भी रिलीज हुई। वहीं तेलुगु में ‘पॉवर स्टार’ पवन कल्याण की ‘भीमला नायक’ रिलीज हुई है। जहाँ तमिलनाडु में ही अकेले ‘वलिमै’ ने 151 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। जबकि ‘भीमला नायक’ ने अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 128 करोड़ रुपए के ग्रॉस का आँकड़ा पार कर लिया है। फिल्म दुनिया भर में 200 करोड़ रुपए की तरफ बढ़ रही है। जबकि अजीत की फिल्म सवा 200 करोड़ की कमाई के पास है।

80 में 77 निकायों पर BJP+ का कब्ज़ा, 977 में 807 वार्ड भी जीते: असम के स्थानीय चुनावों में BJP की बड़ी जीत, कॉन्ग्रेस सिर्फ 1 पर सिमटी

देश के 5 राज्यों में विधानसभाओं के चुनाव के नतीजे कल 10 मार्च को सामने आएँगे लेकिन उससे पहले बीजेपी ने असम के निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल करके अपने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है। आज बुधवार (9 मार्च, 2022) को घोषित चुनाव परिणामों में भाजपा ने असम में कुल 80 में से 75 नगर निकायों पर कब्जा कर लिया है। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस को यहाँ बड़ी निराशा हाथ लगी है।

80 में से 77 नगर निकाय में बीजेपी+ की जीत

असम राज्य चुनाव आयोग (ASEC) की ओर से आज घोषित किए गए चुनाव परिणामों के अनुसार, बीजेपी ने असम के नगर निकाय चुनावों में कुल 80 में से 75 नगर निकायों पर कब्जा कर लिया है। भाजपा साथ गठबंधन में रहे असम गण परिषद ने 2 नगर पालिकाओं में जीत हासिल की है। वहीं कॉन्ग्रेस की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। वह 80 में से केवल 1 नगरपालिका में ही जीत दर्ज कर पाई है जबकि 2 नगरों में अन्य दलों ने जीत दर्ज की है।

आयोग ने बताया कि नगर निकाय चुनावों में कुल 977 में से 807 वार्डों पर बीजेपी ने सहयोगी असम गण परिषद के साथ जीत दर्ज की है। बीजेपी ने जहाँ 742 वार्डों में वहीं असम गण परिषद ने 65 वार्डों पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 71 और अन्य ने 99 वार्डों में जीत हासिल की है। ASEC के नतीजों के मुताबिक मरियानी म्युनिसिपल बोर्ड के 10 में से 7 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। वहीं बची हुई 3 सीटों पर यहाँ भी बीजेपी ने कब्जा जमाया है। इन चुनावों में 2 नगरों में त्रिशंकु नतीजे भी सामने आए हैं।

सीएम हिमंता सरमा ने कार्यकर्ताओं को दी बधाई

चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “यह विशाल जनादेश ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए है। इससे पार्टी को नए जोश के साथ प्रगति के एजेंडे को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।”

सरमा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, “मैं सभी @BJP4Assam कार्यकर्ताओं और नेताओं को बधाई देता हूँ, जिन्होंने आदरणीय पीएम नरेंद्र मोदी जी के विकास के आदर्शों को फैलाने के लिए अथक प्रयास किया। मैं असम के लोगों को बीजेपी और उसके सहयोगियों के नगर निकाय चुनावों में प्रचंड जीत के लिए कृतज्ञता में सिर झुकाता हूँ।”

उन्होंने कहा कि मैं नगर निकाय चुनावों में भाजपा की असम इकाई और उसके सहयोगियों को शानदार जीत दिलाने के लिए राज्य के लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ। वहीं राज्य में कॉन्ग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के प्रदेश प्रमुख भूपेन कुमार बोरा ने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव एक निरंतर प्रक्रिया है और हर पार्टी को अच्छे-बुरे दौर से गुजरना पड़ता है।

गौरतलब है कि असम में नगर निकाय चुनावों के इतिहास में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए 6 मार्च, 2022 को चुनाव हुआ था। इनके जरिए राज्य भर में 80 नगरपालिका बोर्डों के लिए मतदान किया गया था। इस चुनाव में राज्य के करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं वोट डाला था।

