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रूस में प्लेग फैला सकता है यूक्रेन: दावा- अमेरिकी फंड से चल रहे लैब में तैयार किए जा रहे जैविक हथियार

यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग में एक नया खुलासा हुआ है। खबर है कि रूस ने एक दस्तावेज पब्लिश किया है जिसमें बताया गया है कि यूक्रेन ने अमेरिका द्वारा पोषित प्रयोगशालों की मदद से, रूसी सीमा पर जैविक हथियार जैसे एंंथ्रेक्स और प्लेग बनाने पर काम किया। जानकारी के मुताबिक, ये प्रयास जैविक हथियारों पर यूएन निषेध के अनुच्छेद 1 का उल्लंघन है। पोल खुलने के डर से पेंटागन (अमेरिका रक्षा मंत्रालय) की ओर इन्हें समाप्त करने के निर्देश भी दिए गए थे।

रूस से संबंधी जानकारी देने वाली एएसबी न्यूज ने इस संबंध में कल रात कुछ डॉक्यूमेंट शेयर किए थे। इसके अलावा ये दस्तावेज रूस के रक्षा मंत्रालय द्वारा भी दिखाए गए। इसमें इस बात के सबूत हैं कि यूस द्वारा पोषित लैब, जो कि रूसी सीमा के बिलकुल नजदीक हैं, उनमें यूक्रेन ने जैविक हथियार बनाने पर काम किया।

रिपोर्ट के अनुसार रूस ने बताया, “हमें 24 फरवरी को प्लेग, एंथ्रेक्स, टुलारेमिया, हैजा और अन्य घातक बीमारियों के विशेष रूप से खतरनाक बीमारियाँ विकसित करने वाली यूक्रेनी जैविक प्रयोगशालाओं के डॉक्यूमेंट मिले हैं।” रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जब डोनबास में उन्होंने अपना स्पेशल ऑपरेशन शुरू किया तो पेंटागन को चिंता हो गई कि उनके इस गुप्त जैविक प्रयोगों के बारे में रूस को पता चल जाएगा जो कि यूक्रेन में हो रहे हैं। अब संबंधी दस्तावेजों को रूसी विशेषज्ञ जाँच कर रहे हैं।

रूस द्वारा प्रकाशित दस्तावेज में यूक्रेन स्वास्थ्य मंत्रालय का एक ऑर्डर भी शामिल है जिसपर तारीख 24 फरवरी 2022 की है। इसमें जैविक रोगजनक एजेंटों के आपातकाल खात्में की बात हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक रूसी प्रतिनिधि ने जानकारी दी कि यूक्रेन ने अपने ‘डर्टी बम’ के निर्माण और प्लूटोनियम को अलग करने के काम के लिए चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र क्षेत्र का इस्तेमाल किया।

जैविक हथियार के इस्तेमाल का परिणाम

बता दें कि जैविक हथियार जैसे प्लेग आदि का निर्माण किसी भी देश के लिए बेहद घातक होता है। ये देश को अंदरुनी तौर पर कमजोर करने का काम करता है। जैविक हथियार के नाम पर विकसित की गई बीमारियाँ वो भयावह बीमारी होती हैं जिनके चलते पूर्व में कई देशों में सैंकड़ों लोगों ने अपनी जान गँवाई। इस बीमारी में लोगों को आँख लाल होने, सिरदर्द, खुजली और बुखार जैसी सामान्य परेशानियाँ होती और बाद में 7-8 दिन बाद उनकी मौत हो जाती। जो लोग बचने वो या तो लकवा पीड़ित होते या कोमा में जाकर नेत्रहीन हो जाते।

16 साल पहले बम ब्लास्ट्स से दहली थी वाराणसी, 2005 और 2010 में भी धमाके: PM मोदी ने यूँ बदल दी काशी, भव्य हुआ बाबा विश्वनाथ का धाम

अब जब सोमवार (7 मार्च, 2022) को उत्तर प्रदेश में सातवें और अंतिम चरण का विधानसभा चुनाव हो रहा है और इसी क्रम में वाराणसी हॉटस्पॉट बना हुआ है, हमें ये भी याद करने की ज़रूरत है कि आज से 16 साल पहले यही काशी धमाकों से दहल गई थी। आज भले ही बनारस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के कारण चर्चा में हो, लेकिन तब ऐसा नहीं था। UPA के शासनकाल में हुए बम धमाके आज भी लोगों के जेहन में ताज़ा हैं।

तब हुए बम धमाकों में वाराणसी में 28 लोग मारे गए थे और 100 से भी अधिक लोग घायल हुए थे। विश्व की प्राचीनतम शहरों में से एक में हुए इस बम धमाके के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा का नाम सामने आया था। काशी की शान और ‘महामना की बगिया’ कहे जाने वाले ‘बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी’ के नजदीक स्थित लोकप्रिय संकट मोचन हनुमान मंदिर को भी इस बम ब्लास्ट में निशाना बनाया गया था।

