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कीव पर दागी मिसाइलें, कई शहरों में धमाके: यूक्रेन की सेना से बोले पुतिन- हथियार डाल घर जाएँ, दुनिया से कहा- ऐसा होगा जो कभी नहीं देखा होगा

जिस युद्ध का अंदेशा पिछले कई दिनों से जताया जा रहा था वह शुरू हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने टेलीविजन के जरिए देश को संबोधित करते हुए पूर्वी यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के आदेश दिए। इसके बाद यूक्रेन के कई शहरों में धमाके की आवाज सुनी गई। यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलें दागी जाने की खबर है।

इससे पहले पुतिन ने अपने संबोधन में कहा, “मैं यूक्रेन की आर्मी से कहना चाहूँगा कि आपके पुरखे और हम साझा लड़ाई लड़ते रहे हैं। आप अपने हथियार डाल घर चले जाएँ। यूक्रेन के ऐसे सैनिकों को सुरक्षित घरों तक पहुँचाया जाएगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें परिणाम भुगतना होगा।” रूसी राष्ट्रपति ने इस युद्ध में हस्तक्षेप को लेकर दुनिया को भी चेताया है। उन्होंने कहा है, “जो हो रहा है उसमें यदि कोई बाहरी देश घुसता है तो उसे तुरंत जवाब मिलेगा। ऐसा होगा जो इतिहास ने कभी नहीं देखा होगा। मैं उम्मीद करता हूँ मेरी आवाज सुनी जाएगी।”

पुतिन ने संबोधन में कहा कि यूक्रेन द्वारा पेश किए जा रहे खतरों के जवाब में यह कार्रवाई की जा रही है। रूस का लक्ष्य यूक्रेन पर कब्जा करना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसका मकसद नागरिकों की रक्षा करना है।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से अपने सैनिकों को यूक्रेन पर हमला करने से रोकने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में रूसी राष्ट्रपति से अपने सैनिकों को यूक्रेन में प्रवेश करने से रोकने के लिए कहा है।  

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने रूस की कार्रवाई की निंदा की है तो वहीं पुतिन ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकने और मॉस्को सुरक्षा गारंटी की पेशकश करने की रूस की माँग की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा, “पूरी दुनिया की प्रार्थनाएँ आज यूक्रेन के लोगों के साथ हैं क्योंकि वे रूसी सैन्य बलों द्वारा एक अकारण और अनुचित हमले का शिकार हुए हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने एक पूर्व नियोजित युद्ध चुना है जो मानव पीड़ा के साथ जीवन हेतु एक विनाशकारी नुकसान लाएगा।”

इधर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शांति बनाए रखने की अपील की है। देश के नाम संबोधन में जेलेंस्की ने यह भी बताया कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन करने की कोशिश की थी, लेकिन क्रेमलिन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। राष्ट्रपति ने देर रात अपने संबोधन में रूस के उन दावों को खारिज कर दिया कि उनका देश रूस के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूस के आक्रमण से लाखों जिंदगियाँ प्रभावित होंगी।

वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन के लोग और यूक्रेन की सरकार शांति चाहते हैं। लेकिन अगर हम पर हमला होता है, अगर हम अपने देश, अपनी स्वतंत्रता, अपने जीवन और अपने बच्चों के जीवन को छीनने के प्रयास का सामना करते हैं, तो हम अपनी रक्षा करेंगे। जब आप हम पर हमला करेंगे तो हम सामने खड़े दिखाई देंगे न कि पीठ दिखाकर भाग खड़े होंगे।”

वहीं यूक्रेन के विदेश मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यूक्रेन अपना बचाव करेगा और जीतेगा। पुतिन ने अभी-अभी यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया है। यूक्रेन के शांतिपूर्ण शहरों पर हमले हो रहे हैं। यह आक्रामकता का युद्ध है। दुनिया पुतिन को रोक सकती है और उसे रोकना भी करना चाहिए। अब कार्रवाई का समय आ गया है।”

इधर गुरुवार (24 फरवरी 2022) को यूक्रेन से भारतीयों को लेकर IGI एयरपोर्ट पर पहुँचा। इसमें छात्र भी शामिल है। वहाँ से लौटी MBBS की छात्रा ने कहा, “मैं जहाँ रह रही थी वहाँ की स्थिति ठीक है क्योंकि वह जगह बॉर्डर से दूर है। लेकिन हमारे दूतावास ने हमें जाने के लिए कहा। एडवाइजरी जारी होने के बाद हम वापस आ गए।”

एक स्कूल से हिंदुओं की संपत्ति पर दागे गए थे पेट्रोल बम, दूसरा हो गया था तबाह: दिल्ली दंगों के 2 साल बाद दोनों किस हाल?