JNU का नाम ANU करना पड़ा, पूर्व PM से जुड़ा दृश्य हटाया गया, 7 सीन काटे: ‘द कश्मीर फाइल्स’ को सेंसर बोर्ड से ‘A’ सर्टिफिकेट

नब्बे के दशक में घाटी में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार और पलायन पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को सेंसर बोर्ड ने रिलीज के लिए अनुमति दे दी है। हालाँकि, इसके लिए फिल्म में JNU का नाम बदल कर ‘ANU’ करना होगा। साथ ही CBFC (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) ने फिल्म में 7 छोटे-छोटे कट्स भी लगाए हैं। ‘द कश्मीर फाइल्स’ शुक्रवार (11 मार्च, 2022) को रिलीज हो रही है। विवेक अग्रिहोत्री फिल्म के निर्देशक हैं। फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है।

हालाँकि, इस दिन रिलीज होने वाली ये अकेली फिल्म नहीं है। इसी दिन तेलुगु फिल्मों के बड़े स्टार प्रभास और पूजा हेगड़े की फिल्म ‘राधे श्याम’ भी रिलीज हो रही है, जिसका बजट 350 करोड़ रुपए के आसपास है। हाल ही में विवेक अग्निहोत्री ने आरोप लगाया था कि कॉमेडियन कपिल शर्मा ने अपने शो में इस फिल्म का प्रमोशन करने से इनकार कर दिया। ‘द कश्मीर फाइल्स’ के उस दृश्य को CBFC ने हटा दिया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को गिरते हुए दिखाया गया था।

एक खूँखार आतंकी के घर भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री को दिखाए जाने वाले दृश्य को भी हटा दिया गया। एक टेलीविजन चैनल के लोगों को हटाने के साथ-साथ फिल्म में दो दिन जगह दिखाए गए पोस्टर्स में से ‘रेप’ शब्द को भी ब्लर कर दिया गया। जहाँ भी ‘हिन्दू’ या ‘पंडित’ शब्द के साथ कुछ अपशब्द थे, उन्हें हटा दिया गया है। स्पष्ट है, इस्लामी कट्टरपंथियों की भाषा को दिखाने के लिए फिल्म में इनका इस्तेमाल हुआ होगा।

साथ ही ‘डिस्को CM’ वाले शब्द को भी फिल्म से सेंसर बोर्ड ने हटा दिया है। एक यूनिवर्सिटी, जिसे फिल्म में दिखाया गया है – उसका नाम JNU से हटा कर ‘ANU’ रख दिया गया। ‘बॉलीवुड हंगामा’ से बात करते हुए निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि सेंसर बोर्ड ने उन्हें फिल्म में कट्स की लंबी सूची थमाई थी, जिसके बाद उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। बोर्ड को ‘इस्लामी आतंकी’ शब्द से भी आपत्ति थी। पहले कुल दो दर्जन कट्स करने के लिए कहा गया था।

विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि उन्हें अपनी बात को साबित करने के लिए सेंसर बोर्ड के समक्ष कुछ दस्तावेज और सबूत रखने पड़े। उन्होंने पूछा कि भला तथ्यों को कोई कैसे नकार सकता है? उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलने से फिल्म की भावना पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, इसीलिए विवाद से बचने के लिए वो ऐसा करने को राजी हो गए। 170 मिनट (2 घंटे, 50 मिनट) की इस फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन कुमार और पल्लवी जोशी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

‘हालात बिगड़े तो प्रशासन होगा जिम्मेदार’: यूपी मतगणना से पहले नरेश टिकैत ने दी धमकी, कहा – ‘बेईमानी की बू आ रही’

उत्तर प्रदेश चुनाव की वोटिंग के बाद अब मतगणना की बारी है। गुरुवार (10 मार्च 2022) को चुनाव परिणाम आने वाला है, लेकिन काउंटिंग के एक दिन पहले मतगणना में गड़बड़ी की आशंका को लेकर माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के आह्वान के बाद एक तरफ जहाँ सपा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर हो गया है तो दूसरी तरफ किसानों के नेता और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने भी किसानों से अपने वोट की निगरानी करने का आह्वान किया है।