ज्ञात हो कि अस्सी नदी के किनारे इस मंदिर की स्थापना 16वीं शताब्दी में खुद तुलसीदास ने की थी, जो ‘रामचरितमानस’ और ‘हनुमान चालीसा’ के रचयिता हैं। मंगलवार का दिन था और इसी कारण हनुमान जी में श्रद्धा रखने वाले कई हिन्दू मंदिर में उपस्थित थे। ऊपर से शाम के सवा 6 के बाद का समय था। मंदिर के दरवाजे पर एक कंटेनर में बम रखा गया था। आमतौर पर वहाँ महिलाएँ बैठती थीं। इस धमाके ने 10 लोगों की जान ले ली और 40 घायल हुए।

कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन पर भी धमाका हुआ। दशाश्वमेध घाट पर एक और IED मिला, लेकिन लेकिन उसे समय रहते डिफ्यूज कर दिया गया था। इसी बम धमाके के बाद पता चला था कि 23 फरवरी, 2005 को दशाश्वमेध घाट पर हुआ LPG सिलिंडर ब्लास्ट असल में एक आतंकी बम धमाका था। धमाका इतना शक्तिशाली था कि रेलवे स्टेशन की प्रमुख लॉबी में बहरा कर देने वाली आवाज़ गूँजी थी। लोगों की लाशों के चीथड़े उड़ गए थे और यहाँ तक कि छत से भी जा चिपके थे।

2005 और 2006 ही नहीं, बल्कि 2008 में भी वाराणसी में बम धमाका हुआ था। उस साल 23 नवंबर को वहाँ हुए धमाके के बाद उत्तर प्रदेश में ‘आतंक रोधी दस्ता’ का गठन किया गया और इसकी एक यूनिट को वाराणसी में तैनात किया गया। सभी घाटों, BHU, मंदिरों, सारनाथ, रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड और मॉल्स में एंट्री के लिए कुछ नियम-कायदे तय किए गए। इन सबके बावजूद 2010 में दशाश्वमेध घाट पर आतंकियों ने बम ब्लास्ट कर दिया।

हालाँकि, अब योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में चीजें बदल गई हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भी कई इंतजाम किए हैं। अब वाराणसी में भी समय-समय पर सुरक्षा बल मॉक ड्रिल में हिस्सा लेते हैं और ATS यहाँ कड़ी निगरानी रखती है। आज नरेंद्र मोदी वाराणसी में रोडशो करते हैं, विकास कार्यों का जायजा लेते हैं और उनके कार्यक्रमों में लाखों लोग आते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक सामने नहीं आती।

2005 में हुए बम ब्लास्ट में तो 7 लोग मारे गए थे और डेढ़ दर्जन लोग घायल हो गए थे। स्थानीय पुलिस तब इतनी अक्षम हुआ करती थी कि उसने इसे सामान्य LPG सिलिंडर ब्लास्ट बता कर इतिश्री कर ली, जबकि फॉरेंसिक विशेषज्ञों को वहाँ अमोनियम नाइट्रेट मिले। 2006 बम ब्लास्ट के मामले में भी पुलिस ने जाँच शुरू की, लेकिन दिसंबर 2008 में ये मामला ATS को सौंप दिया गया। इसके बाद हरकत-उल-जेहाद-ए-इस्लामी के सरगना वलीउल्लाह को STF ने उसी साल अप्रैल में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोसाईगंज से गिरफ्तार किया।

अदालत ने उसे 10 साल की कड़ी जेल के साथ-साथ उस पर 1.05 लाख का जुर्माना भी लगाया। वलीउल्लाह के पास से पुलिस ने विदेश में बने पिस्तौल के साथ-साथ RDX भी जब्त किया था। गाजियाबाद की अदालत में उसके खिलाफ मामला चला था, वहीं उसे डासना के जेल में रखा गया था। आज जब वाराणसी में जापान के प्रधानमंत्री तक आते हैं और लोग बेख़ौफ़ होकर घूमते हैं, तब हमें याद रहना चाहिए कि केंद्र में कॉन्ग्रेस और राज्य में सपा-बसपा के दौर में ऐसा नहीं हुआ करता था।

7 मार्च, 2006 को वाराणसी रेलवे स्टेशन पर हुए बम ब्लास्ट में 11 लोग मारे गए थे। शहर के अलग-अलग इलाकों में 6 बमों को डिफ्यूज किया गया, वरना और ज्यादा क्षति हो सकती थी। रेलवे स्टेशन के नजदीक ही एक रेस्टॉरेंट है, जहाँ विदेशी अच्छी-खासी संख्या में आते हैं। एक बम वहाँ से भी डिफ्यूज किया गया था। हमेशा की तरफ तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी ‘कड़ी निंदा’ कर के शांति की अपील की और इतिश्री कर ली।