2020 में जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे भड़के तब दो स्कूलों की भी खासी चर्चा हुई थी। इनके नाम हैं: राजधानी स्कूल और डीआरपी स्कूल। दोनों ही स्कूल शिव विहार में हैं। चाँदबाग और शिव विहार दंगों से सर्वाधिक प्रभावित इलाकों में थे। फैसल फारुख की राजधानी स्कूल की छत पर ही वो बड़ा गुलेल लगा था, जिससे पेट्रोल बम हिन्दुओं की संपत्ति को निशाना बना दागे गए थे। इसके बगल में स्थित यतेन्द्र शर्मा का डीआरपी स्कूल भी दंगों में तबाह हो गया था। दो साल बाद दोनों स्कूल सामान्य तरीके से चल रहे हैं।

लेकिन इसे 2020 की दहशत कहें या कुछ और अब भी ज्यादातर लोग कैमरे के सामने बात करने से इनकार कर देते हैं। रेनोवेट होकर नई साज-सज्जा के साथ चल रहे DRP स्कूल से जुड़े लोग भी अब उस घटना पर बात नहीं करना चाहते। उनका कहना था- आप बाहर से वीडियो बना लीजिए। इन्हीं लोगों के बीच स्कूल चलाना है। कुछ इसी तरह की बात आसपास के लोगों ने भी कही: हिन्दू-मुस्लिम दोनों के बच्चे यहाँ पढ़ते हैं और अब कोई खतरा नहीं है। दूसरी ओर राजधानी स्कूल से जुड़े लोगों ने यह कहते हुए बात करने से इनकार कर दिया कि उन मामलों पर पुलिस अपना काम कर रही है। स्कूल के मालिक फैसल फारुख 2020 से ही जमानत पर हैं।

नीचे के वीडियो में आप दंगों के दो साल बाद स्कूल की स्थिति को देख सकते हैं;

गौरतलब है कि दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जो पहली चार्जशीट दायर की गई थी, उसका संबंध राजधानी स्कूल में हुई हिंसा की घटनाओं और 24-25 फरवरी 2020 के दिन हुई घटनाओं से ही था। इस मामले में यतेन्द्र शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी जो डीआरपी स्कूल के मालिक हैं। डीआरपी स्कूल को राजधानी स्कूल की छत पर मौजूद दंगाइयों ने काफी नुकसान पहुँचाया था। उस दिन पुलिस कंट्रोल रूम को जितने भी फोन किए गए थे, उसमें ज़्यादातर डीआरपी स्कूल से गार्ड ने ही किए थे। पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट में भी डीआरपी स्कूल के गार्ड का बयान दर्ज है।

राजधानी पब्लिक स्कूल से लोहे की जंजीर के सहारे उतरे सैकड़ों दंगाइयों ने लूटने के बाद DRP पब्लिक स्कूल को जलाकर पूरी तरह से तबाह कर दिया था। कंप्यूटर से लेकर पंखे तक सब लूट लिए गए थे। इस स्कूल का उस समय कैसा हाल किया गया था इसे आप नीचे के वीडियो में देख सकते हैं;

शिव विहार वह इलाका है जिसका तिराहा तीन पुलिस थानों के अंतर्गत आता है। करावल नगर, दयालपुर और गोकुलपुरी। शिव विहार तिराहे की एक सड़क मुस्तफाबाद की तरफ जाती है जो मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। दूसरी सड़क शिव विहार और बाबू नगर की तरफ जाती है, जहाँ हिन्दू-मुस्लिमों की मिली-जुली आबादी रहती है। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी ज़्यादा है, वहाँ भी मुस्लिमों के घर बने हुए हैं। ऐसे में शिव विहार तिराहे पर हुई हिंसा हिंदुओं के लिए भयावह थी। यहीं पर 10 झुग्गियाँ खाक हुई, दिलबर नेगी का शव मिला, दो-गैराज और सैकड़ों गाड़ियाँ जला दी गई थी। गोली चलने से कई घायल हुए तो दिनेश कुमार खटीक और आलोक तिवारी की मौत हो गई थी।