टिकैत ने कहा कि समाज का ताना-बाना बना रहे। दस मार्च को मतगणना में कोई धाँधली न हो। सरकार से बेईमानी की बू आती है। हम चाहते हैं कि कोई गड़बड़ न हो। जिला प्रशासन अपनी छवि साफ रखे। उन्होंने कहा कि वह किसी पार्टी की बात नहीं कह रहे, लेकिन अगर बेईमानी की बात होगी और फिर कुछ हुआ तो प्रशासन जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा कि मतगणना पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नरेश टिकैत ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि पंचायत चुनाव में पार्टी ने जमकर सत्ता का दुरुपयोग किया था, जिसे पूरी दुनिया ने देखा था। ऐसे में बीजेपी पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। विधानसभा चुनाव की मतगणना के दिन भी धाँधलेबाजी हो सकती है। पंचायत चुनाव में जनता खामोश थी, लेकिन अब विधानसभा चुनाव में ऐसा हुआ तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विजयी जुलूस पर प्रतिबंध ही रहना चाहिए, जिससे तनाव न बने। यह बात पूरे प्रदेश के लिए है और पश्चिम से बात बहुत दूर तक जाती है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि प्रशासन के साथ तालमेल में खटास नहीं पैदा होनी चाहिए। उनके पास जनसमूह की ताकत है। त्योहार भी आ रहे हैं और सभी सुख शांति से त्योहार मनाएँ। वह अराजनीतिक हैं और सर्वसमाज की बात करते हैं। जो दायरा रहेगा, उसमें लोग रहेंगे। सड़कों पर लोग रहेंगे। जीते कोई भी, मतगणना निष्पक्ष होनी चाहिए। वहीं धारा 144 को लेकर नरेश टिकैत ने कहा कि प्रशासन धारा 288 भी लागू कर दे तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। किसान ट्रैक्टर पर अपनी वोट की निगरानी के लिए आएँगे।

इससे पहले भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा था कि यूपी चुनाव में भाजपा (BJP) को नुकसान झेलना पड़ेगा। जनता भाजपा सरकार से नाराज है। इस मौके पर टिकैत ने अप्रत्यक्ष रूप से मतगणना में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया। उन्होंने विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मतगणना को लेकर सजग रहने के लिए कहा था। 

उन्होंने कहा था कि कार्यकर्ता मतगणना केंद्रों पर अपनी पहरेदारी बना कर रखे। अगर उनकी पहरेदारी में कमी रही तो यूपी जिला पंचायत जैसे नतीजे भी सामने आ सकते है। वहीं आंदोलन को लेकर पूछे सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा कि 2022 में पूरे देश में संगठन को मजबूत करने का कार्य किया जाएगा, जहाँ तक आंदोलन की बात है अगर समझौते के तहत हुई माँगो को पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन कहाँ और कब होगा जनता इसका फैसला करेगी।

क्या ‘नवाब प्रेम’ में डूबेगी उद्धव सरकार: हिरासत में लिए गए पूर्व CM फडणवीस, दिखाई थी 125 घंटे की रिकॉर्डिंग वाली पेन ड्राइव

महाराष्ट्र में एनसीपी नेता नवाब मलिक के इस्तीफे की माँग करने वाले भाजपा नेताओं को राज्य पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इन नेताओं में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई पार्टी नेता और राज्य मंत्री शामिल हैं। ये सभी नेता ‘अंडरवर्ल्ड से नवाब मलिक के कनेक्शन’ को लेकर इस्तीफे की माँग कर रहे थे। इसी बाबत इन्होंने आज विरोध प्रदर्शन में एक मार्च भी किया जो कि भायखला के जीजामाता चौक से शुरू होकर और मुंबई के आजाद मैदान में समाप्त हुआ। इसी बीच खबर आई कि महाराष्ट्र पुलिस ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया।