हमेशा की तरह अन्य सभी राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया गया और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित पूजा स्थलों पर पुलिस भेज दी गई। वाराणसी में विरोध के रूप में लोगों ने बंद का आह्वान किया। प्रशासन को स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े। गाडोलिया से एक और हनुमान मंदिर से तीन बम डिफ्यूज किए गए थे। इसके बाद साल बाद ही इसी आतंकी संगठन ने मुंबई में 26/11 हमलों को अंजाम दिया। दिसंबर 2010 में शीतला घाट पर वाराणसी में बम धमाके हुए थे।

जाँच में ये भी सामने आया कि आतंकियों ने ज्यादा से ज्यादा जानमाल की क्षति के लिए इस धमाके को अंजाम दिया था, क्योंकि उस समय CBSE और ICSE की परीक्षाएँ चल रही थीं। यही कारण है कि आरती के दौरान जब मंदिर में बम फटा, तब वहाँ भारी भीड़ थी। साथ ही रेलवे स्टेशन पर जब ‘शिव गंगा एक्सप्रेस’ के लिए यात्रीगण इंतजार कर रहे थे, तब बम फटा। भारत-नेपाल सीमा से बिहार में बम बनाने के सामान लाए गए थे और वहाँ से बम को यूपी पहुँचाया गया था।

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने एक पाकिस्तानी आतंकी को पुलिस द्वारा मार गिराए जाने का दावा किया, लेकिन बाद में पाया गया कि मृतक मध्य प्रदेश का रहने वाला था। हालाँकि, वो आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ था और 2005 के दिल्ली बम ब्लास्ट में उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी था। दिसंबर 2005 में बेंगलुरु स्थित IISC और उससे पहले सितंबर 2002 में गुजरात के अक्षरधाम में हमले हुए था। हालाँकि, 2014 के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई और 2017 के बाद यूपी में भी वो सकारात्मक बदलाव महसूस किया जाने लगा।

‘बाजारू औरत, मुजरा, कोठा, दलाल, सट्टा’ … रुबिका लियाकत को साड़ी-बिंदी-गजरे में देख ऐसे बिदके इस्लामी, हिजाब के लिए भी निकाली खुन्नस

टीवी पत्रकार रुबिका लियाकत ने 5 मार्च को सोशल मीडिया पर एक फोटो अपलोड की। तस्वीर में वह साड़ी पहने, माथे पर बिंदी लगाए और बालों में गजरा लगाकर कार ड्राइव करती नजर आईं। इस तस्वीर को देख कई लोगों ने उनकी तारीफ की, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी एक बार फिर इसे देख बिदक गए। इससे पहले इन्हीं इस्लामियों ने रुबिका को हिजाब विवाद के समय सिर्फ इसलिए घेरा था क्योंकि वो स्कूल में हिजाब लागू करवाने का समर्थन नहीं कर रही थीं।

बता दें कि रुबिका ने अपनी तस्वीर के साथ लिखे ट्वीट में महिला सशक्तिकरण पर बात की और कहा, “एक महिला के पूरी तरह से तैयार होने के बावजूद लोग क्यों सोचते हैं कि उसे ड्राइवर की सीट (गाड़ी चलाने वाली सीट) पर नहीं होना चाहिए। कोई गलती न करें और स्टीयरिंग (गाड़ी को हैंडल करने वाला व्हील) हमेशा अपने हाथ में रखें चाहें आप तैयार हो या न हों।”

गाड़ी, स्टीयरिंग, ड्राइवर सीट को लेकर किए गए ट्वीट में रुबिका महिलाओं को अपने फैसले खुद लेने, अपने जीवन की गाड़ी खुद हैंडल करने की बातें कर रही थीं। लेकिन इस्लामी कट्टरवादियों से ये बर्दाश्त नहीं हुआ।

रुबिका की तस्वीर पर देख सकते हैं कि कैसे कुछ कट्टरपंथी हमेशा की तरह उनकी लुक्स की तुलना एक पुरुष से करते हैं और उनका मजाक उड़ाने के लिए कहते हैं, “भाईजान साड़ी में आप बिंदास लगती है वैसे आप बदमाश तो है हीं। आप अपनी मर्जी से साड़ी पहन सकते हो लेकिन कोई लड़की अपनी मर्जी से हिजाब भी नहीं लगा सकती। एक तरफ आप इस ट्वीट के जरिए महिला सशक्तिकरण की बात कर रही हैं और दूसरी तरफ आप प्रियंका जी का मजाक उड़ा रही हैं।”