गौ तस्करों को पकड़ने गई पुलिस टीम पर मेवात में हमला, हसीन गिरफ्तार-अन्य हुए फरार

हरियाणा के मेवात जिले में गौ तस्कर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमले की खबर है। यहाँ फ़िरोज़पुर झिरका थाना क्षेत्र में हसीन नाम के आरोपित के घर पुलिस दबिश के दौरान पथराव में एक होमगार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया है। पुलिस की गाडी को भी काफी नुकसान पहुँचा है। पुलिस ने हसीन को गिरफ्तार कर लिया है। घटना बुधवार (23 फ़रवरी) की बताई जा रही है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर तौफीक नाम के आरोपित की घेराबंदी की। उसको साकरस से चितौड़ा जाने वाले रास्ते से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से बाइक पर बोरियों में माँस बरामद हुआ। तौफीक ने पूछताछ में हसीन का नाम लिया। हसीन पर तौफीक को मीट बेचने का आरोप है। साथ ही पकड़े गए आरोपित ने मुन्ना, आमीन, सद्दाम और फारुख का भी नाम लिया। माँस को मंहू के पहाड़ पर बेचने की बात पता चली।

इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने बाकी बचे आरोपितों को पकड़ने के लिए दबिश दी। दबिश के दौरान आरोपितों ने 8 से 10 अन्य साथियों के साथ मिल कर पुलिस पर जानलेवा हमला किया। इस दौरान तौफीक भागने में सफल रहा। पथराव के बीच पुलिस ने हसीन नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। SHO अरविन्द कुमार ने बताया कि एक आरोपित की गिरफ्तारी के साथ 1 बाइक और माँस बरामद किया गया है। साथ ही लगभग 1 दर्जन अन्य नामजद आरोपितों पर सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर जानलेवा हमला करने और CS एक्ट में केस दर्ज किया गया है। फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है।

इससे पहले हरियाणा के पलवल इलाके के अंदरौला गाँव में मध्य प्रदेश की पुलिस पर हमला किया गया था। बावजूद इसके पुलिस वॉन्टेड अपराधी खुर्शीद को गिरफ्तार करने में कामयाब रही थी। उसका गैंग देश भर में ATM लूट के लिए कुख्यात है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने लाइव आकर किया युद्ध का ऐलान, यूक्रेन में हो रहे धमाके

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध का ऐलान कर दिया है। उन्होंने टीवी पर लाइव संबोधन में पूर्वी यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के आदेश दिए। इसके बाद विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके में बड़े धमाकों की आवाज सुनाई पड़ी। पुतिन ने जब ऑपरेशन शुरू करने की घोषणा की उसी वक्त न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक भी चल रही थी। लेकिन परिषद की अपील को पुतिन ने अनसुना कर दिया। उन्होंने चेताया है कि जो भी इसमें हस्तक्षेप करेगा उसे भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

यूक्रेन के बंदरगाह शहर मारियुपोल में भी विस्फोटों की आवाज सुनी गई है। रूस के इस एक्शन की आशंका पिछले कई दिनों से जताई जा रही थी।

आतंकी दाऊद से कनेक्शन में अरेस्ट मंत्री नवाब मलिक 3 मार्च तक ED रिमांड में: शिवसेना सांसद राउत बोले- यह गिरफ्तारी महाराष्ट्र सरकार को चुनौती

मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में महाराष्ट्र सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के प्रवक्ता नवाब मलिक (Nawab Malik) को 3 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की हिरासत में भेज दिया गया है। हालाँकि, ED ने PMLA (प्रिवेंशन मनी ऑफ लॉन्ड्रिंग एक्ट) कोर्ट से मलिक की 14 दिन की रिमांड की माँगी थी, लेकिन कोर्ट ने 8 दिन की रिमांड दी। साथ ही उन्हें जेल में अपनी दवाइयाँ रखने और घर से खाना मँगाकर खाने की इजाजत भी दी है।