भाजपा नेताओं को फँसाने की साजिश रच रही उद्धव सरकार: पूर्व CM का दावा

बता दें कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस इस मार्च को करने से पहले संसद में भी नवाब मलिक के इस्तीफे की माँग रख चुके हैं। उन्होंने तीन मार्च से शुरू हुए बजट सत्र के दौरान हर दिन विधानसभा के अंदर नवाब मलिक के इस्तीफे की माँग की। इतना ही नहीं उन्होंने विधानसभा में एक पेन ड्राइव दिखाते हुए दावा किया था कि इस पेन ड्राइव में 125 घंटे की रिकॉर्डिंग है। जिसे देख पता चलता है कि कैसे राज्य सरकार उन्हें और अन्य भाजपा नेताओं (गिरीश महाजन, सुधीर मुनगंटीवार, चंद्रकांत पाटिल, जयकुमार रावल और चंद्रशेखर बावनकुले) को फँसाने के लिए साजिश रच रही है। फडणवीस ने इस दौरान आरोप लगाया कि इस साजिश में राज्य के कुछ पुलिस वाले भी शामिल हैं, इसलिए वह चाहते हैं कि पूरे मामले में सीबीआई अपनी जाँच करे।

संजय राउत ने केंद्रीय एजेंसियों पर लगाया आरोप

विधानसभा में भाजपा नेता के सनसनीखेज आरोपों पर शिवसेना नेता संजय राउत की प्रतिक्रिया आई। उन्होंने फडणवीस के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया और अपने राज्य की पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में किसी के भी खिलाफ झूठे आरोपों के तहत मामले दर्ज नहीं किए जाते। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, एनसीबी, सीबीआई और ईडी जैसी राष्ट्रीय एजेंसियाँ ​​बीजेपी से झूठ बोलने की ट्रेनिंग लेती हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले दाऊद इब्राहिम कनेक्शन और मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने नवाब मलिक को हिरासत में लिया था। इसके बाद से ही भाजपा नेता, मलिक के इस्तीफे की माँग कर रहे थे और उद्धव सरकार पर इसके लिए दबाव बनाया जा रहा था। वहीं, एनसीपी ने अपने बयान में कहा था कि वो चाहे जो हो नवाब मलिक से इस्तीफा नहीं लेगी।

‘मेरे बेटे ने देश के लिए अपने पैर गँवाए हैं’: वामपंथी आतंकियों की IED भी न तोड़ सकी CRPF असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह की माँ का हौसला

दिलेश्वर सिंह करीब 55 साल के हैं। बिहार के कैमूर जिले के देवरथ कला निवासी सिंह एक सामान्य किसान हैं। लेकिन इन दिनों अपने खेतों में नहीं हैं। दिल्ली के एम्स में बैठकर अपने बेटे के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। उनके बेटे हैं 31 वर्षीय ​विभोर सिंह। सीआरपीएफ की 205 कोबरा बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह बिहार के औरंगाबाद जिले में 25 फरवरी 2022 को एक आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आकर घायल हो गए थे। अब उनकी हालत तो स्थिर है, लेकिन दो साल की बच्ची के पिता विभोर की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को दोनों पैर काटने पड़े हैं।

IED ब्लास्ट उस समय हुआ, जब विभोर अपनी टीम को लेकर माओवादी विरोधी अभियान पर निकले थे। इस दौरान हेड कांस्टेबल सुरेंद्र कुमार यादव को भी चोटें आई थी। उनका इलाज भी दिल्ली एम्स में चल रहा है। साथियों के मुताबिक ब्लास्ट की चपेट में आकर बुरी तरह से घायल होने के बाद भी विभोर टीम का नेतृत्व करते रहे और बाकी जवानों को हौसला देते रहे। घायल अवस्था में साथियों को हिम्मत देते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ था।