एक यूजर ने तो उनकी तस्वीर पर लिखा, “आज गोदी मिडिया की हालत, उस बाजारू-औरत की तरह हो गई है। उसे लाख अश्लील गालीयाँ दो फिर भी बुरा नहीं मानती ! भाजपा के गोदी कोठों का मुजरा भाजपा के लिए ज़ोरों पे इसलिए रुबिका भाजपा द&^ पे एक आक थू बनता है आक थू।”

एक ने कहा, आप अपनी मर्जी से साड़ी, गजरा और बिंदी लगा सकती हैं पर कोई मर्जी से पर्दा करे तो मैडम को आग लग जाती है। मुनाफिकों के भी अपने प्रोपेगेंडे हैं।

मोहम्मद अथहर ने लिखा, “अरे रे ये खत्म अब, किलर लुक और पोज धूम रुबिका। अब तो सत्ता में उतर जाओ मीडिया जॉब छोड़ कर।”

एक यूजर ने लिखा, “जब तुम नफरत फैला सकती हो तो कार दौड़ाना तो बाएँ हाथ का खेल है।” एक ने रुबिका के लिए लिखा, “इसका स्टीयरिंग तो खुद बीजेपी के हाथ में हैं।”

नजीम शाह ने लिखा, “दलाली की कमाई से लोग क्या कुछ नहीं कर लेते। मैं तो कहता हूँ ये ED वालो को कुछ दलाल पत्रकारों के घर भी छापा मारना चाहिए! और 10 साल के रिकॉर्ड कमाई के जाँच करनी चाहिए।”

‘राज बदलो, लाल किले पर अपना झंडा लगाओ’: राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किसानों को भड़काया, कहा – ‘दिल्ली में बैठो, लड़ने की आदत डाल लो’

जम्मू-कश्मीर से राज्यपाल के तौर पर हटाकर गोवा और फिर मेघालय भेजे जाने के बाद से सत्यपाल मलिक लगातार अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। वो अक्सर केंद्र की आलोचना करते नजर आते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। हरियाणा में खाप की एक सभा में शामिल होने आए मलिक ने किसानों को सरकार बदलने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि धरने से कुछ नहीं होगा, राज बदलो और दिल्ली में बैठो।

रिपोर्ट के मुताबिक, सत्यपाल मलिक रविवार (6 मार्च 2022) को जींद जिले के कंडेला गाँव की खाप और माजरा खाप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे। इस दौरान उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए लाल किले में तिरंगे का अपमान करने वाले कथित किसानों का बचाव किया।

उन्होंने कहा, “लाल किले का सपना दिखा दे। ये सब खड़े हो जाएँगे। हुआ भी वही 6 महीने में तो नहीं 10 महीने में ये लाल किले पर चढ़ गए। इसके बाद मैंने केंद्र से कहा कि लाल किले पर हमारा हक है। हमारे लड़कों को दोषी मत बनाओ। इनपर मुक़दमे मत करो। ठीक है चले गए लाल किले पर चढ़ा दिया अपना झंडा। वो कोई पार्टी का झंडा नहीं था। निशान साहब था, जिसके लिए हजारों सिखों ने कुर्बानी दी थी।”

सत्यपाल मलिक यहीं नहीं रुके। उन्होंने किसानों को भड़काते हुए कहा, “अगर आप इकट्ठा नहीं रहोगे, अपने सवालों को नहीं समझोगे तो यही होगा। लड़ने की आदत डालो। दो साल बाद चुनाव है। इकट्ठा होकर वोट करोगे तो ये सब दिल्ली से भाग जाएँगे। किसानों का राज होगा। किसी से कुछ माँगने की जरूरत नहीं होगी। यूपी के चुनाव का नतीजा भले नहीं आया पर मैं पश्चिमी यूपी घूमा हूँ और वहाँ का बता रहा हूँ। किसी गाँव में कोई मंत्री घुस नहीं पाया। स्मृति ईरानी को तो कई किलोमीटर दौड़ाया। मैं ये कहना चाहता हूँ कि राज बदलो, अपना राज बनाओ। लोग तुमसे भीख माँगेंगे, तुम्हें भीख माँगने की जरूरत नहीं होगी।” मलिक ने किसानों को कहा कि लाल किले में अपना झंडा फहराओ।

‘UP की 80% सीट जीत रही BJP’: अंतिम चरण के मतदान से पहले CM योगी ने ‘मच्छर-माफिया’ का इलाज भी बताया

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए आखिरी चरण के लिए प्रचार खत्म हो गया है। अब 7 मार्च 2022 को सातवें और अंतिम चरण के लिए मतदान होगा। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वान्चल के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि मच्छर और माफिया स्वस्थ समाज के सबसे बड़े कारकों में से एक हैं। मच्छर शरीर को और माफिया समाज को किसी लायक नहीं छोड़ता है।