ED ने यह गिरफ्तारी ‘मनी लॉन्ड्रिंग और दाऊद से कनेक्शन’ पर चली 8 घंटे की पूछताछ के बाद बुधवार (23 फरवरी) को दोपहर की। ईडी ने मलिक से कथित तौर पर उनसे 1993 में हुए मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट के दोषियों में से एक से कुछ संपत्ति खरीदने के संबंध में पूछताछ की और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद मंत्री नवाब मलिक की आरे से ट्वीट किया गया, “न डरेंगे और न झुकेंगे। 2024 के लिए तैयार रहिए।” कुछ देर बाद ही एक और ट्वीट किया गया, जिसमें कहा गया, ”कुछ ही देर की ख़ामोशी है, फिर शोर आएगा… तुम्हारा तो सिर्फ वक़्त है हमारा दौर आएगा !!” इस दौरान ईडी ऑफिस के बाहर NCP के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की।

नवाब मलिक की गिरफ्तारी पर भाजपा ने उनका इस्तीफा माँगा है। भाजपा का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों पर मुकदमे दर्ज हैं। राज्य के पूर्व गृह मंत्री पहले से ही जेल में हैं और अब ये भी जेल में पहुँच गए।

गिरफ्तारी पर राजनीति शुरू

नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद NCP सुप्रीमो शरद पवार के घर पार्टी नेताओं की बैठक हुई। उसके बाद वह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। नवाब मलिक की गिरफ्तारी के विरोध में महा विकास अघाड़ी के मंत्रियों ने गुरुवार (24 फरवरी) को बजे सुबह विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शरद पवार से फोन पर बात की और उनसे नवाब मलिक का इस्तीफा नहीं लेने का आग्रह किया। वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, “इस्तीफा न दें नवाब मलिक लड़ते रहे… जरूर जीतेंगे।” राउत ने कहा कि जिस तरह से ED के अधिकारी घर में घुसकर मलिक को उठा ले गए, यह महाराष्ट्र सरकार के लिए चुनौती है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में वह कई खुलासे करेंगे और एक ऑफिसर को एक्सपोज करेंगे।

‘हमें इन्हीं मुस्लिमों के बीच रहना है, हम कैमरे पर कुछ नहीं बोल सकते’: दिल्ली के दंगा पीड़ित इलाकों का हाल, 2 साल बाद अजीब सी शांति

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के दो साल हो गए हैं। ऐसे में दंगा प्रभावित राष्ट्रीय राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से का अब क्या हाल है और लोगों के मन में क्या है, इसे टटोलने के लिए हम उन इलाकों में पहुँचे और वहाँ के लोगों से बातचीत की। सबसे पहली बात तो ये कि एक अजीब से तनाव भरे माहौल होने के बावजूद एक प्रकार की शांति तो है, लेकिन कोई कैमरे पर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। ये ऐसे इलाके हैं, जहाँ हिन्दुओं-मुस्लिमों के घर या दुकानें आसपास ही हैं।

उदाहरण के लिए सीलमपुर मेट्रो से ब्रह्मपुरी के लिए काफी ऑटो और ई-रिक्शा चलते हैं, लेकिन आपको हिन्दू ड्राइवर काफी कम दिखेंगे। हिन्दुओं के व्यावसायिक प्रतिष्ठान तो आपको दिखेंगे, लेकिन बाजार में मुस्लिमों का जमावड़ा ज्यादा है। जब हमने कुछ हिन्दू बुजुर्गों से बात की तो वो दंगे के मृतकों विनोद कुमार और नरेश सैनी का नाम लेकर एक आह भरते हैं, लेकिन कहते हैं कि हमें और मुस्लिमों को यहाँ साथ ही रहना है और इसीलिए उनके खिलाफ हम भला कैसे कुछ बोलें।

नरेश सैनी के मोहल्ले में एक बुजुर्ग किराना दुकान वाली महिला हैं, जिन्हें उन दंगों को लेकर सिर्फ इतना पता है कि ‘मुस्लिमों ने आकर झगड़ा किया और लोग मारे गए।’ एक बुजुर्ग पंडित जी का कहना था कि चाहे कुछ भी हो, आज मुस्लिमों के साथ रहना मजबूरी है। कुछ युवक ज़रूर दंगों के बारे में बात करना चाहते हैं, लेकिन बाकी लोग उन्हें ‘संभल कर बोलने’ की सलाह देते हैं। लोगों का कहना है कि