ब्लास्ट में घायल हुए जवानों के तत्काल उपचार के लिए हेलीकॉप्टर की जरूरत थी। लेकिन इस मामले में दर्ज एफआईआर से पता चलता है कि ‘विषम परिस्थिति’ के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया। जवानों को गया में प्राथमिक इलाज के बाद दिल्ली एम्स लाया गया। ऑपइंडिया को रिटायर्ड ADG (BSF) संजीव कृष्ण सूद ने बताया कि जहाँ ब्लास्ट हुआ वह काफी रिमोट इलाका था। ऐसे इलाके में इस तरह की स्थिति से निपटने की तैयारी कैसी हो, इस पर गौर करने की जरूरत है, क्योंकि यदि घाव विभोर के पैरों के बजाय किसी और अंग में हुआ होता तो इतनी देरी के बाद शायद ही उनकी जान बचाई जा सकती थी।

वहीं ऑपइंडिया को वीर चक्र प्राप्त कर्नल (रिटायर्ड) तेजिंदर पाल त्यागी ने बताया, “मैंने युद्ध में अपने सिपाहियों को बलिदान होते देखा है। मैं युद्ध की विभीषिका को जानता हूँ। मुझे यह जान कर बहुत तकलीफ हो रही है कि विभोर सिंह को एयरलिफ्ट करने में भी समय लगा। किसी भी अभियान की प्लानिंग में एयर सपोर्ट शुरुआत में ही दे दी जाती है। ऐसा लग रहा है कि प्लानिंग में कमी थी।” कर्नल त्यागी को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए वीर चक्र मिला था। उन्होंने बताया, “सैनिकों और बलिदानियों के लिए इस सरकार के काम पिछली सरकारों के मुकाबले कई गुना ज्यादा बेहतर हैं।

बेस कैम्प में घायल अवस्था में असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह

कौन हैं असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह

असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह मूल रूप से बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले हैं। परिवार में माता-पिता, पत्नी और एक बेटी है। उन्होंने बीटेक किया है। देश सेवा की लगन उन्हें मई 2017 में CRPF में खींच लाई। ऑपइंडिया को विभोर का परिवार एम्स के ट्रॉमा सेंटर परिसर में बाहर बने एक छोटे से पार्क में मिला। विभोर के साथ हुई घटना का दर्द उनके चेहरे से साफ झलक रहा था। लेकिन उनका हौसला कायम था।

विभोर सिंह के पिता दिलेश्वर सिंह ने बताया, “शाम के करीब पौने आठ बजे हमें जानकारी मिली थी कि बेटा नक्सली एरिया में ऑपेरशन के दौरान घायल हो गया है। हमें गया जाने को कहा गया। हम परिवार वालों के साथ रात लगभग 11 बजे गया पहुँचे। पहले बताया गया छोटी घटना है। लेकिन अगली सुबह हमें पता चला कि नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है।”

दिल्ली के एम्स में असिस्टेंट कमांडेंट विभोर सिंह के परिजन

वहीं विभोर की माँ ऑपइंडिया से बात करते हुए रोने लगीं। उन्होंने बताया, “मेरे बेटे ने देश के लिए अपने पैर गँवाए हैं। अब देश भी उनके लिए कुछ करे। हमारी माँग है कि सरकार उनको सम्मानित करे। विभोर अपने खेत-खलिहान का झगड़ा करने नहीं गया था। सरकार से विनती है कि मेरे बेटे को सम्मानित करे।”

विभोर की माँ की तरह ही उनकी पत्नी भी ऑपइंडिया से बात करते हुए फूट-फूटकर रोने लगीं। खुद को सँभालने के बाद उन्होंने बताया, “घटना के दिन ही उन्हें (विभोर सिंह) चोट लगने की जानकारी दी गई थी। मैंने बात करनी चाही तो इलाज की बात कहकर मुझे रोक दिया। फिर बताया गया कि उन्हें इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से राँची और पटना ले जाया जाएगा। फिर हेलीकॉप्टर सुबह उड़ने को बताया गया। उनका इलाज शुरू होने में लगभग 23 घंटे लग गए। अगर उन्हें समय से दिल्ली लाया गया होता तो हो सकता है कि उनका पैर बच जाता।” हालाँकि एम्स में मिल रहे इलाज पर उन्होंने संतुष्टि जताई है। साथ ही बताया कि CRPF के IG और ADG भी विभोर का हाल जानने एम्स आए थे।