न्यूज नेशन टीवी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने कहा, “मच्छर और माफिया पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास में ये दो सबसे बड़े बाधक थे। मच्छर की जो समस्या थी उसका ‘स्वच्छ भारत मिशन’ से समाधान हो गया है। डबल इंजन की सरकार केंद्र और राज्य ने मिलकर इस समस्या का समाधान किया है। रहे माफिया तो उनका इलाज बेहतर कानून व्यवस्था के जरिए किया गया है। हमने अगर अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम किया है। अगर कोई इस गफलत में है कि चुनाव आ गए हैं तो वो कुछ भी कर ले तो ये संभव नहीं है।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में केवल कानून का राज होगा और इसके साथ खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सीएण योगी ने कहा कि ये एक कड़वा सच है कि साढ़े चार साल तक ये माफिया छुपे हुए थे और चुनाव का नोटिफिकेशन आते ही ये अपने बिलों से बाहर आते हुए दिखाई देते हैं। कई सारी जगहों से इनके धमकी देने वाले वीडियो वायरल हुए हैं। उसके चुनाव आयोग ने भी संज्ञान में लिया है। फिर भी अगर नहीं सुधरे तो व्यवस्था सुधार देगी। व्यवस्था खुद ही उनकी इस गर्मी को निकाल देगी।

सातवें चरण में 54 सीटों पर होंगे मतदान

गौरतलब है कि सोमवार को यूपी के आखिरी चरण में 9 जिलों की 54 सीटों पर मतदान होंगे। जिन जिलों में मतदान होने हैं उनमें आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र शामिल हैं। सीएम योगी ने दावा किया है कि इस चुनाव में भाजपा उत्तर प्रदेश की 80% सीटें अपने नाम करने जा रही हैं।

’15 दिन तक सुबह-शाम कोर्ट में रही, 7 वकील मुझसे करते थे बहस’: बोलीं यौन शोषण पीड़िता अभिनेत्री – डरी हुई हूँ, पर दिलीप के खिलाफ लड़ती रहूँगी

केरल के मलयाली फिल्मों के अभिनेता दिलीप पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली एक्ट्रेस भावना मेनन (35) ने पाँच साल पुराने मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मेरी गरिमा और आत्म सम्मान के लाखों टुकड़े कर दिए गए। मैं तबाह हो गई और अब वापस अपने गौरव को हासिल करना चाहती हूँ। एक्ट्रेस ने परिणाम की चिंता किए बिना मजबूत लड़ाई लड़ने की बात कही है।

पत्रकार बरखा दत्त के यूट्यूब चैनल ‘द मोजो स्टोरी’ को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने अपनी व्यथा व्यक्त की। अभिनेत्री ने अपने पति, परिवार, दोस्तों और उनका समर्थन करने वाली जनता को अन्याय के खिलाफ लड़ने की अपनी दृढ़ संकल्प का श्रेय दिया। 35 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा कि लड़ाई लड़ने का उनका दृढ़ संकल्प उनके शब्दों में स्पष्ट दिखता है।

भावना कहती हैं, “मैं अभी भी डरी हुई हूँ, मुझे नहीं पता कि सिस्टम कैसे काम करता है। मेरे अंदर ये डर है। मैं कभी-कभी दुखी, क्रोधित होती हूँ, लेकिन फिर लड़ना चाहती हूँ। मेरे लिए अच्छा सपोर्ट सिस्टम है, फिर भी मैं अभी भी अकेलापन महसूस करती हूँ। 2020 में मैं 15 दिनों तक सुबह से लेकर शाम तक कोर्ट में रही। लेकिन लगातार दिनों में नहीं। हर पल मैं अदालत में समय बिताती हूँ और ये साबित करने की कोशिशें करती हूँ कि मैं निर्दोष हूँ। सात वकील मुझसे जिरह करने की कोशिश कर रहे थे और सुबह से शाम तक उस घटना को देख रहे थे। तब मुझे लगा था कि मैं अकेली हूँ।”

एक्ट्रेस ने ये भी कहा कि जब अदालत में सुनवाई हो रही थी उस दौरान उन्हें ये लगा कि ये लड़ाई ‘मैं बनाम दुनिया’ है।

भावना मेनन ने आपबीती बताते हुए कहा, “पाँच साल का ये वक्त मेरे लिए बहुत कठिन था। वे मुझे जानते भी नहीं हैं, कुछ लोग (टीवी पर) कह रहे हैं कि मुझे इतनी देर से यात्रा नहीं करनी चाहिए थी। घटना शाम 7 बजे के आसपास हुई! वे मुझ पर आरोप लगा रहे थे। मेरे ऊपर किसी साजिश का आरोप लगाया जा रहा था। मैं बरबाद हो गई थी। जब मैं उन टुकड़ों को समेटने की कोशिश करती हूँ तो ये मुझे नीचे की ओर खींच लेता है। मैं उन्हें बताना चाहती थी कि मेरे माता-पिता ने मुझे ऐसे नहीं पाला। वे पीड़िता को शर्मसार करने में लगे थे। अच्छी बात ये थी कि मैं उस दौरान सोशल मीडिया पर नहीं थी। मेरे इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद मुझे ‘तुम खुद को क्यों नहीं मार लेती’ जैसे मैसेज किए गए।”