सबसे पहले आपको बता दें कि सीलमपुर के इलाके में मुस्लिमों की अच्छी-खासी जनसंख्या है। ऑटो चलाने वालों से लेकर दुकानदारों तक, अधिकतर आपको मुस्लिम ही मिलेंगे। बाजार में चहल-पहल करते इस्लामी स्कल कैप पहने मुस्लिम युवक यहाँ दिखाई देते हैं। मुस्लिम महिलाएँ और लड़कियाँ बुर्के में दिखती हैं। ब्रह्मपुरी मोहल्ले में ज़रूर हिन्दुओं की उपस्थिति है, लेकिन अधिकतर अपने छोटे-मोटे कारोबार में व्यस्त हैं। कुछ बुजुर्ग तिलक लगाने के कारण पहचान में आते हैं कि वे हिन्दू हैं। युवकों में पहचानना मुश्किल है।

आपको बता दें कि सीलमपुर के इलाके में मुस्लिमों की अच्छी-खासी जनसंख्या है। ऑटो चलाने वालों से लेकर दुकानदारों तक, अधिकतर आपको मुस्लिम ही मिलेंगे। बाजार में चहल-पहल करते इस्लामी स्कल कैप पहने मुस्लिम युवक यहाँ दिखाई देते हैं। मुस्लिम महिलाएँ और लड़कियाँ बुर्के में दिखती हैं। ब्रह्मपुरी मोहल्ले में ज़रूर हिन्दुओं की उपस्थिति है, लेकिन अधिकतर अपने छोटे-मोटे कारोबार में व्यस्त हैं। कुछ बुजुर्ग तिलक लगाने के कारण पहचान में आते हैं कि वे हिन्दू हैं। युवकों में पहचानना मुश्किल है।

नरेश सैनी की मृत्यु के बाद घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उनकी हत्या के बाद तो कई नेताओं ने उनके यहाँ हाजिरी लगाई थी, लेकिन अफ़सोस कि अब जब इस दंगे के 2 साल बीत गए हैं, उनकी हाल खबर जानने वाला कोई नहीं है। नरेश सैनी की एक बेटी और एक बेटा है। बेटी जहाँ 8 साल की है, वहीं बेटा 7 वर्ष का है। बेटी की पढ़ाई में ही 1700 रुपए प्रति महीने लग जाते हैं। बेटे की फी में तो स्कूल ने छूट दे दी है, लेकिन दोनों की आगे की पढ़ाई को लेकर परिवार चिंतित है

मोहल्ले में विनोद कुमार का नाम लेते ही लोग भावुक हो जाते हैं और आह भरते हुए बताते हैं कि कैसे दंगे में उनकी जान चली गई थी। हालाँकि, ऑन कैमरा कोई इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है, जिससे पता चलता है कि दो साल भी किस तरह लोग डरे हुए हैं यहाँ पूछने पर कोई भी बता देगा कि ‘DJ वाले’ विनोद कुमार का घर कौन सा है। परिवार का गुजर-बसर DJ सर्विस पर ही निर्भर है। अफसोस वो भी अब ठप्प पड़ा हुआ है। नितिन कुमार का कहना है कि उनके परिवार में फ़िलहाल 5 लोग हैं और घर की आर्थिक स्थिति भी खराब है।

नीरव, माल्या व चोकसी से वसूल किए गए ₹18000 करोड़: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया सख्त मनी लॉन्ड्रिंग कानून की क्यों है जरूरत

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act, 2002 – PMLA) के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बुधवार (23 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत के भगोड़े व्यापारियों से 18,000 करोड़ रुपए की वसूली की गई है। जिन व्यापारियों से सरकार ने वसूली की है, वे हैं- शराब कारोबारी विजय माल्या, डायमंड व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी।

इस कानून के प्रावधानों की अहमियत को बताते हुए केंद्र सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में इसका बचाव किया। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की पीठ ने की। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि भारत ऐंटी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा है और ऐसे कई समझौते हैं, जिनमें सभी सदस्य देशों को अपने संबंधित धन शोधन कानून को एक दूसरे के अनुरूप लाने की आवश्यकता होती है।

केंद्र ने बताया कि माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के मामलों में इनकी संपत्तियों को जब्त किया गया और उन्हें बेचकर बैंकों के 18,000 करोड़ रुपए लौटाए गए। तुषार मेहता ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 4,700 पीएमएलए मामलों की जाँच की जा रही है और अदालत में 67,000 करोड़ रुपए के मामले लंबित हैं। इनमें 313 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

केंद्र ने बताया कि साल 2015-16 में इसके 111 मामले थे, जबकि 2020-21 में यह बढ़कर 981 पहुँच गया। पिछले पाँच वर्षों (2016-17 से 2020-21) में ऐसे अपराधों के लिए 33 लाख एफआईआर दर्ज किए गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 2,086 को जाँच में शामिल किया है। 

केंद्र सरकार ने बताया कि भारत में इस तरह के मामले जाँच के लिए बहुत कम उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूके में लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत सालाना 7,900 मामले, अमेरिका 1,532 मामले, चीन में 4,691 मामले, ऑस्ट्रिया में 1,036 मामले, हॉन्गकॉन्ग में 1,823 मामले, बेल्जियम में 1,862 मामले और रूस में 2,764 मामले दर्ज किए जाते हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पीएमएलए के तहत अपराध की आय की तलाशी, जब्ती, जाँच और कुर्की के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शक्तियों को चुनौती दी गई है। इसको लेकर कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने हाल के पीएमएलए संशोधनों के संभावित दुरुपयोग से संबंधित दलीलें दी हैं।

नए संशोधन में कड़ी जमानत शर्तें, गिरफ्तारी के कारणों की सूचना न देना, ECIR (FIR की तरह) की कॉपी दिए बिना गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग की व्यापक परिभाषा और अपराध की आय, जाँच के दौरान आरोपी द्वारा दिए गए बयान को ट्रायल में सबूत के रूप में मानने जैसे कई पहलुओं को लेकर इस कानून की आलोचना की गई है।

‘The Kashmir Files’ को नुकसान पहुँचाना चाह रही हैं विधु विनोद चोपड़ा की ‘शूर्पणखा’ पत्नी: विवेक अग्निहोत्री का आरोप

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की हालिया फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की सोमवार (21 फरवरी) को रिलीज हुई दमदार ट्रेलर ने इंटरनेट पर धूम मचा दी। अग्निहोत्री की आखिरी फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ थी, जो कि पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु पर आधारित थी। इस फिल्म को वामपंथी झुकाव वाले मीडिया और फिल्म समीक्षकों के गैंग द्वारा टारगेट किया गया था। विवेक अग्निहोत्री ने अब अपनी हालिया फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को नुकसान पहुँचाने का आरोप फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा पर लगाया है।

अग्निहोत्री ने बुधवार (23 फरवरी) को Film Companion की प्रमुख अनुपमा चोपड़ा के खिलाफ ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि वह उनकी फिल्म को टारगेट करने के लिए पीछे से ‘गंदी चाल’ चल रही हैं। विवेक अग्निहोत्री ने अनुपमा को ‘शूर्पणखा’ कहते हुए पूछा, “अगर आप में हिम्मत है तो ‘द कश्मीर फाइल्स’ को खुलेआम नुकसान पहुँचाओ। कृपया पीछे से गंदी हरकतें करना बंद कर दो। आपकी एकमात्र योग्यता यह है कि आपकी शादी एक ऐसे निर्माता से हुई है, जिसने केपी (कश्मीरी पंडित) होने के बावजूद केपी की पीठ में छुरा घोंपा है।”

जब ट्विटर पर एक यूजर ने पूछा कि आलोचक अनुपमा ने क्या कहा तो फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि वह जल्दी ही अनुपमा चोपड़ा और उनकी टीम द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यापारिक चालों का पर्दाफाश करेंगे। अग्निहोत्री ने कथित फिल्म समीक्षक और लेखक राहुल देसाई पर भी कटाक्ष किया, जो चोपड़ा की Film Companion में काम करते हैं। राहुल देसाई द्वारा विवेक अग्निहोत्री की पिछली फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ की समीक्षा एक गंभीर टिप्पणी के बजाए एक बकवास भर थी। फिल्म को ‘ए सेकेंड-हैंड हिस्ट्री लेसन इन थर्ड-रेट पॉलिटिक्स’ करार देते हुए राहुल ने अपने राजनीतिक एजेंडे और फिल्म समीक्षा कौशल का प्रदर्शन किया था।