क्या है मामला

भावना ने आरोप लगाया था कि 17 फरवरी, 2017 की रात 4 लोगों ने गाड़ी में उनका अपहरण किया और उनका यौन शोषण किया। इसके बाद वो वहाँ से भाग निकले। कुछ लोगों ने अभिनेत्री को ब्लैकमेल करने के लिए इस घटना का वीडियो बना लिया। अभिनेता दिलीप पर व्यक्तिगत दुश्मनी में इस घटना को अंजाम दिलवाने के आरोप हैं। आरोप है कि दिलीप ने बदला लेने के लिए ऐसा करने के लिए रुपए दिए थे। इस मामले मुख्य आरोपित के तौर पर एक्टर दिलीप का नाम सामने आय़ा था।

‘कोई हमार झ*%ट न उखाड़ पाई’ : भाजपा नेताओं को माँ-बहन की गाली देने वाला सपाई पहुँचा जेल, वायरल वीडियो के बाद UP पुलिस की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के देवरिया में समाजवादी पार्टी से जुड़े जय प्रकाश यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सपाई जय प्रकाश पर आरोप है कि उसने भाजपा कार्यकर्ता के घर के पास जाकर गाली-गलौच की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी को भी भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं।

सामने आई वीडियो में जय प्रकाश को माँ-बहन की गंदी गालियाँ देते सुना जा सकता है। वीडियो में वह शलभ मणि के अलावा पीएम मोदी का नाम लेकर भी उल-जुलूल बातें कहता है। आखिर में उसे कहते सुना जा सकता है- “कोई हमार झ*%ट न उखाड़ पाई।”

ये वीडियो सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत उमराव ने शेयर की थी। अपने ट्वीट में उन्होंने यूपी पुलिस, यूपी डीजीपी को टैग करते हुए लिखा था, ” देवरिया में हार सुनिश्चित होने के बाद सपाइयों की बौखलाहट बढ़ गई है और सपाई जय प्रकाश यादव भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों में जाकर योगी जी के सूचना सलाहकार व प्रत्याशी शलभ मणि त्रिपाठी को माँ-बहन की गाली दे रहा है।”

अपने ट्वीट में सुप्रीम कोर्ट वकील ने शिकायत की थी कि देवरिया पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। प्रशांत उमराव के ट्वीट के बाद देवरिया पुलिस ने इस पर प्रतिक्रिया दी और बताया कि प्रकरण के संबंध में थाना कोतवाली पर अभियोग पंजीकृत करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।

बता दें कि कार्रवाई करने का आश्वसान देवरिया पुलिस ने कल दिया था और आज खबर आई है कि पुलिस ने पूरे प्रकरण में जय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया है। इस बात की पुष्टि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने की है।

शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, “चुनाव को लेकर भाजपा देवरिया के कार्यकर्ता साथी मिट्ठू राय के चरियांव ख़ास स्थित घर पर चढ़ गाली-गलौज करने वाला समाजवादी पार्टी का नेता जय प्रकाश यादव गिरफ्तार कर लिया गया है, बेहद अनुशासित कार्यकर्ताओं के मान सम्मान के साथ कोई खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जय देवरिया।”

शेन वार्न के थाईलैंड वाले कमरे के फर्श और तौलियों पर ‘खून के धब्बे’, मौत के आधिकारिक कारण पर पुलिस अब भी चुप

शेन वार्न अब हमारे बीच नहीं रहे। थाईलैंड के एक प्राइवेट विला में उनका निधन (4 मार्च 2022) हुआ। अब वहीं की पुलिस से खबर आई है कि जिस कमरे में शेन वार्न थे, वहाँ के फर्श और तौलियों पर ‘खून के धब्बे’ मिले थे।

थाईलैंड पुलिस के अनुसार शेन वार्न को अस्पताल ले जाने के बाद उनके कमरे में खून देखा गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि विला में जो खून पाया गया, वो वार्न की जान बचाने के लिए दिए जा रहे सीपीआर (CPR: Cardiopulmonary Resuscitation) के कारण आया था।

थाईलैंड के जिस कोह सामुई स्थित प्राइवेट विला में शेन वार्न (Shane Warne in Koh Samui) ठहरे थे, वहाँ के स्थानीय पुलिस कमांडर ने थाई मीडिया को बताया, “कमरे में अच्छी-खासी मात्रा में खून पाया गया था। जब सीपीआर शुरू किया गया था, मृतक को तरल खाँसी आई थी और खून बह रहा था।”