दिलचस्प बात यह है कि अनुपमा चोपड़ा के पति और फिल्म निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने भी साल 2019 में रिलीज़ हुई कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को दर्शाने वाली इसी तर्ज पर एक फिल्म का निर्देशन किया था। फिल्म ‘शिकारा’ में कश्मीर घाटी में चरमपंथ, जिहाद, अलगाववाद और इस्लामी चरमपंथियों द्वारा रचे गए हिंदुओं के नरसंहार को धुंधला करने की कोशिश के लिए उनकी व्यापक रूप से आलोचना की गई थी।

‘द कश्मीर फाइल्स’ के ट्रेलर को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। वहीं, इसके खिलाफ दुष्प्रचार शुरू हो गया है। वाम-उदारवादी गैंग बहुत पहले से ही इसे निशाना बनाना शुरू कर दिया था। एनडीटीवी ने फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने से पहले ही इसे एक प्रोपेगेंडा फिल्म कहा था। फिल्म में अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार, चिन्मय मंडलेकर और मृणाल कुलकर्णी मुख्य भूमिकाओं में हैं और यह 11 मार्च 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

हर्षा की हत्या से पहले दो लड़कियों ने किया वीडियो कॉल, 8 गिरफ्तार: ‘मंगलोर मुस्लिम’ पेज पर FIR, जल्द फाँसी देने की माँग

कर्नाटक के शिवमोगा में रविवार (20 फरवरी, 2022) को बजरंग दल के युवा कार्यकर्ता हर्षा की हत्या से कुछ क्षण पहले, उन्हें अज्ञात नंबरों से कई बार वीडियो कॉल आए और कॉल करने वाली लड़कियाँ थीं। हर्षा ने कॉल को अनसुना कर दिया और कुछ गड़बड़ होने पर संदेह जताते हुए जगह छोड़ने का फैसला किया, और अपने दोस्तों से कुछ दूरी पर खड़ी बाइक लाने के लिए कहा। जबकि तीन दोस्त घटना स्थल से 100 मीटर की दूरी पर बाइक खड़ी करने गए थे, तभी हर्षा पर हमला कर हत्या कर दी गई। इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी दोस्त ने खुद मीडिया में खुलासा किया है। वहीं हर्षा का आरोपितों द्वारा पीछा किए जाने की बात भी सामने आई है।

फेसबुक पेज पर दर्ज हुआ FIR

वहीं 26 वर्षीय बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के संबंध में अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने के लिए फेसबुक पेज ‘मैंगलोर मुस्लिम’ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। ‘मैंगलोर मुस्लिम’ ने सोमवार (21 फरवरी, 2022) को मृतक के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए एक विवादित पोस्ट किया था। ऐसे में सांप्रदायिक घृणा और हिंसा भड़काने के लिए फेसबुक पेज के व्यवस्थापकों के खिलाफ साइबर, आर्थिक और नारकोटिक्स अपराध पुलिस स्टेशन द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया है।

गाज़ियाबाद के लोनी में निकला कैंडल मार्च

बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ आज 23 फरवरी को गाजियाबाद की लोनी विधानसभा में कैंडल मार्च निकाल कर विरोध जताया गया। साथ ही बजरंग दल के कार्यकर्ता को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस अवसर पर लोनी से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा, “पूरा देश हर्षा की हत्या से आक्रोशित है। विदेशी ताकतों के इशारे पर गजवा-ए-हिन्द का सपना देखने वालों के द्वारा सनातन धर्म के कार्यों में लगे हुए हर्षा की हत्या करने वालों को सरेआम गोली से उड़ा देना चाहिए।”