स्काईन्यूज.कॉम के अनुसार थाईलैंड पुलिस ने शेन वार्न के निधन के अगले दिन शनिवार को बताया – वार्न के परिवार ने उन्हें पूर्व ऑस्ट्रेलियाई लेग स्पिनर के अस्थमा और हृदय रोग के बारे में बताया था। वहाँ के पुलिस अधीक्षक युताना सिरिसोम्बा के अनुसार वार्न ने हाल ही में अपने हृदय रोग के संबंध में एक डॉक्टर को दिखाया था।

थाईलैंड की पुलिस ने शेन वार्न की मौत को संदिग्ध मानने से इनकार किया है। हालाँकि अभी तक मौत का आधिकारिक कारण भी नहीं बताया है। पुलिस अधीक्षक युताना सिरिसोम्बा ने इसको लेकर कहा – “मैं यकीन से नहीं कह सकता हूँ, यह डॉक्टर की राय पर निर्भर करता है।”

शेन वॉर्न को 4 दोस्त दे रहे थे CPR

थाईलैंड पुलिस के अनुसार घटना के समय शेन वार्न के दोस्तों ने 20 मिनट तक उनकी जान बचाने के लिए संघर्ष किया था। पुलिस के अनुसार रात को खाने के वक्त जब वॉर्न नीचे नहीं आए तो एक दोस्त उन्हें देखने के लिए गया था। इसी दौरान वो बेहोश पड़े मिले।

शेन वॉर्न को बेहोश पड़े देख कर दोस्तों ने सीपीआर के जरिए उनकी जान बचाने की कोशिश की थी। साथ ही एंबुलेंस को भी फोन किया था। वहाँ से वॉर्न को थाई इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया था।

अश्विन ने तोड़ा कपिल देव का रिकॉर्ड, मिताली राज ने की तेंदुलकर की बराबरी: मोहाली से लेकर न्यूजीलैंड तक टीम इंडिया की धूम

क्रिकेट के लिहाज से रविवार (6 मार्च 2022) का दिन यादगार हो गया। इस दिन भारतीय क्रिकेट के दो लिजेंड रविचंद्रन अश्विन और मिताली राज ने अनोखा कारनामा किया। जहाँ अश्विन ने टेस्ट क्रिकेट में विकेट लेने के कपिल देव के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है, तो ‘लेडी सचिन’ कही जाने वाली मिताली राज 6 विश्वकप खेलने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं।

आर अश्विन ये उपलब्धि भारत औऱ श्रीलंका के बीच मोहाली में खेले जा रहे मैच के दौरान हासिल की। उन्होंने चरिथ असालांका का विकेट लिया। इसी के साथ वो टेस्ट क्रिकेट में 435 विकेट लेने वाले देश के दूसरे क्रिकेटर बन गए। उनसे पहले ये कारनामा कपिल देव कर चुके हैं। दोनों खिलाड़ियों में फर्क केवल इतना है कि अश्विन स्पिनर हैं और कपिल देव फास्ट बॉलर थे। हालाँकि वो अभी भी अनिल कुंबले से पीछे हैं। जम्बो के नाम से फेमस रहे कुंबले ने 619 विकेट झटके थे।

गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जा रही है। इसका पहला मैच पंजाब के मोहाली स्टेडियम में खेला गया है, जिसमें रविंद्र जडेजा के शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत भारत ने बड़ी जीत दर्ज की। यहाँ बता दें कि दुनिया में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड श्रीलंका के फिरकी के जादूगर कहे जाने वाले मुथैया मुरलीधरन के नाम है। मुरलीधरन ने अपने कैरियर में 800 विकेटों का रिकॉर्ड बनाया है।

ऐसा करने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी हैं मिताली राज

इस बीच 2022 महिला क्रिकेट विश्वकप में भारतीय टीम की कप्तान मिताली राज (39) ने एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वो 6 वनडे विश्वकप खेलने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। इसी के साथ लेडी सचिन कही जाने वाली मिताली ने सचिन तेंदुलकर के 6 वनडे खेलने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। वहीं विश्व में यह कारनामा करने वाली वो तीसरी खिलाड़ी हैं। सर्वाधिक विश्वकप खेलने के मामले में उन्होंने न्यूजीलैंड की डेब्बी हॉकली और इंग्लैंड की चार्लोट एडवर्ड्स को पछाड़ दिया है।

बीते 22 सालों से क्रिकेट खेल रहीं मिताली ने देश के लिए पहला विश्वकप वर्ष 2000 में खेला। इसके बाद 2005, 2009, 2013 औऱ 2017 के बाद अब 2022 में भी खेल रही हैं। यहीं नहीं मिताली की कैप्टेंसी में भारत ने पाकिस्तान को 107 रनों के अंतर से करारी मात भी दे दिया है।

यूक्रेन से अपना जगुआर और तेंदुआ छोड़ भारत लौटने को राजी नहीं डॉक्टर, लड़की ने कुत्ते के लिए 4 फ्लाइट और सामान भी छोड़ा

युद्धग्रस्त यूक्रेन (Russia-Ukraine War) से जब भारतीय छात्र-छात्राओं को रेस्क्यू किए जाने के दौरान ऐसी कई मामले सामने आए, जिनमें कुछ छात्र अपने कुत्ते और बिल्लियों को वहाँ छोड़कर भारत लौटने को राजी नहीं थे। वहाँ एक ऐसा भी भारतीय छात्र भी है, जिसने एक जगुआर (तेंदुआ की प्रजाति का जानवर) और एक तेंदुआ पाल रखा है और उसे छोड़कर लौटने को राजी नहीं है। एक ऐसी लड़की भी भारत लौट आई है, जिसने अपने पालतू कुत्ते के कारण 4 फ्लाइट छोड़ दी और जब कुत्ते के साथ लौटी तो अपना सामान ही वहीं छोड़ दिया।

आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के तनुकु के रहने वाले कुमार बंदी यूक्रेन के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक शहर डॉनबास (Donbas) में बमबारी और गोलियों से बचने के लिए बंकर में रह रहे हैं और उनके साथ ही ये दोनों जानवर भी हैं। वह 15 साल पहले यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई करने के लिए गए थे और डॉक्टर बनने के बाद वहीं बस गए।

जानवरों से प्रेम के कारण उन्होंने बंगाल टाइगर या एशियाई बाघ को पालने की कोशिश की, लेकिन वहाँ के अधिकारियों ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने जगुआर पालने का लाइसेंस लेकर इन जंगली जानवरों को अपना पालतू बना लिया। उनका दावा है ये उनको पास मौजूद जगुआर की यह प्रजाति दुनिया की दुर्लभतम प्रजाति है और इनकी संख्या दुनिया भर में सिर्फ 21 है, जिनमें एक उनके पास है।

युद्ध छिड़ने के बाद वह भारतीय विद्यार्थियों को यूक्रेन से निकालने में उनकी मदद कर रहे हैं और उन्हें बॉर्डर तक छोड़ रहे हैं। लंबे समय तक रहने के कारण वहाँ के प्रशासन में उनकी गहरी पैठ हो गई है। वहाँ के लोगों ने उनसे भारत लौट जाने की सलाह दी। इसी बीच आंध्र प्रदेश के विपक्षी नेता चंद्रबाबु नायडू ने जूम कॉल पर उनसे संपर्क किया और भारत लौटने के आग्रह किया, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए आने से मना कर दिया कि उनके लौटने के बाद उनके दोनों पालतू जगुआर मर जाएँगे। बंदी का कहना है कि जब तक जिएँगे, इन जानवरों की वे रक्षा करेंगे और मरना होगा तो साथ मरेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, बंदी तेलुगु के यूट्यूब ब्लॉगर हैं और भारत में रहने के दौरान उन्होंने चार तेलुगू फिल्मों में काम भी किया था, लेकिन वे रिलीज नहीं हो पाईं। हालाँकि, वे तमिल, तेलुगु और मलयाम भाषा के सीरियलों में अतिथि कलाकार के तौर पर काम कर चुके हैं। इतना ही नहीं, यूक्रेन की फिल्मों में भी वह काम कर चुके हैं।

कुत्ते के लिए 4 फ्लाइट छोड़ी

दूसरी ओर वह लड़की भारत लौट आई है, जिसने अपने पालतू कुत्ते के कारण 4 फ्लाइट छोड़ दी थी। इसके लिए उन्हें वहाँ अपना सामान छोड़ना पड़ा। मेडिकल (पाँचवी वर्ष) की छात्रा कीर्तना आखिरकार शनिवार (5 मार्च) को अपने पालतू कुत्ते ‘कैंडी’ के साथ चेन्नई पहुँच गई हैं।

तमिलनाडु के मयिलादुथुराई की रहने वाली कीर्तना का कहना है कि जब वह बिना कुत्ते के लौटने को राजी नहीं हुई तो दूतावास के अधिकारियों ने उन्हें फोन किया और कुत्ते के साथ आने की अनुमति दे दी, लेकिन यह भी कहा कि अगर कुत्ता लेकर जाती हैं तो उन्हें अपना सामान वहीं छोड़ना होगा। कीर्तना इसके तैयार हो गई और अपना सामान वहीं छोड़ दिया। इसके पहले भी कई छात्र अपने पालतू कुत्ते कारण फ्लाइट छोड़ चुके थे।

बता दें कि यूक्रेन से भारतीय छात्र-छात्राओं को लाने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन गंगा अभियान चलाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संकटग्रस्त यूक्रेन से ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत अब तक 13,300 से अधिक लोग भारत लौट चुके हैं।