बता दें कि कर्नाटक के शिवमोगा में रविवार को बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की धारदार हथियार से गोद के हत्या कर दी गई थी। घटना के के बाद अभी भी इलाके में तनाव का माहौल है। इसके साथ ही आज निकाले गए कैंडल मार्च में पकड़े गए सभी आरोपितों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से एक सप्ताह में फाँसी की सजा देने की माँग की गई। आज कैंडल मार्च में लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि आरोपितों को फाँसी देकर सख्त संदेश दिया जाना चाहिए कि सनातन धर्म पर चोट करने वाले कभी कामयाब नहीं हो सकते।

इसके साथ ही भाजपा के विधायक नंद किशोर ने कहा आज सभी सेक्युलर वादियों के मुँह पर ताला लग गया है क्योंकि जिसकी हत्या हुई है वो हिंदू था ऐसे लोगों को जनता मुँह तोड़ जवाब देगी, ये सभी बेनकाब हो चुके हैं।

अब तक 8 आरोपित हो चुके हैं गिरफ्तार

हर्षा की हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई जारी है। बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के मामले में पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। कर्नाटक के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बजरंग दल कार्यकर्ता हर्ष की हत्या के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आज दो गिरफ्तारियाँ की गई है। कल तक पुलिस ने 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि कर्नाटक के शिवमोगा जिले 26 साल के बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की रविवार (20 फरवरी 2022) को चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि हर्षा ने हाल में अपने फेसबुक प्रोफाइल पर हिजाब के ख़िलाफ़ और भगवा शॉल के समर्थन में पोस्ट लिखी थी। इसी को उसकी हत्या के पीछे की वजह बताया जा रहा है।

बहरहाल इस घटना के मामले में पुलिस ने अब तक 8 कट्टरपंथी मुस्लिमों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें से 6 की पहचान रियाज, नदीम, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ, अफान (रिहान) के तौर पर की गई है। शिवमोगा पुलिस ने बताया कि आरोपित कार में आए और घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया कि इन लोगों ने हर्षा का पीछा किया, फिर उसे मारा। कुछ चश्मदीद भी मिले हैं। पुलिस के मुताबिक पीड़ित के ऊपर साल 2016-17 में मजहबी भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस भी दर्ज हुआ था। हर्षा की हत्या करने में रियाज, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ का हाथ था जबकि इसकी साजिश रचने में नदीम और अफान भी शामिल थे।

लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा मतदान, उन्नाव में ‘जय श्री राम’ सुन कर सपा कार्यकर्ताओं का हमला: UP में संपन्न हुई चौथे चरण की पोलिंग

उत्तर प्रदेश में बुधवार (23 फरवरी, 2022) को विधानसभा चुनाव के चौथे चरण का मतदान संपन्न हुआ। शाम 5 बजे तक 57.45% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने दावा किया कि चार चरणों में उनकी पार्टी ने 200 के बहुमत के आँकड़े को पार कर लिया है। उन्नाव में ‘जय श्री राम’ कहने पर हंगामा हो गया और सपा-भाजपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। ‘जय श्री राम’ सुन कर सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थक पर हमला बोल दिया

2017 में चौथे चरण के इन 9 जिलों में 55.31% मतदान हुआ था, ऐसे में इसमें अबकी वृद्धि दर्ज की गई है। हालाँकि, 2019 लोकसभा चुनाव में 58.24% मतदान से ये कम ही है। अखिलेश यादव के कारण चर्चा में करहल विधानसभा सीट के जिस बूथ संख्या 266 पर भाजपा ने सपा पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था, वहाँ 73.67% मतदान हुआ। लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा 67% मतदान शाम 6 बजे तक दर्ज किया गया। अखिलेश यादव ने ED द्वारा महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक की गिरफ़्तारी को भी मुद्दा बनाया।

उन्नाव में सबसे कम 54.05% मतदान हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि चौथे चरण में कई पोलिंग बूथों के बाहर बड़ी भीड़ देखी गई। उन्होंने कौशाम्बी और बाराबंकी में जनसभाओं को सम्बोधित किया। वहीं कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने इशारा किया कि चुनाव बाद उनकी पार्टी का सपा के साथ गठबंधन का रास्ता खुला है। चौथे चरण के बाद आवारा पशुओं का मुद्दा भी बना हुआ है। चौथे चरण में रायबरेली में भी चुनाव हुए, जहाँ मुकाबला भाजपा और सपा में है।